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जनवरी, 2012 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

राष्ट्रवाद के महानायक ‘ पूज्य श्री गुरूजी ’

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5 जून, पूज्य श्री गुरूजी की पुण्यतिथि पर विशेष राष्ट्रवाद के महानायक ‘‘पूज्य श्री गुरूजी’ अरविन्द सीसौदिया विश्व स्तर पर भारतीय क्षितिज के जिन व्यक्तित्वों की आहट सुनी जाती थी, उनमें 1940 से 1945 तक, महात्मा गांधी ( नरमपंथी और अहिंसक के नाते ) सरदार वल्लभ भाई पटेल (गरमपंथी और कट्टरता के नाते) नेताजी सुभाषचन्द्र बोस (हर कीमत पर देश की आजादी के लिए प्रतिबद्ध सेनापति के नाते ), मौहम्मद अली जिन्ना (हर हाल में मुस्लिम वर्चस्व के नाते) और पं. जवाहरलाल नेहरू (साम्यवादी विचारों के साथ-साथ, रशिया के प्रति श्रृद्धा और ईस्ट इण्डिया कम्पनी के वफादार नेहरू खानदान के वंशज के नाते अंग्रेजवादी)। इस सूची में परिवर्तन 1945 में हुआ। नेताजी सुभाषचन्द्र बोस की 18 अगस्त 1945 को हवाई दुर्घटना में कथित मृत्यु के पश्चात इस रिक्त स्थान की पूर्ति प्रखर राष्ट्रवादी ‘माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर’ उपनाम ‘श्री गुरूजी’ के प्रखर व्यक्तित्व ने की, जो उनके स्वर्गवास होने तक बनी रही। इसी कारण पूज्य श्री गुरूजी के संदर्भ में बी.बी.सी. लंदन ने अपने प्रसारण में कहा था ‘‘नेहरू और सरदार पटेल के बाद

जय हो भ्रस्टाचार की : नियम तोड़कर ओएसडी को दिए आठ प्लॉट

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  जय हो भ्रस्टाचार की : भास्कर न्यूज.कोटा http://digitalimages.bhaskar.com पूर्व मंत्री प्रमोद जैन भाया के तत्कालीन ओएसडी को रीको ने जमकर ऑब्लाइज किया। सरकारी सेवा में रहते हुए न केवल ओएसडी ने खुद के नाम रियायती दर पर आठ भूखंड आवंटित करवाए बल्कि पार्टनर्स के नाम भी जमीन आवंटित करवा ली। ये सभी भूखंड आवंटित तो अलग-अलग समय में हुए लेकिन रीको ने इतनी मेहरबानी दिखाई कि सारे भूखंड एक ही लाइन में आवंटित किए। इस प्रक्रिया से तत्कालीन ओएसडी राजेंद्र सिंह ने एक ही जगह खुद के नाम करीब 16 हजार वर्गमीटर जमीन इकट्ठी कर ली। सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी में यह खुलासा हुआ है। पीडब्ल्यूडी में एईएन राजेंद्र सिंह को पूर्व मंत्री ने ओएसडी बनाया था। सिंह ने अपने रसूखात का उपयोग करते हुए कोटा में नंाता के समीप पर्यावरण औद्योगिक क्षेत्र में रीको से आठ भूखंड खुद के नाम आवंटित करवाए। नियम है कि सरकारी सेवा में रहते हुए कोई खुद के नाम से व्यावसायिक गतिविधियां शुरू नहीं कर सकता जबकि सिंह ने वर्ष 2006 से 2010 के बीच कुल आठ भूखंड रियायती दर पर खरीदे। इसमें से ४ भूखंड उन्होंने मौजूदा सरकार के कार्यकाल

