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कल्याणकारी पत्रकारिता के सर्वोत्तम आदर्श – देवर्षि नारद'

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कल्याणकारी पत्रकारिता के सर्वोत्तम आदर्श – देवर्षि नारद' (6 मई, देवर्षि नारद जयंती पर विशेष) भले ही नारद देवर्षि थे लेकिन वे देवताओं के पक्ष में नहीं थे। वे प्राणी मात्र की चिंता करते थे। देवताओं की तरफ से भी कभी अन्याय होता दिखता तो राक्षसों को आगाह कर देते थे। देवता होने के बाद भी नारद बड़ी चतुराई से देवताओं की अधार्मिक गतिविधियों पर कटाक्ष करते थे,उन्हें धर्म के रास्ते पर वापस लाने के लिए प्रयत्न करते थे। आज की पत्रकारिता में इसकी बहुत आवश्यकता है। - लोकेन्द्र सिंह पत्रकारिता की तीन प्रमुख भूमिकाएं हैं- सूचना देना, शिक्षित करना और मनोरंजन करना। महात्मा गांधी ने हिन्द स्वराज में पत्रकारिता की  इन तीनों भूमिकाओं को और अधिक विस्तार दिया है- लोगों की भावनाएं जानना और उन्हें जाहिर करना, लोगों में जरूरी भावनाएं पैदा करना, यदि लोगों में दोष है तो किसी भी कीमत पर बेधड़क होकर उनको दिखाना। भारतीय  परम्पराओं में भरोसा करनेवाले विद्वान मानते हैं कि देवर्षि नारद की पत्रकारिता ऐसी ही थी। देवर्षि नारद सम्पूर्ण और आदर्श पत्रकारिता के संवाहक थे। वे महज सूचनाएं देने का ही कार्य नहीं