सोमवार, 24 अप्रैल 2017

केरल में वामपंथी आतंक:पीड़ितों ने सुनाया अपना दर्द




मेरे पिता मेरे सपनों को पूरा करना चाहते थे .... फूलों से सुसज्जित ताबूत भेंट ....केरल में वामपंथी आतंक के पीड़ितों ने सुनाया अपना दर्द
हमारे कार्य का आधार घृणा, हिंसा नहीं, आत्मीयता है – डॉ. कृष्ण गोपाल जी

केरल में वामपंथी आतंक के पीड़ितों ने सुनाया अपना दर्द


मेरे पिता मेरे सपनों को पूरा करना चाहते थे ....................................
विस्मया, ये नाम अधिकांश ने सुना होगा. उसकी कविता सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुई थी. वह पुलिस अधिकारी बनकर अपने गांव की सेवा करना चाहती है, लेकिन वामपंथी गुंडों ने उसके पिता की हत्या कर दी. वह कहती है कि ---- “मेरे पिता मेरे सपनों को पूरा करना चाहते थे, वह रात मेरे सारे सपनों को तबाह कर गई. उनकी (विस्मया के पिता संतोष कुमार, 52 वर्ष) बस एक ही गलती थी कि उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और बीजेपी का समर्थन (पार्टी गांव में भाजपा के समर्थन से पंचायत का चुनाव लड़ा था) किया था. अब मुझे अपने भविष्य में सिर्फ अंधकार दिख रहा है. उन्होंने सिर्फ मेरे पिता को नहीं मारा बल्कि मेरे सपनों और भविष्य़ की भी हत्य़ा कर दी. मुझे सिर्फ अंधकार दिख रहा है, पूर्ण अंधकार. मुझे अब तक यह जवाब नहीं मिला कि उन्होंने मेरे पिता को क्यों मारा?”



अब किसके सहारे जियेंगी ..................... आंखों के सामने पुत्र की हत्या देख नारायणी अम्मा टूट गईं. अब वे इन वामपंथी गुंडों से दोनों हाथ जोड़कर एक ही प्रार्थना कर रही हैं कि “जिस चाकू से उन्होंने उनके पति और बेटे को मारा, उसी से उन्हें भी मार दें. उन्हें किस लिये छोड़ दिया, अब किसके सहारे जियेंगी?”


चलते फिरते शहीद ..................
विभाग प्रचार प्रमुख प्रजिल चलते फिरते शहीद हैं, उनके शरीर पर करीब ढाई दर्जन घावों के निशान हैं. खुशकिस्मत हैं कि वामपंथी गुंडों के हमले में उनका जीवन बच गया.

दोनों पैर चले गए ..................
 श्रीधरन अपने घर के पास चीखने चिल्लाने की आवाजें सुनीं तो लोगों को बचाने के लिये दौड़े, लेकिन वामपंथी गुंडों ने उन पर बम फैंक दिया, जिसमें उनके दोनों पैर चले गए.

फूलों से सुसज्जित ताबूत भेंट ................
 केरल के एक कॉलेज की पूर्व प्राचार्या डॉ. टीएन सरसू, उनकी सेवानिवृत्ति पर कॉलेज की एसएफआई इकाई ने अनोखा गिफ्ट दिया, उन्हें सेवानिवृत्ति पर फूलों से सुसज्जित ताबूत भेंट किया गया.

ये केवल कुछ घटनाएं मात्र हैं, कहानी केवल यहीं तक सीमित नहीं है. शिवदा, रजनी पीड़ितों की सूची काफी लंबी है. पिछले साठ साल के दौरान 400 से अधिक कार्यकर्ता वामपंथी गुंडों के हिंसक हमलों का शिकार हुए हैं. केरल में वामपंथी सरकार के गठन के पश्चात हिंसक घटनाओं में अचानक बढ़ोतरी हुई है. नई सरकार के छोटे से कार्यकाल में अकेले कन्नूर जिले में 436 हिंसक घटनाएं हो चुकी हैं. इसी कालखंड में 19 कार्यकर्ता मारे गए हैं, जिसमें 11 राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के, 4 कांग्रेस के थे. 4 सीपीआई एम के कार्यकर्ता, लेकिन ये वामपंथी विचार को छोड़कर कहीं न कहीं संघ की शाखा, भारतीय मजदूर संघ या भाजपा की ओर आकर्षित थे. इस कारण उनकी भी हत्या कर दी गई.

लेकिन ये समस्त घटनाएं, परिवारों की पीड़ी कभी नेशनल मीडिया की सुर्खियां नहीं बनीं, न ही मानवाधिकार आयोग का कभी इन पीड़ितों की ओर ध्यान गया. न ही तथाकथित बुद्धिजीवी वर्ग का ध्यान इनकी ओर गया.

भगवान की धरती कहलाने वाला केरल आज मार्क्सवादी हिंसा का प्रतीक बन चुका है. केरल मार्क्सवादी हिंसा के चेहरे को सबके समक्ष लाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अभियान शुरू किया है. जिसके तहत विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, इन कार्यक्रमों में केरल में मार्क्सवादी हिंसा के शिकार पीड़ित कुछ स्वयंसेवक परिवारों के सदस्य भी भाग ले रहे हैं. इसी निमित्त शनिवार 15 अप्रैल को दिल्ली में तीन कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, पहला कार्यक्रम जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में था, इसके पश्चात मीडिया जगत में कार्यरत पत्रकार बंधुओं के साथ गोष्ठी का आयोजन किया गया, तीसरे कार्यक्रम में दिल्ली के बुद्धिजीवी वर्ग (प्राध्यापक, अध्यापक, अधिवक्ता, व अन्य) के लिये नेशनल डेमोक्रेटिक टीचर फ्रंट एवं योगक्षेम न्यास ने संगोष्ठी का आयोजन किया. इन कार्यक्रमों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्णगोपाल जी, प्रज्ञा प्रवाह के राष्ट्रीय संयोजक जे. नंदकुमार जी (मूलतः केरल निवासी) तथा पीड़ित परिवारों के सदस्य उपस्थित रहे. कार्यक्रम में शहीद स्वयंसेवकों की जानकारी पर आधारित पुस्तक आहुति का लोकार्पण किया गया.

हमारे कार्य का आधार घृणा, हिंसा नहीं, आत्मीयता है – डॉ. कृष्ण गोपाल जी
बम बनाना केरल में कुटीर उद्योग


नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्णगोपाल जी ने कहा कि बम बनाना केरल में कुटीर उद्योग जैसा बन गया है. पुलिस राज्य सरकार के आदेश पर सबूत इकट्ठे करती और बाद में उन्हें नष्ट कर  देती है. इसलिए वहां मार्क्सवादी विचारधारा से अलग विचार रखने वालों के लिए बहुत संकट पैदा हो गया है. केरल हमारे देश का ही एक अंग है, इसलिए यह सारे देश की समस्या है. वैचारिक भिन्नता से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इस देश का महान दर्शन, महान परम्पराओं को नष्ट नहीं करने दिया जा सकता. राज्य के मुख्यमंत्री, जिनके पास गृह विभाग भी है, उन्हें अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी का पालन करना चाहिए. एक पार्टी कार्यकर्ता के रूप में नहीं बल्कि एक मुख्यमंत्री की तरह व्यवहार करना चाहिए. उन्हें राज्य में कानून, न्याय और शांति सुनिश्चित करनी चाहिए.

उन्होंने कहा कि आरएसएस का विरोध किसी कम्युनिस्ट से नहीं है, अपितु भारत के लिए प्रतिकूल कम्युनिज्म विचारधारा से है. क्योंकि हमारे देश में शास्त्रार्थ कर अपने विचारों से दूसरों को जीतने की परम्परा रही है. किसी की हत्या से आतंक उत्पन्न कर अपने विचार मनवाना यह भारतीय परंपरा कभी नहीं रही. वामपंथ की विचारधारा भारतीय परंपरा, आध्यात्मिक दर्शन के अनुकूल नहीं है. ये देश प्रेम, करुणा, दया का देश है. संघ के कार्यकर्ताओं का स्वभाव सभी जानते हैं. आपातकाल में हजारों कार्यकर्ताओं ने यातनाएं झेलीं. लेकिन सरसंघचालक बाला साहब देवरस जैसे ही जेल से बाहर आए, उन्होंने एक ही बात कही, जिन्होंने हमको बंद किया, कष्ट दिया वे अपने ही थे, अपने मन के अन्दर से यह बैर-भाव निकाल दो, सबसे मित्रता रखो. हमारा दर्शन ही ऐसा है कि हम लम्बे समय तक अपने ऊपर हुए अत्याचारों को याद ही नहीं रखना चाहते. संघ का कार्य का आधार घृणा, हिंसा नहीं, आत्मीयता है, हममें विचारधारा की भिन्नता से घृणा उत्पन्न नहीं होती. यही कारण है कि विरोध के बावजूद देश में सबसे अधिक शाखाएं (लगभग 4500) केरल में हैं.


प्रज्ञा प्रवाह के संयोजक जे. नंदकुमार जी ने कहा कि केरल में मार्क्सवादी आतंक से पीड़ित परिवारों को यहां लाना तथा उनके परिवार के सदस्यों की निर्मम हत्याओं का प्रस्तुतिकरण उनके तथा हमारे लिए अत्यंत कष्टकारी है, लेकिन केरल के बाहर वहां का सच तथाकथित बुद्धिजीवियों के सामने लाने का अन्य मार्ग न होने के कारण इस तरह के कार्यक्रम आयोजित करने पड़ रहे हैं. एक अखलाक की हत्या मीडिया में कई दिनों तक चर्चा व बहस का विषय बनी रहती है, लेकिन केरल में सत्ताधारी वामपंथियों की वैचारिक असहिष्णुता के कारण हुई नृशंस हत्याओं पर मीडिया में चर्चा नहीं होती. उन्होंने केरल से आये पीड़ित परिवारों का परिचय संगोष्ठी में आये बुद्धिजीवियों से करवाते हुए उनके परिजनों की मार्क्सवादियों द्वारा की गयी हत्याओं का उल्लेख किया. उन्होंने बताया कि पीड़ित परिवारों की ओर से मानवाधिकार आयोग और अनुसूचित जाति आयोग में भी मामले को ले जाया गया है.

डॉ. कृष्ण गोपाल जी ने कहा कि मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन वास्तव में हिंसा को रोकना चाहते हैं या सच को सबके समक्ष लाना चाहते हैं तो सर्वोच्च न्यायालय के दो न्यायाधीशों से या पूर्व न्यायाधीशों से हिंसक घटनाओं की जांच करवाएं. पुलिस पर पार्टी का नियंत्रण है, पुलिस ट्रेड यूनियन में वामपंथी पदाधिकारी पुलिस विभाग में प्रमुख पदों पर विराजमान हैं. ऐसे में कैसे निष्पक्ष न्याय की उम्मीद की जा सकती है. उन्होंने बताया कि 1948 तक केरल में संघ की नाम मात्र की शाखाएं थीं, जनवरी 1948 में श्रीगुरूजी का प्रवास था. कार्यक्रम में 150-200 कार्यकर्ता उपस्थित थे, इस दौरान वामपंथी गुंडों ने हमला कर दिया था.

उल्लेखनीय है कि केरल में वामपंथी हिंसा के खिलाफ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ ही अन्य सामाजिक संगठनों ने धरना प्रदर्शन का आयोजन किया था . देशभर में लगभग 800 स्थानों पर विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया. जिसमें साढ़े चार लाख बंधु भगिनियों की भागीदारी रही. (केरल, पंजाब, उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश, गोवा, मणिपुर शामिल नहीं)


निकुंज सूद

शुक्रवार, 21 अप्रैल 2017

युवा भारत को विश्व गुरु बनाने के मिशन में अनवरत मेहनत करें : अमित शाह





भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह द्वारा भाजयुमो की पहली राष्ट्रीय कार्यसमिति को संबोधित करते हुए दिए गए भाषण के मुख्य अंश
युवा कार्यकर्ताओं को न्यू इंडिया के आह्वान को राष्ट्र उन्नति अभियान मानते हुए इस निर्माण यज्ञ में आगे आना चाहिए: अमित शाह
**********
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जन-जन की आकांक्षाओं के जनक बने, उन्होंने यह दिखाया है कि एक गरीब-कल्याण सरकार कैसे बनायी जाती है और वह गरीबों की भलाई के लिए किस तरह कार्य करती है: अमित शाह
**********
युवा स्वच्छता अभियान की ओर उन्मुख हों, वे निरंतर अपने क्षेत्र की स्वच्छता की ओर ध्यान दें: अमित शाह
**********
हम यह सुनिश्चित करें कि हर गरीब को विकास के रास्ते पर जीवन जीने का समान अधिकार मिले, देश में कोई भूखा न हो तो पंडित दीन दयाल उपाध्याय जी को इससे बड़ी श्रद्धांजलि कुछ और नहीं हो सकती: अमित शाह
**********
युवाओं को संस्कार, संस्कृति और परंपरा का निर्वहन करना चाहिए, युवा भारत को विश्व गुरु बनाने के मिशन में अनवरत मेहनत करें: अमित शाह
**********
आज भाजपा के लगभग 300 से अधिक सांसद हैं, 1385 विधायक हैं, लगभग 13 राज्यों में भाजपा एवं भाजपा के सहयोगियों की सरकारें हैं: अमित शाह
**********
जनसंघ के रूप में शुरू हुई भारतीय जनता पार्टी आज 11 करोड़ से अधिक सदस्यों के साथ विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है: अमित शाह
**********
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह ने आज, भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) की दो दिवसीय और नवमनोनित राष्ट्रीय कार्यसमिति को संबोधित किया। श्री शाह ने अपने संबोधन में देशभर से आये भाजयुमो के कार्यकर्ताओं को न्यू इंडिया के आह्वान को राष्ट्र उन्नति अभियान बताते हुए इस निर्माण यज्ञ में आगे आने की अपील कीA उन्होंने कहा कि युवाओं को संस्कार, संस्कृति और परंपरा का निर्वहन करना चाहिएA युवा भारत को विश्व गुरु बनाने के मिशन में अनवरत मेहनत करेंA प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश आगे बढ़ रहा हैA युवा स्वच्छता अभियान की ओर उन्मुख हों वे निरंतर अपने क्षेत्र की स्वच्छता की ओर ध्यान दें. इसे अभियान रूप में लेकर युवा भारत नए भारत के स्वप्न को साकार करें | श्री शाह ने भीम एप एवं मोदी एप के उपयोग पर भी बल दिया |
    भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि इस समय पंडित दीन दयाल उपाध्याय जी की जन्मशती गरीब-कल्याण वर्ष के रूप में चल रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जन-जन की आकांक्षाओं के जनक बने, उन्होंने यह दिखाया है कि एक गरीब-कल्याण सरकार कैसे बनायी जाती है और वह गरीबों की भलाई के लिए किस तरह कार्य करती है। उन्होंने कहा कि हम यह सुनिश्चित करें कि हर गरीब को विकास के रास्ते पर जीवन जीने का समान अधिकार मिले, देश में कोई भूखा न हो तो पंडित दीन दयाल उपाध्याय जी को इससे बड़ी श्रद्धांजलि कुछ और नहीं हो सकती।
    उन्होंने कहा कि केवल 11 सदस्यों से जनसंघ के रूप में शुरू हुई भारतीय जनता पार्टी आज 11 करोड़ से अधिक सदस्यों के साथ विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है। उन्होंने कहा कि विपक्ष से सत्ता के केंद्र तक की यात्रा, जनसंघ से भाजपा की यात्रा अपने जीवन का क्षण-क्षण और शरीर का कण-कण पार्टी के लिए पूर्ण रूप से समर्पित कर देने वाले हजारों तपस्वियों और बलिदानियों के त्याग की साक्षी है और उन मनीषियों के त्याग और बलिदान के परिणामस्वरूप ही भारतीय जनता पार्टी आज परम वैभव के शिखर पर विद्यमान है। उन्होंने कहा कि आज भाजपा के लगभग 300 से अधिक सांसद हैं, 1385 विधायक हैं, लगभग 13 राज्यों में भाजपा एवं भाजपा के सहयोगियों की सरकारें हैं और केंद्र में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्त्व में भारतीय जनता पार्टी की गरीब-कल्याण सरकार है। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की ताकत हमारा संगठन और हमारे कार्यकर्ता हैं और कार्यकर्ताओं के अथक परिश्रम के कारण ही आज कच्छ से लेकर कामरूप तक और कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक भाजपा का विस्तार हुआ है। उन्होंने कहा कि गरीबों का कल्याण, राष्ट्र का उत्थान हमारा संकल्प है


