सोमवार, 20 मार्च 2017

विश्व क्षितिज पर भारत का गौरव स्थापित करना है : साध्वी ऋतम्भरा



विश्व क्षितिज पर भारत का गौरव स्थापित करना है


-साध्वी ऋतम्भरा उपाख्य दीदी मां, संस्थापक, वात्सल्य ग्राम, वृन्दावन
पूर्णाहुति समारोह में दीदी मां के वक्तव्य के प्रमुख अंश-
परम पूज्य श्री गुरुजी कहा करते थे कि निष्क्रियता सभी प्रकार के श्रेष्ठत्व को नष्ट कर देती है। इसलिए सज्जनों को सक्रिय, संगठित और समाज के लिए अपनी योग्यता का योगदान देना बहुत जरूरी है। आज आवश्यकता यह है कि भारत, भारत के रूप में स्थापित हो। भारत को भारत के रूप में देखने की दृष्टि हमारे ऋषि-पुरखों ने कुछ यूं बताई है-
कोई खुशी नहीं अपनी भर,
कोई पीड़ा नहीं पराई,
चाहे मरघट का मातम हो,
चाहे बजे कहीं शहनाई,
हर घटना मुझमें घटती है,
मैं सबका मानस विराट हूं,
सात स्वरों की बांसुरिया में,
कहीं हंसी है कहीं रुलाई,
जग मुझमें हंसता गाता है,
मैं सबका मानस मंथन हूं,
चाहे कोई जगे योग से,
समझो मैं समयुक्त हो गया,
कोई बुद्ध हुआ क्या जैसे,
मुझमें ही कुछ बुद्ध हो गया,
कोई मुक्त हुआ क्या जैसे,
मुझमें ही कुछ मुक्त हो गया,
हर पनघट मेरा पनघट है,
हर गागर मेरी गागर है,
चाहे कोई भी पानी पिए,
कंठ मेरा ही सिंचित होता है।
एकात्मता का यह भाव जब हमारे ह्मदय में प्रगाढ़ होता है तब हम सीमित होकर भी असीमित को अपने आलिंगन में बांध लेते हैं। तब दायरे टूट जाते हैं, एकत्व का दर्शन होता है और हम इस अणु के भीतर ही विराट का दर्शन करने की क्षमता अर्जित कर लेते हैं। यह भाव मन में जगता है तभी तो हमारी भारतभूमि पर जन्मे ऋषि उस कुत्ते के पीछे डंडा लेकर नहीं, घी का कटोरा लेकर भागते हैं जो उनकी रोटी उठाकर ले गया-
नामदेव ने बनाई रोटी, कुत्ते ने उठाई
पीछे नामदेव चल दिए कि
प्रभु रूखी तो न खाओ, थोड़ा घी भी लेते जाओ
कैसी शक्ल बनाई तूने श्वान की
मुझे ओढ़नी ओढ़ा दी इनसान की
...यह उदाहरण बताता है कि हम भिन्न-भिन्न रूपों और नामों में व्याप्त एक ही सत्ता का दर्शन करने वाले लोग हैं। हम हिन्दू हैं और सारी दुनिया को अपना परिवार मानते हैं और उस परिवार में मनुष्य ही नहीं, पशु-पक्षी और जंगल सब समा जाते हैं। हमारी संस्कृति ऐसी है कि बचपन में बालक जब मां से पूछता है तो मां यह नहीं कहती कि जो रात में चमक रहा है वह चन्द्रमा है बल्कि वह कहती है कि वो तेरा चन्दा मामा है। धरित्री के भीतर हम देवता का दर्शन करते हैं। हम हिन्दू हैं इसलिए हमारे लिए कोई सीमा, कोई दायरा संभव ही नहीं है। हमारे प्रेम की धारा किसी दीवार में बांधकर नहीं रखी जा सकती, हम इस प्रेम के संदेश को सर्वत्र बांटना चाहते हैं। क्योंकि हमारे पुरखों ने यह सूत्र दिया है कि जो बटोरा जाता है वह विषाद होता है और जो बांटा जाता है वह प्रसाद होता है। जब यह करुणा और प्रेम का भाव समाज में बढ़ना और बंटना प्रारंभ होता है तब यह कैसे संभव है कि कोई वर्ग इससे वंचित रह जाए, हमारी उपेक्षा का पात्र बन जाए। तब यह कैसे संभव है कि किसी को लगे कि अपमान ही मेरा आहार है, किसी को लगे कि उपेक्षा ही मेरी सम्पत्ति है, किसी को लगे कि दारुण दु:ख झेलना ही मेरी नियति है। भारत में इस प्रकार का बहुत बड़ा समाज यदि हमारे प्रेम-स्नेह से वंचित है तो निश्चित रूप से यह हमारा स्खलन है। यह हमारे पुरखों द्वारा बताए गए मार्ग से च्युत हो जाना है। इसीलिए पूज्य श्रीगुरुजी की जन्मशताब्दी में पूरे वर्ष रा.स्व.संघ के कार्यकर्ताओं ने गली-गली-गांव-गांव जाकर प्रेम के दीपक को प्रज्ज्वलित किया है। इस बात को प्रगाढ़ता से प्रकट किया है कि-
एक ज्योति है सब दीपों में,
सारे जग में नूर एक है,
सच तो यह है इस दुनिया का,
हाकिम और हुजूर एक है,
हर मानव माटी का पुतला,
जीवन का आधार एक है,
गहराई तक जाकर देखो,
सब धर्मों का सार एक है,
एक वाहे गुरु एक परमेश्वर,
कृष्ण और श्रीराम एक हैं,
नाम भले ही अलग-अलग हों,
भक्तों के भगवान एक हैं,
नाम रूप की बात छोड़ दो,
इनसानों की जात एक है,
मन से मन के तार जोड़ लो,
सीधी सच्ची बात एक है।
इस एकात्मता के सूत्र में बंधे हम, कारुण्य और समरसता के प्रवाह में वर्ष भर प्रवाहित होते रहे। आवश्यकता इसी बात की है कि हिन्दू जाति का कारुण्य प्रबल हो, साथ ही हिन्दू जाति का तारुण्य भी प्रबल होना चाहिए। हम जानते हैं कि शक्ति ही शांति का आधार होती है और संगठन ही शक्ति का आधार है। सारा विश्व इस समय संघर्षों में निमग्न है, प्रतिस्पर्धाएं ह्मदय को जलाती हैं, छोटा-बड़ा हो जाने या श्रेष्ठता अथवा हीनता का भाव हमें एक दूसरे से अलग करता है। इसलिए हम सबके भीतर यह भाव प्रबल होना चाहिए कि यदि हम शांति स्थापित करना चाहते हैं तो हमें शक्तिशाली बनना होगा। अगर हमने तलवार गलाकर तकली गढ़ने का प्रयत्न किया, अगर अपने सिंहत्व को खोकर बकरे का धर्म अपनाया तो निश्चित रूप से हम शांति की स्थापना नहीं कर पाएंगे। अहिंसा, प्रेम, सत्य और शांति की स्थापना करने की हमारी प्रबल इच्छा तभी पूरी होगी जब हम जातियों, भेदभावों और सम्प्रदायों से ऊ‚पर उठकर अपने हिन्दू स्वरूप को स्वीकार करेंगे और इस स्वरूप की पहचान करेंगे। और हिन्दू स्वरूप है-
जिस हिन्दू ने नभ में जाकर नक्षत्रों को दी है संज्ञा
जिसने हिमगिर का वक्ष चीर भू को दी है पावन गंगा
जिसने सागर की छाती पर पाषाणों को तैराया है
हर वर्तमान की पीड़ा को हर जिसने इतिहास बनाया है
जिसके आर्यों ने घोष किया कृण्वन्तो विश्वमार्यम् का
जिसका गौरव कम कर न सकी रावण की स्वर्णमयी लंका
जिसके यज्ञों का एक हव्य सौ-सौ पुत्रों का जनक रहा
जिसके आंगन में भयाक्रांत धनपति वर्षाता कनक रहा
जिसके पावन वलिष्ठ तन की रचना तन दे दधीचि ने की
राघव ने वन में भटक-भटक जिस तन में प्राण प्रतिष्ठा की
जौहर कुण्डों में कूद-कूद सतियों ने जिसे दिया सत्व
गुरुओं, गुरुपुत्रों ने जिसमें चिर बलिदानी भर दिया तत्व
वह शाश्वत हिन्दू जीवन क्या स्मरणीय मात्र रह जाएगा
इसकी पावन गंगा का जल क्या नालों में बह जाएगा
इसके गंगाधर शिवशंकर क्या ले समाधि सो जाएंगे
इसके पुष्कर इसके प्रयाग, क्या गर्त मात्र हो जाएंगे
यदि तुम ऐसा नहीं चाहते तो फिर तुमको जगना होगा
हिन्दू राष्ट्र का बिगुल बजाकर दानव दल को दलना होगा।
इसलिए हिन्दू समाज को समर्थ, स्वाभिमानी हिन्दू राष्ट्र के निर्माण करने तथा वन्दनियों के वन्दन करने का निश्चय करना है। हिन्दुओं को समझना होगा कि यदि राष्ट्रद्रोही सूली पर नहीं चढ़ाया गया तो यह पूरा देश ही सूली पर चढ़ जाएगा। समझना होगा कि कातिलों की भक्ति के विधान इस देश में नहीं होने चाहिए। देशद्रोहियों की आरती इस देश में नहीं होनी चाहिए। इस सत्य को स्वीकार करने, कहने का साहस साधना से प्राप्त होता है। हिन्दू समाज को निश्चय करना है कि वह इस सत्य को कहने का अपने भीतर साहस उत्पन्न करेगा और किसी भी प्रकार के भय-प्रलोभन के आगे झुकेगा नहीं। पूज्य श्रीगुरुजी की जन्मशताब्दी पर हिन्दू समाज को संकल्प लेना चाहिए कि समरसता की बयार भारत में बहे, भारत के किसी घर में कन्या भ्रूण हत्या न हो, मातृशक्ति अपनी गरिमा और गौरव का परिचय देगी। विश्व के मानस पटल पर प्रखर भारत की तस्वीर तभी प्रकट होगी जब हमारी माताएं-बहनें अपने गौरव को पहचानेंगी और राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाएंगी। भारत की मातृशक्ति का परिचय यह है-
मेरा परिचय इतना कि मैं भारत की तस्वीर हूं,
मातृभूमि पर मिटने वाले मतवालों की तीर हूं
उन वीरों की दुहिता हूं जो हंस-हंस झूला झूल गए
उन शेरों की माता हूं जो रण-प्रांगण में जूझ गए
मैं जीजा की अमर सहेली, पन्ना की प्रतिछाया हूं
हाड़ी की हूं अमर निशानी मैं जसवंत की माया हूं
कृष्ण के कुल की मर्यादा, लक्ष्मी की शमशीर हूं
मेरा परिचय इतना कि मैं भारत की तस्वीर हूं
हल्दी घाटी की रज का सिंदूर लगाया करती हूं
अरि शोणित की लाली से मैं पांव रचाया करती हूं
पद्मावती हूं रतन सिंह की, चूडावति की सेनानी
मैं जौहर की भीषण ज्वाला, रणचण्डी हूं पाषाणी
मां की ममता नेह बहन का और पत्नी का धीर हूं
मेरा परिचय इतना की मैं भारत की तस्वीर हूं।
कालिदास का अमर काव्य हूं मैं तुलसी का रामायण
अमृतवाणी हूं गीता की, घर-घर होता पारायण
मैं भूषण की शिवा बाबली आल्हा का हुंकारा हूं
सूरदार का मधुर गीत मैं मीरा का एक तारा हूं
वरदायी की अमर कथा हूं रण गर्जन गंभीर हूं
मेरा परिचय इतना की मैं भारत की तस्वीर हूं।
भारत की इस तस्वीर को विश्व पटल पर साक्षात प्रकट करने के लिए भारत की आत्मा को समझना होगा।

