पोस्ट

सितंबर, 2017 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

कोटा महानगर की नगर रचना

 कोटा महानगर की  नगर रचना  1 गणेश नगर संतोषी नगर स्थित शिवाजी पार्क से संतोषी नगर चैराहा, केशवपुरा 7 सेक्टर, व्यायामशाला, विश्वकर्मा मंदिर, केशवपुरा सेक्टर 6, राधाकृष्ण मंदिर, शिशु भारती स्कूल की गली, चैथमाता मंदिर, हनुमान मंदिर विस्तार योजना, शिव ज्योति कान्वेंट स्कूल, तिलक स्कूल, टीवीएस सर्किल होते हुए संतोषी नगर में विसर्जन। 2 विवेकानंद नगर मारूतिनन्दन हनुमान मंदिर से तलवण्डी प्रथम, तलवण्डी सर्किल, वर्धमान स्टेशनर्स, बरथूनिया के पीछे, मंशापूर्ण हनुमान मंदिर, खण्डेलवाल नर्सिंग होम रोड, इन्द्रविहार, तलवण्डी शिवज्योति स्कूल से मारूतिनन्दन हनुमान मंदिर तक 3 चाणक्य  नगर तलवण्डी आजाद पार्क से सेक्टर 4, सेक्टर 5, सिटी सेंटर, एलेन कैरियर इन्स्टीट्यूट, जवाहर नगर, गायत्री पार्क, मां भारती स्कूल से आजाद पार्क 4 विश्वकर्मा नगर राजकीय विद्यालय इन्द्रा विहार से एसएसएफ चैराहा, मेन रोड, गोचर साइकिल की गली, राधाकृष्ण मंदिर, कंसुआ, आदर्श विद्या मंदिर, कंसुआ मेन रोड, कंसुआ चैराहा, डीसीएम रोड सर्किल, मेन रोड, पावर हाऊस चैराहा से इन्द्रा गांधी नगर। 5 प्रताप नगर सनातन मंदिर दादाबाड़ी, शास्

रोहिंगिया देश की सुरक्षा व एकात्मता पर संकट ही बनेंगे : परम पूज्य सरसंघचालक डॉ. मोहन राव भागवत

इमेज
                                                                                                                                                                                                             परम पूज्य सरसंघचालक जी  डॉ. मोहन राव भागवत  का संबोधन         इस वर्ष की विजयादशमी के पावन अवसर को संपन्न करने के लिये हम सब आज यहाँ पर एकत्रित हैं। यह वर्ष परमपूज्य पद्मभूषण कुषोक बकुला रिनपोछे ( His eminence Kushok Bakula Rinpoche ) की जन्मशती का वर्ष है। पूज्य कुषोक बकुला रिनपोछे तथागत बुद्ध के 16 अर्हतों में से बकुल के अवतार थे ऐसी पूरे हिमालय बौद्धों में मान्यता है। वर्तमान काल में आप लद्दाख के सर्वाधिक सम्मानित लामा थे। पूरे लद्दाख में शिक्षा का प्रसार, कुरीतियों का निवारण एवं समाज सुधार व राष्ट्रभाव जागरण में आपकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। 1947 में जब कबाईलियों के वेश में पाकिस्तान की सेना ने जम्मूकश्मीर पर आक्रमण किया तो उनकी प्रेरणा से वहाँ के नौजवानों ने नुबरा ब्रिगेड का गठन कर आक्रमणकारियों को स्कर्दू से आगे बढने नहीं दिया। जम्मू कश्मीर की विधानसभा के सदस्य,

संघ : श्रेष्ठ विचारों से ही पूरे विश्व में आदरणीय

इमेज
विजयादशमी: संघ  के स्थापना दिवस पर श्रेष्ठ विचारों से ही पूरे विश्व में आदरणीय हो गया संघ प्रस्तुति - अरविन्द सिसौदिया     भारत में ही नही सम्पूर्ण विश्व में संघ या आरएसएस के नाम से जाने जाने वाले संगठन की स्थापना सन् 1925 में विजयदशमी के शुभमुहूर्त पर नागपुर में हुई थी। कांग्रेस गरम दल अर्थात “ स्वतंत्रता हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है।“ की घोषणा करने वाले बाल गंगाधर तिलक के मार्ग का अनुसरण करने वाले सुप्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के नाम से इसे स्थापित किया था।  हेडगेवार इससे पहले पराधीन भारत में चलने वाले भारतीय स्वाधीनता आंदोलन में सक्रिय भाग लेने वाले प्रखर स्वतंत्रता सेनानी थे एवं संघ की स्थापना का मार्ग भी स्वतंत्रता संघर्ष के कार्यों को करते हुये उनके विचार में आया । उन्होने उस समय के प्रमुख क्रांतिकारियों के साथ और बाद में कांग्रेस ने गरमदल के नेताओं के मार्गदर्शन में निरपेक्ष भावना से तथा सर्वस्वार्पण की वृत्ति से अपनी सारी शक्ति लगाकर कार्य किया था, जेल भी गये थे। उनकी स्पष्ट एवं प्रखर शैली के कारण स्वतंत्रता आंदोलन क

