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Note on Article 370 : Jammu Kashmir Study Center

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Note on Article 370 ( Jammu Kashmir Study Center) Omar Abdullah Tweet-   “ Mark my words & save this tweet - long after Modi Govt is a distant memory either J&K won't be part of India or Art 370 will still exist.” Comments - The Statements given by Omar Abdullah and Mehbooba are anti National and an insult to the Union Constitution and its makers. The authors of Constitution of India have kept Article 370 as a Temporary Provision. Even Title of the Article is written in the Union Constitution of India – “ Temporary provisions with respect to the State of Jammu and Kashmir”   Even during the debate on Draft Article 306A (which was renumbered as 370 in original Constitution), Goapala Swami Ayyahngar have clearly stated that the Article 370 is not a permanent feature. So, if one will go by tweet of the Hon’ble Chief Minister of the State of Jammu Kashmir – Did Constitution Makers want to break this country by declaring the Article 370 as Temporary Article?  

संघ का करारा जवाब:जम्मू-कश्मीर भारत का ही अंग रहेगा

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- अरविन्द सिसोदिया, जम्मू और कश्मीर युगों युगों से भारत का अभिन्न अंग है। इस पर सैंकडों हिन्दू राजाओं , महाराजाओं का शासन रहा है। विदेशी आक्रांताओं ने जबरिया वहां के हिन्दुओं का धर्मान्तरण किया है। अब्दुल्लाह परिवार हमेशा से गद्दार रहा है, उसे समय समय पर सबक सिखाया जाता रहा है। अनुच्छेद 370 अस्थाई धारा है इसका अस्तित्व स्वतः ही समाप्त प्रायः है। इस धारा से जम्मू कश्मीर के लोगों को आजादी मिलनी चाहिये। कोई ताकत नहीं जो इस प्रांत को भारत से अलग कर सके। जम्मू-कश्मीर भारत का ही अंग रहेगा : संघ अनुच्छेद 370 विवाद पर उमर को संघ का करारा जवाब Wednesday,May 28,2014 http://www.jagran.com/news/national-rss-attacks-on-omar-abdullahs-view-on-article370-11350200.html नई दिल्ली। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में राज्यमंत्री का पदभार संभालने के बाद डॉ. जितेंद्र सिंह के अनुच्छेद 370 पर दिए बयान पर विवाद बढ़ गया है। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने कहा है कि अनुच्छेद 370 रहे न रहे, जम्मू-कश्मीर हमेशा से

मोदी सरकार का पहला बड़ा फैसला, रि‍टेल में एफडीआई नहीं

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मोदी सरकार का पहला बड़ा फैसला, रि‍टेल में एफडीआई से इनकार dainikbhaskar.com|May 27, 2014, http://business.bhaskar.com नई दि‍ल्‍ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टीम की ओर से पहले दि‍न पहला सबसे बड़ा फैसला सामने आया है। नई वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि अभी मल्टी-ब्रांड रिटेल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को आने का सही वक्त नहीं है। अगर मल्टी-ब्रांड रिटेल में एफडीआई लाया जाता है तो किसानों को नुकसान होगा। मोदी के मंत्रि‍यों ने यह मान कि‍या है कि‍ देश की अर्थव्‍यवस्‍था मुश्‍कि‍ल वक्‍त में हैं, ऐसे में कमान संभालना आसान नहीं होगा। आइये हम आपको बताते हैं कि‍ मोदी सरकार की इस कैबि‍नेट ने जनता से क्‍या कहा। वि‍त्‍त मंत्री – अरुण जेटली वित्त मंत्री अरुण जेटली ने महंगाई कम करने का वादा किया है। अपना पदभार ग्रहण करने के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था मुश्किल दौर से गुजर रही है। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था के सामने चुनौतियां स्पष्ट हैं। विकास को फिर से पटरी पर लाने, महंगाई को रोकने और राजकोषीय मजबूती पर जोर होगा। अरुण जेटली ने कहा कि उन

