शनिवार, 14 दिसंबर 2019

नागरिकता (संशोधन) :पाकिस्तान के प्रथम कानून मंत्री योगेन्द्रनाथ मंडल का खत




नागरिकता (संशोधन) कानून का विरोध करने से पहले योगेन्द्रनाथ मंडल का खत पढ़ लें
पाकिस्तान से वहां के इस्लामी शासन के विभेदकारी कारनामों के कारण प्रताड़ित होकर भारत आ रहे हिन्दुओं को भारतीय नागरिकता प्रदान करने सम्बन्धी नागरिकता (संशोधन) विधेयक-2019 पारित हो जाने पर अपनी छाती पीटने वालों को पाकिस्तान के प्रथम कानून मंत्री योगेन्द्रनाथ मंडल का लिखा खत पढ़ लेना चाहिए। तब उन्हें समझ में आ जाएगा कि यह विधेयक क्यों जरूरी था।
पाकिस्तान बन जाने के कुछ ही दिनों बाद वहां मुस्लिम लीग के कारिन्दों द्वारा गैर-मुस्लिमों को निशाना बनाया जाने लगा था। हिन्दुओं के साथ लूट-मार और बलात्कार की घटनाएं सामने आने लगीं। मंडल ने इस विषय पर सरकार को कई खत लिखे। लेकिन पाकिस्तानी सरकार ने उनकी एक न सुनी। उल्टे योगेन्द्रनाथ मंडल को ही मंत्रिमण्डल से बाहर करने के लिए उनकी देशभक्ति पर संदेह किया जाने लगा। मंडल को इस बात का एहसास हुआ कि जिस पाकिस्तान को उन्होंने अपना घर समझा था, वह उनके रहने लायक नहीं है। मंडल बहुत आहत हुए। उन्हें विश्वास था कि पाकिस्तान में दलित-हिन्दुओं के साथ अन्याय नहीं होगा। किन्तु, करीबन दो सालों में ही दलित-मुस्लिम एकता का उनका ख्वाब टूट गया। फलतः जिन्ना की मौत के बाद मंडल 8 अक्टूबर, 1950 को लियाकत अली खां के मंत्रिमंडल से त्यागपत्र देकर भारत आ गए। योगेन्द्रनाथ मंडल ने अपने खत में मुस्लिम लीग से जुड़ने और अपने इस्तीफे की वजह को स्पष्ट किया है। उसके कुछ अंश आप भी देखिये।
मंडल ने लियाकत अली खां को प्रेषित अपने खत में लिखा था, 'बंगाल में मुस्लिम और दलितों की एक जैसी हालात थी। दोनों ही पिछड़े और अशिक्षित थे। मुझे आश्वस्त किया गया था कि लीग के साथ मेरे सहयोग से ऐसे कदम उठाये जाएंगे जिससे बंगाल की बड़ी आबादी का भला होगा। हम मिलकर ऐसी आधारशिला रखेंगे जिससे साम्प्रदायिक शांति और सौहार्द्र बढ़ेगा। इन्हीं कारणों से मैंने मुस्लिम लीग का साथ दिया। 1946 में पाकिस्तान के निर्माण के लिए मुस्लिम लीग ने 'डायरेक्ट एक्शन डे' मनाया। उसके बाद बंगाल में भीषण दंगे हुए। कलकत्ता के नोआखली नरसंहार में पिछड़ी जाति समेत कई हिन्दुओं की हत्याएं हुई। सैकड़ों ने इस्लाम कबूल लिया। हिन्दू महिलाओं का बलात्कार, अपहरण किया गया। इसके बाद मैंने दंगा प्रभावित इलाकों का दौरा किया। मैंने हिन्दुओं के भयानक दुःख देखे। जिनसे आहत हूं। फिर भी मैंने मुस्लिम लीग के साथ सहयोग की नीति को जारी रखा। 14 अगस्त 1947 को पाकिस्तान बनने के बाद मुझे मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। मैंने ख्वाजा नजीमुद्दीन से बात कर ईस्ट बंगाल की कैबिनेट में दो पिछड़ी जाति के लोगों को शामिल करने का अनुरोध किया। उन्होंने मुझसे ऐसा करने का वादा किया। लेकिन इसे टाल दिया गया, जिससे मैं बहुत हताश हुआ।'
अपने खत में मंडल ने पाकिस्तान में दलितों पर हुए अत्याचार की कई घटनाओं जिक्र करते हुए लिखा है, 'गोपालगंज के पास दीघरकुल में मुस्लिमों की झूठी शिकायत पर स्थानीय नमोशूद्राय लोगों के साथ अत्याचार किया गया। पुलिस के साथ मिलकर मुसलमानों ने नमोशूद्राय समाज के लोगों को पीटा, घरों में छापे मारे। एक गर्भवती महिला की इतनी बेरहमी से पिटाई की गयी कि उसका गर्भपात हो गया। निर्दोष हिन्दुओं विशेष रूप से पिछड़े समुदाय के लोगों पर सेना और पुलिस ने भी हिंसा को बढ़ावा दिया। हबीबगढ़ में निर्दोष पुरुषों और महिलाओं को पीटा गया। सेना ने न केवल लोगों को पीटा बल्कि हिन्दू पुरुषों को उनकी महिलाओं को सैन्य शिविरों में भेजने को मजबूर किया, ताकि वो सैनिकों की कामुक इच्छाओं को पूरा कर सकें। मैं इस मामले को आपके संज्ञान में लाया था। मुझे इस मामले में रिपोर्ट के लिए आश्वस्त किया गया, लेकिन रिपोर्ट नहीं आई। कलशैरा में सशस्त्र पुलिस, सेना और स्थानीय लोगों ने पूरे गांव पर हमला किया। कई महिलाओं का पुलिस, सेना और स्थानीय लोगों द्वारा बलात्कार किया गया। मैंने 28 फरवरी 1950 को कलशैरा और आसपास के गांवों का दौरा किया। जब मैं कलशैरा में आया तो देखा कि वह जगह उजाड़ और खंडहर में बदल गई है। करीब 350 घरों को ध्वस्त कर दिया गया। मैंने तथ्यों के साथ आपको सूचना दी। ढाका में नौ दिनों के प्रवास के दौरान में दंगा प्रभावित इलाकों का दौरा किया। ढाका नारायणगंज और ढाका चंटगांव के बीच ट्रेनों और पटरियों पर निर्दोष हिन्दुओं की हत्याओं ने मुझे गहरा झटका दिया। मैंने ईस्ट बंगाल के मुख्यमंत्री से मुलाकात कर दंगा रोकने के लिए जरूरी कदमों को उठाने का आग्रह किया। 20 फरवरी 1950 को मैं बरिसाल पहुंचा। वहां की घटनाओं के बारे में जानकार चकित था। वहां बड़ी संख्या में हिन्दुओं को जला दिया गया था। उनकी बड़ी आबादी को खत्म कर दिया गया। मैंने जिले में लगभग सभी दंगा प्रभावित इलाकों का दौरा किया।
मधापाशा में जमींदार के घर में 200 लोगों की मौत हुई और 40 घायल थे। एक जगह है मुलादी। प्रत्यक्षदर्शी ने वहां भयानक नरक देखा। वहां 300 लोगों का कत्लेआम हुआ था। वहां गांव में शवों के कंकाल भी देखे। नदी किनारे गिद्ध और कुत्ते लाशों को खा रहे थे। वहां पुरुषों की हत्या के बाद लड़कियों को आपस में बांट लिया गया। राजापुर में 60 लोग मारे गए। बाबूगंज में हिन्दुओं की दुकानों को लूटकर आग लगा दी गई। ईस्ट बंगाल के दंगे में अनुमान के मुताबिक 10,000 लोगों की हत्या हुई। अपने आसपास महिलाओं और बच्चों को विलाप करते हुए मेरा दिल पिघल गया। मैंने अपने आप से पूछा, क्या मैं इस्लाम के नाम पर पाकिस्तान आया था?'
उन्होंने लिखा है, 'मुझे एक ऐसी सूची मिली है, जिसके अनुसार 363 मंदिरों व गुरूद्वारों को मुसलमानों ने कब्जे में ले लिया है। इनमें से कुछ को कसाईखाना व होटलों में तब्दील कर दिया है। मुझे जानकारी मिली है कि सिंध में रहने वाले दलित हिन्दुओं की बड़ी संख्या को जबरन मुसलमान बनाया गया है।'
पाकिस्तान के प्रथम कानून मंत्री ने वहां के प्रधानमंत्री को प्रेषित अपने खत के अंत में लिखा था, 'पाकिस्तान की पूरी तस्वीर तथा उसकी शासन-व्यवस्था के निर्दयी एवं कठोर अन्याय को एक तरफ रखते हुए मेरा अपना तजुर्बा भी कुछ कम दुखदायी व पीड़ादायक नहीं है। आपने अपने प्रधानमंत्री और संसदीय पार्टी के पद का उपयोग करते हुए मुझसे एक वक्तव्य जारी करवाया था, जो मैंने 8 सितम्बर को दिया था। आप जानते हैं कि मेरी ऐसी मंशा नहीं थी कि मैं ऐसे असत्य और असत्य से भी बुरे अर्धसत्य-भरा वक्तव्य जारी करूं। जब तक मै मंत्री के रूप में आपके साथ और आपके नेतृत्व में काम कर रहा था, मेरे लिए आपके आग्रह को ठुकरा देना मुमकिन नहीं था। पर, अब मैं इससे ज्यादा झूठे दिखावे तथा असत्य के बोझ को अपनी अंतरात्मा पर नहीं लाद सकता। मैंने यह निश्चय किया कि मैं आपके मंत्री के तौर पर अपने इस्तीफे का प्रस्ताव आपको दूं, जो कि मैं आपके हाथों में थमा रहा हूं। मुझे उम्मीद है आप बिना किसी देरी के इसे स्वीकार करेंगे। आप बेशक इस्लामिक स्टेट के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए इस पद को किसी को देने के लिये स्वतंत्र हैं।'
मालूम हो कि पाकिस्तानी सरकार के मंत्रिमंडल से इस्तीफे के बाद योगेन्द्रनाथ मंडल भारत आ गये थे। कुछ वर्ष गुमनामी की जिन्दगी जीने के बाद 5 अक्टूबर, 1968 को पश्चिम बंगाल में उन्होंने अंतिम सांस ली। ऐसे में विभाजन के समय कांग्रेसी नेताओं के इस आश्वासन पर कि पाकिस्तान में किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं होगा, वहीं रह गए हिन्दुओं की भला क्या गलती है जिन्हें आज वहां न्यूनतम मानवाधिकार भी प्राप्त नहीं है। उनकी भारतीय नागरिकता को पाकिस्तानी नागरिकता में तब्दील कर देने का पाप तो तत्कालीन कांग्रेस की सरकार ने ही की थी। अतएव कांग्रेसियों को इस विधेयक का विरोध कर एक और पाप नहीं करना चाहिए। किन्तु उन्हें कौन समझाये? योगेन्द्र मंडल के पत्र को पढ़कर वे स्वयं समझें।


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कांग्रेस ने पाकिस्तान से कभी नहीं पूछा कि 24 प्रतिशत हिन्दू कहां गये 
-अरविन्द सिसौदिया, जिला महामंत्री भाजपा कोटा !!! 9414180151

जानें क्या है नागरिकता संशोधन बिल : पढ़ें 10 खास बातें
नागरिकता संशोधन विधेयक ( Citizen Amendment Bill ) को लोकसभा के बाद अब राज्यसभा से भी मंजूरी मिल गई। राष्ट्रपति की मुहर लगने के बाद अब नागरिकता संशोधन विधेयक कानून बन जाएगा। संसद ने बुधवार को नागरिकता संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी जिसमें अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से धार्मिक प्रताड़ना के कारण भारत आए हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के लोगों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान है। राज्यसभा ने बुधवार को विस्तृत चर्चा के बाद इस विधेयक को पारित कर दिया। सदन ने विधेयक को प्रवर समिति में भेजे जाने के विपक्ष के प्रस्ताव और संशोधनों को खारिज कर दिया। विधेयक के पक्ष में 125 मत पड़े जबकि 105 सदस्यों ने इसके खिलाफ मतदान किया। बता दें कि लोकसभा इस विधेयक को पहले ही पारित कर चुकी है।
आइये जानते हैं इस बिल के बारे में दस अहम बातें-
1- नागरिक संशोधन बिल के कानून का रूप लेने से पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक उत्पीड़न के कारण वहां से भागकर आए हिंदू, ईसाई, सिख, पारसी, जैन और बौद्ध धर्म को मानने वाले लोगों को CAB के तहत भारत की नागरिकता दी जाएगी।
2 -  ऐसे अवैध प्रवासियों को जिन्होंने 31 दिसंबर 2014 की निर्णायक तारीख तक भारत में प्रवेश कर लिया है, वे भारतीय नागरिकता के लिए सरकार के पास आवेदन कर सकेंगे। 
3. अभी भारतीय नागरिकता लेने के लिए 11 साल भारत में रहना अनिवार्य है। नए बिल में प्रावधान है कि पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यक अगर पांच साल भी भारत में रहे हों तो उन्हें नागरिकता दी जा सकती है
4. यह भी व्यवस्था की गयी है कि उनके विस्थापन या देश में अवैध निवास को लेकर उन पर पहले से चल रही कोई भी कानूनी कार्रवाई स्थायी नागरिकता के लिए उनकी पात्रता को प्रभावित नहीं करेगी। 
5. ओसीआई कार्डधारक यदि शर्तों का उल्लंघन करते हैं तो उनका कार्ड रद्द करने का अधिकार केंद्र को मिलेगा। पर उन्हें सुना भी जाएगा।  
6- नागरिकता संशोधन बिल के चलते जो विरोध की आवाज उठी उसकी वजह ये है कि इस बिल के प्रावधान के मुताबिक पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले मुसलमानों को भारत की नागरिकता नहीं दी जाएगी। कांग्रेस समेत कई पार्टियां इसी आधार पर बिल का विरोध कर रही हैं।
7- देश के पूर्वोत्तर राज्यों में इस विधेयक का विरोध किया जा रहा है, और उनकी चिंता है कि पिछले कुछ दशकों में बांग्लादेश से बड़ी तादाद में आए हिन्दुओं को नागरिकता प्रदान की जा सकती है।
8. गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भारत के मुसलमान भारतीय नागरिक थे, हैं और बने रहेंगे। उन्होंने कहा कि उन तीनों देशों में अल्पसंख्यकों की आबादी में खासी कमी आयी है। शाह ने कहा कि विधेयक में उत्पीड़न का शिकार हुए अल्पसंख्यकों को नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान है। शाह ने इस विधेयक के मकसदों को लेकर वोट बैंक की राजनीति के विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए देश को आश्वस्त किया कि यह प्रस्तावित कानून बंगाल सहित पूरे देश में लागू होगा। उन्होंने इस विधेयक के संविधान विरूद्ध होने के विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि संसद को इस प्रकार का कानून बनाने का अधिकार स्वयं संविधान में दिया गया है। उन्होंने यह भी उम्मीद जतायी कि यह प्रस्तावित कानून न्यायालय में न्यायिक समीक्षा में सही ठहराया जाएगा। उन्होंने कहा कि मुस्लिमों को चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि वे भारत के नागरिक हैं और बने रहेंगे।
9. समर्थन में - भाजपा, अन्नाद्रमुक , बीजद , जदयू , अकाली , मनोनीत , अन्य 
10. विरोध में- कांग्रेस , टीएमसी , सपा , राजद , एनसीपी , माकपा , टीआरएस , डीएमके , बसपा , आप के अलावा मुस्लिम लीग, भाकपा और जेडीएस।




