हिंदू और हिंदुत्व की सुरक्षा, अस्तित्व का यक्ष-प्रश्न; इसे नकारा नहीं जा सकता - अरविन्द सिसोदिया



गहलोत तुष्टिकरणवादी राजनीति के "नो चांस" राजनेता हैं - अरविन्द  सिसोदिया 

हिंदू और हिंदुत्व की सुरक्षा, अस्तित्व का यक्ष-प्रश्न; इसे नकारा नहीं जा सकता - अरविन्द सिसोदिया

कोटा, 30 मार्च। राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी अरविन्द सिसोदिया ने कांग्रेस नेता अशोक  गहलोत के बयान पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि “हिंदू और हिंदुत्व की सुरक्षा कोई वैकल्पिक विषय नहीं, बल्कि राष्ट्र और संस्कृति के अस्तित्व का यक्ष-प्रश्न है। हिंदू अपने राजनैतिक और सामाजिक अधिकारों और सुरक्षा के लिए जागरूक हो रहा है। हिंदू युवाशक्ति अपनी एकजुटता के प्रति दृढ़ हुई है।अब फूट डालो राज करो का छल कपट नहीं चलेगा। ”

उन्होंने कहा कि “जिस तरह से बाहरी घुसपैठ और जनसंख्या विस्फोट के माध्यम से क्षेत्रीय जनसांख्यिकीय परिवर्तन के प्रयास हो रहे हैं, ये हिंदुत्व के विरुद्ध ही षड्यंत्रपूर्ण हमला है। किंतु कांग्रेस और उसके नेता इस सच्चाई को जानबूझकर वोट बैंक को खुश करने के लिए नकारते रहते हैं, क्योंकि उनकी राजनीति ही हिंदू विरोध और तुष्टिकरण पर टिकी हुई है।”

सिसोदिया ने दो टूक कहा कि “ गहलोत का यह कहना कि ‘हिंदू कभी खतरे में नहीं रहा’, भारत के इतिहास के घावों पर नमक छिड़कने जैसा है। 500 साल के मुगल शासन और 250 साल की अंग्रेजी हुकूमत के दौरान हिंदू समाज ने जो खोया, उसे भुलाया नहीं जा सकता।” उन्होंने कहा कि “गहलोत और कांग्रेस मंदिरों का विध्वंस, जबरिया धर्मांतरण, जबरिया अतिक्रमण, सांस्कृतिक दमन और सामाजिक आघात पर आततायियों को क्लीन चिट नहीं दे सकते। वोट बैंक के लिए कांग्रेस और गहलोत इन सच्चाइयों से मुँह मोड़कर देश को गुमराह करने की कोशिश कर रही है।”

सिसोदिया ने कहा कि “गहलोत का हालिया बयान न सिर्फ तथ्यहीन है, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था और इतिहास के सत्य का अपमान भी है। उन जैसे अस्तित्व खो चुके नेता अपने राजनीतिक अस्तित्व को बचाने और तुष्टिकरणवादी कांग्रेस हाईकमान को खुश करने के लिए इस तरह के बयान देते रहते हैं।”

सिसोदिया ने आगे कहा कि “लोकतंत्र, सरकार और स्वतंत्र संस्थाओं का संवैधानिक अस्तित्व है; ये किसी दल के कारण नहीं हैं, बल्कि इनकी संवैधानिक स्थिति से है। वे अपना काम कर रही हैं। किन्तु बयानबाजी से उन्हें रोकने और धमकाने में कांग्रेस ही सक्रिय रहती है।” उन्होंने कहा कि “कांग्रेस ने ही आपातकाल लगाकर देश के लोकतंत्र और संवैधानिक व्यवस्थाओं का हरण किया था, जिसमें गहलोत भी सहभागी रहे हैं। आज जब जांच एजेंसियाँ विधिविरुद्ध कृत्यों और भ्रष्टाचार पर कार्रवाई कर रही हैं, तो कांग्रेस को दर्द हो रहा है।”


शिक्षा के मुद्दे पर सिसोदिया ने कांग्रेस को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि “गहलोत केरल की शिक्षा की बात करते हैं, लेकिन राजस्थान को शिक्षा में दशकों तक पीछे रखने के लिए जिम्मेदार तो कांग्रेस ही रही है। दशकों तक सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस ने राजस्थान को शैक्षणिक रूप से सशक्त करने के बजाय केवल वोट बैंक की राजनीति की।”


उन्होंने कहा कि “कांग्रेस की राजनीति का मूल आधार ही भ्रम फैलाना, समाज को बाँटना, भ्रष्टाचार का संरक्षण करना और अपनी विफलताओं को छिपाना है। लेकिन अब देश की जनता, खासकर युवा, इस राजनीति को समझ चुकी है। आने वाले समय में कांग्रेस को इन झूठे और भ्रामक बयानों की भारी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ेगी।”

अंत में सिसोदिया ने कहा कि “यह विचारधारा की लड़ाई है। देश की जनता ने देश को बाँटने वालों को साइडलाइन किया है। एक तरफ राष्ट्रवाद, संस्कृति और सच्चाई है, और दूसरी तरफ तुष्टिकरण, भ्रम और सत्ता के लिए कुछ भी करने की ओछी राजनीति। देश की जनता तय कर चुकी है कि वह किसके साथ खड़ी है। गहलोत और कांग्रेस के लिए फिलहाल ‘नो चांस’ है।”


भवदीय
अरविन्द सिसोदिया
9414180151

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