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स्वामित्व -2

मध्यप्रदेश के भू-अभिलेख एवं बंदोबस्त आयुक्त (Commissioner of Land Records & Settlement) का मुख्यालय ग्वालियर में स्थित है। उनका पूरा आधिकारिक पता और पिनकोड नीचे दिया गया है:कार्यालय का नाम:  आयुक्त भू-अभिलेख एवं बंदोबस्त, मध्य प्रदेश शासन पूरा पता: मोती महल, लश्कर, ग्वालियर, मध्य प्रदेश पिनकोड: 474004 (अथवा 474007) ईमेल आईडी: clrgwa@mp.nic.इन टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर: 1800-233-6763 / 0755-400-0340 (नोट: मध्य प्रदेश शासन के मुख्य ऑनलाइन लैंड रिकॉर्ड कार्यों के लिए आप उनकी आधिकारिक MP Bhulekh वेबसाइट का उपयोग कर सकते हैं)। यदि आपका आशय भोपाल स्थित प्रमुख राजस्व आयुक्त (Principal Revenue Commissioner) कार्यालय से है, तो उसका पता इस प्रकार है: पता: 220, राजस्व राहत भवन, अरेरा हिल्स, भोपाल, मध्य प्रदेश पिनकोड: 462027 क्या आप भू-अभिलेख विभाग से संबंधित किसी विशेष समस्या (जैसे खसरा-खतौनी सुधार, सीमांकन) की जानकारी चाहते हैं या ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया जानना चाहते हैं? ======= * पूर्व कब्जा, परंपरागत निवास या पुश्तैनी रूप से चले आ रहे अधिकार समाप्त नहीं हुए हैं, बल्कि इस योज...

सुधार हेतु सुझाव -2

1- भाजपा को कांग्रेस के एजेंडे में नहीं फंसना चाहिए / अपने एजेंडे में उन्हे फंसाना चाहिए  2- राहुल को सब बेटेज देनें लगते हैँ। गलत कुछ छोटे प्रवक्ताओं को उसके पीछे छोड़ना चाहिए, थर्ड पार्टी से उसे अधिकतम एक्सपोज करना चाहिए।हां गाँधी परिवार के विरुद्ध रिसर्च टीम मजबूत बनाएं 3- बहुअयामी मीडिया प्रबंधन हों  जैसे - मीडिया संपर्क विभाग मज़बूत हो, थर्डपार्टी मीडिया प्रबंधन मजबूत हो, मुख्यकार्यकारणी में राष्ट्रीय मीडिया महामंत्री और प्रांतीय मीडिया महामंत्री आवश्यकरूप से नियुक्त / इससे मीडिया पर जरूरी खर्च, प्रबंधन और सम्मान सुनिश्चित हो सके। 4- पार्टी नेताओं की संपत्ति ठेकेदारी सप्लाईगिरी सब दिखती है... कुछ पर्दा होना चाहिए  5- धर्मिक दिखना और धर्मिक होना दोनों में अंतर है, लोकलाज के प्रति संवेदनशीलता आवश्यक /पब्लिक सब देखती है। 6- हिंदुत्व से जुडी समस्याएं एक साथ सूचिबद्ध करें और उन पर काम हो / हिंदू अस्थिर वोटर है जरूरी नहीं हमेशा साथ मिले / सरकार बनें  7- गुजरातवाद का विरोध स्वाभाविक है, विशेषकर यूपी में इसमें सावधानी बरतनी होगी। 8- संसद के सदनों में आंतरिक सुरक्षा हेतु ...

