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जनवरी, 2018 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

मोदी : एक बेटी दस बेटों के बराबर होती है

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मन की बात ,जनवरी 2018 मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार |  2018 की यह पहली ‘मन की बात’ है और दो दिन पूर्व ही हमने गणतन्त्र पर्व को बहुत ही उत्साह के साथ और इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि 10 देशों के मुखिया इस समारोह में उपस्थित रहे | मेरे प्यारे देशवासियो, मैं आज श्रीमान प्रकाश त्रिपाठी ने NarendraModiApp पर एक लम्बी चिट्ठी लिखी है और मुझसे बहुत आग्रह किया है कि मैं उनके पत्र में लिखे गए विषयों को स्पर्श करूँ | उन्होंने लिखा है, 1 फरवरी को अन्तरिक्ष में जाने वाली कल्पना चावला की पुण्य तिथि है | कोलंबिया अन्तरिक्षयान दुर्घटना में वो हमें छोड़ कर चली गयीं लेकिन दुनिया भर में लाखों युवाओं को प्रेरणा दे गयी | मैं भाई प्रकाश जी का आभारी हूँ कि उन्होंने अपनी लम्बी चिट्ठी में कल्पना चावला की विदाई से प्रारम्भ किया है | यह सबके लिए दुःख की बात है कि हमने कल्पना चावला जी को इतनी कम उम्र में खो दिया लेकिन उन्होंने अपने जीवन से पूरे विश्व में, ख़ासकर भारत की हज़ारों लड़कियों को, यह संदेश दिया कि नारी-शक्ति के लिए कोई सीमा नहीं है | इच्छा और दृढ़ संकल्प हो, कुछ कर गुजरने का ज़ज्बा हो

संघ RSS : गणतंत्र दिवस परेड में

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जब प्रधानमंत्री श्री जवाहरलाल नेहरू ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को  1963 की गणतंत्र दिवस परेड में आमंत्रित किया था ।  राष्टीय स्वंयसेवक संघ की स्थापना 1925 में हुई मगर संस्थापक परम पूज्य डॉ. केशव बलीराम हेडगेवार बचपन से ही राष्ट्रवादी थे, स्वतंत्रता सेनानी थे , कांग्रेस में भी विभिन्न पदों पर कार्य किया था । जेल गए थे |  मगर कांग्रेस ने संघ को कभी पसंद नहीं किया और संघ की ही तरह का सेवादल नामक संगठन बनाया जो कभी चला नहीं ।  भारत विभाजन पर पूरा देश त्राहीमाम त्राहीमाम कर रहा था तब मात्र संघ ही वह संगठन था जो पाकिस्तान से आ रहे हिन्दुओं की चिन्ता कर रहा था और उन्हे बसानें में लगा था। पाकिस्तान से भारत आये सभी हिन्दुओं के  पुर्नवास का सबसे बडा चिन्तन और स्थापन कार्य संघ ने किया । आजादी के बाद संघ को उप प्रधानमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल  कांग्रेस का हिस्सा बनाना चाहते थे और प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू संघ को समाप्त कर देना चाहते थे। जवाहरलाल नेहरू की संघ विरोधी मानसिंकता ने ही संघ को जबरदस्ती महात्मा गांधी वध में घसीटा था जिसमें वह  निर्दोष साबित हुआ ।  संघ पर प्रतिबंध ने

पद्मावत का विरोध क्यों ?

पद्मावत का विरोध क्यों? इन पर भी ध्यान देना जरूरी .. - सुमन वर्मा की वाल से (1). दीपिका पादुकोण को रानी पद्मावती का पात्र क्यों दिया? जो आज साड़ी में है और कल बिकिनी पोज़ देगी। अगर कल महाभारत में Sunny Leone को द्रौपदी का पात्र दे तो कैसा रहेगा? (2). जो अलाउद्दीन खिलजी पांच फुटिया और बकरे जैसा दिखता था। उसे Six Pack physique में क्यों दिखाया जा रहा है? क्या ये इतिहास से छेडखानी नही? (3). Trailer में आप सभी ने देखा। राणा रतन सिंह, यानी शाहिद कपूर को Shirtless दिखाया। उसे बिना जनेऊ के दिखाया गया। क्या राणा रतन सिंह के माता पिता ने उनका उनपनयन संस्कार नही करवाया था? एक और छेडखानी। (4). इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि Movie में गोरा और बादल कर कोई किरदार है ही नही। और Movie में रानी पद्मावती रतन सिंह को लड़ कर नही भगा कर लेके आती है। माने राजपूत भगोड़े है? (5). भंसाली कहता है कि यह कहानी प्रेरित है असली किरदारों से कोई लेना देना नही। यदि असली कहानी पर ही बना देता, सही इतिहास के साथ तो क्या इसकी नानी मर जाति? यह एक सोची समझी साजिश है। इसे मनो वैज्ञानिक भाषा मे Subversion कहते है। बौद्धिक म

