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संघ बाबासाहब के ही देखे हुए सपने को पूरा करने में लगा है

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बाबा साहब के जीवन को, उनके मूल्यों को जीवन में उतारने की आवश्यकता है - दुर्गादास जी संघ बाबासाहब के ही देखे हुए सपने को पूरा करने में लगा है - डाॅ. अमीलाल भाट राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के  क्षेत्रीय प्रचारक  माननीय  दुर्गादास जी उध्बोधन देते हुए जोधपुर १४ अप्रैल २०१६। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, जोधपुर महानगर द्वारा श्रद्धेय बाबा साहब डाॅ. भीमराव अम्बेडकर जी का 125वां जयंती समारोह  मेडीकल काॅलेज सभागार में आयोजित हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डाॅ. एस.एन. मेडीकल काॅलेज के प्राचार्य एवं नियंत्रक डाॅ. अमीलाल भाट  ने कहा कि संघ को लेकर समाज में अनेक भ्रांत धारणाएँ फैलायी जाती है जबकि संघ को समझने वाला व्यक्ति जानता है कि संघ बाबासाहब के ही देखे हुए सपने को पूरा करने में लगा है। इस भ्रांत धारणा को समाज से दूर करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हिन्दू धर्म सर्व समावेशी है। इस दर्शन में विश्व के सभी धर्मों और तत्वों का सार निहित है। बाबासाहब भारत रत्न नहीं वरन विश्व के रत्न है। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के  क्षेत्रीय प्रचारक  माननीय  दुर्गादास जी ने अपने उद्

आयकर दाताओं की कुल संख्या सिर्फ 1.25 करोड़

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बड़ी आबादी और आयकर दाता May 4, 2016 http://www.4pm.co.in/archives/16434 हमारी सरकार सालाना करीब 5.6 लाख करोड़ के घाटे में जा रही है। इस वजह से सरकार पर कुल कर्ज करीब 70 लाख करोड़ रुपए हो चुका है। इस कर्ज पर सालाना 4.6 लाख करोड़ रुपये ब्याज चुकाना होता है। इस कठिन वित्तीय स्थिति के बाद देश में जीडीपी में टैक्स का अनुपात सिर्फ 16-17 फीसदी है, जबकि अमेरिका, ब्रिटेन आदि में करीब 29 फीसदी है। देश में अमीरों को ढूंढऩा कोई ज्यादा मुश्किल भरा काम नहीं है। बढ़ते होटलों, मॉल्स और ज्वैलर्स की चमचमाती दुकानें देश में प्रगति की गवाही देती हैं। लाखों-करोड़ों रुपये के घर धड़ल्ले से खरीदे और बेचे जा रहे हैं, सडक़ों पर तेज रफ्तार और नई गाडिय़ों की भरमार है। ऐसे में इसे विडंबना ही कहा जायेगा कि देश में आयकर देनेवालों की संख्या कुल आबादी का सिर्फ एक फीसदी है। हालांकि, इनमें से 5,430 लोग हर साल एक करोड़ रुपये से अधिक आयकर देते हैं। लेकिन आबादी का एक बड़ा हिस्सा आयकर देने में लापरवाही बरत रहा है। आयकर से जुड़ा आंकड़ा चौंकाने वाला है। यह देश में कर प्रणाली की खामियों की तरफ भी इशारा करता है। यह आर्थ