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हिंदू समाज, श्रेष्ठ और निर्भय बने - परमपूज्य सरसंघचालक जी

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बुधवार, 11 फ़रवरी 2015 श्रेष्ठ और निर्भय बने हिंदू समाज – परमपूज्य सरसंघचालक जी http://vskjodhpur.blogspot.in/2015/02/blog-post_11.html इंदौर. हिंदुओं के आचरण और व्यवहार पर जोर देते हुये राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पू. सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने हिन्दू समाज को श्रेष्ठ और निर्भय बनने का आह्वान किया. वे माँ नर्मदा हिन्दू संगम को सम्बोधित कर रहे थे. इस दौरान अनेक साधू-संत व्यासपीठ पर विराजमान थे. सरसंघचालक जी ने विशाल जनसमूह को आपसी भेदभाव को दूर कर आदर्श हिन्दू समाज बनाने का संकल्प लेने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि एक अच्छे समाज में आपसी भेदभाव नहीं होता, यह उसकी विशेषता होती है. इसलिये हमारे हिन्दू समाज में जो भेदभाव है उसे दूर करना होगा. तब हमारा समाज संगठित होगा, और वह निर्भय और बल संपन्न बनेगा. हिन्दू समाज कैसा हो यह हमारे आचरण पर निर्भर करता है, इसलिए अपने अन्दर की बुराइयों को दूर करते हुये रोज अपने में सुधार करना होगा. आचरण की शुद्धता पर जोर देते हुये उन्होंने कहा कि पंथ, मंत्र और ग्रंथ तीनों की विरासत हमारे पास है. संतगण इस विरासत को जन सामान्य तक पहुंचाते हैं.

मुस्लिम तथा ईसाई बंधुओं के बारे में संघ की सोच

शनिवार, 14 फ़रवरी 2015 विख्यात पत्रकार जिलानी के साथ श्री गुरूजी का साक्षात्कार– न्यायोचित माँगें पूरी की जानी चाहिये, पर जब चाहे विशेषाधिकारों की माँग कतई न्यायोचित नहीं : श्री गुरूजी http://vskjodhpur.blogspot.in/2015/02/blog-post_14.html राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का लक्ष्य सम्पूर्ण समाज को संगठित कर अपने हिन्दू जीवन दर्शन के प्रकाश में समाज की सर्वांगीण उन्नति करना है. रा.स्व.संघ का कार्य किसी भी मजहब विशेष के विरुद्ध नहीं है. परन्तु किसी भी प्रकार की राष्ट्र विरोधी गतिविधि का संघ हमेशा विरोध करता आया है. समाज के वामपंथी एवं तथाकथित सेकुलर लेखक, जो संघ के विरुद्ध लगातार झूठा और गलत प्रचार करते आये हैं, संघ को मुस्लिम एवं ईसाई विरोधी बताने का प्रयास करते रहते है. मजहब के आधार पर मुस्लिम तथा ईसाईयों के साथ भेदभाव करने की संघ की नीति रही है, ऐसा गलत प्रचार ये लोग करते हैं और इसके समर्थन में श्री गुरुजी द्वारा लिखित “वी एंड अवर नेशनहुड डिफाइनड” नामक पुस्तक का संदर्भ देते है. वास्तव में, यह पुस्तक संघ का अधिकृत साहित्य नहीं है. जिस समय यह पुस्तक प्रकाशित हुई, उस समय श्री गुरूजी सं

संगठित समाज से देश के भाग्य परिवर्तन की आवश्यकता है -परम् पूजनीय सरसंघचालक

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सोमवार, 16 फ़रवरी 2015 सम्पूर्ण समाज एक करना, गुण सम्पन्न, संगठित समाज से  देश के भाग्य परिवर्तन की मूलभूत आवश्यकता है -परम् पूजनीय सरसंघचालक कानपुर।  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, कानपुर प्रान्त द्वारा रेलवे ग्राउण्ड, निराला नगर में आयोजित राष्ट्र रक्षा संगम संघ को सम्बोधित करते हुए रा0 स्व0 संघ के परम् पूजनीय सरसंघचालक मोहन मधुकरराव भागवत ने कहाकि संघ के विशाल कार्यक्रमों को लोग शक्ति प्रदर्शन का नाम देते हैं, पर जिसके पास शक्ति होती है, उसे उसके प्रदर्शन की आवश्यकता नहीं पड़ती है। संघ के पास अपनी शक्ति है, जिसके द्वारा संघ आगे बढ़ रहा है। ऐसे कार्यøमों का उद्देश्य शक्ति प्रदर्शन नहीं आत्म दर्शन होता है। ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य अनुशासन एवं आत्म संयम होता है। जैसाकि हम जानते हैं कि हम और हमारे देश का भाग्य, हमें ही बनाना पड़ेेगा। कोई दूसरा हमारा भाग्य नहीं बनाएगा। डाॅ0 साहब को जैसा लोग जानते हैं, उसके अनुसार वे जन्मजात देशभक्त थे। बचपन से ही उनमें स्वतंत्रता की ललक व उसके सुख आदि के विचार उनके मन में चलते रहते थे। यही कारण है कि बड़े होकर पढ़ाई पूर्ण करने के बाद उन्होंने यह