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जम्मू-कश्मीर : नए सिरे से अशांति को आमन्त्रण  

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-  अरविन्द सिसोदिया कश्मीर मुद्दे के राजनीतिक समाधान के उद्देश्य से वार्ताकारों वरिष्ठ पत्रकार दिलीप पडगांवकर, शिक्षाविद् राधा कुमार एवं पूर्व सूचना आयुक्त एम.एम. अंसारी द्वारा केंद्रीय गृह मंत्रालय को सौंपी गई रिपोर्ट ने ” जम्मू-कश्मीर को शेष भारत से अलग करने वाली धारा 370 को स्थायी करने और राज्य में लागू केंद्रीय कानूनों की समीक्षा करने की बात कह कर राष्ट्रवादी सोच को गंभीर ठेस पहुंचाई है।“ केंद्रीय कानूनों की समीक्षा में सुप्रीम कोर्ट, भारतीय निर्वाचन आयोग एवं भारतीय महालेखाकार तक का दायरा सीमित करने, नियंत्रण रेखा के आर-पार व्यापार को बढ़ावा देने के लिए कश्मीर में दोहरी मुद्रा को मान्यता देने की मांग फिर से उठ सकती है। जो कि राष्ट्र की एकता और अखण्डता को नुकसान पहुचाने का एक नया कुप्रयास होगा। केन्द्र सरकार को अविलम्ब इस रिपोर्ट को अस्विकार करना चाहिये। जम्मू-कश्मीर से जुड़े कानूनों की समीक्षा की सिफारिश नई दिल्ली . जम्मू-कश्मीर पर केंद्र सरकार के वार्ताकारों ने राज्य में लागू सभी केंद्रीय कानूनों की समीक्षा करने की सिफारिश की है। इसके लिए संवैधानिक समिति गठित करने को

बुंदेलखंड के प्रतापी शासक : महाराजा छत्रसाल

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महाराजा छत्रसाल ज्येष्ठ शुक्ल ३ संवत १७०७ बुंदेलखंड में कई प्रतापी शासक हुए हैं। बुंदेला राज्‍य की आधारि‍शला रखने वाले चंपतराय के पुत्र छत्रसाल महान शूरवीर और प्रतापी राजा थे। छत्रसाल का जीवन मुगलों की सत्ता के खि‍लाफ संघर्ष और बुंदेलखंड की स्‍वतंत्रता स्‍थापि‍त करने के लि‍ए जूझते हुए नि‍कला। महाराजा छत्रसाल अपने जीवन के अंतिम समय तक आक्रमणों से जूझते रहे। बुंदेलखंड केशरी के नाम से वि‍ख्‍यात महाराजा छत्रसाल के बारे में ये पंक्तियां बहुत प्रभावशाली है: इत यमुना, उत नर्मदा, इत चंबल, उत टोंस । छत्रसाल सों लरन की, रही न काहू हौंस ।। चंपतराय जब समय भूमि मे ंजीवन-मरण का संघर्ष झेल रहे थे उन्हीं दिनों ज्येष्ठ शुक्ल 3 संवत 1707 (सन 1641) को वर्तमान टीकमगढ़ जिले के लिघोरा विकास खंड के अंतर्गत ककर कचनाए ग्राम के पास स्थित विंध्य-वनों की मोर पहाड़ियों में इतिहास पुरुष छत्रसाल का जन्म हुआ। अपने पराक्रमी पिता चंपतराय की मृत्यु के समय वे मात्र 12 वर्ष के ही थे। वनभूमि की गोद में जन्में, वनदेवों की छाया में पले, वनराज से इस वीर का उद्गम ही तोप, तलवार और रक्त प्रवाह के बीच हुआ। पांच वर्ष में

गौ हत्या की आधुनिक मशीनें क्यों...?

