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अक्तूबर 18, 2015 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

पाकिस्तान से लेंगे आजादी : कांपा पाकिस्तान

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पाकिस्तान से लेंगे आजादी : कांपा पाकिस्तान - प्रशान्त वाजपेयी ‘हम सब क्या चाहते -आजादी पाकिस्तान से लेंगे- आजादी यलगार से बोलो- आजादी सब सोच के बोलो-आजादी है जान हमारी -आजादी है जान से प्यारी -आजादी ’ पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर, जिसे पाकिस्तान  ‘आजाद कश्मीर’ बोलता है, में हजारों युवकों, महिलाओं और बच्चों की भीड़ पाकिस्तानी फौजियों की संगीनों को मुंह चिढ़ाते हुए आजादी के नारे लगा रही थी। फौज की पिट्ठू स्थानीय पुलिस पंजाब (पाकिस्तानी पंजाब) से आयातित अपने अफसरों के हुक्म पर लोगों पर बर्बरता से लाठियां बरसा रही थी। लोग ये भी जानते थे कि आईएसआई और मिलिटरी इंटेलीजेंस के लोग भीड़ में अपने आगामी शिकारों को चुन रहे हैं, लेकिन आजादी के निर्भीक स्वर वादी में गूंज   रहे थे। आज पाक कब्जे वाले कश्मीर-गिलगित-बाल्टिस्तान में ऐसे प्रदर्शन आम बात हैं। इस प्रदर्शन के कुछ दिनों बाद ही 30 सितंबर 2015 को नवाज शरीफ संयुक्त राष्टÑसभा में कागज पर आंखें गड़ाए अपना भाषण पढ़ रहे थे, जिसका मजमून रावलपिंडी से स्वीकृत होकर आया था। मुट्ठी भर सुनने वाले ऊबे हुए थे, क्योंकि वे इस सालाना पाकिस्त

९ औषधियों में विराजती है नवदुर्गा

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९ औषधियों में विराजती है नवदुर्गा - अरविन्द कौशल कोटा 🌹मां दुर्गा नौ रूपों में अपने भक्तों का कल्याण कर उनके सारे संकट हर लेती हैं। इस बात का जीता जागता प्रमाण है, संसार में उपलब्ध वे औषधियां, जिन्हें मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों के रूप में जाना जाता है। नवदुर्गा के नौ औषधि स्वरूपों को सर्वप्रथम मार्कण्डेय चिकित्सा पद्धति के रूप में दर्शाया गया और चिकित्सा प्रणाली के इस रहस्य को ब्रह्माजी द्वारा उपदेश में दुर्गाकवच कहा गया है। ऐसा माना जाता है कि यह औषधियां समस्त प्राणियों के रोगों को हरने वाली और और उनसे बचा रखने के लिए एक कवच का कार्य करती हैं, इसलिए इसे दुर्गाकवच कहा गया। इनके प्रयोग से मनुष्य अकाल मृत्यु से बचकर सौ वर्ष जीवन जी सकता है। आइए जानते हैं दिव्य गुणों वाली नौ औषधियों को जिन्हें नवदुर्गा कहा गया है। 🍁१ प्रथम शैलपुत्री यानि हरड़ - नवदुर्गा का प्रथम रूप शैलपुत्री माना गया है। कई प्रकारकी समस्याओं में काम आने वाली औषधि हरड़, हिमावती है जो देवी शैलपुत्री का ही एक रूप हैं। यह आयुर्वेद की प्रधान औषधि है, जो सात प्रकार की होती है। इसमें हरीतिका (हरी

नवरात्र : सर्व मंगल मांगल्ये

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सर्व मंगल मांगल्ये तारीख: 12 Oct 2015 वर्ष में दो बार शारदीय नवरात्र और वासन्तिक नवरात्र में शक्ति की पूजा की जाती है। यह शक्ति दुर्गा, काली, सरस्वती, लक्ष्मी आदि के रूप में पूजी जाती है। ये शक्तियां निर्माण भी करती हैं और संहार भी। जब निर्माण करती हैं तो मनुष्य में देवत्व का गुण बढ़ जाता है, धरा पर स्वर्ग उतर आता है। लेकिन जब विनाश करती हैं तो दैत्य समाज में हाहाकार मचा देती हैं। यह शक्ति जय है, कल्याण है, शान्ति है, सुन्दरता है, सर्व मंगल मांगल्ये.. है। सबके हित को साधने वाली है। यह शक्ति हम सबके अन्दर भी है। बस, इसको जगाने की आवश्यकता है। इसको जगाए बिना हमारा जीवन सार्थक नहीं है। अत: अपने भीतर छिपी 'परम शक्ति' को जानना, समझना, उसके अनुरूप व्यवहार करना हमारा प्रथम कर्तव्य है। यदि ऐसा होगा तभी हम अपनी नई पीढ़ी को राम और रावण के चरित्र का अन्तर समझा पाएंगे। हमें सबका उत्पीड़न करने वाले रावण जैसा बनना है या भगवान राम जैसा सबकी संभाल करने वाला, सबसे प्रेम करने वाला, सबकी पीड़ा हरने वाला व्यक्तित्व उभारना है। नई पीढ़ी को यह अन्तर हम केवल कथा-कहानी सुनाकर नहीं बता पाएंगे। इ