भारत का बड़ा भू-भाग बचाने वाले : डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी
भारत का बड़ा भू-भाग बचाने वाले : डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी राष्ट्रहित के अमर संघर्ष और वर्तमान भारत में उनकी प्रासंगिकता जहाँ हुए बलिदान मुखर्जी, वह कश्मीर हमारा है। जो कश्मीर हमारा है, वह सारे का सारा है।। भारत के स्वतंत्रता-उपरांत राजनीतिक इतिहास में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का नाम राष्ट्र की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के प्रबल समर्थक के रूप में लिया जाता है। उन्होंने न केवल विभाजन के समय बंगाल और पंजाब के बड़े भूभाग को भारत में बनाए रखने के लिए निर्णायक भूमिका निभाई, बल्कि जम्मू-कश्मीर के भारत में पूर्ण एकीकरण के प्रश्न को राष्ट्रीय विमर्श का केंद्र बनाया। आंदोलन करते हुये अपने प्राणों का बलिदान किया। यही बलिदान दिवस 23 जून है। 23 जून को उनकी पुण्यतिथि तथा 6 जुलाई को उनकी जयंती के अवसर पर राष्ट्र उनके योगदान को स्मरण करता है। स्वतंत्र भारत के प्रारंभिक वर्षों में राष्ट्रीय एकता के लिए संघर्ष करते हुए प्राणों का बलिदान देने वाले वे प्रमुख राजनीतिक नेताओं में गिने जाते हैं। जन्म, शिक्षा और प्रारंभिक जीवन डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म 6 जुलाई 1901 को कोलकाता में हुआ। उन...