नरेंद्र मोदी मंत्रिमंडल, मंत्रियों की सूची और उनके विभाग

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नरेंद्र मोदी मंत्रिमंडल,  मंत्रियों की सूची और उनके विभाग ज़ी मीडिया ब्‍यूरो/बिमल कुमार http://zeenews.india.com नई दिल्‍ली : देश के 15वें प्रधानमंत्री बने नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में शामिल मंत्रियों के विभागों का आधिकारिक ऐलान मंगलवार सुबह कर दिया गया। गौर हो कि मोदी मंत्रिमंडल में राजनाथ सिंह, अरुण जेटली, सुषमा स्‍वराज, नितिन गडकरी, एम वेंकैया नायडू, शिवसेना के अनंत गीते समेत 45 मंत्री शामिल किए गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ सोमवार को शपथ ग्रहण करने वाले मंत्रियों के विभागों का बंटवारा मंगलवार को कर दिया गया है। मंत्रियों की सूची इस प्रकार है : प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी): कार्मिक, लोक शिकायत व पेंशन, आणविक ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग। अन्य महत्वपूर्ण नीतिगत विभागों तथा मंत्रालयों का बंटवारा किसी मंत्री को फिलहाल नहीं किया गया है। मंत्रियों के नाम और उनके विभाग कैबिनेट मंत्री: राजनाथ सिंह : गृह मंत्रालय सुषमा स्वराज : विदेश मंत्रालय, प्रवासी भारतीय मामलों का मंत्रालय अरुण जेटली : वित्त, कॉरपोरेट मामला, रक्षा मंत्रालय एम वेंकैया नायडू : शहरी व

यूटर्न : केजरीवाल बॉन्ड भरने को तैयार

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 केजरीवाल की जेल यात्रा प्रकरण ने साबित कर दिया की  उनकी समझ दिमागी दिवालियेपन  की स्थिति में है । एक  तरफ अपने आप को आम आदमी की पार्टी कहते हैं , बनाते संविधान के ऊपर हैं ।  हाई कोर्ट से भी केजरीवाल को झटका  अरविंद केजरीवाल बॉन्ड भरने को तैयार एजेंसियां | May 27, 2014 नई दिल्ली http://navbharattimes.indiatimes.com दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक अरविंद केजरीवाल को दिल्ली हाई कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली। केजरीवाल की अर्जी पर दिल्ली हाई कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई करते हुए कहा कि उन्हें पर्सनल बॉन्ड भरना ही होगा। इसके बाद अरविंद केजरीवाल इस फैसले को मानते हुए पर्सनल बॉन्ड भरने के लिए तैयार हो गए हैं। उनके वकील प्रशांत भूषण ने हाई कोर्ट को जानकारी दी है कि अरविंद केजरीवाल बॉन्ड भरने के लिए तैयार हैं। प्रशांत भूषण ने साथ ही यह भी बताया कि बॉन्ड भरना एक फिजूल की प्रक्रिया है, जिसकी वजह से लाखों लोग जेलों में बंद रहते हैं और अदालतों का भी वक्त बर्बाद होता है, इसलिए हाई कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई के लिए हामी भर दी है। उन्होंने कहा, 'अरविंद

नरेंद्र मोदी राष्ट्राध्यक्ष के रूप में ए-1 वीजा के पात्र होंगे - अमेरिका

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ओबामा ने दी मोदी सरकार को बधाई, नई सरकार के साथ काम करने को लेकर उत्सुक Bhasha मई 26, 2014 http://khabar.ndtv.com/news वॉशिंगटन: भारत के 15वें प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी के शपथ लेने पर अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने बधाई देते हुए कहा है कि रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए वह नए नेता के साथ काम करने के लिए उत्सुक हैं। व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव जे कार्नी ने कहा, 'राष्ट्रपति ओबामा भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नई भारतीय सरकार को उनके शपथ-ग्रहण पर बधाई देते हैं।' कार्नी ने कहा, 'चुनाव के बाद अपनी बातचीत में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री जिस तरह सहमत हुए थे, दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों के रूप में भारत और अमेरिका गहरे रिश्ते और अपने लोगों तथा दुनिया भर के लिए आर्थिक अवसर, स्वतंत्रता एवं सुरक्षा को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता साझा करते हैं।' प्रेस सचिव ने एक बयान में कहा, 'हम नई सरकार के साथ करीबी से काम करने को लेकर उत्सुक हैं ताकि आने वाले सालों में अमेरिका-भारत रणनीतिक नेतृत्व को मजबूत किया जा सके और उनका प्रसार किया जा सके।

मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेस - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

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मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेस।' बदल दी सरकार की परिभाषा, संगठन की परंपरा Tuesday,May 27,2014 त्वरित टिप्पणी/प्रशांत मिश्र http://www.jagran.com/news भाजपा में एक नए युग की शुरुआत के साथ ही सरकार और पार्टी की प्रकृति और परंपरा भी बदलने लगी है। यह तय हो गया है कि अब न तो सरकार पुराने ढर्रे पर चलेगी और न ही पार्टी। दोनों एक दिशा में एक साथ बढ़ेंगे और संभवत: भाषा भी एक ही होगी। पिछले कुछ महीनों में जज्बे को जुनून बनाकर ऐतिहासिक जनादेश लाने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शपथग्रहण के साथ ही भाजपा और जनसंघ की तीन पीढि़यों की आस और परिश्रम को पूरा कर दिया। खास बात यह थी कि जब भाजपा और बहुत हद तक कांग्रेस ने भी व्यवहार और सिद्धांत में गठबंधन की सरकार को सच मान लिया था, मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने यह दिखा दिया जनता बहुमत की पार्टी वाली सरकार चाहती है। बशर्ते उसे पार्टी और नेतृत्व पर भरोसा हो। इसके साथ कई समीकरण बदल गए हैं। बदलाव पिछले चार-पांच दिनों में ही दिख गया है। पार्टी और सरकार को भी यह स्पष्ट हो गया कि मोदी 'नो नान्सेंस और जीरो टालरेंस' के सिद्धांत पर

क्यों महत्वपूर्ण है नरेंद्र मोदी की पहल

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नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के  स्वयंसेवक हैं , यह राष्ट्रवादी संगठन अखंड भारत की साधना करता है , आज की जो परिस्थिती में , दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (दक्षेस)  ही अखण्ड भारत का स्वरूप है । दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (दक्षेस) को बुलाया जाना नई, मगर अच्छी परंपरा भी है ।  एक नई सरकार के साथ पहले ही दिन से पड़ोसियों से अच्छे संबंध बनाने का मौका मिलाना भी है ! क्यों महत्वपूर्ण है मोदी की पहल हर्ष वी पंत, रक्षा विशेषज्ञ, किंग्स कॉलेज, लंदन http://www.livehindustan.com नरेंद्र मोदी के शपथ-ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (दक्षेस) के सदस्य राष्ट्रों के शासनाध्यक्षों को दिया गया न्योता एक अच्छी शुरुआत है। यह पहल बताती है कि भारत की नई सरकार दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय समीकरणों के अंदर समस्याओं के समाधान को लेकर गंभीर है। सच तो यह है कि भारत के दक्षिण एशियाई पड़ोसी देशों के नेताओं ने मोदी से संपर्क साधा है, जो नई सरकार के लिए एक अच्छा शगुन है। पाकिस्तान नई सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बना रहेगा। इस्लामाबाद की विदेशी नीति को आ

लूट की मानसिकता : जाते-जाते UPA गिफ्ट

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राजनीति में पहुँच  कर , सफल हो कर , धन वैभव की चकाचैंध से बच कर, सेवा करने का कौशल सोनिया गांधी के नृेतृत्व वाली सरकारों में देखने को ही नहीं मिला , जब देख तब लूट की मानसिकता ही सामने आई। जाते जाते भी अनैतिक नियुक्तियों और गैर जरूरी लोलुपता से इन्होने अपनी ही साख को बट्टा लगाया । जाते-जाते UPA ने अपने चहेतों को गिफ्ट में दिए बंगले और प्रमोशन एसपीएस पन्नू/कुमार गौरव [Edited By: मधुरेन्द्र सिन्हा] | सौजन्‍य: Mail Today | नई दिल्‍ली, 22 मई 2014 http://aajtak.intoday.in/story यूपीए सरकार का वक्त खत्म हो गया लेकिन यह गठबंधन जाते-जाते कई अनैतिक काम कर गया. सभी तरह की प्रशासनिक शिष्टता और राजनीतिक शालीनता को दरकिनार करते हुए कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार अपने वफादारों को सभी तरह के उपहार देती जा रही है. इनमें बड़े-बडे सरकारी बंगले, नियुक्तियां और तबादले तक हैं. उन्होंने किसी तरह के प्रतिबंध का पालन नहीं किया, चाहे वह चुनाव आचार संहिता हो या चुनाव में हार. अपने खास लोगों को पुरस्कृत करने का उसने कोई भी मौका नहीं छोड़ा. सरकारी दस्तावेजों से पता चलता है कि जब 16 मई को लोकसभा क

