शनिवार, 9 नवंबर 2019

Ayodhya Verdict: राम जन्मभूमि पर SC का फैसला

Ayodhya Verdict:
एक नजर में पढ़ें अयोध्या राम जन्मभूमि -बाबरी मस्जिद विवाद पर आया SC का फैसला
By Ankur Sharma| Updated: Saturday, November 9, 2019,

नई दिल्ली। देश के सबसे बहुचर्चित कोर्ट केस अयोध्या राम जन्मभूमि - बाबरी मस्जिद विवाद केस में शनिवार को फैसला आ गया है और इसके बाद अब तक विवादित रही जमीन पर रामलला विराजमान ही रहेंगे वहीं दूसरी तरफ सर्वोच्च न्यायालय ने मुस्लिम पक्ष को अलग से मस्जिद के लिए जमीन देने के निर्देश दिए हैं। आज पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने इस मामले में एतिहासिक फैसला सुनाया है, बता दें कि इस बेंच ने लगातार 40 दिन की मैराथन सुनवाई के बाद बीती 16 अक्टूबर को फैसला सुरक्षित रख लिया गया था।

इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला अतार्किक: SC इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा विवादित जमीन को तीन पक्षों में बांटने के फैसले को अतार्किक करार देते हुए कहा कि हाई कोर्ट ने जो तीन पक्ष माने थे, उसे दो हिस्सों में मानना होगा। कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट द्वारा जमीन को तीन हिस्सों में बांटना तार्किक नहीं था। इससे साफ हो गया कि मामले में अब रामलला विराजमान और सुन्नी वक्फ बोर्ड दो पक्ष ही रह गए।

SC ने निर्मोही अखाड़ा के दावे को खारिज किया सुप्रीम कोर्ट ने निर्मोही अखाड़ा के दावे को खारिज करते हुए कहा कि उसने देरी से याचिका दायर की थी, गोगोई ने कहा कि कोर्ट धर्मशास्त्र में पड़े, यह उचित नहीं। प्लेसेज ऑफ वर्शिप ऐक्ट सभी धार्मिक समूहों के हितों की रक्षा के लिए भारत की प्रतिबद्धता को बताता है।

आस्था वैयक्तिक विश्वास का विषय देश की सर्वोच्च अदालत ने कहा कि हिंदुओं की आस्था है कि भगवान राम की जन्म गुंबद के नीचे हुआ था। आस्था वैयक्तिक विश्वास का विषय है, बाबरी मस्जिद का निर्माण खाली जगह पर हुआ था, जमीन के नीचे का ढांचा इस्लामिक नहीं था। ASI के निष्कर्षों से साबित हुआ कि नष्ट किए गए ढांचे के नीचे मंदिर था और इस बात के सबूत हैं कि अंग्रेजों के आने के पहले से राम चबूतरा और सीता रसोई की हिंदू पूजा करते थे।

अपना अधिकार साबित नहीं कर पाए मुस्लिम: सु्प्रीम कोर्ट मुस्लिमों ने इस बात के सबूत पेश नहीं किए कि 1857 से पहले स्थल पर उनका ऐक्सक्लुसिव कब्जा था। सुप्रीम कोर्ट ने शिया वक्फ बोर्ड की अपील खारिज कर दी। उन्होंने कहा कि मस्जिद कब बनी, इससे फर्क नहीं पड़ता। 22-23 दिसंबर 1949 को मूर्ति रखी गई। गौरतलब है कि मुस्लिम पक्ष ने कहा था कि वहां लगातार नमाज पढ़ी जाती रही थी। कोर्ट ने कहा कि 1856 से पहले अंदरूनी हिस्से में हिंदू भी पूजा किया करते थे। रोकने पर बाहर चबूतरे पर पूजा करने लगे खाली जमीन पर नहीं बनी थी मस्जिद: SC सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की खुदाई से निकले सबूतों की अनदेखी नहीं कर सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट का फैसला पूरी पारदर्शिता से हुआ है। बाबरी मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनी थी। कोर्ट ने कहा कि मस्जिद के नीचे विशाल रचना थी। एएसआई ने 12वीं सदी का मंदिर बताया था। कोर्ट ने कहा कि वहां से जो कलाकृतियां मिली थीं, वह इस्लामिक नहीं थीं।

5 एकड़ की जमीन कोर्ट ने आगे कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को कहीं और 5 एकड़ की जमीन दी जाए और इसके साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया है कि वह मंदिर निर्माण के लिए 3 महीने में ट्रस्ट बनाए, इस ट्रस्ट में निर्मोही अखाड़े को भी प्रतिनिधित्व देने का आदेश हुआ है। कोर्ट ने आगे कहा कि हर मजहब के लोगों को संविधान में बराबर का सम्मान दिया गया है।
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अयोध्या पर फैसला: निर्मोही अखाड़े का विवादित जमीन पर दावा खारिज, लेकिन ट्रस्ट में मिलेगा प्रतिनिधित्व
By Anjan Kumar Chaudhary| Updated: Saturday, November 9, 2019,

नई दिल्ली- सुप्रीम कोर्ट ने रामजन्मभूमि की विवादित जमीन पर निर्मोही अखाड़ा का दावा तो खारिज कर दिया है, लेकिन उसे राम मंदिर निर्माण के लिए बनने वाले ट्रस्ट में प्रतिनिधित्व देने का फैसला सुनाया है। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के आर्टिकल-142 का उपयोग किया है। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय का निर्मोही अखाड़ा ने स्वागत किया है।

अयोध्या में रामजन्मभूमि की विवादित जमीन पर एक दावेदार निर्मोही अखाड़ा भी था। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने उसकी दावेदारी ठुकरा दी है। हालांकि अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि मंदिर निर्माण के लिए बनने वाले ट्रस्ट में उसे भी प्रतिनिधित्व दिया जाय। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए निर्मोही अखाड़ा के प्रवक्ता कार्तिक चोपड़ा ने कहा है कि, "150 वर्षों के हमारे संघर्ष को पहचानने के लिए निर्मोही अखाड़ा सुप्रीम कोर्ट का आभारी है और इसने निर्मोही अखाड़ा को केंद्र सरकार की ओर से बनाए जाने वाले श्री राम जन्मस्थान मंदिर के निर्माण एवं प्रबंध के लिए गठित होने वाले ट्रस्ट में पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया है।"


गौरतलब है कि मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट बनाए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने जिस आर्टिकल 142 का इस्तेमाल किया है, उसमें उसे यह अधिकार है कि किसी ऐसे दुर्लभ मामले में जहां कानून से उसे कोई स्पष्ट रास्ता नहीं दिखाई देता, वह अपने विवेक का उपयोग कर सकता है। आपको बता दें कि रामजन्मभूमि में निर्मोही अखाड़ा भी अपने स्वामित्व का दावा करता रहा है, लेकिन वह शुरू से रामलला के पक्ष में ही रहा है।

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Ayodhya Verdict:
रामलला को मिली विवादित जमीन, जानिए अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले की 10 बड़ी बातें
By Bavita Jha| Updated: Saturday, November 9, 2019

नई दिल्ली। देश की सबसे पुराने विवाद अयोध्या जमीन विवाद में आज देश की सर्वोच्च अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवाद मामले में फैसला सुनाते हुए विवादित जमीन रामजन्मभूमि न्याय को दी है। कोर्ट ने अपने फैसले में सुन्नी बोर्ड को अलग से 5 एकड़ जमीन देने की बात कही है। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने निर्मोही अखाड़े के दावे को खारिज कर दिया है।

