संदेश

कोटा संभाग मीडिया

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संभाग प्रभारी - श्रीमती ज्योति जी खंडेलवाल 88754 44000 संभाग संयोजक - अरविन्द सिसोदिया 9414180151  1- कोटा शहर जिला प्रभारी - तन्मय जी शर्मा 96496 00006 2- कोटा देहात जिला प्रभारी - शलेश कौशिक 94133 09977 3- बारां जिला प्रभारी - पंकज मेहता 94141 87814 4- बूँदी जिला प्रभारी - शिवांगी सिकरवार 74130 00264 5- झालावाड़ जिला प्रभारी - मदन प्रजापत 96729 87799 ======= प्रदेश प्रवक्ता  1- पंकज मेहता 9414187814 2- लोकेन्द्र सिंह राजावत 9414100911 3- शिवांगी सिकरवार 7413000264 मोर्चो में  1- युवा मोर्चाआईटी में   प्रदेश संयोजक नमन शर्मा  70232 79935 2- युवा मोर्चा में  प्रदेश प्रवक्ता राहुल सिकरवार  3- महिला मोर्चा में  प्रदेश प्रवक्ता रजनी सोनी  ====== 1- जिला कोटा शहर - 13 प्रवक्ता:----- श्री प्रणय दुबे – 9829390009 श्री अशोक जैन – 9829618493 श्री महेश आइछुना – 9782888666 / 9829611668 श्री जगदीश सिंह मोहिल – 7891956991 श्री कालूलाल भील – 9057275962 श्री अमित सेन – 9828142439 श्री राजेन्द्र गुप्ता – 9414179042 आईटी संयोजक: श्रीमती मोनिक...

कांग्रेस खुद की गलती, निर्वाचन आयोग और सरकार के गले में नहीं डाल सकती - अरविन्द सिसोदिया

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कांग्रेस खुद की गलती, निर्वाचन आयोग और सरकार के गले में नहीं डाल सकती - अरविन्द सिसोदिया कोटा, 10 जून। मध्यप्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों पर हो रहे चुनाव में नामांकन फार्म की जाँच में, संलग्न शपथपत्र में जानकारी छुपाने के आरोप के बाद निर्वाचन अधिकारी द्वारा कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कर दिये जाने पर कांग्रेस के द्वारा फैलाये जा रहे झूठ पर, राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी अरविन्द सिसोदिया ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि " कांग्रेस झूठ के नैरेटिव फैलाने के बजाय अपनी गलती और कांग्रेस पार्टी के आंतरिक षड्यंत्रों को स्वीकार करे। " सिसोदिया नें कहा कि " मध्यप्रदेश कांग्रेस के अंदर राज्यसभा प्रत्याशी को लेकर रहा असंतोष ही सुश्री नटराजन के नामांकन पत्र में त्रुटि का कारण बना है। जिसके चलते नामांकन रद्द हुआ। कांग्रेस को झूठे आधारों पर धरना प्रदर्शन के बजाय, अपने नामांकन पत्र भरने वाली टीम की गलती स्वीकार करनी चाहिए।" सिसोदिया ने कहा कि, “शपथपत्र प्रारूप में बहुत स्पष्टता से आपराधिक प्रकरणों की जानकारी मा...

