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भारत निर्माण के लिए महापुरुषों के विचारों को समझना होगा –परम पूज्य डॉ. मोहन राव जी भागवत

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महापुरुषों की संकल्पनानुसार भारत निर्माण के लिए उनके विचारों को समझना होगा – परम पूज्य डॉ. मोहन राव जी  भागवत दिल्ली में डॉ. आंबेडकर जी पर आधारित पुस्तकों का लोकार्पण समारोह भारत निर्माण के लिए महापुरुषों विचारों को समझना होगा –परम पूज्य  डॉ. मोहन राव जी भागवत नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक परम पूज्य  डॉ. मोहन राव जी भागवत जी ने कहा कि भारत निर्माण की कल्पना करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को समझना अत्यंत आवश्यक है. निर्माताओं ने क्या सोचा था, उनकी दिशा दृष्टि, विचार क्या थे, उस पर विचार करना होगा. मेरा मत है कि अभी भारत निर्माण हुआ नहीं है, अभी भारत निर्माण करना बाकी है. महापुरुषों की संकल्पना के अनुसार भारत निर्माण करने के लिए उनके विचारों को समझना होगा. सरसंघचालक जी ने कहा कि वर्तमान में महापुरुषों को हमने अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर पिंजड़ों में बंद कर दिया है. महापुरुषों को बांटकर रख दिया, लेकिन सबकी दृष्टि समान थी, एक राष्ट्रीय धारा थी. सब इस पवित्र मिट्टी के जाये (जन्मे) भारत माता के सपूत थे. इसलिए हमें महापुरुषों के प्रति देखने की अपनी दृष्टि बदलनी होगी. य

स्वतंत्रता दिवस,संकल्प का दिन : पू. सरसंघचालक डॉ. मोहन जी भागवत

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स्वतंत्रता दिवस पर पू. सरसंघचालक जी ने सूरत में फहराया ध्वज आज का दिन देश के लिए संकल्पबद्ध होने का दिन है – डॉ. मोहन जी भागवत गुजरात (विसंकें). डॉ. आंबेडकर वनवासी कल्याण ट्रस्ट, सूरत, गुजरात द्वारा स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित ध्वजवंदन के कार्यक्रम में पू. सरसंघचालक डॉ. मोहन जी भागवत द्वारा ध्वजवंदन किया गया. डॉ. मोहनजी भागवत ने कहा कि अपने देश को 1947 में स्वतंत्रता मिलने के पश्चात प्रतिवर्ष 15 अगस्त को हम सब देशवासी ध्वजवंदन करते हैं. यह संकल्प का दिन है, जैसे अपनी स्वतंत्रता प्राप्ति के दिन का हम स्मरण करते हैं, वैसे ही उसके लिए संकल्पबद्ध होने का भी यही क्षण है. और जिस प्रकार हम इस उत्सव को मानते हैं, वही हमारा मार्गदर्शन भी करता है कि हमको क्या संकल्प लेना है. पहले तो एकदम ध्यान में आता है कि आज का दिवस पूरा देश मना रहा है. अपने देश में अनेक पंथ संप्रदाय हैं. सब लोग सब त्यौहार नहीं मनाते, कुछ त्यौहार संप्रदाय विशेष के होते हैं. अपने देश में अलग-अलग जाति है, उनके भी अपने कुछ विशिष्ट दिवस होते हैं वो सब नहीं मानते, केवल वो जाति ही मानती है. लेकिन आज का दिवस यहां जाति,