गांधी और गोडसे

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- अरविन्द सिसोदिया  महात्मा गांधी की हत्या को कभी भी सही नही ठहराया जा सकता , मगर गोडसे को भी कभी गद्दार नहीं कहा जा सकता , क्यों की वह भी सच्चा राष्ट्भाक्त था ...देश के विभाजन से पूरा हिन्दू समाज और राष्ट्रभक्त समुदाय स्तब्ध था दुखी था . जिन्ना की विजय और बयान जले पर नमक झिडकते थे , गांधी जी ने अनशन  कर पाकिस्तान को करोड़ों रूपये दिलवाए , वे शीघ्र ही पाकिस्तान यात्रा पर जाने वाले थे, उनकी सहायक पाकिस्तान में कार्यक्रम यात्रा मार्ग आदी पूरा कर चुकीं थी , देश को दर था की वे पाकिस्तान यात्रा के दौरान कही कश्मीर ही पाकिस्तान को न दे आयें ..!!!! नाथूराम गोडसे एक पत्रकार थे , अख़बार के संपादक थे , कोइ गैर जिम्मेवार व्यक्ती नहीं थे ... उन परिथितियों में  जो भी हुआ राष्ट्रहित के लिए ही किया गया इसमें संदेह नहीं है ... महात्मा गांधी की पुण्यतिथी पर यह बातें सामने आनी चाहियें थीं ....नाथूराम गोडसे के उन बयानों और बहसों को भी सामने आना चाहिए जिन्हें बैन किया हुआ है ...और यूँ तो आज देश गांधी जी कई जिदों के कारण कई कष्टों को भोग रहा है मगर उनके महान योगदान को भी नमन किया ही जाना चाहिए....... क्

Shree Ram Setu : 9,00,000 years old

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Jai Shree Ram Setu (48 kms long, 3 kms wide & 22 feets deep) ======================================== The exact date of Lord Ram's birth according to Valmiki Ramayan & Mordern Science. Lord Rama incarnated in Tretayuga which lasted for 4,32,000 x 3 years. Later came Dwapyuga which was 4,32,000 x 2 years Kaliyuga is 4,32,000 years & we already passed 5100 after lord Krishna Disappeared. Total of Dwapar is 8,64,000 + kaliyuga 5100 + 25,000 treta years when lord Rama took SwadhamGaman" means going to own Dham i.e. eternal place Vaikuntha.So approximately Lord Rama left 8,94,100 years back according to Valmiki Ramayan & about the Ram Setu project which was stopped in the year 2008 after the court got evidence about this setu which is Authentic. NASA first claimed it is 17,00,500 years old only because they had their greedy eyes on many usefull things found on the bridge (antibiotic, alge for space travellers, Munga stones etc) so claimed the wrong dates &am

गीता राष्‍ट्रीय धर्मशास्‍त्र घोषित हो : इलाहाबाद उच्च न्यायालय

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गीता राष्‍ट्रीय धर्मशास्‍त्र घोषित हो - हाईकोर्ट 11 सितंबर 2007 वार्ता | http://hindi.in.com/latest-news इलाहाबाद। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51 ए (बी) व (एफ) के तहत राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रगान, राष्ट्रीय पक्षी और राष्ट्रपुष्प की तरह भगवद्गीता को भी राष्ट्रीय धर्म शास्त्र घोषित किया जाए। न्यायालय ने कहा है कि चूंकि देश की आजादी के आन्दोलन की प्रेरणा स्रोत रही गीता भारतीय जीवन पद्धति का आईना है, इसलिए देश के हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह इसके आदर्शों पर अमल करके इस राष्ट्रीय धरोहर की रक्षा करे। न्यायालय ने कहा कि गीता के उपदेश मन के आंतरिक और बाह्य सत्य को उजागर करते हैं और यह किसी खास सम्प्रदाय की नहीं, बल्कि यह सभी सम्प्रदायों की गाइडिंग फोर्स है। यह आदेश न्यायमूर्ति एस. एन. श्रीवास्तव ने वाराणसी के श्यामल राजन मुखर्जी की याचिका पर हाल में दिया है। न्यायालय ने भगवत गीता के श्लोकों और इसके बारे में विद्वानों के विचारों का उद्धरण देते हुए कहा है कि धर्म भगवद्गीता की आत्मा है, जिसे भक्ति योग, कर्मयोग व ज्ञान योग के जरिए प्राप्त किय