रविवार, 16 अप्रैल 2017

समतामूलक समाज निर्माण का लक्ष्य : भाजपा




रविवार, 16 अप्रैल 2017

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह द्वारा जनता मैदान, भुबनेश्वर में आयोजित राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक के समापन अवसर पर दिए गए उद्बोधन के मुख्य बिंदु
 पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक जीत देश की जनता के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी और भारतीय जनता पार्टी के प्रति आशाओं एवं आकांक्षाओं की अभिव्यक्ति है: अमित शाह
**********
लगातार मिल रही जीत से कार्यकर्ता दृढ़ संकल्प के साथ संगठन के विस्तार और देश के विकास के लिए आगे बढ़ने का प्रण लें और परिश्रम की ऐसी पराकाष्ठा करें कि देश भर में एक भी ऐसा बूथ न बचे जहां कमल न खिला हो, संगठन मजबूत न हो: अमित शाह
**********
आज हमारे पास सर्वाधिक लोकप्रिय नेतृत्त्व की पूंजी है। आज देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की ओर एक नई आशा के रूप में देखा जाता है: अमित शाह
**********
आज हमारी जिम्मेवारी सिर्फ चुनाव जीतना या संगठन को ताकतवर बनाना नहीं है बल्कि पूरे देश की राजनीति में सकारात्मक बदलाव भी लाना है: अमित शाह
**********
आज समय आ गया है जब हम यह देश व दुनिया को बताएं कि विचारधारा पर चलने वाली पार्टी किस तरह से काम करती है, गरीब कल्याण के साथ–साथ देश के विकास व देश के गौरव के लिए काम करने वाली सरकार किस तरह से काम करती है और राजनीतिक जीवन में शुचिता कैसे लाया जा सकता है: अमित शाह
**********
हम संगठन व सरकार में एक ऐसी व्यवस्था लायें कि बाकी सभी पार्टियां भी इसी रास्ते पर चलने को मजबूर हो जाएँ और देश के राजनीतिक मानचित्र में बदलाव आ सके: अमित शाह
**********
प्रधानमंत्री जी ने इन तीन सालों में देश के विकास के लिए और जनता की सेवा के लिए अहर्निश काम किया है। तीन सालों में ही श्री नरेन्द्र भाई मोदी जी ने देश भर के 300 जिला मुख्यालयों पर आयोजित कार्यक्रमों में भागीदारी की है और देश के विकास की एक नई नींव रखी है: अमित शाह
**********
      भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह जी ने आज भुबनेश्वर के जनता मैदान में भगवान् जगन्नाथ की पावन धरा पर राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक के समापन सत्र को संबोधित किया और पार्टी कार्यकर्ताओं से आगामी चुनावों में विजय और हर बूथ तक संगठन के विस्तार के साथ-साथ देश की राजनीति में भी सकारात्मक बदलाव लाने के लिए कृतसंकल्पित होने का आह्वान किया।
       श्री शाह ने कहा कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी की यह बैठक जन संघ से भारतीय जनता पार्टी की अब तक की हमारी यात्रा के एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण मोड़ पर हो रही है। उन्होंने कहा कि यह एक महत्त्वपूर्ण मोड़ इसलिए भी है क्योंकि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्त्व में केंद्र की भारतीय जनता पार्टी की हमारी सरकार के तीन वर्ष पूरे हो रहे हैं, साथ ही हाल ही में संपन्न हुए पांच राज्यों के विधानसभा के चुनावों में भाजपा को अभूतपूर्व सफलता भी प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा कि पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक जीत देश की जनता के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी और भारतीय जनता पार्टी के प्रति आशाओं एवं आकांक्षाओं की अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि इस विजय के बाद राजनीतिक आलोचक भी पार्टी की शक्ति को स्वीकार करने पर विवश हो गए हैं। उन्होंने कहा कि इस विजय से कार्यकर्ताओं में उत्साह, आत्मविश्वास और उज्ज्वल भविष्य की कामना के साथ-साथ उनके चेहरे पर संतोष की एक झलक भी लाता है। उन्होंने कहा कि लगातार मिल रही जीत कार्यकर्ताओं के मन में आलस्य का निर्माण न करे बल्कि कार्यकर्ता दृढ़ संकल्प के साथ संगठन के विस्तार और देश के विकास के लिए आगे बढ़ने का प्रण लें और परिश्रम की ऐसी पराकाष्ठा करें कि देश भर में एक भी ऐसा बूथ न बचे जहां कमल न खिला हो, संगठन मजबूत न हो।
      राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि आज हमारे पास देश के सर्वाधिक लोकप्रिय नेतृत्त्व की पूंजी है। उन्होंने कहा कि आज देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की ओर एक नई आशा के रूप में देखा जाता है। उन्होंने कहा कि इस परिदृश्य में हमारा यह दायित्व बनता है कि हम इस निधि को, इस शक्ति को, इस लोकप्रियता को एक स्थायित्व दें और भारत को विश्वगुरु के पद पर एक बार फिर से प्रतिष्ठित करने का काम करें। उन्होंने कहा कि देश की जनता का प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी और भारतीय जनता पार्टी के प्रति एक गहरा और आत्मीय लगाव है। उन्होंने कहा कि यदि हम इसे स्थायित्व देते हैं तो इसके आशातीत परिणाम हमें प्राप्त होंगे।
    श्री शाह ने कहा कि आज हमारी जिम्मेवारी सिर्फ चुनाव जीतना या संगठन को ताकतवर बनाना नहीं है बल्कि पूरे देश की राजनीति में सकारात्मक बदलाव भी लाना है। उन्होंने कहा कि आज समय आ गया है जब हम यह देश व दुनिया को बताएं कि विचारधारा पर चलने वाली पार्टी किस तरह से काम करती है, गरीब कल्याण के साथ – साथ देश के विकास के लिए व देश के गौरव के लिए काम करने वाली सरकार किस तरह से काम करती है और राजनीतिक जीवन में शुचिता कैसे लाया जा सकता है। उन्होंने कार्यकर्ताओं व पार्टी पदाधिकारियों का आह्वान करते हुए कहा कि हम संगठन व सरकार में एक ऐसी व्यवस्था लायें कि बाकी सभी पार्टियां भी इसी रास्ते पर चलने को मजबूर हो जाएँ और देश के राजनीतिक मानचित्र में बदलाव आ सके। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी का हर कार्यकर्ता देश की राजनीति को बदलने का लक्ष्य लेकर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्त्व में देश को नई उंचाई पर ले जाने के लिए कृतसंकल्पित हों।
     भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की हर जगह स्वीकृति के साथ-साथ हमारे सहयोगियों की संख्या भी बढ़ रही है, एनडीए की ताकत भी बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि अभी 10 अप्रैल को ही संपन्न हुए एनडीए की बैठक में सभी सहयोगी दलों ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में अपना अटूट विश्वास व्यक्त किया है और 2019 में दो-तिहाई बहुमत से एक बार फिर से केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनाने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने इन तीन सालों में देश के विकास के लिए और जनता की सेवा के लिए अहर्निश काम किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री बनने के बाद तीन सालों में ही श्री नरेन्द्र भाई मोदी जी ने देश भर के 300 जिला मुख्यालयों पर आयोजित कार्यक्रमों में भागीदारी की है और देश के विकास की एक नई नींव रखी है। उन्होंने कहा कि हमें उनके पुरुषार्थ से प्रेरणा लेकर देश को आगे बढ़ाने के लिए कृतसंकल्पित होना चाहिए।
-------------------------------

भारतीय जनता पार्टी
राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक
भुवनेश्वर, ओडिशा
दिनांक: 15-16 अप्रैल, 2017
प्रस्ताव क्रमांक-1

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के तीन वर्षों के कार्यकाल में लोक कल्याण हेतु लिए गए निर्णयों ने आर्थिक विकास, राजनीतिक विश्वास, उन्नतिशील भारत के निर्माण एवं वैश्विक पटल पर भारत की साख में मजबूती के लक्ष्यों को हासिल किया है. शासन की नीतियों से समाज के अंतिम छोर पर खड़े आम व्यक्ति की आशाओं, आकांक्षाओं की पूर्ति करने की दिशा में भारतीय जनता पार्टी की सरकार श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में सफलता पूर्वक काम कर रही है. गरीब कल्याण को समर्पित उनकी नीतियों के कारण देश की गरीब जनता के मानस में उनके प्रति श्रद्धा, आदर और विश्वास का भाव न सिर्फ मजबूत हुआ है बल्कि जनादेश की कसौटी पर प्रमाणित भी हुआ है. देश के बहुमुखी विकास के लिए अनिवार्य हर जरूरत को वरीयता देते हुए सरकार ने अभूतपूर्व ढंग से काम किया है.

आर्थिक विकास के मोर्चे पर सरकार के प्रयासों से जीएसटी पारित कराने की सफलता मिली तो वहीँ बजट कोअनुशासन के दायरे में लाते हुए इसके कार्यान्वयन के माध्यम से अर्थव्यवस्था की रफ़्तार को त्वरित रूप से गति प्रदान करने का कार्य हुआ है. तकनीक और विज्ञान के क्षेत्र में श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भाजपा सरकार ने ऐतिहासिक सफलताएँ हासिल की हैं, जो भारत को संचार एवं रक्षा क्षेत्र में मजबूती प्रदान करने की दिशा में उपलब्धि है. निर्माण क्षेत्र में हुई बढ़ोतरी और विविध क्षेत्रों में मेक इन इण्डिया स्कीम के तहत हासिल हुई आत्मनिर्भरता से भारत विश्व के अग्रणी देशों के साथ प्रतिस्पर्धा में मजबूती के साथ खड़ा नजर आ रहा है.

जनादेश की कसौटी पर खरी सरकार

पांच राज्यों में संपन्न विधानसभा चुनावों के परिणामों ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को आजादी के बाद के सर्वाधिक लोकप्रिय नेता के रूप में प्रस्थापित किया है. ऐसे समय में जब भाजपा अपने विचारों के प्रणेता पंडित दीन दयाल उपाध्याय जी के जन्म शताब्दी को गरीब कल्याण वर्ष के तौर पर मना रही है, इन चुनावों में मिले जनादेश का महत्व बढ़ जाता है. उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, मणिपुर में पार्टी को विधानसभा चुनावों में और महाराष्ट्र, गुजरात एवं ओड़िसा के निकाय चुनावों में मिली सफलता भाजपा सरकार की गरीब कल्याण को समर्पित नीतियों के प्रति आम जनमानस के अगाध विश्वास की जीत है.

पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह जी की कुशल संगठनात्मक रणनीति एवं संगठन के सभी कार्यकर्ताओं के अथक परिश्रम का भी अभिनन्दन करती है जिसके कारण पार्टी को उत्तरप्रदेश एवं उत्तराखंड में तीन चौथाई से भी ज्यादा सीटें प्राप्त हुयी.

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2017 में पार्टी को 2012 विधानसभा चुनाव की तुलना में भारी बढ़ोतरी मिली है. पार्टी को 41(राजग)फीसद वोट और 325 सीटों पर जीत मिली है. यह उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के इतिहास की सबसे बड़ी जीत है. उत्तर प्रदेश की यह जीत इस लिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारतीय जनता पार्टी के विधायकों में सभी वर्गों एवं सभी क्षेत्रों का व्यापक प्रतिनिधित्व समाहित है. अमीर-गरीब, शहरी-ग्रामीण, अगड़ा-पिछड़ा, युवा, महिला, किसान सभी का प्रतिनिधित्व भाजपा की व्यापक पहुँच को प्रदर्शित करता है. उत्तराखंड में भी भाजपा को ऐतिहासिक एवं अभूतपूर्व सफलता हासिल हुई है. उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में भाजपा को 46.5 फीसद वोट मिले हैं एवं कुल 70 में से 57सीटों पर जीत प्राप्त हुई है. यहाँ भी भारतीय जनतापार्टी को तीन चौथाई से अधिक के बहुमत का जनादेश मिला है. मणिपुर में भाजपा को मिली सफलता यह प्रमाणित करने के लिए प्रयाप्त है कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में उनके शासन की नीतियों की पहुँच देश के उन हिस्सों में भी व्यापक तौर पर हुई है, जहाँ भाजपा की स्थिति न के बराबर होती थी. मणिपुर विधानसभा चुनाव परिणाम इसका ताजा प्रमाण है. मणिपुर में पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा 2.1 फीसद वोट मिले थे और वहां की विधानसभा में भाजपा का प्रतिनिधित्व शून्य था. लेकिन विधानसभा चुनाव 2017 में अभूतपूर्व ढंग से भाजपा को 36.3 फीसद वोट मिले और 21 सीटों पर जीत हासिल हुई. वर्तमान में मणिपुर में भाजपा गठबंधन की सरकार है. गोवा चुनाव में भी भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व की सरकार बनी है. गोवा में भारतीय जनता पार्टी की वोट प्रतिशत सबसे ज्यादा है. महाराष्ट्र निगम चुनावों में नौ महानगरपालिकाओं में से आठ में भारतीय जनता पार्टी को जीत मिली एवं मुंबई महानगर पालिका में भी भाजपा ने अबतक का सबसे अच्छा प्रदर्शन करते हुए 82 सीटों पर जीत दर्ज की. ओडिसा में हुए पंचायत चुनावों भाजपा ने अभूतपूर्व प्रदर्शन करते हुए प्रमुख विपक्षी दल के रूप में अपनी मजबूत स्थिति को कायम किया. यहाँ पर भाजपा ने कालाहांडी की सभी 9 सीटों पर जीत दर्ज की है. राजस्थान, दिल्ली, मध्यप्रदेश, हिमाचल, असाम में हुए विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी मिली जीत से हमारी विश्वास को और मजबूती मिली है. इन उपचुनाव में भी बंगाल में पार्टी की मत प्रतिशत में बढ़ोतरी पार्टी के विस्तार के लिए सुखद है.

भाजपा के प्रति देश के कोने-कोने में जागृत हो रहा यह विश्वास केंद्र सरकार की नीतियों, योजनाओं और कार्यपद्धति के प्रति विश्वास का प्रतिफल है. नोटबंदी के बाद हुए इन सभी चुनावों में मिले जनादेश को भारतीय जनता पार्टी सरकार द्वारा पांच सौ और एक हजार के पुराने नोट बंद किए जाने के फैसले को मिले जनता के समर्थन के तौर पर भी देखती है. 17 राज्यों में भारतीय जनता पार्टी व राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन घटक दलों के मुख्यमंत्री हैं. सांसदों के साथ-साथ अब विधायक भी सर्वाधिक भारतीय जनता पार्टी के हैं.

राजग के 33 दलों के साथ भाजपा का विकास संकल्प

भारतीय जनता पार्टी की विकास परक नीतियों को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के 33 दलों का साथ मिल रहा है. 33 दलों का यह गठबंधन भाजपा के विकास संकल्प की यात्रा में सहभागी है. देश के हर राज्य, हर क्षेत्र एवं हर समाज का प्रतिनिधित्व करने वाले दलों की भागीदारी वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में पूरी एकजुटता के साथ काम कर रहा है. भारतीय जनता पार्टी केंद्र में और राज्यों में जहाँ जिस दल के साथ गठबंधन में है, उन्हें शासन में सहभागी बनाकर चलने की नीति का अनुपालन कर रही है. जहाँ भाजपा की अकेले की पूर्ण बहुमत वाली सरकार है, उन राज्यों में भी राज्यों के राजग के सहभागी दलों को सरकार का हिस्सा बनाकर भाजपा आगे बढ़ रही है. तमिलनाडु, केरल एवं उत्तरपूर्वी राज्यों में एनडीए के सहयोगी दलों की संख्या व ताकत में लगातार वृद्धि हो रही है. भारत के राजनीतिक इतिहास में प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में यह पहली बार हुआ है कि देश में पूरी निष्ठा से यह गठबंधन काम कर रहा है.