मीडिया

एक राजनीतिक दल जिसके पास प्रवक्ता पैनलिस्ट मीडिया विभाग, सोशल मीडिया विभाग, आई टी विभाग, जिलाध्यक्ष विधायक सांसद हों, उसका आदर्श मीडिया प्रबंधन क्या हो सकता है  ? 1- एक आदर्श राजनीतिक मीडिया प्रबंधन रणनीति वह है जो सभी विभागों (प्रवक्ता, सोशल मीडिया, आईटी, और जनप्रप्रतिनिधियों) को एक साथ जोड़कर एक केंद्रीय संदेश (Central Message) जनता तक पहुंचाए। 2- इस प्रणाली में सभी की भूमिकाएं और कार्यप्रणाली स्पष्ट होती है।इन सभी इकाइयों के साथ एक आदर्श राजनीतिक मीडिया प्रबंधन की रूपरेखा इस प्रकार हो सकती है:- 1. केंद्रीय कमान और समन्वय (Central Command Center)दैनिक एजेंडा बैठक: मीडिया विभाग, सोशल मीडिया और आईटी सेल के प्रमुख हर सुबह एक बैठक करें।मुद्दों का चयन: दिन के मुख्य राजनीतिक मुद्दों, राष्ट्रीय और स्थानीय खबरों पर चर्चा करें।संदेश (Core Message) तय करना: पार्टी का आधिकारिक रुख क्या होगा, यह तय करें। 2. प्रवक्ता और पैनलिस्ट प्रबंधन (Spokespersons & Panelists)मुद्दे आधारित ट्रेनिंग: प्रवक्ताओं को टीवी डिबेट्स के लिए डेटा, फैक्ट्स और पार्टी की नीतियों की ब्रीफिंग दें।रोस्टर प्रणाली: टी...

jaipur जयपुर 8 जून 2026

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परिवारवादी पार्टियों में टूटन और आंतरिक कलह की परंपरा का जन्म कांग्रेस से ही हुआ है

कांग्रेस : टूटन की राजनीति का प्रारंभिक अध्याय 1969 : जब इंदिरा गांधी ने ‘सिंडिकेट’ को चुनौती दी कांग्रेस का पहला बड़ा विभाजन और हाईकमान संस्कृति की शुरुआत। 1978 : आपातकाल की पराजय के बाद फिर टूटी कांग्रेस इंदिरा और संजय गांधी के बढ़ते प्रभाव के खिलाफ असंतोष का विस्फोट। 1999 : सोनिया नेतृत्व पर सवाल और एनसीपी का जन्म विदेशी मूल विवाद के बहाने उभरा नेतृत्व केंद्रीकरण का विरोध। 2011 : जगन की बगावत और आंध्र में कांग्रेस का पतन उत्तराधिकार की आकांक्षा ने जन्म दिया वाईएसआर कांग्रेस को। 1998 : ममता बनर्जी का विद्रोह और तृणमूल का उदय केंद्रीय नेतृत्व से टकराव ने बंगाल में नया राजनीतिक विकल्प खड़ा किया। --- क्षेत्रीय दलों में परिवारवाद की परिणति : विरासत की जंग और विभाजन एनसीपी : चाचा-भतीजे की लड़ाई में बिखरी पवार विरासत शरद पवार के बाद उत्तराधिकारी कौन—यही सवाल बना विभाजन का कारण। शिवसेना : ठाकरे परिवार की विरासत पर दो दावेदार उद्धव और राज के मतभेदों ने जन्म दिया महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना को। समाजवादी पार्टी : मुलायम परिवार में सत्ता संघर्ष चाचा शिवपाल और पुत्र अखिलेश के बीच वर्चस्व की खुली ज...