गुरुवार, 28 नवंबर 2019

इकलौता बेटा : करोड़पति मां का कंकाल



भारतीय संस्कृति बचाओ पवित्र परिवार बनाओ 

- अरविन्द सिसौदिया, जिला महामंत्री भाजपा कोटा !!! 9414180151



मुम्बई की करोड़पति स्त्री का शव है। एक करोड़पति NRI पुत्र की माँ की लाश है।

#जरूर_पढ़ें
यह मुम्बई की करोड़पति स्त्री का शव है। एक करोड़पति NRI पुत्र की माँ की लाश है। लगभग 10 माह से 7 करोड़ के फ़्लैट में मरी पड़ी थी। अमेरिका में रहने वाले इंजीनियर ऋतुराज साहनी लंबे अरसे बाद अपने घर मुंबई लौटे, तो घर पर उनका सामना किसी जीवित परिजन की जगह अपनी मां के कंकाल से हुआ। बेटे को नहीं मालूम कि उसकी मां आशा साहनी की मौत कब और किन परिस्थितियों में हुई। आशा साहनी के बुढ़ापे की एकमात्र आशा 'उनके इकलौते बेटे' ने खुद स्वीकार किया कि उसकी मां से आखिरी बातचीत कोई सवा साल पहले बीते साल अप्रैल में हुई थी।
23 अप्रैल 2016 को मां ने ऋुतुराज से कहा था कि बेटा! अब अकेले नहीं रह पाती हूँ। या तो अपने पास अमेरिका बुला लो या फिर मुझे किसी ओल्डएज होम में भेज दो। बेटे ऋतुराज ने आशा साहनी को ढाढस दिया कि मां फिक्र न करे, वह जल्द ही इंडिया आएगा। डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिका में किसी भारतीय का नौकरी करना और डालर कमाना आसान नहीं रहा। लिहाजा बेटे ने अपने हिसाब से तो जल्दी ही की होगी, वह सवा साल बाद मॉं से किया वायदा पूरा करने इंडिया आया, पर माँ के हिसाब से देर हो गई और इसी बीच न जाने कब आशा साहनी की मौत हो गई।
रविवार सुबह एयरपोर्ट से घर पहुंचने के बाद ऋतुराज साहनी ने काफी देर तक दरवाजे पर दस्तक दी। जब कोई जवाब नहीं आया तो उन्होंने दरवाजा खुलवाने के लिए एक चाबी बनाने वाले की मदद ली। भीतर घुसे तो उन्हें अपनी 63 साल की मां आशा साहनी का कंकाल मिला।

आशा साहनी 10वें फ्लोर पर बड़े से फ़्लैट में अकेले रहती थीं। उनके पति की मौत 2013 में हो चुकी थी। पुलिस के मुताबिक 10वीं मंजिल पर स्थित दोनों फ्लैट साहनी परिवार के ही हैं, इसलिए शायद पड़ोसियों को कोई बदबू नहीं आई। हालांकि पुलिस के मुताबिक यह भी हैरानी की बात है कि किसी मेड या फिर पड़ोसी ने उनके दिखाई न देने पर गौर क्यों नहीं किया।

बेटे ने अंतिम बार अप्रैल 2016 में बात होने की जानकारी ऐसे दी, मानों वह अपनी मां से कितना रेगुलर टच में था। जैसा कि बेटे से बातचीत में आशा ने संकेत भी किया था कि वह इतनी अशक्त हो चुकी थीं कि उनका अकेले चल-फिर पाना और रहना मुश्किल हो गया था। करोड़ों डालर कमाने वाले बेटे की मां और 12 करोड़ के दो फ़्लैटों की मालकिन आशा साहनी को अंतिम यात्रा तो नसीब नहीं ही हुई, इससे भी बड़ी विडंबना यह हुई, जैसा कि प्रत्यक्षदर्शियों का अनुमान है कि संभवत: आशा की मौत भूख-प्यास के चलते हुई।

भारत के महाराष्ट्र प्रान्त की आर्थिक राजधानी मुंबई के अंधेरी इलाके लोखंडवाला की पाश लोकलिटी 'वेल्स कॉट सोसायटी' में इस अकेली बुजुर्ग महिला की मौत जिन हालात में हुई, उनसे यह साफ है कि कोलंबिया विश्वविद्यालय की रिपोर्ट में छुपी पश्चिमी सभ्यता की त्रासदी हम भारतीयों के दरवाजे पर दस्तक देती लग रही है। इस रिपोर्ट के मुताबिक मौत का इंतजार ही इस सदी की सबसे खौफनाक बीमारी और आधुनिक जीवन शैली की सबसे बड़ी त्रासदी है। अशक्त मां की करुण पुकार सुनकर भी अनसुना कर देने वाला जब अपना इकलौता बेटा ही हो, तब ऐसे समाज में रिश्ते-नातेदारों से क्या अपेक्षा की जाय?

आशा साहनी की मौत ने एक बार फिर चेताया है कि भारत के शहरों में भी सामाजिक ताना-बाना किस कदर बिखर गया है। अब समय नहीं बचा है, अब भारतवर्ष को चेत जाना चाहिए। भारत में भारतीय संस्कृति नहीं बची तो कुछ नहीं बचेगा।

रविवार, 24 नवंबर 2019

अयोध्या मामले से :न्यायपालिका के प्रति, देश का सम्मान और बढ़ा - प्रधानमंत्री मोदी



https://www.narendramodi.in/hi/mann-ki-baat
अयोध्या मामले में:न्यायपालिका के प्रति, देश का सम्मान और बढ़ा - प्रधानमंत्री मोदी
मेरे प्यारे देशवासियो, ‘मन की बात’ में आप सबका स्वागत है |
आज मन की बात की शुरुआत, युवा देश के, युवा, वो गर्म जोशी, वो देशभक्ति, वो सेवा के रंग में रंगे नौजवान, आप जानते हैं ना | नवम्बर महीने का चौथा रविवार हर साल NCC Day के रूप में मनाया जाता है | आमतौर पर हमारी युवा पीढ़ी को Friendship Day बराबर याद रहता है | लेकिन बहुत लोग हैं जिनको NCC Day भी उतना ही याद रहता है | तो चलिए आज NCC के बारे में बातें हो जाए | मुझे भी कुछ यादें ताजा करने का अवसर मिल जाएगा | सबसे पहले तो NCC के सभी पूर्व और मौजूदा Cadet को NCC Day की बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूँ | क्योंकि मैं भी आप ही की तरह Cadet रहा हूँ और मन से भी, आज भी अपने आपको Cadet मानता हूँ | यह तो हम सबको पता ही है NCC यानी National Cadet Corps | दुनिया के सबसे बड़े uniformed youth organizations में भारत की NCC एक है | यह एक Tri-Services Organization है जिसमें सेना, नौ-सेना, वायुसेना तीनों ही शामिल हैं | Leadership, देशभक्ति, selfless service, discipline, hard-work इन सबको अपने character का हिस्सा बना लें, अपनी habits बनाने की एक रोमांचक यात्रा मतलब - NCC | इस journey के बारे में कुछ और अधिक बातें करने के लिए आज फ़ोन कॉल्स से कुछ नौजवानों से, जिन्होंने अपने NCC में भी अपनी जगह बनायी है | आइये उनसे बातें करते हैं |

प्रधानमंत्री : साथियो आप सब कैसे हैं |

तरन्नुम खान : जय हिन्द प्रधानमंत्री जी

प्रधानमंत्री : जय हिन्द

तरन्नुम खान : सर मेरा नाम Junior Under Officer तरन्नुम खान है

प्रधानमंत्री : तरन्नुम आप कहाँ से हैं |

तरन्नुम खान : मैं दिल्ली की रहने वाली हूँ सर

प्रधानमंत्री : अच्छा | तो NCC में कितने साल कैसे कैसे
अनुभव रहे आपके ?

तरन्नुम खान : सर मैं NCC में 2017 में भर्ती हुई थी and ये तीन
साल मेरी ज़िंदगी के सबसे बेहतरीन साल रहे हैं |

प्रधानमंत्री : वाह, सुनकर के बहुत अच्छा लगा |

तरन्नुम खान : सर, मैं आपको बताना चाहूंगी कि मेरा सबसे अच्छा अनुभव जो रहा वो ‘एक भारत-श्रेष्ठभारत’ कैम्प में रहा था | ये हमारा कैम्प अगस्त में हुआ था जिसमें NER ‘North Eastern Region’ के बच्चे भी आये थे | उन Cadets के साथ हम 10 दिन के लिये रहे | हमने उनका रहन-सहन सीखा | हमने देखा कि उनकी language क्या है | उनका tradition, उनका culture हमने उनसे ऐसी कई सारी चीजें सीखी | जैसे via-zhomi का मतलब होता है... हेलो आप कैसे हैं?.... वैसे ही, हमारी cultural night हुई थी,उसके अन्दर उन्होंने हमें अपना dance सिखाया, तेहरा कहते हैं उनके dance को | और उन्होंने मुझे ‘मेखाला’(mekhela) पहनना भी सिखाया | मैं सच बताती हूँ , उसके अन्दर बहुत खूबसूरत हम सभी लग रहे थे दिल्ली वाले as well as हमारे नागालैंड के दोस्त भी | हम उनको दिल्ली दर्शन पर भी लेकर गये थे ,जहां हमने उनको National War Memorial और India Gate दिखाया | वहां पर हमने उनको दिल्ली की चाट भी खिलायी, भेल-पूरी भी खिलाई लेकिन उनको थोड़ा तीखा लगा क्योंकि जैसा उन्होंने बताया हमको कि वो ज्यादातर soup पीना पसंद करते हैं, थोड़ी उबली हुई सब्जियां खाते हैं, तो उनको खाना तो इतना भाया नहीं, लेकिन, उसके अलावा हमने उनके साथ काफी pictures खींची, काफी हमने अनुभव share करे अपने |

प्रधानमंत्री : आपने उनसे संपर्क बनाये रखा है ?

तरन्नुम खान : जी सर, हमारे संपर्क उनसे अब तक बने हुए हैं |

प्रधानमंत्री : चलिए ,अच्छा किया आपने |

तरन्नुम खान : जी सर

प्रधानमंत्री : और कौन है साथी आपके साथ?

श्री हरि जी.वी. : जय हिन्द सर |

प्रधानमंत्री : जय हिन्द
श्री हरि जी.वी. : मैं Senior Under Officer Sri Hari
G.V. बोल रहा हूँ | मैं बेंगलूरू, कर्नाटका का रहने वाला हूँ |

प्रधानमंत्री : और आप कहाँ पढ़ते हैं ?

श्री हरि जी.वी. : सर बेंगलूरू में Kristujayanti College में

प्रधानमंत्री : अच्छा, बेंगलूरू में ही हैं !

श्री हरि जी.वी. : Yes Sir,

प्रधानमंत्री : बताइये

श्री हरि जी.वी. : सर, मैं कल ही Youth Exchange Programme
Singapore से वापिस आये थे

प्रधानमंत्री : अरे वाह !

श्री हरि जी.वी. : हाँ सर

प्रधानमंत्री : तो आपको मौका मिल गया वहां जाने का

श्री हरि जी.वी. : Yes Sir

प्रधानमंत्री : कैसा अनुभव रहा सिंगापुर में ?

श्री हरि जी.वी. : वहां पे छह (six) country आये थे जिनमें था
United Kingdom, United States of America, Singapore, Brunei, Hong Kong और Nepal | यहाँ पर हमने combat lessons और International Military exercises का एक exchange सीखा था | यहाँ पर हमारा performance कुछ ही अलग था, sir | इनमें से हमें water sports और adventure activities सिखाया था और water polo tournament में India team जीत हासिल किया था sir | और cultural में हम overall performers थे sir | हमारा drill और word of command बहुत अच्छा लगा था sir उनको |

प्रधानमंत्री : आप कितने लोग थे हरि ?

श्री हरि जी.वी. : 20 लोग sir | हम 10 (ten) boy, 10 (ten) girl थे sir|

प्रधानमंत्री : हाँ यही, भारत के सभी अलग-अलग राज्य से थे?

श्री हरि जी.वी. : हाँ सर |

प्रधानमंत्री : चलिए, आपके सारे साथी आपका अनुभव सुनने के
लिए बहुत आतुर होंगे लेकिन मुझे अच्छा लगा | और कौन है आपके साथ ?

विनोले किसो : जय हिन्द सर,

प्रधानमंत्री : जय हिन्द

विनोले किसो : मेरा नाम है Senior Under Officer
विनोले किसो | मैं North Eastern Region Nagaland State का है सर

प्रधानमंत्री : हाँ, विनोले, बताइए क्या अनुभव है आपका ?

विनोले किसो : सर, मैं St. Joseph’s college, Jakhama ( Autonomous) में पढ़ाई कर रहा है , B.A. History (Honours) में | मैंने 2017 साल में NCC join किया और ये मेरे ज़िन्दगी का सबसे बड़ा और अच्छी decision था, सर |

प्रधानमंत्री : NCC के कारण हिंदुस्तान में कहाँ-कहाँ जाने का
मौका मिला है ?

