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इंटरनेशनल हिन्दी केन्द्र अमेरिका में स्थापित होगा

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अमेरिका में स्थापित होगा इंटरनेशनल हिन्दी केन्द्र sanjeevnitoday.com Sunday, April 12, 2015 http://www.sanjeevnitoday.com न्यूयॉर्क। हिंदी को एक वैश्विक भाषा के रूप में बढ़ावा देने के लिए यहां पास में एक 'हिंदी केंद्र खोलने की योजना बनाई गई है। यह केंद्र एक अकादमिक एवं सांस्कृतिक केंद्र के रूप में कार्य करेगा और भारतीय एवं अमेरिकी यूनिवर्सिटीज के बीच आदान-प्रदान कार्यक्रमों को सुगम बनाएगा। महावाणिज्य दूत ज्ञानेश्वर मुले ने गत सप्ताह न्यू जर्सी स्थित रगर्स विश्वविद्यालय के भवन में आयोजित दूसरे इंटरनेशनल हिंदी समिट  में जुटे शिक्षाविदों, कारोबारियों, जन अधिकारियों और सामुदायिक नेताओं को भारत सरकार की ओर से इंटरनेशनल हिंदी केंद्र के लिए समर्थन का विश्वास दिया है। सम्मेलन आयोजित करने वाले हिंदी संगम फाउंडेशन के प्रबंधक ट्रस्टी अशोक ओझा ने कहा कि यह केंद्र हिंदी को एक वैश्विक भाषा के रूप में प्रोत्साहित करने पर आधारित शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के जीवंत केंद्र के रूप में काम करेगा। केंद्र के लिए धन एकत्रित करने के काम में अपने सहयोग का विश्वास दिलाते हुए मुले ने बोला है कि

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद ही हमारा मूल विचार

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद ही हमारा मूल विचार है लेखक- हृदयनारायण दीक्षित http://sumansourabh.blogspot.in/2009/01/blog-post_15.html हिन्दुत्व और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पर राष्ट्रीय अन्तर्मंथन जारी है। भारत के राष्ट्रजीवन के लिए यह देवासुर संग्राम जैसा सागरमंथन है। भारत सनातन काल से तत्तव खोजी, सत्य अभीप्सु राष्ट्र है। तर्क, प्रतितर्क, विचार विमर्श हमारे राष्ट्रजीवन की सनातन परम्परा है। तर्क-प्रतितर्क की लोकतंत्री व्यवस्था को जन्म देने का स्वयंभू दावा करने वाला पश्चिमी जगत भी जानता है कि लोकतंत्र भारत का सहज स्वभाव है। पश्चिम का जनतंत्र राजतंत्र की प्रतिक्रिया से आया। भारतीय लोकतंत्र भारत का सहज स्वभाव है और स्वभाव हिन्दुत्व का प्राण है। आज हिन्दुत्व के आयामों पर मजेदार बहस जारी है। मसलन अटल बिहारी वाजपेयी का हिन्दुत्व क्या है? लालकृष्ण आडवाणी और वाजपेयी के हिन्दुत्व में फर्क क्या है? नरेन्द्र मोदी और विनय कटियार के हिन्दुत्व की दिशा क्या है? क्या अशोक सिंहल और प्रवीण तोगड़िया का हिन्दुत्व किसी और तरह का है? यो प्रागदर्शन में बहस के ये आयाम राजनीतिक हैं। पर हमारे राष्ट्रजीवन में ऐसी बहसे

इस्लाम के सम्बन्ध में स्वयं बाबा साहब अम्बेडकर के विचार

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इस्लाम के सम्बन्ध में स्वयं बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर के विचार Aug 21 Posted by Fan of Agniveer (सभी उद्धरण बाबा साहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाड्‌मय, खंड १५-‘पाकिस्तान और भारत के विभाजन, २००० से लिए गए हैं) Posted by डॉ. जय प्रकाश गुप्त https://agniveerfan.wordpress.com/2011/08/21/muslim-dalit/ मुस्लिमों के कथित दलित-प्रेम का भंडाफोड ..इस्लाम के सम्बन्ध में स्वयं बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर के विचार — १. हिन्दू काफ़िर सम्मान के योग्य नहीं-”मुसलमानों के लिए हिन्दू काफ़िर हैं, और एक काफ़िर सम्मान के योग्य नहीं है। वह निम्न कुल में जन्मा होता है, और उसकी कोई सामाजिक स्थिति नहीं होती। इसलिए जिस देश में क़ाफिरों का शासनहो, वह मुसलमानों के लिए दार-उल-हर्ब है ऐसी सति में यह साबित करने के लिए और सबूत देने की आवश्यकता नहीं है कि मुसलमान हिन्दू सरकार के शासन को स्वीकार नहीं करेंगे।” (पृ. ३०४) २. मुस्लिम भ्रातृभाव केवल मुसलमानों के लिए-”इस्लाम एक बंद निकाय की तरह है, जो मुसलमानों और गैर-मुसलमानों के बीच जो भेद यह करता है, वह बिल्कुल मूर्त और स्पष्ट है। इस्लाम का भ्रातृभाव मानवता का भ्रातृत्व न