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई में संवैधानिक पीठ ने फैसला सुनाते हुए निर्मोही अखाड़ा और शिया वक्फ बोर्ड का दावा खारिज कर दिया है। पांच जजों की बेंच ने अयोध्या मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा कि विवादित जमीन पर राम मंदिर का निर्माण केंद्र सरकार ट्रस्ट बनाकर करेगी। वहीं अयोध्या में ही मस्जिद बनाने के लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड को 5 एकड़ जमीन मिलेगी।
आइए जानें इस ऐतिहासिक फैसले की 10 बड़ी बातें....
अयोध्या पर ऐतिहासिक फैसला सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या जमीन विवाद मामले में पैसला सुनाते हुए कहा कि विवादित जमीन रामलला विराजमान को दी जाए। कोर्ट ने कहा कि हिन्दुओं की यह आस्था अविवादित है कि भगवान राम का जन्म स्थल ध्वस्त संरचना है। उन्होंने कहा का सीता रसोई राम चबूतरा, भंडार गृह की उपस्थिति के मिले सबूत इस तथ्य का दावा पेश करते हैं।

केंद्र सरकार बनाएगी ट्रस्ट सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रामलला के जमीन पर केंद्र सरकार ट्रस्ट बनाकर मंदिर का निर्माण करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को मंदिर निर्माण के लिए 3 महीने में ट्रस्ट बनाकर, योजना तैयार करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि फैसले आस्था और विश्वास, दावे के आधार पर नहीं दिए जा सकते। कोर्ट ने कहा कि ऐतिहासिक दस्तावेज दिखाते हैं हिंदुओं का विश्वास है कि अयोध्या भगवान राम का जन्मस्थान है।

मस्जिद के लिए 5 एकड़ जमीन सुप्रीम कोर्ट ने मुस्जिद बनाने के लिए वैकल्पिक जमीन आवंजिट कराने का नि र्देश दिया। कोर्ट ने सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद बनाने के लिए अयोध्या में 5 एकड़ जमीन देने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि बाबरी मस्जिद को नुकसान पहुंचाना कानून के खिलाफ था।

निर्मोही अखाड़े का दावा खारिज सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले में तीसरे पक्ष निर्मोही अखाड़े का दावा खारिज कर दिया। निर्मोही अखाड़े का दावा खारिज करते हुए मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा कि हमने 1946 के फैजाबाद कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली शिया वक्फ बोर्ड की सिंगल लीव पिटिशन को खारिज करते हैं।


खाली जमीन पर नहीं बनी बाबरी मस्जिद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बाबरी मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनी थी। मस्जिद के नीचे विशाल रचना थी। वह रचना इस्लामिक नहीं थी। वहां जो कलाकृतियां मिली वो भी इस्लामिक नहीं थी। कोर्ट ने कहा कि नमाज पढ़ने की जगह को मस्ज़िद मानने के हक को हम मना नहीं कर सकते।


सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि विवादित ढांचे में पुरानी संरचना की चीज़ें इस्तेमाल हुईं। कसौटी का पत्थर, खंभा आदि देखा गया। कोर्ट ने कहा कि ASI यह नहीं बता पाए कि मंदिर तोड़कर विवादित ढांचा बना था या नहीं। कोर्ट ने कहा कि अयोध्या में विवादित स्थल के नीचे बनी संरचना इस्लामिक नहीं थी लेकिन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने यह साबित नहीं किया कि मस्जिद के निर्माण के लिये मंदिर गिराया गया था।

हिन्दू अयोध्या को राम भगवान का जन्मस्थान मानते हैं सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हिन्दू अयोध्या को राम भगवान का जन्मस्थान मानते हैं। कोर्ट ने कहा कि मुख्य गुंबद को ही जन्म की सही जगह मानते हैं। अयोध्या में राम का जन्म होने के दावे का किसी ने विरोध नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि नमाज पढ़ने की जगह को मस्ज़िद मानने के हक को हम मना नहीं कर सकते। मुख्य नयायाधीश ने कहा कि 1991 का प्लेसेस ऑफ वरशिप एक्ट धर्मस्थानों को बचाने की बात कहता है. एक्ट भारत की धर्मनिरपेक्षता की मिसाल है।

ASI यह नहीं बता पाए कि मंदिर तोड़कर विवादित ढांचा बना था या नहीं अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि मस्ज़िद 1528 की बनी बताई जाती है लेकिन कब बनी इससे फर्क नहीं पड़ता। कोर्ट ने कहा कि ASI यह नहीं बता पाए कि मंदिर तोड़कर विवादित ढांचा बना था या नहीं। 12वीं सदी से 16वीं सदी पर वहां क्या हो रहा था, साबित नहीं हुआ।


सुन्नी वक्फ बोर्ड ने बहस में बदला दावा सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड ने बहस में अपने दावे को बदला। उन्होंने पहले कुछ कहा, बाद मे नीचे मिली रचना को ईदगाह कहा। कोर्ट ने कहा कि साफ है कि बाबरी मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बना था। कोर्ट ने कहा कि बाबरी मस्जिद के नीचे विशाल रचना थी। कोर्ट ने कहा कि ASI ने वहां 12वीं सदी की मंदिर बताई। विवादित ढांचे में पुरानी संरचना की चीज़ें इस्तेमाल हुईं। रिपोर्ट में इस संरचना में कसौटी का पत्थर, खंभा आदि की बात कही गई।

एक मत से आया फैसला सुप्रीम कोर्ट का फैसला एक मत से आया। कोर्ट की कार्यवाही शुरू होते ही सबसे पहले केस नंबर 1501, शिया बनाम सुन्नी वक्फ बोर्ड केस में एक मत से फैसला आया। इस मामले में शिया वक्फ बोर्ड का दावा खारिज कर दिया गया।

राम दरबार है जग सारा

राम दरबार है जग सारा


राम ही तीनो लोक के राजा, सबके प्रतिपला सबके आधारा
राम दरबार है जग सारा.
राम का भेद ना पाया वेद निगम हू नेति नेति उचरा
राम दरबार है जग सारा.
तीन लोक में राम का सज़ा हुआ दरबार, जो जहाँ सुमिरे वहीं दरस दें उसे राम उदार. जय जय राम सियाराम.
जय जय राम सियाराम जय जय राम सियाराम जय जय राम सियाराम जय जय राम सियाराम जय जय राम सियाराम!
राम में सर्व राम में सब माही रूप विराट राम सम नाहीं, जितने भी ब्रह्मांड रचे हैं, सब विराट प्रभु में ही बसें हैं !!
रूप विराट धरे तो चौदह भुवन में नाहीं आते हैं, सिमटेई तो हनुमान ह्रदय में सीता सहित समाते हैं.
पतित उधरन दीन बंधु पतितो को पार लगातें हैं, बेर बेर शबरी के हाथों बेर प्रेम से खाते हैं
जोग जतन कर जोगी जिनको जनम जनम नहीं पाते हैं, भक्ति के बस में होकर के वे बालक भी बन जाते हैं.
योगी के चिंतन में राम, मानव के मंथन में राम, तन में राम मन में राम, सृष्टि के कन कन में राम.
आती जाती श्वास में राम, अनुभव में आभास में राम, नहीं तर्क के पास में राम, बसतें में विश्वास में राम
राम तो हैं आनंद के सागर, भर लो जिसकी जितनी गागर, कीजो छमा दोष त्रुटि स्वामी राम नमामि नमामि नमामि.
अनंता अनंत अभेदा अभेद आगमया गम्या पार को पारा, राम  दरबार  है  जग  सारा, राम दरबार है जग सारा !!