दिवाली पर ‘लक्ष्मी’ को चीन जाने से रोकें : क्षेत्र संघ प्रचारक दुर्गादास जी

इमेज
भारतीय लोक कल्याण प्रन्यास की विचार गोष्ठी सम्पन्न दिल में राष्ट्रभक्ति, हाथ में स्वदेशी वस्तु होना चाहिए दिवाली पर ‘लक्ष्मी’ को चीन जाने से रोकें : क्षेत्र संघ प्रचारक दुर्गादास          कोटा | भारतीय लोक कल्याण प्रन्यास की ओर से मंगलवार को बल्लभबाड़ी स्थित सूरज भवन पर ‘‘चीन की आर्थिक चुनौतियां एवं समाधान’’ विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षैत्र प्रचारक दुर्गादास थे। वहीं अध्यक्षता कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जीएल केशवा ने की। महानगर संघचालक ताराचंद गोयल भी मंच पर मौजूद रहे। इस दौरान रमेश जोशी ने ‘ राष्ट्रभक्ति ले हृदय में हो खड़ा यदि देश सारा, संकटों पर मात करता राष्ट्र विजयी हो हमारा...’ की प्रस्तुति दी। शिवकुमार मिश्रा ने भूमिका रखी।         कार्यक्रम को संबोधित करते हुए दुर्गादास जी ने कहा कि चीनी सामानों के कारण से हमारे उद्योग धंधों पर संकट खड़ा हो गया है। आज फिरोजाबाद का परंपरागत कांच का उद्योग संकट झेल रहा है। वहां पर गत 12-13 वर्षाें में 500 में से करीबन 300 उद्योग बंद हो गए हैं तथा श

गरबा : माँ की जीवन शक्ति के सौभाग्य की आराधना

इमेज
एक नये जीवन को जन्म देने की शक्ति ताकत या व्यवस्था मात्र मां स्वरूपा स्त्री में ही हे। गरवा संम्भवतः उसी शक्ति को प्राप्त करने तथा उससे सम्पन्न बनें रहनें की उत्कट इच्छा की आराधना स्वरूप हे।  माँ की गर्भ शक्ति की आराधना  जानिए, सौभाग्य का प्रतीक गरबा का इतिहास लाइफस्टाइल डेस्क। गरबा गुजरात का प्रसिद्ध लोकनृत्य है। यह नाम संस्कृत के गर्भ-द्वीप से है। गरबा सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है और अश्विन मास की नवरात्रों को गरबा नृत्योत्सव के रूप में मनाया जाता है। नवरात्रों की पहली रात्रि को गरबा की स्थापना होती है। फिर उसमें चार ज्योतियां प्रज्वलित की जाती हें। फिर उसके चारों ओर ताली बजाती फेरे लगाती हैं। आईये और जानते गरबा का इतिहास.... • यह परंपरागत रूप से एक बड़ी  गर्भ दीप  के आसपास प्रदर्शन किया गया था, जो कि  मां के गर्भ में भ्रूण के रूप में जीवन का प्रतिनिधित्व करती है । यह नृत्य रूप देवी दुर्गा की दिव्यता और शक्ति की पूजा करता है। • गरबा के प्रतीकात्मक रूप पर एक और दृष्टिकोण यह है, कि जैसे नृतक अपने पैरों से परिपत्र बनाते हैं। यह जीवन के चक्र का प्रतिनिधित्व करता है

राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ और स्वयंसेवक

इमेज
विश्व के सबसे बडे स्वंयसेवी संगठन राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ की भारत में संघ की आवश्यता क्यों हुई और उसका स्वंयसेवक कौन है । इन प्रश्नों का संझिप्त उत्तर यह शब्द हैं। http://rss.org/ दृष्टी और दर्शन दिनांक: 04-Jun-2017 प्राचीन काल से चलते आए अपने राष्ट्रजीवन पर यदि हम एक सरसरी नजर डालें तो हमें यह बोध होगा कि अपने समाज के धर्मप्रधान जीवन के कुछ संस्कार अनेक प्रकार की आपत्तियों के उपरांत भी अभी तक दिखार्इ देते हैं। यहाँ धर्म-परिपालन करनेवाले, प्रत्यक्ष अपने जीवन में उसका आचरण करनेवाले तपस्वी, त्यागी एवं ज्ञानी व्यक्ति एक अखंड परंपरा के रूप में उत्पन्न होते आए हैं। उन्हीं के कारण अपने राष्ट्र की वास्तविक रक्षा हुर्इ है और उन्हीं की प्रेरणा से राज्य-निर्माता भी उत्पन्न हुए हैं। उस परंपरा को युगानुकूल बनाएँ अत: हम लोगों को समझना चाहिए कि लौकिक दृष्टि से समाज को समर्थ, सुप्रतिष्ठित, सद्धर्माघिष्ठित बनाने में तभी सफल हो सकेंगे, जब उस प्राचीन परंपरा को हम लोग युगानुकूल बना, फिर से पुनरुज्जीवित कर पाएँगे। युगानुकूल कहने का यह कारण है कि प्रत्येक युग में वह परंपरा

