RSS/RAW पर प्रतिबंध का विरोध

आपकी यह टिप्पणी भारत में एक प्रचलित विमर्श (discourse) को दर्शाती है, जिसे समय-समय पर विभिन्न मंचों और सरकारी कार्यवाहियों के माध्यम से भी अभिव्यक्ति मिली है। इस विषय पर कुछ मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
FCRA और विदेशी फंडिंग पर नकेल: भारत सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) के नियमों को काफी सख्त किया है। सरकार का तर्क है कि कई एनजीओ (NGOs) और मिशनरी संस्थाएं विदेशी धन का उपयोग उन गतिविधियों के लिए कर रही थीं जो भारत के सामाजिक ताने-बाने और राष्ट्रीय हित के खिलाफ थीं।

धर्मांतरण और सुरक्षा: खुफिया एजेंसियों और गृह मंत्रालय की रिपोर्टों में अक्सर यह संकेत दिया गया है कि विदेशी फंडिंग का एक हिस्सा प्रलोभन या दबाव के माध्यम से धर्मांतरण गतिविधियों में इस्तेमाल होता है। सरकार ने हाल ही में कई ऐसी संस्थाओं के लाइसेंस रद्द किए हैं जो इन गतिविधियों में संदिग्ध पाई गईं।
USCIRF की भूमिका पर सवाल: भारत सरकार और कई भारतीय विश्लेषक USCIRF जैसी संस्थाओं की रिपोर्टों को "कवर फायर" के रूप में देखते हैं। उनका मानना है कि जब भारत सरकार धर्मांतरण या संदिग्ध विदेशी फंडिंग के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करती है, तो ये अमेरिकी संस्थाएं इसे "धार्मिक स्वतंत्रता का हनन" बताकर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने की कोशिश करती हैं।
हस्तक्षेप का आरोप: विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से कहा है कि USCIRF भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप कर रहा है और भारत की संप्रभुता को चुनौती दे रहा है। भारत इसे एक "चुनिंदा नैरेटिव" मानता है जो केवल एक पक्ष को दिखाता है और जमीनी हकीकत को नजरअंदाज करता है।

पश्चिमी हितों का एजेंडा: विशेषज्ञों का एक वर्ग यह भी मानता है कि इस तरह की रिपोर्टों का उद्देश्य भारत जैसे उभरते हुए देश को रक्षा और व्यापार के मोर्चे पर रक्षात्मक (defensive) बनाना है। 

क्या आप यह जानना चाहेंगे कि भारत सरकार ने विदेशी चंदे (FCRA) को रोकने के लिए कौन से विशिष्ट कानून और बदलाव किए हैं?
------
यूएससीआईआरएफ (USCIRF) की 2026 की वार्षिक रिपोर्ट में आरएसएस (RSS) और RAW पर प्रतिबंध लगाने और भारत को 'कंट्री ऑफ पार्टिकुलर कंसर्न' (CPC) की सूची में शामिल करने की सिफारिश पर भारत सरकार ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। 
भारत सरकार का रुख मुख्य रूप से निंदनीय और खारिज करने वाला रहा है: -

रिपोर्ट को खारिज किया: भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने USCIRF की रिपोर्ट को "प्रेरित", "पक्षपाती" (motivated and biased) और "मनगढ़ंत" करार देकर सिरे से खारिज कर दिया है।

विकृत और चयनित तस्वीर: विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि यह आयोग कई वर्षों से भारत की एक "विकृत और चयनित तस्वीर" (distorted and selective picture) पेश करता आ रहा है, जो तथ्यात्मक होने के बजाय वैचारिक नैरेटिव पर आधारित है।

क्रेडिबिलिटी पर सवाल: भारत सरकार का मानना है कि USCIRF की ऐसी रिपोर्टें विश्वसनीय नहीं हैं और ये आयोग की अपनी साख को ही कमज़ोर करती हैं।

RSS/RAW पर प्रतिबंध का विरोध: भारत ने आरएसएस और RAW के खिलाफ लक्षित प्रतिबंधों (targeted sanctions) की सिफारिशों को "चयनात्मक निशाना" (selective targeting) बताया है।

अमेरिका को आईना: भारत सरकार ने पलटवार करते हुए कहा है कि USCIRF को भारत पर टिप्पणी करने के बजाय अमेरिका में हिंदू मंदिरों पर हमले और वहां भारतीय समुदाय को मिल रही धमकियों की जांच करनी चाहिए। 

संक्षेप में, भारत सरकार इस रिपोर्ट को भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप और एक एजेंडे के तहत की गई कार्रवाई मानती है। 


-----=-----
आरएसएस और रॉ पर बैन की मांग करने वाली अमेरिकी आयोग की रिपोर्ट में आख़िर क्या है?