नरेंद्र मोदी : बापू जी को श्रद्धांजलि, अटल जी से आशीर्वाद

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बापू जी को श्रद्धांजलि, अटल जी से आशीर्वाद,  विदेशी मेहमानों का आना शुरू नई दिल्‍ली, एजेंसी 26-05-2014 10.00 बजे नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लेने लिए श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे दिल्ली पहुंचे। 9.50 बजे अभिनेता रजनीकांत के करीबी सूत्रों ने यह जानकारी दी कि वह नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल नहीं होंगे। रजनीकांत को समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया था। 9.00 बजे गुजरात भवन में मोदी से मिलने सबसे पहले उमा भारती पहुंचीं, उसके बाद रविशंकर प्रसाद, सुषमा स्वराज, राजनाथ सिंह, अरुण जेटली, निर्मला सीतारमन, नजमा हेपतुल्लाह, सदानंद गौड़ा, रामविलास पासवान, अनंत कुमार, डॉ. हर्षवर्द्धन, विजेंद्र गुप्‍ता और प्रकाश जावड़ेकर सहित भाजपा के कई बड़े नेता यहां पहुंचे। 8.30 बजे अटल बिहारी वाजपेयी से आशीर्वाद लेने के बाद मोदी गुजरात भवन पहुंचे। 8.15 बजे नरेंद्र मोदी बापू को श्रद्धांजलि देने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से मिलने उनके आवास पर गए और वहां उनका आशीर्वाद लिया। 8.00 बजे देश के 15वें प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ

देश को राजा नहीं, सेवक मिला : नरेंद्र मोदी

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देश को राजा नहीं, सेवक मिला : नरेंद्र दामोदरदास मोदी  http://www.panchjanya.com वह राजनीतिक नहीं हो सकता! गंगा आरती के जरिए काशी की समस्त जनता का कृतज्ञता ज्ञापन। संसद में प्रवेश से पूर्व सीढि़यों पर मस्तक नवाना। सेंट्रल हॉल में संबोधन के वक्त गले का रुंध जाना!! चूंकि इनमें से कोई भंगिमा विशुद्ध राजनीतिक नहीं इसीलिए राजनेता ज्यादा बौखलाए हुए हैं। राजनीति के बारे में सबसे दिलचस्प बात यही है कि यहां कहे से ज्यादा अनकहे की कीमत होती है। लोग वह समझना चाहते हैं जो बोला ही नहीं गया। खूब बोलने वाले का मौन पढ़ा जा रहा है। संस्कारों का सहज प्रकटीकरणए अपनी सांस्कृतिक पहचान को बेहिचक गले लगाना और भावनात्मक पक्ष की अकस्मात झलक यकीनन यह सब राजनीतिक नहीं हो सकता! और इसी वजह से राजनीतिज्ञ डरे हुए हैं। स्थापित छवि से एकदम उलट। सौम्य, मृदुल, निर्भीक। नरेंद्र दामोदरदास मोदी के व्यक्तित्व का यह पक्ष राजनेताओं की नींद हराम किए है। जो खुलकर भारतीयता को गले लगाता होए अपनी पहचान ना छिपाता हो उसे जनता का ऐसा प्यार-दुलार मिल सकता है! राजनीति के सेकुलर अथवा वामपंथी खेमों ने कभी ऐसी कल्पना भी नहीं की थी