गुरुवार, 10 अक्तूबर 2019

विजयादशमी :सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी

विजयादशमी पर विशेष – राष्ट्र जागरण के अग्रिम मोर्चे पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
(मंगलवार, 08 अक्तूबर 2019)



आदरणीय प्रमुख अतिथि महोदय, इस उत्सव को देखने के लिए विशेष रूप से यहां पर पधारे हुए निमंत्रित अतिथि गण, श्रद्धेय संत वृंद, मा. संघचालक गण, संघ के सभी माननीय अधिकारीगण, माता भगिनी, नागरिक सज्जन एवं आत्मीय स्वयंसेवक बंधु.

इस विजयादशमी के पहले बीता हुआ वर्ष भर का कालखंड श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश वर्ष के रूप में तथा स्वर्गीय महात्मा गांधी के जन्म के डेढ़ सौ वे वर्ष के रूप में विशेष रहा. उस उपलक्ष्य में किए जाने वाले कार्यक्रम आगे और कुछ समय, उनकी अवधि समाप्त होने तक, चलने वाले हैं. इस बीच 10 नवंबर से स्वर्गीय दत्तोपंत जी ठेंगड़ी का भी शताब्दी वर्ष शुरू होना है. परंतु बीते हुए वर्ष में घटी हुई कुछ महत्त्वपूर्ण घटनाओं ने, उसको हमारे लिए और स्मरणीय बना दिया है.

मई मास में लोकसभा चुनावों के परिणाम प्राप्त हुए. इन चुनावों की ओर संपूर्ण विश्व का ध्यान आकर्षित हुआ था. भारत जैसे विविधताओं से भरे विशाल देश में, चुनाव का यह कार्य समय से और व्यवस्थित कैसे सम्पन्न होता है, यह देखना दुनिया के लिए आकर्षण का पहला विषय था. वैसे ही 2014 में आया परिवर्तन केवल 2014 के पहले के सरकार के प्रति मोहभंग से उत्पन्न हुई एक नकारात्मक राजनीतिक लहर का परिणाम है, अथवा विशिष्ट दिशा में जाने के लिए जनता ने अपना मन बना लिया है, यह 2019 के चुनावों में दिखाई देना था. विश्व का ध्यान उस ओर भी था. जनता ने अपनी दृढ़ राय प्रकट की और भारत देश में प्रजातंत्र, विदेशों से आयातित नई अपरिचित बात नहीं है, बल्कि देश के जनमानस में सदियों से चलती आई परंपरा तथा स्वातंत्र्योत्तर काल में प्राप्त हुआ अनुभव व प्रबोधन, इनके परिणामस्वरूप प्रजातंत्र में रहना व प्रजातंत्र को सफलतापूर्वक चलाना यह समाज का मन बन गया है, यह बात सबके ध्यान में आई. नई सरकार को बढ़ी हुई संख्या में फिर से चुनकर लाकर समाज ने उनके पिछले कार्यों की सम्मति व आने वाले समय के लिए बहुत सारी अपेक्षाओं को व्यक्त किया था.

उन अपेक्षाओं को प्रत्यक्ष में साकार कर, जन भावनाओं का सम्मान करते हुए, देश के हित में उनकी इच्छाएँ पूर्ण करने का साहस इस दोबारा चुने हुए शासन में भी है, यह बात फिर एक बार सिद्ध हो गई, कलम 370 को अप्रभावी बनाने के सरकार के काम से. सत्तारूढ़ दल की विचार परंपरा में यह कार्य तो पहले से ही स्वीकारा गया था. लेकिन इस बार कुशलतापूर्वक अन्य मतों के दलों का भी दोनों सदनों में समर्थन प्राप्त कर, सामान्य जनों के हृदय के भावों के अनुरूप तथा मजबूत तर्कों के साथ यह जो काम हुआ, उसके लिए देश के प्रधानमंत्री, गृहमंत्री सहित शासक दल तथा इस जन भावना का संसद में समर्थन करने वाले अन्य दल भी अभिनंदन के पात्र हैं. यह कदम अपनी पूर्णता तब प्राप्त कर लेगा, जब 370 के प्रभाव में न हो सके न्याय कार्य सम्पन्न होंगे तथा उसी प्रभाव के कारण चलते आये अन्यायों की समाप्ति होगी. वहां से अन्यायपूर्वक निकाल दिए गए हमारे कश्मीरी पंडितों का पुनर्वसन,  उनकी निर्भय, सुरक्षित तथा देशभक्त व हिंदू बने रहने की स्थिति में होगा. कश्मीर के रहिवासी जनों को अनेक अधिकार, जिनसे वे अब तक वंचित थे, प्राप्त होंगे और घाटी के बंधुओं के मन में यह जो गलत डर भरा गया है, कि 370 हटने से उनकी जमीनें, उनकी नौकरियां इन पर बड़ा संकट पैदा होने वाला है, वह दूर होकर आत्मीय भाव से शेष भारत जनों के साथ एकरूप मन से देश के विकास में वो अपनी जिम्मेवारी भी बराबरी से संभालेंगे.

सितंबर के महीने में अपनी प्रतिभा से, संपूर्ण विश्व के वैज्ञानिक बिरादरी का ध्यानाकर्षण करते हुए, उनकी प्रशंसा व सहानुभूति प्राप्त करते हुए, हमारे वैज्ञानिकों ने अब तक चंद्रमा के अनछुए प्रदेश, उसके दक्षिण ध्रुव पर अपना चांद्रयान ‘विक्रम’ उतारा. यद्यपि अपेक्षा के अनुरूप पूर्ण सफलता ना मिली, परंतु पहले ही प्रयास में इतना कुछ कर पाना यह भी सारी दुनिया को अबतक साध्य न हुई एक बात थी. हमारे देश की बौद्धिक प्रतिभा व वैज्ञानिकता का तथा संकल्प को परिश्रमपूर्वक पूर्ण करने के लगन का सम्मान हमारे वैज्ञानिकों के इस पराक्रम के कारण दुनिया में सर्वत्र बढ़ गया है. जनता की परिपक्व बुद्धि व कृति, देश में जगा हुआ स्वाभिमान, शासन में जगा हुआ दृढ़ संकल्प तथा साथ ही हमारे वैज्ञानिक सामर्थ्य की अनुभूति इन के इन सुखद अनुभवों के कारण पिछला वर्ष हमें हमेशा स्मरण में रहेगा.

परंतु, इस सुखद वातावरण में अलसा कर हम अपनी सजगता व अपनी तत्परता को भुला दें, सब कुछ शासन पर छोड़ कर, निष्क्रिय होकर विलासिता व स्वार्थों में मग्न हो ऐसा समय नहीं है. जिस दिशा में हम लोगों ने चलना प्रारंभ किया है, वह अपना अंतिम लक्ष्य-परमवैभव सम्पन्न भारत – अभी दूर है. मार्ग के रोड़े, बाधाएं और हमें रोकने की इच्छा रखने वाले शक्तियों के कारनामे अभी समाप्त नहीं हुए हैं. हमारे सामने कुछ संकट हैं जिनका उपाय हमें करना है. कुछ प्रश्न है जिनके उत्तर हमें देने हैं, और कुछ समस्याएं हैं जिनका निदान कर हमें उन्हें सुलझाना है.

सौभाग्य से हमारे देश के सुरक्षा सामर्थ्य की स्थिति, हमारे सेना की तैयारी, हमारे शासन की सुरक्षा नीति तथा हमारे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कुशलता की स्थिति इस प्रकार की बनी है कि इस मामले में हम लोग सजग और आश्वस्त हैं. हमारी स्थल सीमा तथा जल सीमाओं पर सुरक्षा सतर्कता पहले से अच्छी है. केवल स्थल सीमापर रक्षक व चैकियों की संख्या व जल सीमापर-विशेषकर द्वीपों वाले टापुओं की – निगरानी अधिक बढ़ानी पड़ेगी. देश के अन्दर भी उग्रवादी हिंसा में कमी आयी है. उग्रवादियों के आत्मसमर्पण की संख्या भी बढ़ी है.