17 मार्च 2026


भारत सरकार ने रॉ (रिसर्च एंड एनालिसिस विंग) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर प्रतिबंध लगाने की मांग करने वाली अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (यूएससीआईआरएफ़) की रिपोर्ट को सख़्त आलोचना के साथ ख़ारिज किया है.

भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा है कि अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी आयोग की रिपोर्ट स्पष्ट रूप से पक्षपाती और प्रेरित है.

वहीं, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अभी यूएससीआईआरएफ़ की रिपोर्ट पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.

आरएसएस के दिल्ली स्थित मुख्यालय केशव कुंज के मीडिया विभाग ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहा, "अभी इस संबंध में आरएसएस ने कोई वक्तव्य जारी नहीं किया है."

भारत सरकार इससे पहले भी यूएससीआईआरएफ़ की धार्मिक स्वतंत्रता रिपोर्टों को पहले से चले आ रहे पक्षपाती रवैये का हवाला देकर नकारती रही है.

भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने मौजूदा रिपोर्ट को भी पक्षपात के एक पुराने पैटर्न का हिस्सा बताया है और कहा है कि भारत सरकार पिछले कई सालों से इन निष्कर्षों को ख़ारिज करती रही है.


पीएम मोदी और अमित शाह के ख़िलाफ़ कथित नारेबाज़ी पर जेएनयू का बयान- स्टूडेंट्स को करेंगे बाहर
6 जनवरी 2026
दिग्विजय सिंह के आरएसएस वाले बयान पर बहस जारी, कांग्रेस नेताओं ने गोडसे और अल-क़ायदा का किया ज़िक्र
28 दिसंबर 2025
समाप्त
आरएसएस को बैन करने की माँग
मार्को रुबियो
इमेज स्रोत,Getty Images
इमेज कैप्शन,इन सिफ़ारिशों को अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने स्वीकार नहीं किया है. तस्वीर में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो (फ़ाइल फ़ोटो)
यूएससीआईआरएफ़ ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट में अमेरिकी विदेश मंत्रालय से भारत को विशेष चिंता वाले देश (सीपीसी) के रूप में नामित करने की मांग की है.

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति निरंतर ख़राब हो रही है.

यूएससीआईआरएफ़ ने भारत की ख़ुफ़िया एजेंसी रॉ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर धार्मिक स्वतंत्रता उल्लंघन के गंभीर आरोप लगाए हैं और कहा है कि अमेरिका को रॉ और आरएसएस पर लक्षित प्रतिबंध लगाने चाहिए.

अपनी सिफ़ारिशों में यूएससीआईआरएफ़ ने कहा है कि रॉ और आरएसएस से जुड़े लोगों और संस्थानों की संपत्तियां फ़्रीज़ की जाएं और उनके अमेरिका में प्रवेश पर रोक लगाई जाए.

इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिका भारत को दी जाने वाली सुरक्षा सहायता और द्विपक्षीय कारोबार को धार्मिक स्वतंत्रता में सुधारों से जोड़े और हथियार निर्यात नियंत्रण अधिनियम के तहत भारत को हथियारों की बिक्री पर रोक भी लगाए.

हालांकि, ये सिर्फ़ सिफ़ारिशें हैं और उन्हें अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने स्वीकार नहीं किया है.

क्या है यूएससीआईआरएफ़?

यूएससीआईआरएफ़ यानी यूनाइटेड स्टेट्स कमिशन ऑन इंटरनेशनल रिलिजियस फ़्रीडम एक स्वतंत्र आयोग और सरकारी एजेंसी है जिसमें अमेरिका की दोनों बड़े राजनीतिक दलों रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी के लोग शामिल हैं.

इस आयोग की स्थापना साल 1998 में अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत की गई थी. यह संघीय सरकारी एजेंसी अमेरिका के विदेश मंत्रालय से अलग है और स्वतंत्र रूप से काम करती है.

यूएससीआईआरएफ़ हर साल अपनी वार्षिक धार्मिक स्वतंत्रता रिपोर्ट तैयार करती है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धार्मिक स्वतंत्रता बढ़ाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति, विदेश मंत्रालय और कांग्रेस को नीतिगत सिफ़ारिशें देती है.

यह आयोग उन देशों की पहचान करता है जहां धार्मिक स्वतंत्रता का निरंतर, गंभीर और व्यवस्थित उल्लंघन होता है. आयोग की सिफ़ारिशों पर अमेरिका का विदेश मंत्रालय ऐसे देशों को विशेष चिंता वाले देश (सीपीसी) और विशेष निगरानी सूची (एसडब्ल्यूएल) में वर्गीकृत करता है.

इस रिपोर्ट में भारत के अलावा म्यांमार, क्यूबा, चीन, इरीट्रिया, ईरान, निकारागुआ, नाइजीरिया, उत्तर कोरिया, पाकिस्तान, रूस, सऊदी अरब, ताजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान को फिर से सीपीसी में शामिल करने की सिफ़ारिश की गई है.