तीन वर्षों में गरीब कल्याण योजनाओं का सफल क्रियान्वयन

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में सबका साथ सबका विकास का संकल्प लेकर आम जन जीवन के हितों में जो तमाम योजनाएं शुरू की गयीं और उन योजनाओं के माध्यम से बदलाव को जमीन पर उतारा गया, यह विजययात्रा उन योजनाओं के सफल क्रियान्वयन का प्रमाण है. भाजपानीत केंद्र सरकार ने जनधन योजना के अंतर्गत 27.97 करोंड़ खाते खोलने का काम करके देश के उन लोगों को मुख्यधारा के अर्थतंत्र से जोड़ने का काम किया है, जो आजादी के पिछले सात दशकों में नहीं हो पाया था. इस योजना के तहत 63,885 करोंड़ रूपये इन खातों में जमा हुए. सरकार ने रोजगार और स्टार्टअप एवं स्टैंडअप योजना के तहत रोजगार क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए मुद्रा योजना के माध्यम से 6.6 करोड़ ऋण दिए. समाज के अंतिम छोर पर जीवन यापन करने वाले परिवारों की महिलाओं के जीवन स्तर में सुधार के लिए केंद्र सरकार ने उज्ज्वला योजना एक तहत लगभग 2 करोंड़ मुफ्त रसोई गैस कनेक्शन दिए हैं. विद्युतीकरण के क्षेत्र भाजपानीत केंद्र सरकार ने अभूतपूर्व ढंग से काम किया है. आजादी के सात दशकों बीतने के बावजूद देश के 18 हजार से ज्यादा गाँव ऐसे थे, जहाँ बिजली का कनेक्शन नहीं था. सरकार ने 2018 तक सभी गांवों में बिजली कनेक्शन पहुंचाने के लक्ष्य क्र तहत काम करते हुए अभी तक 12586 गांवों को बिजली से जोड़ने का काम पूरा कर लिया गया है. सरकार की उजाला LED योजना के तहत 11.8 करोंड़ lEDबल्ब वितरित किए गए जिससे 11330 करोंड़ की बचत हुई. सरकार ने विशेष कर तटवर्ती क्षेत्र के मछुआरों के लिए विशेष ध्यान दिया है. किसानों को फसल बीमा, मृदा स्वास्थ व प्रधानमंत्री सिंचाई योजना से सीधा लाभ पहुँचाया है. सरकार ने शत्रु संपति विधेयक पारित कराने का काम किया है. माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में लोक कल्याण को समर्पित योजनाओं के प्रतिफल में पार्टी जनादेश की कसौटी पर खरी उतरी है.

अर्थतंत्र में सुदृढ़ता से विकास को रफ्तार

जीएसटी पर सफलता: भारतीय जनता पार्टी जीएसटी पर मिली सफलता के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी एवं वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली को बधाई देती है. सामान और सेवा पर समान अप्रत्यक्ष कर प्रणाली को लागू कराने में मिली सफलता ऐतिहासिक है. इससे भारतीय अर्थतंत्र में आने वाली बाधाएं कम होंगी एवं अर्थव्यवस्था में व्यापक सुधार होगा. व्यापारिक सुगमता की दृष्टि से जीएसटी का लागू होना एक महत्वपूर्ण सफलता है. इसका सकारात्मक प्रभाव आम व्यक्ति पर पड़ेगा और व्यापार क्षेत्र में तेजी आएगी जिससे रोजगार के अनेक अवसर पैदा होंगे. जीएसटी के कारण महंगाई में भी कमी आएगी. आर्थिक सुधारों की दृष्टि से जीएसटी को पारित कराना भाजपानीत केंद्र सरकार की उपलब्धि है.
बजट 2017-18 : भारतीय जनता पार्टी केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए बजट 2017-18की सराहना करती है. यह बजट लोक कल्याण की मूल भावना का प्रतिबिंब होने के साथ-साथ आर्थिक ढाँचे को सुदृढ़ करने में भी सक्षम है. एक राष्ट्र एक बजट की तर्ज पर इसबार केंद्र सरकार ने रेल बजट को अलग से पेश करने की बजाय आम बजट के साथ ही पेश किया.सरकार द्वारा पहली बार अनुशासन के दायरे में1 फरवरी को बजट पेश होने से बजट वितरण एवं योजनाओं के कार्यान्वयन में तेजी आई है. रोजगार गारंटी के तहत खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के लिए इस बजट के माध्यम से मनरेगा के लिए 11000 करोड़ की बढ़ोतरी करके 48000 करोड़ कर दिया गया है. निम्न मध्यम वर्ग को आयकर स्लैब्स में छूट देने का सरकार का निर्णय सराहनीय है. कुल 21.47 लाख करोंड़ के बजट में गरीब, मजदूर, दिव्यांग, महिला, बाल विकास, निर्माण क्षेत्र, रक्षा क्षेत्र, आधारभूत संरचना, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा, बीमा सुरक्षा सहित प्रत्येक मुद्दे को बारीकी से वरीयता दी गयी है. रक्षा क्षेत्र के लिए बजट से 2.74 लाख करोंड़, बुनियादी ढांचों के विकास के लिए 3.96 लाख करोंड़, हाइवे विकास के लिए 64000 करोंड़, महिला कल्याण फंड के तहत 1.86 लाख करोंड़, रेल सुरक्षा के लिए 1 लाख करोंड़ रुपए का प्रावधान रखा गया है. इसके अतिरिक्त इस बजट के तहत जन सरोकार से जुड़े अन्य तमाम लक्ष्यों जैसे- 1 मई 2018 तक देश के सभी गांवों में बिजली की उपलब्धता, किसानों को 10 लाख करोंड़ कर्ज, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 2019 तक 1 करोंड़ परिवारों को आवास, महात्मा गांधी की 150वी जयंती तक 1 करोड़ गरीब परिवारों को गरीबी रेखा से ऊपर लाने जैसे तमाम लोक कल्याण को समर्पित लक्ष्य चिन्हित किए गए हैं. यह बजट केंद्र सरकार के लोक कल्याण के प्रति समर्पण को दिखाता है तो वहीँ दूसरी तरफ विकास एवं आधारभूत संरचना को मजबूत बनाने के प्रति संकल्पित नजर आता है. आजादी के बाद पहली बार बजट को 31 मार्च से पहले पारित करके कियान्वित भी कर दिया है. जो देश के वित्तीय अनुशासन एवं आर्थिक विकास में बहुत बड़ा कदम है.
चुनाव सुधार और चंदे में पारदर्शिता: माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने इस दिशा में ठोस पहल करते हुए राजनीतिक दलों के चंदे की नकदी सीमा को 20000 रुपए से कम करते हुए 2000 तक कर दिया. केंद्र सरकार का यह कदम चुनाव सुधार एवं चंदे में पारदर्शिता के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम है.
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर कदम

भारतीय जनता पार्टी वैचारिक रूप से ही रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की पुरजोर पक्षधर रही है. प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत ने इस लक्ष्य को मजबूती से हासिल करते हुए, 1 मार्च 2017 को स्वदेश निर्मित सुपर सोनिक इंटरसेप्टर का सफल परीक्षण किया गया.

अन्तरिक्ष में भारत की धमक:

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व में इसरो ने विश्व में पहली बारएक साथ 104 उपग्रहों का अन्तरिक्ष में सफल प्रक्षेपण करने का विश्व कीर्तिमान स्थापित किया. इसके पहले रूस ने 37 उपग्रह छोड़े थे. प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व में विश्व पटल पर भारत का गौरव बढाने की दिशा में लगातार किया जा रहा उनका प्रयास गौरवान्वित करने वाला है. एक दौर था जब इस कार्य के लिए हम दूसरे देशों पर निर्भर थे लेकिन आत्मनिर्भरता का संकल्प लेकर काम कर रही भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम रख दिया है और इसके लिए श्री नरेंद्र मोदी जी का नेतृत्व बधाई के योग्य है.

भीम एप:प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की सरकार आने के बाद से ही डिजिटल इण्डिया को लेकर व्यापक स्तर पर काम हुए हैं. नोटबंदी के बाद डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने भीम एप लांच किया जो कि काफी लोकप्रिय हो चुका है. शुरू के दौर में ही इस एप को इस्तेमाल करने वालों की संख्या सवा करोंड़ से ज्यादा हो गयी थी.

राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति:

भारतीय जनता पार्टी राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 प्रस्तावित करने एवं इसे मंजूरी देने के लिए केंद्र सरकार के मंत्रिपरिषद को बधाई देती है. केंद्र सरकार ने इस स्वास्थ नीति के अंतर्गत दुर्गम बिमारियों को मुफ्त सरकारी सुविधा, दवा एवं जाँच को सस्ता एवं सुलभ करना, आयुष को मुख्यधारा में जोड़ना, बुजुर्गों को स्वास्थ सुविधा, स्वास्थ के सम्बंधित सभी सुविधाओं को सस्ता करके गरीबों तक उपलब्ध कराना जैसे लक्ष्यों के साथ एक व्यापक, समावेशी एवं समय के जरूरतों के हिसाब से इस नीति को तैयार किया है. अत्याधुनिक तकनीक के साथ-साथ परंपरागत प्रणालियों से सज्ज राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 स्वस्थ भारत बनाने की दिशा में अचूक कार्यक्रम साबित होगी.

वैश्विक पटल पर चमकी भारत की साख

वर्ष में 2014 में भाजपा की सरकार आने और श्री नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही विश्व जगत में भारत की साख ऊँची हुई है. दुनिया की निगाहें अब भारत की ओर हैं. तमाम आंकड़े भारत को एक संभावनाओं का देश मानने लगे हैं. दुनिया के तमाम देशों से भारत के रिश्ते मजबूत हुए हैं. व्यापारिक, सामरिक एवं कुटनीतिक स्तर पर भारत की ताकत और साख में इजाफा हुआ है. इसकी एकमात्र वजह यह है कि वर्तमान में देश में एक मजबूत सरकार है जिसका नेतृत्व एक मजबूत नेता के हाथों में है. विश्व पटल पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की प्रशासकीय कार्यशैली, लोक कल्याण को समर्पित नीतियों, मजबूत इच्छाशक्ति, सशक्त नेतृत्व की असीम क्षमता को पुरजोर स्वीकृति मिली है.

भारतीय जनता पार्टी सांसदों को 2014 में संसद के केन्द्रीय कक्ष में आयोजित पहली संसदीय बैठक को संबोधित करते हुए एवं दायित्व बोध का एहसास कराते हुए माननीय प्रधानमंत्री जी ने अपने संबोधन में कहा था कि “हम पद के लिए नहीं अपितु 125 करोड़ लोगों की आशा और आंकझाओं को पूरा करने के लिए समेट कर बैठे है, इसलिए पदभार जीवन में बहुत बड़ी बात होती है यह मैंने कभी नहीं माना, लेकिन कार्यभार, जिम्मेवारी ये सबसे बड़ी बात होती है. हमें उसे परिपूर्ण करने के लिए अपने आप को समर्पित करना होगा.” माननीय प्रधानमंत्री जी के इन तीन वर्षों के कार्यकाल में उन्होंने अपनी कर्मठता से अपने इस शब्दों को जनता के विश्वास में बदल दिया है. यह कार्यकारिणी अपने कार्यकर्ताओं से आवाहन करती है कि सभी मिलकर पंडित दीनदयाल जन्मशताब्दी वर्ष में यह संकल्प लें की जनसेवा के द्वारा जन विश्वास हासिल करने में कार्यकर्त्ता परिश्रम की पराकाष्ठा करेंगे. भारतीय जनता पार्टी देश के जनता से भी आह्वान करती है कि देश में विकास एवं गरीब कल्याण कार्यक्रमों की निरंतरता हेतु 2019 के चुनावों में भी श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में प्रचंड बहुमत से सरकार बनाने हेतु संकल्पवान हो.

****

प्रस्ताव क्रमांक-2
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने भारतीय जनता पार्टी की सरकार के लक्ष्यों को रेखांकित करते हुए लोकसभा में अपने पहले भाषण में कहा था, “ हम तो पंडित दीन दयाल उपाध्याय जी के आदर्शो से पले हुए लोग है. जिन्होंने हमें अन्त्योदय की शिक्षा दी थी. गरीब को गरीबी के खिलाफ लड़ाई लड़ने की ताकत दें. शासन की सारी व्यवस्थायें गरीब को सशक्त बनाने के लिए काम आनी चाहिए और सारी व्यवस्थाओं का अंतिम नतीजा उस आखिरी छोर पर बैठे हुए इन्सान के लिए काम आए, उस दिशा में प्रयास होगा, तब जाकर उसका कल्याण हम कर पाएंगे.” माननीय प्रधानमंत्री जी के अपने पहले संबोधन पर प्रतिबद्धता के साथ तीन साल के शासनकाल में मजबूती से इस दिशा में कदम बढ़ाये है.

भारतीय जनता पार्टी प्रधानमंत्री श्रीनरेंद्रमोदीजी द्वारा राष्ट्रीय सामजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़ा वर्ग के आयोग को संवैधानिक दर्जा दिए जाने के फैसले का स्वागत और अभिन्दन करती है. आजादी के 70 साल बाद किसी सरकार द्वारा समाज के गरीब दूर-दराज के क्षेत्रों में जीवन यापन कर रहे पिछड़ा समाज के हितों में लिया गया एक ऐतिहासिक, दूरदर्शी और अभूतपूर्व निर्णय है. समाज के कमजोर वर्गों की न्याय देने के लिए लम्बे समय से अपेक्षित मांग को पूरा किया गया है.

इस ऐतिहासिक कदम के लाभ:

इस ऐतिहासिक फैसले से समाज के सभी पिछड़े वर्ग के लोगों को न्याय मिलेगा. मौजूदा पिछड़ा वर्ग आयोग एक साधारण क़ानूनी निकाय है, जिसका कार्य सरकार को जातियों/समुदायों की सूचियों में शामिल करने अथवा निकालने के संबंध में सलाह देना है. अब इस आयोग को सांविधिक निकाय के रूप में एनसीएससी और एनसीएसटी के बराबर का दर्जा मिल जायेगा. यह आयोग पिछड़ा वर्ग के संरक्षण, कल्याण, और विकास तथा उन्नति से संबंधित अन्य कार्यों का भी निर्वहन करेगा.यह आयोग संविधान के अंतर्गत आने वाले अनुच्छेद 16-4 एवं 15-4 के निहित अधिकारों का प्रयोग करते हुए सामजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़े हुए वर्ग को सशक्त करते हुए उनको न्याय देगा.

समतामूलक समाज निर्माण का लक्ष्य भाजपा की प्रतिबद्धता रही है और भाजपा सरकार ने इस फैसले से उस दिशा में एक कदम बढ़ाया गया है. एक न्यायपूर्ण भारत और समतामूलक समाज की परिकल्पना को मूर्त रूप देने की क्षमता माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा लिए गए इस अहम निर्णय में अंतर्निहित है.

कांग्रेस और क्षेत्रीय विपक्षी दलों का पिछड़ा वर्ग विरोधी आचरण:

आज माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भाजपा-नीत सरकार ने समाज के पिछड़े वर्ग के हितों को समर्पित वर्षों से लंबित इस कार्य को किया है तो ऐसे में कांग्रेसएवंअन्यविपक्षी दलों का रुख बेहद निराशाजनक एवं दुर्भाग्यपूर्ण है. कांग्रेस एवं विपक्षी दलों ने जिस तरह से राज्यसभा में इसका विरोध किया है, पिछड़े वर्ग को लेकर उसकी मूल मनोस्थिति को दिखाता है. यह सच है कि देश में लंवे समय तक शासन में रहने के बावजूद कांग्रेस पिछड़ा वर्ग के हितों का यह काम नहीं कर पाई. अब जब भाजपा को शासन का जनादेश मिला है तो भाजपा की सरकार ने वरीयता में रखकर इस कार्य को किया है. आजादी के बाद काका कालेकर कमीशन (1950) और मंडल आयोग (1979) की रिपोर्ट के बावजूद भी तत्कालीन कांग्रेस की सरकारों द्वारा इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया. विदित है कि इस अहम निर्णय को लागू करने के संबंध में ओबीसी संसदीय समिति की सिफारिश भी आई और सभी दलों के सांसदों ने व्यक्तिगत रूप से माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी से मुलाक़ात करके इस संबंध में संविधान में संशोधन करने का आग्रह किया था. इस दिशा में सरकार ने ठोस कदम उठाते हुए इसे लोकसभा में सर्वसम्मति पारित भी करा लिया. लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश के पिछड़े तबके के लोगों को सशक्त बनाने और उन्हें न्यायिक रूप से और मजबूत करने की दिशा में उठाए गए इस कदम को राज्यसभा में विरोध करके रोक दिया गया है. राजनीति में राजनीतिक विरोध चलते हैं, आरोप-प्रत्यारोप भी होते हैं, लेकिन गरीब और हाशिये के समाज के लिए हो रहे किसी फैसले को अपनी राजनीति के लिए रोकना कहीं से भी उचित नहीं कहा जा सकता है. कांग्रेस एवं विपक्षी दलों द्वारा राजनीति में सिर्फ इस बात के लिए इस निर्णय का विरोध करना उचित नहीं कहा जा सकता है कि अमुक काम लंबे समय तक शासन में रहने के बावजूद वे इस काम को नहीं कर पाए और भाजपा की सरकार ने कर दिया. एकओर कांग्रेस व विपक्षी दलों ने इसका विरोध किया वही भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमितशाहजी के नेतृत्व में सभी एनडीए दलों एवं मुख्यमंत्रीयोंने इसको समर्थन देकर माननीय प्रधानमंत्री जी का आभार व्यक्त किया.

