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जून, 2010 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

सरकार सामूहिक विवाह सम्मेलनों को सहयोग करें

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सामूहिक विवाह सम्मेलनों को सरकार , कर्तव्य और उत्सव के रूप में  आयोजित  करे . - अरविन्द सिसोदिया   यूँ तो आवश्यकता अविष्कार कि जननी होती हे , सामूहिक विवाह सम्मलेन भी इसी  कि उपज हे . सरकार के स्तर पर सामूहिक विवाह सम्मेलनों को सहयोग कि बात मुझे जहाँ तक ध्यान आती हे वह नाम भैंरो सिंह शेखावत  का आता  हे वे राजस्थान  के मुख्यमंत्री थे . जनता को सरकारी खजाने से पैसा मिलने का काम भी १९७७ में आई जनता सरकार से ही प्रारंभ हुआ हे , उससे पहले तो सरकार जनता से पैसा लेना ही जानती थी . देना नही जानती थी . बड़ती महंगाई  के कारण जातीय पंचायतों और संगठनों ने कुछ धन वर-वधु के आभिभाव्कों से और कुछ धन समाज के सम्पन्न लोगों से लेकर  यह कार्य प्रारंभ किया था जो बहुत ही तेजी से सम्पूर्ण समाज में फैल गया . पिछड़ी जातियों और गरिवों के नाम पर बाद में सरकारें भी जुडी  .     - सामूहिक   विवाह सम्मलेन को प्रोत्सहान   देने कि आवश्यकता हे , सरकारी सहयोग राशी भी बडानी चाहिए , इन्हें लोकप्रिय और व्यवहारिक बनने के लिए जिला पंचायतों को ही आगे करना चाहिए . केंद्र  सरकार को भी योगदान देना चाहिए , इसमें कमियां खो

जम्मू और कश्मीर - सेना को बहार करने की कोशिशें

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उमर अब्दुल्लाह-पाकिस्तानी मंसूबों कि बकालत .....!!!! - अरविन्द सिसोदिया मत भूलिए जम्मू और कश्मीर प्रान्त आज तक भारत का हिस्सा इसलिए  हे की वहां सेना अपनी जान पर खेल कर , अनगिनित बलिदानों से उसकी रक्षा कर रही हे . जम्मू - कश्मीर पार से जब धोके से पाकिसतानी सेना ने कवाईली  वेश में आक्रमण किया था , तब उसे भारत कि सेनाओं ने ही बचाया था , भारतकी और से पहुची सेना को उतरने के लिए हवाई पट्टी ठीक करने ने के काम को  संघ के स्वंय सेवक ने ही किया था . ईसकी रक्षा के लिए कई युद्ध हो चुके हें , हजारों सैनिकों के बलिदान से , इसकी रक्षा हो रही हे . मत भूलिए कि कश्मीर में एक भी मुसलमान नही था , हर बच्चा भोले शंकर का पुजारी था , हर बेटी कि माता पार्वती जी थीं . गलत हाथों में राज चले जाने से , सबको जबरिया मुसलमान बनाया गया . आज वे चाहते हें कि कश्मीरी बन कर ही रहें तो उन्हें जबरिया पाकिस्तानी बनाने पर तुलें हें . यदि जरा सी ईमानदारी हे और जरा भी पुरुषार्थ हे तो उनकी सच्ची रक्षा कि जाये   . यह रक्षा आम व्यक्ति नही सेना ही कर सकती हे वही करेगी . कश्मीर में सेना से दिक्कत सिर्फ पाकिस्तान  को हे , उसका ब

महंगाई का महाघोटाला

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प्रश्न  यह हे की प्रधानमंत्री किसका ..? महंगाई के महाघोटाले बाजों का !   - अरविन्द सिसोदिया जनता का या मतदाताओं   का या य़ू पी ए गठ बंधन का या कांग्रेस पार्टी का या  सोनिया  गाँधी का , या अमरीकी हितों का , या बहूराष्ट्रिय कंपनियों का , या जमाखोरों का , तेजड़ियों का , स्वंय प्रधानमंत्री ही बता सकते हें की वे किन किन के प्रधानमंत्री हें ! इस समय जो  हालात हें उनमें तो प्रधानमंत्री जी जनता और मतदाताओं से तो कह नही सकते की वे उनके हें !!  सरकार  मंहगाई  के सच को कब मानेगी यह तो वह ही जाने . मगर अब आम आदमी का जीना मुहाल  हो रहा हे महंगाई के कई कारण गिनाये जा सकते हें , मगर सच यह हे की किसी को चिंता ही नही हे की महंगाई क्यों हे.   एक प्रधान मंत्री था अटल विहारी वाजपेयी , जिसके शासन में एक बार आलू प्याज का दाम क्या बड़ा , उन्होंने एसी महंगाई की नकेल कसी की उनके ६ साल के शासन में कभी  भी महंगाई ने दाम बडाने  का नाम नही लिया , ज्यादा वक्त नही सिर्फ ६ साल पहले की ही बात हे , इन ६ सालों में कही कोई तुफान नही आया हे जो महंगाई इतनी सुरसा हो गई की उसमें देश का प्रधान मंत्रिम तक समां जा