विनोले किसो : सर, मैंने NCC join किया और बहुत सीखा था
और मुझे opportunities भी बहुत मिली थी और मेरा एक experience था वो मैं आपको बताना चाहता है | मैंने इस साल 2019 जून महीने से एक कैंप attend किया वो है Combined Annual Training Camp और वो Sazolie College, Kohima में held किया | इस कैंप में 400 cadets ने attend किया |

प्रधानमंत्री : तो नागालैंड में सारे आपके साथी जानना चाहते होंगे हिंदुस्तान में कहाँ गए, क्या-क्या देखा ? सब अनुभव सुनाते हो सबको ?

विनोले किसो : Yes sir.

प्रधानमंत्री : और कौन है आपके साथ ?

अखिल : जय हिन्द सर, मेरा नाम Junior Under Officer
Akhil है |

प्रधानमंत्री : हाँ अखिल, बताइए |

अखिल : मैं रोहतक, हरियाणा का रहने वाला हूँ, सर |

प्रधानमंत्री : हाँ...

अखिल : मैं दयाल सिंह कॉलेज, दिल्ली यूनिवर्सिटी से
Physics Honours कर रहा हूँ |

प्रधानमंत्री : हाँ... हाँ...

अखिल : सर, मुझे NCC में सबसे अच्छा discipline लगा है
सर |

प्रधानमंत्री : वाह...

अखिल : इसने मुझे और ज्यादा responsible citizen बनाया
है सर | NCC cadet की drill, uniform मुझे बेहद पसंद है |

प्रधानमंत्री : कितने camp करने का मौका मिला, कहाँ-कहाँ
जाने का मौका मिला ?

अखिल : सर, मैंने 3 camp किये है सर | मैं हाल ही में
Indian Military Academy, Dehradun में attachment camp का हिस्सा रहा हूँ |

प्रधानमंत्री : कितने समय का था ?

अखिल : सर, ये 13 दिन का camp का था सर |

प्रधानमंत्री : अच्छा

अखिल : सर, मैंने वहाँ पर भारतीय फौज में अफसर कैसे
बनते हैं ,उसको बड़े करीब से देखा है और उसके बाद मेरा भारतीय फौज में अफसर बनने का संकल्प और ज्यादा दृढ़ हुआ है सर |

प्रधानमंत्री : वाह...

अखिल : और सर मैंने Republic Day Parade में भी हिस्सा
लिया था और वो मेरे लिए और मेरे परिवार के लिए बहुत ही गर्व की बात थी |
प्रधानमंत्री : शाबाश...

अखिल : मेरे से ज्यादा ख़ुशी मेरी माँ थी सर | जब
हम सुबह 2 बजे उठ कर राजपथ पर practice करने जाते थे तो जोश हम में इतना होता था कि वो देखने लायक था | बाकी forces contingent के लोग जो हमें इतना प्रोत्साहित करते थे राजपथ पर march करते वक़्त हमारे रोंगटे खड़े हो गए थे सर |

प्रधानमंत्री : चलिए आप चारों से बात करने का मौका मिला
और वो भी NCC Day पर | मेरे लिये बहुत ख़ुशी की बात है क्योंकि मेरा भी सौभाग्य रहा कि मैं भी बचपन में मेरे गाँव के स्कूल में NCC Cadet रहा था तो मुझे मालूम है कि ये discipline, ये uniform, उसके कारण जो confidence level बढ़ता है, ये सारी चीज़ें बचपन में मुझे एक NCC Cadet के रूप में अनुभव करने का मौका मिला था |

विनोले : प्रधानमंत्री जी मेरा एक सवाल है |
प्रधानमंत्री : हाँ बताइए...

तरन्नुम : कि आप भी एक NCC का हिस्सा रहे हैं
प्रधानमंत्री : कौन ? विनोले बोल रही हो ?

विनोले : yes sir
प्रधानमंत्री : हाँ विनोले बताइए...

विनोले : क्या आपको कभी भी punishment मिली थी ?
प्रधानमंत्री : (हँस कर) इसका मतलब कि आप लोगों को
punishment मिलती है ?

विनोले : हां सर |
प्रधानमंत्री : जी नहीं, मुझे ऐसा कभी हुआ नहीं क्योंकि मैं
बहुत ही, एक प्रकार से discipline मैं मानने वाला था लेकिन एक बार जरुर misunderstanding हुआ था | जब हम camp में थे तो मैं एक पेड़ पर चढ़ गया था | तो पहले तो ऐसा ही लगा कि मैं कोई कानून तोड़ दिया है लेकिन बाद में सबको ध्यान में आया कि वहाँ, ये पतंग की डोर में एक पक्षी फंस गया था | तो उसको बचाने के लिए मैं वहाँ चढ़ गया था | तो खैर, पहले तो लगता था कि मुझ पर कोई discipline action होंगे लेकिन बाद में मेरी बड़ी वाह-वाही हो गयी | तो इस प्रकार से एक अलग ही अनुभव आया मुझे |

तरन्नुम खान : जी सर, ये जान कर बहुत अच्छा लगा सर |
प्रधानमंत्री : Thank You.

तरन्नुम खान : मैं तरन्नुम बात कर रही हूँ |
प्रधानमंत्री : हाँ तरन्नुम, बताइए...

तरन्नुम खान : अगर आपकी आज्ञा हो तो मैं आपसे एक सवाल
करना चाहूंगी सर |

प्रधानमंत्री : जी... जी... बताइए |

तरन्नुम खान : सर, आपने अपने संदेशों में हमें कहा है कि हर
भारतीय नागरिक को 3 सालों में 15 जगह तो जाना ही चाहिए | आप हमें बताना चाहेंगे कि हमें कहाँ जाना चाहिए ? और आपको किस जगह जा कर सबसे अच्छा महसूस हुआ था ?

प्रधानमंत्री : वैसे मैं हिमालय को बहुत पसंद करता रहता हूँ
हमेशा |

तरन्नुम खान : जी...

प्रधानमंत्री : लेकिन फिर भी मैं भारत के लोगों से आग्रह
करूँगा कि अगर आपको प्रकृति से प्रेम है |

तरन्नुम खान : जी...

प्रधानमंत्री : घने जंगल, झरने, एक अलग ही प्रकार का माहौल
देखना है तो मैं सबको कहता हूँ आप North East जरुर जाइए |

तरन्नुम खान : जी सर |

प्रधानमंत्री : ये मैं हमेशा बताता हूँ और उसके कारण North
East में tourism भी बहुत बढ़ेगा, economy को भी बहुत फायदा होगा और ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के सपने को भी वहाँ मजबूती मिलेगी |

तरन्नुम खान : जी सर |

प्रधानमंत्री : लेकिन हिंदुस्तान में हर जगह पर बहुत कुछ
देखने जैसा है, अध्ययन करने जैसा है और एक प्रकार से आत्मसात करने जैसा है |

श्री हरि जी.वी. : प्रधानमंत्री जी, मैं श्री हरि बोल रहा हूँ |

प्रधानमंत्री : जी हरि बताइए...

श्री हरि जी.वी. : मैं आपसे जानना चाहता हूँ कि आप एक
politician न होते तो आप क्या होते ?

प्रधानमंत्री : अब ये तो बड़ा कठिन सवाल है क्योंकि हर बच्चे
के जीवन में कई पड़ाव आते हैं | कभी ये बनने का मन करता है, कभी वो बनने का मन करता है लेकिन ये बात सही है कि मुझे कभी राजनीति में जाने का मन नहीं था, न ही कभी सोचा था लेकिन अब पहुँच गया हूँ तो जी-जान से देश के काम आऊँ, उसके लिए सोचता रहता हूँ और इसलिए अब मैं ‘यहाँ न होता तो कहाँ होता’ ये सोचना ही नहीं चाहिए मुझे | अब तो जी-जान से जहाँ हूँ वहाँ जी भरकर के जीना चाहिए, जी-जान से जुटना चाहिए और जमकर के देश के लिए काम करना चाहिए | न दिन देखनी है, न रात देखनी है बस यही एक मकसद से अपने आप को मैंने खपा दिया है |

अखिल : प्रधानमंत्री जी...

प्रधानमंत्री : जी...

अखिल : आप दिन में इतने busy रहते हो तो मेरी ये जिज्ञासा
थी जानने की कि आपको टी.वी. देखने का, फिल्म देखने का या किताब पढ़ने का समय मिलता है ?

प्रधानमंत्री : वैसे मेरी किताब पढ़ने की रूचि तो रहती थी |
फिल्म देखने की कभी रूचि भी नहीं रही, उसमें समय का बंधन तो नहीं है और न ही उस प्रकार से टी.वी. देख पाता हूँ | बहुत कम | कभी-कभी पहले discovery channel देखा करता था, जिज्ञासा के कारण | और किताबें पढ़ता था लेकिन इन दिनों तो पढ़ नहीं पाता हूँ और दूसरा Google के कारण भी आदतें ख़राब हो गई हैं क्योंकि अगर किसी reference को देखना है तो तुरंत shortcut ढूंढ लेते हैं | तो कुछ आदतें जो सबकी बिगड़ी हैं, मेरी भी बिगड़ी है | चलिए दोस्तों, मुझे बहुत अच्छा लगा आप सबसे बात करने के लिए और मैं आपके माध्यम से NCC के सभी cadets को बहुत-बहुत शुभकामनाएँ देता हूँ | बहुत-बहुत धन्यवाद दोस्तों, Thank You !
सभी NCC cadets : बहुत-बहुत धन्यवाद सर, Thank You !
प्रधानमंत्री : Thank you, Thank You.
सभी NCC cadets : जय हिन्द सर |
प्रधानमंत्री : जय हिन्द |
सभी NCC cadets : जय हिन्द सर |
प्रधानमंत्री : जय हिन्द, जय हिन्द |
मेरे प्यारे देशवासियो, हम सभी देशवासियों को ये कभी भी नहीं भूलना चाहिए कि 7 दिसम्बर को Armed Forces Flag Day मनाया जाता है | ये वो दिन है जब हम अपने वीर सैनिकों को, उनके पराक्रम को, उनके बलिदान को याद तो करते ही हैं लेकिन योगदान भी करते हैं | सिर्फ सम्मान का भाव इतने से बात चलती नहीं है | सहभाग भी जरुरी होता है और 07 दिसम्बर को हर नागरिक को आगे आना चाहिए | हर एक के पास उस दिन Armed Forces का Flag होना ही चाहिए और हर किसी का योगदान भी होना चाहिए | आइये, इस अवसर पर हम अपनी Armed Forces के अदम्य साहस, शौर्य और समर्पण भाव के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करें और वीर सैनिको का स्मरण करें |

मेरे प्यारे देशवासियो, भारत में Fit India Movement से तो आप परिचित हो ही गए होंगे | CBSE ने एक सराहनीय पहल की है | Fit India सप्ताह की | Schools, Fit India सप्ताह दिसम्बर महीने में कभी भी मना सकते हैं | इसमें fitness को लेकर कई प्रकार के आयोजन किए जाने हैं | इसमें quiz, निबंध, लेख, चित्रकारी, पारंपरिक और स्थानीय खेल, योगासन, dance एवं खेलकूद प्रतियोगिताएं शामिल हैं | Fit India सप्ताह में विद्यार्थियों के साथ-साथ उनके शिक्षक और माता-पिता भी भाग ले सकते हैं | लेकिन ये मत भूलना कि Fit India मतलब सिर्फ दिमागी कसरत, कागजी कसरत या laptop या computer पर या mobile phone पर fitness की app देखते रहना | जी नहीं ! पसीना बहाना है | खाने की आदतें बदलनी है | अधिकतम focus activity करने की आदत बनानी है | मैं देश के सभी राज्यों के school board एवं school प्रबंधन से अपील करता हूँ कि हर school में, दिसम्बर महीने में, Fit India सप्ताह मनाया जाए | इससे fitness की आदत हम सभी की दिनचर्या में शामिल होगी | Fit India Movement में fitness को लेकर स्कूलों की ranking की व्यवस्था भी की गई हैं | इस ranking को हासिल करने वाले सभी school, Fit India logo और flag का इस्तेमाल भी कर पाएंगे | Fit India portal पर जाकर school स्वयं को Fit घोषित कर सकते हैं | Fit India three star और Fit India five star ratings भी दी जाएगी | मैं अनुरोध करते हूँ कि सभी school, Fit India ranking में शामिल हों और Fit India यह सहज स्वभाव बने | एक जनांदोलन बने | जागरूकता आए | इसके लिए प्रयास करना चाहिए |

मेरे प्यारे देशवासियो, हमारे देश इतना विशाल है | इतना विविधिताओं से भरा हुआ है | इतना पुरातन है कि बहुत सी बातें हमारे ध्यान में ही नहीं आती हैं और स्वाभाविक भी है | वैसी एक बात मैं आपको share करना चाहता हूँ | कुछ दिन पहले MyGov पर एक comment पर मेरी नजर पड़ी | ये comment असम के नौगाँव के श्रीमान रमेश शर्मा जी ने लिखा था | उन्होंने लिखा ब्रहमपुत्र नदी पर एक उत्सव चल रहा है | जिसका नाम है ब्रहमपुत्र पुष्कर | 04 नवम्बर से 16 नवम्बर तक ये उत्सव था और इस ब्रहमपुत्र पुष्कर में शामिल होने के लिए देश के भिन्न-भिन्न भागों से कई लोग वहाँ पर शामिल हुए हैं | ये सुनकर आपको भी आश्चर्य हुआ ना | हाँ यही तो बात है ये ऐसा महत्वपूर्ण उत्सव है और हमारे पूर्वजों ने इसकी ऐसी रचना की है कि जब पूरी बात सुनोगे तो आपको भी आश्चर्य होगा | लेकिन दुर्भाग्य से इसका जितना व्यापक प्रचार होना चाहिए | जितनी देश के कोने-कोने में जानकारी होनी चाहिए, उतनी मात्रा में नहीं होती है | और ये भी बात सही है इस पूरा आयोजन एक प्रकार से एक देश-एक सन्देश और हम सब एक है | उस भाव को भरने वाला है, ताकत देने वाला है |

सबसे पहले तो रमेश जी आपका बहुत बहुत धन्यवाद कि आपने ‘मन की बात’ के माध्यम से देशवासियों के बीच ये बात शेयर करने का निश्चय किया | आपने पीड़ा भी व्यक्त की है कि है इतने महत्वपूर्ण बात की कोई व्यापक चर्चा नहीं होती है, प्रचार नहीं होता है | आपकी पीड़ा मैं समझ सकता हूँ | देश में ज्यादा लोग इस विषय में नहीं जानते हैं | हाँ, अगर शायद किसी ने इसको International River festival कह दिया होता, कुछ बड़े शानदार शब्दों का उपयोग किया होता, तो शायद, हमारे देश में कुछ लोग है जो ज़रूर उस पर कुछ न कुछ चर्चाएँ करते और प्रचार भी हो जाता |

मेरे प्यारे देशवासियों पुष्करम, पुष्करालू, पुष्करः क्या आपने कभी ये शब्द सुने हैं, क्या आप जानते हैं आपको पता है ये क्या है, मै बताता हूँ यह देश कि बारह अलग अलग नदियों पर जो उत्सव आयोजित होते हैं उसके भिन्न- भिन्न नाम है | हर वर्ष एक नदी पर यानि उस नदी का नंबर फिर बारह वर्ष के बाद लगता है, और यह उत्सव देश के अलग-अलग कोने की बारह नदियों पर होता है, बारी- बारी से होता है और बारह दिन चलता है कुम्भ की तरह ही ये उत्सव भी राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देता है और ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के दर्शन कराता है | पुष्करम यह ऐसा उत्सव है जिसमें नदी का मह्त्मय , नदी का गौरव, जीवन में नदी की महत्ता एक सहज रूप से उजागर होती है!

