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संसद पर हमला :13 दिसंबर 2001: मुख्य आरोपी अफजल गुरु : जेएनयू

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भारत की संसद पर हमले के आरोपी की बरसी मनाने वाले अपने आप को देश भक्त कैसे कह सकते हैं ?  कोई भी विश्व विद्यालय देश विरोधियों  को अनुमति कैसे दे सकता ?? और देशविरोधी का साथ देने को सिर्फ और सिर्फ देशद्रोही  कहा जाता हे !  अभिव्यक्ती की स्वतंत्रता का नाम लेकर देश से गद्दारी नही की जा सकती !! संसद पर हमले की पूरी कहानी... http://hindi.webdunia.com 13 दिसंबर 2001 को जैश-ए-मोहम्मद के पांच आतंकवादियों ने संसद पर हमला किया था। उस दिन एक सफेद एंबेसडर कार में आए इन आतंकवादियों ने 45 मिनट में लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर को गोलियों से छलनी करके पूरे हिंदुस्तान को झकझोर दिया था  यह पाकिस्तान की भारत के लोकतंत्र के मंदिर को नेस्तनाबूद करने की साजिद थी, लेकिन हमारे सुरक्षाकर्मियों ने अपनी जान की परवाह न करते हुए इन आतंकियों के मंसूबों पर पानी फेर दिया। जानिए संपूर्ण घटनाक्रम जानिए ! कैसे हुआ था हमला- तारी‍ख 13 दिसंबर, सन 2001, स्थान- भारत का संसद भवन। लोकतंत्र का मंदिर जहां जनता द्वारा चुने सांसद भारत की नीति-नियमों का निर्माण करते हैं। आम दिनों में जब संसद भवन के परिसर कोई सफेद रंग

साम्यवादी सोच का सच : आशुतोष मिश्र

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साम्यवादी सोच का सच ( दैनिक जागरण ) Editor, Sampadkiya February 22, 2016 लेखक -  आशुतोष मिश्र , लखनऊ विश्व विद्यालय राजनीती शास्त्र के विभागाध्यक्ष   जेएनयू से भारत की बर्बादी तक जंग जारी रखने के ऐलान को सुनकर सारा देश सदमे में है। इस जंग को जीतने के लिए हर घर से अफजल निकलने और अफजल के हत्यारों को जिंदा न छोड़ने का संकल्प सार्वजनिक हो गया है। जेएनयू का चालीस साल पुराना छात्र होने के नाते मेरे लिए इसमें कुछ नया नहीं है। कम्युनिस्ट क्रांतिकारिता और इस्लामी कट्टरवादिता की दुस्साहसी दुरभिसंधि की कहानी उससे भी तीस साल पुरानी है जब अधिकारी थीसिस के आधार पर मार्क्‍सवादियों ने मुस्लिम लीग के साथ मिलकर पाकिस्तान बनाने का आंदोलन चलाया था। इसका औपचारिक आरंभ तो उससे भी पच्चीस साल पहले अगस्त 1920 में हुआ जब एमएन रॉय ने डीकॉलोनाइजेशन थीसिस के जरिये भारत के साम्यवादियों को आजादी के आंदोलन से अलग रखने की कोशिश की। आजादी के बाद दोबारा देश के कम्युनिस्ट नेताओं को मॉस्को बुलाकर स्टालिन ने फटकारा। इस वजह से मजबूरी में हमारे कम्युनिस्ट नेताओं ने माना कि भारत देश थोड़ा आजाद हुआ है और यहां थोड़ा ज