व्यक्ति के या विश्व के जीवन में संकटों की परिस्थिति हमेशा बनी रहती है. कुछ संकट सामने दिखाई देते हैं. कुछ-कुछ बाद में सामने आते हैं. अपनी शरीर मन बुद्धि जितनी सजग स्वस्थ और प्रतिकारक्षम रहती है उतनी ही उन संकटों से बचने की संभावना बढ़ती है. परंतु, मनुष्य को अंदर से भी संकट पैदा होने का भय तो रहता ही है. कई प्रकार के संकट पैदा करनेवाले कारक शरीर के ही अंदर निवास करते हैं. शरीर की रोग प्रतिकारक शक्ति कम होने से उनका प्रभाव दिखाई देता है अन्यथा उनका उपद्रव नहीं होता.

हम सब लोग जानते हैं की गत कुछ वर्षों में एक परिवर्तन भारत की सोच की दिशा में आया है. उसको न चाहने वाले व्यक्ति दुनिया में भी है और भारत में भी है. भारत को बढ़ता हुआ देखना जिनके स्वार्थों के लिए भय पैदा करता है, ऐसी शक्तियां भी भारत को दृढ़ता व शक्ति से सम्पन्न होने नहीं देना चाहती. दुर्भाग्य से भारत में समाज के एकात्मता की, समता व समरसता की स्थिति जैसी चाहिए वैसी अभी नहीं है. इसका लाभ लेकर इन शक्तियों के उद्योग चलते हुए हम सभी देख रहे हैं. विविधताओं को, जाति, पंथ, भाषा, प्रांत इत्यादि प्रकारों को, एक दूसरे से अलग करना, भेदों में परिवर्तित करना पहले से चलते आ रहे भेदों की खाईयों को, आपस में वैमनस्य भड़काकर और बढ़ाना, उत्पन्न किए गए अलगावों को मनगढ़ंत कृत्रिम पहचानों पर खड़ा कर, इस देश की एक सामाजिक धारा में अलग-अलग विरोधी प्रवाह उत्पन्न करना; ऐसा प्रयास चल रहा है. सजगतापूर्वक इन कुचक्रों की पहचान करते हुए, उनका बौद्धिक तथा सामाजिक धरातल पर प्रतिकार होने की आवश्यकता है. शासन व प्रशासन में कार्यरत व्यक्तियों द्वारा सदभावनापूर्वक प्रवर्तित नीति, दिये गए वक्तव्यों या निर्णयों को भी गलत अर्थ में अथवा तोड़मरोड़ कर प्रचारित कर अपने घृणित उद्देश्यों के लाभ के लिए ऐसी शक्तियाँ उपद्रव करती है. सतत सावधानी की आवश्यकता है. ऐसी सब गतिविधियों में कहीं ना कहीं देश के कानून, नागरिक अनुशासन आदि के प्रति वितृष्णा उत्पन्न करने का छुपा अथवा प्रकट प्रयास चलता है. उसका सभी स्तरों पर अच्छा प्रतिकार होना चाहिए.

आजकल अपने ही समाज के एक समुदाय के द्वारा दूसरे समुदाय के व्यक्तियों पर आक्रमण कर उनको सामूहिक हिंसा के शिकार बनाने के समाचार छपे हैं. ऐसी घटनाएं केवल एक तरफा नहीं हुई है. दोनों तरफ से ऐसी घटनाओं के समाचार हैं तथा आरोप-प्रत्यारोप चलते हैं. कुछ घटनाओं को जानबूझकर करवाया गया है तथा कुछ घटनाओं को विपर्यस्त रूप में प्रकाशित किया गया है, यह बात भी सामने आई है. परंतु, कहीं ना कहीं कानून और व्यवस्था की सीमा का उल्लंघन कर यह हिंसा की प्रवृत्ति समाज में परस्पर संबंधों को नष्ट कर अपना प्रताप दिखाती है इस बात को स्वीकार तो करना ही पड़ेगा. यह प्रवृत्ति हमारे देश की परंपरा नहीं है, न ही हमारे संविधान में यह बात बैठती है. कितना भी मतभेद हो, कितना भी भड़काई जाने वाली कृतियाँ हुई हो, कानून और संविधान की मर्यादा के अंदर रहकर ही, पुलिस बलों के हाथ में ऐसे मामले देकर, न्याय व्यवस्था पर विश्वास रखकर ही चलना पड़ेगा. स्वतंत्र देश के नागरिकों का यही कर्तव्य है. ऐसी घटनाओं में लिप्त लोगों का संघ ने कभी भी समर्थन नहीं किया है और ऐसी प्रत्येक घटना के विरोध में संघ खड़ा है. ऐसी घटनाएं ना हो इसलिए स्वयंसेवक प्रयासरत रहते हैं. परंतु ऐसी घटनाओं को, जो परंपरा भारत की नहीं है ऐसी परंपरा को दर्शाने वाले ‘लिंचिंग’ जैसे शब्द देकर, सारे देश को व हिंदू समाज को सर्वत्र बदनाम करने का प्रयास करना; देश के तथाकथित अल्पसंख्यक वर्गों में भय पैदा करने का प्रयास करना; ऐसे षड्यंत्र चल रहे हैं यह हम को समझना चाहिए. भड़काने वाली भाषा तथा भड़काने वाले कृतियों से सभी को बचना चाहिए. विशिष्ट समुदाय के हितों की वकालत करने की आड़ में आपस में लड़ा कर स्वार्थ की रोटियां सेकने का उद्योग करने वाले तथाकथित नेताओं को प्रश्रय नहीं देना चाहिए. ऐसी घटनाओं का कड़ाई से नियंत्रण करने के लिए पर्याप्त कानून देश में विद्यमान है. उनका प्रामाणिकता से व सख्ती से अमल होना चाहिए.

समाज के विभिन्न वर्गों को आपस में सद्भावना, संवाद तथा सहयोग बढ़ाने के प्रयास में प्रयासरत होना चाहिए. समाज के सभी वर्गों का सद्भाव, समरसता व सहयोग तथा कानून संविधान की मर्यादा में ही अपने मतों की अभिव्यक्ति और हितों की रक्षा के लिए प्रयास करने का अनुशासन पालन करना, यह आज की स्थिति में नितांत आवश्यक बात है. इस प्रकार के संवाद को, सहयोग को बढ़ाने का प्रयास संघ के स्वयंसेवक प्रारंभ कर रहे हैं. इसके बाद भी कुछ बातों का निर्णय न्यायालय से ही होना पड़ता है. निर्णय कुछ भी हो आपस के सद्भाव को किसी भी बात से ठेस ना पहुंचे ऐसी वाणी और कृति सभी जिम्मेदार नागरिकों की होनी चाहिए. यह जिम्मेवारी किसी एक समूह की नहीं है. यह सभी की जिम्मेवारी है. सभी ने उसका पालन करना चाहिए और प्रारंभ स्वयं से करना चाहिए.

विश्व की आर्थिक व्यवस्था चक्र की गति में आयी मंदी सर्वत्र कुछ न कुछ परिणाम करती है. अमरीका व चीन में चली आर्थिक स्पर्धा के परिणाम भी भारतसहित सभी देशों को भुगतने पड़ते हैं. इस स्थिति से राहत देनेवाले कई उपाय शासन के द्वारा गत डेढ़ महिने में किये गये हैं. जनता के हितों के प्रति शासन की संवेदना व उसकी सक्रियता का परिचय इससे अवश्य मिलता है. इस तथाकथित मंदी के चक्र से हम निश्चित रूप से बाहर आयेंगे, हमारे आर्थिक जगत की सभी हस्तियों का यह सामर्थ्य अवश्य है.

