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माँ की स्तुति

माँ की स्तुति  ईश्वर से भी बड़ा जिसका है उपकार ईश्वर से भी बड़ा जिसका है उपकार, जो सब कुछ कर देती बच्चों पर बार । कैसे चुकाऊँ ऋण तेरा, हे जननी महान, तेरे चरणों में बसता मेरा सारा जहान। आँखें तेरी देन हैं, जिनसे जग को जाना, कान तेरे वरदान, सुना हर मधुर तराना। नाक से मिली साँस, जीवन का आधार, तेरी ही कृपा से धड़कता ये संसार। तन-मन, शिक्षा, संस्कार—सब तुझसे पाया, मेरे हर गुण में बस तेरा ही साया। नाम मेरा तुझसे, पहचान भी तेरी, मेरी हर उपलब्धि में मेहनत है तेरी। चलना सिखाया तूने, गिरकर फिर उठना, अंधियारे में दीप बन, हर पल साथ रहना। जब भी मैं डगमगाया, तूने राह दिखाई, अपने आँचल में भर, हर पीड़ा मिटाई। तेरी डाँट में भी छिपा स्नेह का उजियारा, तेरे हर त्याग ने जीवन सँवारा। रातों की नींद त्याग, मुझे चैन सुलाया, अपने सुख भूल, मेरा हर दुःख मिटाया। तेरे उपकारों का न कोई पार है, तेरे बिना ये जीवन कितना बेकार है। अहसान मानूँ तेरा, करूँ तेरा सम्मान, तेरे चरणों में ही बसता मेरा सारा जहान। हे नादान मन, समझ ले ये सच्चाई, माँ एक बार गई तो फिर न लौट पाई। वही सृजन की शक्ति, वही जीवन दानी, वही पहली गुरु, व...

जहरीली कांग्रेस, विभाजनकारी कांग्रेस, देश विरोधी कांग्रेस, जनता की नजर से उतर चुकी है - अरविन्द सिसोदिया

कांग्रेस नेता सोनिया गाँधी,राहुल गाँधी और मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा rss और भाजपा के नेताओं के विरुद्ध उकसावे वाले बयानों का ब्यौरा क्या है...   कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खिलाफ दिए गए बयानों को भाजपा ने "उकसावे वाला", "विवादास्पद" और "हिंसा भड़काने वाला" करार दिया है।  इन बयानों पर अक्सर राजनीतिक घमासान मचता रहा है।अप्रैल 2026 तक के ब्यौरों के अनुसार, मुख्य बयानों का विवरण इस प्रकार है: 1. मल्लिकार्जुन खरगे (कांग्रेस अध्यक्ष) के बयानRSS/BJP को 'जहरीला सांप' बताना (अप्रैल 2026): असम में एक चुनावी रैली (नीलमबाजार) के दौरान खरगे ने RSS और BJP की तुलना एक "जहरीले सांप" से की। उन्होंने कहा, "अगर आप सांप को मारना चाहते हैं, तो वह 'जहरीला सांप' है। अगर आप उसे छुएंगे, तो मर जाएंगे।" उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के खतरों को 'नमाज' (प्रार्थना) के समय भी पहले निपटाया जाना चाहिए।RSS पर प्रतिबंध की मांग: खरगे ने RSS पर प्रतिबं...

अपील खारिज होने पर डिक्री के क्रियान्वयन के लिए नई लिमिटेशन अवधि शुरू होगी: सुप्रीम कोर्ट

