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दिमागी नक्सलवाद

प्रेस विज्ञप्ति  लोकतंत्र, संविधान और राष्ट्रविरोधी व्यवहार ही दिमागी नक्सलवाद — अरविन्द सिसोदिया कोटा, 18 अगस्त। राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल से जुड़े शिक्षा-प्रोत्साहन न्यासी एवं वरिष्ठ बुद्धिजीवी अरविन्द सिसोदिया ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लालकिले की प्राचीर से दिए गए संबोधन में प्रयुक्त “दिमागी नक्सल” शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि " यह शब्द केवल हिंसक नक्सली गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन वैचारिक प्रवृत्तियों की ओर भी संकेत करता है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था, संवैधानिक संस्थाओं, राष्ट्रीय एकता और भारत की संप्रभुता को कमजोर करने का प्रयास करती हैं, दुष्प्रेरणायें देश में फैलाती हैँ। सिसोदिया नें कहा कि " भारत ने लंबे समय तक नक्सलवाद की चुनौती को झेला है। इस दौरान देश ने यह महसूस किया कि जो लोग नक्सलवादी विचारधारा से जुड़े थे, वे न तो भारत के संविधान को मानते थे, न लोकतंत्र में विश्वास रखते थे, न कानून-व्यवस्था को स्वीकार करते थे और न ही निर्वाचन के माध्यम से जनता के निर्णय का सम्मान करते थे। उनकी भाषा हिंसा और शस्त्रों की भाष...

स्वाधीनता संग्राम में संघ की भूमिका के अकाट्य तथ्य - मुरलीधर

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स्वाधीनता संग्राम में संघ की भूमिका के अकाट्य तथ्य - मुरलीधर कोटा 16 अगस्त । स्वतंत्रता दिवस की 80 वी वर्षगाठ के शुभ अवसर पर भारतीय जनकल्याण समिति, कोटा द्वारा सूरज भवन, बल्लभबाड़ी कोटा पर स्वतंत्रता दिवस का भव्य समारोह आयोजित किया गया । कार्यक्रम की अध्यक्षता कोटा विभाग के विभाग संघचालक पन्नालाल शर्मा ने की। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, चितौड़ प्रांत के प्रान्त प्रचारक मुरलीधर ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने संबोधन में कहा कि " भारतीय इतिहास को धूमिल करने के प्रयास अब और नहीं टिकेंगे। " उन्होंने " स्वाधीनता संग्राम में संघ की भूमिका के अकाट्य प्रमाण प्रस्तुत किये।" मुरलीधर ने उद्बोधन में स्पष्ट किया कि " भारत की आजादी बिना खड़ग-बिना ढाल से नहीं बल्कि क्रांतिकारियों के बलिदान और जनजन के संघर्षों का परिणाम है। इसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक के संस्थापक डॉ केशवराव हेडगेवार एवं तत्कालीन स्वयंसेवकों की टोली ने अपना अमूल्य योगदान दिया। " उन्होंने कहा कि " जो लोग संघ पर आरोप लगाते हैं उनको “संघ और स्वतंत्रता आंदोलन” नाम की पुस्तक पढ़नी चाहिए। "  ...

कोटा संभाग निकाय

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कोटा संभाग (कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़) क -  1- कोटा नगर निगम - obc महिला / 100 वार्ड   2- रामगन्जमंडी   सामान्य /40 3- सांगोद    सामान्य /35 4-सुल्तानपुर   सामान्य sc/25 5-इटावा  सामान्य महिला /35 6- सुकेत  सामान्यobc /25 ख - बूँदी  1- बूँदी / सामान्य  2- के पाटन / सामान्य  3- कापरेन / सामान्य महिला  4- लाखेरी / सामान्य  5- इंद्रगढ़ / सामान्य महिला  6- नैनबा / सामान्य  7- हिण्डोली / सामान्य  8- देई / सामान्य sc  ग - झालावाड़  1- झालावाड़ / OBC जनरल  2- झालरापाटन / सामान्य  3- खानपुर / सामान्य महिला  4- मनोहर थाना  / सामान्य 5- अकलेरा OBC महिला 6- पिडावा  / सामान्य 7- भवानीमंडी  / सामान्य 8- डग / sc महिला  घ - बारां   1- बारां / जनरल महिला /60 2- अंता जनरल obc /35 3 अटरू जनरल sc /25 4- छबड़ा जनरल महिला /35 5- सीसवाली जनरल /20 6-मांगरोल जनरल /35

संघ ही स्वतंत्रता के बाद घावों पर मरहम बना, कांग्रेस हिंसा और तुष्टिकरण का पर्याय बनी

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भारत विभाजन पर बहुत बड़ी जनहानि  भारत के विभाजन (1947) के समय भड़की सांप्रदायिक हिंसा, कत्लेआम और दंगों का दौर भारतीय इतिहास का सबसे दर्दनाक अध्याय है। इस ऐतिहासिक त्रासदी में लाखों हिंदू-सिख और मुस्लिम परिवारों को अपनी जान गंवानी पड़ी और करोड़ों लोग विस्थापित हुए।  विभाजन के दौरान देश के शीर्ष नेताओं—जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल—की भूमिका और उनके प्रयासों को लेकर इतिहासकारों और समकालीन दस्तावेजों के आधार पर निम्नलिखित महत्वपूर्ण तथ्य सामने आते हैं:- ## 1. शरणार्थी संकट और राहत कार्य * राहत शिविरों की स्थापना: विभाजन के तुरंत बाद भारत सरकार ने दिल्ली, पंजाब और अन्य राज्यों में विशाल राहत शिविरों (जैसे दिल्ली का पुराना किला और किंग्सवे कैंप) का निर्माण किया। इन शिविरों में आने वाले लाखों हिंदू और सिख शरणार्थियों के लिए भोजन, कपड़े, चिकित्सा और सुरक्षा की व्यवस्था की गई।  * पुनर्वास मंत्रालय का गठन: शरणार्थियों की समस्याओं को प्राथमिकता से सुलझाने के लिए विशेष तौर पर 'पुनर्वास मंत्रालय' (Ministry of Rehabilitation) बनाया गया। ## 2. दंगों को रोकने के लिए व्यक्तिगत प्...