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श्रीमान एम और मास्टर महाशय : महेन्द्रनाथ गुप्त

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   Mahendranath Gupta From Wikipedia, the free encyclopedia  महेन्द्रनाथ गुप्त महेन्द्रनाथ गुप्त श्रीमान एम और मास्टर महाशय के नाम से अधिक परिचित हैं। वे श्रीरामकृष्ण वचनामृत नामक विख्यात पुस्तक के रचयिता हैं। महेन्द्रनाथ गुप्त बीसवीं सदी के भारतीय संत परमहंस योगानंद के गुरु भी थे।  Mahendranath Gupta (Bengali: মহেন্দ্রনাথ গুপ্ত) (14 July 1854 – 4 June 1932), (also famously known as শ্রীম, Master Mahashay, and M.), was a disciple of Ramakrishna (a great 19th-century Hindu mystic) and a great mystic himself. He was the author of Sri Sri Ramakrishna Kathamrita (5 vols.), a Bengali classic; in English, it is known as The Gospel of Sri Ramakrishna. He was also an early teacher to Paramahansa Yogananda, a famous 20th-century yogi, guru and philosopher. In his autobiography, Yogananda noted that Gupta ran a small boys' high school in Kolkata, and he recounted their visits, as they often traveled to the Dakshineshwar Kali Temple together.  Having a devotional nature, Gupta worshipped the

‘फ्रीडम टु पब्लिश’ : सत्य पथ के बलिदानी महाशय राजपाल

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      ‘फ्रीडम टु पब्लिश’ : सत्य पथ के बलिदानी महाशय राजपाल सत्य पथ के बलिदानी महाशय राजपाल महाशय राजपाल (अंग्रेज़ी: Mahashay Rajpal ; जन्म- 1885, अमृतसर; मृत्यु- 6 अप्रैल, 1929) हिन्दी की महान् सेवा करने वाले लाहौर के निवासी थे। उनका लाहौर में प्रकाशन संस्थान था। वह खुद भी विद्वान् थे। राजपाल पक्के आर्य समाजी थे और विभिन्न मतों का अपनी पुस्तकों में तार्किक ढंग से खंडन करते थे। इसी से क्षुब्ध होकर इल्मदीन नाम के एक व्यक्ति ने उस समय छुरा मारकर महाशय राजपाल की हत्या कर दी, जब वह अपनी दुकान पर बैठे हुए थे। हत्यारे को कुछ युवकों द्वारा दौड़कर पकड़ लिया गया था। उसे 'लाहौर उच्च न्यायालय' से फ़ाँसी की सज़ा हुई थी। देश के बंटवारे के बाद राजपाल का परिवार दिल्ली चला आया था। जीवन परिचय महाशय राजपाल का जन्म भारत की सुप्रसिद्ध सांस्कृतिक व ऐतिहासिक नगरी अमृतसर में पंचमी आषाढ़ संवत (सन 1885) को हुआ था। यह काल भारतीय इतिहास में बड़ा महत्त्व रखता है। इस काल में राजपाल जी ने लाला रामदास जी के घर जन्म लेकर अपने कुल को धन्य कर दिया। लाला रामदास जी एक निर्धन खत्री थे। राजपाल प्रारम्भ से ही बहुत सं