हमारे पूर्वजो ने प्रकृति को, पर्यावरण को , जल को , जमीन को , जंगल को बहुत अहमियत दी | उन्होंने नदियों के महत्व को समझा और समाज को नदियों के प्रति सकारात्मत भाव कैसा पैदा हो, एक संस्कार कैसे बनें , नदी के साथ संस्कृति की धारा, नदी के साथ संस्कार की धारा , नदी के साथ समाज को जोड़ने का प्रयास ये निरंतर चलता रहा और मजेदार बात ये है कि समाज नदियों से भी जुड़ा और आपस में भी जुड़ा | पिछले साल तमिलनाडु के तामीर बरनी नदी पर पुष्करम हुआ था | इस वर्ष यह ब्रह्मपुत्र नदी पर आयोजित हुआ और आने वाले साल तुंगभद्रा नदी आँध्रप्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में आयोजित होगा | एक तरह से आप इन बारह स्थानों की यात्रा एक Tourist circuit के रूप में भी कर सकते हैं | यहाँ मैं असम के लोगों की गर्मजोशी उनके आतिथ्य की सराहना करना चाहता हूँ जिन्होंने पूरे देश से आये तीर्थयात्रियों का बहुत सुन्दर सत्कार किया | आयोजकों ने स्वच्छता का भी पूरा ख्याल रखा | plastic free zone सुनिश्चित किये | जगह-जगह Bio Toilets की भी व्यवस्था की | मुझे उम्मीद है कि नदियों के प्रति इस प्रकार का भाव जगाने का ये हज़ारों साल पुराना हमारा उत्सव भावी पीढ़ी को भी जोड़े | प्रकृति, पर्यावरण, पानी ये सारी चीजें हमारे पर्यटन का भी हिस्सा बनें, जीवन का भी हिस्सा बनें |

मेरे प्यारे देशवासियों Namo App पर मध्यप्रदेश से बेटी श्वेता लिखती है, और उसने लिखा है, सर, मैं क्लास 9th में हूँ मेरी बोर्ड की परीक्षा में अभी एक साल का समय है लेकिन मैं students और exam warriors के साथ आपकी बातचीत लगातार सुनती हूँ, मैंने आपको इसलिए लिखा है क्योंकि आपने हमें अब तक ये नहीं बताया है कि अगली परीक्षा पर चर्चा कब होगी | कृपया आप इसे जल्द से जल्द करें | अगर, सम्भव हो तो, जनवरी में ही इस कार्यक्रम का आयोजन करें | साथियो, ‘मन की बात’ के बारे में मुझे यही बात बहुत अच्छी लगती है - मेरे युवा-मित्र, मुझे, जिस अधिकार और स्नेह के साथ शिकायत करते हैं, आदेश देते हैं, सुझाव देते हैं - यह देख कर मुझे बहुत खुशी होती है | श्वेता जी, आपने बहुत ही सही समय पर इस विषय को उठाया है | परीक्षाएँ आने वाली हैं, तो, हर साल की तरह हमें परीक्षा पर चर्चा भी करनी है | आपकी बात सही है इस कार्यक्रम को थोड़ा पहले आयोजित करने की आवश्यकता है !

पिछले कार्यक्रम के बाद कई लोगों ने इसे और अधिक प्रभावी बनाने के लिए अपने सुझाव भी भेजे हैं, और, शिकायत भी की थी कि पिछली बार देर से हुआ था, परीक्षा एकदम से निकट आ गई थी | और श्वेता का सुझाव सही है कि मुझे, इसको, जनवरी में करना चाहिए HRD Ministry और MyGov की टीम, मिलकर, इस पर काम कर रही हैं | लेकिन, मैं, कोशिश करुगां, इस बार परीक्षा पर चर्चा जनवरी की शुरू में या बीच में हो जाए | देश भर के विद्यार्थियों-साथियों के पास दो अवसर हैं | पहला, अपने स्कूल से ही इस कार्यक्रम का हिस्सा बनना | दूसरा, यहाँ दिल्ली में होने वाले कार्यक्रम में भाग लेना | दिल्ली के लिए देश-भर से विद्यार्थियों का चयन MyGov के माध्यम से किया जाएगा | साथियो, हम सबको मिलकर परीक्षा के भय को भगाना है | मेरे युवा-साथी परीक्षाओं के समय हँसते-खिलखिलाते दिखें, Parents तनाव मुक्त हों, Teachers आश्वस्त हों, इसी उद्देश्य को लेकर, पिछले कई सालों से, हम, ‘मन की बात’ के माध्यम से ‘परीक्षा पर चर्चा’ Town Hall के माध्यम से या फिर Exam Warrior’s Book के माध्यम से लगातार प्रयास कर रहें हैं | इस मिशन को देश-भर के विद्यार्थियों ने, Parents ने, और Teachers ने गति दी इसके लिए मैं इन सबका आभारी हूँ, और, आने वाली परीक्षा चर्चा का कार्यक्रम हम सब मिलकर के मनाएँ - आप सब को निमंत्रण हैं |

साथियो, पिछले ‘मन की बात’ में हमने 2010 में अयोध्या मामले में आये इलाहाबाद हाई कोर्ट के Judgement के बारे में चर्चा की थी, और, मैंने कहा था कि देश ने तब किस तरह से शांति और भाई-चारा बनाये रखा था | निर्णय आने के पहले भी, और, निर्णय आने के बाद भी | इस बार भी, जब, 9 नवम्बर को सुप्रीम कोर्ट का Judgement आया, तो 130 करोड़ भारतीयों ने, फिर से ये साबित कर दिया कि उनके लिए देशहित से बढ़कर कुछ नहीं है | देश में, शांति, एकता और सदभावना के मूल्य सर्वोपरि हैं | राम मंदिर पर जब फ़ैसला आया तो पूरे देश ने उसे दिल खोलकर गले लगाया | पूरी सहजता और शांति के साथ स्वीकार किया | आज, ‘मन की बात’ के माध्यम से मैं देशवासियों को साधुवाद देता हूँ, धन्यवाद देना चाहता हूँ | उन्होंने, जिस प्रकार के धैर्य, संयम और परिपक्वता का परिचय दिया है, मैं, उसके लिए विशेष आभार प्रकट करना चाहता हूँ | एक ओर, जहाँ, लम्बे समय के बाद कानूनी लड़ाई समाप्त हुई है, वहीं, दूसरी ओर, न्यायपालिका के प्रति, देश का सम्मान और बढ़ा है | सही मायने में ये फैसला हमारी न्यायपालिका के लिए भी मील का पत्थर साबित हुआ है | सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले के बाद, अब देश, नई उम्मीदों और नई आकांशाओं के साथ नए रास्ते पर, नये इरादे लेकर चल पड़ा है | New India, इसी भावना को अपनाकर शांति, एकता और सदभावना के साथ आगे बढ़े - यही मेरी कामना है, हम सबकी कामना है |

मेरे प्यारे देशवासियो, हमारी सभ्यता, संस्कृति और भाषाएं पूरे विश्व को, विविधता में, एकता का सन्देश देती हैं | 130 करोड़ भारतीयों का ये वो देश है, जहाँ कहा जाता था, कि, ‘कोस-कोस पर पानी बदले और चार कोस पर वाणी’ | हमारी भारत भूमि पर सैकड़ों भाषाएँ सदियों से पुष्पित पल्लवित होती रही हैं | हालाँकि, हमें इस बात की भी चिंता होती है कि कहीं भाषाएँ और बोलियाँ ख़त्म तो नहीं हो जाएगी ! पिछले दिनों, मुझे, उत्तराखंड के धारचुला की कहानी पढ़ने को मिली | मुझे काफी संतोष मिला | इस कहानी से पता चलता है कि किस प्रकार लोग अपनी भाषाओँ, उसे बढ़ावा देने के लिए, आगे आ रहें है | कुछ, Innovative कर रहें हैं धारचुला खबर मैंने, मेरा, ध्यान भी, इसलिए गया कि किसी समय, मैं, धारचूला में आते-जाते रुका करता था | उस पार नेपाल, इस पार कालीगंगा - तो स्वाभाविक धारचूला सुनते ही, इस खबर पर, मेरा ध्यान गया | पिथौरागढ़ के धारचूला में, रंग समुदाय के काफ़ी लोग रहते हैं, इनकी, आपसी बोल-चाल की भाषा रगलो है | ये लोग इस बात को सोचकर अत्यंत दुखी हो जाते थे कि इनकी भाषा बोलने वाले लोग लगातार कम होते जा रहे हैं - फिर क्या था, एक दिन, इन सबने, अपनी भाषा को बचाने का संकल्प ले लिया | देखते-ही-देखते इस मिशन में रंग समुदाय के लोग जुटते चले गए | आप हैरान हो जायेंगे, इस समुदाय के लोगों की संख्या, गिनती भर की है | मोटा-मोटा अंदाज़ कर सकते हैं कि शायद दस हज़ार हो, लेकिन, रंग भाषा को बचाने के लिए हर कोई जुट गया, चाहे, चौरासी साल के बुज़ुर्ग दीवान सिंह हों या बाईस वर्ष की युवा वैशाली गर्ब्याल प्रोफेसर हों या व्यापारी, हर कोई, हर संभव कोशिश में लग गया | इस मिशन में, सोशल मिडिया का भी भरपूर उपयोग किया गया | कई Whatsapp group बनाए गए | सैकड़ों लोगों को, उस पर भी, जोड़ा गया | इस भाषा की कोई लिपि नहीं है | सिर्फ, बोल-चाल में ही एक प्रकार से इसका चलन है | ऐसे में, लोग कहानियाँ, कवितायेँ और गाने पोस्ट करने लगे | एक-दूसरे की भाषा ठीक करने लगे | एक प्रकार से Whatsapp ही classroom बन गया जहाँ हर कोई शिक्षक भी है और विद्यार्थी भी ! रंगलोक भाषा को संरक्षित करने का एक इस प्रयास में है | तरह-तरह के कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, पत्रिका निकाली जा रही है और इसमें सामाजिक संस्थाओं की भी मदद मिल रही है |

साथियो, ख़ास बात ये भी है कि संयुक्त राष्ट्र ने 2019 यानी इस वर्ष को ‘International Year of Indigenous Languages’ घोषित किया है | यानी उन भाषाओँ को संरक्षित करने पर जोर दिया जा रहा है जो विलुप्त होने के कगार पर है | डेढ़-सौ साल पहले, आधुनिक हिंदी के जनक, भारतेंदु हरीशचंद्र जी ने भी कहा था :-
“निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल,
बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल ||”
अर्थात, मातृभाषा के ज्ञान के बिना उन्नति संभव नहीं है | ऐसे में रंग समुदाय की ये पहल पूरी दुनिया को एक राह दिखाने वाली है | यदि आप भी इस कहानी से प्रेरित हुए हैं, तो, आज से ही, अपनी मातृभाषा या बोली का खुद उपयोग करें | परिवार को, समाज को प्रेरित करें |
19वीं शताब्दी के आखरी काल में महाकवि सुब्रमण्यम भारती जी नें कहा था और तमिल में कहा था | वो भी हम लोगों के लिए बहुत ही प्रेरक है | सुब्रमण्यम भारती जी ने तमिल भाषा में कहा था -
मुप्पदु कोडि मुगमुडैयाळ् उयिर्,
मोईम्बुर ओन्ड्रुडैयाळ् – इवळ्,
सेप्पु मोऴि पतिनेट्टुडैयाळ् एनिर्,
सिन्तनै ओन्रुडैयाळ्॥
(muppadhu KOdi mugamudayAL, uyir,
moymbura ondrudaiyAL – ivaL,
seppu mozhi pathinettudaiyAL enir,
sinthanai ondrudaiyAL.)