महान वीरांगना दुर्गावती

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महान वीरांगना महारानी दुर्गावती  ने , देश की अस्मिता और स्वतंत्रता के लिए लड़ा था महा संग्राम - अरविन्द सिसोदिया चंदेलों कि बेटी थी , गोंडवाने  कि रानी , चंडी थी-रणचंडी थी , वह दुर्गावती भवानी  थी . भारत की नारियों ने देश की अस्मिता और स्वतंत्रता के लिए हमेशा ही यशस्वी  योगदान दिया है । महारानी दुर्गावती , मध्यप्रदेश की विलुप्त ऎतिहासिक धरोहर की महान यशोगाथा हे , वे  साहस और पराक्रम रहीं . . उनकी वीर गाथा महारानी लक्ष्मी बाई जितनी  प्रसिद्ध नही हुई , मगर  उनका वीरोचित व्यवहार लक्ष्मी बाई से कम नही था .य़ू तो दो महान बिभुतियों में तुलना नही की जाती ,  यह विवाद का प्रश्न भी नही हे कि किसको प्रशिधि अधिक मिली और किसको नही मिला . लक्ष्मी बाई को प्रसिधी का एक कारण  जबलपुर कि ही बहू सुभद्रा कुमारी चोहान कि  झाँसी की रानी कविता को भी जाता हे  , चमक उठी सन सत्तावन में, वह तलवार पुरानी थी, बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।। जिसने उनकी यशोगाथा  को शिखर तक पहुचाया हे . उनकी सडक दुर्घटना में निधन होने से , बहु

वंदे मातरम - बंकिमचन्द्र - स्वतंत्रता का महामन्त्र

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- शत शत नमन ,बंकिम - अरविन्द सिसोदिया कुछ  तो कहानी छोड़ जा , अपनी निसानी छोड़ जा , मोशम  बीता  जाये , जीवन बीता  जाये . यह गीत संभव  दो बीघा जमीन का हे . मगर सच यही हे की , काल चक्र की गती नही रूकती,  एक थे बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय , उनका निधन हुए भी काफी समय हो गया मगर वे हमारे बीच आज भी जिदा हें . क्यों की उन्होंने एक अमर गीत की रचना की जिसने भारत को नई उर्जा दी और देश की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई .जो रग रग  में जोश भर देता हे . जब भी कोई सैनिक जीत दर्ज कर्ता हे तो वो जन गण मन नही कहता , वह  वन्दे मातरम का जय घोष करता हे .    यही  वह गीत था वन्दे मातरम .जो स्वतंत्रता  का महामन्त्र बना .इसे उन्होंने आनद मठ  नामक उपन्यास में लिखा था .., यह उपन्यास बंगदर्शन में किस्तों में छपा था . लेकिन जब १८८२ में यह पुस्तक रूप में छपा तो तुरंत ही बिक गया , लगतार इसके कई  संस्करण  छपे , उनके जीवन काल में ५ बार यह छप चुका था . उनका जन्म २६ जून १८३८ में हुआ था ,उन्होंने कई उपन्यास लिखे मगर उन्हें अंतरराष्ट्रीय ख्यति इसी आनद मठ  के वन्दे मातरम  से मिली ..,  यह उपन्यास भार

कांग्रेस का शासन,महंगाई का दुशासन ! कांग्रेस को वोट देने की सजा !!