नरेंद्र मोदी की आज भारत को जरूरत है : रतन टाटा

इमेज
आज भारत को है नरेंद्र मोदी की जरूरत: रतन टाटा News18Hindi Updated: September 20, 2017, 6:59 टाटा संस के चेयरमैन एमिरेटस रतन टाटा ने नेटवर्क 18 समूह के बिजनेस चैनल सीएनबीसी टीवी18 के साथ एक खास इंटरव्‍यू में कहा कि आज भारत को नरेंद्र मोदी की जरूरत है. मोदी ने न्यू इंडिया के लिए एक विजन क्रिएट किया है और नए भारत के निर्माण के लिए वे सभी तरह के इनोवेटिव कदम उठा रहे हैं. टाटा ने कहा कि लोगों को राजनीतिक पूर्वाग्रह से ऊपर उठकर देश के निर्माण के लिए काम करना चाहिए. देश निर्माण में युवा दें सहयोग टाटा ने कहा कि लोग भले ही मोदी से असहमत हो सकते हैं, लेकिन मेरा मानना है कि अगर भारत को इस समय किसी चीज की जरूरत है तो वह है- नरेंद्र मोदी. नए भारत के निर्माण के लिए सभी को मोदी के विजन के साथ होना चाहिए. उन्होंने उम्मीद जताई कि देश के युवा नए भारत के निर्माण में उनकी मदद करेंगे. समूह की अधिकांश कमाई परोपकार से जुड़े कार्यों पर खर्च होती है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की. उन्होंने कहा कि मैं नरेंद्र मोदी को गुजरात के मुख्यमंत्री के समय से जानता हूं. पश्चिम बंगा
इमेज
प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में : पॉलिटिक्स ऑफ़ परफॉरमेंस के एक नए युग की शुरुआत - अमित शाह  भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह द्वारा रांची, झारखंड में पंडित दीनदयाल उपाध्याय सम्पूर्ण वांड्मय का लोकार्पण और प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन में दिए गए उद्बोधन के मुख्य बिंदु शुक्रवार, 15 सितम्बर 2017 भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह द्वारा रांची, झारखंड में पंडित दीनदयाल उपाध्याय सम्पूर्ण वांड्मय का लोकार्पण और प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन में दिए गए उद्बोधन के मुख्य बिंदु प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हमने रिफॉर्म्स से भी दो कदम आगे बढ़ कर ट्रांसफॉर्मेशन अर्थात सम्पूर्ण परिवर्तन की दिशा में देश को आगे बढ़ाने का प्रयास किया है *********** प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने देश से परिवारवाद, जातिवाद और तुष्टीकरण की राजनीति को ख़त्म करके पॉलिटिक्स ऑफ़ परफॉरमेंस के एक नए युग की शुरुआत की है *********** 13वें वित्त आयोग में कांग्रेस-नीत यूपीए सरकार ने झारखंड को शेयर इन सेन्ट्रल टैक्स में 42,847 करोड़ रुपय

श्रीकृष्ण जलवा पूजन : डोल ग्यारस

इमेज
डोल ग्यारस : श्रीकृष्ण की मूर्ति विराजेंगी 'डोल' में श्रीकृष्ण जन्म के 18 वें दिन माता यशोदा ने उनका जलवा पूजन किया था। इसी दिन को 'डोल ग्यारस' के रूप में मनाया जाता है। जलवा पूजन के बाद ही संस्कारों की शुरुआत होती है। जलवा पूजन को कुआं पूजन भी कहा जाता है। इस ग्यारस को परिवर्तिनी एकादशी, जयझूलनी एकादशी, वामन एकादशी आदि के नाम से भी जाना जाता है। 'डोल ग्यारस' के अवसर पर कृष्ण मंदिरों में पूजा-अर्चना होती है। भगवान कृष्ण की मूर्ति को 'डोल' में विराजमान कर उनकी शोभायात्रा निकाली जाती है। इस अवसर पर कई शहरों में मेले, चल समारोह और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी होता है। इसके साथ ही डोल ग्यारस पर भगवान राधा-कृष्ण के एक से बढ़कर एक नयनाभिराम विद्युत सज्जित डोल निकाले जाते हैं। इसमें साथ चल रहे अखाड़ों के उस्ताद व खलीफा तथा कलाकार अपने हैरतअंगेज प्रदर्शन से भक्तों को रोमांचित करते हैं। ग्यारस का महत्व : शुक्ल-कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को चंद्रमा की ग्यारह कलाओं का प्रभाव जीवों पर पड़ता है। फलत: शरीर की अस्वस्थता और मन की चंचलता स्वाभाविक रूप से