आरक्षण हड़पने की साजिश में रत है कांग्रेस - अरविन्द सिसोदिया bjp rajasthan kota

*चाचा नेहरु के चुनावी किस्से –*
पाकिस्तान के दवाब में नेहरु ने मुसलमानों को फुल फ्लैश आरक्षण देने पूरा प्लान तैयार कर लिया था ! 
नेहरु मुसलमानों को नौकरियों के साथ-साथ चुनावों में भी आरक्षण देने का ब्लू प्रिंट तैयार कर चुके थे ! नेहरु का मुस्लिम चुनावी आरक्षण का प्लान ये था कि – *इस देश में कई मुस्लिम सीट बनाईं जाएंगी, जिन पर सिर्फ मुस्लिम उम्मीदवार खड़ा होगा और वोट डालने का अधिकार भी सिर्फ मुसलमान को होगा... यानी सिर्फ मुसलमानों द्वारा मुसलमान प्रतिनिधि चुना जाएगा... पंचायत से लेकर लोकसभा तक !*

जब ताजा लोकसभा चुनाव में ओबीसी कोटे में मुस्लिम आरक्षण को लेकर पीएम मोदी ने कांग्रेस पर हमला बोला है, तब से इस पर नया विवाद शुरु हो गया है... तो आइये इसकी जड़ समझने के लिये सीधे चलते हैं नेहरु के दौर में...

तो बात 1949 की है... पूर्वी पाकिस्तान यानी आज के बांग्लादेश में हिंदू विरोधी दंगे अपने पूरे उफान पर थे। करीब पांच लाख बंगाली हिंदुओं का नरसंहार कर दिया गया। वहीं करीब पचास लाख बंगाली हिंदू जान बचाकर हमेशा-हमेशा के लिए पश्चिम बंगाल आ गये। पूरे देश में पाकिस्तान के खिलाफ सख्त एक्शन लेने की मांग हो रही थी। लेकिन शांति के मसीहा नेहरू के दिमाग में कुछ और ही चल रहा था। उन्होने ब्रिटिश सरकार के दबाव में पाकिस्तान से युद्ध के बजाय बातचीत का रास्ता चुना।

तो फिर क्या था... 1950 के मार्च महीने के आखिर हफ्ते में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री लियाकत अली खान दिल्ली पहुंचे और नेहरू के साथ उनकी बातचीत के दौर शुरु हो गये। इस बातचीत का मुद्दा ये था कि दोनों देश अपने-अपने अल्पसंख्यकों को किस तरह से सुरक्षा दे सकते हैं। इस बातचीत में लियाकत अली ने नेहरू से कहा कि वो भारत में मुसलमानों के लिए आरक्षण की व्यवस्था करें। हैरत की बात है कि इस बेहूदा मांग पर नेहरू पूरी तरह से तैयार हो गये। बकायदा समझौते का एक ड्रॉफ्ट भी तैयार हो गया जिसमें भारत में मुसलमानों को नौकरी और चुनावों में आरक्षण देने का वादा किया गया था। अब इसके बाद इस कांड में आया एक नया मोड़...

नेहरू जब इस ड्रॉफ्ट को लेकर कैबिनेट की बैठक में पहुंचे तो उसके बाद क्या हुआ इसका जिक्र किया है बैठक में मौजूद तत्कालीन पीडब्लूडी मंत्री एन.वी. गाडगिल ने... वो अपनी मशहूर किताब Government From Inside में लिखते हैं कि -