प्रबल राष्ट्रवादी : भीमराव अम्बेडकर

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प्रबल राष्ट्रवादी : भीमराव अम्बेडकर प्रभात कुमार रॉय (पूर्व प्रशासनिक अधिकारी) बाबासाहेब डा.अम्बेडकर एक अत्यंत प्रखर देशभक्त और प्रबल राष्ट्रवादी थे। 23 मार्च 1940 को मुस्लिम लीग ने भारत का विभाजन करके पाकिस्तान निर्मित करने कै प्रस्ताव पारित किया था। इस प्रस्ताव के पश्चात बाबासाहेब डा.अम्बेडकर की एक पुस्तक ऑन पार्टिशन प्रकाशित हुई। इस प्रभावशाली और विचार उत्तेजक पुस्तक को पढ़कर ज्ञात होता है कि डा.अम्बेडकर कितने जबरदस्त राष्ट्रवादी थे। ऑन पार्टिशन के बाद डा.अम्बेडकर की पुस्तक थाट्स ऑन पाकिस्तान प्रकाशित हुई जिसने कि एक बार पुनः प्रखर देशभक्त के विचारों से अवगत कराया।  भारत की राजनीतिक एकता को मूर्तरुप देने का जैसा शानदार कार्य सरदार पटेल ने अंजाम दिया, उसी कोटि का अप्रतिम कार्य राष्ट्र की सामाजिक एकता को शक्तिशाली बनाने की खातिर डा.अम्बेडकर द्वारा किया गया। अपनी चेतना के उदय से अपनी जिंदगी के आखिरी पल तक इंसान-इंसान के मध्य भाईचारे का सूत्रपात करने और समानता की लहर प्रवाहित करने में डा.अम्बेडकर जुटे रहे। प्रजातंत्र और समानता उनके लिए पर्यायवाची शब्द कदाचित नहीं रहे। उनके अनुसार पू

भीमराव अंम्बेडकर : राष्ट्रवादी चरित्र

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राष्ट्रवादी चरित्र  डॉ भीमराव अंम्बेडकर Manak Chand Maloo की Facebook से तुम चाहते हो कि भारत कश्मीर की सीमाओं की रक्षा करे, सड़कें बनाए, अन्न की आपूर्ति करे और कश्मीर का दर्जा भारत के ही बराबर हो। और भारत सरकार के पास सीमित ताकत हो। भारतीयों के कश्मीर में कोई अधिकार न हों। मैं भारत का विधिमंत्री हूं। मुझे भारत के हितों की रक्षा करनी है। मैं तुम्हारे प्रस्ताव को स्वीकार नहीं कर सकता।' डॉ़ आंबेडकर के ये ठोस शब्द सुनकर शेख अब्दुल्ला का दिल बैठ गया। पंडित नेहरू ने अब्दुल्ला को तत्कालीन विधिमंत्री डॉ़ आंबेडकर के पास भेजा था ताकि धारा 370 के प्रस्ताव को हकीकत में बदला जा सके। शेख अब्दुल्ला ने बातचीत की विफलता की सूचना पं. नेहरू को दी तो नेहरू ने शेख को गोपाल स्वामी आयंगर के पास भेजा। आयंगर ने सरदार पटेल से सहायता की याचना की क्योंकि धारा 370 को नेहरू ने अपनी नाक का सवाल बना लिया था। आखिरकार नेहरू की जिद को रखते हुए धारा 370 के प्रस्ताव को पारित करा लिया गया। अपनी व्यक्तिगत पसंद-नापसंद को आधार बना कर देश के महत्वपूर्ण फैसले करने वाले और नीतियों से ज्यादा व्यक्तित्वों को मान्यता दे