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अटलजी : 'भारत रत्न'

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                                             अटलजी का जीवन परिचय http://hindi.webdunia.com   धूल और धुएँ की बस्ती में पले एक साधारण अध्यापक के पुत्र श्री अटलबिहारी वाजपेयी दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के प्रधानमंत्री बने। उनका जन्म 25 दिसंबर 1925 को हुआ। अपनी प्रतिभा, नेतृत्व क्षमता और लोकप्रियता के कारण वे चार दशकों से भी अधिक समय से भारतीय संसद के सांसद रहे। उनमें मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की संकल्पशक्ति, भगवान श्रीकृष्ण की राजनीतिक कुशलता और आचार्य चाणक्य की निश्चयात्मिका बुद्धि है। वे अपने जीवन का क्षण-क्षण और शरीर का कण-कण राष्ट्रसेवा के यज्ञ में अर्पित कर रहे हैं। उनका तो उद्‍घोष है - हम जिएँगे तो देश के लिए, मरेंगे तो देश के‍ लिए। इस पावन धरती का कंकर-कंकर शंकर है, बिन्दु-बिन्दु गंगाजल है। भारत के लिए हँसते-हँसते प्राण न्योछावर करने में गौरव और गर्व का अनुभव करूँगा।' प्रधानमंत्री अटलजी ने पोखरण में अणु-परीक्षण करके संसार को भारत की शक्ति का एहसास करा दिया। कारगिल युद्ध में पाकिस्तान के छक्के छुड़ाने वाले तथा उसे पराजित करने वाले भारतीय सैनिकों का मनोबल

अटल बिहारी वाजपेयी : रग रग हिंदू मेरा परिचय

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मेरा परिचय - अटल बिहारी वाजपेयी *** हिंदू तन मन, हिंदू जीवन, रग रग हिंदू मेरा परिचय॥ मै शंकर का वह क्रोधानल, कर सकता जगती क्षार-क्षार डमरू की वह प्रलयध्वनि हूं, जिसमें नाचता भीषण संहार रणचंडी की अतृप्त प्यास, मैं दुर्गा का उन्मत्त हास मै यम की प्रलयंकर पुकार, जलते मरघट का धुंआधार फिर अंतरतम की ज्वाला से जगती में आग लगा दूं मैं यदि धधक उठे जल थल अंबर, जड चेतन तो कैसा विस्मय हिंदू तन मन, हिंदू जीवन, रग रग हिंदू मेरा परिचय॥ मै आज पुरुष निर्भयता का वरदान लिए आया भू पर पय पीकर सब मरते आए, मैं अमर हुआ लो विष पीकर अधरों की प्यास बुझाई है, मैंने पीकर वह आग प्रखर हो जाती दुनिया भस्मसात, जिसको पल भर में ही छूकर भय से व्याकुल फिर दुनिया ने प्रारंभ किया मेरा पूजन मै नर नारायण नीलकण्ठ बन गया, न इसमें कुछ संशय हिंदू तन मन, हिंदू जीवन, रग रग हिंदू मेरा परिचय॥ मै अखिल विश्व का गुरु महान, देता विद्या का अमर दान मैने दिखलाया मुक्तिमार्ग, मैंने सिखलाया ब्रह्म ज्ञान मेरे वेदों का ज्ञान अमर, मेरे वेदों की ज्योति प्रखर मानव के मन का अंधकार, क्या कभी सामने सका ठहर मेरा स्वर्णाभा म