कविता - मोदीजी के बारह वर्षों में,भारत को मिला स्वराष्ट्र का सम्मान,

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मोदीजी के बारह वर्षों में, भारत को मिला स्वराष्ट्र का सम्मान, पुरखों की थाती सनातन है, हो रहा अब पुनरोत्थान। मोदीजी के बारह वर्षों में  अंत्योदय संकल्प लिए  जनधन खाते घर-घर पहुँचे, खुला विकास का द्वार महान। शौचालय, उज्ज्वला, आवासों से बदला जनजीवन का विधान, जय जय राष्ट्र निर्माण, जय जय भारत महान॥ सदियों की उलझी गाँठों को,  मिला समाधान और सम्मान, धारा 370 हटाकर गूँजा अखंड भारत का जयगान। एक संविधान, एक निशान का साकार हुआ स्वप्न महान, जय जय राष्ट्र निर्माण, जय जय भारत महान॥ अयोध्या की पावन धरती पर, फिर लौटा संस्कृति का मान, श्रीराम मंदिर के निर्माण से खिला करोड़ों का अरमान। श्रद्धा, शौर्य और सभ्यता का जग में बढ़ा सम्मान, जय जय राष्ट्र निर्माण, जय जय भारत महान॥ सीमा पार छिपे आतंक को, मिला करारा उत्तर महान, सर्जिकल स्ट्राइक और वायु प्रहार से बढ़ा देश का अभिमान। नवभारत ने जग को दिखलाया अपना दृढ़ स्वाभिमान, जय जय राष्ट्र निर्माण, जय जय भारत महान॥ तीन तलाक की कुप्रथा टूटी, नारी को मिला अधिकार महान, तैंतीस प्रतिशत आरक्षण से बढ़ा नेतृत्व का अभियान। मातृशक्ति के सशक्त स्व...

वामपंथी अधिनायकवादी विचारधारा : तियानमेन चौक नरसंहार

तियानमेन चौक नरसंहार  (वामपंथी खूनी इतिहास एवं संविधान विरोधी कृत्यों के सन्दर्भ में)  तियानमेन चौक नरसंहार (3–4 जून 1989) वामपंथी अधिनायकवादी विचारधारा की अमानवीय प्रवृत्तियों और उसके छिपे हुए कुटिल उद्देश्यों का एक ज्वलंत प्रतीक है। इस दौरान न केवल हजारों निर्दोष नागरिकों, विशेषकर छात्रों और श्रमिकों, का निर्मम दमन किया गया, बल्कि करोड़ों चीनी नागरिकों के मौलिक संवैधानिक अधिकारों को भी रौंद दिया गया। यह घटना दिखाती है कि जब सत्ता जनभावनाओं से कटकर केवल दमन के बल पर शासन करती है, तो वह रक्तपात और लोकतांत्रिक आकांक्षाओं को कुचलने में भी नहीं चूकती। दरअसल, तियानमेन नरसंहार वामपंथी विचारधारा के चरित्र का कोई अपवाद नहीं था, बल्कि उसकी सतत अमानवीय प्रवृत्तियों की ही एक कड़ी थी। इतिहास के पन्ने पलटने पर स्पष्ट होता है कि वामपंथी अधिनायकवाद का पूरा इतिहास ऐसे ही संविधान-विरोधी अत्याचारों और दमन की घटनाओं से अटा पड़ा है। लेनिन के नेतृत्व में बोल्शेविक क्रांति के बाद लाखों विरोधियों का दमन, स्टालिन के Great Purge के दौरान अनुमानित दो करोड़ से अधिक लोगों की हत्याएँ, और माओत्से तुंग के ...

कविता - बारह वर्षों के शासन ने, मोदीजी ने भारत को स्वाभिमान दिया

कविता -  बारह वर्षों के शासन ने, मोदीजी ने भारत को स्वाभिमान दिया, आजादी पर कब्जा किए, अघोषित लीग से मुक्त किया, महानायक भी, देवता भी, ईश्वर जैसा काम किया। बारह वर्षों के शासन ने, मोदीजी ने भारत को स्वाभिमान दिया। सदियों से जो घाव मिले थे, उन पर मरहम लगवाया, टूटे हुए जनमन में फिर नवविश्वास जगाया, विश्व मंच पर भारत माता का ऊँचा नाम किया। बारह वर्षों के शासन ने, मोदीजी ने भारत को स्वाभिमान दिया। काशी का वैभव लौटाया, अयोध्या का सम्मान बढ़ाया, सोमनाथ की गौरवगाथा को जन-जन तक पहुँचाया, सांस्कृतिक चेतना को फिर से जन-अभियान किया। बारह वर्षों के शासन ने, मोदीजी ने भारत को स्वाभिमान दिया। सीमा पर दुश्मन को उसके घर में जाकर समझाया, भारत अब कमजोर नहीं है, यह दुनिया को बतलाया, सेना के शौर्य और साहस का सदा गुणगान किया। बारह वर्षों के शासन ने, मोदीजी ने भारत को स्वाभिमान दिया। गरीबों को घर, गैस, शौचालय, सम्मानित जीवन दिया, नारी शक्ति को आगे बढ़ने का नया अभियान दिया, वंचित, शोषित, पीड़ित जन को नव-अधिकार प्रदान किया। बारह वर्षों के शासन ने, मोदीजी ने भारत को स्वाभिमान दिया। विश्वगुरु बनने की राहों ...