और उस समय ये 19वीं शताब्दी के ये आखरी उत्तरार्ध की बात है | और उन्होंने कहा है भारत माता के 30 करोड़ चेहरे हैं, लेकिन शरीर एक है | यह 18 भाषाएँ बोलती हैं, लेकिन सोच एक है |

मेरे प्यारे देशवासियो, कभी-कभी जीवन में, छोटी-छोटी चीज़ें भी हमें बहुत बड़ा सन्देश दे जाती हैं | अब देखिये न, media में ही scuba divers की एक story पढ़ रहा था | एक ऐसी कहानी है जो हर भारतवासी को प्रेरित करने वाली है | विशाखापत्तनम में गोताखोरी का प्रशिक्षण देने वाले scuba divers एक दिन mangamaripeta beach पर समुद्र से लौट रहे थे तो समुद्र में तैरती हुई कुछ प्लास्टिक की बोतलों और pouch से टकरा रहे थे | इसे साफ़ करते हुए उन्हें मामला बड़ा गंभीर लगा | हमारा समुद्र किस प्रकार से कचरे से भर दिया जा रहा है | पिछले कई दिनों से ये गोताखोर समुद्र में, तट के, करीब 100 मीटर दूर जाते है, गहरे पानी में गोता लगाते हैं और फिर वहाँ मौजूद कचरे को बाहर निकालते हैं | और मुझे बताया गया है कि 13 दिनों में ही, यानी 2 सप्ताह के भीतर-भीतर, करीब-करीब 4000 किलो से अधिक plastic waste उन्होंने समुद्र से निकाला है | इन scuba divers की छोटी- सी शुरुआत एक बड़े अभियान का रूप लेती जा रही है | इन्हें अब स्थानीय लोगों की भी मदद मिलने लगी है | आस-पास के मछुआरें भी उन्हें हर प्रकार की सहायता करने लगे है | जरा सोचिये, इस scuba divers से प्रेरणा लेकर, अगर, हम भी, सिर्फ अपने आस-पास के इलाके को प्लास्टिक के कचरे से मुक्त करने का संकल्प कर लें तो फिर ‘प्लास्टिक मुक्त भारत’ पूरी दुनिया के लिए एक नई मिसाल पेश कर सकता है |

मेरे प्यारे देशवासियो, दो दिन बाद 26 नवम्बर है | यह दिन पूरे देश के लिए बहुत ख़ास है | हमारे गणतंत्र के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इस दिन को हम ‘संविधान दिवस’ के रूप में मनाते हैं | और इस बार का ‘संविधान दिवस’ अपने आप में विशेष है, क्योंकि, इस बार संविधान को अपनाने के 70 वर्ष पूरे हो रहे हैं | इस बार इस अवसर पर पार्लियामेंट में विशेष आयोजन होगा और फिर साल भर पूरे देशभर में अलग-अलग कार्यक्रम होंगे | आइये, इस अवसर पर हम संविधान सभा के सभी सदस्यों को आदरपूर्वक नमन् करें, अपनी श्रद्धा अर्पित करें | भारत का संविधान ऐसा है जो प्रत्येक नागरिक के अधिकारों और सम्मान की रक्षा करता है और यह हमारे संविधान निर्माताओं की दूरदर्शिता की वजह से ही सुनिश्चित हो सका है | मैं कामना करता हूँ कि ‘संविधान दिवस’ हमारे संविधान के आदर्शों को कायम रखने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की हमारी प्रतिबद्धता को बल दे | आखिर ! यही सपना तो हमारे संविधान निर्माताओं ने देखा था|

मेरे प्यारे देशवासियो, ठंड का मौसम शुरू हो रहा है, गुलाबी ठंड अब महसूस हो रही है | हिमालय के कुछ भाग बर्फ की चादर ओढ़ना शुरू किये हैं लेकिन ये मौसम ‘Fit India Movement’ का है | आप, आपका परिवार, आपके मित्रवार्तूर आपके साथी, मौका मत गंवाइये | ‘Fit India Movement’ को आगे बढ़ाने के लिए मौसम का भरपूर फ़ायदा उठाइए |बहुत-बहुत शुभकामनाएँ | बहुत-बहुत धन्यवाद |

शनिवार, 9 नवंबर 2019

Ayodhya Verdict: राम जन्मभूमि पर SC का फैसला

Ayodhya Verdict:
एक नजर में पढ़ें अयोध्या राम जन्मभूमि -बाबरी मस्जिद विवाद पर आया SC का फैसला
By Ankur Sharma| Updated: Saturday, November 9, 2019,

नई दिल्ली। देश के सबसे बहुचर्चित कोर्ट केस अयोध्या राम जन्मभूमि - बाबरी मस्जिद विवाद केस में शनिवार को फैसला आ गया है और इसके बाद अब तक विवादित रही जमीन पर रामलला विराजमान ही रहेंगे वहीं दूसरी तरफ सर्वोच्च न्यायालय ने मुस्लिम पक्ष को अलग से मस्जिद के लिए जमीन देने के निर्देश दिए हैं। आज पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने इस मामले में एतिहासिक फैसला सुनाया है, बता दें कि इस बेंच ने लगातार 40 दिन की मैराथन सुनवाई के बाद बीती 16 अक्टूबर को फैसला सुरक्षित रख लिया गया था।

इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला अतार्किक: SC इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा विवादित जमीन को तीन पक्षों में बांटने के फैसले को अतार्किक करार देते हुए कहा कि हाई कोर्ट ने जो तीन पक्ष माने थे, उसे दो हिस्सों में मानना होगा। कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट द्वारा जमीन को तीन हिस्सों में बांटना तार्किक नहीं था। इससे साफ हो गया कि मामले में अब रामलला विराजमान और सुन्नी वक्फ बोर्ड दो पक्ष ही रह गए।

SC ने निर्मोही अखाड़ा के दावे को खारिज किया सुप्रीम कोर्ट ने निर्मोही अखाड़ा के दावे को खारिज करते हुए कहा कि उसने देरी से याचिका दायर की थी, गोगोई ने कहा कि कोर्ट धर्मशास्त्र में पड़े, यह उचित नहीं। प्लेसेज ऑफ वर्शिप ऐक्ट सभी धार्मिक समूहों के हितों की रक्षा के लिए भारत की प्रतिबद्धता को बताता है।

आस्था वैयक्तिक विश्वास का विषय देश की सर्वोच्च अदालत ने कहा कि हिंदुओं की आस्था है कि भगवान राम की जन्म गुंबद के नीचे हुआ था। आस्था वैयक्तिक विश्वास का विषय है, बाबरी मस्जिद का निर्माण खाली जगह पर हुआ था, जमीन के नीचे का ढांचा इस्लामिक नहीं था। ASI के निष्कर्षों से साबित हुआ कि नष्ट किए गए ढांचे के नीचे मंदिर था और इस बात के सबूत हैं कि अंग्रेजों के आने के पहले से राम चबूतरा और सीता रसोई की हिंदू पूजा करते थे।

अपना अधिकार साबित नहीं कर पाए मुस्लिम: सु्प्रीम कोर्ट मुस्लिमों ने इस बात के सबूत पेश नहीं किए कि 1857 से पहले स्थल पर उनका ऐक्सक्लुसिव कब्जा था। सुप्रीम कोर्ट ने शिया वक्फ बोर्ड की अपील खारिज कर दी। उन्होंने कहा कि मस्जिद कब बनी, इससे फर्क नहीं पड़ता। 22-23 दिसंबर 1949 को मूर्ति रखी गई। गौरतलब है कि मुस्लिम पक्ष ने कहा था कि वहां लगातार नमाज पढ़ी जाती रही थी। कोर्ट ने कहा कि 1856 से पहले अंदरूनी हिस्से में हिंदू भी पूजा किया करते थे। रोकने पर बाहर चबूतरे पर पूजा करने लगे खाली जमीन पर नहीं बनी थी मस्जिद: SC सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की खुदाई से निकले सबूतों की अनदेखी नहीं कर सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट का फैसला पूरी पारदर्शिता से हुआ है। बाबरी मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनी थी। कोर्ट ने कहा कि मस्जिद के नीचे विशाल रचना थी। एएसआई ने 12वीं सदी का मंदिर बताया था। कोर्ट ने कहा कि वहां से जो कलाकृतियां मिली थीं, वह इस्लामिक नहीं थीं।

5 एकड़ की जमीन कोर्ट ने आगे कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को कहीं और 5 एकड़ की जमीन दी जाए और इसके साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया है कि वह मंदिर निर्माण के लिए 3 महीने में ट्रस्ट बनाए, इस ट्रस्ट में निर्मोही अखाड़े को भी प्रतिनिधित्व देने का आदेश हुआ है। कोर्ट ने आगे कहा कि हर मजहब के लोगों को संविधान में बराबर का सम्मान दिया गया है।
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अयोध्या पर फैसला: निर्मोही अखाड़े का विवादित जमीन पर दावा खारिज, लेकिन ट्रस्ट में मिलेगा प्रतिनिधित्व
By Anjan Kumar Chaudhary| Updated: Saturday, November 9, 2019,

नई दिल्ली- सुप्रीम कोर्ट ने रामजन्मभूमि की विवादित जमीन पर निर्मोही अखाड़ा का दावा तो खारिज कर दिया है, लेकिन उसे राम मंदिर निर्माण के लिए बनने वाले ट्रस्ट में प्रतिनिधित्व देने का फैसला सुनाया है। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के आर्टिकल-142 का उपयोग किया है। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय का निर्मोही अखाड़ा ने स्वागत किया है।

अयोध्या में रामजन्मभूमि की विवादित जमीन पर एक दावेदार निर्मोही अखाड़ा भी था। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने उसकी दावेदारी ठुकरा दी है। हालांकि अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि मंदिर निर्माण के लिए बनने वाले ट्रस्ट में उसे भी प्रतिनिधित्व दिया जाय। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए निर्मोही अखाड़ा के प्रवक्ता कार्तिक चोपड़ा ने कहा है कि, "150 वर्षों के हमारे संघर्ष को पहचानने के लिए निर्मोही अखाड़ा सुप्रीम कोर्ट का आभारी है और इसने निर्मोही अखाड़ा को केंद्र सरकार की ओर से बनाए जाने वाले श्री राम जन्मस्थान मंदिर के निर्माण एवं प्रबंध के लिए गठित होने वाले ट्रस्ट में पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया है।"


गौरतलब है कि मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट बनाए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने जिस आर्टिकल 142 का इस्तेमाल किया है, उसमें उसे यह अधिकार है कि किसी ऐसे दुर्लभ मामले में जहां कानून से उसे कोई स्पष्ट रास्ता नहीं दिखाई देता, वह अपने विवेक का उपयोग कर सकता है। आपको बता दें कि रामजन्मभूमि में निर्मोही अखाड़ा भी अपने स्वामित्व का दावा करता रहा है, लेकिन वह शुरू से रामलला के पक्ष में ही रहा है।

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Ayodhya Verdict:
रामलला को मिली विवादित जमीन, जानिए अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले की 10 बड़ी बातें
By Bavita Jha| Updated: Saturday, November 9, 2019

नई दिल्ली। देश की सबसे पुराने विवाद अयोध्या जमीन विवाद में आज देश की सर्वोच्च अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवाद मामले में फैसला सुनाते हुए विवादित जमीन रामजन्मभूमि न्याय को दी है। कोर्ट ने अपने फैसले में सुन्नी बोर्ड को अलग से 5 एकड़ जमीन देने की बात कही है। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने निर्मोही अखाड़े के दावे को खारिज कर दिया है।

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई में संवैधानिक पीठ ने फैसला सुनाते हुए निर्मोही अखाड़ा और शिया वक्फ बोर्ड का दावा खारिज कर दिया है। पांच जजों की बेंच ने अयोध्या मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा कि विवादित जमीन पर राम मंदिर का निर्माण केंद्र सरकार ट्रस्ट बनाकर करेगी। वहीं अयोध्या में ही मस्जिद बनाने के लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड को 5 एकड़ जमीन मिलेगी।
आइए जानें इस ऐतिहासिक फैसले की 10 बड़ी बातें....
अयोध्या पर ऐतिहासिक फैसला सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या जमीन विवाद मामले में पैसला सुनाते हुए कहा कि विवादित जमीन रामलला विराजमान को दी जाए। कोर्ट ने कहा कि हिन्दुओं की यह आस्था अविवादित है कि भगवान राम का जन्म स्थल ध्वस्त संरचना है। उन्होंने कहा का सीता रसोई राम चबूतरा, भंडार गृह की उपस्थिति के मिले सबूत इस तथ्य का दावा पेश करते हैं।

केंद्र सरकार बनाएगी ट्रस्ट सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रामलला के जमीन पर केंद्र सरकार ट्रस्ट बनाकर मंदिर का निर्माण करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को मंदिर निर्माण के लिए 3 महीने में ट्रस्ट बनाकर, योजना तैयार करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि फैसले आस्था और विश्वास, दावे के आधार पर नहीं दिए जा सकते। कोर्ट ने कहा कि ऐतिहासिक दस्तावेज दिखाते हैं हिंदुओं का विश्वास है कि अयोध्या भगवान राम का जन्मस्थान है।

मस्जिद के लिए 5 एकड़ जमीन सुप्रीम कोर्ट ने मुस्जिद बनाने के लिए वैकल्पिक जमीन आवंजिट कराने का नि र्देश दिया। कोर्ट ने सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद बनाने के लिए अयोध्या में 5 एकड़ जमीन देने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि बाबरी मस्जिद को नुकसान पहुंचाना कानून के खिलाफ था।

निर्मोही अखाड़े का दावा खारिज सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले में तीसरे पक्ष निर्मोही अखाड़े का दावा खारिज कर दिया। निर्मोही अखाड़े का दावा खारिज करते हुए मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा कि हमने 1946 के फैजाबाद कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली शिया वक्फ बोर्ड की सिंगल लीव पिटिशन को खारिज करते हैं।


खाली जमीन पर नहीं बनी बाबरी मस्जिद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बाबरी मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनी थी। मस्जिद के नीचे विशाल रचना थी। वह रचना इस्लामिक नहीं थी। वहां जो कलाकृतियां मिली वो भी इस्लामिक नहीं थी। कोर्ट ने कहा कि नमाज पढ़ने की जगह को मस्ज़िद मानने के हक को हम मना नहीं कर सकते।


सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि विवादित ढांचे में पुरानी संरचना की चीज़ें इस्तेमाल हुईं। कसौटी का पत्थर, खंभा आदि देखा गया। कोर्ट ने कहा कि ASI यह नहीं बता पाए कि मंदिर तोड़कर विवादित ढांचा बना था या नहीं। कोर्ट ने कहा कि अयोध्या में विवादित स्थल के नीचे बनी संरचना इस्लामिक नहीं थी लेकिन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने यह साबित नहीं किया कि मस्जिद के निर्माण के लिये मंदिर गिराया गया था।

हिन्दू अयोध्या को राम भगवान का जन्मस्थान मानते हैं सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हिन्दू अयोध्या को राम भगवान का जन्मस्थान मानते हैं। कोर्ट ने कहा कि मुख्य गुंबद को ही जन्म की सही जगह मानते हैं। अयोध्या में राम का जन्म होने के दावे का किसी ने विरोध नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि नमाज पढ़ने की जगह को मस्ज़िद मानने के हक को हम मना नहीं कर सकते। मुख्य नयायाधीश ने कहा कि 1991 का प्लेसेस ऑफ वरशिप एक्ट धर्मस्थानों को बचाने की बात कहता है. एक्ट भारत की धर्मनिरपेक्षता की मिसाल है।