सोमवार से शुरू होगा नरेंद्र मोदी राज : शपथ ग्रहण समारोह सोमवार को

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सोमवार से शुरू होगा नरेंद्र मोदी राज राष्ट्रपति भवन का विशाल प्रांगण कल शाम उन यादगार लम्हों का साक्षी होगा, जब नरेंद्र मोदी सैकड़ों देशी-विदेशी मेहमानों की मौजूदगी में देश के 15वें प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ग्रहण करेंगे। नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह के लिए राष्ट्रपति भवन तैयार http://khabar.ndtv.com नई दिल्ली: भारत के 15 वें प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी का शपथ ग्रहण समारोह, अतिथियों की सूची के लिहाज से राष्ट्रपति भवन में अब तक अयोजित सबसे बड़ा कार्यक्रम होगा, जिसमें दक्षेस देशों के नेताओं सहित 4,000 से अधिक लोग शरीक होंगे। यह पहला अवसर है जब राष्ट्रपति भवन में इतनी अधिक संख्या में लोग जुट रहे हैं, जहां अब तक हुए सबसे बड़े समारोहों, जैसे कि गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर होने वाले 'जलपान कार्यक्रम' में अधिकतम 1500 से 2,000 अतिथि शरीक हुए हैं। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की प्रेस सचिव ओमिता पॉल ने बताया कि 1990 में चंद्रशेखर और 1998 में अटल बिहारी वाजपेयी का शपथ ग्रहण समारोह राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में हुआ था और उनमें 1,200 से 1,300 अतिथि श

इतिहास : मोदी की कसौटी शुरू कर चुका है

यह लेख पढ़  कर , आपको लगेगा कि आलोचना के स्तर  पर नरेन्द्र मोदी जी को मीडिया किस कदर तौलने में लगा हुआ है , चिंतन मंथन विश्लेषण  चाहिए , कोई सारभूत बात आपको समझ आये तो अवश्य बताएं । इतिहास, मोदी की कसौटी शुरू कर चुका है जनसत्ता   /    कुमार प्रशांत http://www.jansatta.com नई दिल्ली। नरेंद्र मोदी के कंधों पर बैठ कर भारतीय जनता पार्टी ने जैसी ऊंचाई छूई है, उसका अनुमान किसे था! लेकिन भारतीय जनता पार्टी के नेताओं, संघ परिवारियों और उनके भोले विश्वासी साधारण कार्यकर्ताओं को यह याद दिलाने की, और बार-बार याद दिलाने की जरूरत है कि इतने सारे हंगामे, इतनी कटुता फैलाने और इतना उन्माद भड़काने (और इतनी बड़ी रकम फूंक देने के बाद भी, जिसका सही अनुमान कोई कभी नहीं लगा सकेगा! ) मोदी को सिर्फ इकतीस फीसद मतदाताओं का समर्थन मिला है। संसदीय लोकतंत्र का हमारा इतिहास बताता है कि 1957 से अब तक जितने भी चुनाव हुए हैं, उनमें सबसे कम मतदाताओं के समर्थन से बनी सरकार यही है। मोदी के पास अपने 282 सांसद ही हैं जो 1957 से अब तक किसी भी सरकार के सांसदों से कम हैं। जिस नेहरू-परिवार को मोदी (और उनकी सुन-सुन कर

ये है गुजरात का नरेन्द्र मोदी पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम

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ये है गुजरात का पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम, भूखा नहीं सोता कोई इंसान dainikbhaskar.com| May 21, 2014 http://business.bhaskar.com/article-bb/BIZ-ART-gujarat-public-distribution-system-is-the-best-model-4620895-PHO.html?seq=1 गुजरात में नरेन्द्र मोदी ने अपने कार्यकाल के दौरान सरकारी योजनाओं में कई ऐसे महत्पूर्ण सुधारों को लागू किया, जो पूरे देश के लिए एक मॉडल के तौर पर उभरा। ऐसा ही एक मॉडल देश में खाद्य सुरक्षा की गारंटी देने में कारगर है, जिसे गुजरात और छत्तीसगढ़ की सरकार ने प्रदेश की टार्गेटेड पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम को प्रभावी बनाने के लिए इजात किया। खाद्य वितरण प्रणाली की खामियों को दूर करने की मोदी सरकार की पहल की सराहना सुप्रीम कोर्ट और वर्ल्ड बैंक फूड प्रोग्राम ने भी की। इसके बाद 2011 में केन्द्र सरकार ने उसे एक प्रभावी मॉडल मानते हुए सभी प्रदेशों को भी इसे अपनाने की सलाह दी। केन्द्र सरकार ने कहा कि वह भी जल्द से जल्द गुजरात और छतीसगढ़ के मॉडल का अनुसरण करते हुए देश में खाद्य सुरक्षा गारंटी को सुनिश्चित करें। क्या हैं खाद्य वितरण प्रणाली में समस्याएं इस प्र