अपील खारिज होने पर डिक्री के क्रियान्वयन के लिए नई लिमिटेशन अवधि शुरू होगी: सुप्रीम कोर्ट कानूनी चालाकी खत्म....  2026-04-08  सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी अपील को गैर-हाजिरी (default) के कारण खारिज किया जाता है, तो उससे एक नया लिमिटेशन पीरियड शुरू होता है, और ऐसे में 12 साल के भीतर दायर की गई एग्जीक्यूशन पिटीशन (डिक्री के क्रियान्वयन की अर्जी) मान्य होगी। जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने कहा कि यह तर्क सही नहीं है कि एग्जीक्यूशन पिटीशन की 12 साल की अवधि केवल डिक्री पास होने की तारीख से ही गिनी जाए, खासकर तब जब उस डिक्री के खिलाफ अपील लंबित रही हो। कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें एग्जीक्यूशन पिटीशन को लिमिटेशन के आधार पर खारिज कर दिया गया था। हाईकोर्ट का मानना था कि अपील का डिफॉल्ट में खारिज होना डिक्री होल्डर को नई लिमिटेशन अवधि नहीं देता। सुप्रीम कोर्ट ने इससे असहमति जताते हुए कहा कि अपील मूल वाद (सूट) का ही विस्तार होती है, और यदि अपील किसी तकनीकी कारण—जैसे गैर-हाजिरी या देरी—से खारिज होती है, तब भ...

सामूहिक प्रयासों से भारत बनेगा पुनः वैभव संपन्न राष्ट्र — दुर्गादास

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सामूहिक प्रयासों से भारत बनेगा पुनः वैभव संपन्न राष्ट्र — दुर्गादास - संघ शताब्दी वर्ष पर प्रमुख जन गोष्ठी सम्पन्न बारां। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ बारां नगर द्वारा संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में सार्वजनिक धर्मदा संस्था सभागार में प्रमुख जन गोष्ठी का आयोजन हुआ।  अखिल भारतीय घुमंतू कार्य संयोजक दुर्गादास ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ विगत 100 वर्षों से संस्कारित, अनुशासित एवं संगठित समाज के निर्माण हेतु निरंतर कार्य कर रहा है।  उन्होंने बताया कि संघ के स्वयंसेवक समाज जीवन के प्रत्येक क्षेत्र—शिक्षा, सेवा, सुरक्षा, ग्राम विकास, पर्यावरण संरक्षण एवं सांस्कृतिक जागरण—में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने अपने वक्तव्य में भारत के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारा देश प्राचीन काल में ज्ञान, विज्ञान, शौर्य, कला, कौशल और आर्थिक समृद्धि के क्षेत्र में विश्व का अग्रणी राष्ट्र रहा है। वर्तमान समय में आवश्यकता है कि हम सभी मिलकर सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता और सकारात्मक चिंतन के आधार पर कार्य करें, जिससे भारत पुनः अपने वैभवशाली स्थान को प्राप्त कर सके...

God is within us and also beyond us — Arvind Sisodia

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God is within us and also beyond us — Arvind Sisodia God is within us and also beyond us — Arvind Sisodia Brothers and sisters, Human beings often consider themselves great—taking pride in their knowledge, their strength, and their achievements. This small body of merely 5–6 feet, with limited intellect and understanding, dares to challenge the Supreme Power. It argues, questions, and sometimes even assumes that everything is under its control. But pause for a moment… is that really true? A mother becomes pregnant… she carries life within her, feels it, connects with it… but does she truly know who is creating that child within her womb? Who is shaping that tiny life? Who is forming its eyes, crafting its heart, giving rhythm to its heartbeat? The mother is a medium… but who is the Creator? And a human being… immersed in ego, proud of physical strength, often indulges in injustice and wrongdoing. But does he even know what is happening within his own body? How is blood flow...

