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दुनिया बदलने के लिए 5 साल ही काफी होते हैं: नरेंद्र मोदी

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दुनिया बदलने के लिए 5 साल ही काफी होते हैं: नरेंद्र मोदी नवभारतटाइम्स.कॉम | Feb 8, 2014  इंफाल बीजेपी के पीएम कैंडिडेट नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस पर हमला बोलते हुए उन पर नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों को विकास से महरूम रखने का आरोप लगाया। मोदी ने मनमोहन पर वार करते हुए कहा कि भारत के मौजूदा प्रधानमंत्री 23 साल से यहां से चुनकर संसद में जाते हैं, लेकिन इतने साल में उन्होंने इस क्षेत्र के लिए क्या किया? उन्होंने कहा, 'हमारे प्रधानमंत्री इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं, लेकिन उन्होंने इस क्षेत्र के विकास के लिए क्या किया।' प्रधानमंत्री पर चुटकी लेते हुए उन्होंने कहा, 'दुनिया बदलने के लिए 5 साल ही काफी होते हैं, लेकिन यहां तो 23 साल में भी कोई बदलाव नहीं आया।' मोदी ने नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों को देश के विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि जब नॉर्थ-ईस्ट का भला होगा, तभी हिंदुस्तान का भी भला होगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सरकारों की नीतियों के अभाव के कारण हर्बल मेडिसीन को बढ़ावा नहीं दिया जा सका और इससे नॉर्थ ईस्ट के राज्य क

सत्यनारायण नडेला -माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ चुने गए !

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अनुशासन, अभ्यास, अनुभूति और अनुभव आधारित अलख  - कल्पेश याग्निक (लेखक दैनिक भास्कर समूह के नेशनल एडिटर हैं।) 'जी, नहीं; न तो मैं आपको चुन रहा हूं, न उसे। मैं तो अपने आप को ही चुन रहा हूं।' -प्रसिद्ध अमेरिकी पुस्तक 'द सिलेक्शन' से। क्या देखा जाता है किसी को सर्वोच्च पद देते समय ? क्यों सत्य नारायण नडेला - सत्या -माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ चुने गए? हर युवा भारतीय, हर महत्वाकांक्षी प्रोफेशनल, हर बिजनेस लीडर इस हफ्ते यही बात कर रहा है। निश्चित ही यह एक ऐसा प्रश्न है जिसके वास्तविक उ?ार से करोड़ों लोगों को लाभ होगा। उन्हें पता चलेगा कारण। लाखों को प्रेरणा मिलेगी। ताकि वे भी अपने-आप से यह पूछ सकें कि क्या उनके भीतर भी 'वो' है? डू आय हैव इट इन मी? सत्या से अधिक लोग इसलिए स्वयं को जोड़ कर देख सकेंगे - चूंकि वे संभवत: पहले ऐसे भारतीय हैं जो गैऱ-आईआईटी, गैऱ-आईआईएम होने के बावजूद विश्व की सबसे बड़ी, सर्वाधिक प्रतिष्ठित सॉफ्टवेयर कंपनी के सर्वोच्च पद पर पहुंचे हैं। यही नहीं, जिस मणिपाल इंजीनियरिंग कॉलेज से उन्होंने साधारण इंजीनियरिंंग की - वो आज जिस रूप में है - भारी

मोदी की सुनामी से कांग्रेस की जहरीली राजनीति तहस-नहस होगी - अंकुर शर्मा

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मोदी नाम का सुनामी ही कांग्रेस की जहरीली राजनीति को तहस-नहस करेगा अंकुर शर्मा Posted by : Ankur Sharma  Friday, 7 February , 2014, http://hindi.oneindia.in चुनाव प्रक्रिया के साथ यह समस्या है कि वह सत्ता के लिए पागलपन के हद तक जाने वाले लालच को प्रकट कर देता है और इसके बाद नेता मुर्ख और नादान दिखने लगते हैं। ऐसा ही हुआ कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ गुलबर्गा में जहाँ वह एक ईएसआई सुविधा का उद्घाटन करने पहुंची थीं। एक आम सभी को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बीजेपी के प्रधानमन्त्री उम्मीदवार नरेंद्र मोदी जहर का बीज बोकर और हिंसा को भड़काकर विभाजक राजनीति कर रहे हैं। घबरा गयी है कांग्रेस  सोनिया गांधी की कांग्रेस सरकार चुनाव के दौड़ में बुरी तरीके से जूझ रही है। यह सरकार हर एक मापदंड पर लड़खड़ाती हुई दिख रही है। प्रधानमन्त्री के कार्यकाल में जो भी घोटाले हुए हैं, इसने पार्टी को ऐसी संदिग्ध अवस्था में ला खड़ा किया है कि यूपीए के लिए अपनी तीसरी अवधि के लिए सहारा मांगने में मुश्किल आ रही है जिसका नेतृत्व राहुल गांधी करेंगे। राहुल गांधी का कमजोर नेतृत्व! राहुल गांधी क

वैज्ञानिक शोध पर खर्च : भारत बहुत पीछे

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देशको जानबूझ कर पीछे कर  रही है कोंग्रेस … भारत सरकार विदेशी गुलामी में अपने देश की वैज्ञानिकता को उन्नत नही कर रही है । ईसाई देशों को फायदा पहुचानें कि मानसिकता वाली कोंग्रेस हमारे देश के लिए बोझ बन गई है ! इस समय भारत को एक देशभक्त राजनैतिक दल की सरकार चाहिए जो भारतीय जनता पार्टी ही दे सकती है । ---------------------------- वैज्ञानिक शोध पर खर्च के मामले में भारत बहुत पीछे Fri, 07 Feb 2014 http://www.jagran.com/news वाशिंगटन। वैश्विक रूप से वैज्ञानिक शोध एवं विकास के क्षेत्र में खर्च को लेकर भारत बहुत पीछे है। इस क्षेत्र में अमेरिका सबसे आगे है। हालांकि इस क्षेत्र में खर्च में वृद्धि को लेकर चीन सबसे आगे है। अमेरिका की एक आधिकारिक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। 2011 में विश्व भर में शोध एवं विकास पर करीब 1435 अरब डॉलर (89 लाख करोड़ रुपये) खर्च हुए। विश्व में इस क्षेत्र में हुए कुल खर्च के बारे में यह नवीनतम जानकारी है। इसके मुताबिक 2007 में भारत ने इस पर केवल 24 अरब डॉलर (करीब एक लाख करोड़ रुपये) की राशि खर्च की थी। 2001 में विश्व में इस क्षेत्र में करीब 753 अरब डॉलर (करी