गीता भारतीय दर्शन : मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय

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गीता धार्मिक पुस्तक नहीं – उच्च न्यायालय January 28, 2012 जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा है कि गीता कोई धार्मिक पुस्तक नहीं बल्कि भारतीय दर्शन पर आधारित ग्रंथ है। कोर्ट ने कहा कि इसलिए स्कूलों में इसको पढ़ाए जाने पर रोक नहीं लगाई जा सकती।  मध्य प्रदेश के स्कूली पाठ्यक्रम में गीता-सार को शामिल किए जाने के विरोध में दायर जनहित याचिका को जस्टिस अजित सिंह और जस्टिस संजय यादव की बेंच खारिज कर दिया। बेंच ने कहा कि ‘गीता’ में दर्शन है न कि धार्मिक सीख। कैथलिक बिशप काउंसिल के प्रवक्ता आनंद मुत्तंगल ने याचिका में कहा था कि यह फैसला अनुच्छेद 28 (1) का उल्लंघन है। हाई कोर्ट ने कहा कि धार्मिक पुस्तक की जगह स्कूलों में सभी धर्मों का सारांश पढ़ाया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 28 (1) नैतिक शिक्षा, सांप्रदायिक सिद्धांतों और सामाजिक एकता बनाए रखने वाले किसी प्रशिक्षण पर पाबंदी नहीं लगाता, जो नागरिकता व राज्य के विकास का जरूरी हिस्सा हैं। हाईकोर्ट ने अरुणा रॉय विरूद्ध केन्द्र सरकार के मामले में सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का भी उल्लेख किया। उसमें कहा गया है कि ‘ संविधान के अनुच्छेद 28 (1)

वसंत पंचमी : विद्या की देवी सरस्वती की पूजा

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**** " वसंत पंचमी एक भारतीय त्योहार : विद्या की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है " **** -हेमा निरजेश वर्मा वसंत पंचमी एक भारतीय त्योहार है, इस दिन विद्या की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। यह पूजा पूर्वी भारत में बड़े उल्लास से मनायी जाती है। इस दिन स्त्रियाँ पीले वस्त्र धारण करती हैं। प्राचीन भारत में पूरे साल को जिन छह मौसमों में बाँटा जाता था उनमें वसंत लोगों का सबसे मनचाहा मौसम था।जब फूलों पर बहार आ जाती, खेतों मे सरसों का सोना चमकने लगता, जौ और गेहूँ की बालियाँ खिलने लगतीं, आमों के पेड़ों पर बौर आ जाता और हर तरफ़ रंग-बिरंगी तितलियाँ मँडराने लगतीं। वसंत ऋतु का स्वागत करने के लिए माघ महीने के पाँचवे दिन एक बड़ा जश्न मनाया जाता था जिसमें विष्णु और कामदेव की पूजा होती, यह वसंत पंचमी का त्यौहार कहलाता था। शास्त्रों में बसंत पंचमी को ऋषि पंचमी से उल्लेखित किया गया है, तो पुराणों-शास्त्रों तथा अनेक काव्यग्रंथों में भी अलग-अलग ढंग से इसका चित्रण मिलता है। बसन्त पंचमी कथा सृष्टि के प्रारंभिक काल में भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने जीवों, खासतौर पर मनुष्य योनि की रचना की। अप

