कविता - जो स्वयं चढ़ गए राष्ट्रवेदी पर, उन्हें क्या तौलोगे चढ़ावे से
चढ़ावे की चोरी का आरोप हर हिंदू का मस्तक स्वाभिमान से ऊँचा जिस बलिदानी संघर्ष से, उसी गौरव को रामजन्मभूमि कहता हिंदुस्तान गर्व से। क्या तुच्छ चढ़ावे की चोरी का आरोप लगाते हो ? जो स्वयं चढ़ गए राष्ट्रवेदी पर, उन्हें क्या तौलोगे चढ़ावे से! ====1==== जिनकी साँसों में राम बसे, जिनके प्राणों में देश रहा, जिनका जीवन धर्म, समाज और संस्कृति का संदेश रहा। जिनके त्याग ने युगों की पीड़ा को सम्मान दिलाया, उनके माथे कलंक लिखना, खुद के पतन का काम किया। ====2==== जिन्होंने अपना तन अर्पित किया, मन अर्पित किया, सम्मान दिया, पीढ़ियों के स्वाभिमान को जीवन भर नया अभियान दिया। जो अपना सर्वस्व राम के चरणों में समर्पित कर आए, उन पर चढ़ावे का दोष लगानें में तुम्हे लज्जा न आये। ====3==== इतिहास साक्षी है, बलिदानों का मूल्य कभी धन से नहीं होता, श्रद्धा का मोल किसी दान, किसी आभूषण से नहीं होता। जो राष्ट्र और राम के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दें, उनका आकलन तुच्छ चढ़ावे की गिनती से नहीं होता। ====4==== रामजन्मभूमि केवल मंदिर नहीं, युगों के संकल्प का मान है, यह असंख्य कारसेवकों,तपस्वियों और संघर्षों का सम्मान है...