48 घंटों में महाराष्ट्र में पांच किसानों ने की खुदकुशी


यह घटना आश्चर्य जनक  नहीं हे पूरे देश में किशानों की जो उपेक्षा हो रही हे यह उसका तो बहुत ही सूक्ष्म रूप मात्र हे भारत में जब भी अब नया क्रांति का आगाज होगा तो वह किसान के घर से होगा , महंगे खाद बीज और क्ष्रम के बाद भी जब उसे फसल घटे में बेंचना होती हे तो आखिर कब तक वह सहेगा यह जुल्म ...

महाराष्ट्र में पांच किसानों ने की खुदकुशी
Tue, 01 May 2012
Jagran Hindi News
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मुंबई। महाराष्ट्र दिवस के जश्न एवं नेताओं के लोक लुभावन वादों के बीच सूखा प्रभावित विदर्भ क्षेत्र में बीते 48 घंटों में पांच किसानों ने खुदकुशी की है। किसानों ने कर्ज के मकड़जाल से निजात के लिए मौत को गले लगाया है। राज्य में बीते चार माह में खुदकुशी करने वाले खेतिहारों का आंकड़ा 332 पहुंच गया है।
विदर्भ जन आंदोलन समिति के अध्यक्ष और कृषक नेता किशोर तिवारी ने कहा, यवतमाल जिले के चिंचोली गांव में मंगलवार सुबह रामदास धाले नामक किसान ने आत्महत्या कर ली। कपास की खेती करने वाले रामदास पर तीन लाख का कर्ज था। तिवारी ने कहा, बीते 48 घंटों में यवतमाल जिले के अरिल गांव निवासी अजबराव मेश्राम और रामन्ना पेडकुलवार तथा वासिम के पोहारादेवी निवासी पार्वती बाई कादल और अमरावती जिले के सातेगांव निवासी श्रीराम काकड़ ने खुदकुशी कर ली। कर्ज चुका पाने में नाकामी के कारण ही इन चारों ने मौत को गले लगाया।
तिवारी ने राजनेताओं और अफसरों पर निशाना साधते हुए कहा, राहुल गांधी जैसी कद्दावर शख्सियत समेत तमाम नेता, मंत्री और अधिकारी इलाके का दौरा करते हैं। किसानों की दिक्कतें जानने के बाद समाधान का आश्वासन देते हैं, लेकिन होता कुछ नहीं।

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