हिंदुओं के कानून ही बदलती है सरकारः सुप्रीम कोर्ट

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http://navbharattimes.indiatimes.com   हिंदुओं के कानून ही बदलती है सरकारः सुप्रीम कोर्ट 10 Feb 2011 नई दिल्ली ।। सुप्रीम कोर्ट ने अल्पसंख्यक समुदायों के पर्सनल लॉज में बदलाव न करने को लेकर सरकार की खिंचाई करते हुए कहा है कि सरकार सिर्फ हिंदुओं से जुड़े कानूनों में ही बदलाव करती है। इससे सरकार की धर्मनिरपेक्षता पर भी सवाल उठते हैं।  अदालत ने मंगलवार को कहा कि पर्सनल लॉज में सुधार की सरकार की कोशिशें हिंदू समुदाय से आगे नहीं बढ़तीं। अदालत ने कहा कि हिंदू समुदाय परंपरागत कानूनों में सरकार की तरफ से होने वाली इन कोशिशों को लेकर सहिष्णु रहा है। लेकिन, इस मामले में धर्मनिरपेक्ष नजरिए की कमी दिखती है। ऐसा सुधार दूसरे धार्मिक समुदायों से जुड़े कानूनों में नहीं किया जा रहा। जस्टिस दलवीर भंडारी और जस्टिस एक.के. गांगुली ने राष्ट्रीय महिला आयोग की एक याचिका पर सुनवाई के दौरान ये बातें कहीं। याचिका में कहा गया था कि विवाह की उम्र को लेकर अलग-अलग कानूनों से काफी उलझन है। इसलिए याचिका में शादी की न्यूनतम उम्र पर एक समान कानून की जरूरत बताई गई थी।  -------------- Friday, February 11, 2011 सार

जब ज़ीरो दिया मेरे भारत ने, दुनिया को तब गिनती आयी

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-------------- गाना / Title: जब ज़ीरो दिया ... है प्रीत जहाँ की रीत सदा - jab ziiro diyaa ... hai priit jahaa.N kii riit sadaa चित्रपट / Film: Poorab Aur Paschim संगीतकार / Music Director:  कल्याणजी - आनंदजी-(Kalyanji-Anandji) गीतकार / Lyricist:  इन्दीवर-(Indeevar) गायक / Singer(s):  Mahendra Kapoor -----------  जब ज़ीरो दिया मेरे भारत ने भारत ने मेरे भारत ने दुनिया को तब गिनती आयी तारों की भाषा भारत ने दुनिया को पहले सिखलायी देता ना दशमलव भारत तो यूँ चाँद पे जाना मुश्किल था धरती और चाँद की दूरी का अंदाज़ लगाना मुश्किल था सभ्यता जहाँ पहले आयी पहले जनमी है जहाँ पे कला अपना भारत जो भारत है जिसके पीछे संसार चला संसार चला और आगे बढ़ा ज्यूँ आगे बढ़ा, बढ़ता ही गया भगवान करे ये और बढ़े बढ़ता ही रहे और फूले\-फले मदनपुरी: चुप क्यों हो गये? और सुनाओ है प्रीत जहाँ की रीत सदा मैं गीत वहाँ के गाता हूँ भारत का रहने वाला हूँ भारत की बात सुनाता हूँ काले\-गोरे का भेद नहीं हर दिल से हमारा नाता है कुछ और न आता हो हमको हमें प्यार निभाना आता है जिसे मान चुकी सारी दुनि

मेरे देश की धरती,सोना उगले उगले हीरे मोती ......