अर्थव्यवस्था में बल भरने के लिए विदेशी सीधे पूँजी निवेश को अनुमति देना तथा उद्योगों का निजिकरण ऐसे कदम भी उठाने को सरकार बाध्य हो रही है. परन्तु सरकार की कई लोककल्याणकारी नीतियाँ व कार्यक्रमों के निचले स्तर पर लागू करने में अधिक तत्परता व क्षमता तथा अनावश्यक कड़ाई से बचने से भी बहुत सी बातें ठीक हो सकती है.

परिस्थिति के दबावों का उत्तर देने के प्रयास में स्वदेशी का भान विस्मृत होने से भी हानि होगी. दैनन्दिन जीवन में देशभक्ति की अभिव्यक्ति को ही स्व. दत्तोपंत ठेंगड़ी “स्वदेशी” मानते थे. स्व. विनोबाजी भावे ने उसका अर्थ “स्वावलंबन तथा अहिंसा” यह किया है. सभी मानकों में स्वनिर्भरता तथा देश में सबको रोजगार ऐसी शक्ति रखनेवाले ही अन्तर्राष्ट्रीय व्यापारिक संबंध बना सकते हैं, बढ़ा सकते हैं तथा स्वयं सुरक्षित रहकर विश्वमानवता को भी एक सुरक्षित व निरामय भविष्य दे सकते हैं. अपने आर्थिक परिवेश के अनुसार कोई घुमावदार दूर का रास्ता हमें चुनना पड़ सकता है तो भी लक्ष्य व दिशा तो स्वसामर्थ्य को बनाकर मजबूरियों से सदा के लिए बाहर आना यही होना चाहिए.

परंतु इतर तात्कालिक संकटों का तथा विश्व में चलने वाले आर्थिक उतार-चढ़ाव का परिणाम हमारी अर्थव्यवस्था पर कम से कम हो, इसलिए हमको मूल में जाकर विचार करना पड़ेगा. हमको हमारी अपनी दृष्टि से, हमारी अपनी आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर, हमारी अपनी जनता का रूप और परिवेश ध्यान में रखकर, हमारे अपने संसाधन और जन का विचार करते हुए, हमारी आकांक्षाओं को सफल साकार करने वाली अपनी आर्थिक दृष्टि बनाकर, अपनी नीति बनानी पड़ेगी. जगत का प्रचलित अर्थविचार कई प्रश्नों का उत्तर देने में असमर्थ है. उसके मानक भी कई प्रकार से अधूरे पड़ते हैं यह बात विश्व के अनेक अर्थतज्ञों के द्वारा ही सामने आ रही है. ऐसी अवस्था में कम से कम ऊर्जा का उपयोग करते हुए अधिकाधिक रोजगार पैदा करने वाली पर्यावरण के लिए उपकारक, हमको हर मामले में स्वनिर्भर बना सकने वाली तथा अपने बलबूते सारे विश्व के साथ हम अपनी शर्तों पर व्यापारी संबंध बनाएँ बढ़ाएँ रख सके, ऐसा सामर्थ्य हम में भरने वाली अपनी आर्थिक दृष्टि, नीति व व्यवस्था का निर्माण करने की दिशा में हमको कदम बढ़ाने ही पड़ेंगे.

यह स्व का विचार कर सकने में हम लोग स्वतंत्रता के इतने दशकों बाद भी कम पड़ रहे, इसके मूल में, योजनापूर्वक हम को गुलाम बनाने वाली शिक्षा का, जो प्रवर्तन गुलामी के काल में भारत में किया गया तथा स्वतंत्रता के बाद भी अभी तक हमने उसको जारी रखा है, यह बात ही कारण है. हमको अपने शिक्षा की रचना भी भारतीय दृष्टि से करनी पड़ेगी. विश्व में शिक्षा क्षेत्र में उत्कृष्ट गिने जाने वाले देशों की शिक्षा पद्धतियों का हम अध्ययन करते हैं, तो वहां भी इसी प्रकार से स्व आधारित शिक्षा ही उन-उन देशों की शैक्षिक उन्नति का कारण है, यह स्पष्ट दिखाई देता है. स्वभाषा, स्वभूषा, स्वसंस्कृति का सम्यक् परिचय तथा उसके बारे में गौरव प्रदान करने वाली कालसुसंगत, तर्कशुद्ध सत्यनिष्ठा, कर्तव्य बोध तथा विश्व के प्रति आत्मीय दृष्टिकोण व जीवों के प्रति करुणा की भावना देने वाली शिक्षा पद्धति हमको चाहिए. पाठ्यक्रम से लेकर तो शिक्षकों के प्रशिक्षण तक सब बातों में आमूलचूल परिवर्तन की आवश्यकता लगती है. केवल ढांचागत परिवर्तनों से काम बनने वाला नहीं है.

शिक्षा में इन सब बातों के अभाव के साथ हमारे देश में परिवारों में होने वाला संस्कारों का क्षरण व सामाजिक जीवन में मूल्य निष्ठा विरहित आचरण यह समाज जीवन में दो बहुत बड़ी समस्याएं उत्पन्न करने के लिए कारण बनता है. जिस देश में यह मातृवत्परदारेषु की भावना थी, महिलाओं के सम्मान की रक्षा के लिए रामायण महाभारत जैसे महाकाव्यों का विषय बनने वाले भीषण संग्राम हुए, स्वयं की मान रक्षा हेतु जौहर जैसे बलिदान हुए, उस देश में आज हमारी माता बहने न समाज में सुरक्षित न परिवार में सुरक्षित इस प्रकार की स्थिति का संकेत देने वाली घटनाएं घट रही है, यह हम सबको लज्जा का अनुभव करा देने वाली बात है. अपनी मातृशक्ति को हमको प्रबुद्ध, स्वावलंबनक्षम स्वसंरक्षणक्षम बनाना ही होगा. महिलाओं को देखने की पुरुषों की दृष्टि में हमारे संस्कृति के पवित्रता व शालीनता के संस्कार भरने ही पड़ेंगे.

बाल्यावस्था से ही घर के वातावरण से इस प्रशिक्षण का प्रारंभ होता है यह हम सब लोग जानते हैं. परंतु इसका नितांत अभाव आज के अणु परिवारों में दिखाई देता है. इसका और एक भयंकर लक्षण नई पीढ़ी में बढ़ने वाला नशीले पदार्थों के व्यसन का प्रमाण है. एक समय चीन जैसे सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध राष्ट्र की तरुणाई को भी व्यसनाधीन बनाकर विदेशी शक्तियों ने निःसत्त्व बना कर रख दिया था. ऐसे व्यसन के मोह से अलिप्त रहने की, सुशीलता की ओर झुकने वाली और मोह के वश ना होते हुए इन खतरों से दूर रहने की दृढ़ता वाली मानसिकता, घर में नहीं बनेगी तो, इससे व्यसन के प्रकोप को रोक पाना यह बहुत कठिन कार्य हो जाएगा. इस दृष्टि से संघ के स्वयंसेवकों सहित सभी अभिभावकों को सजग व सक्रिय होने की आवश्यकता है.

