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शिवाजी का आगरा जेल से मुक्त होना

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                                          19 अगस्त  के दिन शिवाजी औरंगजेब की आगरा कैद से निकले थे शिवाजी की आगरा यात्रा -  अपनी सुरक्षा का पूर्ण आश्वासन प्राप्त कर छत्रपति शिवाजी आगरा के दरबार में औरंगजेब से मिलने के लिए तैयार हो गए। वह 9 मई, 1666 ई को अपने पुत्र शम्भाजी एवं 4000 मराठा सैनिकों के साथ मुगल दरबार में उपस्थित हुए, परन्तु औरंगजेब द्वारा उचित सम्मान न प्राप्त करने पर शिवाजी ने भरे हुए दरबार में औरंगजेब को विश्वश्घाती  कहा, जिसके परिणमस्वरूप औरंगजेब ने शिवाजी एवं उनके पुत्र को  जयपुर भवन  में कैद कर दिया। वहां से शिवाजी 17 अगस्त, 1666 ई ( यह तारीख कही 13, 16,18   और कहीं 19  भी लिखी है ) को फलों की टोकरी में छिपकर फरार हो गए और 22 सितम्बर, 1666 ई. को रायगढ़ पहुंचे। शिवाजी का फलों की टोकरी में छुपकर कर आगरा जेल से मुक्त होना  : समर्थ गुरु रामदास की योजना के मुताबिक, औरंगजेब को भेंट के तौर पर फलों की टोकरियां भिजवाई जाती थीं.  गुरूजी ने भी ये सिलसिला अपने एक भक्त के जरिए शुरू कराया था. मुगल सेना का विश्वास जीतने के बाद उस भक्त ने 17 अगस्त 1666 को