भारतीय जनता पार्टी सभी कार्यकर्ताओं एवं सामाजिक संस्थाओंसे आह्वान करती है कि समतामूलक समाज के निर्माण के लिए माननीय प्रधानमंत्री जी के इस ऐतिहासिक फैसले के महत्त्व को दूरस्थ क्षेत्रों के गरीब एवं पिछड़े वर्गों तक पहुंचाए. पार्टी के सभी नेताओंकोगरीब वर्गों के संवैधानिक एवं क़ानूनी अधिकारों के जागरण का प्रयास करना चाहिए और इसके साथ-साथ विपक्षी दलों के पिछड़ा वर्ग विरोधी आचरण का पर्दाफाश भी करना चाहिए.भारतीय जनता पार्टी गरीबों को दिए गयेइस ऐतिहासिक संवैधानिक अधिकार पर माननीय प्रधानमंत्री जी हार्दिक अभिनंदन एवं स्वागत करती है.

*****

शनिवार, 15 अप्रैल 2017

भाजपा : राष्ट्रीय कार्यकारिणी भुबनेश्वर







शनिवार, 15 अप्रैल 2017

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह द्वारा जनता मैदान, भुबनेश्वर में आयोजित राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक के उदघाटन अवसर पर दिए गए उद्बोधन के मुख्य बिंदु
पांच राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की अभूतपूर्व विजय का मुख्य कारण प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की लोकप्रियता, मोदी सरकार की गरीब कल्याण की नीति को नीचे तक पहुंचाने की कार्य-योजना और पार्टी के कार्यकर्ताओं का अथक परिश्रम है: अमित शाह
*******
पांच राज्यों के चुनाव में भाजपा की शानदार जीत से देश में जातिवाद, परिवारवाद और तुष्टीकरण की राजनीति का अंत हुआ है और ‘पॉलिटिक्स ऑफ़ परफॉरमेंस’ के एक नए युग की शुरुआत हुई है: अमित शाह
*******
2014 के बाद जितने भी चुनाव, उप-चुनाव अथवा स्थानीय निकायों के चुनाव हुए, उसमें हर जगह भारतीय जनता पार्टी ने अभूतपूर्व जीत दर्ज की जो भाजपा के दिनोंदिन बढ़ते हुए जनाधार और भाजपा में देश की जनता की गहरी आस्था का द्योतक है: अमित शाह
*******
भाजपा की लगातार जीत से विपक्ष बौखलाया हुआ है, उनके पास कोई मुद्दा नहीं है इसलिए वे रह-रह कर इवीएम को लेकर आरोप लगाते रहते हैं: अमित शाह
*******
क्या यूपीए-1 और यूपीए-2 की जीत क्या इवीएम से नहीं हुआ था, क्या दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बैलेट पेपर से चुनकर आई थी और क्या अभी पंजाब में कांग्रेस की जीत इवीएम के कारण हुई है: अमित शाह
*******
आगामी मई में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार के तीन साल पूरे हो जायेंगे। इन तीन वर्षों में मोदी सरकार ने इतने सारे काम किये हैं कि इनमें से एक भी काम अपने पूरे कार्यकाल तक में कई सरकारें पूरा नहीं कर पातीं: अमित शाह
*******
भारतीय जनता पार्टी का स्वर्णिम युग आना अभी बाकी है। यह स्वर्णिम युग तभी आयेगा जब केरल, बंगाल, तमिलनाडु और उत्तर-पूर्व के राज्यों में भी हमारी सरकार बनेगी और कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक एवं कच्छ से लेकर कामरूप तक संगठन का विस्तार होगा: अमित शाह
*******
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र की हमारी भारतीय जनता पार्टी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि इन तीन सालों में हम पर भ्रष्टाचार का एक भी आरोप नहीं है, हमारे विरोधी भी हम पर भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं लगा सके हैं: अमित शाह
*******
जब देश आजादी की 75वीं वर्षगाँठ मना रहा होगा, तब देश कैसा हो, इसके विकास का मॉडल कैसा हो, इस सोच के साथ प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने न्यू इंडिया की परिकल्पना को देश के सामने रखा है: अमित शाह
*******
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में देश को पॉलिसी पैरालिसिस से मुक्ति मिली है। लोगों को अच्छे लगने वाले फैसले नहीं, बल्कि लोगों के लिए अच्छे फैसले लिए जाने की जरूरत है और मोदी सरकार ऐसे ही निर्णायक फैसले ले रही है: अमित शाह
*******
भाजपा केरल, पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में संगठन के कार्यकर्ताओं पर हिंसात्मक हमले की कड़ी निंदा करती है: अमित शाह
*******
यदि इन राज्यों में सत्ताधारी पार्टियां यह सोचती हैं कि वे हिंसा के जरिये पार्टी के विचारों को विस्तारित करने से रोकने में सफल हो जायेंगे तो यह उनकी भूल है, भाजपा और अधिक मजबूती के साथ इन राज्यों में उभर कर आयेगी: अमित शाह
*******
दिल्ली में शुंगलू कमिटी की रिपोर्ट में जो सच्चाई सामने आई है, उससे यह स्पष्ट है कि राजनीतिक शुचिता का इससे बड़ा उल्लंघन और नहीं हो सकता: अमित शाह
*******
हम जनता को विश्वास दिलाना चाहते हैं कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी केवल और केवल देश के विकास के लिए काम करेगी और भारत को एक बार फिर से ‘विश्वगुरु’ के पद पर प्रतिष्ठित करने का काम करेगी: अमित शाह
*******

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह ने आज भुबनेश्वर के जनता मैदान में श्री भीम भोई परिसर में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक को संबोधित किया। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने पांच राज्य के विधानसभा चुनावों में भाजपा की अप्रत्याशित विजय, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र की भारतीय जनता पार्टी के काम काज और संगठन विस्तार के कार्यक्रमों पर विस्तार से चर्चा की।

श्री शाह ने कहा कि आज हम महाप्रभु जगन्नाथ की पावन भूमि पर राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक के लिए एकत्रित हुए हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली में संपन्न हुए पिछले राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक से अब तक के तीन महीने में देश में बहुत बड़े स्तर पर राजनीतिक बदलाव हुआ है। उन्होंने कहा कि इस दौरान संपन्न हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में से चार राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी को अप्रत्याशित सफलता प्राप्त हुई है, यहाँ हमें तीन चौथाई से जयादा बहुमत प्राप्त हुआ है, साथ ही गोवा और मणिपुर में भी पार्टी को सबसे अधिक वोट मिला है। उन्होंने कहा कि भाजपा की इस अभूतपूर्व विजय का मुख्य कारण प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की लोकप्रियता, मोदी सरकार की गरीब कल्याण की नीति को नीचे तक पहुंचाने की कार्य-योजना और पार्टी के कार्यकर्ताओं का अथक परिश्रम है। उन्होंने कहा कि अब राजनीतिक विश्लेषक भी यह मानने पर विवश हो गए हैं कि श्री नरेन्द्र मोदी जी आजादी के बाद से देश के सबसे लोकप्रिय प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने पांच राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की अभूतपूर्व विजय पर कार्यकारिणी के सदस्यों से अपने स्थान पर खड़े होकर माननीय प्रधानमंत्री जी का करतल ध्वनि से स्वागत करने की अपील की। (सभी सदस्यों ने अपने स्थान पर खड़े होकर प्रधानमंत्री जी का जोरदार स्वागत किया।) उन्होंने पाँचों राज्यों की जनता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मैं आपको विश्वास दिलाना चाहता हूँ कि आपके विश्वास व आकांक्षाओं पर शत-प्रतिशत खरे उतरने का काम राज्य की भारतीय जनता पार्टी की सरकारें करेंगी और राज्य विकास के पथ पर आगे बढ़ेगा।

राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि पिछले कार्यकारिणी से लेकर अब तक के तीन महीने में महत्त्वपूर्ण जीएसटी विधायक को दोनों सदनों में पारित किया गया जो एक राष्ट्र, एक टैक्स की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि इस दौरान पद्म पुरस्कारों की भी घोषणा की गई। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद पहली बार समाज के ऐसे गुमनाम मनीषियों, समाजसेवियों और बुद्धिजीवियों को यह पुरस्कार दिए गए हैं जिन्होंने देश व समाज के लिए कई अकल्पनीय कार्य किये हैं, सही मायनों में पद्म पुरस्कारों का जनतांत्रिककरण किया गया है जो कि एक अनूठी पहल है। उन्होंने कहा कि अब पद्म पुरस्कारों के लिए कोई भी व्यक्ति स्वयं ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं, इसकी वैज्ञानिक तरीके से जांच होती है और फिर पुरस्कारों के लिए उपयुक्त लोगों का नाम फाइनल किया जाता है। उन्होंने कहा कि यदि इस बार की पद्म पुरस्कारों की सूची का एनालिसिस किया जाय तो पता चलेगा कि देश में कितना बड़ा बदलाव आया है।

श्री शाह ने कहा कि 2014 में 30 वर्ष के पश्चात पहली बार किसी एक दल को बहुमत मिला और आजादी के बाद तो पहली बार किसी गैर-कांग्रेसी दल को अपने दम पर पूर्ण बहुमत मिला और केंद्र में श्री नरेन्द्र भाई मोदी जी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी। उन्होंने कहा कि इसके बाद हुए हर चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को शानदार जीत हासिल हुई। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड, जम्मू-कश्मीर, अरुणाचल प्रदेश, असम, उत्तर प्रदेश, गोवा, उत्तराखंड, मणिपुर में भारतीय जनता पार्टी की सरकारें बनीं, बिहार और दिल्ली में भी हमारे वोट प्रतिशत में वृद्धि दर्ज की गई। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद जितने भी चुनाव, उप-चुनाव अथवा स्थानीय निकायों के चुनाव हुए, उसमें हर जगह भारतीय जनता पार्टी ने अभूतपूर्व जीत दर्ज की जो भाजपा के दिनोंदिन बढ़ते हुए जनाधार और भाजपा में देश की जनता की गहरी आस्था का द्योतक है।

उत्तर प्रदेश के चुनाव परिणाम पर बोलते हुए भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि राज्य में पहली बार सपा-बसपा के क्रम टूटने के साथ ही जातिवाद, परिवारवाद और तुष्टीकरण की राजनीति का अंत हुआ है और ‘पॉलिटिक्स ऑफ़ परफॉरमेंस’ के एक नए युग की शुरुआत हुई है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में इतना बड़ा जनादेश आजादी के बाद किसी भी पार्टी को नसीब नहीं हुआ जितना बड़ा जनादेश इस बार भारतीय जनता पार्टी को प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी को तीन चौथाई बहुमत से जीत नसीब हुई है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के लिए जो हमने कहा था कि इस प्रदेश को श्रद्धेय श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने बनाया और मोदी जी इसे संवारेंगे – इसे राज्य की जनता ने ह्रदय से स्वीकार किया है।

विपक्ष पर करारा प्रहार करते हुए श्री शाह ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की लगातार जीत से विपक्ष बौखलाया हुआ है, उसके पास कोई मुद्दा नहीं है इसलिए वे रह - रह कर इवीएम को लेकर आरोप लगाते रहते हैं। उन्होंने विपक्ष को कठघरे में खड़ा करते हुए पूछा कि क्या यूपीए-1 और यूपीए-2 की जीत क्या इवीएम से नहीं हुआ था, क्या दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बैलेट पेपर से चुनकर आई थी और क्या अभी पंजाब में कांग्रेस की जीत इवीएम के कारण हुई है?

भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि कई राजनीतिक पंडित 2014 को भाजपा का स्वर्णिम युग बताते थे, आज वे 2017 को भी भाजपा का स्वर्णिम युग बता रहे हैं लेकिन पार्टी का स्वर्णिम युग आना अभी बाकी है। उन्होंने कहा कि यह स्वर्णिम युग तभी आयेगा जब केरल, बंगाल, तमिलनाडु के साथ-साथ उत्तर-पूर्व के राज्यों में भी भाजपा की सरकार बनेगी और कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक एवं कच्छ से लेकर कामरूप तक संगठन का विस्तार होगा। उन्होंने कहा कि विजय की यह भूख और बढ़नी चाहिए, हम अथक पुरुषार्थ से प्रेरणा लेकर और अधिक तत्परता के साथ काम करने के लिए कृतसंकल्पित हों।

श्री शाह ने कहा कि आगामी मई में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार के तीन साल पूरे हो जायेंगे। उन्होंने कहा कि इन तीन वर्षों में मोदी सरकार ने इतने सारे काम किये हैं कि इनमें से एक भी काम अपने पूरे कार्यकाल तक में कई सरकारें पूरा नहीं कर पातीं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र की एनडीए सरकार की तीन साल की कुछ प्रमुख उपलब्धियों की चर्चा करना यहाँ आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत दुनिया की सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बनी है, प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष करों के कनेक्शन में वृद्धि हुई है, डिमोनेटाईजेशन के द्वारा काले-धन के संग्रह पर अंकुश लगाया गया है, काले-धन को अर्थव्यवस्था से ख़त्म करने के लिए एक-के-बाद-एक कई कदम उठाये गए हैं, टैक्सेशन को पारदर्शी बनाया गया और राजनीतिक चंदों को 2000 कैश तक सीमित करके चंदे की प्रक्रिया को भी पारदर्शी बनाने की पहल की गई है। उन्होंने कहा कि चाहे बेनामी संपत्ति पर क़ानून की बात हो, शत्रु संपत्ति पर कार्रवाई की बात हो या फिर शेल कंपनियों के खिलाफ मुहिम की बात - एनडीए सरकार ने हर मोर्चे पर सुधार कार्यक्रम की नींव रखी है।

श्री शाह ने कहा कि नीति आयोग का गठन करके और राज्यों को मिलनेवाले शेयर को बढ़ा कर फेडरल स्ट्रक्चर को मजबूत बनाने का काम किया गया है, बजट की प्रक्रिया को 31 मार्च से पहले ही पूरा कर के एक अप्रैल से बजट के प्रावधानों को लागू करने की शुरुआत करके एनडीए सरकार ने एक नया मानदंड स्थापित किया है, साथ ही, रेल बजट को आम बजट में समायोजित करके विकास की गति को तेज करने के प्रयास किये गए हैं।

भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में ठोस पहल करते हुए डेढ़ साल में ही लगभग 2 करोड़ गरीब महिलाओं को गैस कनेक्शन उपलब्ध कराये गए हैं, जन-धन योजना के अंतर्गत लगभग 29 करोड़ लोगों के बैंक अकाउंट खोल कर उन्हें देश के अर्थतंत्र की मुख्यधारा से जोड़ा गया है, मुद्रा बैंक के माध्यम से देश के लगभग 7.32 करोड़ लोगों को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराये गए हैं, भीम ऐप की शुरुआत कर देश भर में डिजिटलाइजेशन को बढ़ावा दिया गया है और आजादी के 70 साल बाद भी बिजली से वंचित 18000 गाँवों में से 13000 गाँवों में बिजली पहुंचाने का काम पूरा किया गया है।

श्री शाह ने कहा कि किसानों की भलाई के लिए केंद्र की एनडीए सरकार ने कई काम किये हैं चाहे वह प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना हो, स्वायल हेल्थ कार्ड की योजना हो, यूरिया उत्पादन में वृद्धि और खाद के दाम कम करने की बात हो।

राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि 40 वर्षों से लंबित ‘OROP’ को एक साल में लागू कर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा-नीत एनडीए सरकार ने भूतपूर्व सैनिकों के प्रति सम्मान और अपनी संवेदना को प्रकट करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि एनडीए की विदेश नीति ने एक नया आयाम स्थापित किया गया है, साथ ही, पेरिस समझौते में पर्यावरण को बचाने की हमारी प्रतिबद्धता को भी दुनिया भर में सराहा गया है।

भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र की हमारी भारतीय जनता पार्टी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि इन तीन सालों में हम पर भ्रष्टाचार का एक भी आरोप नहीं है, यहाँ तक कि हमारे विरोधी भी हम पर भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं लगा सके हैं। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष में एक साथ 104 उपग्रह को स्थापित करके हमने अंतरिक्ष विकास में उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है। उन्होंने कहा कि ओबीसी कमीशन को संवैधानिक दर्जा देकर विकास में पीछे छूट गए समाज के वंचितों के प्रति विकास की प्रतिबद्धता हमने दर्शाई है। उन्होंने कहा कि स्वच्छता अभियान, बेटी बचाओ - बेटी पढाओ और नमामि गंगे के माध्यम से हमने जन-समस्याओं को जन-आंदोलन बनाने का काम किया है।

श्री शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने न्यू इंडिया की परिकल्पना को देश के सामने रखा है जो हमारे नौजवानों की मेधा शक्ति को एक नई दिशा देगी। उन्होंने कहा कि 2022 में जब देश आजादी की 75वीं वर्षगाँठ मना रहा होगा तब देश कैसा हो, इसके विकास का मॉडल कैसा होना चाहिए, यह प्रधानमंत्री जी की दूरदर्शिता का परिचायक है। उन्होंने कहा कि 2022 के लक्ष्य को पूरा करने के लिए अभी से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी जुट गई है।

भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में देश को पॉलिसी पैरालिसिस से मुक्ति मिली है। उन्होंने कहा कि लोगों को अच्छे लगने वाले फैसले नहीं, बल्कि लोगों के लिए अच्छे फैसले लिए जाने की जरूरत है और मोदी सरकार ऐसे ही निर्णायक फैसले ले रही है जो देश और जनता के लिए अच्छे हों, यह हमारी सरकार की दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति का परिचायक है। साथ ही, उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि 2019 में एक बार फिर से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में राजग की सरकार बनेगी और हम जनता की भलाई के लिए अहर्निश काम करेंगे।

श्री शाह ने कहा कि भाजपा केरल, पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में संगठन के कार्यकर्ताओं पर हिंसात्मक हमले की कड़ी निंदा करती है। उन्होंने कहा कि यदि विचारों को दबाने के लिए इस तरह से पार्टियां भाजपा के कार्यकर्ताओं पर हिंसात्मक हमले करती है तो ऐसे में लोकतंत्र की रक्षा कैसे की जा सकती है? उन्होंने कहा कि यदि इन राज्यों में सत्ताधारी पार्टियां यह सोचती हैं कि वे हिंसा के जरिये भारतीय जनता पार्टी के विचारों को विस्तारित करने से रोकने में सफल हो जायेंगे तो यह उनकी भूल है, वे ऐसा करने में कभी सफल नहीं हो पायेंगे, भारतीय जनता पार्टी और अधिक मजबूती के साथ इन राज्यों में उभर कर आयेगी।

आम आदमी पार्टी पर निशाना साधते हुए भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि अभी दिल्ली में शुंगलू कमिटी की रिपोर्ट में जो सच्चाई सामने आई है, उससे यह स्पष्ट है कि राजनीतिक शुचिता का इससे बड़ा उल्लंघन और नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि दिल्ली के उपचुनाव में भी भारतीय जनता पार्टी को विशाल जीत हासिल हुई है और पार्टी दिल्ली के नगर निगम के चुनाव में भी अच्छी सफलता हासिल करेगी।

श्री शाह ने कहा कि यह वर्ष पंडित दीन दयाल उपाध्याय जी का जन्म शताब्दी वर्ष है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने इस वर्ष को बड़े पैमाने पर मनाने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने भी अधिकृत रूप से इस वर्ष को गरीब कल्याण वर्ष के रूप में मनाने का निश्चय किया है, हमारी राज्य सरकारों को भी इसके लिए कार्ययोजना बनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस वर्ष में संगठन के विस्तार व विकास के लिए लाखों कार्यकर्ताओं ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया है जो काफी उत्साहवर्द्धक है। उन्होंने कहा कि मैं स्वयं इसमें अपनी भागीदारी दूंगा एवं विभिन्न राज्यों में बूथ स्तर पर प्रवास करूंगा। उन्होंने कहा कि हिमाचल, गुजरात और कर्नाटक में भी अबकी बार भारतीय जनता पार्टी की सरकार का गठन होगा।

ओडिशा में बीजू जनता दल की सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश में 20 सालों से बीजद की सरकार है। उन्होंने कहा कि जहां भारतीय जनता पार्टी शासित राज्य लगातार विकास की नई कहानियां लिख रहे हैं, वहीं ओडिशा विकास के हर मापदंडों में काफी पीछे है। उन्होंने कहा कि यहाँ न तो लोगों को शुद्ध पीने का पानी मिल रहा है, न लोगों को बिजली मिल रही है और न ही शिक्षा व स्वास्थ्य की ही मूलभूत सुविधा मौजूद है। उन्होंने कहा कि ओडिशा में बूथ से लेकर प्रदेश तक 2015-17 तक यहाँ के कार्यकर्ताओं ने कठिन संघर्ष किया है, इसके बेहतर परिणाम भी मिलने लगे हैं, मैं ओडिशा के प्रदेश अध्यक्ष एवं संगठन की पूरी टीम को ह्रदय से बधाई देता हूँ।

श्री शाह ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी आज विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है, आज देश के 17 प्रदेशों में भाजपा एवं भाजपा गठबंधन की सरकारें हैं, 300 से अधिक सांसद हैं, 1700 से अधिक विधायक हैं, देश की लगभग 60% आबादी और 70% भू-भाग पर हम सरकार में रहकर जनता की सेवा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमें संगठन के विस्तार और विकास के लिए अहर्निश काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि केरल, बंगाल, तमिलनाडु, त्रिपुरा, तेलंगाना और नार्थ-ईस्ट के राज्यों में भी हमें पार्टी को मजबूत करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि उत्तर-पूर्व के राज्यों के लिए हमने कई इनिशिएटिव लिए हैं और वहां की एक-एक जनता ने इसे ह्रदय से स्वीकारा है। उन्होंने कहा कि हमारा पुरुषार्थ जब जनादेश में परिवर्तित होती है, तभी इसे सफलता की संज्ञा दी जाती है। उन्होंने कहा कि जहां हम चूक गए हैं, वहां हम और मजबूती के साथ प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में पहुंचें, चारों तरफ कमल ही कमल दिखाई दे। उन्होंने कहा कि हम जनता को विश्वास दिलाना चाहते हैं कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी केवल और केवल देश के विकास के लिए काम करेगी और भारत को एक बार फिर से ‘विश्वगुरु’ के पद पर प्रतिष्ठित करने का काम करेगी।


Truth Of Diebetes


*Diebetes...*
क्या आप जानते हैं, *1997 से पहले fasting diebetes की limit 140 थी।*
फिर *fasting sugar की limit 126 कर दी गयी।*
इससे *world population में 14% diebetec लोग बढ़ गए।*
उसके बाद *2003 में Asso. ने फिर से fasting sugar की limit कम करके 100 कर दी।*
याने फिर से *total popolation के करीबन 70% लोग diebetec माने जाने लगे।*
दरअसल *diebetes ratio या limit तय करने वाली कुछ pharmaceutical कंपनियां थीं*
*अपना business बढ़ाने के लिए ये किया जाता रहा।*
लेकिन क्या आपको पता है
कि
*Actually diebetes कैसे count करनी चाहिए ?*
*कैसे पता चलेगा कि आप diebetec हैं या नहीं ?*
पुराने जमाने के इलाज़ के हिसाब से
*diebetes count करने का एक सरल उपाय है*
*आप की age + 100*
जी हाँ
यही एक सचाई है
*अगर आपकी उम्र 65 है तो आपकी sugar level after food होनी चाहिए 165*
*अगर आपकी age 75 है तो आपकी normal sugar level होनी चाहिए after food 175*
*अगर ऐसा है तो इसका मतलब आपको diabetes नहीं है।*
ये होता है age के हिसाब से यानी..
*you can count ur diebetec limit as 100 + your age.*
*even if ur age is 80*
*Ur diebetec limit is counted as 180 after food.*
*Means if ur sugar level at this age is 180 even though u are not a diebetec.*
U can be counted as a Normal human.
*But many grps of companies and asso.have changed the sugar level mostly for their business*
No any dr.can guide u.
No one will advice u
*But its a truth...*
उसके साथ साथ एक सच ये भी है कि,
*अगर आपका digestion power अच्छा है*
*आपको कोई टेंशन नहीं है*
*या आप कोई टेंशन नहीं लेते।*
*आप अच्छा खाना खाते हो*
*आप junk food.spicy.heavy oily food नहीं खाते*
*आप regular yoga या exercise करते हैं*
*और आपका वजन आपकी lenght के हिसाब के बराबर है यानि लगभग same है*
*तो आपको diebetes हो ही नहीं सकती।।*
यही एक pure सच है। बस टेंशन न लें अच्छा खाना खाएं
Exercise करते रहें,
💐 and then.
*be happy*
*be healthy*
*Always...*
*So please TAKE CARE of You and Yours.....*
---------------------------------------

What is Diabetes?
Diabetes is a disease that occurs when your blood glucose, also called blood sugar, is too high. Blood glucose is your main source of energy and comes from the food you eat. Insulin, a hormone made by the pancreas, helps glucose from food get into your cells to be used for energy. Sometimes your body doesn’t make enough—or any—insulin or doesn’t use insulin well. Glucose then stays in your blood and doesn’t reach your cells.

Over time, having too much glucose in your blood can cause health problems. Although diabetes has no cure, you can take steps to manage your diabetes and stay healthy.

Sometimes people call diabetes “a touch of sugar” or “borderline diabetes.” These terms suggest that someone doesn’t really have diabetes or has a less serious case, but every case of diabetes is serious.

What are the different types of diabetes?

The most common types of diabetes are type 1, type 2, and gestational diabetes.

Type 1 diabetes

If you have type 1 diabetes, your body does not make insulin. Your immune system attacks and destroys the cells in your pancreas that make insulin. Type 1 diabetes is usually diagnosed in children and young adults, although it can appear at any age. People with type 1 diabetes need to take insulin every day to stay alive.

Type 2 diabetes

If you have type 2 diabetes, your body does not make or use insulin well. You can develop type 2 diabetes at any age, even during childhood. However, this type of diabetes occurs most often in middle-aged and older people. Type 2 is the most common type of diabetes.

Gestational diabetes

Gestational diabetes develops in some women when they are pregnant. Most of the time, this type of diabetes goes away after the baby is born. However, if you’ve had gestational diabetes, you have a greater chance of developing type 2 diabetes later in life. Sometimes diabetes diagnosed during pregnancy is actually type 2 diabetes.

Other types of diabetes

Less common types include monogenic diabetes, which is an inherited form of diabetes, and cystic fibrosis-related diabetes .

How common is diabetes?

As of 2014, 29.1 million people in the United States, or 9.3 percent of the population, had diabetes. More than 1 in 4 of them didn’t know they had the disease. Diabetes affects 1 in 4 people over the age of 65. About 95 percent of cases in adults are type 2 diabetes.1

Who is more likely to develop type 2 diabetes?

You are more likely to develop type 2 diabetes if you are age 45 or older, have a family history of diabetes, or are overweight. Physical inactivity, race, and certain health problems such as high blood pressure also affect your chance of developing type 2 diabetes. You are also more likely to develop type 2 diabetes if you have prediabetes or had gestational diabetes when you were pregnant. Learn more about risk factors for type 2 diabetes.

What health problems can people with diabetes develop?

Over time, high blood glucose leads to problems such as

heart disease
stroke
kidney disease
eye problems
dental disease
nerve damage
foot problems
You can take steps to lower your chances of developing these diabetes-related health problems.

References

1Centers for Disease Control and Prevention. National diabetes statistics report: estimates of diabetes and its burden in the United States, 2014 website. www.cdc.gov/diabetes/data/statistics/2014StatisticsReport.html . Updated May 15, 2015. Accessed August 18, 2016.

November 2016

बुधवार, 12 अप्रैल 2017

कण कण सूं गूंजे, जय जय राजस्थान



ओ गोरे धोरा री धरती रो, पिच रंग पाड़ा री धरती रो
पितळ पाथळ री धरती रो, मीरा कर्माँ री धरती रो
कितरो, कितरो मैं कराँ रे बखाण
कण कण सूं गूंजे, जय जय राजस्थान

घर गूंज्या भाई धर्मजला
घर गूंज्या भाई धर्मजला
धर्मजला भाई धर्मजला हो हो

कोटा बूंदी भलो भरतपुर, अलवर और अजमेर
कोटा बूंदी भलो भरतपुर, अलवर और अजमेर
पुष्कर तीरथ बडो के जिणरी महिमा चारो उमेर
दे अजमेर शरीफ औलिया ... (२), नित सत रो परमाण
कितरो, कितरो मैं कराँ रे बखाण
कण कण सूं गूंजे, जय जय राजस्थान

घर गूंज्या भाई धर्मजला
घर गूंज्या भाई धर्मजला
धर्मजला भाई धर्मजला हो हो

दशों दिशा वा में गूंजे रे, वीरां रो गुणगान
दशों दिशा वा में गूंजे रे, वीरां रो गुणगान
हल्दीघाटी अर प्रताप रे तप पर जग कुर्बान
चेतक अर चित्तौड़ पर सारे .. (२) जग ने है अभिमान
कितरो, कितरो मैं कराँ रे बखाण
कण कण सूं गूंजे, जय जय राजस्थान

घर गूंज्या भाई धर्मजला
घर गूंज्या भाई धर्मजला
धर्मजला भाई धर्मजला हो हो

उदियापुर में एकलिंगजी, गणपति रणथम्भोर
उदियापुर में एकलिंगजी, गणपति रणथम्भोर
जयपुर में आमेर भवानी, जोधाणे मंडौर
बिकाणे में करणी माता ... (२), राठोडा री शान
कितरो, कितरो मैं कराँ रे बखाण
कण कण सूं गूंजे, जय जय राजस्थान

घर गूंज्या भाई धर्मजला
घर गूंज्या भाई धर्मजला
धर्मजला भाई धर्मजला हो हो

आबू छत्तर तो सीमा रो रक्षक जैसलमेर
आबू छत्तर तो सीमा रो रक्षक जैसलमेर
इण रे गढ़ रा परपोटा है बाँका घेर घुमेर
घर घर गूंजे मेडतणी ... (२), मीरा रा मीठा गान

कितरो, कितरो मैं कराँ रे बखाण
कण कण सूं गूंजे, जय जय राजस्थान

घर गूंज्या भाई धर्मजला
घर गूंज्या भाई धर्मजला
धर्मजला भाई धर्मजला हो हो

राणी सती री शेखावाटी, जंगल मंगल करणी
राणी सती री शेखावाटी, जंगल मंगल करणी
खाटू वाले श्याम धणी री महिमा जाए न बरणी
करणी बरणी रोज चलावे ... (२) वायड री संतान
कितरो, कितरो मैं कराँ रे बखाण
कण कण सूं गूंजे, जय जय राजस्थान

घर गूंज्या भाई धर्मजला
घर गूंज्या भाई धर्मजला
धर्मजला भाई धर्मजला हो हो

गोगा पाबू तेजो दांडू, झाम्भोजी री वाणी
गोगा पाबू तेजो दांडू, झाम्भोजी री वाणी
रामदेव के पर्चा री लीला किणसूं अणज्ञाणी
जेमल पत्ता भामाशा री ... (२) आ धरती है खाण
कितरो, कितरो मैं कराँ रे बखाण
कण कण सूं गूंजे, जय जय राजस्थान

घर गूंज्या भाई धर्मजला
घर गूंज्या भाई धर्मजला
धर्मजला भाई धर्मजला हो हो

वीर पदमणी, हाड़ी राणी, जेडी सतियाँ जाई
वीर पदमणी, हाड़ी राणी, जेडी सतियाँ जाई
जोधा दुर्गा दाससा जन्म्या, जन्मी पन्ना धाई
जौहर और झुंझार सूं होवे... (२) इणरी खरी पिछाण
कितरो, कितरो मैं कराँ रे बखाण
कण कण सूं गूंजे, जय जय राजस्थान

घर गूंज्या भाई धर्मजला
घर गूंज्या भाई धर्मजला
धर्मजला भाई धर्मजला हो हो

ओ गोरे धोरा री धरती रो, पिच रंग पाड़ा री धरती रो
पितळ पाथळ री धरती रो, मीरा कर्माँ री धरती रो
कितरो, कितरो मैं कराँ रे बखाण
कण कण सूं गूंजे, जय जय राजस्थान

घर गूंज्या भाई धर्मजला
घर गूंज्या भाई धर्मजला
धर्मजला भाई धर्मजला हो हो 

शुक्रवार, 7 अप्रैल 2017

इंद्रेश कुमार : कांग्रेस ने भगवा और हिंदुत्व को बदनाम किया



आज नहीं तो कल होंगे पाकिस्तान के टुकड़े - इंद्रेश कुमार

बुधवार, 05 अप्रैल 2017

कैथल। केंद्र में पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने सुरक्षा एजेंसियों का जमकर दुरुपयोग किया और अब समय के साथ ये बात सबके सामने आ चुकी है। ये कहना है आरएसएस के राष्ट्रीय प्रचारक इंद्रेश कुमार का।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस की न्याय व जांच में आस्था नहीं है। वोट की राजनीति के लिए कांग्रेस ने भगवा और हिंदुत्व को बदनाम किया। साथ ही आरएसएस और देशभक्तों को निशाने पर भी लिया। वे बुधवार को कैथल में ढांड रोड स्थित अरुण सराफ के निवास पर पत्रकारों से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जिस एफआईआर में उसका नाम भी नहीं था, जानबूझकर उस मामले को कोर्ट में घसीटा गया। कोर्ट ने भी यह बात मानी है और उन्हीं तथ्यों के आधार पर माननीय कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया।