ईश्वर तो हमारे भीतर भी है और बाहर भी है - अरविन्द सिसोदिया

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ईश्वर तो हमारे भीतर भी है और बाहर भी है - अरविन्द सिसोदिया  भाइयों और बहनों, मनुष्य अपने आप को बहुत बड़ा समझता है… अपने ज्ञान पर, अपनी शक्ति पर, अपनी उपलब्धियों पर गर्व करता है। मात्र 5–6 फीट का यह शरीर, सीमित बुद्धि और सीमित समझ के साथ, परम सत्ता को भी चुनौती देने लगता है। तर्क करता है, प्रश्न करता है, और कभी-कभी तो यह मान बैठता है कि सब कुछ उसी के नियंत्रण में है। लेकिन ज़रा ठहर कर सोचिए… क्या सच में ऐसा है? एक माँ गर्भवती होती है… वह उस जीवन को अपने भीतर धारण करती है, उसे महसूस करती है, उससे जुड़ती है… लेकिन क्या वह जानती है कि उसके गर्भ में उस शिशु की रचना कौन कर रहा है? कौन है जो उस नन्हे से जीवन को आकार दे रहा है? कौन उसकी आँखें बना रहा है, उसका हृदय गढ़ रहा है, उसकी धड़कन को गति दे रहा है? माँ माध्यम है… पर सृजनकर्ता कौन है? और एक मनुष्य… अपने अहंकार में डूबा हुआ, अपने शरीर की शक्ति पर इतराता हुआ, अन्याय और अत्याचार करता रहता है। लेकिन क्या उसे यह भी पता है कि उसके शरीर के भीतर क्या चल रहा है? उसकी धमनियों में रक्त कैसे बह रहा है? उसके फेफड़ों में श्वास कैसे आ-जा...

हिंदू परिवार परंपरा सभी को सुख और शांति प्रदान करती है RSS Kota

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“कोटा में मातृशक्ति सम्मेलन सम्पन्न " मातृशक्ति राष्ट्र निर्माण की आधारशिला - प्रो. भगवती प्रसाद  मातृशक्ति से सनातन संस्कृति संरक्षण और राष्ट्र चेतना का आव्हान  हिंदू परिवार परंपरा सभी को सुख और शांति प्रदान करती है - प्रो. भगवती प्रसाद कोटा, 08 अप्रैल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, कोटा महानगर की ओर से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूर्ण होनें के अवसर पर शताब्दी वर्ष के क्रम में " मातृशक्ति प्रमुख जन गोष्ठी " का आयोजन बुधवार अपराहन में तलवंडी स्थित राजकीय आयुर्वेदिक योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा महाविद्यालय में रखा गया |  कार्यक्रम में मुख्य वक्ता पेसिफिक यूनिवर्सिटी उदयपुर के कुलगुरु एवं अखिल भारतीय स्वदेशी जागरण संयोजक आदरणीय भगवती प्रसाद जी रहे , गोष्ठी की अध्यक्षता कृषि विश्वविद्यालय, कोटा कुलगुरु श्रीमती विमला ने की साथ ही मंच पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कोटा महानगर के संघ चालक गोपाल लाल गर्ग भी उपस्थित रहे | कृषि विश्वविद्यालय, कोटा कुलगुरु श्रीमती विमला ने राजमाता अहिल्याबाई होल्कर के जीवन से नेतृत्व , रानी लक्ष्मी बाई से व्यक्तित्व की प्रेर...

हिंदुत्व ही देश का राष्ट्रित्व है - बलिराम

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हिंदुत्व ही देश का राष्ट्रित्व है -बलिराम  अखिल भारतीय सामाजिक सद्भावना संयोजक  कोटा | आज दिनांक 07 अप्रैल को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ विवेकानंद नगर द्वारा प्रमुख जन गोष्ठी का आयोजन महावीर नगर प्रथम स्थित सनाडय सामुदायिक भवन में रखा गया| गोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सामाजिक सद्भावना प्रमुख बलिराम जी उनके साथ मंच पर विवेकानंद संघ चालक सत्यनारायण काष्ट उपस्थित रहे |  गोष्ठी का प्रारंभ भारत माता चित्र के समक्ष दीप प्रज्व्वलं एवं पुष्पांजलि के उपरांत राष्ट्रगीत वन्देमातरम के साथ हुआ |  मुख्यवक्ता ने अपने उद्बोधन में बताया राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का निर्माण हिन्दू समाज को शक्ति संपन्न बनाने के लिए है | हिंदुस्तान हिन्दू राष्ट्र है | आज इसी को लेकर भ्रम है, भ्रांतियां है| इसका कारण है कि दुर्भाग्य के कारण हमने जो गुलामी झेलनी पड़ी | उस गुलामी के कारण ही अंग्रेजों ने हमारे गौरव पूर्ण इतिहास को ही विकृतकर दिया गया | जिसके कारण हमारे मन भ्रम पैदा किया गया हमारे धर्म को लेकर, हमारी संस्कृति को लेकर, हमारे राष्ट्...

