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जुलाई 20, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

भारत विरोधी तत्वों के बीच गठजोड़ : कथित पेगासस जासूसी की झूठी रिपोर्ट

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          भारत के मान सम्मान और स्वाभिमान विश्व भर में प्रतिष्ठित कर रहे, प्रधानमंत्री मोदीजी के खिलाफ कांग्रेस का बड़ा अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र चल रहा है ..इस कथित जासूसी काण्ड में जो नाम बताये जा रहे हैं उनका कोई आाधार नहीं हे। इन्टरनेशनल मीडिया की टेबिल रिपोर्ट मात्र है। Pegasus जासूसी कांड पर संसद में बोले नए IT मंत्री अश्विनी वैष्णव ... गलत और आधारहीन हैं रिपोर्ट, लोकतंत्र की छवि खराब करने को फैलाई सनसनी नए केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्‍णव ने सर्विलांस के प्रोटोकॉल्‍स को गिनाते हुए कहा कि किसी तरह का अवैध सर्विलांस हमारे सिस्‍टम में संभव नहीं है. पेगासस जासूसी के कथित दावे को लेकर आज संसद के मानसून सत्र में आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सरकार का पक्ष रखा. उन्होंने कहा है कि हमारे कानूनों और मजबूत संस्थानों में जांच और संतुलन के साथ किसी भी प्रकार की अवैध निगरानी संभव नहीं है. भारत में एक अच्छी तरह से स्थापित प्रक्रिया है जिसके माध्यम से राष्ट्रीय सुरक्षा के उद्देश्य से इलेक्ट्रॉनिक संचार का वैध तरीके से इस्तेमाल किया जाता है. आईटी मंत्री ने कहा कि जब हम इस मुद्दे को तर्क के चश्म

देवउठनी एकादशी : तुलसी विवाह

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 जिस तरह हम 24 घंटे के पूरे दिवस में लगभग एक तिहाई 8 घंटे निद्रा लेते है। उसी तरह भगवान भी वर्ष में एक तिहाई अर्थात 4 माह की निद्रा लेते हैं। तर्क विर्तक और कुतर्क कितने भी हों। मगर सच यही है कि शरीर को अपनी ऊर्जा को पुनः प्राप्त करने हेतु निद्रा लेनी ही पढ़ती है और फिर जागरण भी होता है। यही वैज्ञानिक नियम ईश्वरीय व्यवस्था पर भी लागू होता है।      देवउठनी एकादशी कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी कहा जाता है।  धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी के दिन से कोई भी मंगल कार्य शुरू किया जा सकता है। इसके अलावा इस दिन अगर विधिवत पूजा अर्चना की जाए तो पूजा करने वाले व्यक्ति को एक हजार अश्वमेघ यज्ञ के बराबर का पुण्य प्राप्त होता है। माना जाता है कि भगवान विष्णु इस दिन विश्राम से जागकर सृष्टि का कार्य-भार संभालते हैं। देवउठनी एकादशी से सभी मंगल कार्य शुरू हो जाते है। ऐसे में आइए जानते हैं इस शुभ दिन क्या करने से व्यक्ति को 1 हजार अश्वमेघ यज्ञ का फल प्राप्त हो सकता है। लक्ष्मी पूजन – देवउठनी एकादशी के दिन स्नान करने के बाद भगवान विष्णु के साथ मां लक्ष्मी की भी विधिवत पूजा जरूर

देवशयनी एकादशी : हरिशयनी एकादशी

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   जिस तरह हम 24 घंटे के पूरे दिवस में लगभग एक तिहाई 8 घंटे निद्रा लेते है। उसी तरह भगवान भी वर्ष में एक तिहाई अर्थात 4 माह की निद्रा लेते हैं। तर्क विर्तक और कुतर्क कितने भी हों। मगर सच यही है कि शरीर को अपनी ऊर्जा को पुनः प्राप्त करने हेतु निद्रा लेनी ही पढ़ती है। यही वैज्ञानिक नियम ईश्वरीय व्यवस्था पर भी लागू होता है।    देवशयनी एकादशी 'हरिशयनी एकादशी' भगवान विष्णु - अन्य नाम     'पद्मनाभा' एकादशी, 'हरिशयनी' एकादशी अनुयायी - हिंदू, भारतीय उद्देश्य - ब्रह्म वैवर्त पुराण में इस एकादशी का विशेष माहात्म्य लिखा है। इस व्रत को करने से प्राणी की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, सभी पाप नष्ट होते हैं। प्रारम्भ - पौराणिक काल तिथि - आषाढ़ शुक्ल एकादशी अनुष्ठान - इस दिन उपवास करके भगवान विष्णु की प्रतिमा को आसन पर आसीन कर उनका षोडशोपचार सहित पूजन करके, उनके हाथों में शंख, चक्र, गदा, पद्म सुशोभित कर उन्हें पीताम्बर, पीत वस्त्रों व पीले दुपट्टे से सजाया जाता है। पंचामृत से स्नान करवाकर, तत्पश्चात् भगवान की धूप, दीप, पुष्प आदि से पूजा कर आरती उतारी जाती है। धार्मिक मान्यता