ये देश पहले से ही 29 दिसंबर 2023 को प्रकाशित पिछली सीपीसी सूची में शामिल हैं. नाइजीरिया को विशेष रूप से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिर से अक्तूबर 2025 में सीपीसी में शामिल किया था.

इस बार यूएससीआईआरएफ़ ने भारत, अफ़ग़ानिस्तान, लीबिया, सीरिया और वियतनाम को भी इस सूची में शामिल करने की मांग की है. अभी अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने 2026 के लिए इन सिफ़ारिशों पर कोई कार्रवाई नहीं की है.


भारत को लेकर रिपोर्ट में क्या कहा गया है?
आरएसएस कार्यकर्ता

,रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2025 में "कई राज्यों में हिंदू राष्ट्रवादी भीड़ ने बिना किसी सज़ा के डर के मुसलमानों और ईसाइयों को परेशान किया"

यूएससीआईआरएफ़ की ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2025 में भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति निरंतर ख़राब हुई है. इसी वजह से भारत को सीपीसी सूची में डालने की सिफ़ारिश की गई है.

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर ऐसे क़ानून पारित हुए हैं जो अल्पसंख्यकों की धार्मिक स्वतंत्रता पर निशाना है. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में सरकार शरणार्थियों को देश से निकाल रही है और हिंदुत्ववादी और राष्ट्रवादी समूहों के अल्पसंख्यकों पर हमले बढ़े हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में हिंदुत्ववादी समूह क़ानून के किसी डर के बिना ईसाइयों और मुसलमानों पर हमले कर रहे हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है, "साल भर, कई राज्यों में हिंदू राष्ट्रवादी भीड़ ने बिना किसी सज़ा के डर के मुसलमानों और ईसाइयों को परेशान किया, उकसाया और उनके ख़िलाफ़ हिंसा भड़काई."

रिपोर्ट में कहा गया, "मार्च 2025 में, महाराष्ट्र में एक कट्टरपंथी हिंदू राष्ट्रवादी समूह, विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने 17वीं सदी के मुगल शासक औरंगजेब की क़ब्र को हटाने की मांग की जिसके बाद हिंसा भड़क उठी. इसके बाद हुए दंगों में दर्जनों लोग घायल हुए और कर्फ्यू लगा दिया गया."

ओडिशा में ईसाइयों के ख़िलाफ़ हिंसा का ज़िक़्र करते हुए रिपोर्ट में कहा गया, "जून 2025 में, ओडिशा में एक हिंदू राष्ट्रवादी भीड़ ने हिंदू धर्म में परिवर्तन करने से इनकार करने के बाद 20 ईसाई परिवारों पर हमला किया. इन हमलों के दौरान पुलिस ने कोई हस्तक्षेप नहीं किया, आठ लोग घायल हो गए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया."

बीते साल अप्रैल में पहलगाम में हुए चरमपंथी हमले में 26 भारतीय की मौत के बाद की घटनाओं का ज़िक़्र भी इस रिपोर्ट में किया गया है.

रिपोर्ट में कहा गया, "कश्मीर में मुख्य रूप से हिंदू पर्यटकों पर धार्मिक पहचान के आधार पर हुए हमले में 26 लोगों की मौत के बाद भारत में मुस्लिम विरोधी भावना भड़की."

"उत्तर प्रदेश में, एक हिंदू राष्ट्रवादी समूह के स्वयंभू सदस्यों ने कथित तौर पर कश्मीर हमले में मारे गए लोगों का बदला लेने की कसम खाते हुए एक मुस्लिम रेस्तरां कर्मचारी की गोली मारकर हत्या कर दी."

रिपोर्ट में कहा गया, "मई 2025 में, भारतीय अधिकारियों ने 15 ईसाइयों सहित 40 रोहिंग्या शरणार्थियों को हिरासत में लिया, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में ले जाया गया और लाइफ वेस्ट के अलावा और कुछ भी न देकर बर्मा के तट तक तैरने के लिए मजबूर किया गया."

"जुलाई 2025 में, भारतीय अधिकारियों ने भारतीय नागरिक होने के बावजूद असम से सैकड़ों बंगाली भाषी मुसलमानों को बांग्लादेश भेज दिया. सत्तारूढ़ भाजपा के अधिकारियों ने निष्कासित लोगों पर बांग्लादेश से आए मुस्लिम 'घुसपैठिए' होने का आरोप लगाया."

इस रिपोर्ट में ख़ासतौर पर वक़्फ़ क़ानून और उत्तराखंड के राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण अधिनियम (यूएसएएमई) का ज़िक़्र किया गया है.