रविवार, 19 मार्च 2017

योगी आदित्यनाथ : जीवन परिचय




योगी आदित्यनाथ
1_ उत्तराखंड के पौड़ी जिले में आदित्यनाथ का जन्म हुआ था.
2 _ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान आदित्यनाथ एबीवीपी से जुड़े.
3 _2014 में पांचवी बार दो लाख से ज्यादा वोटों से जीतकर सांसद चुने गए.
4 _19 मार्च 2017: योगी आदित्यनाथ देश के सबसे बड़ी विधानसभा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने !.


योगी आदित्यनाथ का जीवन परिचय , 
जन्म से लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री तक का सफर

https://khabar.ndtv.com
अभिषेक कुमार द्वारा लिखित : रविवार मार्च 19, 2017

गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अब तक लोग एक सांसद के रूप में जानते थे, लेकिन उन्हें इतना बड़ा पद मिलने के बाद लोग उनके बारे में जानना चाहते हैं. हम आपके लिए योगी आदित्यनाथ के जीवन के अब तक के सफर की कहानी लेकर आए हैं. आप नीचे जान पाएंगे किस साल अजय सिंह नेगी ने संन्यास अपनाकर योगी आदित्यनाथ बन गए. आप जान पाएंगे कि गणित का तेज तर्रार छात्र के साथ ऐसा क्या हुआ जो वह पहले संन्यासी और फिर राजनेता के रूप में अपनी पहचान बनाने में सफल रहा. ऐसे ही सवालों के जवाब के लिए नीचे टाइमलाइन में पढ़ें योगी आदित्यनाथ का पूरा बायोडाटा.

5 जून 1972: उत्तराखंड (तब उत्तर प्रदेश था) के पौड़ी जिला स्थित यमकेश्वर तहसील के पंचूर गांव के राजपूत परिवार में योगी आदित्यनाथ का जन्म हुआ था.
1977: टिहरी के गजा के स्थानीय स्कूल में पढ़ाई शुरू की. स्कूल और कॉलेज सर्टिफिकेट में इनका नाम अजय सिंह नेगी है.
1987: टिहरी के गजा स्कूल से दसवीं की परीक्षा पास की.
1989: ऋषिकेश के भरत मंदिर इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की.
1990: ग्रेजुएशन की पढ़ाई करते हुए एबीवीपी से जुड़े.
1992: कोटद्वार के गढ़वाल यूनिवर्सिटी से गणित में बीएससी की परीक्षा पास की.
1993: गणित में एमएससी की पढ़ाई के दौरान गुरु गोरखनाथ पर रिसर्च करने गोरखपुर आए. यहां गोरक्षनाथ पीठ के महंत अवैद्यनाथ की नजर अजय सिंह/आदित्यनाथ पर पड़ी.
1994: सांसारिक मोहमाया त्यागकर पूर्ण संन्यासी बन गए, जिसके बाद अजय सिंह नेगी का नाम योगी आदित्यानाथ हो गया.
1998: योगी आदित्यनाथ सबसे पहले गोरखपुर से चुनाव भाजपा प्रत्याशी के तौर पर लड़े और जीत गए. तब उनकी उम्र महज 26 साल थी.
1999: गोरखपुर से दोबारा सांसद चुने गए.
अप्रैल 2002: योगी ने हिन्दू युवा वाहिनी बनायी.
2004: तीसरी बार लोकसभा का चुनाव जीता.
2007: गोरखपुर में दंगे हुए तो योगी आदित्यनाथ को मुख्य आरोपी बनाया गया. गिरफ्तारी हुई और इस पर कोहराम भी मचा. योगी के खिलाफ कई अपराधिक मुकदमे भी दर्ज हुए.
7 सितंबर 2008: सांसद योगी आदित्यनाथ पर आजमगढ़ में जानलेवा हिंसक हमला हुआ था. इस हमले में वे बाल-बाल बचे थे.
2009: योगी आदित्यनाथ  2 लाख से ज्यादा वोटों से जीतकर लोकसभा पहुंचे.
2014: पांचवी बार एक बार फिर से दो लाख से ज्यादा वोटों से जीतकर सांसद चुने गए.
2015: 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को प्रचंड बहुमत मिला था. इसके बाद यूपी में 12 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हुए. इसमें योगी आदित्यनाथ से काफी प्रचार कराया गया, लेकिन परिणाम निराशाजनक रहा.
2017: विधानसभा चुनाव में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने योगी आदित्यनाथ से पूरे राज्य में प्रचार कराया. यहां तक कि इन्हें एक हेलीकॉप्टर तक दे दिया गया था.
19 मार्च 2017: उत्तर प्रदेश के बीजेपी विधायक दल की बैठक में योगी आदित्यनाथ को विधायक दल का नेता चुनकर मुख्यमंत्री का ताज सौंप दिया गया.
20 मार्च 2017: योगी आदित्यनाथ देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली.

शनिवार, 18 मार्च 2017

जितना बड़ा अपराधी, उतनी ऊपर पहुंच:प्रधान न्यायाधीश जे एस खेहर

भारत के प्रधान न्यायाधीश, न्यायमूर्ति जे एस खेहर की तारीफ करनी होगी कि उन्होने अन्याय के सच को बडी बेवाकी से व्यक्त किया । अन्याय छेल रहे पीडितों के पक्ष में काम करने का आव्हान किया । उनकी साहसी पहल को सलाम करते हुये , आशा कर सकता हूं कि बडे अपराधियों ओर बडे पूजीपतियों एवं बडे लोगों की गिरफ्त से भारतीय न्याय व्यवस्था को मुक्त करानें में उनकी पहल अहम सफलता का मार्ग प्रशस्त करेगी।
- अरविन्द सिसोदिया, कोटा 9414180151



सीजेआई खेहर ने भारत को बताया अनूठा देश, 
कहा- जितना बड़ा अपराधी, उतनी ऊपर पहुंच


Last Updated: Saturday, March 18, 2017
http://zeenews.india.com

नयी दिल्ली: देश के प्रधान न्यायाधीश जे एस खेहर ने शनिवार (18 मार्च) को विधि कार्यकर्ताओं का आह्वाहन किया कि वे 2017 को अपराध पीड़ितों के लिए काम करें. उन्होंने दुष्कर्म पीड़ितों या तेजाबी हमले के शिकार अथवा अपने घर के एकमात्र रोजी रोटी कमाने वाले को गंवाने वालों की परिस्थितियों पर हैरानी व्यक्त करते हुये कहा कि अपराधियों की तो आखिरी उपाय तक न्याय के लिये पहुंच होती है.

प्रधान न्यायाधीश ने विधि कार्यकर्ताओं से ऐसे प्रभावित लोगों तक पहुंचने की अपील की ताकि उन्हें अपेक्षित मुआवजा मिल सके. उन्होंने कहा कि भारत में आतंकवाद के अपराध में अभियुक्त को उच्चतम न्यायालय तक सभी कानूनी उपायों का इस्तेमाल करने के बाद भी न्याय के लिये कानून के तहत प्रदत्त सभी संभव कानूनी उपायों के इस्तेमाल की अनुमति है.

याकूब मेमन की फांसी के खिलाफ रात 2 बजे हुई थी सुनवाई:
प्रधान न्यायाधीश परोक्ष रूप से 1993 के मुंबई विस्फोट के एकमात्र मृत्युदंड प्राप्त दोषी याकूब मेमन के मामले का हवाला दे रहे थे जिसकी फांसी की सजा उच्चतम न्यायालय ने 29 जुलाई 2015 को ठुकरा दी थी लेकिन कुछ एक्टिविस्ट वकील ने उसी रात फैसले पर फिर से गौर करने के लिए एक और याचिका दायर की क्योंकि दोषी को 30 जुलाई की सुबह फांसी दी जानी थी. उच्चतम न्यायालय इस याचिका पर सुनवाई के लिये सहमत भी हुआ और 30 जुलाई को रात दो बजे से दो घंटे से ज्यादा समय तक एक पीठ ने विशेष सुनवाई की.

जितना बड़ा अपराधी, उतना बड़ा हंगामा:
राज्य विधि सेवा प्राधिकारण के 15 वें अखिल भारतीय सम्मेलन के अपने उद्घाटन संबोधन में न्यायमूर्ति खेहर ने कहा, ‘हमारा अनूठा देश है. बड़ा अपराधी, बड़ा हंगामा. जैसा कि हमने पहले देखा है कि आतंकवाद जैसे अपराध में दोषी उच्चतम न्यायालय में नाकाम हुआ और पुनर्विचार में भी असफल रहने के बावजूद एक तरीके से न्याय तक पहुंच हो सकती है जिसका हम विस्तार करते हैं.’

उन्होंने कहा, ‘मुझे वर्षों तक आश्चर्य होता रहा कि पीड़ितों का क्या होता है. वर्षों तक हैरान रहा कि उन परिवारों का क्या जिन्होंने अपने एकमात्र रोजी रोटी कमाने वाले को खो दिया. मुझे वषरें तक तेजाब कि हमले के पीड़ितों के बारे में हैरानी हुयी जिनका चेहरा बिगड़ गया और समाज में जी नहीं सकते. मैंने दुष्कर्म पीड़िताओं के बारे में उनकी जिंदगी के बारे में सोचा और मुझे हैरानी कि हमारी उनतक क्यों पहुंच नहीं है.’