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गौ हत्या  की आधुनिक मशीनें क्यों...? भारत में गौ काटने के लिये ऐसे ही आधुनिक मशीनें लाई गई है जिसमें एक संकरी गली में गौ को बेजा जाता है जिसमें सामने शीशा लगा होता है और जब गाय अन्दर जाती है तो ये मशीन उसकी गर्दन जकड लेती है और एक सैकेण्ड में अलग कर देती है..........अगर ऐसा भारत में भी होने लगा तो हर रोज लाखों गायों को मारा जायेगा और एक दिन ये भारत से खत्म हो जायेगी और उसे मां कहने वाले लोग उसे क्या चुप चाप कटता देखना चाहेंगे........ ????????

जगनमोहन रेड्डी गिरफ्तार : सीबीआई दुरउपयोग

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कांग्रेस सी बी आई की कार्यवाही के द्वारा राजनैतिक विरोधियों को किस तरह नीचा दिखाते हैं इसका उदाहरण जगन रेड्डी की आय से अधिक सम्पती के आधार पर गिरफतारी है। जबकि आय से अधिक सम्पती के मामले में मुलायम सिंह यादव, लालूप्रसाद यादव और मायावती सिरमौर हैं,इन्हे क्यों सीबीआई गिरफतार नहीं कर रही .......???? इन दलों से कांग्रेस ने अपना समर्थन हांसिल किया हुआ हे। आय से अधिक सम्पती के मामलों के कारण ही ये दल कांग्रेस की हां में हां मिलाते रहते हें। जगन ने येसा नहीं किया तो उसे गिरफतार कर लिया गया .......लगातार सीबीआई दुरउपयोग की यह ताजा मिसाल है.....सवाल यह नहीं कि जगन को क्यों गिरिफतार किया ? सवाल है जगन से बडे आय से अधिक सम्पती के मामलों में गिरफतारी क्यों नहीं...... =========== जगनमोहन रेड्डी को CBI ने किया गिरफ्तार भाषा | हैदराबाद, 27 मई 2012कांग्रेस से विद्रोह कर राजनीति में तेजी से कदम बढ़ाने वाले कडप्पा के सांसद वाईएस जगनमोहन रेड्डी को आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक सम्पत्ति मामले में सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया.सीबीआई प्रवक्ता ने बताया, ‘जगनमोहन रेड्डी को शाम सवा सात बजे गिरफ्तार कर

अमर शहीद राम प्रसाद 'बिस्मिल'

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रामप्रसाद 'बिस्मिल' की आत्मकथा अमर शहीद राम प्रसाद 'बिस्मिल' की आत्मकथा The Autobiography of Ram Prasad 'Bismil' दिसंबर 1927 ईस्वी में गोरखपुर जेल में लिखी गई प्रथम खंड आत्म-चरित्र तोमरधार में चम्बल नदी के किनारे पर दो ग्राम आबाद हैं, जो ग्वालियर राज्य में बहुत ही प्रसिद्ध हैं, क्योंकि इन ग्रामों के निवासी बड़े उद्दण्ड हैं । वे राज्य की सत्ता की कोई चिन्ता नहीं करते । जमीदारों का यह हाल है कि जिस साल उनके मन में आता है राज्य को भूमि-कर देते हैं और जिस साल उनकी इच्छा नहीं होती, मालगुजारी देने से साफ इन्कार कर जाते हैं । यदि तहसीलदार या कोई और राज्य का अधिकारी आता है तो ये जमींदार बीहड़ में चले जाते हैं और महीनों बीहड़ों में ही पड़े रहते हैं । उनके पशु भी वहीं रहते हैं और भोजनादि भी बीहड़ों में ही होता है । घर पर कोई ऐसा मूल्यवान पदार्थ नहीं छोड़ते जिसे नीलाम करके मालगुजारी वसूल की जा सके । एक जमींदार के सम्बंध में कथा प्रचलित है कि मालगुजारी न देने के कारण ही उनको कुछ भूमि माफी में मिल गई । पहले तो कई साल तक भागे रहे । एक बार धोखे से पकड़ लिये गए तो तहस