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विजयादशमी : परम पूज्य सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी का पूर्ण संबोधन

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रेशिमबाग नागपुर में विजयादशमी उत्सव पर  परम पूज्य सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी का पूर्ण संबोधन October 11, 2016 आदरणीय प्रमुख अतिथि महोदय, निमंत्रित विशिष्ट अतिथिगण, नागरिक सज्जन माता भगिनी, माननीय संघचालक गण एवं आत्मीय स्वयंसेवक बंधु, अपने पवित्र संघकार्य के 90 वर्ष पूर्ण होने के पश्चात् युगाब्द 5118 अर्थात् ई. स. 2016 का यह विजयादशमी उत्सव एक वैशिष्ट्यपूर्ण कालखण्ड में संपन्न हो रहा है. स्व. पंडीत दीनदयाल जी उपाध्याय की जन्मशती के संबंध में पिछले वर्ष ही मैंने उल्लेख किया था. वह 100वाँ वर्ष पूरा होने के बाद इस वर्ष भी उनके जन्मशती के कार्यक्रम चलने वाले है. यह वर्ष अपने इतिहास के कुछ और ऐसे महापुरुषों के पुनःस्मरण का वर्ष है, जिनके जीवन संदेश के अनुसरण की आवश्यकता आज की परिस्थिति में हम सबको प्रतीत होती है. यह वर्ष आचार्यश्री अभिनवगुप्त की सहस्राब्दी का वर्ष है. वे शैवदर्शन के मूर्धन्य आचार्य तथा साक्षात्कार प्राप्त संत थे. ‘‘प्रत्यभिज्ञा’’ संज्ञक दार्शनिक संकल्पना के प्रवर्तन के साथ-साथ उन्होंने अपनी बहुमुखी प्रतिभा के अविष्कार से काव्य, नाट्य, संगीत, भाषा, ध