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विजयादशमी :सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी

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विजयादशमी पर विशेष – राष्ट्र जागरण के अग्रिम मोर्चे पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (मंगलवार, 08 अक्तूबर 2019) आदरणीय प्रमुख अतिथि महोदय, इस उत्सव को देखने के लिए विशेष रूप से यहां पर पधारे हुए निमंत्रित अतिथि गण, श्रद्धेय संत वृंद, मा. संघचालक गण, संघ के सभी माननीय अधिकारीगण, माता भगिनी, नागरिक सज्जन एवं आत्मीय स्वयंसेवक बंधु. इस विजयादशमी के पहले बीता हुआ वर्ष भर का कालखंड श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश वर्ष के रूप में तथा स्वर्गीय महात्मा गांधी के जन्म के डेढ़ सौ वे वर्ष के रूप में विशेष रहा. उस उपलक्ष्य में किए जाने वाले कार्यक्रम आगे और कुछ समय, उनकी अवधि समाप्त होने तक, चलने वाले हैं. इस बीच 10 नवंबर से स्वर्गीय दत्तोपंत जी ठेंगड़ी का भी शताब्दी वर्ष शुरू होना है. परंतु बीते हुए वर्ष में घटी हुई कुछ महत्त्वपूर्ण घटनाओं ने, उसको हमारे लिए और स्मरणीय बना दिया है. मई मास में लोकसभा चुनावों के परिणाम प्राप्त हुए. इन चुनावों की ओर संपूर्ण विश्व का ध्यान आकर्षित हुआ था. भारत जैसे विविधताओं से भरे विशाल देश में, चुनाव का यह कार्य समय से और व्यवस्थित कैसे सम्पन्न होत

हिन्दू महात्मा गांधी - अरविन्द सिसौदिया

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- गांधी जयंती ! हिन्दू महात्मा गांधी को स्थापित करनें की जरूरत है - अरविन्द सिसौदिया जवाहरलाल नेहरू और कांग्रेस ने जिस महात्मा गांधी को सामनें रखा वह महात्मा गांधी थे ही नहीं । महात्मा गांधी ने तो शुद्ध रूप से रघुपति राघव राजा राम गाया था और रामराज्य की कल्पना की थी। महात्मा गांधी तो सनातन महात्मा गांधी थे, हिन्दू महात्मा गांधी थे भारतीय संस्कृित को आगे रख कर चलने वाले महात्मा गांधी थे। श्रीराम, अहिंसा, सत्य, मानवता, रामराज्य और क्षमा हिन्दू संस्कृति से ही उन्होने लिये थे । गीता उनको सबसे प्रिय थी। उनकी 150 जयंती पर हिन्दू महात्मा गांधी को स्थापित कर उन्हे सच्ची श्रृद्धांजल दी जानी चाहिये।