समाज में सर्वत्र अनुभव होने वाला आर्थिक तथा चारित्रिक भ्रष्ट आचरण भी मूल में इसी संस्कारहीनता के कारण उत्पन्न होता है. समय-समय पर इसको नियंत्रित करने के लिए कानून तो होते रहते हैं, कतिपय भ्रष्टाचारियों को कड़ा दंड दिया जाता है ऐसे उदाहरण भी स्थापित हो जाते हैं. परंतु ऊपर के स्तर पर हुए इस स्वस्थ स्वच्छ परिष्कार के नीचे सामान्य स्तर पर भ्रष्टाचार चलते चलता ही रहा है. और कहीं-कहीं वह इन उपायों को ही आश्रय बनाकर बढ़ रहा है, यह भी ध्यान में आता है. प्रामाणिक व्यक्ति तो इन कड़े कानूनों के पालन के चक्कर में कई कठिनाइयों में छटपटाते रहते हैं और जिनको विधि और शील की कोई परवाह नहीं ऐसे निर्लज्ज और उद्दंड लोग इन व्यवस्थाओं को चकमा देकर पनपते पलते रहते हैं. यह केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है. बिना श्रम या कम श्रम में व बिना अधिकार के अधिक पाने का लालच, कुसंस्कार के रूप में हमारे मन में पैठ कर बैठा है, यह ऐसे भ्रष्ट आचरण का मूल कारण है. सामाजिक वातावरण में, घरों में सब प्रकार के प्रबोधन से तथा अपने आचरण के उदाहरण से इस परिस्थिति को बदलना, यह देश के स्वास्थ्य व सुव्यवस्था के लिए एक अनिवार्य कर्तव्य बनता है.

समाज के प्रबोधन तथा समाज में वातावरण निर्माण करने में माध्यमों की बहुत बड़ी भूमिका हो सकती है. व्यापारिक दृष्टि से केवल मसालेदार व सनसनीखेज विषयों को उभारने के मोह से बाहर आकर, माध्यम भी इस वातावरण के निर्मिती में जुड़ जाए, तो यह कार्य और भी गति से हो सकता है.

अपने समाज के अंदर का वातावरण जैसे हम सभी सजग होकर उस वातावरण को स्वस्थ बनाये रखने की चिन्ता करने की आवश्यकता को अधोरेखांकित करता है वैसे ही संपूर्ण विश्व में विश्व के बाह्य पर्यावरण की समस्या मानव-समाज के व्यापक पहल की मांग कर रही है. पर्यावरण को स्वस्थ रखने के लिए बड़े नीतिगत उपायों की पहल तो सभी देशों की पर्यावरण नीति में उचित व समन्वित परिवर्तन लाने का विषय है व शासन से संबंधित विषय है. परन्तु जनसामान्यों के नित्य व्यवहार में छोटे-छोटे परिवर्तन की पहल भी इस दिशा में परिणामकारक हो सकती है. संघ के स्वयंसेवक इस क्षेत्र में ऐसे अनेक कार्य पहले से ही कर रहे हैं. उनके इन सारे प्रयासों को सुव्यवस्थित रूप देकर, समाज की गतिविधि के नाते आगे बढ़ाने का कार्य भी “पर्यावरण गतिविधि” नाम से प्रारम्भ हुआ है.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ गत 9 दशकों से समाज में एकात्मता व सद्भावना, सदाचरण व सद्व्यवहार तथा इस राष्ट्र के प्रति स्पष्ट दृष्टि व भक्ति उत्पन्न करने का कार्य कर रहा है. संघ के स्वयंसेवकों के सेवा भावना व समर्पण के बारे में देश में सर्वत्र आस्था जगी है ऐसा अनुभव आता है. परंतु अभी तक संघ के संपर्क में न आए हुए वर्गों में संघ के प्रति अविश्वास, भय व शत्रुता उत्पन्न हो, ऐसा प्रयास किया जाता है. संघ हिन्दू समाज का संगठन करता है इसका अर्थ वह अपने आप को हिन्दू न कहनेवाले समाज के वर्गों, विशेषकर मुस्लिम व ईसाइयों से शत्रुता रखता है, यह नितान्त असत्य व विपर्यस्त प्रचार चलता है. हिन्दू समाज, हिन्दुत्व इनके बारे में अनेक प्रमाणहीन, विकृत आरोप लगाकर उनको भी बदनाम करने का प्रयास चलता ही आया है. इन सब कुचक्रों के पीछे हमारे समाज का निरंतर विघटन होता रहे, उसका उपयोग अपने स्वार्थलाभ के लिये हों, यह सोच काम कर रही है. यह बात अब इतनी स्पष्ट है कि जानबूझकर आँखें बंद कर रखनेवालों को ही वह समझ में नहीं आती.

संघ की अपने राष्ट्र के पहचान के बारे में, हम सबकी सामूहिक पहचान के बारे में, हमारे देश के स्वभाव की पहचान के बारे में स्पष्ट दृष्टि व घोषणा है, वह सुविचारित व अडिग है, कि भारत हिंदुस्थान, हिंदू राष्ट्र है. संघ की दृष्टि में हिंदू शब्द केवल अपने आप को हिंदू कहने वालों के लिए नहीं है. जो भारत के हैं, जो भारतीय पूर्वजों के वंशज है तथा सभी विविधताओं का स्वीकार सम्मान व स्वागत करते हुए आपस में मिलजुल कर देश का वैभव तथा मानवता में शांति बढ़ाने का काम करने में जुट जाते हैं वे सभी भारतीय हिंदू हैं. उनकी पूजा, उनकी भाषा, उनका खानपान, रीति रिवाज, उनका निवास स्थान, कोई भी होने से इसमें अंतर नहीं आता. सामर्थ्यसम्पन्न व्यक्ति व समाज निर्भय होते हैं. ऐसे सामर्थ्यसम्पन्न लोग चारित्र्यसम्पन्न हो तो और किसी को भयभीत भी नहीं करते. दुर्बल लोग ही स्वयं की असुरक्षितता के भय के कारण अन्यों को भय दिखाने का प्रयास करते हैं. संघ सम्पूर्ण हिन्दू समाज को ऐसा बलसम्पन्न तथा सुशील व सद्भावी बनाएगा, जो किसी से न डरेंगे, न किसी को डरायेंगे, बल्कि दुर्बल व भयग्रस्त लोगों की रक्षा करेंगे.

इस हिंदू शब्द के बारे में एक भ्रमपूर्ण धारणा, उसको एक संप्रदाय के चैखट में बंद करने वाली कल्पना, अंग्रेजों के जमाने से हमारा बुद्धि भ्रम कर रही है. इसके चलते इस शब्द का स्वीकार न करने वाला वर्ग भी समाज में है. वे अपने आप के लिए भारतीय शब्द का उपयोग करते हैं. भारतीय स्वभाव, भारतीय संस्कृति के आधार पर चलने वाली सभ्यताओं को कुछ लोग अंग्रेजी में ‘इंडिक’ इस शब्द से संबोधित करते हैं. संघ के लिए इन शब्दों का पर्यायी उपयोग भी, जो हिंदू शब्द को भय या भ्रमवश नकारते हैं उनके लिए मान्य है. शब्द अलग होने से, पंथ संप्रदाय पूजा अलग होने से, खानपान रीति रिवाज अलग होने से, रहने के स्थान अलग-अलग होने से, प्रांत या भाषा अलग होने से, हम समाज के वर्गों को एक दूसरे से अलग नहीं मानते. इन सब को अपना मान कर ही संघ का काम चलता है. हमारा यह अपनत्व, जोड़नेवाली भावना ही राष्ट्रभावना है. वही हिन्दुत्व है. हमारे इस प्राचीन राष्ट्र का, कालसुसंगत परमवैभवसम्पन्न रूप प्रत्यक्ष साकार करने का भव्य लक्ष्य, इसकी धर्मप्राण प्रकृति व संस्कृति का संरक्षण संवर्धन ही इस अपनत्व का केन्द्र व लक्ष्य है.