बसंत पंचमी : अरविन्द सिसौदिया

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22 जनवरी 2018  को बसंत पंचमी की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनायें! - अरविन्द सिसौदिया,जिला महामंत्री भाजपा कोटा ! देश भर में खासतौर से उत्तर भारत में बसंत पंचमी का त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है. बसंत पंचमी के दिन व‍िद्या की देवी सरस्वती का जन्म हुआ था इसलिए इस दिन सरस्वती पूजा का व‍िधान है.किसानों के लिए इस त्योहार का विशेष महत्व है. बसंत पंचमी पर सरसों के खेत लहलहा उठते हैं. चना, मसूर ,धनिया और गेहूं की बालियां ख‍िलने लगती हैं. इस दिन से बसंत ऋतु का प्रारंभ होता है. यूं तो भारत में छह ऋतुएं होती हैं लेकिन बसंत को ऋतुओं का राजा कहा जाता है. इस दौरान मौसम सुहाना हो जाता है और पेड़-पौधों में नए फल-फूल पल्लवित होने लगते हैं. इस दिन कई जगहों पर पतंगबाजी भी होती है. ------------------------------------- बसंत पंचमी 2018 :  इस खास समय में ऐसे करें मां सरस्वती की पूजा माघ माह की शुक्ल पंचमी को बसंत पंचमी का पर्व मनाया जाता है, यह तिथि वागीश्वरी जयंती और श्री पंचमी के नाम से भी जानी जाती है | माघ माह की शुक्ल पंचमी को बसंत पंचमी का पर्व मनाया जाता है. इस माह में गुप्त नवरात्रि भी म

महाराणा के 'प्रताप' से हिल उठा मुगल सिंहासन

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माई एहड़ा पूत जण, जेहड़ा राण प्रताप। अकबर सूतो ओधकै, जाण सिराणै साप॥ पुण्यतिथि विशेष:महाराणा के 'प्रताप' से हिल उठा मुगल सिंहासन जब-जब तेरी तलवार उठी, दुश्मन की टोली डोल गयी, फीकी पड़ी दहाड़ शेर की, जब-जब तूने हुंकार भरी। था साथी तेरा घोड़ा चेतक, जिस पर तू सवारी करता था थी तुझमें कोई खास बात, जो अकबर भी तुझसे डरता था॥ महाराणा प्रताप का नाम लेते ही मुगल साम्राज्य को चुनौती देने वाले एक महान वीर योद्धा का चित्र आंखों के सामने उभर आता है।  ज्येष्ठ शुक्ल तीज सम्वत् (9 मई 1540)  को मेवाड़ के उदयपुर में जन्मे महाराणा प्रताप का संपूर्ण जीवन त्याग, संघर्ष और बलिदान का एक परिचायक है। प्रताप संघर्ष के उस कठिन दौर में पैदा हुए, जब पूरे भारत पर मुगलों का शासन छाया हुआ था। महाराणा प्रताप 'महान' कहे जाने वाले मुगल सम्राट अकबर की ‘महानता’ के पीछे छिपी उसकी साम्राज्यवादी नीति के विरुद्ध थे, इसलिए उन्होंने उसकी अधीनता स्वीकार नहीं की। अकबर के साथ संघर्ष में महाराणा प्रताप ने जिस वीरता, स्वाभिमान और त्याग का परिचय दिया, वह भारतीय इतिहास में कहीं और देखने को नहीं मि

न्यायपालिका : अनेकों प्रश्नों के जबाव नहीं !