नए वक़्फ़ क़ानून के तहत वक़्फ़ बोर्ड में ग़ैर मुसलमान सदस्यों को शामिल करने की अनुमति दी गई है. वहीं उत्तराखंड के नए क़ानून को लागू करने से पहले राज्य में मदरसा बोर्ड को ख़त्म कर दिया गया है.

इस नए क़ानून से राज्य में मुसलमानों के मदरसों के साथ-साथ सिखों, बौद्धों, जैनियों और पारसियों के शिक्षण संस्थान सीधे सरकार के नियंत्रण में आ जाएंगे.

भारत सरकार की प्रतिक्रिया?
रणधीर जायसवाल

इमेज कैप्शन,विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा है कि अमेरिकी आयोग भारत की एक 'विकृत और चुनिंदा' तस्वीर पेश करने पर अड़ा हुआ है

भारत सरकार ने इस रिपोर्ट को पूरी तरह से प्रेरित और पक्षपाती बताते हुए ख़ारिज किया है और कहा है कि ये रिपोर्ट ठोस तथ्यों के बजाए वैचारिक विमर्श पर आधारित है.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक बयान में कहा है कि यूएससीआईआरएफ़ पिछले कुछ सालों से भारत की एक 'विकृत और चुनिंदा' तस्वीर पेश करने पर अड़ा हुआ है.

उन्होंने रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह रिपोर्ट ठोस तथ्यों के बजाए संदिग्ध स्रोतों और वैचारिक विमर्श पर आधारित है.

उन्होंने कहा कि इस तरह की बार-बार की जा रही ग़लतियां ख़ुद आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती हैं.

भारत ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि यूएससीआईआरएफ़ को भारत की चुनिंदा आलोचना के बजाए अमेरिका के भीतर हो रही गंभीर घटनाओं पर विचार करना चाहिए.

भारतीय प्रवक्ता ने कहा, "भारत की चुनिंदा आलोचना के बजाए यूएससीआईआरएफ़ को अमेरिका में हो रही उत्पात और हिंदू मंदिरों में तोड़फोड़ की घटनाओं, और भारतीय समुदाय के ख़िलाफ़ बढ़ रही असहिष्णुता पर ध्यान देना चाहिए."

राजनीतिक प्रतिक्रिया
आरएसएस कार्यकर्ता

कांग्रेस ने कहा है, "मनुस्मृति से देश चलाने की वकालत करने वाला संविधान विरोधी आरएसएस, देश की एकता और भाईचारे के लिए ज़हर है."

यूएससीआईआरएफ़ की रिपोर्ट आने के बाद भारत में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ पर निशाना साधा है.

कांग्रेस ने एक्स पर किए एक पोस्ट में कहा, "यूएससीआईआरएफ़ का कहना है कि आरएसएस लोगों की धार्मिक आज़ादी के लिए ख़तरनाक है. ये धर्म के आधार पर भेदभाव बढ़ाने के लिए ज़िम्मेदार है."

कांग्रेस ने कहा, "आरएसएस पर तुरंत प्रतिबंध लगाया जाए, इसकी संपत्ति ज़ब्त की जाए और अमेरिका में आरएसएस के लोगों की एंट्री बैन हो."

कांग्रेस ने अपने पोस्ट में यह भी कहा है कि महात्मा गांधी की हत्या के बाद सरदार पटेल ने आरएसएस पर प्रतिबंध लगा दिया था.

कांग्रेस ने कहा, "मनुस्मृति से देश चलाने की वकालत करने वाला संविधान विरोधी आरएसएस, देश की एकता और भाईचारे के लिए ज़हर है."

वहीं कांग्रेस की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने कहा, "वह किस आधार पर बोल रहे हैं, समझ नहीं आता है लेकिन आरएसएस का अपना स्थान रहा है, चाहे स्वतंत्रता की बात हो या उसके बाद की बात हो वह सकारात्मक काम कर रहा है. संस्था ख़राब नहीं होती है, कुछ आदमी ख़राब होते हैं. उस आदमी को बैन किया जाए."


टिप्पणियाँ

इन्हे भी पढे़....

छत्रपति शिवाजी : सिसोदिया राजपूत वंश

हमें वीर केशव मिले आप जबसे : संघ गीत

दशा माता पूजन Dasha Mata Puja

विष्णु पुराण के अनुसार काल-गणना vishnu puran kal ganana

जगद्गुरु रामभद्राचार्य : सुप्रीम कोर्ट में रामलला के पक्ष में वेद-पुराण के उद्धारण के साथ गवाही

सेंगर राजपूतों का इतिहास एवं विकास

तेरा वैभव अमर रहे माँ, हम दिन चार रहें न रहे।

नेताजी सुभाषचन्द्र बोस, मास्को जेल में..?

गणगौर : अखंड सौभाग्य का पर्व Gangaur - festival of good luck

हमारा देश “भारतवर्ष” : जम्बू दीपे भरत खण्डे