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राजपुतो की शान के लिये हसते हसते बलिदान देनेवाले विर की कहानी

★******- विर गाथा -******★ राजपुतो की शान के लिये हसते हसते बलिदान देनेवाले विर की कहानी *****!!!!!!!!**** मुगल बादशाह का दिल्ली में दरबार लगा था और हिंदुस्तान के दूर दूर के राजा महाराज दरबार में हाजिर थे , उसी दौरान मुगल बादशाह ने एक दम्भोक्ति की " है कोई हमसे बहादुर इस दुनिया में ?" सभा में सन्नाटा सा पसर गया , एक बार फिर वही दोहराया गया तीसरी बार फिर उसने ख़ुशी से चिल्ला करकहा " है कोई हमसे बहादुर जो हिंदुस्तान पर सल्तनत कायम कर सके ?सभा की खामोसी की तोड़ती एक बुलन्द शेर सी दहाड़ गूंजी तो सबका ध्यान उस शख्स की और गया , वो जोधपुर के महाराजा राव रिड़मल थे । रिड़मल जी ने कहा , मुगलो में बहादुरी नही कुटिलता है , सबसे बहादुर तो राजपूत है दुनिया में ,, मुगलो ने राजपूतो को आपस में लड़वा कर हिंदुस्तान पर राज किया , कभी सिसोदिया राणा वंश को कछावा जयपुर से तो कभी राठोड़ो को दूसरे राजपूतो से ,, ।बादशाह का मुँह देखने लायक था , ऐसा लगा जेसे किसी ने चोरी करते रंगे हाथो पकड़ लिया हो ।बाते मत करो राव , उद्धाहरण दो वीरता का । रिड़मल ने कहा "क्या किसी कौम में देखा है किसी को सिरकटने