विश्व को भारत की नितान्त आवश्यकता है. भारत को अपनी प्रकृति; संस्कृति के सुदृढ़ नींव पर खड़ा होना ही पड़ेगा. इसलिये राष्ट्र के बारे में यह स्पष्ट कल्पना व उसका गौरव मन में लेकर समाज में सर्वत्र सद्भाव, सदाचार तथा समरसता की भावना सुदृढ़ करने की आवश्यकता है. इन सभी प्रयासों में संघ के स्वयंसेवकों की महती भूमिका है व रहेगी. इसके लिए उपयोगी अनेक योजनाओं को यशस्वी करने के लिए संघ के स्वयंसेवक प्रयासरत हैं. प्रत्येक स्वयंसेवक को ही समय की चुनौती को स्वीकार कर कार्यरत होना होगा.

परन्तु यह समय की आवश्यकता तभी समय रहते पूर्ण होगी जब इस कार्य का दायित्व किसी व्यक्ति या संगठन पर डालकर, स्वयं दूर से देखते रहने का स्वभाव हम छोड़ दें. राष्ट्र की उन्नति, समाज की समस्याओं का निदान तथा संकटों का उपशम करने का कार्य ठेके पर नहीं दिया जाता. समय-समय पर नेतृत्व करने का काम अवश्य कोई न कोई करेगा, परंतु जब तक जागृत जनता, स्पष्ट दृष्टि, निःस्वार्थ प्रामाणिक परिश्रम तथा अभेद्य एकता के साथ वज्रशक्ति बनकर ऐसे प्रयासों में स्वयं से नहीं लगती, तब तक संपूर्ण व शाश्वत सफलता मिलना संभव नहीं होगा.

इसी कार्य के लिए समाज में वातावरण बना सकनेवाले कार्यकर्ताओं का निर्माण संघ करता है. उन कार्यकर्ताओं द्वारा समाज में चलनेवाले क्रियाकलाप व उनके परिणाम आज यह सिद्ध कर रहे हैं कि हम, हमारा कुटुंब, हमारा यह देश तथा विश्व को सुखी बनाने का यही सुपंथ है.

आप सभी को यह आवाहन है कि सद्य समय की इस आवश्यकता को अच्छी तरह संज्ञान में लेते हुए हम सब इस भव्य व पवित्र कार्य के सहयोगी बनें.

“युगपरिवर्तन की बेला में, हम सब मिलकर साथ चलें

देशधर्म की रक्षा के हित, सहते सब आघात चलें

मिलकर साथ चलें,  मिलकर साथ चलें..”

.. भारत माता की जय..

बुधवार, 2 अक्तूबर 2019

हिन्दू महात्मा गांधी - अरविन्द सिसौदिया





- गांधी जयंती !

हिन्दू महात्मा गांधी को स्थापित करनें की जरूरत है - अरविन्द सिसौदिया

जवाहरलाल नेहरू और कांग्रेस ने जिस महात्मा गांधी को सामनें रखा वह महात्मा गांधी थे ही नहीं । महात्मा गांधी ने तो शुद्ध रूप से रघुपति राघव राजा राम गाया था और रामराज्य की कल्पना की थी। महात्मा गांधी तो सनातन महात्मा गांधी थे, हिन्दू महात्मा गांधी थे भारतीय संस्कृित को आगे रख कर चलने वाले महात्मा गांधी थे। श्रीराम, अहिंसा, सत्य, मानवता, रामराज्य और क्षमा हिन्दू संस्कृति से ही उन्होने लिये थे । गीता उनको सबसे प्रिय थी। उनकी 150 जयंती पर हिन्दू महात्मा गांधी को स्थापित कर उन्हे सच्ची श्रृद्धांजल दी जानी चाहिये।

मंगलवार, 17 सितंबर 2019

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी दीर्घायु हों - अरविन्द सिसौदिया







https://www.youtube.com/watch?v=0xwiBM0Pldg

 प्रधानमंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी जी को जन्मदिवस की कोटि-कोटि शुभकामनाएं - अरविन्द सिसौदिया

सोमवार, 2 सितंबर 2019

’मतदाता सत्यापन कार्यक्रम’ से अवश्य जुडें - अरविन्द सिसौदिया







प्रत्येक मतदाता के नाम का सत्यापन होगा
1 जनवरी 2020 को 18 वर्ष पूर्ण करने वाले भी अपना नाम जुडवा सकेगें
’’मतदाता सत्यापन कार्यक्रम’’ प्रारम्भ, वोटरसूची में अपना - अपना नाम सत्यापन अवश्य करवायें - अरविन्द सिसौदिया

1 सितम्बर, कोटा। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार 01 सितंबर से 30 सितंबर 2019 तक मतदाता सूची सत्यापन का कार्य प्रारम्भ हो चुका हे। वर्तमान में मौजूद सभी नामों का सत्यापन किसी अन्य दस्तावेज के साथ किया जायेगा। भाजपा के जिला महामंत्री अरविन्द सिसौदिया ने बताया कि सत्यापन कार्यक्रम के अंतर्गत फोटोयुक्त निर्वाचक नामावली में मौजूदा मतदाताओं ने नामों का सत्यापन बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर किया जाएगा। उन्होने कहा अपना और अपने परिवार के नामों की सुनिश्चितता के लिये स्वंय प्रेरणा से तय दस्तावेजों से नाम अवश्य सत्यापित करवाना चहिये। उन्होने बताया कि आयोग द्वारा इस हेतु 7 अधिकृत किये गये दस्तावेजों में भारतीय पासपोर्ट, ड्राइविंग लाईसेंस, आधार, राशनकार्ड, सरकारी-अर्द्ध सरकारी कर्मियों को जारी पहचान पत्र, बैंक की पासबुक, किसान पहचान पत्र आदि में से किसी एक के साथ किया जा रहा है। सीसौदिया ने आव्हान किया है कि सभी नागरिकों को, राजनैतिक एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं को मतदाता सत्यापन कार्य में बढ़-चढ़ कर भाग लेना चाहिये और मतदाता सूची शुद्ध व सही बनानें में सहयोग करना चाहिये। महामंत्री ने बताया कि सत्यापन में बोगस, डुप्लीकेट, मृतक, शिटेड आदि मतदाताओं के नाम पुनरीक्षित कर पात्र वास्तविक मतदाता के नाम को ही निर्वाचक नामावली में सम्मिलित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस हेतु मतदाताओं द्वारा स्वंय भी एनवीएसपी “ राष्ट्रीय मतदाता सेवा पोर्टल” पर अपना सत्यापन आनलाइन करवा सकतें है। उन्होनें बताया कि इस कार्यक्रम के अन्तर्गत सभी मतदाता स्वयं आयोग द्वारा ’वोटर हेल्पलाइन’ मोबाईल एप, एनवीएसपी पोर्टल एवं अपने - अपने क्षेत्रों में संचालित होने वाले ई-मित्र, कामन सर्विस सेंटर (सीएससी ) तथा निर्वाचक पंजीकरण कार्यालय में मतदाता सुविधा केन्द्र के माध्यम से मतदाता सूची में अपनी ￧प्रविष्ठियांे का सत्यापन आयोग द्वारा इस हेतु अधिकृत किय गये दस्तावेजों के साथ करवा सकेंगे।
उन्होंने बताया कि यदि मतदाता सूची की किसी भी प्रविष्टि में संशोधन भी निर्धारित प्रपत्र से आनलाइन आवेदन पत्र भरकर प्रस्तुत कर सकेंगे। मतदाता सत्यापन कार्यक्रम के दौरान मतदाताओं द्वारा परिवार के सदस्यों की प्रविष्ठियां का सत्यापन भी किया जा सकेगा। ऐसे पात्र मतदाता जिनका संदर्भ तिथि 1 जनवरी-2020 के सदर्भ में मतदाता सूची में पंजीकरण नहीं किया गया है के द्वारा भी निर्धारित प्रपत्र में आवेदन किया जा सकेगा। अभियान के दौरान प्रयुक्त होने वाले विभिन्न आवेदन फार्म 6,7,8 एवं 8ए की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित आयोग द्वारा की गई है । बीएलओ द्वारा घर-घर सत्यापन के दौरान एवं मतदान केन्द्रों पर आयोजित किये जाने वाले विशेष शिविरों में इनका प्रयोग किया जायेगा।
- अरविन्द सिसौदिया, जिला महामंत्री भाजपा कोटा। 9414180151