हिन्दुत्व, भारत की आत्मा है

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“हिन्दुत्व, भारत की आत्मा है” अजमेर महानगर , 7 अप्रैल 2026।  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, अजमेर महानगर द्वारा संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में सूचना केंद्र सभागार में अजमेर के कला साधकों की एक ‘प्रमुख जन गोष्ठी’ का आयोजन किया गया। जिसमें अजमेर में निवास करने वाले कला वर्ग से जाने माने कलाकार एवं प्रमुख जन उपस्थित रहे । मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के श्री अरुण कुमार जैन अखिल भारतीय सह प्रचारक प्रमुख रहे। अरुण जैन ने उद्बोधन देते हुए समाज में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की रचनात्मक भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंनेे कहा कि संगठन के अभाव, आचरण में धर्म को छोड़ने, पराधीनता के काल में सांस्कृतिक आत्महीनता और स्वार्थ केन्द्रित लालसा के कारण समाज पतन की ओर अग्रसर हुआ एवं पराधीन भी हुआ। अत: व्यक्तिगत एवं राष्ट्रीय चारित्र्य से युक्त समाज के निर्माण के लिये पूजनीय डॉ. हेडगेवार जी ने संघ की स्थापना की। इस हेतु संगठन और संगठन हेतु शाखा पद्धति विकसित की। प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं ने समाज जीवन में भारत केन्द्रित विचार पर चलने वाले संगठन खड़े किये। पूजनीय गुरूजी ने संघ के वैचारिक अधिष्...

अपने विचार को इतना फैलादो कि हर बूथ पर राष्ट्रवाद का परचम लहराता रहे - मदन राठौड़

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- अरविन्द सिसोदिया  भाजपा मीडिया संयोजक, कोटा संभाग  9414180151 भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड नें अपने संबोधन में जनसंघ के जन्म से लेकर भाजपा निर्माण तक की गाथा सुनाते हुये कहा कि आज भारत में प्रधानमंत्री मोदीजी के रूप में सक्षम नेतृत्व हमारे पास है। पूरी दुनिया जिन्हे गंभीरता से लेती है। हमारे देश में गैस है पेट्रोल है हम तो श्रीलंका और बांग्लादेश तक की मदद कर रहे हैँ। राठौड़ नें कांग्रेस को ओड़े हाथ लेते हुये कहा कि कांग्रेस देश का हित करने पर विचार नहीं करती बल्कि वह कई दसकों से क परिवार के हित मात्र तक सिमटी हुई है। अब तो वह हताशा और निराशा में निरंतर आराजकता फैलाने की कोशिश करती रहती है। यह देश के प्रति नकारात्मक रवैया है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को आव्हान किया कि वे पुरषोर्थी बनें तेजश्वी बनें उन्होंने आव्हान किया कि अपने विचार को इतना फैलादो कि हर बूथ पर भाजपा और राष्ट्रवाद का परचम लहराता रहे। देश में सिर्फ और सिर्फ राष्ट्रहित की गूंज हो। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष और कोटा से सांसद ओम जी बिरला को कोहनूर हीरा कह कर प्रशंसा की। ---------- कोटा में बोले म...