उन्होंने कहा कि अजमेर शरीफ के गद्दीनशीन प्रमुख ने भी बहुत समय पहले कहा कि था कि सरकार गलत कर रही है। कई जगह अब ये सवाल भी उठने लगा है कि उन पर कानूनी कार्यवाही की जाए। लेकिन देशभर की जनता ने उन्हें सजा दे दी है। यही कारण है कि अब वे अपनी ओर से किए गए अन्याय और पाप कार्मों की सजा भुगत रहे हैं। ऐसे में जिस वोट बैंक को वो खरीदना चाहते थे, उस चाल में वो सफल नहीं हो पाए।

हरियाणा को लेकर इंद्रेश कुमार ने कहा कि हरियाणा में भी तीन परिणाम देखने को मिल रहे हैं। इनमें सादगी व सरलता वाली सरकार, जातिवाद से ऊपर उठकर काम करने वाली सरकार औश्र नौकरियों में पादर्शिता की बात मुख्य रूप से देखने को मिल रही है। हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन पर इंद्रेश ने कहा कि कुछ बाहरी लोग हरियाणा के भाईचारे को खराब कर रहे हैं, ये ठीक नहीं है।

प्रदेश का भाईचारा खराब करने, तोड़फोड़ करने, नुकसान पहुंचाने वाले लोगों को हमें हरियाणा से खदेड़ना चाहिए। उन्होंने आने वाले समय में पाकिस्तान के भी टूकड़े होने की बात कही। राममंदिर को लेकर उन्होंने कहा कि इस दिशा में माहौल तैयार हो रहा है और कोर्ट ने भी माना है कि यहां कभी मंदिर था और इस्लाम धर्म भी यहीं कहता है कि दूसरे के धर्म को तोड़कर अपना धर्मस्थल बनाना गलत है।

रविवार, 2 अप्रैल 2017

‘‘भेद रहित समाज का निर्माण होने वाला है’’- सरसंघचालक परमपूज्य श्री मोहनराव भागवत



‘‘भेद रहित समाज का निर्माण होने वाला है’’

- संघ के सरसंघचालक परमपूज्य श्री मोहनराव भागवत  

दिंनाक: 27 Mar 2017

http://panchjanya.com

फिर कोई अन्याय करने वाला खड़ा न होना सके— इसका इंतजाम होना चाहिए। यह सब इसलिए करना है ताकि संपूर्ण समाज एक हो सके। आपस में दुर्भावना बढ़ाने वाली भाषा नहीं होनी चाहिए। फिर व्यवस्था में इस दृृष्टि से जो-जो प्रावधान किए जाते हैं, या करने के सुझाव आते हैं, वे प्रावधान लागू हों। इस प्रक्रिया में सबको समाहित करते हुए, किसी की राह देखे बिना, नित्य व्यवहार में इसका प्रकटीकरण शुरू कर दें, तो फिर ये कार्य जल्दी हो जाएगा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत के ‘एक मंदिर, एक श्मशान और एक कुआं’ के भेदभाव दूर करने के आह्वान ने सामाजिक समरसता और सौहार्द के लिए एक नई कार्य दिशा दिखाई है। संघ से बाहर के बहुत से लोग भी इस पहल का स्वागत कर रहे हैं। तृतीय सरसंघचालक बालासाहब देवरस, जिन्होंने इस सुधारवादी विचार को सामाजिक बल प्रदान करने हेतु जो  गति दी थी, उसे आज श्री भागवत आगे ले जा रहे हैं। कोयम्बटूर में संपन्न रा.स्व.संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा के अवसर पर पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर एवं आर्गेनाइजर के संपादक प्रफुल्ल केतकर ने उनसे बालासाहब देवरस, समरसता में उनके योगदान और आगे की दिशा में बातचीत की। प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश :-

 समरसता संघ के स्वभाव में 1925 से ही रही है। आगे चलकर इस आग्रह के पीछे बालासाहब देवरस बड़ी प्रेरणा रहे। उनके योगदान को आप कैसे देखते हैं?

 हिन्दू संगठन समरसता के बिना असंभव ही है और इसलिए संपूर्ण हिन्दू समाज को एक करने के लिए उसकी दृष्टि भेदविहीन होनी, आवश्यक है। इसलिए समरसता की दृष्टि संघ के स्वभाव में ही है। परंतु संघ की शक्ति क्रमश: बढ़ी है। संघ में तो संघ के जन्म से ही यह व्यवहार है, परंतु बालासाहब जब सरसंघचालक बने, उस समय समाज द्वारा संघ से कुछ सुनने और कुछ मात्रा में उस पर विचार करने और प्रयोग करने की स्थिति भी बन रही थी। आज संघ की बात समाज सोचेगा, करेगा इसका परिमाण बहुत बड़ा है, तब उतना बड़ा नहीं था, लेकिन इसका प्रारंभ हो चुका था। संघ का यह समतामूलक, समरसतामूलक दृष्टिकोण समाज के लिए भी आवश्यक है। (यह दृष्टिकोण) समाज में भी जाना चाहिए। इस दृष्टि से सरसंघचालक बनते ही बालासाहब ने विषय रखा कि अब संघ का मुख्य ध्येय सामाजिक समरसता है। इसकी स्पष्टता स्वयंसेवकों में भी हो और समाज में भी हो, इसलिए बालासाहब ने बहुत सोच-समझकर वसंत व्याख्यानमाला का भाषण कुछ महीनों तक तैयारी के बाद दिया। संघ का इसके बारे में विचार, व्यवहार तो पहले से था लेकिन पीछे जो विचार प्रक्रिया थी, वह स्वयंसेवकों को भी स्पष्ट हो गई और समाज में भी एक संदेश गया।

संघ के इस आग्रह का समाज पर कैसा प्रभाव रहा?
यह सबको पता है कि संघ हिन्दुत्ववादी है। अब हिन्दू के साथ यह भेदभाव वाली बात चिपकाई जाती है तो फिर संघ का दृष्टिकोण क्या होगा? ऐसा मानने वाले लोग समाज में थे कि निश्चित ही यह जात-पात का समर्थन करने वाला, भेदभाव का समर्थन करने वाला संगठन होगा। तब संघ में इस बारे में, समाज के लिए सार्वजनिक रूप से बहुत चर्चा की गई। इस तरह के प्रश्न भी थे और समाज में उन प्रश्नों का लाभ लेकर संघ की खाल उधेड़ने वाले लोग भी थे। किन्तु जब बालासाहब ने (वसंत व्याख्यामाला, 8 मई, 1974, पूना में) स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह भेदभाव जड़-मूल से खत्म (छङ्मू‘, २३ङ्मू‘ ंल्ल िुं११ी’) हो जाना चाहिए, तो ये सारे प्रश्न एकदम समाप्त हो गए। इससे समाज में अपनी भूमिका रखने के लिए स्वयंसेवकों में एकदम हिम्मत आ गई। व्यवहार तो दिख ही रहा था परंतु इसके पीछे वैचारिक कल्पना कौन सी है, क्या है, इसकी स्पष्टता सामान्य स्वयंसेवकों को नहीं थी। (बालासाहेब का) भाषण है, जिसमें यह सारी बातें हैं कि वैचारिक परिकल्पना क्या है, क्या व्यवहार अपेक्षित है, क्या-क्या होना चाहिए। इससे स्वयंसेवकों के सामने विषय स्पष्ट हो गया। हमारा कहना क्या है, उस बारे में भी उनका आत्मविश्वास बढ़ गया। समाज में शंकाओं पर प्रामाणिक लोगों के लिए विराम लग गया। इस प्रकार एक बहुत बड़ी सुविधा बन गई। सामाजिक समता के संघर्ष में अन्य लोग स्पष्ट भूमिका नहीं ले पाए, लेकिन भेदभाव के शिकार समाज के साथ संघ के स्वयंसेवक स्पष्ट रूप से खड़े रहे, ऐसे अनेक प्रसंग हैं।

  वसंत व्याख्यानमाला में बालासाहब के ऐतिहासिक उद्बोधन के बाद संघ कार्य में कौन-कौन से नए आयाम जुड़े?
 समाज के साथ जब कार्य शुरू हुआ तो स्वाभाविक रूप से अनेक बातों में नए आयाम जुड़े। समाज के इस भेदभाव के शिकार वर्ग की समस्याएं क्या हैं? उनका मन क्या है? और जो समाज में एक खाई उत्पन्न हुई है, उसके बारे में, उसे पाटने के उपाय क्या होने चाहिए,  इस बारे में चिंतन शुरू हुआ। उसमें से सामाजिक समरसता मंच जैसी गतिविधि शुरू हुई। विशेषकर जो वर्ग हिन्दू समाज, हिन्दू वगैरह बातों से दूर रहने की मानसिकता में था, उसके साथ संपर्क करना, उसको समझाना-बुझाना, उसको शाखाओं में लाना, इसके प्रयत्न ज्यादा बड़े हो गए। इसके फलस्वरूप ऐसे वर्गों का आत्मसम्मान का जो संघर्ष था, उसमें हिन्दू संगठन करने वालों की धारा का बल भी कहीं-कहीं जुड़ने लगा।

 सामाजिक विभेदों को दूर करने के लिए और उपाय
होने चाहिए?
एक सदा के लिए चलने वाला उपाय है कि अपने व्यक्तिगत, पारिवारिक, आजीविका के और सामाजिक आचरण में, सभी भेदभावों को नकारते हुए उचित भूमिकाएं लेना। प्रत्यक्ष व्यवहार की बातों के लिए अपनी आदत बदलना। जैसे अनेक भाषाओं में जातिवाचक मुहावरे हैं। भेदभाव का जो युग था, उसमें तथाकथित ऐसी जातियों, जिनको पिछड़ा कहा जाता था, अस्पृश्य कहते थे, ऐसी जातियों को जरा छोटा स्थान देने वाली कहावतें, मुहावरे हैं। हम उनका उपयोग करते हैं, तो उसके पीछे निहित द्वेषभाव चाहे नहीं लाते हैं, परंतु शब्द तो अस्तित्व में है और जो भेदभाव के शिकार हुए हैं, उनके हृदय में घर कर गए हैं। हमको ऐसी आदतें बदलनी पड़ेंगी। मन और विचार सहमत होने के बावजूद शरीर की आदत हो जाती है, वह बदलनी होगी। बोलने की आदत बदलनी पड़ेगी। हमारा व्यवहार पुरानी विषमता को त्यागकर समतायुक्त हुआ कि नहीं -लोग इसकी परीक्षा करेंगे। खासकर वे लोग इसकी परीक्षा करेंगे, जिनको हमको जोड़ना है, जिन अपनों को फिर से अपना बनाना है। सहज व्यवहार में भी अपने आप को परिष्कृत बनाकर प्रयोग करना होगा। उदाहरणार्थ- मान लीजिए, मैं किसी के घर गया। मुझे प्यास नहीं है, पानी आया और मैंने कहा, पानी नहीं पीना है, तो मेरे हृदय में भले ही कुछ न हो, लेकिन वहां शंका खड़ी होती है कि हमारे यहां पानी नहीं पीना चाहते। पूजनीय गुरुजी ने एक बार बहुत अच्छा उदाहरण प्रस्तुत किया। एक स्वयंसेवक ने कहा कि मेरी झोंपड़ी में आएं, चाय पीने के लिए, पास में ही है। वह झोंपड़ी में रहने वाला स्वयंसेवक था। गुरुजी ने कहा, चलो। एक तो ऐसा वर्ग, दूसरा बहुत गरीब। गुरुजी गए तो एक-दो कार्यकर्ता भी साथ थे। आधी झोंपड़ी में यह भी दिख रहा था कि घर की माता चाय बना रही है। बर्तन गंदा जैसा था, छलनी नहीं थी, कपड़े से चाय छानी गई, कपड़ा भी कैसा था, चाय आई तो एक ने कहा, मैं चाय नहीं पीता, दूसरे ने कहा, सुबह से बहुत चाय पी चुका हूं। गुरुजी ने चाय पी ली। बाहर जाने के बाद कार्यकतार्ओं ने पूछा, गुरुजी आपने ऐसी चाय कैसे पी ली? गुरुजी ने कहा, आप लोग उसकी चाय देख रहे थे! मैं तो उसका प्रेम पी रहा था। यही सहजता रखिए। प्रेम-सम्मान समाज की जरूरत है। तो अपने व्यवहार को ऐसा रखना चाहिए जिससे उनकी प्रेम-सम्मान की अपेक्षा की पूर्ति हो। ऐसे व्यवहार की आदत डालनी पड़ेगी। दूसरा, सार्वजनिक जीवन में ऐसे प्रश्न आते हैं। अंतरजातीय विवाह होता है, विरोध भी खड़ा होता है। संघ के स्वयंसेवक उसके समर्थन में खड़े दिखने चाहिए। होना भी चाहिए और सामान्यत: ऐसा है भी। यदि कोई अंतरजातीय विवाहों के संदर्भ में सर्वेक्षण करे तो सबसे ज्यादा स्वयंसेवक ही मिलेंगे। अनौपचारिक चर्चा में कई बार यह अनुभव देखने में आया है। महाराष्ट्र का जो पहला अंतरजातीय विवाह था उससे दो संदेश गए थे। एक डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का और दूसरा गुरुजी का। गुरुजी ने संघ के स्वयंसेवकों को ये लिखा था कि जो शारीरिक आकर्षण के चलते नहीं, बल्कि समाज में जो जाति प्रथा है, उसका विरोध दर्ज करने के लिए अंतरजातीय विवाह कर रहे हैं, मैं उनके इस अंतरजातीय विवाह का समर्थन भी करता हूं और अंतरजातीय विवाह को शुभकामनाएं भी देता हूं।
संघ के स्वयंसेवकों की इस प्रकार की भूमिका सार्वजनिक रूप से होनी चाहिए। स्वयंसेवक को किसी तात्कालिक भावनाओं में न बहते हुए, अहंकार में, इधर-उधर की चपेट में नहीं आना चाहिए। संघ के स्वयंसेवक समाज की एकात्मता, अखंडता, समरसता को ध्यान में रखकर भूमिका तय करें और उसका निर्भय रूप से निर्वहन करें, इसकी आवश्यकता है।

 समरसता की राह में कठिनाइयां क्या हैं?
 सबसे बड़ी जरूरत आदत बदलने की है। दो हजार वर्षों से हम जो कर रहे हैं, उसमें कई बातों में धर्म के नाम पर अधर्म हो रहा है। अपनी पुरानी बातों का मोह यदि छोड़कर नहीं जाता, तो उस मोह को तोड़कर, सत्य के साथ खड़ा होना पड़ेगा। बालासाहब ने सिरे से कह दिया - जड़-मूल से खत्म (छङ्मू‘, २३ङ्मू‘ ंल्ल िुं११ी’)। भेदभाव का विषय सामने ऐसे आता है कि प्राचीन ब्राह्मण व्यवस्था ने मुझ पर अन्याय किया। वे स्वार्थी लोग थे, अहंकारी लोग थे। पहली प्रतिक्रिया में पूर्वजों का बचाव करना स्वाभाविक प्रतिक्रिया है। वह कह रहा भेदभाव के निषेध की बात, उसके मन में हजारों वर्ष से चिढ़ है। चिढ़ को अनदेखा कीजिए। उसकी समता की बात का समर्थन कीजिए। क्योंकि अगर पूर्वज और परंपरा श्रेष्ठ है तो किसी के कहने से कोई आंच आने वाली नहीं है। अन्याय हो रहा है, तो उसका तो विरोध करना ही पड़ेगा। एक कार्यकर्ता से किसी ने एक बार कार्यक्रम में पूछा कि हिन्दू धर्म में प्रभु श्रीरामचन्द्र को आप बड़ा प्यारा मानते हैं, पर उन्होंने शंबूक वध किया, क्या उसका समर्थन करते हैं? तो हिन्दू के लिए यह बहुत टेढ़ा प्रश्न है। राम का निषेध करना, शंबूक वध का समर्थन करना-ये पेच फंसता है। संघ का जो कार्यकर्ता था उसने कहा कि पहले तो मैं आपका अभिनंदन करता हूं क्योंकि जिन्होंने आपको प्रश्न पूछने के लिए पढ़ा कर भेजा है, तो इस प्रश्न के जरिए उन्होंने भी मान लिया कि राम नाम के कोई हुए भी थे। यह बहुत बड़ी बात है। दूसरी बात है कि राम ने शंबूक वध किया या नहीं किया? क्योंकि अनेक लोग मानते हैं कि यह पूरा प्रकरण ही उत्तरकांड का पक्षिप्त भाग है। लेकिन हम जिस राम की पूजा करते हैं, उस राम ने एक अन्यायी राक्षस का वध किया था। शंबूक वध हमारे लिए राम के आदर का विषय नहीं है और अगर कल ऐसा सिद्ध हुआ कि ऐसा किया था तो हम शंबूक वध के लिए राम का धिक्कार भी करेंगे। ऐसा उसने सीधा उत्तर दिया। एक स्पष्ट भूमिका लेनी चाहिए। इसमें पूर्वजों का अनादर नहीं होता है। सावरकरजी कहते थे कि गलत बातों के लिए पूर्वजों को दोषी मत कहो, लेकिन पूर्वजों की गलत बातों का आदरपूर्वक धिक्कार करो। परंपराओं के बारे में अपनी भूमिका आदरपूर्वक धिक्कार की होनी चाहिए। ऐसा वे कहते थे। ऐसी बातों में कठिनाई आती है, संकोच होता है। ऐसे व्यावहारिक प्रश्नों में यदि स्वार्थ मार खाता हो, तो स्वार्थ छोड़ कर भी, जो उचित है उसका समर्थन करना चाहिए। उसमें कई बार समाज भी विरोध में खड़ा होता है। तो इसको सीखना पड़ता है, इसका आदर करना पड़ता है। अपने मन में आवश्यक साहस बना रहे, इसका प्रयास करना चाहिए। दूसरी बात आती है कि हजारों वर्ष अन्याय के कारण वहां क्रोध है, द्वेष है ये जानते हुए भी अपना प्रेम बनाए रखते हुए धैर्यपूर्वक व्यवहार करना। भड़ास निकलने के बाद वह शांत होगा-इस विश्वास के साथ सोचना पड़ेगा। इसका लाभ लेकर वहां सतत मन कलुषित करने वाले लोग और प्रवृत्तियां रहती हैं। यह षड्यंत्र चल रहा है। इसका ठीक से बंदोबस्त हो जाए। इसलिए अपने स्नेह से वहीं पर इसको समझने वाले लोग खड़े हों। यह बाधा नहीं, व्यवस्था की आवश्यकता है। यह सतत कार्य है।