कविता - विश्वास का नाम है मोदी - अरविन्द सिसोदिया

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विश्वास का नाम है मोदी - अरविन्द सिसोदिया  9414180151 विश्वास का नाम है मोदी,  दुश्मन की नींद हराम है मोदी। जन-जन की आशा, जनकल्याण हे मोदी, नवचैतन्य भारत का नया मुकाम है मोदी। ===1=== सिर्फ विकल्प नहीं है मोदी, देश का संकल्प है मोदी। भारत की नई दिशा है मोदी , विकास की पहचान है मोदी। ===2=== गरीब के घर में उजियारा पहुँचा, जन-धन से सम्मान दिलाया , हर घर पहुँचा बैंकिंग का अधिकार, उज्ज्वला से चूल्हा रोशन हुआ, धुंए की धुंध मिटाई, डिजिटल भारत ने दुनिया को दिखाया, तकनीक से कैसे बदलता है संसार। ===3=== सड़कों से लेकर सेतु तक, रेल से लेकर विमान तक, गाँवों से शहरों तक,  विकास की  गूँज सुनाई देती है । वंदे भारत की गति में भारत, एक्सप्रेसवे की रफ्तार है भारत, बढ़ते कदमों की हर आहट में नए युग का विस्तार है भारत। ===4=== स्वच्छ भारत का संकल्प लेकर गाँव-गाँव संदेश पहुँचाया, शौचालय से सम्मान तक जनजीवन को बेहतर बनाया। जल जीवन की धारा पहुँची, घर-घर नल का सपना साकार, सेवा को राजनीति से ऊपर रख बढ़ाया जनविश्वास अपार। ===5=== दुनिया में भारत की आवाज़ बुलंद, कूटनीति में बढ़ा सम...

'मूड ऑफ द नेशन' MOTN

अगस्त 2026 के 'मूड ऑफ द नेशन' (MOTN) सर्वे के अनुमानों की तुलना 2024 के वास्तविक लोकसभा चुनाव परिणामों से करने पर पता चलता है कि एनडीए (NDA) की स्थिति मजबूत हुई है, जबकि विपक्षी 'INDIA' गठबंधन को नुकसान होता दिख रहा है। [1]  नीचे सीटों और प्रमुख पैमानों के आधार पर सीधा तुलनात्मक विवरण दिया गया है: ## 📊 सीटों का तुलनात्मक विश्लेषण | गठबंधन / पार्टी | 2024 चुनाव परिणाम (वास्तविक) | 2026 MOTN सर्वे (अनुमान) | बदलाव (फायदा / नुकसान) | |---|---|---|---| | एनडीए (NDA) | 293 | 326 | 📈 +33 सीटें | | बीजेपी (BJP - अकेले) | 240 | 261 | 📈 +21 सीटें | | इंडिया गठबंधन (INDIA) | 234 | 185 | 📉 -49 सीटें | | कांग्रेस (INC - अकेले) | 99 | 106 | 📈 +7 सीटें | ## 🔍 मुख्य बदलाव और प्रवृत्तियां (Trends) * गठबंधन स्तर पर बदलाव: NDA गठबंधन 2024 के 293 सीटों के मुकाबले बढ़कर 326 सीटों पर पहुंचता दिख रहा है। इसके विपरीत, विपक्षी 'INDIA' गठबंधन को भारी नुकसान हो रहा है, जो 234 सीटों से घटकर 185 सीटों पर सिमट सकता है।  * बीजेपी बनाम कांग्रेस: BJP अकेले अपने दम पर 240 से बढ़कर 261 सीट...

विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब यूनिवर्सिटी में लहराया भगवा, RSS के ABVP ने जीता अध्यक्ष पद

विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब यूनिवर्सिटी में लहराया भगवा, RSS के ABVP ने जीता अध्यक्ष पद Aug 31, 2026  अपनी जीत पर प्रतिक्रिया देते हुए ABVP के बिधान ने कहा कि आज जेन-जी ने साबित कर दिया कि पीएम नरेंद्र मोदी जी और ABVP उनके दिलों में हैं। उन्होंने कहा कि ABVP ने पिछले एक साल में किए गए काम की वजह से चुनाव जीते हैं। Panjab University Election RSS Wing ABVP Win Presidential Post Before Assembly Election  एबीवीपी कैंडिडेट अंकित बिधान पंजाब यूनिवर्सिटी कैंपस स्टूडेंट्स काउंसिल (PUCSC) के अध्यक्ष बने हैं। विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब यूनिवर्सिटी में एक बार फिर से भगवा लहराया है। आरएसएस के छात्र संगठन ABVP ने लगातार दूसरे साल चुनाव में जीत दर्ज की है। इस बार एबीवीपी को शिरोमणि अकाली दल के छात्र संगठन का भी साथ मिला है। एबीवीपी कैंडिडेट अंकित बिधान पंजाब यूनिवर्सिटी कैंपस स्टूडेंट्स काउंसिल (PUCSC) के अध्यक्ष बने हैं। एबीवीपी की जीत इसलिए भी अहम हो गई क्योंकि स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया (SOI) जो सुखबीर सिंह बादल की लीडरशिप वाली शिरोमणि अकाली दल (SAD) की स्टूडेंट विंग है ने चुनाव...

विविधता स्वाभाविक है और एकता ही सत्य है - सरसंघचालक भगवत जी Amerika RSS

विविधता स्वाभाविक है और एकता ही सत्य है 29 अगस्त को न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में अमेरिकन हिंदू फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग (AHEAD फोरम) द्वारा आयोजित "सार्वभौमिक एकता समारोह" को संबोधित करते हुए, आरएसएस सरसंघचालक डॉ. मोहन भगवत जी ने मुख्य भाषण में कहा, "जब हम अमेरिका, संयुक्त राज्य अमेरिका कहते हैं, तो अक्सर एक शब्द पर चर्चा होती है: बहुलतावाद। और जब हम भारत कहते हैं, तो एक और शब्द, एक और मुहावरा, चर्चा में आता है: विविधता में एकता। भारत के लिए, यह एकता और यह विविधता, दोनों इसके डीएनए में हैं। राष्ट्र केवल भौगोलिक इकाइयाँ नहीं हैं। इस ब्रह्मांड की संरचना में, राष्ट्रों को एक कर्तव्य निभाना होता है।" भारत के विश्वदृष्टिकोण के बारे में बात करते हुए सरसंघचालक जी ने कहा, प्रत्येक राष्ट्र का एक उद्देश्य होता है। भारत को क्या उद्देश्य दिया गया है? भारत का काम विविधता में एकता को साकार करना और समय-समय पर विश्व को इसका अहसास कराना है। हम सब एक हैं और विविधता ही हमारी इस एकता को सुशोभित करती है। इसलिए विविधता का सम्मान करना, उसे स्वीकार करना और उसका जश्न मनाना आवश्यक...

असहिष्णु अमेरिकियों को अपने भीतर झांकना चाहिए - अरविंद सिसोदिया

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प्रेस विज्ञप्ति असहिष्णु अमेरिकियों को अपने भीतर झांकना चाहिए - अरविंद सिसोदिया 30 अगस्त, कोटा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ /आरएसएस के खिलाफ अमेरिकी संस्थाओं और कुछ थिंक-टैंकों द्वारा लगातार फैलाए जा रहे नकारात्मक नैरेटिव पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन न्यासी एवं वरिष्ठ विचारक अरविंद सिसौदिया ने अमेरिका को कड़ा आईना दिखाया है। उन्होंने कहा कि, "भारत के सांस्कृतिक संगठन पर कोई भी टिप्पणी करने से पहले अमेरिका को अपने स्वयं के क्रूर और रक्तरंजित इतिहास को देखना चाहिए। दुनिया भर में मानवाधिकारों का ढोंग रचने वाला अमेरिका वास्तव में विश्व का सबसे बड़ा अत्याचारी, हिंसक और नरसंहारक देश है, जो अपनी बादशाहत के लिए चौबीस घंटे और 365 दिन दूसरे देशों के खिलाफ षड्यंत्र करता रहता है।" उन्होंने कहा कि " प्रधानमंत्री मोदीजी के नेतृत्व में भारत तेजी से उभरती अर्थ व्यवस्था बन रहा है जो कि अमेरिका के लिए सबसे बड़ी चुभन है और वह भारत के विरुद्ध लगातार अवरोध खडे कर रहा है, जिसे पूरी दुनिया महसूस कर रही है। " उन्होंने कहा क...