2017 को पीड़ितों के लिए काम का वर्ष बनाएं:
न्यायमूर्ति खेहर ने कहा, ‘इस संस्था के संरक्षक के तौर पर आज मेरी आपसे अपील करने की इच्छा है. पीड़ितों तक पहुंचा जाए। 2017 को पीड़ितों के लिए काम का वर्ष बनाया जाए.’ प्रधान न्यायाधीश ने राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नलसा), राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को अपने सहायक विधिक (पारा-लीगल) कार्यकर्ताओं को हरेक निचली अदालतों में भेजकर पीड़ितों को सूचित करने को कहा कि उनके मुआवजे का हक बंद नहीं हुआ है.

उन्होंने कहा, ‘अपने सहायक विधिक कार्यकर्ताओं को प्रत्येक निचली अदालत में भेजकर पीड़ितों को अवगत कराएं. प्रत्येक पीड़ितों को सीआरपीसी की धारा 357-ए के बारे में बताया जाए कि उन्हें मुआवजे का अधिकार है.’ उन्होंने कहा, ‘उन्हें समझाएं कि आरोपी को बरी किये जाने या दोषसिद्धि के साथ मामला बंद नहीं हुआ है. दिल बड़ा करें और पीड़ितों तक पहुंचे.’

न्यायमूर्ति खेहर ने कहा कि पीड़ितों के लिए राष्ट्रीय स्तर और राज्य स्तर पर कोष तैयार करने के लिए संसद ने सीआरपीसी की धारा 357-ए शुरू की. न्यायमूर्ति खेहर ने कहा कि पीड़ितों को मुआवजे के साथ किसी भी मामले में आरोपी को खासकर आपराधिक मामले में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए और जैसे ही उसे गिरफ्तार किया जाता है तो उसके मामले में उस तक मदद के लिए किसी की पहुंच होनी चाहिए.

शुक्रवार, 17 मार्च 2017

प्रणब मुखर्जी ने नरेंद्र मोदी और अटल बिहारी वाजपेयी की खुलकर तारीफ की



   प्रणव मुखर्जी : - ' मोदी का काम करने का अपना तरीका है। हमें इसके लिए उन्हें क्रेडिट देना चाहिए कि उन्होंने किस तरह से चीजों को जल्दी सीखा है। एक शख्स सीधे स्टेट एडमिनिस्ट्रेशन से आता है और यहां आकर केंद्र सरकार का हेड बन जाता है। इसके बाद वह दूसरे देशों से रिश्तों, एक्सटर्नल इकाेनॉमी में महारत हासिल करता है। वह बड़े मसलों से निपटता है। किसी भी प्रधानमंत्री को इसकी इनडेप्थ नॉलेज हासिल करनी होती है। मोदी ने यह किया।'



मोदी ने तेजी से काफी कुछ सीखा है: प्रणब; 
वाजपेयी के बारे में भी की तारीफ
Dainikbhaskar.com | Mar 17, 2017

नई दिल्ली. प्रणब मुखर्जी ने नरेंद्र मोदी और अटल बिहारी वाजपेयी की शुक्रवार को खुलकर तारीफ की। इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में प्रणब ने कहा कि स्टेट एडमिनिस्ट्रेशन से आए मोदी ने केंद्र में तेजी से चीजों को सीखा और नए रोल में खुद को बखूबी ढाला। प्रणब ने पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी की तारीफ में भी कहा कि उनका काम करने का तरीका एकदम अलग था। वे अपने साथियों की फिक्र किया करते थे। और क्या बोले प्रणब...

मोदी राज्य से आए और केंद्र में महारत हासिल कर ली
- इंडिया टुडे के मुताबिक, प्रणब ने कहा, ''मोदी का काम करने का अपना तरीका है। हमें इसके लिए उन्हें क्रेडिट देना चाहिए कि उन्होंने किस तरह से चीजों को जल्दी सीखा है। चरण सिंह से लेकर चंद्रशेखर तक प्रधानमंत्रियों को काफी कम वक्त काम करने का मौका मिला। इन लोगों के पास पार्लियामेंट का अच्छा-खासा एक्सपीरियंस था। लेकिन एक शख्स सीधे स्टेट एडमिनिस्ट्रेशन से आता है और यहां आकर केंद्र सरकार का हेड बन जाता है। इसके बाद वह दूसरे देशों से रिश्तों, एक्सटर्नल इकाेनॉमी में महारत हासिल करता है।'' 
- ''2008 की आर्थिक मंदी के बाद एक ताकतवर ऑर्गनाइजेशन जी-20 के रूप में उभरा। हर साल और कभी-कभी साल में दो बार जी-20 की समिट होती है। वह बड़े मसलों से निपटता है। किसी भी प्रधानमंत्री को इसकी इनडेप्थ नॉलेज हासिल करनी होती है। मोदी ने यह किया।''
- ''मोदी चीजों को बहुत अच्छी तरह ऑब्जर्व करते हैं। मुझे उनकी वह बात अच्छी लगी, जब उन्होंने कहा कि चुनाव जीतने के लिए आपको बहुमत चाहिए होता है, लेकिन सरकार चलाने के सभी का मत चाहिए होता है।''
अपने साथियों की बेहद फिक्र करते थे अटलजी
- प्रणब ने कहा, ''अटलजी काफी असरदार पीएम थे। लेकिन वे पूरी तरह अलग अप्रोच रखते थे। मैं सिर्फ एक उदाहरण आपको दूंगा। मैं राज्यसभा में था। मैंने अचानक देखा कि प्रधानमंत्री मेरी सीट की तरफ आ रहे हैं। मैंने शर्मिंदगी महसूस की। मैंने कहा- अटलजी आपने मेरे पास आने की क्यों तकलीफ की। अाप किसी को मुझे बुलाने के लिए भेज देते।''
- ''अटलजी ने कहा कि कोई बात नहीं। हम दोस्त हैं। इसके बाद अटलजी ने मुझसे एक बात की गुजारिश की। उन्होंने कहा कि जॉर्ज फर्नांडीज काफी मेहनती और काबिल मंत्री हैं। उनके लिए ज्यादा तल्ख न हों। उस वक्त जॉर्ज डिफेंस मिनिस्टर हुआ करते थे।''
- ''मैंने अटलजी से कहा कि मैं इस बात की तारीफ करता हूं। मैं इस बात को सलाम करता हूं कि आप अपने कलीग की कितनी फिक्र करते हैं। ये बस एक घटना है जो बताती है कि वे किस तरह काम करते थे।'' 
- ''कुछ दिन पहले मेरे पास कुछ लोग आए और कहा कि कश्मीर का मसला सुलझना चाहिए। मैंने उनसे कहा कि मैं अथॉरिटी नहीं हूं। आप इस मसले को क्यों नहीं सुलझाते। जब आप अथॉरिटी से मिलें तो उन्हें बताएं कि अटलजी की सोच के पन्नों से आपको सबक लेना चाहिए।''
2008 में मजबूत थी भारत की इकोनॉमी
- प्रणब ने कहा कि यूपीए-1 के पहले पांच में से चार साल के दौरान ग्रोथ रेट 8% से ज्यादा थी। इंडियन इकोनॉमी का बेस इतना मजबूत था कि उसने 2008 के इकोनॉमिक क्राइसिस को भी झेल लिया। मनमोहन सिंह ने मंत्रियों को काम करने की पूरी छूट दी थी।

मोदी राज्य से आए और केंद्र में महारत हासिल कर ली
- इंडिया टुडे के मुताबिक, प्रणब ने कहा, ''मोदी का काम करने का अपना तरीका है। हमें इसके लिए उन्हें क्रेडिट देना चाहिए कि उन्होंने किस तरह से चीजों को जल्दी सीखा है। चरण सिंह से लेकर चंद्रशेखर तक प्रधानमंत्रियों को काफी कम वक्त काम करने का मौका मिला। इन लोगों के पास पार्लियामेंट का अच्छा-खासा एक्सपीरियंस था। लेकिन एक शख्स सीधे स्टेट एडमिनिस्ट्रेशन से आता है और यहां आकर केंद्र सरकार का हेड बन जाता है। इसके बाद वह दूसरे देशों से रिश्तों, एक्सटर्नल इकाेनॉमी में महारत हासिल करता है।'' 
- ''2008 की आर्थिक मंदी के बाद एक ताकतवर ऑर्गनाइजेशन जी-20 के रूप में उभरा। हर साल और कभी-कभी साल में दो बार जी-20 की समिट होती है। वह बड़े मसलों से निपटता है। किसी भी प्रधानमंत्री को इसकी इनडेप्थ नॉलेज हासिल करनी होती है। मोदी ने यह किया।''
- ''मोदी चीजों को बहुत अच्छी तरह ऑब्जर्व करते हैं। मुझे उनकी वह बात अच्छी लगी, जब उन्होंने कहा कि चुनाव जीतने के लिए आपको बहुमत चाहिए होता है, लेकिन सरकार चलाने के सभी का मत चाहिए होता है।''
अपने साथियों की बेहद फिक्र करते थे अटलजी
- प्रणब ने कहा, ''अटलजी काफी असरदार पीएम थे। लेकिन वे पूरी तरह अलग अप्रोच रखते थे। मैं सिर्फ एक उदाहरण आपको दूंगा। मैं राज्यसभा में था। मैंने अचानक देखा कि प्रधानमंत्री मेरी सीट की तरफ आ रहे हैं। मैंने शर्मिंदगी महसूस की। मैंने कहा- अटलजी आपने मेरे पास आने की क्यों तकलीफ की। अाप किसी को मुझे बुलाने के लिए भेज देते।''
- ''अटलजी ने कहा कि कोई बात नहीं। हम दोस्त हैं। इसके बाद अटलजी ने मुझसे एक बात की गुजारिश की। उन्होंने कहा कि जॉर्ज फर्नांडीज काफी मेहनती और काबिल मंत्री हैं। उनके लिए ज्यादा तल्ख न हों। उस वक्त जॉर्ज डिफेंस मिनिस्टर हुआ करते थे।''
- ''मैंने अटलजी से कहा कि मैं इस बात की तारीफ करता हूं। मैं इस बात को सलाम करता हूं कि आप अपने कलीग की कितनी फिक्र करते हैं। ये बस एक घटना है जो बताती है कि वे किस तरह काम करते थे।'' 
- ''कुछ दिन पहले मेरे पास कुछ लोग आए और कहा कि कश्मीर का मसला सुलझना चाहिए। मैंने उनसे कहा कि मैं अथॉरिटी नहीं हूं। आप इस मसले को क्यों नहीं सुलझाते। जब आप अथॉरिटी से मिलें तो उन्हें बताएं कि अटलजी की सोच के पन्नों से आपको सबक लेना चाहिए।''
2008 में मजबूत थी भारत की इकोनॉमी
- प्रणब ने कहा कि यूपीए-1 के पहले पांच में से चार साल के दौरान ग्रोथ रेट 8% से ज्यादा थी। इंडियन इकोनॉमी का बेस इतना मजबूत था कि उसने 2008 के इकोनॉमिक क्राइसिस को भी झेल लिया। मनमोहन सिंह ने मंत्रियों को काम करने की पूरी छूट दी थी।

सोमवार, 13 मार्च 2017

पीएम मोदी हैं 'मैन ऑफ द मैच'



विधानसभा चुनाव 2017: नतीजों के राष्ट्रीय राजनीति पर होंगे ये 10 असर
टाइम्स न्यूज नेटवर्क | Updated: Mar 11, 2017

नई दिल्ली
पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में बीजेपी की बंपर जीत के मायने निकाले जाने लगे हैं। हर कोई 4  राज्यों में बीजेपी के शानदार प्रदर्शन को मोदी की जीत करार दे रहा है। इसमें कुछ अतिशयोक्ति भी नहीं लगता। वहीं, पंजाब में अपनी झाड़ू से अकाली-बीजेपी की सफाया करने गई आम आदमी पार्टी पंजाब में फ्लॉप होने के साथ ही गोवा में खाता तक नहीं खोल पाई। हालांकि यूपी में महज 7 सीटें हासिल करने वाली कांग्रेस ने पंजाब में जरूर अपनी लाज बचा ली। जानें, इस जीत से देश की राजनीति पर होंगे कौन से 10 बड़े असर...

