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श्रीकृष्ण जलवा पूजन : डोल ग्यारस

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डोल ग्यारस : श्रीकृष्ण की मूर्ति विराजेंगी 'डोल' में श्रीकृष्ण जन्म के 18 वें दिन माता यशोदा ने उनका जलवा पूजन किया था। इसी दिन को 'डोल ग्यारस' के रूप में मनाया जाता है। जलवा पूजन के बाद ही संस्कारों की शुरुआत होती है। जलवा पूजन को कुआं पूजन भी कहा जाता है। इस ग्यारस को परिवर्तिनी एकादशी, जयझूलनी एकादशी, वामन एकादशी आदि के नाम से भी जाना जाता है। 'डोल ग्यारस' के अवसर पर कृष्ण मंदिरों में पूजा-अर्चना होती है। भगवान कृष्ण की मूर्ति को 'डोल' में विराजमान कर उनकी शोभायात्रा निकाली जाती है। इस अवसर पर कई शहरों में मेले, चल समारोह और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी होता है। इसके साथ ही डोल ग्यारस पर भगवान राधा-कृष्ण के एक से बढ़कर एक नयनाभिराम विद्युत सज्जित डोल निकाले जाते हैं। इसमें साथ चल रहे अखाड़ों के उस्ताद व खलीफा तथा कलाकार अपने हैरतअंगेज प्रदर्शन से भक्तों को रोमांचित करते हैं। ग्यारस का महत्व : शुक्ल-कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को चंद्रमा की ग्यारह कलाओं का प्रभाव जीवों पर पड़ता है। फलत: शरीर की अस्वस्थता और मन की चंचलता स्वाभाविक रूप से

भारत नव निर्माण ‘संकल्प से सिद्धि’ - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

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भारत नव निर्माण 2017 से 2022 तक, ये 5 वर्ष ‘संकल्प से सिद्धि’ के वर्ष हैं: लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी August 09, 2017 * हमारी आजादी न केवल हमारे देश के लिए थी बल्कि इससे विश्व के अन्य भागों में भी उपनिवेशवाद का अंत करने की प्रेरणा मिली: पीएम मोदी * भ्रष्टाचार रुपी दीमक ने हमारे देश की विकास यात्रा पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है: प्रधानमंत्री मोदी * गरीबी, अशिक्षा और कुपोषण आज हमारे देश के सामने बड़ी चुनौतियां, हमें इसमें सकारात्मक बदलाव लाने की आवश्यकता: पीएम मोदी * 1942 में गाँधी जी का आह्वान था - ‘करेंगे या मरेंगे’ और आज की जरुरत है - ‘करेंगे और कर के रहेंगे’: प्रधानमंत्री मोदी * 2017 से 2022 तक, ये 5 वर्ष ‘संकल्प से सिद्धि’ के वर्ष हैं: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आदरणीय अध्यक्ष महोदया, मैं आपका और सदन के सभी आदरणीय सदस्‍यों का आभार भी व्‍यक्‍त करता हूं और हम सब आज गौरव भी महसूस कर रहे हैं कि अगस्त क्रांति का, उन्‍हें स्मरण करने का, इस सदन के पवित्र स्थान पर हम लोगों को सौभाग्य मिला है। हम में से बहुत लोग हैं जिन्हें शायद अगस्त क्रांति, 9 अगस्‍त, उन घटनाओं क