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संघ समाज में समरसता का भाव जगाने के लिए प्रयासरत – सह-सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले जी

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रांची . अखिल भारतीय कार्यकारी  मंडल की बैठक का विधिवत् उद्घाटन रांची के सरला बिरला स्कूल में पू. सरसंघचालक डॉ. मोहन राव भागवत जी और सरकार्यवाह सुरेश भय्या जी जोशी ने किया. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह-सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले जी ने प्रेस वार्ता में संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक के संबंध में जानकारी दी. उन्होंने कहा कि संघ की बैठक वर्ष में दो बार होती है, प्रतिनिधि सभा की बैठक मार्च में, जबकि कार्यकारी मंडल की बैठक विजयादशमी एवं दीपावली के बीच होती है. सामान्यतः इन बैठकों में संघ कार्य के विस्तार, गुणात्मकता की दृष्टि से प्रगति और समाज राष्ट्र जीवन में संघ कार्य के प्रभाव पर चर्चा एवं कार्यनीति की कई बातें तय करते हैं. समाज एवं राष्ट्रजीवन से संबंधित कुछ विषयों पर हिन्दू समाज के विचार एवं मन को व्यक्त करने वाले संघ की नीति और विचार से सुसम्बद्ध प्रस्ताव भी बैठक में पारित करते हैं. सह सरकार्यवाह जी ने बताया कि 30 अक्टूबर से प्रारंभ तीन दिवसीय अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक में 400 के लगभग संघ के अधिकारी भाग ले रहे हैं. इस बैठक में जनसंख्या असंतुलन पर हम

आज भारत की गीता, योगदर्शन, तथागत विश्वमान्य हो रहे हैं – परम पूज्य डॉ. मोहन भागवत जी

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Thursday, October 22, 2015 आज भारत की गीता, भारत का योगदर्शन, भारत के तथागत विश्वमान्य हो रहे हैं – डॉ. मोहन भागवत जी परम पूज्य पू. सरसंघचालक डॉ. मोहन जी भागवत का विजयादशमी उत्सव 2015 (गुरुवार दिनांक 22 अक्तुबर 2015) के अवसर पर दिया उद्बोधन - नागपुर. कार्यक्रम के प्रमुख अतिथि आदरणीय डॉ. वीके सारस्वत जी अन्य निमंत्रित अतिथि गण, उपस्थित नागरिक सज्जन, माता भगिनी तथा आत्मीय स्वयंसेवक बन्धु - विजयादशमी के प्रतिवर्ष संपन्न होने वाले पर्व के निमित्त आज हम यहां एकत्रित हैं. संघ कार्य प्रारम्भ होकर आज 90 वर्ष पूर्ण हुए. यह वर्ष भारतरत्न डॉ. भीमराव जी उपाख्य बाबासाहेब आम्बेडकर की जन्मजयंती का 125वां वर्ष है. सम्पूर्ण देश में सामाजिक विषमता की अन्यायी नागपुर (1कुरीति को चुनौती देते हुए उन्होंने जीवनभर संघर्ष किया. स्वतंत्र भारत के संविधान में आर्थिक व राजनीतिक दृष्टि से उस विषमता को निर्मूल कर समता के मूल्यों की प्रतिष्ठापना करने वाले प्रावधान वे कर गये. संघ के द्वितीय सरसंघचालक श्री गुरुजी के शब्दों में आचार्य शंकर की प्रखर बुद्धि व तथागत बुद्ध की असीम करुणा का संगम उनकी प्रतिभा में था.