गुरुवार, 29 अगस्त 2019

कांग्रेस गद्दार, उसे वोट देना पाप है - अरविन्द सिसौदिया





कांग्रेस गद्दार पार्टी, उसे वोट देना पाप है - अरविन्द सिसौदिया
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधाी ने , अपने बयानों के द्वारा पाकिस्तान की पूरी पूरी मदद की और कश्मीर पर झूठ फैलानें का काम स्वंय किया है। जनता में वह गद्दार पार्टी मानी जानें लगी है। तीन बडे राज्यों के विधानसभा चुनाव सामनें हैं। मध्यप्रदेश और राजस्थान में पालिका और पंचायतीराज चुनाव सामनें है। इन चुनावों में जनता से वोट ठगनें के लिये राहुल ने यूटर्न लिया है। राहुल का यह बयान मात्र छल है। वोट ठगनें की राजनीति है।
- अरविन्द सिसौदिया, जिला महामंत्री भाजपा, कोटा।

शुक्रवार, 23 अगस्त 2019

क्या वंश पूछते हो, श्रीराम मय जो पूरा देश है - अरविन्द सिसौदिया







12 अग॰ 2019 को प्रीमियर हुआ था
**** क्या वंश पूछते हो,भगवान श्रीराम मय जो पूरा देश है - अरविन्द सिसौदिया
*** अनुसंधान हो - श्रीराम के वंशज सीसौदिया, सिकरवार बडगूजर गुहिल भी हें
*** सूर्यवंशी भगवान श्रीराम और माता जानकी की कोख से जन्में "लव" के वंशज पूरे भारत में फैले हुये हैं। मेवाड श्रीराम के पुत्र लव के वंशजों का ही है। गुहिल , सीसौदिया, सिकरवार और बड गूजर लव के वंशज ही है। लव ने लाहौर बसाई थी । बाद में गुजरात और फिर मेवाड पर उनके वंशजों का शासन हुआ। लेकिन पश्चिमी भारत की अशांत और संघर्षशील सीमाओं के कारण कोई बडे दस्तावेजी सबूत मिलना मुस्किल है। किन्तु स्मृतियों,जागाओं और संस्कृत साहित्य इस बात का गवाह है कि श्रीराम के एक मात्र पुत्र लव थे ! वाल्मीकी जी ने कुशा से कुश को बनाया था और कुश को भी पुत्रवत सम्मान ही प्राप्त था। इन दानों पुत्रों को राज्य दिया गया था तथा उनकी वंश परम्परा समस्त भारत में फैली हुई हे।
- अरविन्द सिसौदिया,जिला महामंत्री भाजपा कोटा !!!
भाजपा कोटा संभाग मीडिया प्रभारी ! 9414180151 / 9509559131

कांग्रेस आराजकता उत्पन्न करना चाहती है - अरविन्द सिसौदिया





14 अग॰ 2019 को प्रीमियर हुआ था
कांग्रेस आराजकता उत्पन्न करना चाहती है - अरविन्द सिसौदिया
कांग्रेस पाकिस्तान परस्ती के लिये माफी मांगे - अरविन्द सिसौदिया
काँग्रेस महासचिव प्रियंका वाड्रा ने कहा कि “ कश्मीर से धारा 370 हटाना असंवैधानिक है “। काँग्रेसी के क्रूर नेता मणिशंकर अय्यर ने कहा कि “ कश्मीर अब फलस्तीन बनके रहेगा“। मतलब कश्मीर में खून-खराबे की काँग्रेस की पाकिस्तान से मिल कर मुकम्मल योजना है। काँग्रेस के महाज्ञानी नेता पी. चिदम्बरम् ने साम्प्रदायिक राग अलापते हुये कहा कि “ मुस्लिम-बहुल होने के कारण ही भगवा सरकार ने धारा 370 हटाई, कश्मीर यदि हिन्दू-बहुल होता तो धारा 370 कभी न हटती ।“ चिदम्बरम् यह बताना भूल गए कि यदि कश्मीर हिन्दू-बहुल होता तो धारा 370 लगती ही नहीं। फिर कल ही काँग्रेस के लगभग मुख्य नेता दिग्विजय सिंह बोले कि “ भाजपा ने 370 हटाकर अपने हाथ जला लिए, अब कश्मीर भारत से अलग हो जाएगा ।“. मतलब कांग्रेस अब कश्मीर पाकिस्तान को सौंप कर ही मानेंगे।“ कुल मिला कर कांग्रेस देश को संकअ में डालनें पर आमादा है।
इसके पूर्व संसद में धारा 370 पर चर्चा के दौरान काँग्रेस के अधीर रंजन चैधरी, मनीष तिवारी, दिग्विजय सिंह और चिदम्बरम् वगैरह ने वो सब कुछ कहा जो कश्मीर पर पाकिस्तान कहता रहा है। अधीर रंजन चैधरी ने तो कश्मीर को यूएन का मसला तक बता दिया, जिसमें भारत बिना यूएन की अनुमति के कुछ नहीं कर सकता३ राज्यसभाक् में तो काँग्रेसियों ने विरोध में लगातार हुल्लड़ और नारेबाजी की। समूचा प्रकरण संसद में मौजूद काँग्रेस आलाकमान द्वारा प्रायोजित और समर्थित था। काँग्रेस कार्यसमिति की मीटिंग छोड़कर बाहर आये राहुल गांधी ने पत्रकारों को झूठा बयान दिया कि “ कश्मीर हिंसा में जल रहा है, लोग सेना द्वारा मारे जा रहे हैं, स्थिति बहुत गंभीर है।“
काँग्रेस कश्मीर को सेना द्वारा बना दिया गया नाजी कैम्प तक बता रही है । इसके पहले भी कांग्रेसी मणिशंकर अय्यर और कांग्रेसी सलमान खुर्शीद मोदी सरकार को हटाने के लिए पाकिस्तान मदद माँगने गए थे। भारत भर के लोग हतप्रभ हैं कि देश को आजादी दिलाने और राष्ट्रनिर्माता होने का दावा करने वाली काँग्रेस एका एक पाकिस्तान की प्रवक्ता कैसे बन गई। वह पाकिस्तान की राजनैतिक पार्टी की तरह कैसे व्यवहार कर रही है। लेकिन सच तो यह है कि काँग्रेस वैसी ही है जैसे सत्तर साल पहले थी। देश की जनता ही इतने दशकों तक काँग्रेस से भ्रमित रही और देश गर्त में जाता रहा। भड़काकर धारा 370 और 35 ए को पुनर्जीवित करने की अघोषितनीति से काम कर रहीं हे। जिसे कभी देश सफल नहीं होनें देगा।