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अभिषेक मनु सिंघवी सीडी स्कैंडल (2012) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता अभिषेक मनु एक सनसनीखेज सीडी सामने आने के बाद सेक्स स्कैंडल में फंसे थे। सिंघवी के यहां ड्राइवर रह चुके एक व्यक्ति ने यह सीडी बनाई थी। सीडी में कथित तौर पर अभिषेक मनु सिंघवी सुप्रीम कोर्ट के लॉयर्स चैंबर में एक महिला वकील के साथ आपत्तिजनक पोजिशन में थे। ---------------------- - ओमपाल सिंह निडर ( की फेसबुक बाल से ) https://www.facebook.com/kaviompalsingh.nidar/posts/2013020972246855 देश की न्यायपालिका में बड़े गोरखधंधे का पर्दाफ़ाश, अदालतों की ये हकीकत जानकर हों जायेंगे हैरान...! . भारतीय न्याय व्यवस्था पर कई बार ऊँगली उठती रही है कि यहाँ इन्साफ मिलने में काफी लंबा वक़्त लगता है और आम इंसान को तो कई बार इन्साफ मिल ही नहीं पाता. अदालतों में करोड़ों केस पेंडिंग हैं, जो ना जाने कितने सालों से न्याय का इन्तजार कर रहे हैं. इस दुखद स्थिति का मुख्य कारण है न्यायपालिका का आम जनता की समस्याओं के प्रति गैर-जिम्मेदाराना रवैय्या और शीर्ष पदों पर कब्जा करे बैठे कई ऐसे जज जिन्हे राजनीतिक पार्टियों द्वारा पुरस्कृत कि

स्वामी विवेकानन्द : प्रेरक प्रसंग

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स्वामी विवेकानंद के ये 8 अनमोल विचार जीवन से दूर कर सकते हैं निराशा आज स्वामी विवेकानंद जी जन्मदिन हैं. उनके विचार आज भी प्रासांगिक बने हुए हैं. स्वामी जी के विचार किसी भी व्यक्ति की निराशा को दूर कर सकते हैं. उसमें आशा भर सकते हैं. प्रस्तुत हैं स्वामी जी के कुछ ऐसे ही विचार ... आज स्वामी विवेकानंद जी जन्मदिन हैं. उनके विचार आज भी प्रासांगिक बने हुए हैं. स्वामी जी के विचार किसी भी व्यक्ति की निराशा को दूर कर सकते हैं. उसमें आशा भर सकते हैं. प्रस्तुत हैं स्वामी जी के कुछ ऐसे ही विचार ... 1-उठो और जागो और तब तक रुको नहीं जब तक कि तुम अपना लक्ष्य प्राप्त नहीं कर लेते. 2-आप जो भी सोचेंगे. आप वही हो जाएंगे. अगर आप खुद को कमजोर सोचेंगे तो आप कमजोर बन जाएंगे. अगर आप सोचेंगे की आप शक्तिशाली हैं तो आप शाक्तिशाली बन जाएंगे. 3-एक विचार चुनिए और उस विचार को अपना जीवन बना लिजिए. उस विचार के बारे में सोचें उस विचार के सपने देखें. अपने दिमाग, अपने शरीर के हर अंग को उस विचार से भर लें बाकी सारे विचार छोड़ दें. यही सफलता का रास्ता हैं. 4-एक नायक की तरह जिएं. हमेशा कहें मुझे कोई डर नह

शिव-भाव से जीव-सेवा करें : प्रधानमंत्री मोदी : मन की बात

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मन की बात ,31 दिसंबर 2017 मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार | ‘मन की बात’ का, इस वर्ष का यह आख़िरी कार्यक्रम है और संयोग देखिए कि आज, वर्ष 2017 का भी आख़िरी दिन है | इस पूरे वर्ष बहुत सारी बाते हमने और आपने share  की | ‘मन की बात’ के लिए आपके ढ़ेर सारे पत्र, comments , विचारों का ये आदान-प्रदान, मेरे लिए तो हमेशा एक नई ऊर्जा लेकर के आता है | कुछ घंटों बाद, वर्ष बदल जाएगा लेकिन हमारी बातों का यह सिलसिला आगे भी इसी तरह जारी रहेगा | आने वाले वर्ष में हम, और नयी-नयी बातें करेंगे, नये अनुभव share करेंगे | आप सबको 2018 की अनेक-अनेक शुभकामनाएँ | अभी पिछले दिनों 25 दिसम्बर को विश्वभर में क्रिसमस का त्योहार धूमधाम से मनाया गया | भारत में भी लोगों ने काफी उत्साह से इस त्योहार को मनाया | क्रिसमस के अवसर पर हम सब ईसा मसीह की महान शिक्षाओं को याद करते हैं और ईसा मसीह ने सबसे ज़्यादा जिस बात पर बल दिया था, वह था - “सेवा-भाव” | सेवा की भावना का सार हम बाइबल में भी देखते हैं | The Son of Man has come, not to be served, But to serve, And to give his life, as blessing To all humankind. यह