केशव चालीसा RSS
केशव चालीसा दोहा: राष्ट्रभक्ति के सूर्य तुम, त्याग तपस्या धाम। केशव तुम्हें नमन, सनातन रहेगा आपका नाम॥ जय-जय केशव - केशव, राष्ट्रधर्म के तुम आधार॥1॥ नागपुर में जन्म तुम्हारा, चैत्र शुक्ल दिन अति प्यारा॥2॥ केशव नाम सदा सम्मानित, देशप्रेम में जीवन दानित॥3॥ बाल्यकाल से भाव महान, मातृभूमि का रखते ध्यान॥4॥ देख गुलामी का दुख अपार, मन में जागा क्रांति विचार॥5॥ पढ़ने गए कोलकाता धाम, वहाँ किया तेजस्वी काम॥6॥ स्वाधीनता की जगी उमंग, देशप्रेम के रंगे थे रंग॥7॥ फिर भी मन को शांति न आई, नई दिशा की राह दिखाई॥8॥ गहन किया चिंतन-मनन, राष्ट्र बना अपना जीवन॥9॥ विजयादशमी शुभ दिन पाया, संघ का बीज स्वयं बोया॥10॥ सन् पच्चीस का वह वर्ष महान, जगा दिया हिन्दू अभिमान॥11॥ शाखा पद्धति नई बनाई, सरल राह सबको दिखलाई॥12॥ रोज मिलें सब एक स्थान, बढ़े प्रेम और बढ़े सम्मान॥13॥ खेल-कूद और व्यायाम, संस्कारों का सुंदर काम॥14॥ गीत, कथा और प्रार्थना साथ, राष्ट्रभक्ति का सच्चा पथ॥15॥ पहले लोगों ने हँसी उड़ाई, पर तुमने हिम्मत न गँवाई॥16॥ धैर्य रखा और किया प्रयास, बढ़ता गया संघ का विकास॥17॥ बालकों से शुरू किया काम, फैल...