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1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद 54 भारतीय सैनिक लापता हैं, जिन्हें अक्सर 'मिसिंग 54' (Missing 54) कहा जाता है। माना जाता है कि ये सैनिक पाकिस्तानी जेलों में युद्धबंदी (PoW) के रूप में बंद हैं। वर्षों के बीत जाने और परिजनों के संघर्ष के बावजूद, इन सैनिकों की वापसी अब भी एक अनसुलझी पहेली और बड़ा कूटनीतिक मुद्दा है।
1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के गुमनाम नायकों में से एक, मेजर अशोक कुमार सूरी (Major Ashok Kumar Suri) की कहानी वीरता, बलिदान और अंतहीन इंतज़ार की एक मार्मिक गाथा है। वे उन 54 भारतीय युद्धबंदियों (POWs) में से एक थे, जो युद्ध के बाद भी पाकिस्तान की जेलों में रह गए, लेकिन भारत कभी वापस नहीं लौटे। मेजर अशोक कुमार सूरी हरियाणा के फरीदाबाद के रहने वाले थे। वे 5 असम बटालियन (Assam Regiment) में कमीशंड ऑफिसर थे और बेहद बहादुर और खेल प्रेमी (विशेषकर हॉकी) अधिकारी थे। 1971 के युद्ध के दौरान, वे चम्ब सेक्टर (पश्चिमी मोर्चे) में तैनात थे। बटालियन क्वार्टर मास्टर के रूप में, उन्होंने मुन्नवर और तवी नदी के पास 191 इन्फैंट्री ब्रिगेड की अग्रिम रक्षा पंक्तियों में गोला-बारूद और रसद पहुँचाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली थी। 2 दिसंबर 1971 को, जब युद्ध की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई थी, तब वे अपने काफिले के साथ मुन्नवर क्षेत्र में पाकिस्तानी गोलाबारी के बीच भारतीय सैनिकों की सहायता कर रहे थे। इसके बाद वे लापता हो गए, और शुरू में उन्हें "एक्शन में शहीद" (Killed in action) बताया गया था!लेकिन,जनवरी 1972 में, रेडियो लाहौर के 'पंजाबी दरबार' कार्यक्रम में मेजर सूरी का नाम जीवित कैदियों की सूची में लिया गया था।26 दिसंबर 1974 को, मेजर सूरी के पिता को अपने बेटे के हाथ से लिखा एक पत्र मिला, जिस पर 7 दिसंबर 1974 की तारीख थी। इसमें लिखा था, "मैं यहाँ ठीक हूँ।" यह पत्र एक रिहा हुए कैदी के माध्यम से दिल्ली पहुंचा था।सबूतों के बाद भारत सरकार ने उनका स्टेटस "शहीद" से बदलकर "युद्धबंदी (Missing in Action)" कर दिया था। कई खुफिया रिपोर्टों और अन्य कैदियों ने बताया कि उन्हें कोट लखपत जेल और अन्य पाकिस्तानी जेलों में देखा गया था।
मेजर सूरी के पिता ने "मिसिंग डिफेंस पर्सनल रिलेटिव्स एसोसिएशन (MDPRA)" का नेतृत्व किया। उन्होंने आजीवन अपने बेटे के लौटने का इंतज़ार किया, लेकिन वे 54 लापता सैनिकों में से एक थे जिन्हें पाकिस्तान ने कभी वापस नहीं लौटाया गया!
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