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मकर संक्रांति : "सारे तीरथ बार बार, गंगासागर एक बार"

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तीर्थ  यात्रा - "सारे तीरथ बार बार, गंगासागर एक बार" बैरकपुर  में  पोस्टिंग  की  खबर  सुन  कर  मेरे  माता  पिता  को  बहुत  ख़ुशी  हुईI उनकी  वर्षों  की इच्छा थी  कि  गंगा  सागर  की  तीर्थ  यात्रा की  जाये, किन्तु यात्रा के बारे में सुनी गए बातें और कोलकाता में कोई व्यवस्था न होने के कारण उनकी यह इच्छा अधूरी रही थीI कोलकाता में मेरी पोस्टिंग उनकी इस इच्छा पूर्ति की दिशा में सहायक थाI पिताजी ने नववर्ष पर पत्र लिख कर मुझे गंगा सागर की यात्रा की तैयारी करने के निर्देश दे दिएI मैंने सोचा कि अभी जनवरी में बोले हैं, तो उनके आने में कुछ समय तो लगेगा हीI किन्तु मेरे आश्चचर्य की कोई सीमा नहीं रही, जब अगले ही सप्ताह पिताजी और माँ बैरकपुर आ गएI "मैंने सोचा कि गंगा सागर तो मकर संक्रांति में ही जाना चहियेI इस लिए मैं तुरंत आ गयाI" आते ही पिताजी ने कहाI "क्या तुमने सारी बातें पता की?" पिताजी की धार्मिक प्रवृति को ध्यान में रखते हुए मुझे इसका ख्याल रखना चहिये थाI पिताजी को आश्वस्त कर मैं इंस्टिट्यूट के कर्मचारियों से इसके बारे में पता कियाI खैर, हमारा गंग

आलोचना करने से अच्छा है, समाधान ढूंढना – इंद्रेश कुमार जी

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समस्याओं की आलोचना करने से अच्छा है, उनका समाधान ढूंढना – इंद्रेश कुमार जी January 13, 2016 गुडगांव (हरियाणा). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य इंद्रेश कुमार जी ने कहा कि कांग्रेस नहीं झुकती तो देश का विभाजन भी नहीं होता. बापू (महात्मा गांधी) चुप नहीं रहते तो आजादी की इतनी बड़ी कीमत नहीं चुकानी पड़ती और आज भारत अखंड होता. इंद्रेश जी स्वामी विवेकानंद व्याख्यानमाला के पहले दिन “भारत की सीमाएं-चुनौतियां व समाधान” विषय पर अपने विचार व्यक्त कर रहे थे. गौरीकुंज सभागृह में सोमवार शाम उन्होंने कहा कि समस्याओं की आलोचना करने से अच्छा है, उनको दूर करने के लिए रास्ते निकालना, समाधान ढूंढना. सीमाओं पर विकास करने के लिए आयोग बनाने, कानून बनाने और पलायन रोकने का भी उन्होंने सुझाव दिया. उन्होंने कहा कि आतंक, नक्सलवाद, अलगाववाद और साम्प्रदायिक दंगे में जी नहीं सकते. खुद्दार, स्वाभिमानी बनें. छुरा, बंदूक, बम समाधान नहीं. संवाद समस्याओं का समाधान है. व्याख्यान के दौरान इंद्रेश जी ने स्वामी विवेकानंद का किस्सा सुनाया. उन्होंने कहा कि मॉरल वैल्यू (नैतिक मूल्य) औ