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समाज में बढ़ती असहिष्णुता और घरेलू हिंसा : समस्या एवं समाधान

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समाज में बढ़ती असहिष्णुता और घरेलू हिंसा : समस्या एवं समाधान आज समाज में बढ़ती असहिष्णुता, आक्रोश और पारिवारिक हिंसा की घटनाएँ गंभीर चिंता का विषय बन गई हैं। लगभग प्रतिदिन ऐसी घटनाएँ सामने आती हैं, जिनमें पुत्र द्वारा पिता की हत्या, पति-पत्नी के बीच घातक हिंसा, मंगेतर द्वारा भावी जीवनसाथी की हत्या या पूरे परिवार की सामूहिक हत्या जैसी दुखद घटनाएँ शामिल हैं। यह केवल मामूली कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और प्रशासनिक चुनौती भी है। साथ ही समाज में प्रशासनिक सुरक्षा तंत्र की घट चुकी क्षमता का प्रतीक भी है।  लगभग साढ़े सतरह लाख वर्षपूर्व, भगवान राम के रामराज्य में समाज में क्या घटित हो रहा है इसकी जानकारी गुप्तचर व्यवस्था से होती थी। राजा राम स्वयं वेश बदल कर जनता की चर्चाओं को जानते समझते थे। आज तो तकनीकी संसाधन बहुत अधिक सक्षम हो गये हैँ, ऐसे में समाज में क्या घटित हो रहा है इसकी जानकारी शासन को होना चाहिए। समस्या कहाँ है? अनेक गंभीर अपराध अचानक नहीं होते, बल्कि उनसे पहले लंबे समय तक घरेलू विवाद, मारपीट, धमकियाँ, नशे की समस्या, मानसिक तनाव और हिंस...

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) ने परिसीमन पर अपनी स्टडी रिपोर्ट उत्तर दक्षिण का समाधान प्रस्तुत करती है

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) ने परिसीमन पर अपनी स्टडी रिपोर्ट में लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 824 करने का एक संभावित गणितीय मॉडल पेश किया है।  इस "लक्षित परिसीमन" के तहत सभी सीटों के बजाय केवल 170 चुनिंदा सीटों को कई हिस्सों में बांटकर नई सीटें बनाने का सुझाव दिया गया है। रिपोर्ट की मुख्य सिफारिशें और गणितीय मॉडल: सीटों का विभाजन: रिपोर्ट के अनुसार, कुल 170 सीटों को विभाजित किया जाएगा। इनमें से 59 सीटों को दो हिस्सों में और 111 सीटों को तीन हिस्सों में बांटने का प्रस्ताव है।सीटों की कुल संख्या: इस विभाजन प्रक्रिया के बाद देश में लोकसभा सीटों की संख्या बढ़कर 824 हो जाएगी। राज्यों के अनुपात में संतुलन: जनसंख्या के आधार पर राज्यों के प्रतिनिधित्व में असंतुलन न आए, इसके लिए लक्षित मानदंडों का इस्तेमाल कर सभी बड़े राज्यों की सीटों का वर्तमान अनुपात बनाए रखने की सिफारिश की गई है। क्षेत्रीय असर: उदाहरण के लिए, इस मॉडल के लागू होने से राजस्थान की वर्तमान 25 लोकसभा सीटों के ढांचे में बदलाव होगा और इनकी संख्या बढ़कर 38 तक हो सकती है।यह एक सैद्धांतिक कार्य-पत्र...

स्वस्मित्व योजना बनाम स्वामित्व का कोई प्रश्न सिविल मुकदमे द्वारा तय होगा

  मध्यप्रदेश राजस्व न्यायालयों को बंटवारे का अधिकार  मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय नागजीराम बनाम मांगीलाल एवं अन्य। 21 अप्रैल, 1976 को समतुल्य उद्धरण: एआईआर 1977 एमपी 8 लेखक: एस दयाल बेंच: एसडी वर्मा, बी दुबे निर्णय शिव दयाल, सी.जे 1. एक डिवीजन बेंच ने पैत्रम बनाम राजस्व बोर्ड (1968 जब एलजे 304) और गंगाराम बनाम कन्हैयालाल (1971 जब एलजे 819) के बीच 'विवाद को सुलझाने' के लिए इस मामले को हमारे पास भेजा है। उन मामलों का निर्णय दो अलग-अलग खंडपीठों द्वारा किया गया। उन दोनों में सवाल यह था कि तहसीलदार क्या कर सकता है और उसे मध्य प्रदेश भूमि राजस्व संहिता की धारा 178 (1) के तहत उसके समक्ष किए गए विभाजन के आवेदन पर कैसे आगे बढ़ना चाहिए। 1959 (इसके बाद संहिता के रूप में संदर्भित) जब स्वामित्व का कोई प्रश्न उठाया जाता है। संहिता की धारा 178 इस प्रकार है:-- " धारा 178 जोत का विभाजन:-- (1) यदि धारा 59 के तहत कृषि के प्रयोजन के लिए मूल्यांकन की गई किसी भी जोत में एक से अधिक भूमिस्वामी हैं, तो ऐसा कोई भी भूमिस्वामी जोत में अपने हिस्से के विभाजन के लिए तहसीलदार को आवेदन कर सकता है: बशर्ते कि ...