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21 मार्च 2015 से प्रारंभ होगा हिन्दू नव वर्ष विक्रम संवत् 2072

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                                    21 मार्च 2015 को विक्रम संवत् के नये साल का आरम्भ क्या है गुड़ी पड़वा या हिन्दू नववर्ष या चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (21 मार्च 2015 को) ? http://www.himalayauk.org चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा को गुड़ी पड़वा या नववर्ष का आरम्भ माना गया है। ‘गुड़ी’ का अर्थ होता है विजय पताका । ऐसा माना गया है कि शालिवाहन नामक कुम्हार के पुत्र ने मिट्टी के सैनिकों का निर्माण किया और उनकी एक सेना बनाकर उस पर पानी छिड़ककर उनमें प्राण फूँक दिये। उसमें सेना की सहायता से शक्तिशाली शत्रुओं को पराजित किया। इसी विजय के उपलक्ष्य में प्रतीक रूप में ‘‘शालीवाहन शक’ का प्रारम्भ हुआ। पूरे महाराष्ट्र में बड़े ही उत्साह से गुड़ी पड़वा के रूप में यह पर्व मनाया जाता है। कश्मीरी हिन्दुओं द्वारा नववर्ष के रूप में एक महत्वपूर्ण उत्सव की तरह इसे मनाया जाता है। इसे हिन्दू नव संवत्सर या नव संवत् भी कहते हैं।इस वर्ष 21 मार्च 2015 को कीलक नामक विक्रम संवत् 2072 का प्रारंभ होगा| 21 मार्च 2015 (शनिवार) को इस धरा की 1955885115वीं वर्षगांठ है| पंडित “विशाल” दयानन्द शास्त्री के अनुसार ऐसी

संसद भवन की डिजाइन : चौसठ योगिनी मंदिर की

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                     हमारे संसद भवन की डिजाइन चौसठ योगिनी मंदिर जैसी है                                                     रविन्द्र झारखरिया    Apr 13, 2014, मुरैना. हमारा संसद भवन ब्रिटिश वास्तुविद् सर एडविन लुटियंस की मौलिक परिकल्पना माना जाता है। लेकिन, इसका मॉडल हू-ब-हू मुरैना जिले के मितावली में मौजूद चौसठ योगिनी शिव मंदिर से मेल खाता है। 9वीं सदी में प्रतिहार वंश के राजाओं द्वारा बनाए गए मंदिर में 101 खंभे कतारबद्ध हैं। और 64 कमरों में एक-एक शिवलिंग है। मंदिर के मुख्य परिसर में भी एक बड़ा शिवलिंग स्थापित है। माना जाता है कि हर कमरे में शिवलिंग के साथ देवी योगिनी की मूर्ति भी रही होगी, जिसके आधार पर इसका नाम चौसठ योगिनी मंदिर पड़ा। इकंतेश्वर महादेव के नाम से भी प्रतिष्ठित यह मंदिर कभी तांत्रिक अनुष्ठान के विश्वविद्यालय के रूप में जाना जाता था। छह एकड़ में फैली संसद में 12 दरवाजे और 27 फीट ऊंचे 144 खंभे कतारबद्ध हैं। इसका व्यास 560 फीट और घेरा 533 मीटर है। इसके निर्माण में 1927 में 83 लाख रुपए की राशि खर्च हुई थी। ------------------ अतुलनीय भारत का दिल बेह