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हिन्दुस्थान, हिन्दुराष्ट्र है,यह सत्य है !

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प. पू. सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत जी का बौद्धिक 16 फरवरी 2014,स्थान: भाऊराव देवरस सभागार निवेदिता शिक्षा सदन, वाराणसी (उत्तर प्रदेश) हिन्दुस्थान, हिन्दुराष्ट्र है,यह सत्य है  प. पू. सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत जी का बौद्धिक 16 फरवरी 2014,स्थान: भाऊराव देवरस सभागार निवेदिता शिक्षा सदन, वाराणसी (उत्तर प्रदेश) http://vskkashi.blogspot.in/2014/03/blog-post_12.html माननीय क्षेत्र संघचालक जी और माननीय विभाग संघचालाक जी, उपस्थित अन्य अधिकारीगण एवं आत्मीय स्वयंसेवक बन्धुओं. ये मेरा भी सौभाग्य है कि प्रवास के निमित्त देश के विभिन्न स्थानों पर जाना होता है, और आप सब लोगों के दर्शन का अवसर मिले, लगभग दो तीन वर्षों में एकाध बार अवश्य प्राप्त होता ही है. यहाँ कार्यक्रम की प्रस्तावना में यह कहा गया कि, आपका सौभाग्य है कि सरसंघचालक जी के दर्शन हो गए, और मैं कह रहा हूँ कि मेरा सौभाग्य ये है कि आपके दर्शन हो गए. अब ८८ वर्षों से ये संघ चल रहा है, तो ये भाषा भी अपनी परिचित है. लेकिन हम सबलोग जानते हैं, और अगर नहीं जानते हैं तो हमको ये जानना चाहिए कि ये भाषा मात्र नहीं है, कोई कार्यकर्ता मिलता है

नेताजी सुभाषचंद्र बोस,भारत के प्रथम स्वाधीन राष्ट्राध्यक्ष थे : इन्द्रेशजी

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नेताजी सुभाष चंद्र बोस थे भारत के प्रथम स्वाधीन राष्ट्राध्यक्ष: इन्द्रेशजी स्त्रोत: vskbharat.com बुधवार, 28 जनवरी 2015 भुवनेश्वर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य श्री इंद्रेश कुमार जी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को भारत का प्रथम राष्ट्राध्यक्ष बताते हुए कहा है कि उनके नेतृत्व में गठित प्रथम स्वाधीन भारत सरकार को जापान, जर्मनी, रूस और दस अन्य देशों ने मान्यता दी थी. इतना ही नहीं, वे स्वाधीन भारतीय सेना के प्रथम सेना नायक भी थे. नेताजी और वीर सुरेन्द्र साये की जयंती पर 23 जनवरी को संघ व्दारा आयोजित युवा सम्मेलन में इंद्रेश जी ने मुख्य वक्ता के रूप में कहा कि अगर नेताजी होते तो पिछले 60 सालों में भारत की राजनीति का चित्र काफी अलग होता. उन्होंने कहा कि जानबूझकर नेताजी, वीर सुरेन्द्र साये और स्वामी विवेकानन्द जैसे राष्ट्रनायकों को   लोगों से दूर रखा गया. इसलिये अब आने वाले दो वर्षों में इन क्रांतिकारियों के जीवन को लोगों के सामने लाने के लिये प्रयत्न जरूरी हैं. सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में सेना के सेवानिवृत्त कर्नल हिमांशु शेखर महापात्र ने युवा पीढ़ी क