पोस्ट

जुलाई 22, 2015 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

Patwon ki Magnificent Haveli : Jaisalmer Rajasthan

चित्र
Location:  Jaisalmer  Rajasthan   Founded In:  About 300 years ago Rajasthan is home to some of the most magnificent havelis (mansions) in the whole of India. One such haveli is the Patwon ki Haveli, or Salim Singh ki Haveli, situated in the city of Jaisalmer. Infact, it is considered to be the one of the largest as well as the finest haveli of Rajasthan. The haveli has been named after Salim Singh, the prime minister of the erstwhile state of Jaisalmer. Patwon ki Haveli is beautifully constructed and stands covered with an arched roof. Exquisitely carved brackets, in the shape of peacocks, adorn its roof.  Salim Singh ki Haveli comprises of five stories presently. However, it is said that initially, the haveli was seven stories high. The two additional wooden stories made the haveli as high as the palace of the Maharaja of Jaisalmer. Upset by this fact, the Maharaja ordered the demolition of the two topmost stories. Located just below the hill, Patwon ki haveli has been s

धारा ३७० मात्र एक अंतरिम व्यवस्था : अरुणकुमार

चित्र
धारा ३७० मात्र एक अंतरिम व्यवस्था, कोई विशेष दर्जा या शक्ति नहीं : अरुणकुमार नागपुर, दि. ३० जून.धारा ३७० द्वारा जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा या शक्ति प्राप्त है, यह मात्र एक भ्रम है. वास्तव में धारा ३७० उस समय की राज्य की स्थिति को देखते हुए की गई अंतरिम व्यवस्था है, ऐेसा प्रतिपादन जम्मू-कश्मीर स्टडी सेंटर के निदेशक अरुणकुमार ने किया. वे आर. एस. मुंडले धरमपेठ कला-वाणिज्य महाविद्यालय एवं जम्मू-कश्मीर स्टडी सेंटर नागपुर द्वारा महाविद्यालय के वेलणकर सभागृह में ‘जम्मू-कश्मीर : तथ्य और विपर्यास’ इस विषय पर आयोजित कार्यशाला में बोल रहे थे. अपना मुद्दा स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि, जम्मू-कश्मीर का जब भारत में विलय हुआ, तब वहॉं युद्ध चल रहा था. उस समय की व्यवस्था के अनुसार वहॉं  संविधान सभा बन नहीं सकती थी. १९५१ में वहॉं संविधान सभा का निर्वाचन हुआ और इस संविधान सभा ने ६ फरवरी १९५४ को राज्य के भारत में विलय की पुष्टी की. १४ मई १९५४ को भारत के राष्ट्रपति ने संविधान के अस्थायी अनुच्छेद (धारा) ३७० के अंतर्गत संविधान आदेश जारी किया और वहॉं कुछ अपवादों और सुधारों के साथ भारत का संविधान

दिशा संकेतक, बोध कराने वाला गुरु : जे. कृष्णमूर्ति

चित्र
दिशा संकेतक, बोध कराने वाला गुरु : जे. कृष्णमूर्ति सबसे पहली बात तो यह है कि हम गुरु चाहते ही क्यों हैं? हम कहते हैं कि हमें एक गुरु की आवश्यकता है। क्योंकि हम भ्रांति में हैं और गुरु मददगार होता है। वह बताएगा कि सत्य क्या है। वह समझने में हमारी सहायता करेगा। वह जीवन के बारे में हमसे कहीं अधिक जानता है। वह एक पिता की तरह, एक अध्यापक की तरह जीवन में हमारा मार्गदर्शन करेगा। उसका अनुभव व्यापक है और हमारा बहुत कम है। वह अपने अधिक अनुभव के द्वारा हमारी सहायता करेगा आदि-आदि। सबसे पहले हम इस विचार की परीक्षा करें कि क्या कोई गुरु हमारी अस्त-व्यस्तता को, भीतरी गड़बड़ी को समाप्त कर सकता है? क्या कोई भी दूसरा व्यक्ति हमारी दुविधा को दूर कर सकता है? दुविधा, जो कि हमारी ही क्रियाओं-प्रतिक्रियाओं का फल है। हम ने ही उसे रचा है। अंदर और बाहर, अस्तित्व के सभी स्तरों पर होने वाले इस क्लेश को, इस संघर्ष को, आप क्या समझते हैं कि इसे किसी और ने उत्पन्न किया है? यह हमारे ही अपने आपको न जानने का नतीजा है। हम अपने को गहराई से नहीं समझते। अपने द्वंद्व, अपनी प्रतिक्रियाएं, अपनी पीड़ाएं इन सब को नह

संघ की स्वीकार्यता बढ़ी : मनमोहन वैद्य

चित्र
संघ के प्रति समाज की स्वीकार्यता बढ़ी : मनमोहन वैद्य नैनीताल/देहरादून 22 जुलाई (विसंके)। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रति देश में समर्थन बढ़ने के साथ ही संगठन की स्वीकार्यता में इजाफा हुआ है। संघ हर तीन साल में संघ शिक्षा वर्ग के पाठ्यक्रम की समीक्षा करेगा। परम पूजनीय सर संघचालक मोहन जी भागवत की मौजूदगी में शीर्षस्थ पदाधिकारियों की  संघ के विस्तार के लिए प्रचारकों के साथ बैठक चल रही है। बुधवार को संघ प्रमुख प्रांत प्रचारकों के साथ तीन दिनी बैठक करेंगे। इस अहम बैठक में आनुषांगिक संगठनों के क्रियाकलापों की समीक्षा करने के साथ ही भावी कार्यक्रम तय किए जाएंगे। मंगलवार को पार्वती प्रेमा जगाती विद्यालय में पत्रकारों से बातचीत में संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख मनमोहन जी वैद्य ने कहा कि संघ के प्राथमिक शिक्षा वर्ग में पिछले साल 80 हजार लोग शामिल हुए थे, यह संख्या इस बार बढ़कर सवा लाख तक पहुंचने की पूरी उम्मीद है, जबकि संघ शिक्षा वर्ग में पिछली संख्या 17 हजार से बढ़कर 19 हजार हो जाएगी। उन्होंने कहा कि हर तीन साल में संघ शिक्षा वर्ग के पाठ्यक्रम की समीक्षा की जाती रही है।