पोस्ट

मार्च 14, 2016 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

देश में 58477 स्थानों पर संघ की शाखाएं लगती हैं

चित्र
नागौर में हुई संघ की अ.भा.प्रतिनिधि सभा बैठक में अनुकूल परिस्थिति का लाभ उठाने का आह्वान https://www.facebook.com/permalink. वीर भूमि राजस्थान के इतिहास में 36 राजवंशों का उल्लेख मिलता है। इनमें मेवाड़ का सीसोदिया वंश तो विश्व-विख्यात है, किन्तु साहस, शौर्य और पराक्रम में चौहानों का भी कोई सानी नहीं रहा। दिल्ली और अजमेर के सम्राट पृथ्वीराज चौहान अपने समय के अग्रणी योद्धा थे। पुराणों में बताया गया है कि ॠषियों ने दैत्यों का सामना करने के लिये एक यज्ञ कुण्ड निर्मित किया। उसमें बारी-बारी से चार योद्धा प्रकट हुए। पहले तीन तो दैत्यों से पराजित हुए। चौथे योद्धा का नाम चौहान (चाह-मान अर्थात् चार भुजाओं वाला) रखा गया और उसने दैत्यों को पराजित किया। ऐसे महा-पराक्रमी चौहानों की एक शाखा नाडौल में थी। नाडौल में तैनात वीरवर पज्जूनराय ने मोहम्मद गोरी को धूल चटाई थी। यही नाडौल आज-कल नागौर के नाम से प्रसिद्ध है। इस ऐतिहासिक नगरी में 11,12 तथा 13 मार्च को रा.स्व.संघ की अ.भा.प्रतिनिधि सभा की बैठक हुई। अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा संघ की सर्वोच्च नीति-नियामक इकाई है। तीन साल में एक बार होने वाले च

राष्ट्रीय परिदृश्य

अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा 2016, नागौर -: राष्ट्रीय परिदृश्य :- 1) महिला और मंदिर प्रवेश :- गत कुछ दिनों से महिलाओं के मंदिर प्रवेश को लेकर कुछ समूहों द्वारा विवाद का मुद्दा बनाया जा रहा है। भारत में प्राचीन काल से ही धार्मिक, आध्यात्मिक क्षेत्र में पूजा-पाठ की दृष्टि से महिला-पुरुषों की सहभागिता सहजता से रही है, यह अपनी श्रेष्ठ परम्परा है। सामान्यतः सभी मंदिरों में महिला-पुरुष भेद न रखते हुए सहजता से प्रवेश होता ही है। महिलाओं द्वारा वेदाध्ययन, पौरोहित्य के कार्य भी सहजता से संपन्न हो रहे हैं। अनुचित रुढ़ी परंपरा के कारण कुछ स्थानों पर मंदिर प्रवेश को लेकर असहमति दिखाई देती है। जहां पर यह विवाद है संबंधित बंधुओं से चर्चा हो एवं मानसिकता में परिवर्तन लाने का प्रयास हो। इस प्रकार के विषयों का राजनीतिकरण न हो एवं ऐसे संवेदनशील विषयों का समाधान संवाद, चर्चा से ही हो नहीं कि आंदोलन से। इसे भी ध्यान में रखना आवश्यक है। सामाजिक, धार्मिक क्षेत्र का नेतृत्व, मंदिर व्यवस्थापन आदि के समन्वित प्रयासों से सभी स्तर पर मानसिकता में परिवर्तन के प्रयास सामाजिक स्वास्थ्य की दृष्टि से आवश्यक है। 2