कविता - दरी बिछाये कार्यकर्ता, गद्दार करे जजमानी

कविता -   दरी बिछाये  कार्यकर्ता , जजमान बनें गद्दार - अरविन्द सिसोदिया  दरी बिछाये कार्यकर्ता , गद्दार करे जजमानी, वाहरी राजनीती तूनें अपनों को सगी न मानी ,  जनता से का का करेगी बेईमानी। =====1===== जिंदाबाद-मुर्दाबाद में बीत गई सारी उम्र, कार्यकर्ता फिर भी ढूंढता रहा अपना मुकाम  धूप में झंडा उठाया, बारिश में नारे लगाए, अपनों के लिए जाने कितने जूते घिसाए। दरी बिछाये वफादार, जजमान बनें गद्दार, वाहरी राजनीती तू अपनों की सगी नहीं,  जनता का क्या करेगी हॉल। =====2===== जो कल तक देते थे गाली, आज गले के हार, मौका मिलते ही बदल गए रिश्ते और विचार। जिसने बुरे वक्त में साथ दिया,वो आज भी कतार , कल के विरोधी बने आपके दरबार  न  कोई धरम कोई शरम न कोई ईमान। कार्यकर्ता सीढ़ी बना, सब चढ़ गए आसमान, मंजिल मिलते ही भूल गए उसका सारा एहसान। =====3===== दरी बिछाये वफादार जमान बनें गद्दार वाहरी राजनीती तू अपनों की सगी नहीं,  जनता का क्या करेगी हॉल। जिंदाबाद-मुर्दाबाद में बीत गई सारी उम्र, फिर भी कार्यकर्ता ढूंढता रहा अपना मुकाम हर कदम। धूप में झंडा उठाया, बारिश...

Instead of Opposing the RSS, Intolerant Americans Should Look Within — Arvind Sisodia

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Instead of Opposing the Sangh, Intolerant Americans Should Look Within — Arvind Sisodia Kota, August 30: Strongly reacting to what he described as a continuing negative narrative against the Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) by American institutions and certain think tanks, Arvind Sisodia, Trustee for Education Promotion of the Rajasthan State Textbook Board and senior thinker, has hit back at the United States, urging it to examine its own history before passing judgment on India's cultural organizations. "Before branding India's cultural organizations as 'intolerant,' America should look into its own past—a history marked by violence, bloodshed and grave violations of human rights. A country that presents itself as the global champion of human rights has itself been responsible for some of the most violent episodes in modern history and continues to pursue policies aimed at preserving its global dominance," Sisodia said. India and the Sangh's...

मोदी क्यों जरूरी है

मोदी क्यों जरूरी है? 1-- जेवर एयरपोर्ट का निर्माण। 2-- 5 राज्यों में UCC लागू करना। 3-मिस काल पर गैस सिलेंडर; 4-आनलाईन बिलों का भुगतान; 5-यू पी आई पेमेंट; 6-डी जी लोकर 7-जन औषधि केंद्र 8-आयुष्मान कार्ड 9-नयी संसद भवन 10-फ्री वैक्सीनेशन  11-जन धन योजना  12-सर्जिकल स्ट्राईक 13-आप्रेशन सिंदूर  14-तीन तलाक़ बिल 15-आधार लिंक 16-फास्ट टैग 17-चिनाब ब्रिज 18-जम्बू की सुरंग 19- गंगा एक्सप्रेस-वे  20-काशी कोरीडोर 21-विश्वनाथ कोरीडोर 22-केदारनाथ पुनर्निर्माण  23-श्री राम मंदिर निर्माण  24-सुकन्या समृद्धि योजना 25-शौचालयों का निर्माण  26-रेलवे पटरियों का दोहरीकरण  27-टिकट बुकिंग में दिन कम 28-टिकट कैंसिलेशन सुविधा  29-स्वर्णिम चतुर्भुज योजना 30-भारत माला प्रोजेक्ट  31-18 एम्स का निर्माण  32-S I R  33-महात्मा गांधी सेतु पुनर्निर्माण  34-भूपेन हजारिका सेतु  35-सेना का आधुनिकीकरण  36-मेक इन इंडिया  37-ड्रोन क्रांति  38-किसानों के खाते में सीधे पैसे 39-राशन डिजिटलाईजेशन  40-फ्री राशन 41-नोटबंदी 42-G S T लागू करना ...