1. पीएम मोदी हैं 'मैन ऑफ द मैच'
राजनीतिक पंडितों के कयासों को गलत साबित करते हुए 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों ने साबित किया है कि पीएम मोदी की लहर कम नहीं हुई है, बल्कि और तेज रफ्तार पकड़ चुकी है। यदि 2014 में पीएम मोदी की जीत की वजह उनका करिश्मा था तो आज यह और बढ़ चुका है। बीजेपी ने यूपी और उत्तराखंड में बड़ी जीत हासिल की है। इन दोनों ही राज्यों में बीजेपी ने सीएम कैंडिडेट्स का ऐलान नही किया था, ऐसे में इन दोनों राज्यों में बंपर जीत को मोदी का कमाल ही कहा जाएगा। खासतौर पर उत्तर प्रदेश में बीजेपी की जीत ऐतिहासिक है। बीजेपी ने कांग्रेस और एसपी के उस गठबंधन के खिलाफ बंपर जीत दर्ज की है, जो कागजों पर खासा मजबूत बताया जा रहा था। सीएम अखिलेश यादव की लोकप्रियता का ग्राफ बढ़ता दिखाया जा रहा था। ऐसे में बीजेपी की इस जोरदार विजय के लिए पीएम नरेंद्र मोदी को श्रेय देना ही होगा।

2. भारतीय राजनीति का मुख्य ध्रुव बनी बीजेपी
यूपी और उत्तराखंड में जीत के साथ बीजेपी देश में सबसे बड़ी ताकत के तौर पर उभरी है। बीजेपी और उसके सहयोगी दलों की देश के 12 राज्यों में सरकार है। देश का तकरीबन 54 पर्सेंट हिस्सा भगवा शासन के अंतर्गत है, जबकि 63.6% क्षेत्र पर बीजेपी और उसके सहयोगियों का शासन है। बीजेपी को गोवा में स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है और कांग्रेस 17 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। दूसरी तरफ मणिपुर में एक बार फिर से कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जबकि बीजेपी उससे बेहद करीब खड़ी है।

3. 'कांग्रेस मुक्त' भारत की बात अभी दूर
भले ही कांग्रेस को यूपी में एसपी का जूनियर पार्टनर रहते हुए करारी शिकस्त झेलनी पड़ी है, लेकिन पंजाब में उसने अपने दम पर सत्ता हासिल की है। वहीं गोवा और मणिपुर में वह बीजेपी से करीबी मुकाबले में आगे रही है। हालांकि उत्तराखंड में वह बुरी तरह हारी है, लेकिन पंजाब में आप के मुकाबले शानदार जीत पर कांग्रेस नेतृत्व खुश होगा। हालांकि बीजेपी के पास यूपी की जीत का जश्न मनाने का बड़ा कारण है, लेकिन कांग्रेस मुक्त भारत की बात अब भी सपना ही है।

4. केजरीवाल को लगा बड़ा झटका
विधानसभा चुनाव के नतीजों ने अरविंद केजरीवाल की राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाओं को करारा झटका दिया है। आप का मानना था कि दिल्ली के बाद वह पंजाब की सत्ता पर काबिज होगी। हालांकि आप ने बीजेपी-अकाली को तीसरे स्थान पर धकेला है, लेकिन सत्ता से दूर रहने के चलते वह नैशनल पॉलिटिक्स में अपनी धमक नहीं जमा पाएगी। इसके अलावा गोवा में भी आप को क्लीन स्वीप की स्थिति झेलनी पड़ी है।

5. आर्थिक सुधारों में आएगी तेजी
इन विधानसभा चुनावों के नतीजों से मोदी सरकार को आर्थिक सुधारों की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाने का मौका मिलेगा। इससे वह जीएसटी को लागू करने की ओर भी बढ़ सकेगी। बीजेपी की भारी जीत से मार्केट पर निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा। आने वाले वक्त में बाजार में भी तेजी देखने को मिल सकती है।

6. बदलेगा राज्यसभा का गणित
इन विधानसभा चुनावों के चलते अगले साल तक राज्यसभा का गणित पूरी तरह से बदल जाएगा। 2018 के मध्य तक बीजेपी राज्यसभा में बहुमत में आ जाएगी। राज्यसभा में बहुमत सरकार को आत्मविश्वास प्रदान करेगा और वह लेबर रिफॉर्म्स जैसे बिलों पर आगे बढ़ सकेगी।

7. राष्ट्रपति चुनावों पर रहेगा असर
नई चुनी गई 5 विधानसभा चुनावों में बीजेपी के मजबूत प्रतिनिधित्व के चलते वह राष्ट्रपति चुनाव में मजबूत स्थिति में होगी। यूपी में बीजेपी की जीत उसके लिए जुलाई में अपने पसंद के राष्ट्रपति को चुनने की राह मजबूत करेगी।

8. नोटबंदी का मिला राजनीतिक लाभ
नोटबंदी के आर्थिक लाभ हुए या नहीं, इस पर बहस हो सकती है। लेकिन यह कहना गलत नहीं होगा कि राजनीति में पीएम मोदी का यह फैसला मास्टरस्ट्रोक साबित हुआ है। नोटबंदी के बाद से बीजेपी जितने भी चुनावों में उतरी है, उसे अप्रत्याशित सफलता मिली है। गुजरात, महाराष्ट्र और ओडिशा के निकाय चुनावों से लेकर विधानसभा चुनावों तक में बीजेपी ने शानदार प्रदर्शन किया है।

9.क्षेत्रीय दलों के लिए अस्तित्व का संकट
मोदी की सुनामी में मायावती और अजित सिंह जैसी क्षेत्रीय क्षत्रप बहते दिखे हैं। अखिलेश आने वाले चुनावों में उबर सकते हैं, लेकिन मायावती और अजित सिंह जैसों के लिए अस्तित्व का संकट है। मोदी की लोकप्रियता के दौर में खुद को राजनीतिक रूप से प्रासंगिक बनाए रखने के लिए आरएलडी और बीएसपी को अपनी रणनीति में बदलाव करना होगा।

10. हिमाचल और गुजरात में बीजेपी की राह होगी आसान
यूपी, उत्तराखंड में इस शानदार जीत के बाद बीजेपी इस साल के आखिर में गुजरात एवं हिमाचल प्रदेश के चुनावों के लिए भी पूरी तरह से तैयार हो गई होगी। बीजेपी को जहां पीएम नरेंद्र मोदी के गृह राज्य गुजरात में जीत की उम्मीद होगी वहीं वह हिमाचल को कांग्रेस से छीनने की योजना पर काम करेगी।

रविवार, 12 मार्च 2017

देश के गरीबों की ताकत को समझता हूं : नरेंद्र मोदी



खास बातें

०१_'चुनाव में कौन जीता, कौन हारा, मैं इस दायरे में सोचने वालों में नहीं हूं'

०२-'जिन्होंने वोट दिया भाजपा सरकार उनकी भी, जिन्होंने नहीं दिया उनकी भी'

०३-'मैं ऐसा पीएम हूं जिससे पूछा जाता है, इतनी मेहनत क्यों करते हो'

देश के गरीबों की ताकत को समझता हूं, जीत के बाद और अधिक नम्र होना हमारी जिम्मेदारी : पीएम मोदी

सुनील कुमार सिरीज द्वारा लिखित, अंतिम अपडेट: रविवार मार्च 12, 2017

https://khabar.ndtv.com/news/assembly-polls-2017/pm-narendra-modis-assembly-elections-victory-speech-at-bjp-headqaurter-1668901



        नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत के बाद बीजेपी हेडक्वार्टर में आयोजित अभिनंदन समारोह में पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव सिर्फ सरकार बनाने के लिए नहीं होते हैं, बल्कि यह लोकशिक्षण का माध्यम भी है. उन्होंने कहा कि अकल्पनीय भारी मतदान के बाद अकल्पनीय भारी विजय होता है, यह पोलिटिकल पंडितों के लिए विचार करने को मजबूर करता है. भावनात्मक मुद्दों के अलावा विकास एक कठिन चुनावी मुद्दा होता है. पिछले 50 सालों में विभिन्न राजनीतिक दल इस मुद्दे से कतराते रहे हैं.

        प्रधानमंत्री ने कहा कि इस जीत के लिए बीजेपी की चार पीढ़ियां खप गईं. हर चुनाव के साथ हमारा समर्थन बढ़ता गया. यह बीजेपी का स्वर्णिम युग है. उन्होंने कहा, चुनाव में कौन जीता, कौन हारा, मैं इस दायरे में सोचने वालों में से नहीं हूं. चुनाव का नतीजा हमारे लिए जनता जनार्दन का पवित्र आदेश होता है. जीत के फल के बाद और अधिक नम्र होना हमारी जिम्मेदारी है. सत्ता जनता की सेवा करने का एक अवसर होती है. पीएम मोदी ने कहा, मैं देश की गरीबों की शक्ति को पहचान पाता हूं और राष्ट्र के निर्माण में गरीबों को जितना ज्यादा अवसर मिलेगा, देश उतना प्रगति करेगा. गरीब को अगर काम का अवसर मिला, तो वह देश के लिए ज्यादा काम करके दिखाएगा. मध्यम वर्ग का बोझ कम होना चाहिए. एक बार गरीब के अंदर खुद का बोझ उठाने की क्षमता आ जाएगी, तब मध्यम वर्ग का बोझ कम हो जाएगा.