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गाना / Title: मेरे देश की धरती, सोना उगले उगले हीरे मोती - mere desh kii dharatii, sonaa ugale ugale hiire motii चित्रपट / Film: Upkaarसंगीतकार / Music Director:  कल्याणजी - आनंदजी-(Kalyanji-Anandji) गीतकार / Lyricist:  इन्दीवर-(Indeevar) गायक / Singer(s):  Mahendra Kapoor  ,   chorus ---- मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती मेरे देश की धरती ... बैलों के गले में जब घुंघरू जीवन का राग सुनाते हैं ग़म कोस दूर हो जाता है खुशियों के कंवल मुस्काते हैं सुनके रहट की आवाज़ें यूँ लगे कहीं शहनाई बजे आते ही मस्त बहारों के दुल्हन की तरह हर खेत सजे, मेरे देश ... जब चलते हैं इस धरती पे हल ममता अंगड़ाइयाँ लेती है क्यूँ ना पूजे इस माटी को जो जीवन का सुख देती है इस धरती पे जिसने जनम लिया, उसने ही पाया प्यार तेरा यहाँ अपना पराया कोई नहीं है सब पे है माँ उपकार तेरा, मेरे देश ... ये बाग़ है गौतम नानक का खिलते हैं चमन के फूल यहाँ गांधी, सुभाष, टैगोर, तिलक, ऐसे हैं अमन के फूल यहाँ रंग हरा हरी सिंह नलवे से रंग लाल है लाल बहादुर से रंग बना बसंती भगत सिंह रंग अमन का वीर जवाहर से,

वह ख़ून कहो किस मतलब का, जिसमें उबाल का नाम नहीं - विमल सोनी

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विमल सोनी वह ख़ून कहो किस मतलब का, जिसमें उबाल का नाम नहीं वह ख़ून कहो किस मतलब का, आ सके देश के काम नहीं वह ख़ून कहो किस मतलब का, जिसमें जीवन न रवानी है जो परवश में होकर बहता है, वह ख़ून नहीं है पानी है उस दिन लोगों ने सही सही, खूँ की कीमत पहचानी थी जिस दिन सुभाष ने बर्मा में, मांगी उनसे कुर्बानी थी बोले स्वतंत्रता की खातिर, बलिदान तुमहे करना होगा बहुत जी चुके हो जग में, लेकिन आगे मरना होगा आजादी के चरणों में जो, जयमाल चढाई जाएगी वह सुनो तुम्हारे शीशों के, फूलों से गूंथी जाएगी आज़ादी का संग्राम कहीं, पैसे पर खेला जाता है? ये शीश कटाने का सौदा, नंगे सर झेला जाता है आज़ादी का इतिहास कहीं, काली स्याही लिख पाती है? इसको पाने को वीरों ने, खून की नदी बहाई जाती है यह कहते कहते वक्ता की, आंखों में खून उतर आया मुख रक्त वर्ण हो दमक उठा, चमकी उनकी रक्तिम काया आजानु बाहु ऊंचा करके, वे बोले रक्त मुझे देना इसके बदले में भारत की, आज़ादी तुम मुझसे लेना हो गई सभा में उथल पुथल, सीने में दिल न समाते थे स्वर इंकलाब के नारों के, कोसों तक झाए जाते थे हम देंगे देंगे ख़ून, स्वर बस यही

राष्ट्रवाद के लिए; राष्ट्रपति का निर्वाचन जनता करे

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राष्ट्रवाद के लिए; राष्ट्रपति का निर्वाचन जनता करे अरविन्द सीसौदिया हमारी स्वतंत्रता के लिये राष्ट्रपति पद का कितना महत्व है, यह समझने के लिए हमें 25 जून 1975 की रात्रि 11 बजकर 45 मिनिट पर, तत्कालीन राष्ट्रपति फखरूद्दीन अली अहमद द्वारा तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमति इन्दिरा गांधी के कहने पर, लगाये गये आपातकाल को समझना होगा। जिसमें राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 352 के अन्तर्गत आंतरिक आपातकाल लगा दिया था। जेलों में डाले गये निर्दोषों को न्यायालय मुक्त न कर पाये, इसलिये कि ‘मीसा’ कानून को न्यायालय के क्षैत्राधिकार से बाहर कर दिया गया था। लोगों की जबरिया नसबंदी कर दी गई थी, जबरिया मकान तोड़ दिये गये थे। कोई भी अखबार सरकार के खिलाफ लिख नहीं सकता था, विपक्ष नाम की कोई चीज नहीं रहने दी गई थी। व्यक्तिगत स्वतंत्रता समाप्त हो गई थी। सोचने समझने वाली बात यह है कि ऐसा क्यों हुआ! राष्ट्रपति ने बिना जनता की परवाह किये आपातकाल क्यों लगा दिया! इसके दो कारण थे, पहला कारण तो राष्ट्रपति जनता के द्वारा चुना नहीं जाता जो वह जनता के प्रति जवाबदेह होता........, क्योंकि उसको चुनने वाला निर्वाचक मण्