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कांग्रेस का असली चेहरा बेनकाब  , गरीव की गर्दन पर कांग्रेस कहत , जनता से जुल्म और कंपनियों को फायदा - अरविन्द सिसोदिया विश्व बाजार में पिछली साल कच्चे तेल के भाव १४० डालर प्रति बैरल थे तब पेटोलियम पदार्थ के मूल्य बाजार आधारित नही किये , अब  जब की मात्र ७७/८० डालर हे तब भाव बडाना सिर्फ आम भारतीय के प्रति द्वेषता ही कहा  जायेगा, कांग्रेस को वोट देने की सजा यह देश भुगत रहा हे . यह मूल्यवृद्धि सिर्फ एक आम भारतीय को प्रभावित कर रही हे . जो समपन्न वर्ग हे उसे इस से कोई फर्क नही पड़ता .  .   कांग्रेस का शासन ,महंगाई का दुशासन ! कांग्रेस का महंगाई ज्वालामुखी रोज रोज ही फटने लगा ...! अघोषित  आर्थिक आपातकाल मार ही डाला इस महंगाई   ने , ईस्ट इण्डिया कंपनी की तरह लूट . भारत को सोमालिया बनाने की साजिस . देश की जनता को गरीव करने का षड्यंत्र , अब दाल रोटी खाओ  प्रभु के गुण गाओ का जमाना गया .  अब तो वह जमाना आया हे की ....., जो कुछ बचा तो महंगाई मार गई महंगाई मार गई ..  ! क्या आप जानते हें की भारत में करोडपति या इससे उपर कितने हें ? सिर्फ १ लाख २५ हजार ?? बांकी कुछ मध्यम वर्ग और लगभ

काला आपातकाल - सतत सतर्कता ही स्वतन्त्रता का मूल्य हे

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हम वीरों की संतानें हें , यही हमारी थाती हे ! - अरविन्द सिसोदिया सतत सतर्कता ही स्वतन्त्रता का मूल्य हे , ये शब्द सिर्फ स्मरणीय वाक्य ही नही हें .  मानव जीवन के लिए ध्येय पथ भी हे . इसके बिना आप अपना स्वभिमान और सम्मान भी खो  देते हें . आज विश्व में हमारा जो सम्मान हे उसका कारण यह भी हे की हम वह जाग्रत लोग हें जो अपनी गुलामी  के खिलाफ हजारों साल से लगातार संघर्स करते हुए आजादी प्राप्त करने का सामर्थ्य रखते हें , नव स्वतंत्र देशों में से ज्यादातर देश अपनी लोकतंत्र व्यवस्था को खो चुके हें , मगर हमारा लोकतन्त्र मात्र १८ महीने की कैद  के साथ ही फिरसे स्वतंत्र हो गया !    हलांकि हम एक सनातन राष्ट्र हें हमारी राष्ट्रिय आयु अनंत हे , कुल मिला कर विश्व की प्रथम सभ्यता से हमारा अस्तित्व हे , किन्तु हमारी  गुलामी से मुक्ति और नई स्वतन्त्रता के साथ जीवन का शुभारंभ १५ अगस्त १९४७ से माना जाता हे , हमारी नागरिक आजादी के  अपहरण का एक दोर   गुजर चुका , जिसे  संघर्ष और सोभाग्य  से  बाद में हटा दिया गया .  . उस काल खंड ( २५/२६  जून १९७५  की रात्रि से २१ मार्च १९७७ ) को हम  काला आप

डाउ केमिकल्स ने,भारत और प्रणव दा का अपमान किया

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भारत और प्रणव दा  का अपमान किया डाउ केमिकल्स ने ....! समुद्री जीवों से भी गये गुजरे भारतीय  ....!! भारत सरकार सरकार हे या अमरीकी गुलाम ...!!! -- अरविन्द सिसोदिया समुद्री जीवों से सस्ते भारतीय हें , अमरीकी नजर में -- - मेक्सिको की खाड़ी में ब्रिटिश पेट्रोलियम के तेल कुएं में विस्‍फोट से 11 कर्मचारियों की मौत हो गई और समुद्र में तेल का रिसाव शुरू हो गया। करीब दो महीने से रिसाव जारी है। इससे अब तक 597 पक्षियों, 243 कछुओं और 31 दूसरे समुद्री जीवों की मौत हो गई है। 30 डॉल्फिन की मौत की बात भी कही जा रही है । रिसाव के चलते अमेरिका ने तुरंत 2 अरब डॉलर के नुकसान का अनुमान लगा लिया और ब्रिटिश पेट्रोलियम पर दबाव बना कर एक अरब डॉलर हर्जाना भरने के लिए उसे राजी भी कर लिया लिया। कंपनी समुद्र तटों की सफाई पर एक अरब डॉलर खर्च भी कर चुकी है। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने ब्रिटिश पेट्रोलियम को यह कहते हुए आड़े हाथों भी लिया कि यहां पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है और कंपनी अपनी छवि सुधारने के लिए विज्ञापन पर पैसे उड़ा रही है। 25 साल पहले भोपाल में अमेरिकी कंपनी यूनियन कार्बाइड की भारतीय ईकाई य