ASI यह नहीं बता पाए कि मंदिर तोड़कर विवादित ढांचा बना था या नहीं अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि मस्ज़िद 1528 की बनी बताई जाती है लेकिन कब बनी इससे फर्क नहीं पड़ता। कोर्ट ने कहा कि ASI यह नहीं बता पाए कि मंदिर तोड़कर विवादित ढांचा बना था या नहीं। 12वीं सदी से 16वीं सदी पर वहां क्या हो रहा था, साबित नहीं हुआ।


सुन्नी वक्फ बोर्ड ने बहस में बदला दावा सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड ने बहस में अपने दावे को बदला। उन्होंने पहले कुछ कहा, बाद मे नीचे मिली रचना को ईदगाह कहा। कोर्ट ने कहा कि साफ है कि बाबरी मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बना था। कोर्ट ने कहा कि बाबरी मस्जिद के नीचे विशाल रचना थी। कोर्ट ने कहा कि ASI ने वहां 12वीं सदी की मंदिर बताई। विवादित ढांचे में पुरानी संरचना की चीज़ें इस्तेमाल हुईं। रिपोर्ट में इस संरचना में कसौटी का पत्थर, खंभा आदि की बात कही गई।

एक मत से आया फैसला सुप्रीम कोर्ट का फैसला एक मत से आया। कोर्ट की कार्यवाही शुरू होते ही सबसे पहले केस नंबर 1501, शिया बनाम सुन्नी वक्फ बोर्ड केस में एक मत से फैसला आया। इस मामले में शिया वक्फ बोर्ड का दावा खारिज कर दिया गया।

राम दरबार है जग सारा

राम दरबार है जग सारा


राम ही तीनो लोक के राजा, सबके प्रतिपला सबके आधारा
राम दरबार है जग सारा.
राम का भेद ना पाया वेद निगम हू नेति नेति उचरा
राम दरबार है जग सारा.
तीन लोक में राम का सज़ा हुआ दरबार, जो जहाँ सुमिरे वहीं दरस दें उसे राम उदार. जय जय राम सियाराम.
जय जय राम सियाराम जय जय राम सियाराम जय जय राम सियाराम जय जय राम सियाराम जय जय राम सियाराम!
राम में सर्व राम में सब माही रूप विराट राम सम नाहीं, जितने भी ब्रह्मांड रचे हैं, सब विराट प्रभु में ही बसें हैं !!
रूप विराट धरे तो चौदह भुवन में नाहीं आते हैं, सिमटेई तो हनुमान ह्रदय में सीता सहित समाते हैं.
पतित उधरन दीन बंधु पतितो को पार लगातें हैं, बेर बेर शबरी के हाथों बेर प्रेम से खाते हैं
जोग जतन कर जोगी जिनको जनम जनम नहीं पाते हैं, भक्ति के बस में होकर के वे बालक भी बन जाते हैं.
योगी के चिंतन में राम, मानव के मंथन में राम, तन में राम मन में राम, सृष्टि के कन कन में राम.
आती जाती श्वास में राम, अनुभव में आभास में राम, नहीं तर्क के पास में राम, बसतें में विश्वास में राम
राम तो हैं आनंद के सागर, भर लो जिसकी जितनी गागर, कीजो छमा दोष त्रुटि स्वामी राम नमामि नमामि नमामि.
अनंता अनंत अभेदा अभेद आगमया गम्या पार को पारा, राम  दरबार  है  जग  सारा, राम दरबार है जग सारा !!

गुरुवार, 10 अक्तूबर 2019

विजयादशमी :सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी

विजयादशमी पर विशेष – राष्ट्र जागरण के अग्रिम मोर्चे पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
(मंगलवार, 08 अक्तूबर 2019)



आदरणीय प्रमुख अतिथि महोदय, इस उत्सव को देखने के लिए विशेष रूप से यहां पर पधारे हुए निमंत्रित अतिथि गण, श्रद्धेय संत वृंद, मा. संघचालक गण, संघ के सभी माननीय अधिकारीगण, माता भगिनी, नागरिक सज्जन एवं आत्मीय स्वयंसेवक बंधु.

इस विजयादशमी के पहले बीता हुआ वर्ष भर का कालखंड श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश वर्ष के रूप में तथा स्वर्गीय महात्मा गांधी के जन्म के डेढ़ सौ वे वर्ष के रूप में विशेष रहा. उस उपलक्ष्य में किए जाने वाले कार्यक्रम आगे और कुछ समय, उनकी अवधि समाप्त होने तक, चलने वाले हैं. इस बीच 10 नवंबर से स्वर्गीय दत्तोपंत जी ठेंगड़ी का भी शताब्दी वर्ष शुरू होना है. परंतु बीते हुए वर्ष में घटी हुई कुछ महत्त्वपूर्ण घटनाओं ने, उसको हमारे लिए और स्मरणीय बना दिया है.

मई मास में लोकसभा चुनावों के परिणाम प्राप्त हुए. इन चुनावों की ओर संपूर्ण विश्व का ध्यान आकर्षित हुआ था. भारत जैसे विविधताओं से भरे विशाल देश में, चुनाव का यह कार्य समय से और व्यवस्थित कैसे सम्पन्न होता है, यह देखना दुनिया के लिए आकर्षण का पहला विषय था. वैसे ही 2014 में आया परिवर्तन केवल 2014 के पहले के सरकार के प्रति मोहभंग से उत्पन्न हुई एक नकारात्मक राजनीतिक लहर का परिणाम है, अथवा विशिष्ट दिशा में जाने के लिए जनता ने अपना मन बना लिया है, यह 2019 के चुनावों में दिखाई देना था. विश्व का ध्यान उस ओर भी था. जनता ने अपनी दृढ़ राय प्रकट की और भारत देश में प्रजातंत्र, विदेशों से आयातित नई अपरिचित बात नहीं है, बल्कि देश के जनमानस में सदियों से चलती आई परंपरा तथा स्वातंत्र्योत्तर काल में प्राप्त हुआ अनुभव व प्रबोधन, इनके परिणामस्वरूप प्रजातंत्र में रहना व प्रजातंत्र को सफलतापूर्वक चलाना यह समाज का मन बन गया है, यह बात सबके ध्यान में आई. नई सरकार को बढ़ी हुई संख्या में फिर से चुनकर लाकर समाज ने उनके पिछले कार्यों की सम्मति व आने वाले समय के लिए बहुत सारी अपेक्षाओं को व्यक्त किया था.

उन अपेक्षाओं को प्रत्यक्ष में साकार कर, जन भावनाओं का सम्मान करते हुए, देश के हित में उनकी इच्छाएँ पूर्ण करने का साहस इस दोबारा चुने हुए शासन में भी है, यह बात फिर एक बार सिद्ध हो गई, कलम 370 को अप्रभावी बनाने के सरकार के काम से. सत्तारूढ़ दल की विचार परंपरा में यह कार्य तो पहले से ही स्वीकारा गया था. लेकिन इस बार कुशलतापूर्वक अन्य मतों के दलों का भी दोनों सदनों में समर्थन प्राप्त कर, सामान्य जनों के हृदय के भावों के अनुरूप तथा मजबूत तर्कों के साथ यह जो काम हुआ, उसके लिए देश के प्रधानमंत्री, गृहमंत्री सहित शासक दल तथा इस जन भावना का संसद में समर्थन करने वाले अन्य दल भी अभिनंदन के पात्र हैं. यह कदम अपनी पूर्णता तब प्राप्त कर लेगा, जब 370 के प्रभाव में न हो सके न्याय कार्य सम्पन्न होंगे तथा उसी प्रभाव के कारण चलते आये अन्यायों की समाप्ति होगी. वहां से अन्यायपूर्वक निकाल दिए गए हमारे कश्मीरी पंडितों का पुनर्वसन,  उनकी निर्भय, सुरक्षित तथा देशभक्त व हिंदू बने रहने की स्थिति में होगा. कश्मीर के रहिवासी जनों को अनेक अधिकार, जिनसे वे अब तक वंचित थे, प्राप्त होंगे और घाटी के बंधुओं के मन में यह जो गलत डर भरा गया है, कि 370 हटने से उनकी जमीनें, उनकी नौकरियां इन पर बड़ा संकट पैदा होने वाला है, वह दूर होकर आत्मीय भाव से शेष भारत जनों के साथ एकरूप मन से देश के विकास में वो अपनी जिम्मेवारी भी बराबरी से संभालेंगे.

सितंबर के महीने में अपनी प्रतिभा से, संपूर्ण विश्व के वैज्ञानिक बिरादरी का ध्यानाकर्षण करते हुए, उनकी प्रशंसा व सहानुभूति प्राप्त करते हुए, हमारे वैज्ञानिकों ने अब तक चंद्रमा के अनछुए प्रदेश, उसके दक्षिण ध्रुव पर अपना चांद्रयान ‘विक्रम’ उतारा. यद्यपि अपेक्षा के अनुरूप पूर्ण सफलता ना मिली, परंतु पहले ही प्रयास में इतना कुछ कर पाना यह भी सारी दुनिया को अबतक साध्य न हुई एक बात थी. हमारे देश की बौद्धिक प्रतिभा व वैज्ञानिकता का तथा संकल्प को परिश्रमपूर्वक पूर्ण करने के लगन का सम्मान हमारे वैज्ञानिकों के इस पराक्रम के कारण दुनिया में सर्वत्र बढ़ गया है. जनता की परिपक्व बुद्धि व कृति, देश में जगा हुआ स्वाभिमान, शासन में जगा हुआ दृढ़ संकल्प तथा साथ ही हमारे वैज्ञानिक सामर्थ्य की अनुभूति इन के इन सुखद अनुभवों के कारण पिछला वर्ष हमें हमेशा स्मरण में रहेगा.

परंतु, इस सुखद वातावरण में अलसा कर हम अपनी सजगता व अपनी तत्परता को भुला दें, सब कुछ शासन पर छोड़ कर, निष्क्रिय होकर विलासिता व स्वार्थों में मग्न हो ऐसा समय नहीं है. जिस दिशा में हम लोगों ने चलना प्रारंभ किया है, वह अपना अंतिम लक्ष्य-परमवैभव सम्पन्न भारत – अभी दूर है. मार्ग के रोड़े, बाधाएं और हमें रोकने की इच्छा रखने वाले शक्तियों के कारनामे अभी समाप्त नहीं हुए हैं. हमारे सामने कुछ संकट हैं जिनका उपाय हमें करना है. कुछ प्रश्न है जिनके उत्तर हमें देने हैं, और कुछ समस्याएं हैं जिनका निदान कर हमें उन्हें सुलझाना है.

सौभाग्य से हमारे देश के सुरक्षा सामर्थ्य की स्थिति, हमारे सेना की तैयारी, हमारे शासन की सुरक्षा नीति तथा हमारे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कुशलता की स्थिति इस प्रकार की बनी है कि इस मामले में हम लोग सजग और आश्वस्त हैं. हमारी स्थल सीमा तथा जल सीमाओं पर सुरक्षा सतर्कता पहले से अच्छी है. केवल स्थल सीमापर रक्षक व चैकियों की संख्या व जल सीमापर-विशेषकर द्वीपों वाले टापुओं की – निगरानी अधिक बढ़ानी पड़ेगी. देश के अन्दर भी उग्रवादी हिंसा में कमी आयी है. उग्रवादियों के आत्मसमर्पण की संख्या भी बढ़ी है.

व्यक्ति के या विश्व के जीवन में संकटों की परिस्थिति हमेशा बनी रहती है. कुछ संकट सामने दिखाई देते हैं. कुछ-कुछ बाद में सामने आते हैं. अपनी शरीर मन बुद्धि जितनी सजग स्वस्थ और प्रतिकारक्षम रहती है उतनी ही उन संकटों से बचने की संभावना बढ़ती है. परंतु, मनुष्य को अंदर से भी संकट पैदा होने का भय तो रहता ही है. कई प्रकार के संकट पैदा करनेवाले कारक शरीर के ही अंदर निवास करते हैं. शरीर की रोग प्रतिकारक शक्ति कम होने से उनका प्रभाव दिखाई देता है अन्यथा उनका उपद्रव नहीं होता.

हम सब लोग जानते हैं की गत कुछ वर्षों में एक परिवर्तन भारत की सोच की दिशा में आया है. उसको न चाहने वाले व्यक्ति दुनिया में भी है और भारत में भी है. भारत को बढ़ता हुआ देखना जिनके स्वार्थों के लिए भय पैदा करता है, ऐसी शक्तियां भी भारत को दृढ़ता व शक्ति से सम्पन्न होने नहीं देना चाहती. दुर्भाग्य से भारत में समाज के एकात्मता की, समता व समरसता की स्थिति जैसी चाहिए वैसी अभी नहीं है. इसका लाभ लेकर इन शक्तियों के उद्योग चलते हुए हम सभी देख रहे हैं. विविधताओं को, जाति, पंथ, भाषा, प्रांत इत्यादि प्रकारों को, एक दूसरे से अलग करना, भेदों में परिवर्तित करना पहले से चलते आ रहे भेदों की खाईयों को, आपस में वैमनस्य भड़काकर और बढ़ाना, उत्पन्न किए गए अलगावों को मनगढ़ंत कृत्रिम पहचानों पर खड़ा कर, इस देश की एक सामाजिक धारा में अलग-अलग विरोधी प्रवाह उत्पन्न करना; ऐसा प्रयास चल रहा है. सजगतापूर्वक इन कुचक्रों की पहचान करते हुए, उनका बौद्धिक तथा सामाजिक धरातल पर प्रतिकार होने की आवश्यकता है. शासन व प्रशासन में कार्यरत व्यक्तियों द्वारा सदभावनापूर्वक प्रवर्तित नीति, दिये गए वक्तव्यों या निर्णयों को भी गलत अर्थ में अथवा तोड़मरोड़ कर प्रचारित कर अपने घृणित उद्देश्यों के लाभ के लिए ऐसी शक्तियाँ उपद्रव करती है. सतत सावधानी की आवश्यकता है. ऐसी सब गतिविधियों में कहीं ना कहीं देश के कानून, नागरिक अनुशासन आदि के प्रति वितृष्णा उत्पन्न करने का छुपा अथवा प्रकट प्रयास चलता है. उसका सभी स्तरों पर अच्छा प्रतिकार होना चाहिए.