       प्रधानमंत्री मोदी ने पांचों राज्यों की जनता का धन्यवाद देते हुए कहा कि जिन्होंने वोट दिया भाजपा की सरकार उनकी भी है, जिन्होंने नहीं दिया उनकी भी है. इसलिए वोट दिया कि नहीं दिया यह कोई मायने नहीं रखता. प्रधानमंत्री ने कहा सरकार सबकी होती है, सबके लिए होती है और सबको साथ लेकर चलने के लिए होती है. सरकार को कोई भेदभाव करने का हक नहीं है. प्रधानमंत्री ने कहा, मैंने कहा था कि हमसे गलती हो सकती है, लेकिन गलत इरादे से कोई काम नहीं करेंगे. देश से दूसरा वादा मैंने ये किया था कि कि हम परिश्रम की पराकाष्ठा करेंगे. तीसरी बात मैंने कही थी कि हम जो कुछ करेंगे, प्रामाणिकता के साथ करेंगे. उन्होंने अपने बारे में कहा कि मैं ऐसा पीएम हूं, जिससे पूछा जाता है कि इतनी मेहनत क्यों करते हो. इससे बड़ा जीवन का सौभाग्य क्या हो सकता है.

       पीएम नरेंद्र मोदी के भव्य अभिनंदन समारोह में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने लोगों को होली की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ये होली देश और भाजपा दोनों के लिए अनोखा रंग लेकर आई है. उन्होंने कहा कि यूपी की जीत हर मामले में अप्रत्याशित रही. उत्तराखंड में भी प्रचंड बहुमत के साथ बीजेपी सरकार बनाने जा रही है. मणिपुर और गोवा में भी वहां की जनता ने भाजपा को भरपूर समर्थन दिया और हमारा प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा. पांचों राज्यों के चुनावों के नतीजे 2014 के लोकसभा चुनावों से भी दो कदम आगे है.

       बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि इस बार हमें 2014 से भी बड़ा समर्थन मिला है और देश का गरीब नोटबंदी के फैसले पर बीजेपी के साथ है. अमित शाह ने कहा कि नरेंद्र मोदी आजादी के बाद सर्वाधिक लोकप्रिय नेता बनकर उभरे हैं. बीजेपी की विजय यात्रा हिमाचल, गुजरात होते हुए पूर्व और दक्षिण में भी पहुंचेगी.

        इस समारोह में शामिल होने के लिए पीएम मोदी ली मेरीडियन होटल से बीजेपी दफ़्तर तक पैदल पहुंचे. इस दौरान उन पर फूलों की बारिश की गई. बीजेपी दफ्तर पहुंचने के बाद पीएम ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा पर फूल चढ़ाए. बीजेपी के इस जश्न में बड़ी संख्या मेें पार्टी कार्यकर्ता और कई दिग्गज नेता मौजूद रहे. पार्टी दफ्तर में ढोल-नगाड़े की थाप पर बीजेपी कार्यकर्ता नाचते-गाते दिखे.

       बीजेपी मुख्यालय में पीएम मोदी के स्वागत की भव्य तैयारी की गई. वहां होली के रंगीन होर्डिंग के जरिये विधानसभा चुनावों में बीजेपी का समर्थन करने के लिए लोगों को धन्यवाद दिया गया. ली मेरिडियन होटल से लेकर बीजेपी मुख्यालय तक के रास्ते के बीच लोगों की भीड़ के मद्देनजर पुलिस ने सुरक्षा के खास इंतजाम किए थे. पार्टी कार्यकर्ता पीएम मोदी के बड़े-बड़े कटआउट लेकर सड़कों के दोनों ओर खड़े दिखे. स्वागत समारोह में कई केंद्रीय मंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता मौजूद थे.

      स्वागत समारोह के बाद बीजेपी संसदीय बोर्ड की बैठक होनी है, जहां यूपी और उत्तराखंड के मुख्यमंत्रियों के नाम तय किए जा सकते हैं. कहा जा रहा है कि यूपी में मुख्यमंत्री पद के लिए केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा का नाम सबसे आगे चल रहा है. वहीं अमित शाह के क़रीबी दिनेश शर्मा भी रेस में हैं.

      यूपी बीजेपी अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य, महासचिव श्रीकांत शर्मा समेत कई और नामों की चर्चा चल रही है. वहीं उत्तराखंड में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क़रीबी त्रिवेंद्र सिंह रावत, सतपाल महाराज, प्रकाश पंत जैसे कई नाम रेस में हैं.

शुक्रवार, 3 मार्च 2017

प्रदेश के विकास के लिए हर चुनौती मंजूर : मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे





राज्यपाल के अभिभाषण पर मुख्यमंत्री का जवाब
जयपुर, 2 मार्च 2017

मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे ने कहा है कि जहां चाह है, वहां राह है। इसीलिए हमें भी प्रदेश के विकास के लिए हर चुनौती मंजूर है। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने आप पर, अपनी पार्टी पर, विपक्ष पर और प्रदेश की जनता पर पूरा भरोसा है कि वह विकास की ओर उठाए गए हर कदम में हमारा भरपूर साथ देंगे।

मुख्यमंत्री गुरूवार को विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब दे रही थीं। उन्होंने कहा कि यह अभिभाषण मात्र एक वर्ष की उपलब्धियां नही बल्कि पिछले तीन वर्ष में निष्ठा और लगन से किये गये टीम राजस्थान के प्रयासों का परिणाम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने भेदभाव से ऊपर उठकर हर क्षेत्र में विकास को गति देने का काम किया है। उन्होंने कहा कि जो विधानसभा क्षेत्र कांग्रेस पार्टी के गढ़ माने जाते हैं उन क्षेत्रों के विकास में हमने कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने कहा कि झुंझुनूं विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस 11 बार जीती, जबकि हमारी पार्टी को दो बार ही मौका मिला। सुराज संकल्प यात्रा के दौरान हमने उनकी अधिक फ्लोराइडयुक्त पानी के कारण पीड़ा महसूस की और कुंभाराम लिफ्ट कैनाल से मीठा पानी पहुंचाने की बुनियाद रखी। पिछली सरकार ने इस क्षेत्र में सड़कों के निर्माण पर 23 करोड़ 74 लाख रुपये खर्च किए, जबकि हमने केवल तीन साल में ही 24.27 करोड़ रुपये के सड़क निर्माण कार्य करा दिए हैं।

अधिकारी-कर्मचारी डरें नहीं साथ खड़ी है सरकार
मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ लोगों को आश्चर्य हो रहा है कि तमाम चुनौतियों के बावजूद उनकी सरकार जमीनी स्तर पर काम कैसे कर रही है। ऐसे लोग प्रदेश के विकास की गति को रोक नहीं पाए तो अधिकारियों को डराने, धमकाने लगे। सूची बनाने की धमकी दी। लगता है कुछ लोग सत्ता की खुमारी से अभी तक ऊबर नहीं पाए। उनको तो धन्यवाद देना चाहिए था कि सरकार ने विकास में बाधा बनने वाले लोगों को बेनकाब किया है। मैं राजस्थान के प्रत्येक सदस्य, सभी अधिकारी और कर्मचारियों को आश्वस्त करती हूं कि वे डरे नहीं, सरकार उनके साथ खड़ी है। अपना काम निर्भिक रूप से सच्ची लगन, ईमानदारी और निष्ठा के साथ काम करते रहें ताकि सशक्त और समृद्ध राजस्थान का निर्माण हो सके।
श्रीमती राजे ने कहा कि नवलगढ़ विधानसभा क्षेत्र में तो हमें एक बार भी मौका नहीं मिला, फिर भी हमने तीन साल में यहां 61 करोड़ रुपये के सड़क निर्माण कार्य कराये। जबकि कांग्रेस के पांच साल में 23 करोड़ रुपये ही खर्च हुए थे। उन्होंने कहा कि ओसियां मे भी 10 बार जीतने के बावजूद कांग्रेस वहां की जरूरते पूरी नही कर सकी, मगर हमने यहां भी कॉलेज, केन्द्रीय विद्यालय और कृषि मंडी खोली। साथ ही चार सौ करोड़ रुपये की पांचला घेवडा चिराई पेयजल योजना शुरू की। सड़कों पर भी 47.12 करोड़ रुपये खर्च किये।

जेएनवीयू की आंच दूर तक
मुख्यमंत्री ने कहा कि कल सदन में हंगामा हुआ। आप सबको लगा कि हम ये नही समझ रहे कि आप ये क्यूं कर रहे है। हमें मालूम था कि विधायक जोगाराम जयनारायण व्यास विश्व विद्यालय में हुई अनियमितताओं का मुद्दा उठाने वाले थे, जिसकी आंच दूर तक जाती। इसलिए जानबूझ कर हंगामा खड़ा किया ताकि वो मुद्दा तो गायब हो जाए। यह मुद्दा इतनी आसानी से नही गायब होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजाति क्षेत्र को अपना वोट बैंक समझने वाली कांग्रेस पार्टी ने आदिवासियों को मुख्यधारा से जोड़ने की चिन्ता तक नहीं की। हमारी सरकार ने इन क्षेत्रों के लिए अलग से सर्विस कैडर का गठन करने, मेधावी छात्राओं को स्कूटी देने तथा महाराणा प्रताप पुलिस बटालियन की स्थापना करने जैसे काम किये। उन्होंने कहा कि बांसवाड़ा में भी पिछले तीन साल में सड़कों पर 69 करोड़ रुपये खर्च किये गये। उन्होंने कहा कि बिना भेदभाव ही राज्य भर में सभी पंचायत मुख्यालयों पर हायर सैकेण्डरी स्कूल खोले जा रहे है। ग्रामीण गौरव पथ बनाएं जा रहे हैं।

प्रदेश के इतिहास का सबसे छोटा विधायक दल
श्रीमती राजे ने कहा कि जनता ने हमें प्रदेश की सेवा के लिए 18 साल दिए वो भी टुकड़ों में, जबकि कांग्रेस को 50 साल मिले। फिर भी जिस पार्टी ने प्रदेश में 50 वर्ष तक शासन किया, वही पार्टी राजस्थान के इतिहास में अब तक का सबसे छोटा विधायक दल बनकर सामने बैठी है। इसका कारण भी साफ है कि जनता ने कांग्रेस पार्टी को खूब समय दिया और परखा मगर प्रदेश का विकास नहीं हुआ।