डा. श्यामाप्रसाद मुखर्जी - राष्ट्रहित पर पहला बलिदान

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राष्ट्रहित पर पहला बलिदान - अरविन्द सिसोदिया लाखों भारतवासियों  के प्रेरणा पुंज और पथ प्रदर्शक ,   डा. श्यामाप्रसाद मुखर्जी महान शिक्षाविद, चिन्तक और भारतीय जनसंघ के संस्थापक थे, जो की भारतीय जनता पार्टी का प्रारंभिक नाम था  । भारतवर्ष की जनता उन्हें एक प्रखर राष्ट्रवादी के रूप में स्मरण करती है  । राष्ट्र सेवा की प्रतिव्धता में  उनकी मिसाल दी जाती है . एक प्रखर  राष्ट्र भक्त के रूप में, भारतीय इतिहास उन्हें सम्मान से स्वीकार करता है , उनका बलिदान स्वतंत्र भारत में राष्ट्रहित पर पहला बलिदान था , आज जो जम्मू और कश्मीर भारत का अंग हे वह उनके ही संघर्ष के कारण हे , उनके बलिदान के कारण हे .  भारतीय राजनीती में उन्होंने , एक जुझारू, कर्मठ, विचारक और चिंतक के रूप में, भारतवर्ष के करोड़ों  लोगों के मन में उनकी गहरी छबि अंकित है, वे एक निरभिमानी देशभक्त थे । बुद्धजीवियों और मनीषियों के वे आज भी आदर्श हैं  जब तक यह देश रहेगा तब तक उन्हें सम्मान के साथ २३ जून को हमेशा याद किया जायेगा ! - डा मुखर्जी देश के विभाजन के खिलाफ थे , उनकी धरना थी की जब हमारी सांस्क्रतिक प्रष्ठभूमि एक हे थो दो ट

अफजल को फ़ांसी , विनय कटियार के दबाव में

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अफजल को फ़ांसी , विनय कटियार के दबाव में - अरविन्द सिसोदिया अफजल गुरु जेसे आतंकवादी कांग्रेस के घरजमाई शीर्षक से १८-५-२०१० को में ने इसी  ब्लॉग पर अपनी  पोस्ट  लिखी थी , - भाजपा ने अम्बेडकर नगर जिले में आगामी 25 जून को ‘जागो जनता रैली’ आयोजित की है। रैली के लिए छपे एक पोस्टर में पूछा गया है कि संसद पर हमला करनेवाला अफजल गुरु किसका दामाद है, कांग्रेस का ? - कांग्रेस इस पर भड़की हुई हे , उसने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए , इसे दिमागी दिवालिया पन कहा हे . सच यही हे की भारत की जनता में दिमाग हे वह सहनशील हे उसमें धर्म  निरपेक्षता हे वह अपने से बड़ कर दूसरे को सम्मान देती हे ,  इसी  कारण से ही कांग्रेस हे ! इसी कारण से चाहे जो कहने वाले लोग हें , इस जनता ने जब भी  दिमागी दिवालिये पन से अपना हित  सोचना शिरू कर दिया उसी  दिन से पाखंड की राजनीती सुधर जायेगी.., लोग भारत में रहकर भारत का बुरा करना भूल जायेंगे, हिन्दुओं की सहनशीलता को उनकी कमजोरी मत मनो वह भी क्रोध में आ सकता हे , - में पूर्व संसद विनय कटियार को धन्यवाद दूंगा की उनने बजनदार  ढंग से देशा हित की बात उठाई , कांग्रेस अन्दर तक 

डाऊ केमिकल्स से हमदर्दी क्यों....?