आजकल अपने ही समाज के एक समुदाय के द्वारा दूसरे समुदाय के व्यक्तियों पर आक्रमण कर उनको सामूहिक हिंसा के शिकार बनाने के समाचार छपे हैं. ऐसी घटनाएं केवल एक तरफा नहीं हुई है. दोनों तरफ से ऐसी घटनाओं के समाचार हैं तथा आरोप-प्रत्यारोप चलते हैं. कुछ घटनाओं को जानबूझकर करवाया गया है तथा कुछ घटनाओं को विपर्यस्त रूप में प्रकाशित किया गया है, यह बात भी सामने आई है. परंतु, कहीं ना कहीं कानून और व्यवस्था की सीमा का उल्लंघन कर यह हिंसा की प्रवृत्ति समाज में परस्पर संबंधों को नष्ट कर अपना प्रताप दिखाती है इस बात को स्वीकार तो करना ही पड़ेगा. यह प्रवृत्ति हमारे देश की परंपरा नहीं है, न ही हमारे संविधान में यह बात बैठती है. कितना भी मतभेद हो, कितना भी भड़काई जाने वाली कृतियाँ हुई हो, कानून और संविधान की मर्यादा के अंदर रहकर ही, पुलिस बलों के हाथ में ऐसे मामले देकर, न्याय व्यवस्था पर विश्वास रखकर ही चलना पड़ेगा. स्वतंत्र देश के नागरिकों का यही कर्तव्य है. ऐसी घटनाओं में लिप्त लोगों का संघ ने कभी भी समर्थन नहीं किया है और ऐसी प्रत्येक घटना के विरोध में संघ खड़ा है. ऐसी घटनाएं ना हो इसलिए स्वयंसेवक प्रयासरत रहते हैं. परंतु ऐसी घटनाओं को, जो परंपरा भारत की नहीं है ऐसी परंपरा को दर्शाने वाले ‘लिंचिंग’ जैसे शब्द देकर, सारे देश को व हिंदू समाज को सर्वत्र बदनाम करने का प्रयास करना; देश के तथाकथित अल्पसंख्यक वर्गों में भय पैदा करने का प्रयास करना; ऐसे षड्यंत्र चल रहे हैं यह हम को समझना चाहिए. भड़काने वाली भाषा तथा भड़काने वाले कृतियों से सभी को बचना चाहिए. विशिष्ट समुदाय के हितों की वकालत करने की आड़ में आपस में लड़ा कर स्वार्थ की रोटियां सेकने का उद्योग करने वाले तथाकथित नेताओं को प्रश्रय नहीं देना चाहिए. ऐसी घटनाओं का कड़ाई से नियंत्रण करने के लिए पर्याप्त कानून देश में विद्यमान है. उनका प्रामाणिकता से व सख्ती से अमल होना चाहिए.

समाज के विभिन्न वर्गों को आपस में सद्भावना, संवाद तथा सहयोग बढ़ाने के प्रयास में प्रयासरत होना चाहिए. समाज के सभी वर्गों का सद्भाव, समरसता व सहयोग तथा कानून संविधान की मर्यादा में ही अपने मतों की अभिव्यक्ति और हितों की रक्षा के लिए प्रयास करने का अनुशासन पालन करना, यह आज की स्थिति में नितांत आवश्यक बात है. इस प्रकार के संवाद को, सहयोग को बढ़ाने का प्रयास संघ के स्वयंसेवक प्रारंभ कर रहे हैं. इसके बाद भी कुछ बातों का निर्णय न्यायालय से ही होना पड़ता है. निर्णय कुछ भी हो आपस के सद्भाव को किसी भी बात से ठेस ना पहुंचे ऐसी वाणी और कृति सभी जिम्मेदार नागरिकों की होनी चाहिए. यह जिम्मेवारी किसी एक समूह की नहीं है. यह सभी की जिम्मेवारी है. सभी ने उसका पालन करना चाहिए और प्रारंभ स्वयं से करना चाहिए.

विश्व की आर्थिक व्यवस्था चक्र की गति में आयी मंदी सर्वत्र कुछ न कुछ परिणाम करती है. अमरीका व चीन में चली आर्थिक स्पर्धा के परिणाम भी भारतसहित सभी देशों को भुगतने पड़ते हैं. इस स्थिति से राहत देनेवाले कई उपाय शासन के द्वारा गत डेढ़ महिने में किये गये हैं. जनता के हितों के प्रति शासन की संवेदना व उसकी सक्रियता का परिचय इससे अवश्य मिलता है. इस तथाकथित मंदी के चक्र से हम निश्चित रूप से बाहर आयेंगे, हमारे आर्थिक जगत की सभी हस्तियों का यह सामर्थ्य अवश्य है.

अर्थव्यवस्था में बल भरने के लिए विदेशी सीधे पूँजी निवेश को अनुमति देना तथा उद्योगों का निजिकरण ऐसे कदम भी उठाने को सरकार बाध्य हो रही है. परन्तु सरकार की कई लोककल्याणकारी नीतियाँ व कार्यक्रमों के निचले स्तर पर लागू करने में अधिक तत्परता व क्षमता तथा अनावश्यक कड़ाई से बचने से भी बहुत सी बातें ठीक हो सकती है.

परिस्थिति के दबावों का उत्तर देने के प्रयास में स्वदेशी का भान विस्मृत होने से भी हानि होगी. दैनन्दिन जीवन में देशभक्ति की अभिव्यक्ति को ही स्व. दत्तोपंत ठेंगड़ी “स्वदेशी” मानते थे. स्व. विनोबाजी भावे ने उसका अर्थ “स्वावलंबन तथा अहिंसा” यह किया है. सभी मानकों में स्वनिर्भरता तथा देश में सबको रोजगार ऐसी शक्ति रखनेवाले ही अन्तर्राष्ट्रीय व्यापारिक संबंध बना सकते हैं, बढ़ा सकते हैं तथा स्वयं सुरक्षित रहकर विश्वमानवता को भी एक सुरक्षित व निरामय भविष्य दे सकते हैं. अपने आर्थिक परिवेश के अनुसार कोई घुमावदार दूर का रास्ता हमें चुनना पड़ सकता है तो भी लक्ष्य व दिशा तो स्वसामर्थ्य को बनाकर मजबूरियों से सदा के लिए बाहर आना यही होना चाहिए.

परंतु इतर तात्कालिक संकटों का तथा विश्व में चलने वाले आर्थिक उतार-चढ़ाव का परिणाम हमारी अर्थव्यवस्था पर कम से कम हो, इसलिए हमको मूल में जाकर विचार करना पड़ेगा. हमको हमारी अपनी दृष्टि से, हमारी अपनी आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर, हमारी अपनी जनता का रूप और परिवेश ध्यान में रखकर, हमारे अपने संसाधन और जन का विचार करते हुए, हमारी आकांक्षाओं को सफल साकार करने वाली अपनी आर्थिक दृष्टि बनाकर, अपनी नीति बनानी पड़ेगी. जगत का प्रचलित अर्थविचार कई प्रश्नों का उत्तर देने में असमर्थ है. उसके मानक भी कई प्रकार से अधूरे पड़ते हैं यह बात विश्व के अनेक अर्थतज्ञों के द्वारा ही सामने आ रही है. ऐसी अवस्था में कम से कम ऊर्जा का उपयोग करते हुए अधिकाधिक रोजगार पैदा करने वाली पर्यावरण के लिए उपकारक, हमको हर मामले में स्वनिर्भर बना सकने वाली तथा अपने बलबूते सारे विश्व के साथ हम अपनी शर्तों पर व्यापारी संबंध बनाएँ बढ़ाएँ रख सके, ऐसा सामर्थ्य हम में भरने वाली अपनी आर्थिक दृष्टि, नीति व व्यवस्था का निर्माण करने की दिशा में हमको कदम बढ़ाने ही पड़ेंगे.

यह स्व का विचार कर सकने में हम लोग स्वतंत्रता के इतने दशकों बाद भी कम पड़ रहे, इसके मूल में, योजनापूर्वक हम को गुलाम बनाने वाली शिक्षा का, जो प्रवर्तन गुलामी के काल में भारत में किया गया तथा स्वतंत्रता के बाद भी अभी तक हमने उसको जारी रखा है, यह बात ही कारण है. हमको अपने शिक्षा की रचना भी भारतीय दृष्टि से करनी पड़ेगी. विश्व में शिक्षा क्षेत्र में उत्कृष्ट गिने जाने वाले देशों की शिक्षा पद्धतियों का हम अध्ययन करते हैं, तो वहां भी इसी प्रकार से स्व आधारित शिक्षा ही उन-उन देशों की शैक्षिक उन्नति का कारण है, यह स्पष्ट दिखाई देता है. स्वभाषा, स्वभूषा, स्वसंस्कृति का सम्यक् परिचय तथा उसके बारे में गौरव प्रदान करने वाली कालसुसंगत, तर्कशुद्ध सत्यनिष्ठा, कर्तव्य बोध तथा विश्व के प्रति आत्मीय दृष्टिकोण व जीवों के प्रति करुणा की भावना देने वाली शिक्षा पद्धति हमको चाहिए. पाठ्यक्रम से लेकर तो शिक्षकों के प्रशिक्षण तक सब बातों में आमूलचूल परिवर्तन की आवश्यकता लगती है. केवल ढांचागत परिवर्तनों से काम बनने वाला नहीं है.

शिक्षा में इन सब बातों के अभाव के साथ हमारे देश में परिवारों में होने वाला संस्कारों का क्षरण व सामाजिक जीवन में मूल्य निष्ठा विरहित आचरण यह समाज जीवन में दो बहुत बड़ी समस्याएं उत्पन्न करने के लिए कारण बनता है. जिस देश में यह मातृवत्परदारेषु की भावना थी, महिलाओं के सम्मान की रक्षा के लिए रामायण महाभारत जैसे महाकाव्यों का विषय बनने वाले भीषण संग्राम हुए, स्वयं की मान रक्षा हेतु जौहर जैसे बलिदान हुए, उस देश में आज हमारी माता बहने न समाज में सुरक्षित न परिवार में सुरक्षित इस प्रकार की स्थिति का संकेत देने वाली घटनाएं घट रही है, यह हम सबको लज्जा का अनुभव करा देने वाली बात है. अपनी मातृशक्ति को हमको प्रबुद्ध, स्वावलंबनक्षम स्वसंरक्षणक्षम बनाना ही होगा. महिलाओं को देखने की पुरुषों की दृष्टि में हमारे संस्कृति के पवित्रता व शालीनता के संस्कार भरने ही पड़ेंगे.

बाल्यावस्था से ही घर के वातावरण से इस प्रशिक्षण का प्रारंभ होता है यह हम सब लोग जानते हैं. परंतु इसका नितांत अभाव आज के अणु परिवारों में दिखाई देता है. इसका और एक भयंकर लक्षण नई पीढ़ी में बढ़ने वाला नशीले पदार्थों के व्यसन का प्रमाण है. एक समय चीन जैसे सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध राष्ट्र की तरुणाई को भी व्यसनाधीन बनाकर विदेशी शक्तियों ने निःसत्त्व बना कर रख दिया था. ऐसे व्यसन के मोह से अलिप्त रहने की, सुशीलता की ओर झुकने वाली और मोह के वश ना होते हुए इन खतरों से दूर रहने की दृढ़ता वाली मानसिकता, घर में नहीं बनेगी तो, इससे व्यसन के प्रकोप को रोक पाना यह बहुत कठिन कार्य हो जाएगा. इस दृष्टि से संघ के स्वयंसेवकों सहित सभी अभिभावकों को सजग व सक्रिय होने की आवश्यकता है.

समाज में सर्वत्र अनुभव होने वाला आर्थिक तथा चारित्रिक भ्रष्ट आचरण भी मूल में इसी संस्कारहीनता के कारण उत्पन्न होता है. समय-समय पर इसको नियंत्रित करने के लिए कानून तो होते रहते हैं, कतिपय भ्रष्टाचारियों को कड़ा दंड दिया जाता है ऐसे उदाहरण भी स्थापित हो जाते हैं. परंतु ऊपर के स्तर पर हुए इस स्वस्थ स्वच्छ परिष्कार के नीचे सामान्य स्तर पर भ्रष्टाचार चलते चलता ही रहा है. और कहीं-कहीं वह इन उपायों को ही आश्रय बनाकर बढ़ रहा है, यह भी ध्यान में आता है. प्रामाणिक व्यक्ति तो इन कड़े कानूनों के पालन के चक्कर में कई कठिनाइयों में छटपटाते रहते हैं और जिनको विधि और शील की कोई परवाह नहीं ऐसे निर्लज्ज और उद्दंड लोग इन व्यवस्थाओं को चकमा देकर पनपते पलते रहते हैं. यह केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है. बिना श्रम या कम श्रम में व बिना अधिकार के अधिक पाने का लालच, कुसंस्कार के रूप में हमारे मन में पैठ कर बैठा है, यह ऐसे भ्रष्ट आचरण का मूल कारण है. सामाजिक वातावरण में, घरों में सब प्रकार के प्रबोधन से तथा अपने आचरण के उदाहरण से इस परिस्थिति को बदलना, यह देश के स्वास्थ्य व सुव्यवस्था के लिए एक अनिवार्य कर्तव्य बनता है.

समाज के प्रबोधन तथा समाज में वातावरण निर्माण करने में माध्यमों की बहुत बड़ी भूमिका हो सकती है. व्यापारिक दृष्टि से केवल मसालेदार व सनसनीखेज विषयों को उभारने के मोह से बाहर आकर, माध्यम भी इस वातावरण के निर्मिती में जुड़ जाए, तो यह कार्य और भी गति से हो सकता है.