 आपने कहा कि समरसता सतत चलने वाला काम है। इसमें समाज के विभिन्न घटकों की क्या भूमिका हो सकती है?
ल्ल  एक तो बड़ा अच्छा उदाहरण दीनदयालजी ने रखा है कि गढ्डे में कोई गिरा है और उसको निकालना है तो ऊपर वाले को झुकना होगा। तभी वह हाथ दे सकता है। और नीचे वाले को अपनी ऐड़ियां उठाकर हाथ ऊपर उठाने होंगे। तभी वह उस हाथ को पकड़ सकता है। यह प्रयत्न शुरू हुआ है। ऊपर से झुकने का संकोच हटना चाहिए। ये एक बात है। ऊपर वाले घटक को झुकने का प्रयास रना चाहिए। और नीचे वाला घटक अपनी ऐड़ियां उठा कर हाथ ऊपर कर रहा है, उसमें उसकी जितनी मदद हो सकती हो, वह करनी चाहिए। दूसरा, ठंडे दिमाग से सोचना, बोलना, करना चाहिए। बालासाहब ने उस व्याख्यान में यह बात कही है कि अस्पृश्यता, अन्याय बहुत साफ है। आखिर अपना समाज एक है, यही मान्यता है न। समाज को एक रखना है, न कि अस्पृश्यता के शिकार लोग और अस्पृश्यता चलाने वाले लोग, इस प्रकार के दो वर्गों को हमेशा बनाए रखना है या झगड़ा बनाए रखना है। अगर झगड़ा नहीं बनाए रखना है, सर्वत्र शांति बनाए रखनी है, तो अपने-अपने विषय को भूलने वाले दोनों तरफ के लोगों को गाली-गलौज की भाषा छोड़नी पड़ेगी। इधर के लोगों को समझना पड़ेगा कि यह हजार वर्षों की चिढ़ बोल रही है। बहुत कठोर भाषा सुनने के बाद भी गुस्सा नहीं आने देना, यह इनको करना पड़ेगा। और इधर के लोगों को धीरे-धीरे समाज को गुस्सा आएगा, दूरी बढ़ेगी, ऐसा न करते हुए, यह अंतर कम हो ऐसी भाषा रखनी पड़ेगी। अन्याय का स्पष्ट उल्लेख करते हुए भी हम यह कर सकते हैं। नेतृत्व करने वाले लोगों को भी विवेक होना चाहिए कि यह अन्याय है, इसे समाप्त होना चाहिए, पूरी तरह समाप्त होना चाहिए। और फिर कोई अन्याय करने वाला खड़ा न होना सके- इसका इंतजाम होना चाहिए। यह सब इसलिए करना है ताकि संपूर्ण समाज एक हो सके। आपस में दुर्भावना बढ़ाने वाली भाषा नहीं होनी चाहिए। फिर व्यवस्था में इस दृष्टि से जो-जो प्रावधान किए जाते हैं, या करने के सुझाव आते हैं, वे प्रावधान लागू हों। इस प्रक्रिया में सबको समाहित करते हुए, किसी की राह देखे बिना, नित्य व्यवहार में इसका प्रकटीकरण शुरू कर दें, तो फिर ये कार्य जल्दी हो जाएगा।

सामाजिक परिवर्तन की इस प्रक्रिया में संघ की भविष्य की क्या योजनाएं हैं?
ल्ल  संघ की सबसे मूलगामी योजना प्रत्यक्ष व्यवहार के आधार पर सबको जोड़ना है। बाहर की परिस्थिति कुछ भी हो, समाज के सब वर्गों के लोग आपस में मित्र बनें। और जैसे एक वर्ग के लोगों में जो मित्र बनते हैं, फिर उनके परिवार भी मित्र बनते हैं, आना-जाना शुरू होता है, पारिवारिक आत्मीयता का व्यवहार होता है, उसी तरीके से सभी वर्गों के परिवार आपस में मिलते-जुलते रहें। ये जहां-जहां इस प्रकार का व्यवहार होता हो, ‘रोटी व्यवहार-बेटी व्यवहार’ तक में समता लाने का प्रयास होता हो, वहां-वहां अपना हाथ लगे, मदद हो, उसको बल मिले, उसकी विजय हो। यह हमारा कार्य है। अन्यायग्रस्तों का अन्याय जल्द से जल्द दूर हो। अपने व्यवहार के इस उदाहरण का समाज भी अनुकरण करे, इस उद्देश्य से समाज से बातचीत हो। इसलिए सर्वे करो, दुनिया के लोगों को बताओ कि यह ठीक नहीं है। उनको समझाओ। आपका व्यवहार भी लोग देखेंगे। उसके आधार पर समझेंगे तो उपाय होंगे।

 एक कुआं, एक मंदिर, एक श्मशान के आपके आह्वान के बाद आपको समाज के विभिन्न मत संप्रदायों के अग्रणी नेतृत्व से किस प्रकार की प्रतिक्रियाएं मिलीं?
 लगभग सारी प्रतिक्रयाएं अनुकूल रही हैं। विचार के तत्व को तो सौ प्रतिशत ने स्वीकार किया, लेकिन जिनको संघ की जानकारी नहीं है, अथवा जिनको विरोध ही करना है, उन्होंने इसके साथ ही जोड़ दिया कि अच्छा, अब जाग गए क्या?  अब तक कहां थे? यह एक प्रकार है। यानी मंदिर, पानी, श्मशान एक हो- इस बात का विरोध नहीं किया, लेकिन मेरे कहने पर शंका का एक प्रश्नचिन्ह लगा दिया। अथवा यह कहा कि यह केवल बोलने की बातें हैं। विषय का सीधा विरोध कहीं नहीं हुआ। बहुत सारा समाज इससे आनंदित हो गया। संघ के सरसंघचालक ऐसा कहते हैं- इस बात से अन्यायग्रस्त समाज में तो एक आशा का संचार हुआ। इसके पीछे एक वृत्तांत है। मेरे भाषण में यह बात आने के पहले मैं पलामुरू गया था, जो तेलंगाना में है। वहां बहुत बड़ी संख्या ऐसे वर्गों की है, उनमें स्वयंसेवक भी हैं। यहां तथाकथित वाम विचारों के, तथाकथित दलित कहलाने वाले एक नेता मंच पर थे। पहले मेरा भाषण और बाद में उनका भाषण हुआ। मैं तब सरकार्यवाह था। मुझे सामाजिक समरसता का विषय रखना ही था। उसके बाद उन्होंने सार्वजनिक भाषण में कहा कि मैं तो मानता था कि संघ सवर्णों का है। लेकिन यहां तो मैं देख रहा हूं संघ में बहुमत तो हमारा हो गया और वह भी पूर्णकालिक लोगों में। और संघ के ‘जनरल सेक्रेटरी’ का भाषण मैंने सुना है। संघ भी सार्वजनिक तौर पर ऐसा बोलता है, यह मैं पहली बार सुन रहा हूं। उन्होंने प्रश्न भी किया कि वास्तव में संघ की भूमिका है क्या? भाषण होने के बाद हम सब बैठे हुए थे तो मैंने उनको कहा, हमारी यही भूमिका पहले से है, उनको आश्चर्य हुआ। फिर बाद में संवाद भी बढ़ा। कार्यकर्ताओं से और कभी-कभी मेरे साथ भी। इसी तरह की गप-शप में मैंने एक बार कहा कि मंदिर, पानी, श्मशान का विषय समाज में पहले जाना चाहिए, क्योंकि समाज को इस विषय में रोज की अनुभूति होती है। उन्होंने कहा, यह बात आप बोल नहीं सकते। मैंने कहा, मैं बोलने वाला हूं, आप आइए। उस विजयादशमी के उत्सव में वे आए। यह देखने के लिए आए कि मैं यह बोलता हूं या नहीं। इसके बाद उन्होंने अपने लोगों को संबोधित करते हुए बहुत बार यह कहा कि संघ इस प्रकार सोचता है। संघ वालों को दूर मत रखो। इस तरह जो वास्तव में प्रामाणिक नेतृत्व है, जो किसी राजनीति का भाग नहीं है, लेकिन जो पक्का तथाकथित दलित है, उसको यह सुनकर आनंद होगा। संघ के प्रति आशा जगेगी। संघ में विश्वास जगेगा। सारे देश में संदेश जाएगा।

राजनीतिक अनुकूलता इसमें कितनी सहायक होती है?
राजनीतिक अनुकूलता इसमें एक ही पहलू में सहायक हो सकती है। जो लोग राजनीति में हैं, वे सोचकर कुछ करें तो सहायक होती है। जहां समता चाहने वाले लोग सत्ता में हैं, वहां अनुसूचित जाति और जनजातियों के लिए संविधान प्रदत्त अधिकारों के साथ जगह-जगह पर जो कानूनी प्रावधान हैं, वे ठीक से लागू हो जाएं। यदि सरकारें इतना ही देख लें कि समय पर उनका धन आवंटित हो रहा है, योग्य व्यक्ति द्वारा कार्य हो रहा है, तो बहुत बड़ा काम हो जाएगा। यानी पचास प्रतिशत से ज्यादा उनकी दुर्व्यवस्था दूर हो सकती है। यह प्रावधान पहले से ही हैं। हम मानते हैं जहां-जहां सरकारों में स्वयंसेवक हैं, वहां उनका ध्यान इस ओर ज्यादा रहे। यह करना उनके हाथ में है, हम इसके लिए आग्रह कर सकते हैं, और कर भी रहे हैं।

समाज समरस हो, एकात्म हो, इसके लिए समाज अपने सामने क्या उदाहरण रख सकता है, उसकी प्रेरणा क्या होगी?
 वास्तव में जो प्रेरणा है वह हमारी संस्कृति में है- सत्य, करुणा, शुचिता, तपस्या-धर्म के ये चार पात्र हैं। सत्य क्या है? सत्य हमारी सबसे बड़ी मान्यता है कि सबमें एक ही तत्व है और उसी का आविष्कार सब हैं। कोई छोटा-बड़ा नहीं, कोई अपना-पराया नहीं। सब अपने ही हैं। अब इसका स्वभाविक परिणाम है कि यदि कोई दुर्व्यवस्था हो तो अपनों के लिए करुणा मन में होनी ही चाहिए। धर्म यानी समाज की धारणा इन दो तत्वों से शुरू होती है कि सब मेरे ही अपने हैं, मैं ही सब में हूं, सब मुझमें हैं और इसलिए कोई दुर्व्यवस्था में न रहे, यह देखना मेरा काम है। यह करुणा आत्मीयता से उपजती है। ऐसा व्यक्ति यदि पवित्र है, स्वार्थी नहीं है, विकारों से दूषित नहीं है, लोभ-दंभ, मोह, काम-क्रोध उसमें नहीं है तो वह अपना जीवन लोक कल्याणकारी ही बनाएगा। लोक कल्याणकारी जीवन उसे धर्म की धारणा देगा। इसलिए धर्म यानी समाज की धारणा-इन चार बातों का ध्यान रखना चाहिए। यह हमारी संस्कृति का आदेश है। तथागत ने यही कहा है, भगवद्गीता में यही बात कही गई है। श्रीभगवत्पुराण यही कहता है। शिवपुराण यही कहता है। हमारी जितनी भारतीय विचारधाराएं हैं, उनके दर्शन अलग-अलग हैं। जगत के मूल में जड़ है या चेतन है, इसका चिंतन अलग है। लेकिन प्रत्यक्ष व्यवहार में सभी का आदेश सत्य है। यह केवल लिखित नहीं है। हमारे हजारों संतों ने ऐसा जीवन व्यतीत किया है। यह पुरानी बात नहीं है। आधुनिक संतों ने भी यही कहा है। स्वामी विवेकानंद ने वाराहनगर मठ के काम करने वाले मजदूरों को अपने हाथ से सुग्रास भोजन करवाया। उसका उत्सव मनाया। सबको बताया कि असली नारायण तो यही हैं। पीड़ा कैसी होती है, यह अनुभव करने के लिए गाडगे बाबा किसी बावड़ी पर जाते थे और पानी मांगते थे। किसान कहता था कि अभी मैं आराम कर रहा हूं, पानी पीना हो, तो तुम रस्सी से खींच लो। वह पानी खींचते थे। कई बार उनके पानी पीते समय किसान को याद आती थी कि वह किस जाति के हैं। गाडगे बाबा अपनी जाति जान-बूझकर नहीं बताते थे और मार खाते थे। डॉ. बाबासाहब आंबेडकर ने भी ऐसा बहुत बार किया। ऐसे संत आधुनिक समय में भी हमारे यहां हैं। उनका प्रत्यक्ष जीवन है। सब त्याग करके और सब दुख सहन करके भी इस रास्ते पर चलते हैं। यह बहुत बड़ी प्रेरणा है। ये समाज मेरा अपना है। देश मेरा अपना है। यह क्या कम बड़ी प्रेरणा है! मेरे अपने लोग ऐसे ही रहे, तो मेरा नाम किस काम का। क्या रहेगा दुनिया में? मैं भारत से विदेश में जाता हूं, तो भारत में जात-पात का इतना बड़ा भेद है, यह बात मेरी गर्दन झुकाएगी या ऊंची करेगी? समाजभक्ति, देश भक्ति, संस्कृति भक्ति यह बहुत बड़ी बातें हैं।

 भारतीय दर्शन की बात करें, तो विविधता में एकता हिन्दू समाज की शक्ति है, इसमें भेद पैदा करने की होड़ क्यों बढ़ रही है?
 भेद पैदा होने का एक कारण तो अपनी आत्मविस्मृति है। मैं आपको अपना प्रतिद्वंद्वी मानने लगूं, तो स्वाभाविक तौर पर, अपनी हित रक्षा के स्वार्थ में मैं आपकी हित रक्षा की अनदेखी करने लगूंगा, कभी-कभी आपके हित का विरोध भी करूंगा। देश पर आक्रमण करने वाला, जो कम से कम उस दिन तो आपका और मेरा दोनों का विरोधी होता है। लेकिन आपस में भेद होने के कारण  मैंने ऐसा नहीं माना, और आपको नीचा दिखाने के लिए मैंने उसको बुला लिया। बाबासाहब आंबेडकर ने भी संविधान सभा की बहस में यही कहा कि किसी ने अपने बल पर भारत को नहीं जीता। हमारे अपने भेदों के कारण वे जीते और गद्दारी के कारण हमने अपना देश उनके हवाले किया। यह हमारे देश के इतिहास का हिस्सा रहा है। इसकी पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए। यह हमारी आत्मविस्मृति की पराकाष्ठा है। फिर से हम उस ज्ञान का स्मरण करें कि हम एक हैं। इन भेदों को और चौड़ा करने वाली निहित स्वार्थी शक्तियां देश के अंदर और देश के बाहर बहुत हैं। जहां-जहां लोगों को बांट कर लाभ हो सकता है, वहां-वहां लोगों को बांटना और उनके बंटवारे की आग पर अपने स्वार्थ की रोटियां सेंकना— ऐसा करने वाले लोग और स्वार्थी शक्तियां रहती हैं। ये लोग उसका लाभ लेते हैं। मैं समझता हूं कि बार-बार ऐसा करने वाले लोगों के बजाए ज्यादा उचित होगा कि हम लोगों का ध्यान इस पर हो कि हमको यह याद रखना है और याद रखके उचित व्यवहार करना है।