लोकतंत्र का गंगा स्नान

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अपनी बात लोकतंत्र का गंगा स्नान तारीख  17 May 2014 http://www.panchjanya.com बनारस के घाट पर गंगा की एक डुबकी भारतीय लोकतंत्र को इतना पावनए ऐसा सशक्त कर देगी किसने सोचा था! इस चुनाव के नतीजे सिर्फ नतीजे नहीं हैं। तीसरे मोर्चे का बंधा बंडलए वंचितों को महज वोट बैंक मानने वाले मंसूबों का ढेर और कुनबापरस्ती की उखड़ी हुई सांसें बता रही हैं कि देश में लोकतांत्रिक परिवर्तन का ऐसा तूफान गुजरा है जिसमें जाति और मजहब की राजनीति पर टिकी सत्ता के तमाम किले ढह गए। देश की नब्ज पर हाथ रखना, लोगों की चिंताओं को समझना और सामने रखना मीडिया का धर्म है। यही धर्म निभाते हुए पाञ्चजन्य ने देशव्यापी रायशुमारी पर आधारित अनूठा सर्वेक्षण किया था और वह मुद्दे सामने रखे थे जो देशभर के लोगों की चिंताओं में सबसे ऊपर थे। देश की राजनीति बदल रही है। समाज एकजुट हो रहा है, जनता विकास चाहती है। जनता को भरमाने, कुनबे की डुग्गी बजाने से काम नहीं चलेगा यह बात विमर्श के तौर पर सबके सामने थी। परंतु सेकुलर लबादा ओढ़े राजनीति करने वाली जमात भ्रष्टाचार ढंकने, राजनीतिक शत्रुओं का उत्पीड़न करने और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण

नरेंद्र मोदी से सीखने लायक पांच बातें

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ये हैं नरेंद्र मोदी से सीखने लायक पांच बातें,  विरोधी भी करते हैं इसकी तारीफ 1-आलोचनाओं से नहीं घबराएं मोदी की कामयाबी के सफर में आलोचनाओं को झेलने का उनका गुण काफी मददगार रहा है। विपक्षियों के अलावा खुद भाजपा के भीतर भी कई बार उनकी आलोचना हुई, मगर इससे घबराए बिना वह अपना काम करते रहे। पिछले साल सितंबर में जब उन्‍हें भाजपा की तरफ से प्रधानमंत्री पद का उम्‍मीदवार बनाया गया तो उनकी नाकामी की बात कहने वाले लोगों की कमी नहीं थी। कई लोगों ने कहा था कि वह मुसलमानों के लिए अभिशाप की तरह हैं तो वहीं कई ने यह भी कहा कि उनकी वजह से भाजपा को सहयोगी दल नहीं मिलेंगे और पार्टी मुसीबतों में घिर जाएगी। एक्‍सपर्ट्स और चुनावी विश्‍लेषकों ने भी मोदी की वजह से भाजपा को नुकसान पहुंचने की बात कही थी। मोदी को जब भाजपा के चुनावी अभियान का प्रमुख बनाया गया था तो कई विश्‍लेषकों ने कहा था कि भाजपा इस चुनाव में महज 160 सीटों पर सिमट जाएगी। लेकिन मोदी ने इन सब बातों से खुद को दूर रखा और सारा ध्‍यान मकसद पर केंद्रित रखा। इसी का नतीजा था कि कमान संभालने के तुरंत बाद उन्‍होंने पार्टी के लिए 272+ क