जश्न नहीं मनाया, रिपोर्ट कार्ड दिया
श्रीमती राजे ने कहा कि हमारी सरकार के तीन साल पूरे होने पर हमारे ऊपर जश्न मनाने के आरोप लगाये गये, जबकि हम जनता के बीच गये और तीन साल में किए हुए कार्यों को लोगां के सामने रखा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हम एसबीसी वर्ग को आरक्षण के लिए कानून लेकर आए और उस कानून के विलोपित होने के बाद हमने सुप्रीम कोर्ट में अपील कर एसबीसी वर्ग को इसका लाभ दिलाने का प्रयास कर रहे हैं। हमने एसबीसी वर्ग को आरक्षण के बारे में अध्ययन के लिए जस्टिस एस के गर्ग की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की है। उन्होंने कहा कि हमने आर्थिक पिछडे़ वर्ग के आरक्षण के अध्ययन के लिए जस्टिस अनूप गोयल की अध्यक्षता में आयोग गठित किया है एवं धौलपुर-भरतपुर के जाटों के आरक्षण की मांग का जस्टिस जितेन्द्र गोयल की अध्यक्षता में ओबीसी आयोग अध्ययन कर रहा है।

बिना प्रावधानों के कर डाली घोषणाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार ने अपने कार्यकाल के अन्तिम वर्ष में 19 वृहद पेयजल तथा 16 सिंचाई परियोजनाओं सहित 42 कॉलेजो की घोषणाएं कर दी जबकि इनके लिए कोई वित्तीय प्रावधान नहीं रखा गया। उन्होंने कहा कि हमने राजधर्म का पालन करते हुए 42 कॉलेजो की घोषणाओं में से 32 को पूरा किया।

किसान हित में नियम बदले
श्रीमती राजे ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को नई फसल बीमा योजना के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि हमारी सरकार ने इस योजना के लिए 1066 करोड रुपये का प्रावधान रखा है। उन्होंने कहा कि हमारा प्रदेश इस योजना की क्रियान्विति में अग्रणी है जिसकी स्वयं प्रधानमंत्री जी ने सराहना की है। इतना ही नहीं पहली बार राष्ट्रीय आपदा राहत फंड के नियमों में बदलाव करते हुए 50 प्रतिशत के स्थान पर 33 प्रतिशत खराबे पर मुआवजे का निर्धारण किया गया जिसका फायदा प्रदेश के किसानों को मिला। उन्होंने कहा कि ग्राम के आयोजन में 55 हजार किसानों और पशुपालकों ने भाग लेकर इसे सफल बनाया।

राजस्थान में प्रति व्यक्ति आय दुगुनी हुई
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी राज्य की खुशहाली का प्रतीक उसकी प्रति व्यक्ति आय को माना जाता है। इस आंकडे़ में भी राजस्थान ने नई ऊंचाई हासिल की है। प्रदेश की प्रति व्यक्ति वार्षिक आय वर्ष 2013-14 में 27 हजार रुपये थी, जो अब वर्ष 2015-16 में दुगुने से भी अधिक 57 हजार रुपये हो गई है।

बिजली पर देश में सबसे अधिक सब्सिडी राजस्थान में
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार के निर्णय के कारण हमें 80 हजार करोड़ रुपये के कर्ज में डूबी कम्पनियां मिली जिसका सालाना ब्याज ही 8 हजार करोड़ रुपये है। बढ़ी हुई दरों के कारण किसानों पर पड़ने वाले भार को कम करने के लिए सरकार ने यह भार खुद वहन करने का निर्णय लिया। पिछली सरकार ने 5 वर्ष में बिजली पर जहां 9 हजार करोड़ रुपये की सब्सिडी दी थी, वहीं हमारी सरकार ने तीन वर्ष में ही 24 हजार करोड़ रुपये की सब्सिडी दी है। आने वाले दिनों में सरकार इस मद में 8 हजार 500 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष सब्सिडी का भार वहन करेगी। यह सब्सिडी देश के किसी भी राज्य सरकार द्वारा कृषि पर दी जा रही सर्वाधिक सब्सिडी है।

श्रीमती राजे ने प्रदेश के स्वाभिमान और खुशहाली के लिए सभी से साथ आने का आह्वान करते हुए हेनरी फोर्ड के इस कथन के साथ अपने भाषण का समापन कियाः-

‘‘साथ आना शुरुआत होती है, साथ रहने से तरक्की होती है और साथ काम करने से सफलता मिलती है।’’
मुख्यमंत्री के भाषण के बाद सदन में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव ध्वनि मत से पारित हुआ।

मंगलवार, 28 फ़रवरी 2017

देवभूमि भारत विश्व का मार्गदर्शन करने में सक्षमः इंद्रेश कुमार


देवभूमि भारत विश्व का मार्गदर्शन करने में सक्षमः इंद्रेश कुमार
अंग्रेजी नववर्ष पर मीडिया के बड़े हिस्से में दीवानगीः अद्वैता काला

भारतीय नववर्ष अपनी  कालगणना पर आधारितः नरेंद्र तनेजा


नोएडा 16.2.2017. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक इन्द्रेश कुमार ने  भारतीय नव वर्ष को त्योहार के रूप में मनाने पर बल दिया। प्रेरणा जनसंचार एवं शोध संस्थान (नोएडा-उत्तर प्रदेश) की पत्रिका केशव संवाद के चुनाव: लोकतंत्र का पर्व विषयक विशेषांक के लोर्कापण अवसर पर उन्होंने भारतीय नववर्ष की समग्र परिकल्पना पर प्रकाश डाला और कहा कि भारतीय नववर्ष वस्तुतः कालगणना पर आधारित है और पूरे भारत में विभिन्न रूपों में मनाया जाता है। कहीं विक्रमी संवत तो कहीं युगाब्द के रूप में इसकी प्रतिष्ठा है। उन्होंने कहा कि भारतीय नववर्ष वस्तुतः भारतीय संस्कृति और परंपराओं की राष्ट्रीय अभिव्यक्ति है। यह सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की आधारभूमि है। भारत देवभूमि है और वह संपूर्ण विश्व का मार्गदर्शन करने में सक्षम है। इसकी स्वीकार्यता जनमानस में है और इसमें जितनी जनहिस्सेदारी बढ़ेगी, उतना ही भारतीय समाज एकजुट होगा और उसको मजबूती मिलेगी।

जानी-मानी पटकथा लेखिका सुश्री अद्वैता काला ने भारतीय नववर्ष के विस्तार में मीडिया की भूमिका बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने इस बात पर दुःख व्यक्त किया कि मीडिया का बड़ा हिस्सा विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक  मीडिया और अंग्रेजी मीडिया भारतीय नववर्ष की घोर उपेक्षा करते हैं। एक जनवरी को जो अंग्रेजी नववर्ष मनाया जाता है उसको लेकर मीडिया के इस बड़े हिस्से में प्रचारात्मक दीवानगी दिखती है। अगर यही दीवानगी भारतीय नववर्ष को लेकर हो तो भारतीय समाज में इसके प्रसार को बढ़ाया जा सकता है, इसको लोकप्रिय बनाया जा सकता है। उन्होंने भारतीय नववर्ष को जनता का त्योहार बनाने का आह्वान किया। कहा कि बच्चों और नव युवकों में विशेष रूप से इसके प्रति क्रेज पैदा किया जाना चाहिए।

चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के कुलपति नरेन्द्र कुमार तनेजा ने भारतीय नव वर्ष की वैज्ञानिक व्याख्या करते हुए कहा कि यह पूरी तरह से भारतीय कालगणना पर आधारित है और इसकी वैज्ञानिकता को चुनौती नहीं दी जा सकती है। उन्होंने भी इसमें जनहिस्सेदारी बढ़ाने पर बल दिया और कहा कि इसका जितना प्रचार-प्रसार होगा, उतना ही भारतीय संस्कृति और परंपराओं को मजबूती मिलेगी। हिन्दुस्थान समाचार के प्रधान संपादक राकेश मंजुल,  यूनियन बैंक, मेरठ के पूर्व महाप्रबंधक आनंद प्रकाश, संघ के सह विभाग संघचालक सुशील और नोएडा महानगर संघचालक मधुसूदन दादू आदि  के सान्निध्य में भारतीय नववर्ष पर विस्तार से मंथन हुआ।

सोमवार, 27 फ़रवरी 2017

केरल बना वामपंथी विचारधारा का खूनी चेहरा




केरल या कसाईखाना


           केरल में जब से माकपा के नेतृत्व में सरकार बनी है, तब से वहां भाजपा और संघ के कार्यकर्ताओं की हत्याएं बढ़ गई हैं। ऐसा लगता है कि वामपंथियों ने भगवान का अपना घर माने जाने वाले केरल को कसाईघर बना दिया है। 2016 में मई से सितंबर तक 300 से अधिक हत्या की वारदातें हो चुकी हैं  । - लोकेन्द्र सिंह 

