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देश को क्यों बांट रहा है टीवी मीडिया ? - संजय द्विवेदी

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मीडिया अपना लक्ष्य पथ भूल गया है। पूरी मीडिया की समझ को लांछित किए बिना यह  कहने में संकोच नहीं है कि टीवी मीडिया का ज्यादातर हिस्सा देश का शुभचिंतक नहीं है। वह बंटवारे की राजनीति को स्वर दे रहा है और राष्ट्रीय प्रश्नों  पर लोकमत के परिष्कार की जिम्मेदारी से भाग रहा है। - संजय द्विवेदी काफी समय हुआ पटना में एक आयोजन में माओवाद पर बोलने का प्रसंग था। मैंने अपना वक्तव्य पूरा किया तो प्रश्नों का समय आया। राज्य के बहुत वरिष्ठ नेता, उस समय विधान परिषद के सभापति रहे स्व.श्री ताराकांत झा भी उस सभा में थे, उन्होंने मुझे जैसे बहुत कम आयु और अनुभव में छोटे व्यक्ति से पूछा “आखिर देश का कौन सा प्रश्न या मुद्दा है जिस पर सभी देशवासी और राजनीतिक दल एक है?” जाहिर तौर पर मेरे पास इस बात का उत्तर नहीं था। आज जब झा साहब इस दुनिया में नहीं हैं, तो याकूब मेमन की फांसी पर देश को बंटा हुआ देखकर मुझे उनकी बेतरह याद आई। आतंकवाद जिसने कितनों के घरों के चिराग बुझा दिए, भी हमारे लिए विवाद का विषय है। जिस मामले में याकूब को फांसी हुई है, उसमें कुल संख्या को छोड़ दें तो सेंचुरी बाजार की अकेली साजिश में 11

रघुवीरसिंह कौशल: प्रखर राजनेता और रक्तदान के प्रेरणा पुरूष

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भाई साहब रघुवीरसिंह कौशल: प्रखर राजनेता और मानव सेवा तथा रक्तदान के प्रेरणा पुरूष - अरविन्द सिसौदिया जिला महामंत्री भाजपा कोटा 9414180151 9509559131 55 वर्ष के लगभग राजनैतिक जीवन में बेदाग छवि के व्यक्ति, राजस्थान विधानसभा में कुशाग्र वक्ता एवं दबंग किसान नेता के रूप में ख्याती प्राप्त विधायक रहे। स्पष्टतावादिता के लिए विख्यात रघुवीरसिंह कौशल ने नैतिकता के मुद्दों पर अपनी पार्टी को भी अनेकों अवसरों पर नहीं बख्शा। निर्विवाद छवि हेतु सभी राजनैतिक पार्टियों के नेताओं के लिए एक आदर्श मार्ग आपने प्रस्तुत किया । कौशल राजस्थान में लिफ्ट सिंचाई परियोजनाओं के जनक, सहकार राजनीती के स्थापक, जी एस एसों का जाल बिछानें वाले तथा रक्तदान , वृक्षारोपड, मरीजों की सेवा और विद्यादान के प्रेरक हैं। उन्होने राजनीति को मानव सेवा का माध्यम बना कर अनूठी मिशाल पेश की , अनेकों बार उनके भाषणों में होता था  ” वास्तविक गरीवों के बीपीएल का कार्ड बनवाया कि नहीं, मरीजों को देखने अस्पताल जाते हो कि नहीं , जरूरतमंद के इलाज को दान देतो हो कि नहीं , होली दिवाली गरीबों के घर राम राम करने जाते हो कि नहीं। “ उ