जनता दलबदलुओं को स्‍वीकार नहीं पाती

लोकसभा चुनाव परिणाम : इन दलबदलुओं को रास नहीं आई BJP, जानिए किस-किसको जनता ने नकारा अन्‍य पार्टियों से भाजपा में शामिल कई नेता चुनाव हार गए हैं। नई दिल्‍ली:- लोकसभा चुनावों (Lok Sabha Elections 2024) के परिणाम कई राजनेताओं के लिए उम्‍मीद के मुताबिक नहीं रहे हैं. खासकर बीजेपी के लिए दूसरी पार्टी से आने वाले नेताओं को टिकट देना जनता को रास नहीं आया है और ऐसे कई नेताओं को मुंह की खानी पड़ी है. एक राजनीतिक पार्टी से जुड़ाव और उसकी विचारधारा की बात करने वाले नेता अचानक से पार्टी बदलते ही नई पार्टी और उसकी विचारधारा की बात करने लगते हैं, कई बार जनता ऐसे दलबदलुओं को स्‍वीकार नहीं पाती है. लोकसभा चुनाव से पहले अन्‍य पार्टियों से भाजपा में शामिल कई राजनेताओं को हार का सामना करना पड़ा है. इसमें कई बड़े नाम शामिल हैं. इन राजनेताओं की भाजपा में शामिल होने की मजबूरियां अलग-अलग हो सकती हैं, लेकिन परिणाम एक ही रहा है और वो है हार.   कृपाशंकर सिंह  महाराष्‍ट्र के पूर्व मंत्री और मुंबई कांग्रेस के अध्‍यक्ष रह चुके कृपाशंकर सिंह 2021 में भाजपा में शामिल हो गए थे. भाजपा ने कृपाशंकर सिंह को ...

भारतीय जनता पार्टी का स्थापना दिवस: विचार से विस्तार तक की यात्रा

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भारतीय जनता पार्टी का स्थापना दिवस,विचार से विस्तार तक की यात्रा 6 अप्रैल भारतीय राजनीति के इतिहास में एक महत्वपूर्ण दिन है। इसी दिन 1980 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की स्थापना हुई थी। आज जब भाजपा अपना 47वां स्थापना दिवस मना रही है, तब यह केवल एक राजनीतिक दल का उत्सव नहीं, बल्कि एक दीर्घ वैचारिक यात्रा का स्मरण भी है—एक ऐसी यात्रा जिसकी जड़ें 1925 तक जाती हैं। इस विचारधारा का मूल 1925 में स्थापित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ा है, जिसकी स्थापना परमपूज्य डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी ने की थी। संघ का उद्देश्य भारतीय समाज में सांस्कृतिक चेतना, राष्ट्रभाव और सनातन परंपराओं के प्रति स्वाभिमान जागृत करना था। यह एक सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन के रूप में विकसित हुआ, जिसने राष्ट्र को सर्वोपरि मानने वाली सोच को मजबूत किया। स्वतंत्रता के बाद का कालखंड अनेक राजनीतिक और वैचारिक संघर्षों से भरा हुआ था। महात्मा गांधी की हत्या के बाद संघ पर आरोप लगाए गए और तत्कालीन नेहरू सरकार द्वारा उस पर प्रतिबंध लगा दिया गया। उस समय संघ के पक्ष में खड़े होने या उसे न्याय दिलाने के लिए...

Sangh Work is a Sacred Divine Mission; Whoever Obstructed It Was Reduced to Naught – Arvind Sisodia

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Press Release Sangh Work is a Sacred Divine Mission; Whoever Obstructed It Was Reduced to Naught – Arvind Sisodia Kota, April 5. Arvind Sisodia—Education Promotion Trustee of the Rajasthan State Textbook Board and a senior intellectual—has launched a sharp and scathing attack on the Congress party and its student wing regarding the unnecessary opposition and anarchic atmosphere they are fomenting against the Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS). He stated, "The Rashtriya Swayamsevak Sangh is the staunch vanguard of *Satya Sanatan* (Eternal Truth) Hindutva. The work of the Sangh is a sacred, divine mission; whoever placed obstacles in its path was themselves reduced to naught. The entire Hindu society stands firmly with the Sangh. It is a revered organization that nurtures and preserves Indian culture and traditions, and is deeply connected to the very soul of the nation. Its volunteers are the standard-bearers of *Sanatan* Hinduism—a force that the 'non-Hi...