ईश्वर का अपना घर' कहा जाने वाला और प्राकृतिक संपदा से संपन्न प्रदेश केरल लाल आतंक की चपेट में है। प्रदेश में लगातार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है। केरल वामपंथी हिंसा के लिए बदनाम है, लेकिन पिछले कुछ समय में हिंसक घटनाओं में चिंतित करने वाली वृद्धि हुई है। खासकर जब से केरल में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की सरकार आई है। संघ और भाजपा का कहना है कि प्रदेश में मार्क्सवादी हिंसा को मुख्यमंत्री पी़ विजयन का संरक्षण प्राप्त है। अब तक की घटनाओं में स्पष्ट तौर पर माकपा के कार्यकर्ताओं और नेताओं की संलिप्तता उजागर हुई है। लेकिन राज्य सरकार ने हिंसा को रोकने के लिए कोई कठोर कदम नहीं उठाए हैं, बल्कि घटनाओं की लीपापोती करने का प्रयास जरूर किया है। इसलिए मुख्यमंत्री पी़ विजयन सहित समूची माकपा सरकार संदेह के घेरे में है।
विश्व इतिहास में ज्ञात तथ्य है कि जहां भी कम्युनिस्ट शासन रहा है, वहां विरोधी विचार को खत्म करने के लिए मार्क्सवादी कार्यकर्ताओं ने सड़कों को खून से रंग दिया है। वामपंथी विचार के मूल में तानाशाही और हिंसा है। कम्युनिस्ट पार्टियों ने रूस से लेकर चीन, पूर्वी यूरोपीय देशों, कोरिया और क्यूबा से लेकर भारत के लाल गलियारों में घोर असहिष्णुता का प्रकटीकरण किया है। वामपंथी विचार को थोपने के लिए अन्य विचार के लोगों की राजनीतिक हत्याएं करने में कम्युनिस्ट कुख्यात हैं। भारत में पश्चिम बंगाल इस प्रवृत्ति का गवाह है और अब केरल में यह दिख रही है। केरल में वामपंथी विचारधारा से शिक्षित लोग राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी से संबंध रखने वाले लोगों की जिस क्रूरता से हत्या कर रहे हैं, वह किसी भी सभ्य समाज के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं। कोझीकोड की घटना माकपा की बर्बरता का एक उदाहरण है। कोझीकोड के पलक्कड़ में 28 दिसंबर की रात माकपा गुंडों ने भाजपा नेता चादयांकलायिल राधाकृष्णन के घर पर पेट्रोल बम से उस वक्त हमला किया, जब उनका समूचा परिवार गहरी नींद में था। सोते हुए लोगों को आग के हवाले करके बदमाश भाग गए। इस हमले में भाजपा की मंडल कार्यकारिणी के सदस्य 44 वर्षीय चादयांकलायिल राधाकृष्णन, उनके भाई कन्नन और भाभी विमला की मौत हो गई। राधाकृष्णन ने उसी दिन दम तोड़ दिया था। जबकि आग से बुरी तरह झुलसे कन्नन और उनकी पत्नी विमला की इलाज के दौरान मौत हो गई। यह क्षेत्र पूर्व मुख्यमंत्री अच्युतानंदन का चुनाव क्षेत्र है। राधाकृष्णन और उनके भाई कन्नन की सक्रियता से यहां भाजपा का जनाधार बढ़ रहा था। भाजपा की बढ़ती लोकप्रियता से भयभीत माकपा के कार्यकर्ताओं ने इस परिवार को खत्म कर दिया। वामपंथी नृशंसता का एक और उदाहरण है, जनवरी, 2017 के पहले सप्ताह में मल्लपुरम जिले की घटना। भाजपा कार्यकर्ता सुरेश अपने परिवार के साथ कार से जा रहे थे। उसी दौरान मल्लपुरम जिले में तिरूर के नजदीक माकपा गुंडों ने उन्हें घेर लिया। हथियार के बल पर जबरन कार का दरवाजा खुलवाया और उनकी गोद से दस माह के बेटे को छीन लिया और उसके पैर पकड़कर सड़क पर फेंक दिया। सुरेश पर भी जानलेवा हमला किया। यह उदाहरण इस बात के सबूत हैं केरल में 'सर्वहारा का शासन' नहीं, बल्कि 'जंगल राज' आ गया है। 
इस जंगलराज में महिला और मासूम बच्चे भी सुरक्षित नहीं हैं। चिंता की बात यह भी है कि इन घटनाओं पर राष्ट्रीय मीडिया और तथाकथित बुद्धिजीवी जगत में अजीब-सी खामोशी पसरी हुई है। केरल का कन्नूर लाल आतंक के लिए सबसे अधिक कुख्यात है। ऐसा माना जाता है कि अपने विरोधियों को ठिकाने लगाने का प्रशिक्षण देने के लिए वामपंथी खेमे में गर्व के साथ 'कन्नूर मॉडल' को प्रस्तुत किया जाता है। अब जब प्रदेश में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार है, तब इस कन्नूर मॉडल को पूरे प्रदेश में लागू करने का षड्यंत्र रचा जा रहा है। हाल में, कन्नूर में 18 जनवरी को भाजपा के कार्यकर्ता मुल्लापरम एजुथान संतोष की हत्या की गई। 
संतोष की हत्या माकपा के गुंडों ने उस वक्त कर दी, जब वह रात में अपने घर में अकेले थे। इस तरह घेराबंदी करके हो रही संघ और भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या से स्थानीय जनता में आक्रोश देखा जा रहा है। संतोष की हत्या के बाद केरल में बढ़ रहे जंगलराज और लाल आतंक के खिलाफ आवाज बुलंद करने का संकल्प संघ और भाजपा ने किया है।
इससे पूर्व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अक्टूबर, 2016 में हैदराबाद में आयोजित अपने अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक में प्रस्ताव पारित कर राजनीति प्रेरित हत्याओं को रोकने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग केरल और केंद्र सरकार के सामने रख चुका है। इसके साथ ही संघ ने जनसामान्य से आह्वान किया है कि मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के हिंसात्मक तौर-तरीकों के विरुद्ध जनमत निर्माण करने के लिए विभिन्न मंचों पर आवाज उठाई जाए। तथाकथित बुद्धिजीवियों की खामोशी के बाद भी अब संघ के आह्वान पर वामपंथी विचारधारा का यह खूनी चेहरा समूचे देश के सामने आना तय है।
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केरल में सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगाए केंद्र: दत्तात्रेय

नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated: Jan 24, 2017

नई दिल्ली
संघ के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने कहा है कि संघ और बीजेपी की कार्यकर्ताओं की केरल में हो रही हत्याओं को लेकर प्रदेश सरकार को बर्खास्त कर वहां राष्ट्रपति शासन लगाया जाए। उन्होंने कहा, 'ये मांग हिंदुस्तान की जनता केंद्र सरकार से करे, क्योंकि केरल की राज्य सरकार के संरक्षण में सीपीएम के कार्यकर्ता इंसानियत का गला घोंट रहे हैं।' दत्तात्रेय मंगलवार को जंतर-मंतर पर जनाधिकार समिति की ओर से आयोजित धरना-प्रदर्शन के दौरान बोल रहे थे।

दत्तात्रेय ने संघ और बीजेपी कार्यकर्ताओं की राजनीतिक हत्या पर चेतावनी दी कि यदि केरल सरकार अभी अचित कार्रवाई नहीं करती है तो इसका परिणाम भुगतने को तैयार रहे। उन्होंने कहा, 'वामपंथियों का आधार कठोर नफरत है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है कि वे माताओं-बहनों और मासूम बच्चों तक को नहीं छोड़ते हैं, लेकिन अब मार्क्सवादी कार्यकर्ताओं ने हमारे कार्यकर्ताओं का खून बहाया तो उन्हें कुरुक्षेत्र के मैदान में घसीटकर कौरवों का इतिहास दोहराया जाएगा।'

संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख जे. नंदकुमार ने कहा, 'आज भगवान की धरती कही जाने वाली केरल की धरती को कम्युनिस्ट गुंडों ने कसाईखाना बना रखा है। पिछले कुछ सालों में केरल में 270 संघ और बीजेपी कार्यकर्ताओं की हत्या की जा चुकी है।' धरना-प्रदर्शन के बाद जनाधिकार समिति के एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय गृह राज्यमंत्री हंसराज अहीर को ज्ञापन सौंपा, जिसमें केरल में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की गई।
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हिंसा और दमन के जरिये राजनीतिक वर्चस्व स्थापित करना है वामपंथ का असल चरित्र

आयुष आनंद (लेखक नेशनलिस्ट ऑनलाइन में कॉपी एडिटर हैं।)


केरल हमेशा से राजनीतिक हिंसा के लिए कुख्यात रहा है। आये दिन वहां राजनीतिक दलों के आम कार्यकर्ता इन हिंसा के शिकार हो रहे हैं। केरल में अक्सर हर तरह की राजनीतिक हिंसा में अक्सर एक पक्ष मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ही होती आई है| चाहे आज़ादी के पहले त्रावनकोर राज्य के विरुद्ध एलप्पी क्षेत्र में अक्टूबर 1946 को हुआ कम्युनिस्टों का हिंसक पुन्नापरा-वायलर विद्रोह हो, जिसमें हजारों की तादाद में आम पुलिस वाले एवं जनसामान्य मारे गए थे तथा जिसे तात्कालीन कम्युनिस्ट नेता टी के वर्गीश वैद्य ने “कम्युनिस्ट इंडिया” बनाने का पूर्वाभ्यास तक कह डाला था, या फिर विश्व की प्रथम लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गयी 1957 की कम्युनिस्ट नम्बूदरीपाद सरकार में शुरू हुयी व्यापक राजनैतिक हिंसा, जिसमें विपक्ष के नेताओं और कार्यकर्ताओं को चुन चुन कर मारा जाने लगा| समस्या इतनी गंभीर हो गयी कि सन 1959 में तात्कालीन कांग्रेस नीत केंद्र सरकार को राज्य में संवैधानिक ढांचे के टूटने एवं कानून व्यवस्था समाप्त हो जाने के आरोप में अनुच्छेद 356 का प्रयोग कर, लिबरेशन स्ट्रगल कर रहे सामान्य केरल वासियों की मांग को मानते हुए नम्बूदरीपाद सरकार को बर्खास्त करना पड़ा। इस तरह विश्व की एक मात्र जनतांत्रिक तरीके से चुनी हुई कम्युनिस्ट सरकार भी हिंसा के उसी मार्ग पर चल पड़ी, जहाँ इंसान का मूल्य विचारधारा एवं राजनैतिक हितों के समक्ष गौण हो जाता है।
जो भी स्टालिन की नीतियों के विरुद्ध होता चाहे वो उसकी खुद की ही पार्टी का क्यों न हो, उसकी हत्या कर देना ही उसका राजधर्म बन गया। स्टालिन ने अपनी विचारधारा जो कि स्टालिनवादी थी, का प्रचार शुरू किया। भारत के मार्क्सवादी इसी परंपरा के वाहक हैं। वे राजनीती में सत्तासीन होने के लिए स्टॅलिन की ही तरह हिंसा, क़त्ल एवं वैचारिक तानाशाही को प्रमुखता देते हैं। और तो और सत्तासीन होने के बाद भी अगर कोई उनकी नीतियों से इतर सोचता है या उस सरकार के शीर्ष नेतृत्व को चुनौती देने में सक्षम हो जाता है तो स्टालिन की ही तरह ये भी उसे हमेशा के लिए शांत करने से नहीं चूकते।
केरल में सत्तारूढ़ मार्क्सवादी सरकार विश्व की एक मात्र सरकार या यों कहें एक मात्र राजनैतिक विचारधारा वाली पार्टी है, जो अब तक क्रूर दमनकारी एवं हिंसक राजनीतिज्ञ स्टालिन को अपना राजनैतिक आदर्श मानती है। जहाँ सम्पूर्ण विश्व अब लगभग ये बात मान चुका है कि स्टालिन की नीतियाँ सभ्य राजनैतिक व्यवस्था में कोई स्थान न रखती है और न ही उसका कोई स्थान होना चाहिए, वहीँ भारत के मार्क्सवादी आज तक उसे अपना आदर्श बनाये बैठे हैं। अक्टूबर 1917 की रुसी क्रांति से लेनिन के बाद सत्तासीन हुए स्टालिन ने ना केवल मार्क्सवाद की विचारधारा का ही बंटाधार किया बल्कि लेनिन ने जो कुछ मार्क्सवाद बचा रखा था, उसे भी तिलांजलि दे दी। मार्क्स नवीन राष्ट्र-राज्य की अवधारणा के ही खिलाफ थे, उनके अनुसार क्रांति नीचे से स्वतः होनी थी, जबकि स्टॅलिन ने इसे जबरन थोपने का अभियान चलाया। जो भी उसकी नीतियों के विरुद्ध होता चाहे वो उसकी खुद की ही पार्टी का क्यों न हो, उसकी हत्या कर देना ही राज धर्म बन गया। स्टालिन ने मार्क्स के असल उसूलों के खिलाफ जा कर न केवल तत्कालीन जहरीली वैश्विक कूटनीति का अंग बनना स्वीकार किया अपितु अपनी विचारधारा जो कि मार्क्सवादी तो बिलकुल नहीं, बल्कि स्टालिनवादी थी, का प्रचार शुरू किया। भारत के मार्क्सवादी इसी परंपरा के वाहक हैं। वे राजनीती में सत्तासीन होने के लिए स्टेलिन की ही तरह हिंसा, क़त्ल एवं वैचारिक तानाशाही को ही प्रमुखता देते हैं। और तो और, सत्तासीन होने के बाद भी अगर कोई उनकी नीतियों से इतर सोचता है या उस सरकार के शीर्ष नेतृत्व को चुनौती देने में सक्षम हो जाता है, तो स्टालिन की ही तरह ये भी उसे हमेशा के लिए शांत करने से चूकते नहीं हैं। इसी वैचारिक पृष्ठभूमि में जहाँ भी यह दल “सी.पी.एम.” सक्रिय और मजबूत होता है, वहां ये अपनें इन्ही हिंसक तौर-तरीकों को इस्तेमाल में लाने लगते हैं, चाहे वो बंगाल रहा हो या लगातार लाल हो रही केरल की भूमि।

