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स्वतंत्रता दिवस 2015 : प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के भाषण का मूल पाठ

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स्वतंत्रता दिवस 2015 के अवसर पर प्रधानमंत्री के भाषण का मूल पाठ  प्रधानमंत्री जी श्री नरेन्‍द्र मोदी ने स्‍वतंत्रता दिवस 2015 के अवसर पर लाल किले के प्राचीर से देश को संबोंधित किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री के संबोधन का मूल पाठ इस प्रकार है - भारत के सवा सौ करोड़ मेरे प्‍यारे देशवासियों, आजादी के पावन पर्व पर आप सबको हृदय से बहुत-बहुत शुभकामनाएं। 15 अगस्‍त का यह सवेरा मामूली सवेरा नहीं है। यह विश्‍व के सबसे बड़े लोकतंत्र का स्‍वातंत्र्य पर्व का सवेरा है। यह सवेरा, सवा सौ करोड़ देशवासियों के सपनों का सवेरा है। यह सवेरा सवा सौ करोड़ देशवासियों के संकल्‍प का सवेरा है और ऐसे पावन पर्व पर जिन महापुरूषों के बलिदान के कारण, त्‍याग और तपस्‍या के कारण सदियों तक भारत की अस्मिता के लिए जूझते रहे, अपने सर कटवाते रहे, जवानी जेल में खपाते रहे, यातनाएं झेलते रहे, लेकिन सपने नहीं छोड़े, संकल्‍प नहीं छोड़े। ऐसे आजादी के स्‍वतंत्रता सेनानियों को मैं आज कोटि-कोटि वंदन करता हूं। पिछले दिनों हमारे देश के अनेक गणमान्‍य नागरिकों ने, अनेक युवकों ने, साहित्‍यकारों ने, समाजसेवियों ने, चाहे वो बेटा ह

कांग्रेस राज के पाठ्यक्रम हिन्दू विरोधी क्यों ?

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suresh chiplukar के लेख से    कांग्रेस राज के पाठ्यक्रमों  हिन्दू विरोधी क्यों ? क्या आपने कभी सुना है कि सरकार ने एक पुस्तक लिखवाने के लिए चालीस लाख रूपए खर्च कर दिए हों? या फिर कभी किसी ऐसे बौद्धिक प्रोजेक्ट(?) के बारे में सुना है जो पिछले 43 वर्ष से चल रहा हो, जिस पर करोड़ों रूपए खर्च हो चुके हों और अभी भी पूरा नहीं हुआ हो?  यदि नहीं सुना हो, तो दिल थामकर बैठिये... ICHR जिसे हम “भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद्” के नाम से जानते हैं, वहाँ पर ऐसी कई बौद्धिक लूट हुई हैं. जैसा कि शायद आप जानते ही होंगे, पिछले साठ वर्षों से इतिहास शोध, संगोष्ठियों, सेमिनारों, फेलोशिप्स, स्कॉलरशिप से लेकर  पाठ्यक्रमों में हिन्दू विरोधी तथा भारत विरोधी ज़हर भरने का ठेका वामपंथ के पास था. केन्द्र में जो भी काँग्रेस सरकार आई, उसने कभी इन अजगरों की आरामतलबी में कोई खलल उत्पन्न नहीं किया , बल्कि इन्हें समुचित हड्डियाँ देकर पाला-पोसा. पिछले कई वर्षों से “स्पेशल रिसर्च प्रोजेक्ट्स” के नाम पर यह बौद्धिक डाकाजनी चल रही थी.  उपरोक्त स्पेशल रिसर्च प्रोजेक्ट्स, जिन्हें मात्र कुछ वर्षों एवं दो-चार लाख रुप