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सरकार की कोशिश , इतना पैसा मुंह पर मार दो की कोई चिल्लाये नही....!!! सबाल  गाँधी परिवार की साख का हे ...!!!   - अरविन्द सिसोदिया भोपाल गैस नरसंहार के मामले में गठित भारत सरकार के मंत्री मंडलीय समूह ने सोमबार को एक सिफारिस सोंपी   हे , जिस में  कोशिश की गई हे की इतना पैसा  मुंह  पर मार दो की कोई चिल्लाये नही ! 1500 करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा को प्रधानमंत्री मंत्री मंडल की केबिनेट  बैठक में रखेंगे और स्वीक्रति भी मिलाना तय हे . मगर कही भी यह नही बताया गया की यह पैसा वे दोषी कंपनी से वसूलेंगे  की नही ! गैस कांड पर पुनर्गठित मंत्री समूह (जीओएम) के द्वारा दी गई सिफारिशों से अधिकतर पीड़ित लोग और त्रासदी में न्याय की मांग कर रहे सातों एनजीओ भी संतुष्ट नहीं दिख रहे हैं। प्रभावितों का कहना है कि सरकार द्वारा दिये गये फैसले में केवल खानापूर्ति ही की गई है। सरकार वास्तव में भोपाल गैस से पीड़ित लोगों के प्रति सहानुभूति का तो दिखावा कर रही हे, वह वास्तव में तो अमरीकी  एंडरसन और डाउ केमिकल्स के प्रति बचाव का रुख अपना रही है। क्यों की इस मंत्री समूह में कम से कम कमलनाथ तो इनके शुभ चितक के तोर

नीतीश धोखेबाज - लालूप्रसाद यादव

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नीतीश धोखेबाज - लालूप्रसाद यादव आपदा राहत मद में मिले करो़डों रूपए दबाकर रख गए - लालूप्रसाद यादव  -- अरविन्द सिसोदिया राष्ट्रीय  जनता   दल प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने बिहार के मुख्य मंत्री नीतीश कुमार पर हमला बोल दिया और उन्हें धोखेबाज बताते हुए कहा,मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष में गुजरात का भेजा हुआ पैसा बिना खर्च हुए दो साल तक कैसे प़डा रह गया। कहीं इसका यह तो मतलब नहीं कि आपदा राहत मद में मिले करो़डों रूपए दबाकर रख गए और बाढ़ पीडितों को कहा गया कि केंद्र सरकार से राहत मद में मांगी गई राशि नहीं मिली इसलिए पुनर्वास का काम नहीं हुआ। भाजपा कोई चींटी नहीं है कि उसे कोई रग़ड सके, यह नौटंकी बंद होनी चाहिए। नरेंद मोदी और वरुण गाँधी दोनों को बिहार जा कर रोज  ८ से १० सभाएं करनी चाहिए .  भारत कोई नितीश का गुलाम थोड़े ही हो गया हे , वे बिहार के स्वामी  भी नही हें , लालू प्रशाद यादव ने भी एल के आडवानी को गिरिफ्तर किया था , पूरा देश उनके साथ खड़ा हुआ था . आज लालू जी कहाँ हें और आडवानीजी कहाँ हें , जो भी हो, अब लगता यहीं है कि बिहार में भाजपा-जदयू गठबंधन सरकार के दोनों घटक दल यहां तीन-चार महीने

बिहार में बड़ी आग हे , नीतीशजी झुलस मत जाना !

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बिहार में बड़ी आग हे , नीतीशजी झुलस मत जाना ! --अरविन्द सीसोदिया   राजनीती में न तो दया क़ी जरूरत हे नही अपनेपन  क़ी , गद्दी के लिए बाप को जेल में ड़ाल दिया जाता हे और भाई  को मार दिया जाता हे , भा जा पा ने भले ही ज्यादा विधायक  होते हुए भी नितीश को अपना नेता बना दिया था मगर  नितीश ने गद्दी पर बैठते ही भा जा पा को ख़तम करने क़ी जैसे कसम खाई हो , इस तरह के काम किये जिससे भा जा पा को नुकसान हो , उनकी छबी को ठेस पहुचे . भा जा पा को , अपनी अलग पहचान बना कर आगे चलना   चाहिए था जो उसने नही किया . न जाने क्यों अलग पहचान बनाने  से डरते हें जबकि अलग पहचान, ही दल को सुरक्षित रखती हे . .    निताश कुमार के मन में लगातार खोट था , मगर बी जे पी को टालने क़ी अदातसी पड गई हे , लोकसभा चुनाव के बाद यह खुलाशा  सामने आ चुका  था क़ी  नितीश कांग्रेस के करीब जा रहे हें , मगर बीजेपी सहयोगी दलों के साथ नतमस्तक हो जाती हे मानों उनकी अटकी हो ,  इस का फायदा सहयोगी दल उठाते हें , दल को कठोर  और स्पष्ट रवैया सहयोगी दलों  के सामने रखना  चाहिए ,  एक नही आनेक  वार यह हो चूका हे क़ी जो, बी जे पी से मदद लेता हे वही