भारतीय जनसंघ के सन 1967 में हुए कालीकट सम्मलेन के साथ केरल की राजनीति में राष्ट्रवादी विचारधारा का जब से प्रादुर्भाव हुआ है, उसी समय से राष्ट्रवादी विचार के कार्यकर्ता लगातार स्टालिनवादी सी.पी.एम. के शिकार बन रहे हैं। संघ के मुख्य शिक्षक वदिकल रामकृष्णन की कन्नूर में हुयी हत्या से शुरू हुआ सिलसिला आज तक लगातार जारी है। अकेले केरल में ही सी.पी.एम. हिंसा में मारे गए राष्ट्रवादी कार्यकर्ताओं कि संख्या 227 के लगभग है। अभी हाल ही में 12 अक्टूबर को कन्नूर में मार्क्सवादियों ने सी रेमिथ की हत्या कर दी, इनके पिता उत्थमन की भी हत्या इन्ही तत्वों ने सन 2002 में कर दी थी। इनका गाँव पिन्नाराई, सी.पी.एम. के मुख्यमंत्री का पैतृक ग्राम भी है। जब से मई 2016 में सी.पी.एम. की सरकार केरल में बनी है, तब से राजनैतिक हिंसा एवं हत्याओं का सिलसिला फिर से शुरू हो चुका है। संघ कार्यकर्ताओं पर हमले आम हो गए हैं एवं चार कार्यकर्ताओं की अब तक हत्या भी हो चुकी है। अभी मात्र 2 महीने पूर्व प्रदेश भाजपा के त्रिवेंद्रम स्थित नवनिर्मित कार्यालय पर पेट्रोल बम से हमला भी किया गया। यहाँ पर ही गत 7 अक्टूबर को विष्णु नामक भाजपा युवा मोर्चा के कार्यकर्ता की उसके मां बिंदु और चाची लैला के सामने सी.पी.एम. कार्यकर्ताओं ने हत्या कर दी थी तथा उन्होंने जब विष्णु को बचाने की कोशिश की तो उन्हें भी घायल कर दिया। विष्णु एक संभ्रांत दलित परिवार से ताल्लुक रखता था।
रमज़ान महीने के 29 वें दिन 2014 में सी.पी.एम. कार्यकर्ताओं ने मुस्लिम संगठन SDPI के मुखपत्र तेजस तेली के संवाददाता फैज़ल की सरेआम हत्या कर दी। हत्या के बाद उन्होंने वहां पर त्रिशूल गाड़ कर इसका इलज़ाम संघ कार्यकर्ताओं पर डालकर समाज में राजनैतिक स्वार्थ हेतु वैमनस्य पैदा करने की कोशिश की। जब एक इमानदार पुलिस अधिकारी ने इस साजिश का पर्दाफाश करना चाहा तो उसे प्रताड़ित किया जाने लगा एवं उसका तबादला कर दिया गया। तब जाके फैज़ल के परिवार वालों ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया एवं माननीय उच्च न्यायालय ने इस केस को सीबीआई को सौंपा। बाद में सीबीआई के छानबीन में असल आरोपियों की पहचान सी.पी.एम. कार्यकर्ताओं के रूप में हुई, जिसे उच्च न्यायालय ने भी सत्य पाया।
असल में केरल में हर तरह की राजनैतिक हिंसा के पीछे एक हाथ तो सी.पी.एम का होता ही है। केरल में अब फिर से शुरू हुए नवीन राजनैतिक हिंसा के दौर में सी.पी.एम. ने जिहादी तत्वों के साथ हाथ मिला लिया है, दोनों ही विचारधाराएँ संघ कार्यकर्ताओं को अपना आसान निशाना बना रही हैं| कुल मिला के सी.पी.एम. केरल में मार्क्स नहीं, बल्कि पूर्ण रूप से स्टालिन के पदचिन्हों पर चल रही है और यही कारण है कि जहाँ भी सी.पी.एम. प्रभावशाली है, भारतीय जन सामान्य को वहां पर तब तक गंभीर राजनैतिक हिंसक दौर से गुजरना पड़ रहा है। केरल से व्यापक पैमाने पर ISIS के लिए हुआ पलायन एवं इस मुद्दे पर सी.पी.एम. की अगुवाई वाली वाम मोर्चा के सरकार की अनदेखी तो कम से कम इसी ओर इशारा कर रही है। काफी टालमलोट के बाद ही केरल सरकार ने ISIS के युद्ध क्षेत्र से आये कॉल डिटेल को NIA से साझा किया। अगर व्यापक दृष्टि से देखे तो पाएंगे इन सारे तत्वों का स्वार्थ समाज में अव्यवस्था एवं राष्ट्रवाद के पोषक तत्वों के सफाए में सन्निहित है और चूँकि संघ कार्यकर्ता इस विषैली विचारधारा का लोकतान्त्रिक तरीके से सफलतापूर्वक प्रतिकार कर रहे हैं, इसलिए उन्हें इसकी कीमत अपने कार्यकर्ताओं के खून के रूप में चुकानी भी पड़ रही है। जब तक ये तत्व राजनैतिक रूप से संघर्षग्रस्त इन क्षेत्रों में गौण नहीं हो जाते तब तक हिंसा के इस सतत चल रहे सिलसिले के थम जाने की संभावना दूर-दूर तक दिखाई नहीं देती है। अब ये वहां की जनता को ही निश्चित करना होगा कि वो किस तरह की राजनैतिक व्यवस्था चाहते हैं। क्या शान्ति के साथ चलने वाले लोकतांत्रिक व्यवस्था का विकल्प हिंसक स्टालिन को माने वाले सी.पी.एम. या जिहादी तत्व हो सकते हैं ? सब कुछ वहां की जनता के निर्णय पर निर्भर है कि उन्हें शांत सुरभित लोकतंत्र या फिर समाज में सतत संघर्ष चाहने वाली वाम विचारधारा इनमें से  क्या चाहिए ? सभ्य समाज को इन तत्वों को अब नकारना ही पड़ेगा।

मंगलवार, 21 फ़रवरी 2017

उत्तर प्रदेश में 55 लाख लोगों को गैस कनेक्शन दिए जा चुके हैं : नरेंद्र मोदी



भाजपा का उद्देश्य है किसान को सिंचाई, बालकों को पढ़ाई, 
युवकों को कमाई और बुजुर्गों को दवाई: प्रधानमंत्री
February 20, 2017

Quote उत्तर प्रदेश के उरई और फूलपुर में श्री नरेंद्र मोदी की चुनाव प्रचार, लोगों से भाजपा सरकार के लिए वोट करने का किया आग्रह
Quote प्रधानमंत्री मोदी ने सपा, बसपा और कांग्रेस पर साधा निशाना,  उत्तर प्रदेश के धीमी विकास लिए ठहराया जिम्मेदार
Quote उत्तर प्रदेश की सरकार बुंदेलखंड के विकास पर ध्यान नहीं दे रही: प्रधानमंत्री मोदी
Quote राज्य में खराब कानून व्यवस्था पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूपी सरकार से पूछा सवाल
Quote युवाओं के लिए नए अवसर मुहैया कराने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने स्किल इंडिया और स्टार्ट-अप इंडिया कार्यक्रमों की शुरुआत की: प्रधानमंत्री

         प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के उरई और फूलपुर में एक जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भाजपा उत्तर प्रदेश के लिए विकास के चार मंत्र लेकर चल रही है, किसान को सिंचाई, बालकों को पढ़ाई, युवकों को कमाई और बुजुर्गों को दवाई। श्री मोदी ने कहा कि अगर उनकी सरकार आई तो केन-बेतवा नदी को जोड़ दिया जाएगा, जिससे बुंदेलखंड के हर कोने में पानी पहुंच जाएगा। साथ ही बुंदेलखंड के विकास के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय में स्वतंत्र बुंदेलखंड विकास बोर्ड का गठन किया जाएगा, जिसका साप्ताहिक हिसाब रखा जाएगा।

        प्रधानमंत्री ने गरीबों के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और कहा कि गरीब को सस्ती दवाई मिले। इसके लिए 700 दवाइयों के दाम कम किए गए है। जो कैंसर की दवाई पहले 30 हजार में मिलती थी, वो अब 2 हजार रुपये में और बीपी, शूगर की जो दवाई 80 रूपये में मिलती थी, उसके दाम 12 रूपये कर दिए गए है। यही नहीं अब हार्ट की एंजियोप्लास्टी में लगने वाला स्टेंट जो पहले डेढ़ लाख में आता था, उसके दाम भी घटाकर 25 हजार तक कर दिए गए हैं।

       प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने यूरिया का नीम कोटिंग करने के साथ उसका दाम भी घटा दिया है। नीमकोटिंग यूरिया की वजह से किसानों की फसलों की पैदावार में भी 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। श्री मोदी ने कहा अगर भाजपा की सरकार प्रदेश में आई तो खनन माफियाओं की खुले आम खनिज संपदाओं की लूट पर रोक लगाएगी। साथ ही नौजवानों को पलायन न करना पड़े, इसकी कोशिश की जाएगी।

         उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार स्किल इंडिया और स्टार्ट-अप इंडिया जैसे कार्यक्रमों का संचालन कर रही है जिससे युवाओं के लिए नए अवसर पैदा होंगे। प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि अकेले उत्तर प्रदेश में 55 लाख लोगों को गैस कनेक्शन दिए जा चुके हैं। जबकि प्रदेश के 1500 गांवों में पहली बार केंद्र सरकार के प्रयासों से बिजली पहुंच चुकी है।

        प्रधानमंत्री ने कहा कि भाजपा देश में विकास का माहौल तैयार करने और लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में काम कर रही है।