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विविधता है, भेद नहीं, इसी आधार पर हम सबको साथ लाते हैं - प्रचार प्रमुख श्री मनमोहन वैद्य

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विविधता है, भेद नहीं, इसी आधार पर हम सबको साथ लाते हैं  -  मनमोहन वैद्य, अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख, रा. स्व. संघ -  साभार : पाञ्चजन्य शाखा यानी टहनी, इस टहनी को संभालने वाला संघवृक्ष कैसा है? इसके कार्य की प्रकृति और आयाम क्या हैं यह जानने के क्रम में पाञ्चजन्य ने बात की रा. स्व. संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख श्री मनमोहन वैद्य से। प्रस्तुत हैं इस वार्ता के प्रमुख अंश। संघ के नाम पर कुछ लोग नाक-भौं    चढ़ाते हैं, कुछ इसे रचनात्मक शक्ति कहते हैं आपने संघ के प्रचारक के रूप में जीवन दिया है, आपने संघ को कैसा पाया? रा.स्व.संघ राष्ट्र के पुनर्निर्माण में लगा है। यह रचनात्मक कार्य ही है। संघ की आलोचना पहले से होती आ रही है। डॉ. हेडगेवार जी कहते थे कि संघ की प्रशंसा हमारा उत्तरदायित्व बढ़ाने वाली है और संघ की आलोचना आलोचक की अज्ञानता का निदर्शक है ऐसा मानकर चलना चाहिए। आज जो लोग नाक-भौ चढ़ाते हैं उसमें तीन प्रकार के लोग हैं एक वे जो संघ के बारे में जानते ही नहीं हैं, या गलत जानकारी रखते हैं इसलिए ऐसा कह रहे हैं। दूसरा वे जो किसी व्यक्तिगत स्वार्थ से  ऐसा कह रहे हैं, और तीसरे वह