"ठीक 10 बजे नेहरू ने कैबिनेट के सामने लियाकत अली के साथ अपने समझौते का एक ड्रॉफ्ट रखा। मुझे इस बात का यकीन नहीं था कि इस ड्रॉफ्ट पर सरदार पटेल से सहमति ली गई थी या नहीं। समझौते के अंतिम दो पैराग्राफ में भारत के सभी राज्यों की नौकरियों और प्रतिनिधि निकायों (*सभी चुनावों में) में मुसलमानों को उनकी आबादी के अनुपात में आरक्षण देने का वादा किया गया था। केंद्र सरकार की नौकरियों के लिए भी यही प्रावधान रखे गये थे। हम सभी मंत्रियों को ड्रॉफ्ट की एक-एक कॉपी दे दी गई थी लेकिन किसी ने अपना मुंह नहीं खोला। तब मैंने कहा कि – ‘ये दो पैराग्राफ कांग्रेस की पूरी विचारधारा के खिलाफ हैं। मुसलमानों के लिये अलग से सीट स्वीकार करने की वजह से देश को विभाजन की कीमत चुकानी पड़ी। आप हमें फिर से वही ज़हर पीने को कह रहे हैं। ये एक विश्वासघात है, पिछले चालीस वर्षों के इतिहास को भुला दिया गया है।’"

कैबिनेट की बैठक में मुसलमानों को आरक्षण देने वाले ड्राफ्ट का एन.वी. गाडगिल ने सख्त विरोध किया, इसके बाद कैबिनेट की बैठक में क्या हआ जानते हैं खुद एनवी गाडगिल के शब्दों में वो अपनी किताब आगे लिखते हैं –

"मेरे विरोध की वजह से नेहरू नाराज थे लेकिन बाकी मंत्री खुश थे। फिर भी उनमें से किसी ने भी मेरा समर्थन करने की हिम्मत नहीं की। आधे घंटे तक चली चर्चा के बाद मंत्री गोपालस्वामी अयंगर ने कहा कि – ‘गाडगिल की आपत्तियों में दम है’ और उन्होने समझौते के आखिरी दो पैराग्राफ फिर तैयार करने का काम अपने हाथ में ले लिया। इस पर नेहरू ने गुस्से में जवाब दिया कि - ‘मैंने लियाकत अली खान के साथ इस शर्त पर अपनी सहमति व्यक्त की है।‘ तब मैंने उन्हे जवाब दिया कि – ‘आपने उन्हें ये भी बताया होगा कि कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही समझौते को अंतिम रूप दिया जाता है। मैं अन्य कैबिनेट सदस्यों के बारे में तो नहीं कह सकता लेकिन मैं इसका सौ फीसदी विरोध करता हूं।’ इस पर सरदार पटेल ने चुपचाप सुझाव दिया कि चर्चा अगले दिन के लिए स्थगित कर दी जाए और बैठक स्थगित कर दी गई।"

गाडगिल अपनी किताब में आगे लिखते हैं कि उसी रात सरदार पटेल ने उन्हे ये जानकारी दी कि गोपालस्वामी आयंगर ने समझौते के ड्राफ्ट में बदलाव कर दिया है। लिहाज़ा जब अगले दिन मंत्रिमंडल की बैठक हुई तो अंतिम दो पैराग्राफों को हटा दिया गया था। इस तरह सरदार पटेल की समझदारी और एन.वी. गाडगिल की बगावत की वजह से मुसलमानों को आरक्षण देने का नेहब रू का सपना चकनाचूर हो गया।
*समझे न... ये गेम बहुत पुराना है !*

टिप्पणियाँ

इन्हे भी पढे़....

माननीय इन्द्रेश कुमार जी indresh kumar rss

"आदमी की औकात " - जैन मुनि तरुण सागर जी महाराज

राष्ट्रवाद के महानायक ‘ पूज्य श्री गुरूजी ’ The great hero of nationalism 'Pujya Shri Guruji'

राजपूतो की शान रोहणी ठिकाना : सिर कटने के बाद भी लड़ने वाले वीरों की कहानी

छत्रपति शिवाजी : सिसोदिया राजपूत वंश

तेरा वैभव अमर रहे माँ, हम दिन चार रहें न रहे।

सेंगर राजपूतों का इतिहास एवं विकास

भारत का बड़ा भू भाग बचाने वाले : डा. श्यामाप्रसाद मुखर्जी Dr Shyama Prasad mukhrji

राजस्थान के व्याबर जिले में देवमाली गांव,कैंसर का 'झाड़ा'

माँ बाण माता : सिसोदिया वंश की कुलदेवी