कविता - अब वोट बैंक के चक्कर में देश ने झुकना छोड़ दिया

कविता - अब वोट बैंक के चक्कर में देश ने झुकना छोड़ दिया

अब वोट बैंक के चक्कर में देश ने झुकना छोड़ दिया,
बहुत हुई जो बर्बादी थी, मोदीजी ने मिथक तोड़ दिया।

वर्षों से जो डर का साया सीमाओं पर छाया था,
दुश्मन की हर काली चाल पर बस मौन ही पाया था,
अब सिंहनाद गूंजा ऐसा, हर भ्रम का सिर फोड़ दिया,
मोदीजी ने साहस से इतिहास नया मोड़ दिया।
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देश की सुरक्षा सर्वोपरि है — यह मंत्र उन्होंने दिया,
भारत पहले, भारत सर्वोच्च — यह संकल्प स्पष्ट किया।
कल तक जो देते थे धमकी, उनका अभिमान तोड़ दिया,
दृढ़ नेतृत्व की शक्ति से हर संकट को मोड़ दिया।
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विश्व पटल पर भारत का गौरव ऊँचा हो गया,
स्वाभिमान का दीपक फिर से घर-घर में रोशन हो गया।
विकास और विश्वास का रथ आगे बढ़ता जा रहा,
मोदीजी के नेतृत्व में भारत नित नित निखरता जा रहा।
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अब वोट बैंक की राजनीति का दौर सिमटता गया ,
राष्ट्रधर्म की ज्योति से  धमकियों का अंधियारा मिट गया ।
बहुत हुई बर्बादी पहले, अब नवयुग से देश संवर गया ,
मोदीजी ने दृढ़ संकल्प से, नवोदय का सूर्य चमक रहा।
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अब वोट बैंक के चक्कर में देश ने झुकना छोड़ दिया,
बहुत हुई जो बर्बादी थी, मोदीजी ने मिथक तोड़ दिया।

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