हम लाये हैं तूफ़ान से कश्ती निकाल के

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- अरविन्द सिसोदिया  देश ने जो आजादी पाई है, वह बहुत बड़ी कीमत शहादतों के रूप में अदा करके पाई है ..विभाजन के दर्द के बीच पाई है ...अब इसे फिरसे गुलाम बनाने की कोशिशें हो रहीं हैं ...हमें  अपनी आजादी हर हाल में बचा कर रखनी है..इसके लिए चाहे जितनी बड़ी कुर्बानी ही क्यों न देनी पड़े... ---- गाना / Title: हम लाये हैं तूफ़ान से कश्ती निकाल के -  ham laaye hai.n tuufaan se kashtii nikaal ke चित्रपट / Film: Jaagriti/संगीतकार / Music Director:  हेमंत-(Hemant) गीतकार / Lyricist:  प्रदीप-(Pradeep) / गायक / Singer(s):  Rafi  ---- पासे सभी उलट गए दुश्मन की चाल के  अक्षर सभी पलट गए भारत के भाल के  मंज़िल पे आया मुल्क हर बला को टाल के  सदियों के बाद फिर उड़े बादल गुलाल के  -- हम लाए हैं तूफ़ान से कश्ती निकाल के  इस देश को रखना मेरे बच्चों सम्भाल के  तुम ही भविष्य हो मेरे भारत विशाल के  इस देश को रखना मेरे बच्चों सम्भाल के  --- १) देखो कहीं बरबाद ना होए ये बगीचा  इसको हृदय के खून से बापू ने है सींचा  रक्खा है ये चिराग़ शहीदों ने बाल के, इस देश को... -- २) दुनिया के दांव पेंच स

दो तस्वीरें है हिंदुस्तान की.: ये देश है वीर जवानों का : Top 5 Corruption Scams in India.

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दो तस्वीरें है हिंदुस्तान की...... ------ गाना / Title: ये देश है वीर जवानों का - ye desh hai viir javaano.n kaa चित्रपट / Film: Naya Daur संगीतकार / Music Director:  ओ. पी. नय्यर-(O P Nayyar)  गीतकार / Lyricist:  साहिर-(Sahir)  गायक / Singer(s):  Rafi  ---------- ये देश है वीर जवानों का, अलबेलों का मस्तानों का ओ ... ओ ... अति वीरों की ये देश है वीर जवानों का  अलबेलों का मस्तानों का इस देश का यारों ... होय!!  इस देश का यारों क्या कहना  ये देश है दुनिया का गहना -- ओ... ओ... यहाँ चौड़ी छाती वीरों की यहाँ भोली शक्लें हीरों की यहाँ गाते हैं राँझे ... होय!! यहाँ गाते हैं राँझे मस्ती में मस्ती में झूमें बस्ती में -- ओ... ओ... पेड़ों में बहारें झूलों की राहों में कतारें फूलों की यहाँ हँसता है सावन ... होय!! यहाँ हँसता है सावन बालों में खिलती हैं कलियाँ गालों में -- ओ... ओ... कहीं दंगल शोख जवानों के कहीं कर्तब तीर कमानों के यहाँ नित नित मेले ... होय!! यहाँ नित नित मेले सजते हैं नित ढोल और ताशे बजते हैं -- ओ... ओ... दिलबर के लिये दिलदार हैं हम दुश्मन क