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चीन : 6 लोगों की मौत, पार्सल बमों से किए गए ब्लास्ट

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15 सीरियल धमाकों से दहला चीन, 6 लोगों की मौत, पार्सल बमों से किए गए ब्लास्ट aajtak.in [Edited By: स्वपनल सोनल] | नई दिल्ली, 30 सितम्बर 2015 चीन के गुआंग्शी इलाके में बुधवार को हुए 15 सीरियल धमाकों में कम से कम छह लोगों की मौत हो गई है, जबकि 15 से अधि‍क घायल हो गए हैं. हमलावरों ने अलग-अलग ठिकानों पर पार्सल बम रखे थे. इस हमले की अभी तक किसी ने जिम्मेदारी नहीं ली है. चीन की मीडिया में आ रही खबरों के मुताबिक, पहला धमाका स्थानीय समयानुसार करीब 3 बजकर 50 मिनट पर हुआ. इसके बाद शाम के 5 बजते-बजते 15 धमाकों की आवाज से पूरा गुआंग्शी इलाका थर्रा गया. धमाके में एक इमारत के ढहने की भी खबर है. चीन में बुधवार को शहीदी दिवस भी मनाया जा रहा है. शिन्हुआ न्यूज एजेंसी के मुताबिक, ज्यादातर धमाके लियुझोउ शहर के पास के इलाकों में हुए हैं. इसमें बसअड्डा, अस्पताल, जेल, सुपर मार्केट, सब्जी बाजार और हॉस्टल को निशाना बनाया गया. धमाकों के लिए पार्सल बम का इस्तेमाल किया गया, जिसके बाद स्थानीय प्रशासन ने आम लोगों से लावारिस पार्सल से दूर रहने को कहा है. शिन्हुआ के अनुसार, हमलावरों ने धमाके के लिए एक ए

मजहब परस्ती से ऊपर हो वतनपरस्ती - साकेन्द्र प्रताप वर्मा

सेकुलरवाद बनाम राष्ट्रवाद - मजहब परस्ती से ऊपर हो वतनपरस्ती -साकेन्द्र प्रताप वर्मा तारीख: 28 Sep 2015 देश की छद्म सेकुलर राजनीति ने भारतीय मुस्लिम मानस को देश के लिए उपयोगी न बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। सन् 1905 में अंग्रेजी हुकूमत ने हिन्दू और मुसलमान के नाम पर बंगाल का विभाजन किया था, किंतु अंग्रेजों का षड्यंत्र सफल नहीं हुआ और हिन्दू-मुस्लिम एकता नहीं टूटी। दोनों ने डटकर मुकाबला किया। विभाजन समाप्त हुआ। उसके बाद अंग्रेजों के प्रयास, लोकमान्य तिलक के बजाय गांधी के हाथों में कांग्रेस का नेतृत्व तथा इकबाल द्वारा जिन्ना को उकसाने के षड्यंत्रों ने भारत को विभाजन तक लाकर खड़ा कर दिया। आज भी मुसलमानों को सच समझाने के बजाय वोट बैंक के रूप में एकत्र करने के ही प्रयास अधिकांश राजनेताओं द्वारा किये जा रहे हैं।  इस देश में रहीम, रसखान, मलिक मोहम्मद जायसी, अश्फाक उल्ला खान, बहादुरशाह जफर ने अपने-अपने तरीके से राष्ट्रवाद से मुस्लिम समुदाय को जुड़ने की प्रेरणा दी है। बहादुरशाह जफर के दो बेटों का सिर कलम करके उनके सामने पेश किया गया और अंग्रेजी हुक्मरानों ने कहा कि आत्मसमर्पण करो

राष्ट्रवाद के सारथी : संघ के विचार

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शनिवार, 26 सितंबर 2015 व्यक्ति विशेष: मोहन भागवत कैसे बनें मोदी के 'कृष्ण'  सबसे तकतवर हस्ती हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. लोकसभा चुनाव में जीत के बाद से ही राजनीतिक के आसमान पर सबसे चमकदार चेहरा बन कर चमक रहे हैं नरेंद्र मोदी. लेकिन क्या आप जानते हैं कि राजनीति की दुनिया से अलग देश में दूसरा सबसे ताकतवर शख्स कौन हैं? दरअसल मोहन भागवत वो शख्स भी है जिन्होंने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने में सबसे अहम रोल निभाया है. देश के सबसे बड़े संगठन, राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ को चलाते हैं. उनका संगठन, आरएसएस यूं तो जाहिरी तौर पर राजनीतिक गतिविधियों से परहेज करता है लेकिन बीजेपी को चुनावी जंग जिताने में पर्दे के पीछे आऱएसएस औऱ उसके प्रमुख मोहन भागवत का सबसे अहम योगदान माना जाता है. मोहन भागवत का नाम यूं तो मीडिया में कभी-कभार ही चमकता है लेकिन केंद्र में बीजेपी की सरकार बनने के बाद से वो अक्सर अपने बयानों को लेकर विवादों में घिरते रहे हैं. पिछले दिनों आरक्षण के मुद्दे पर उनके ताजा बयान ने एक बार फिर देश में राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया है. राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ यानी