कविता - रक्षाबंधन पर्व नहीं, कर्तव्य है बहन के प्रति

कविता  रक्षाबंधन पर्व नहीं, कर्तव्य है बहन के प्रति - अरविन्द सिसोदिया  रक्षाबंधन पर्व नहीं, कर्तव्य है बहन के प्रति, संकल्प है समाज की शक्ति के प्रति। भाई-बहन के अटूट प्रेम की प्रतिष्ठा के प्रति, इसमें न कमी आने देना, यह संकल्प है जगत-जननी के प्रति। रक्षाबंधन पर्व नहीं, कर्तव्य है बहन के प्रति। ====1==== राखी केवल धागा नहीं, विश्वास की पहचान है, बहना के स्नेह में ममता, भाई में रक्षा का मान है। भाई दूज भी कहता है, रिश्ता रहे अटूट सदा, बहन का सम्मान और सुरक्षा, यही धर्म का विधान है। नारी का आदर करना, सनातन की पहचान है, नारी के सम्मान से ही घर, समाज और राष्ट्र महान है। ====2==== नारी जननी, नारी शक्ति, नारी जीवन का आधार है, दुर्गा में शक्ति, सरस्वती में ज्ञान, लक्ष्मी का अवतार है। वेदों में गूँजी गार्गी-मैत्रेयी की ज्ञानमयी वाणी, नारी के साहस और सामर्थ्य की अमर निशानी। नारी अबला नहीं, वह सृजन और सामर्थ्य की कर्ता है, उसके अधिकारों का सम्मान ही संस्कृति का सम्मान है। ====3==== शिक्षा मिले, सुरक्षा मिले, स्वतंत्रता का अधिकार मिले, हर बेटी को आगे बढ़ने के समान अवसर मिले। नारी केवल प...

ईश्वर में भी मातृशक्ति को बराबरी का दर्जा देता है हिंदुत्व — अरविन्द सिसोदिया

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ईश्वर में भी मातृशक्ति को बराबरी का दर्जा देता है हिंदुत्व — अरविन्द सिसोदिया भारतीय सभ्यता की पहचान केवल उसके प्राचीन ग्रंथों, मंदिरों और अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है; बल्कि उसकी वास्तविक पहचान उस जीवन-दृष्टि से होती है, जिसमें मनुष्य, प्रकृति, परिवार, समाज और सृष्टि को परस्पर संबद्ध एवं एकात्म माना गया है। इस व्यापक दृष्टि में स्त्री केवल परिवार की एक सदस्य नहीं है। वह जीवन की सहयात्री, ज्ञान की साधिका, सृजन की शक्ति, परिवार की धुरी और समाज की चेतना है। भगवान शंकर और भगवती भवानी के एकीकृत स्वरूप ‘अर्धनारीश्वर’ की संकल्पना इसकी सच्ची और सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुति के रूप में अनादिकाल से स्थापित है, जो वैज्ञानिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण प्रतीक है। यूँ तो संपूर्ण पृथ्वी की सभ्यताएँ परिस्थितियों से मुकाबला करते हुए, अपनी-अपनी व्यवस्थाओं का निर्माण करते हुए आगे बढ़ी हैं। इसलिए समयानुकूल व्यवस्थाओं में भेद हो सकते हैं और स्थिति-परिस्थिति के अनेक स्वरूप हो सकते हैं। किन्तु विश्व की अन्य समकक्ष सभ्यताओं के मुकाबले भारतीय संस्कृति की सनातन हिंदू सभ्यता में नारी की स्थिति हमेशा ...