गॉड साइंस: ईश्वर स्वयं वैज्ञानिक है — एक विकास यात्रा

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गॉड साइंस: ईश्वर स्वयं वैज्ञानिक है : एक विकास यात्रा - अरविन्द सिसोदिया  - अरविन्द सिसोदिया 9414180151 मानव सभ्यता के आरंभ से ही मनुष्य ने इस प्रश्न पर विचार किया है कि इस ब्रह्मांड की रचना किसने की और यह किस नियम के अनुसार संचालित होता है। प्रारंभिक काल में जब मनुष्य की बुद्धि में विज्ञान का स्पष्ट विकास नहीं हुआ था, समझ कम थी, तब मनुष्य ने प्रकृति की शक्तियों— सूर्य, चंद्रमा, अग्नि, वायु और जल को ही ईश्वर के रूप में स्वीकार किया। अथवा यूँ समझें कि देवीय शक्तियों के रूप में अंगीकार किया। यह आस्था केवल गुणावगुणों के भय का परिणाम नहीं थी, बल्कि उसके भीतर एक गहरी जिज्ञासा और खोज की भावना भी निहित थी। धीरे-धीरे यह समझ विकसित हुई कि ब्रह्मांड किसी अव्यवस्था का परिणाम नहीं, बल्कि नियमों से संचालित एक सुव्यवस्थित तंत्र है—और उन नियमों का मूल स्रोत ही " ईश्वर " है। इसी विचार से “ईश्वर स्वयं वैज्ञानिक है” जैसी अवधारणा जन्म लेती है। वैदिक और प्राचीन भारतीय परंपरा में यह दृष्टिकोण अत्यंत स्पष्ट और गहन रूप में प्रकट होता है। ऋग्वेद में सृष्टि की उत्पत्ति को लेकर गूढ़ प्रश्न...

God Science: God as the Supreme Scientist — A Journey of Evolution

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God Science: God as the Supreme Scientist — A Journey of Evolution — Arvind Sisodia  India  (9414180151) Since the dawn of human civilization, mankind has continuously pondered a fundamental question: Who created this universe, and by what laws does it operate? In the earliest stages, when human intellect had not yet developed a clear understanding of science, people perceived the forces of nature—such as the sun, moon, fire, air, and water—as divine. In other words, these natural forces were accepted and revered as manifestations of divine power. This belief was not merely a product of fear or uncertainty; it was also rooted in deep curiosity and a desire to understand existence. Gradually, human understanding evolved, leading to the realization that the universe is not a product of chaos, but a well-ordered system governed by precise laws. The source of these laws came to be understood as “God.” From this realization emerged the profound idea that “God Himself is...

संघ का विचार भारत के सत्य सनातन का विचार है – मुरलीधर

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, कोटा महानगर द्वारा शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों के निमित्त शिक्षा क्षेत्र के प्रमुखजनों की प्रमुख जनगोष्ठी आयोजित संघ का विचार भारत के सत्य सनातन का विचार है – मुरलीधर कोटा, 3 अप्रैल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में कोटा महानगर में शिक्षा क्षेत्र के प्रमुख जनों की एक प्रमुखजन गोष्ठी का आयोजन गुरुवार को कोटा महानगर में किया गया। कार्यक्रम में कोटा के प्रमुख शिक्षण संस्थानों—भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आई आई आई टी ), राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय (आर टी यू ), कोटा विश्वविद्यालय , राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय , राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय , राजकीय एवं निजी महाविद्यालयों के कार्यरत एवं सेवानिवृत्त आचार्य, प्राध्यापक, शोधार्थी एवं अधिकारीगणों की सहभागिता रही। मंचस्थ मुख्यवक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चित्तौड़ प्रान्त प्रचारक मुरलीधर जी, कोटा विभाग संघ चालक पन्नालाल शर्मा एवं कोटा महानगर संघचालक गोपाल गर्ग रहे। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता चित्तौड़ प्रांत के प्रांत प्रचारक श्रीमान मुरलीधर जी थे। श्रीमान मुरलीधर जी न...