आप देश में लगातार प्रवास करते हुए समरसता का विषय रख रहे हैं। आप इसका फलित कैसे देखते हैं?
ल्ल  देखिए, मुझे लगता है कि समरसता पर आग्रह रखें और इन बातों के पीछे अपना व्यवहार सब पहलुओं पर स्थापित करें, वही हम लोग कर रहे हैं। इससे एक दिन यह बात सिरे चढ़ेगी और समाज इसको मानेगा। क्योंकि लोगों को बांटने वाले और उस पर अपना खेल खेलने वाले लोग बहुत थोड़े दिन के हैं। और ऐसे थोड़े लोग हैं जो ये सारी बातें समझकर एकदम आदर्श व्यवहार अपने आप कर रहे हैं। बीच का जो अस्सी प्रतिशत या नब्बे प्रतिशत समाज है, वह हवा के साथ इधर उधर झूलता है किन्तु मूल में मनुष्यता से परिपूर्ण है। इसलिए वह सद्प्रवृत्त है। सद्प्रवृत्ति की राह मिलेगी तो वह उधर जाएगा। सद्प्रवृत्ति की हवा जितनी जल्दी बनाएंगे, उतना जल्दी समाज उसी पर आ जाएगा, जो उचित है, सत्य है और न्यायपूर्ण है। मुझे लगता है कि, जैसा कि बाबासाहब कहते थे भेदरहित, समतायुक्त, शोषणमुक्त राष्ट्र व समाज का सपना लेकर हजार सालों में बहुत उठापटक हुई है। बहुत लोगों ने काम किया है। लेकिन तब से लेकर अब तक चले सारे प्रयासों का सम्मिलित फल आने वाले समय में हमें मिलने वाला है और भेदरहित समाज का निर्माण होने वाला है।

शुक्रवार, 31 मार्च 2017

चैत्र नवरात्रि : 40 साल से व्रत रख रहे हैं पीएम नरेंद्र मोदी





चैत्र नवरात्रि 2017: 40 साल से व्रत रख रहे हैं पीएम नरेंद्र मोदी, योगी आदित्य नाथ पहली बार गोरखपुर से बाहर कर रहे नवरात्र पूजा


प्रधानमंत्री मोदी की तरह की यूपी के नए सीएम योगी आदित्य नाथ भी है। योगी साल में दोनों बार नवरात्रि का व्रत रखते हैं और देवी मां की साधना करते हैं।

जनसत्ता ऑनलाइन नई दिल्ली | March 28, 2017

            हिन्दू नववर्ष और चैत्र नवरात्रि पर्व मंगलवार से प्रारंभ हो गया है। 28 मार्च मंगलवार को कलश स्थापना (घट स्थापना) के साथ 9 दिन तक आराधन का पर्व चलेगा। नवरात्र 28 मार्च से 5 अप्रैल तक चलेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और योगी आदित्य नाथ ने हर बार की तरह इस बार भी नवरात्रि का व्रत रखा। पीएम मोदी 40 सालों से नवरात्रि का व्रत रखते आ रहे हैं। साल 2012 में पीएम नरेंद्र मोदी ने ब्लॉग के जरिए बताया था कि वह पिछले 35 सालों से यह व्रत रखते हैं। इस दौरान वह अन्न और किसी भी तरह के मसालों का सेवन नहीं करते हैं। पूरे दिन काम करने के बाद वह शाम को नीबू पानी और कुछ फल खाते हैं। पूरे नवरात्र भर उनका यही शेड्यूल रहता है। देवी मां की भक्ति के साथ पीएम मोदी इस दौरान अपना काम भी करते हैं। पीएम मोदी ने उस समय भी उपवास रखा था, जब वह 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद अमेरिका की यात्रा पर गए थे। इसके चलते उनके लिए वहां पर मीनू में बदलाव किया गया था। खाने की जगह उन्हें नींबू पानी प्रदान किया गया था।

मोदी की तरह ही योगी भी
प्रधानमंत्री मोदी की तरह की यूपी के नए सीएम योगी आदित्य नाथ भी है। योगी साल में दोनों बार नवरात्रि का व्रत रखते हैं और देवी मां की साधना करते हैं। शारदीय नवरात्र में तो योगी 9 दिनों तक किसी से मुलाकात तक नहीं करते बस एक कमरे में रहते हैं और आराधना करते हैं। नवरात्रि पर योगी रोजाना सुबह तीन बजे उठते और दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं। इस दौरान वो अन्न नहीं खाएंगे, सिर्फ दूध-दही और फलाहार का ही सेवन करते हैं। इस दौरान योगी कन्या पूजन भी करते हैं। जिसमें कन्याओं के पैर धोते हैं, तिलक लगाते हैं फिर उन्हें भोजन कराते हैं।
पहली बार गोरखपुर से रहेंगे दूर
इस बार की नवरात्र में योगी पहली बार योगी आदित्य नाथ पूरे 9 दिन गोरखपुर में नहीं रहेंगे। दरअसल, सीएम बनने के बाद योगी लखनऊ स्थित सीएम हाउस, पांच कालिदास मार्ग पर नवरात्रि के दौरान रहेंगे और यहीं देवी मां की पूजा करेंगे। कहा जा रहा है कि योगी नवरात्र पर गोरखपुर जा सकते हैं। बताया जाता है कि अब तक सिर्फ एक बार ऐसा हुआ है जब योगी को गोरखपुर से बाहर जाना पड़ा था। कुछ साल पहले ट्रेन हादसे के कारण उन्हें घटनास्थल पर जाना पड़ा था।

-------------

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व सीएम योगी ने भी रखा नौ दिन का व्रत

2012 में पीएम मोदी ने एक ब्लॉग के जरिए बताया था कि वह पिछले 35 सालों से यह व्रत रखते आ रहे हैं

जनसत्ता ऑनलाइन March 28, 2017


मंगलवार से नवरात्री शुरू होने जा रहे हैं और हर बार की तरह इस बार भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सभी नौ दिन व्रत रखेंगे। वह पिछले चार से भी ज्यादा दशकों से नवरात्री व्रत रखते आ रहे हैं। उपवास के दिनों में पीएम केवल एक फल खाते हैं और नींबू पानी पीते हैं। इस दौरान वे अन्‍न और मसालें नहीं खाते हैं। हिन्दू संस्कृति से जुड़े देश भर के अन्य लोगों के साथ पीएम मोदी भी पूरा दिन सिर्फ गर्म पानी पीकर ही काम चलाएंगे। 2012 में पीएम मोदी ने एक ब्लॉग के जरिए बताया था कि वह पिछले 35 सालों से यह व्रत रखते हैं।
इतना ही नहीं, 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद जब वह अमेरिकी यात्रा पर गए थे तब भी उन्होंने अपनी इस आस्था को नहीं तोड़ा था। इसके चलते उनके लिए वहां पर मीनू में बदलाव किया गया था। खाने की जगह नींबू पानी प्रदान किया गया था। वहीं,  2015 में नरेंद्र मोदी ने नवरात्रि के पहले दिन असम के मशहूर कामाख्या देवी मंदिर में पूजा-अर्चना कर अपने व्रत की शुरुआत की थी। भारतीय परंपरा के अनुसार चैत्र महीने की शुक्‍ल पक्ष की प्रतिपदा यानि पहली तारीख से नया साल शुरू होता है। इसी दिन से चैत्र नवरात्र भी शुरू हो जाता है जो कि रामनवमी तक चलता है। इन नौ दिनों तक हिंदू व्रत रखते हैं। उपवास के दौरान अन्‍न नहीं खाया जाता है।

पीएम मोदी साल के दोनों नवरात्र (चैत्र और शारदीय) में व्रत रखते हैं। सिर्फ पीएम मोदी ही नहीं, उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी नवरात्री का व्रत पूरी निष्ठा के साथ रखते हैं। शारदीय नवरात्र में तो योगी 9 दिनों तक किसी से मुलाकात तक नहीं करते बस एक कमरे में रहते हैं और आराधना करते हैं। कहा जाता है कि पीएम मोदी सुबह 4 बजे उठ जाते हैं, लेकिन मुख्यमंत्री योगी उनसे भी पहले सुबह 3 बजे उठ जाते हैं।

गुरुवार, 30 मार्च 2017

संघ : पश्चिम बंगाल में बढ़ती जिहादी गतिविधियाँ पर प्रस्ताव





कोयंबटूर (तामिलनाडु) 19 मार्च 17.   राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की निर्णय लेने वाली सर्वोच्च इकाई “अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा” का विधिवत शुभारंभ मा.सरसंघचालक डॉ. मोहन जी भागवत तथा सरकार्यवाह श्री भय्या जी जोशी ने किया. श्री अमृता विश्व विध्याश्रम, कोयंबटूर (तामिलनाडु) के परिसर मे आयोजित तीन दिवसीय प्रतिनिधि सभा बैठक के दौरान देश व समाज से जुड़े अहम विषयों पर चर्चा हुई , साथ ही प्रांत अनुसार संघ कार्य का अवलोकन भी किया गया  और आगामी कार्य योजना पर चर्चा हुई .

अनुसांगिक संगठनों से प्रमुख रूप में विश्व हिंदू परिषद, राष्ट्र सेविका समिति, स्वदेशी जागरण मंच, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, विश्व विभाग, संस्कार भारती, भारत विकास परिषद, भाजपा के प्रमुख पदाधिकारी सहित अन्य संगठन  इस बैठक मे भाग लिया। 
 

राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा-2017- में  

पश्चिम बंगाल में बढ़ती जिहादी गतिविधियाँ  पर प्रस्ताव


अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा, पश्चिम बंगाल में जिहादी तत्वों के निरन्तर बढ़ रहे हिंसाचार, राज्य सरकार द्वारा मुस्लिम वोट-बैंक की राजनीति के चलते राष्ट्र-विरोधी तत्वों को दिये जा रहे बढ़ावे तथा राज्य में घटती हिन्दू जनसंख्या के प्रति, गहरी चिन्ता व्यक्त करती है। भारत-बांग्लादेश सीमा से मात्र 8 कि.मी. अन्दर स्थित कालियाचक (जिला - मालदा) पुलिस स्टेशन पर राष्ट्रविरोधी जिहादी तत्वों द्वारा आक्रमण कर लूट-पाट करने, आपराधिक रिकार्ड जला देने तथा राज्य में अनेक स्थानों पर सुरक्षा बलों पर हमलों की बढ़ती घटनाएँ , राष्ट्रीय सुरक्षा व कानून व्यवस्था के लिये गंभीर चुनौती बन गई हैं। कट्टरपंथी मौलवियों द्वारा हिंसा को बढ़ावा देने वाले फतवे खुलेआम जारी किए जा रहे हैं। कटवा, कलिग्राम, ईलामबाजार, मेटियाबुरुज (कोलकाता) सहित अनेक स्थानों पर कट्टरपंथियों द्वारा हिन्दू समाज पर आक्रमण किये जा रहे हैं। कट्टरपंथियों के दबाव में सीमावर्ती क्षेत्रों से हिन्दू समाज बड़ी संख्या में पलायन को विवश हो रहा है। इन्हीं तत्वों द्वारा जाली मुद्रा तथा गोवंश की तस्करी व घुसपैठ को निरन्तर बढ़ावा दिया जा रहा है। वर्धमान बम विस्फोट की जाँच करते समय एन.आई.ए. द्वारा यह पाया गया कि पूरे राज्य में कई आतंकी समूह (माड्यूल) सक्रिय हैं तथा जिहादी आतंकियों का यह जाल सीमा के दोनों ओर फैला हुआ है।

सुनियोजित तरीके से उपद्रव मचा रहे उन्मादी कट्टरपंथियों को मंत्री पद व अन्य महत्त्वपूर्ण राजनैतिक व शासकीय पद देकर जहाँ प्रोत्साहन दिया जा रहा है, वहीं राज्य सरकार हिन्दू समाज के धार्मिक आयोजनों में बाधाएँ खड़ी कर रही है। पिछले दिनों मोहर्रम के कारण माँ दुर्गा की प्रतिमाओं के विसर्जन का समय असामान्य रूप से कम कर दिया गया, जिस पर कोलकाता उच्च न्यायालय ने भी राज्य सरकार को फटकार लगाई थी।
विगत कुछ वर्षों में बमबारी, हिंसा, आगजनी व महिलाओं से दुराचार आदि की अनेक घटनाएँ हुई हैं। हिन्दू समाज पर हो रहे इन अत्याचारों के सर्वाधिक शिकार अनुसूचित जाति के लोग हैं। जुरानपुर, वैष्णवनगर, खड़गपुर व मल्लारपुर में इन वर्गों के 6 लोगों की हत्या हुई तथा गत दुर्गापूजा के दिनों इसी वर्ग की 17 वर्षीय एक छात्रा पर एसिड बल्ब से हमला किया जो उसकी मृत्यु का कारण बना। धूलागढ़ में 13-14 दिसम्बर 2016 को हिन्दू समाज पर सुनियोजित आक्रमण में आगजनी, लूटपाट व महिलाओं से दुर्व्यवहार की वीभत्स घटनाएँ हुईं। राज्य सरकार द्वारा इन कट्टरपंथी तत्वों को नियन्त्रित करने के स्थान पर इन घटनाओं को पूर्णतया छिपाने का प्रयास किया गया। यह चौंकाने वाला तथ्य है कि जब कुछ निष्पक्ष पत्रकारों ने यह सारा अनाचार प्रकाश में लाने का साहस किया तो उन्हीं के विरुद्ध मुकदमे दर्ज कर दिये गए।

राज्य सरकार एक ओर राष्ट्रभक्ति का संस्कार देने वाले विद्यालयों को बन्द करने की धमकी दे रही है, वहीं दूसरी ओर कुख्यात सिमुलिया मदरसा जैसी हजारों संस्थाओं की ओर से आँख मूँदे हुए है, जिनमें कट्टरपंथी व जिहादी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कट्टरपंथियों के दबाव में पाठ्यपुस्तकों में मूल बांग्ला शब्दों का विकृतीकरण किया जा रहा है। अनेक स्थानों पर शिक्षण संस्थाओं में परंपरा से चली आ रही सरस्वती पूजा को भी बन्द करने का प्रयास किया जा रहा है। मिलाद-उन-नबी मनाने के नाम पर विद्यालयों का इस्लामीकरण करने आदि के प्रयासों को राज्य सरकार अनदेखा कर रही है। पिछले वर्ष कोलकाता से मात्र 40 कि.मी. दूर 1750 विद्यार्थियों वाले तेहट्ट स्थित उच्च माध्यमिक विद्यालय में विद्यालय-प्रशासन द्वारा मिलाद-उन-नबी मनाने की अनुमति न दिये जाने पर कट्टरपंथियों ने कब्जा करके वहाँ अपना झण्डा फहराया तथा अध्यापिकाओं को कमरे में बन्द कर दिया। परिणामस्वरूप वह विद्यालय एक माह तक बन्द रहा।

भारत विभाजन के समय बंगाल का हिन्दू बहुल क्षेत्र ही पश्चिम बंगाल के रूप में अस्तित्व में आया था। तदुपरान्त पूर्वी पाकिस्तान या वर्तमान बांग्लादेश में निरन्तर अत्याचार व प्रताड़ना के कारण वहाँ के हिन्दू नागरिक भारी संख्या में पश्चिम बंगाल में शरण लेने को बाध्य हुए। यह आश्चर्यजनक है कि बांग्लादेश से विस्थापित होकर बड़ी संख्या में हिन्दुओं के प.बंगाल में आने के उपरान्त भी राज्य की हिन्दू जनसंख्या जो 1951 में 78.45 प्रतिशत थी, वह 2011 की जनगणना के अनुसार घटकर 70.54 प्रतिशत तक आ गई। यह राष्ट्र की एकता व अखण्डता के लिए गंभीर चेतावनी का विषय है।  

    अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा कट्टरपंथी हिंसा तथा राज्य सरकार की मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति की कड़े शब्दों में निंदा करती है तथा समस्त देशवासियों से यह आवाहन करती है कि जिहादी हिंसा व राज्य सरकार की सांप्रदायिक राजनीति के विरुद्ध जन जागरण करें। देश के जन संचार माध्यमों से भी यह आग्रह है कि इस भीषण परिस्थिति को देश के सामने प्रस्तुत करें। प्रतिनिधि सभा राज्य सरकार का आवाहन करती है कि वोटों की क्षुद्र राजनीति से ऊपर उठकर वह अपने संवैधानिक दायित्व का निर्वहन करे। अ.भा.प्र.सभा केन्द्र सरकार से भी यह आग्रह करती है कि राष्ट्रीय सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए राज्य के राष्ट्र-विरोधी जिहादी तत्वों के विरुद्ध दृढ़ता से कार्यवाही सुनिश्चित करे।