रामायण में वर्णित नक्षत्रों की स्थितियों को लाखों साल पीछे सटीक रूप से सिद्ध किया जा सकता है
खगोलीय गणना और पृथ्वी के अयनचलन (Precession of Equinoxes) के सिद्धांतों के अनुसार, 17.5 लाख वर्ष पूर्व चैत्र मास शिशिर ऋतु (शीत ऋतु या ठंड के मौसम) में आता होगा। इसके पीछे का वैज्ञानिक और गणितीय कारण इस प्रकार है: 1. पृथ्वी का अयनचलन (Precession of Equinoxes) पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमते हुए एक लट्टू की तरह बहुत धीमी गति से डगमगाती (Wobble) भी है। इस गति को अयनचलन कहते हैं। पृथ्वी को ऐसा एक पूरा चक्र (360 डिग्री) पूरा करने में लगभग 25,772 वर्ष का समय लगता है। 2. निरयण कैलेंडर और ऋतुओं का खिसकना हमारा पारंपरिक पंचांग (विक्रम संवत) निरयण (Sidereal) पद्धति पर आधारित है, जिसमें महीनों का निर्धारण आकाश में तारों और नक्षत्रों की निश्चित स्थिति देखकर होता है। दूसरी ओर, ऋतुएं सूर्य की स्थिति (सायन या Tropical वर्ष) से तय होती हैं। अयनचलन के कारण, ऋतु चक्र हर साल नक्षत्रों की तुलना में लगभग 20 मिनट पहले समाप्त हो जाता है। इसका मतलब है कि समय के साथ ऋतुएं हिंदू महीनों में पीछे की ओर खिसकती जाती हैं। 3. 17.5 लाख वर्ष पूर्व की गणितीय गणना यदि हम 17.5 लाख (1,750,000) वर्षों को अयनचलन के एक चक्र की अवध...