अपने समाज के अंदर का वातावरण जैसे हम सभी सजग होकर उस वातावरण को स्वस्थ बनाये रखने की चिन्ता करने की आवश्यकता को अधोरेखांकित करता है वैसे ही संपूर्ण विश्व में विश्व के बाह्य पर्यावरण की समस्या मानव-समाज के व्यापक पहल की मांग कर रही है. पर्यावरण को स्वस्थ रखने के लिए बड़े नीतिगत उपायों की पहल तो सभी देशों की पर्यावरण नीति में उचित व समन्वित परिवर्तन लाने का विषय है व शासन से संबंधित विषय है. परन्तु जनसामान्यों के नित्य व्यवहार में छोटे-छोटे परिवर्तन की पहल भी इस दिशा में परिणामकारक हो सकती है. संघ के स्वयंसेवक इस क्षेत्र में ऐसे अनेक कार्य पहले से ही कर रहे हैं. उनके इन सारे प्रयासों को सुव्यवस्थित रूप देकर, समाज की गतिविधि के नाते आगे बढ़ाने का कार्य भी “पर्यावरण गतिविधि” नाम से प्रारम्भ हुआ है.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ गत 9 दशकों से समाज में एकात्मता व सद्भावना, सदाचरण व सद्व्यवहार तथा इस राष्ट्र के प्रति स्पष्ट दृष्टि व भक्ति उत्पन्न करने का कार्य कर रहा है. संघ के स्वयंसेवकों के सेवा भावना व समर्पण के बारे में देश में सर्वत्र आस्था जगी है ऐसा अनुभव आता है. परंतु अभी तक संघ के संपर्क में न आए हुए वर्गों में संघ के प्रति अविश्वास, भय व शत्रुता उत्पन्न हो, ऐसा प्रयास किया जाता है. संघ हिन्दू समाज का संगठन करता है इसका अर्थ वह अपने आप को हिन्दू न कहनेवाले समाज के वर्गों, विशेषकर मुस्लिम व ईसाइयों से शत्रुता रखता है, यह नितान्त असत्य व विपर्यस्त प्रचार चलता है. हिन्दू समाज, हिन्दुत्व इनके बारे में अनेक प्रमाणहीन, विकृत आरोप लगाकर उनको भी बदनाम करने का प्रयास चलता ही आया है. इन सब कुचक्रों के पीछे हमारे समाज का निरंतर विघटन होता रहे, उसका उपयोग अपने स्वार्थलाभ के लिये हों, यह सोच काम कर रही है. यह बात अब इतनी स्पष्ट है कि जानबूझकर आँखें बंद कर रखनेवालों को ही वह समझ में नहीं आती.

संघ की अपने राष्ट्र के पहचान के बारे में, हम सबकी सामूहिक पहचान के बारे में, हमारे देश के स्वभाव की पहचान के बारे में स्पष्ट दृष्टि व घोषणा है, वह सुविचारित व अडिग है, कि भारत हिंदुस्थान, हिंदू राष्ट्र है. संघ की दृष्टि में हिंदू शब्द केवल अपने आप को हिंदू कहने वालों के लिए नहीं है. जो भारत के हैं, जो भारतीय पूर्वजों के वंशज है तथा सभी विविधताओं का स्वीकार सम्मान व स्वागत करते हुए आपस में मिलजुल कर देश का वैभव तथा मानवता में शांति बढ़ाने का काम करने में जुट जाते हैं वे सभी भारतीय हिंदू हैं. उनकी पूजा, उनकी भाषा, उनका खानपान, रीति रिवाज, उनका निवास स्थान, कोई भी होने से इसमें अंतर नहीं आता. सामर्थ्यसम्पन्न व्यक्ति व समाज निर्भय होते हैं. ऐसे सामर्थ्यसम्पन्न लोग चारित्र्यसम्पन्न हो तो और किसी को भयभीत भी नहीं करते. दुर्बल लोग ही स्वयं की असुरक्षितता के भय के कारण अन्यों को भय दिखाने का प्रयास करते हैं. संघ सम्पूर्ण हिन्दू समाज को ऐसा बलसम्पन्न तथा सुशील व सद्भावी बनाएगा, जो किसी से न डरेंगे, न किसी को डरायेंगे, बल्कि दुर्बल व भयग्रस्त लोगों की रक्षा करेंगे.

इस हिंदू शब्द के बारे में एक भ्रमपूर्ण धारणा, उसको एक संप्रदाय के चैखट में बंद करने वाली कल्पना, अंग्रेजों के जमाने से हमारा बुद्धि भ्रम कर रही है. इसके चलते इस शब्द का स्वीकार न करने वाला वर्ग भी समाज में है. वे अपने आप के लिए भारतीय शब्द का उपयोग करते हैं. भारतीय स्वभाव, भारतीय संस्कृति के आधार पर चलने वाली सभ्यताओं को कुछ लोग अंग्रेजी में ‘इंडिक’ इस शब्द से संबोधित करते हैं. संघ के लिए इन शब्दों का पर्यायी उपयोग भी, जो हिंदू शब्द को भय या भ्रमवश नकारते हैं उनके लिए मान्य है. शब्द अलग होने से, पंथ संप्रदाय पूजा अलग होने से, खानपान रीति रिवाज अलग होने से, रहने के स्थान अलग-अलग होने से, प्रांत या भाषा अलग होने से, हम समाज के वर्गों को एक दूसरे से अलग नहीं मानते. इन सब को अपना मान कर ही संघ का काम चलता है. हमारा यह अपनत्व, जोड़नेवाली भावना ही राष्ट्रभावना है. वही हिन्दुत्व है. हमारे इस प्राचीन राष्ट्र का, कालसुसंगत परमवैभवसम्पन्न रूप प्रत्यक्ष साकार करने का भव्य लक्ष्य, इसकी धर्मप्राण प्रकृति व संस्कृति का संरक्षण संवर्धन ही इस अपनत्व का केन्द्र व लक्ष्य है.

विश्व को भारत की नितान्त आवश्यकता है. भारत को अपनी प्रकृति; संस्कृति के सुदृढ़ नींव पर खड़ा होना ही पड़ेगा. इसलिये राष्ट्र के बारे में यह स्पष्ट कल्पना व उसका गौरव मन में लेकर समाज में सर्वत्र सद्भाव, सदाचार तथा समरसता की भावना सुदृढ़ करने की आवश्यकता है. इन सभी प्रयासों में संघ के स्वयंसेवकों की महती भूमिका है व रहेगी. इसके लिए उपयोगी अनेक योजनाओं को यशस्वी करने के लिए संघ के स्वयंसेवक प्रयासरत हैं. प्रत्येक स्वयंसेवक को ही समय की चुनौती को स्वीकार कर कार्यरत होना होगा.

परन्तु यह समय की आवश्यकता तभी समय रहते पूर्ण होगी जब इस कार्य का दायित्व किसी व्यक्ति या संगठन पर डालकर, स्वयं दूर से देखते रहने का स्वभाव हम छोड़ दें. राष्ट्र की उन्नति, समाज की समस्याओं का निदान तथा संकटों का उपशम करने का कार्य ठेके पर नहीं दिया जाता. समय-समय पर नेतृत्व करने का काम अवश्य कोई न कोई करेगा, परंतु जब तक जागृत जनता, स्पष्ट दृष्टि, निःस्वार्थ प्रामाणिक परिश्रम तथा अभेद्य एकता के साथ वज्रशक्ति बनकर ऐसे प्रयासों में स्वयं से नहीं लगती, तब तक संपूर्ण व शाश्वत सफलता मिलना संभव नहीं होगा.

इसी कार्य के लिए समाज में वातावरण बना सकनेवाले कार्यकर्ताओं का निर्माण संघ करता है. उन कार्यकर्ताओं द्वारा समाज में चलनेवाले क्रियाकलाप व उनके परिणाम आज यह सिद्ध कर रहे हैं कि हम, हमारा कुटुंब, हमारा यह देश तथा विश्व को सुखी बनाने का यही सुपंथ है.

आप सभी को यह आवाहन है कि सद्य समय की इस आवश्यकता को अच्छी तरह संज्ञान में लेते हुए हम सब इस भव्य व पवित्र कार्य के सहयोगी बनें.

“युगपरिवर्तन की बेला में, हम सब मिलकर साथ चलें

देशधर्म की रक्षा के हित, सहते सब आघात चलें

मिलकर साथ चलें,  मिलकर साथ चलें..”

.. भारत माता की जय..

बुधवार, 2 अक्तूबर 2019

हिन्दू महात्मा गांधी - अरविन्द सिसौदिया





- गांधी जयंती !

हिन्दू महात्मा गांधी को स्थापित करनें की जरूरत है - अरविन्द सिसौदिया

जवाहरलाल नेहरू और कांग्रेस ने जिस महात्मा गांधी को सामनें रखा वह महात्मा गांधी थे ही नहीं । महात्मा गांधी ने तो शुद्ध रूप से रघुपति राघव राजा राम गाया था और रामराज्य की कल्पना की थी। महात्मा गांधी तो सनातन महात्मा गांधी थे, हिन्दू महात्मा गांधी थे भारतीय संस्कृित को आगे रख कर चलने वाले महात्मा गांधी थे। श्रीराम, अहिंसा, सत्य, मानवता, रामराज्य और क्षमा हिन्दू संस्कृति से ही उन्होने लिये थे । गीता उनको सबसे प्रिय थी। उनकी 150 जयंती पर हिन्दू महात्मा गांधी को स्थापित कर उन्हे सच्ची श्रृद्धांजल दी जानी चाहिये।

मंगलवार, 17 सितंबर 2019

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी दीर्घायु हों - अरविन्द सिसौदिया







https://www.youtube.com/watch?v=0xwiBM0Pldg

 प्रधानमंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी जी को जन्मदिवस की कोटि-कोटि शुभकामनाएं - अरविन्द सिसौदिया

सोमवार, 2 सितंबर 2019

’मतदाता सत्यापन कार्यक्रम’ से अवश्य जुडें - अरविन्द सिसौदिया







प्रत्येक मतदाता के नाम का सत्यापन होगा
1 जनवरी 2020 को 18 वर्ष पूर्ण करने वाले भी अपना नाम जुडवा सकेगें
’’मतदाता सत्यापन कार्यक्रम’’ प्रारम्भ, वोटरसूची में अपना - अपना नाम सत्यापन अवश्य करवायें - अरविन्द सिसौदिया

1 सितम्बर, कोटा। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार 01 सितंबर से 30 सितंबर 2019 तक मतदाता सूची सत्यापन का कार्य प्रारम्भ हो चुका हे। वर्तमान में मौजूद सभी नामों का सत्यापन किसी अन्य दस्तावेज के साथ किया जायेगा। भाजपा के जिला महामंत्री अरविन्द सिसौदिया ने बताया कि सत्यापन कार्यक्रम के अंतर्गत फोटोयुक्त निर्वाचक नामावली में मौजूदा मतदाताओं ने नामों का सत्यापन बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर किया जाएगा। उन्होने कहा अपना और अपने परिवार के नामों की सुनिश्चितता के लिये स्वंय प्रेरणा से तय दस्तावेजों से नाम अवश्य सत्यापित करवाना चहिये। उन्होने बताया कि आयोग द्वारा इस हेतु 7 अधिकृत किये गये दस्तावेजों में भारतीय पासपोर्ट, ड्राइविंग लाईसेंस, आधार, राशनकार्ड, सरकारी-अर्द्ध सरकारी कर्मियों को जारी पहचान पत्र, बैंक की पासबुक, किसान पहचान पत्र आदि में से किसी एक के साथ किया जा रहा है। सीसौदिया ने आव्हान किया है कि सभी नागरिकों को, राजनैतिक एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं को मतदाता सत्यापन कार्य में बढ़-चढ़ कर भाग लेना चाहिये और मतदाता सूची शुद्ध व सही बनानें में सहयोग करना चाहिये। महामंत्री ने बताया कि सत्यापन में बोगस, डुप्लीकेट, मृतक, शिटेड आदि मतदाताओं के नाम पुनरीक्षित कर पात्र वास्तविक मतदाता के नाम को ही निर्वाचक नामावली में सम्मिलित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस हेतु मतदाताओं द्वारा स्वंय भी एनवीएसपी “ राष्ट्रीय मतदाता सेवा पोर्टल” पर अपना सत्यापन आनलाइन करवा सकतें है। उन्होनें बताया कि इस कार्यक्रम के अन्तर्गत सभी मतदाता स्वयं आयोग द्वारा ’वोटर हेल्पलाइन’ मोबाईल एप, एनवीएसपी पोर्टल एवं अपने - अपने क्षेत्रों में संचालित होने वाले ई-मित्र, कामन सर्विस सेंटर (सीएससी ) तथा निर्वाचक पंजीकरण कार्यालय में मतदाता सुविधा केन्द्र के माध्यम से मतदाता सूची में अपनी ￧प्रविष्ठियांे का सत्यापन आयोग द्वारा इस हेतु अधिकृत किय गये दस्तावेजों के साथ करवा सकेंगे।
उन्होंने बताया कि यदि मतदाता सूची की किसी भी प्रविष्टि में संशोधन भी निर्धारित प्रपत्र से आनलाइन आवेदन पत्र भरकर प्रस्तुत कर सकेंगे। मतदाता सत्यापन कार्यक्रम के दौरान मतदाताओं द्वारा परिवार के सदस्यों की प्रविष्ठियां का सत्यापन भी किया जा सकेगा। ऐसे पात्र मतदाता जिनका संदर्भ तिथि 1 जनवरी-2020 के सदर्भ में मतदाता सूची में पंजीकरण नहीं किया गया है के द्वारा भी निर्धारित प्रपत्र में आवेदन किया जा सकेगा। अभियान के दौरान प्रयुक्त होने वाले विभिन्न आवेदन फार्म 6,7,8 एवं 8ए की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित आयोग द्वारा की गई है । बीएलओ द्वारा घर-घर सत्यापन के दौरान एवं मतदान केन्द्रों पर आयोजित किये जाने वाले विशेष शिविरों में इनका प्रयोग किया जायेगा।
- अरविन्द सिसौदिया, जिला महामंत्री भाजपा कोटा। 9414180151

गुरुवार, 29 अगस्त 2019

कांग्रेस गद्दार, उसे वोट देना पाप है - अरविन्द सिसौदिया





कांग्रेस गद्दार पार्टी, उसे वोट देना पाप है - अरविन्द सिसौदिया
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधाी ने , अपने बयानों के द्वारा पाकिस्तान की पूरी पूरी मदद की और कश्मीर पर झूठ फैलानें का काम स्वंय किया है। जनता में वह गद्दार पार्टी मानी जानें लगी है। तीन बडे राज्यों के विधानसभा चुनाव सामनें हैं। मध्यप्रदेश और राजस्थान में पालिका और पंचायतीराज चुनाव सामनें है। इन चुनावों में जनता से वोट ठगनें के लिये राहुल ने यूटर्न लिया है। राहुल का यह बयान मात्र छल है। वोट ठगनें की राजनीति है।
- अरविन्द सिसौदिया, जिला महामंत्री भाजपा, कोटा।