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अद्वितीय बलिदान : वीर बंदा बैरागी : न भूतो न भविष्यति

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     वीर बंदा बैरागी का कृतित्व अनुपम और बलिदान था अद्वितीय आभार सहित - राकेश कुमार आर्य के ब्लाग से हिंदू प्रतिभा और पराक्रम मुगलकाल का विधिवत आरंभ अकबर के काल से माना जाता है। अकबर को भी उस समय हेमू जैसे वीर योद्घा के प्रबल प्रतिरोध का सामना करना पड़ा था। इस महान योद्घा के विषय में डा. आर.सी. मजूमदार लिखते हैं :- ''मध्यकालीन और आधुनिक इतिहासकारों ने हेमू के साथ न्याय नहीं किया और वे उस विलक्षण प्रतिभावान हिंदू शासक और प्रखर व्यक्तित्व का उचित मूल्यांकन करने में असफल रहे। मुस्लिम शासकों के उत्कर्षकाल में सामान्य व्यापारी के स्तर से ऊपर उठकर धीरे-धीरे दिल्ली के राजसिंहासन तक पहुंचने वाला हेमू किसी राजवंश में उत्पन्न नहीं हुआ था न ही वह किसी राजसी वैभव का उत्तराधिकारी था।'' डा. मजूमदार के ये शब्द हिंदू प्रतिभा और पराक्रम का सम्मान है। इन शब्दों का मूल्य तब और बढ़ जाता है जब मध्यकालीन भारत में विश्व के अन्य देशों में और भारत में भी स्थान-स्थान पर मुस्लिम राज्य खड़े हो जाते थे और किसी अन्य मतावलंबी का साहस उस समय अपना राज्य खड़ा करने का नही होता था। तब हेमचंद्र उपनाम हे

बंदा बैरागी : हिन्दू शौर्य की पराकाष्ठा

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  बंदा बैरागी : हिन्दू शौर्य की पराकाष्ठा      9 जून- बलिदान दिवस बंदा बैरागी.. बेटे को मार कर कलेजा मुँह में ठूस दिया, फिर हाथी से कुचलवा डाला.. लेकिन नहीं बने “मुसलमान” Link -  warrior-banda-bairagi-ji      इनकी चर्चा करते तो खतरे में पड़ जाते उनके स्वघोषित धर्मनिरपेक्षता के नकली सिद्धांत .. इनके बारे में बताते तो उनके आका हो जाते नाराज जिनकी चाटुकारिता के उन्हें पैसे मिलते थे .. इनका सच दिखाते तो इतिहास काली स्याही का नहीं बल्कि स्वर्णिम रंग में होता .. इनका जिक्र करते तो समाज मे न तो लव जिहाद होता और न ही धर्मांतरण .. और ये सब न होता तो उनकी दुकानदारी न चलती .. भारत के इतिहास को विकृत करने वाले चाटुकार इतिहासकारो के किये पाप का नतीजा है कि धर्म के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले बंदा बैरागी का आज बलिदान दिवस है जिसे बहुत कम भारतीय जानते हैं .. *9 जून बन्दा बैरागी का बलिदान दिवस* * बन्दा बैरागी का जन्म 27 अक्तूबर, 1670 को ग्राम तच्छल किला, पुंछ में श्री रामदेव के घर में हुआ। उनका बचपन का नाम लक्ष्मणदास था। युवावस्था में शिकार खेलते समय उन्होंने एक गर्भवती हिरणी पर तीर चला दिया। इससे उ