कांग्रेस राहुल गांधी को भी कोटा-बूंदी से लडाये, तो भी भाजपा ही जीतेगी – अरविन्द सिसोदिया

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कांग्रेस राहुल गांधी को भी कोटा-बूंदी से लडाये, तो भी भाजपा ही जीतेगी – अरविन्द सिसोदिया कोटा, 4 जून। राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा के कोटा में दिए गए बयानों के उत्तर में भाजपा कोटा संभाग मीडिया संयोजक अरविन्द सिसोदिया ने करारा जबाब देते हुये कहा है कि, " राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा की किसी बात को जनता गंभीरता से नहीं लेती, क्योंकि वे राजस्थान की जनता द्वारा कान पकड़कर सिंहासन से उतारे गए गहलोत मंत्रिमंडल के नौकरी चोर मंत्री रहे हैं।" संभाग संयोजक सिसोदिया नें कहा कि " डोटासरा उसी कांग्रेस से हैँ जिसकी गहलोत सरकार लोकभवन के बजाएँ फाइव स्टार होटल के बंद कमरों से चलती थी, जिसके विधायक इस्तीफे देकर अपने ही आलाकमान का बहिस्कार और ब्लेकमेल करते थे। यह उसी कांग्रेस से हैँ जिसमें उपमुख्यमंत्री को नाकारा और निकम्मा कहा जाता था। इन्हें इनके अजूबेपन के कारण ही जनता नें सत्ता से बाहर कर राजनीती में उल्टा लटका दिया। अब इन्हें हर चीज उल्टी दिखती है।"  सिसोदिया ने कहा कि, "कांग्रेसजन हाइकमान में अपने नंबर बढ़ाने ...

मिशनरी और नेहरू परिवार

मिशनरी और नेहरू परिवार  17 अक्टूबर 1952 को तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को एक परिपत्र (पत्र) लिखा था। इसमें उन्होंने निर्देश दिया था कि भारतीय और विदेशी ईसाई मिशनरियों के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव या उत्पीड़न नहीं किया जाना चाहिए। पत्र के मुख्य बिंदु:भेदभाव पर चिंता: नेहरू ने कहा कि उन्हें ऐसी शिकायतें मिली हैं कि कुछ राज्यों में ईसाई मिशनरियों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार किया जा रहा है और उन्हें उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। सेवा कार्यों की सराहना: उन्होंने जोर देकर कहा कि मिशनरियों द्वारा शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में किए जा रहे निस्वार्थ सेवा कार्यों में अनावश्यक बाधा उत्पन्न नहीं की जानी चाहिए।पुराने पूर्वाग्रहों को छोड़ना: नेहरू ने स्वीकार किया कि औपनिवेशिक काल में मिशनरियों का विदेशी ताकतों से जुड़ाव होने के कारण लोगों के मन में उनके प्रति कुछ पूर्वाग्रह थे। लेकिन, स्वतंत्र भारत में इस तरह की पुरानी सोच को खत्म किया जाना चाहिए। ======1======= नहीं, इस संदर्भ में ईसाई मिशनरियों के साथ भारत सरकार या जवाहरलाल नेहरू का कोई आधिक...