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कंगना रनोट पहुंची वीर सावरकर जी की काल कोठरी में

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वीर विनायक दामोदर सावरकर को करीब करीब 11 वर्षों तक कालापानी की सेल्युलर जेल में रखा गया । राष्ट्रवादी अभिनेत्री कंगना राणावत नें हाल ही में वहां पहुच कर इन महान स्वतन्त्रता सेनानियों को नमन किया है ।     सावरकर सेल की तस्वीरें शेयर करते हुए कंगना रनौत ने लिखा, 'किताबों में जो पढ़ाया जाता है वह सच्चा इतिहास नहीं है, बल्कि सच्चा इतिहास इन कोठरियों में ही है।' अपनी इस यात्रा के दौरान कंगना रनौत उस सेल में भी पहुंची जहां वीर सावरकर को बंदी बनाया गया था। सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए इन तस्वीरों में देखा जा सकता है कि वीर सावरकर की तस्वीर के सामने कंगना ध्यान के मुद्रा में बैठी हुई हैं। इस जेल के बाउंड्री की तस्वीर भी कंगना रनौत ने अपने सोशल मीडिया पर पोस्ट की है। सावरकर के बारे में पढ़ाया नहीं गया कंगना ने अपनी इस पोस्ट में लिखा है- आज पोर्ट ब्लेयर में स्थित काला पानी सेल्युलर जेल में वीर सावरकार सेल का दौरा किया। उनका कितना डर रहा होगा कि काला पानी में रखा गया।  ये वह आजादी है जिसे हमारी टेक्स्ट बुक में नहीं पढ़ाया गया। मैंने कोठरी में ध्यान लगाया और वीर सावरकर जी के प्रति अपनी कृतज

भाजपा और मोदी को हटाना आसान नहीं है - प्रशान्त किशोर Prashant Kishor

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को लंबे समय तक केंद्र में रहेगी भाजपा -  प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) विशेष रणनीतिकार के रुप में ख्याति प्राप्त प्रशांत किशोर  ने गोवा के म्यूजियम में एक कार्यक्रम के दौरान कहा, 'बीजेपी आने वाले कई दशक तक भारतीय राजनीति के केंद्र में बनी रहेगी और इससे फर्क नहीं पड़ता है कि वह हारे या जीते. ठीक वैसे ही जैसे कांग्रेस के 40 साल थे. उसी तरह बीजेपी कहीं नहीं जा रही है.'  उन्होंने कहा, 'भारत में जब एक बार आप 30 फीसदी वोट पा लेते हैं तो इतनी जल्दी कहीं नहीं जा रहे. आप इस भ्रम में ना रहें कि लोग गुस्सा हो रहे हैं और वे मोदी को उखाड़ फेकेंगे. हो सकता है लोग मोदी को हटा दें, लेकिन बीजेपी फिर भी राजनीति के केंद्र में बनी रहेगी और कई दशक तक आपको बीजेपी का सामने करना पड़ेगा.' मोदी की ताकत नहीं समझ रहे राहुल: प्रशांत किशोर    इसके साथ ही प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) ने राहुल गांधी (Rahul Gandhi) पर निशाना साधा और कहा कि वह मोदी की ताकत नहीं समझ रहे हैं. वह सोचते हैं कि कुछ समय की बात है, लोग मोदी को सत्ता से बेदखल कर देंगे, लेकिन यह नहीं होने वाला है.'  उन्होंने कहा, 'ज

भारत की महान स्वतन्त्रता सेनानी भगिनी निवेदिता Bhgni Nivedita

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28 अक्तूबर/जन्म-दिवस भारत की महान  स्वतन्त्रता सेनानी भगिनी निवेदिता स्वामी विवेकानन्द से प्रभावित होकर आयरलैण्ड की युवती मार्गरेट नोबेल ने अपना जीवन भारत माता की सेवा में लगा दिया। प्लेग, बाढ़, अकाल आदि में उन्होंने समर्पण भाव से जनता की सेवा की। 28 अक्तूबर, 1867 को जन्मी मार्गरेट के पिता सैम्युअल नोबल आयरिश चर्च में पादरी थे।  बचपन से ही मार्गरेट नोबेल की रुचि सेवा कार्यों में थी। वह निर्धनों की झुग्गियों में जाकर बच्चों को पढ़ाती थी। एक बार उनके घर भारत में कार्यरत एक पादरी आये। उन्होंने मार्गरेट को कहा कि शायद तुम्हें भी एक दिन भारत जाना पड़े। तब से मार्गरेट के सपनों में भारत बसने लगा। मार्गरेट के पिता का 34 वर्ष की अल्पायु में ही देहान्त हो गया। मरते समय उन्होंने अपनी पत्नी मेरी से कहा कि यदि मार्गरेट कभी भारत जाना चाहे, तो उसे रोकना नहीं। पति की मृत्यु के बाद मेरी अपने मायके आ गयी। वहीं मार्गरेट की शिक्षा पूर्ण हुई। 17 साल की अवस्था में मार्गरेट एक विद्यालय में बच्चों को पढ़ाने लगी। कुछ समय बाद उसकी सगाई हो गयी; पर विवाह से पूर्व ही उसके मंगेतर की बीमारी से मृत्यु हो गयी। इससे मा

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी ( Statue of Unity ) : राष्ट्र का भौगोलिक एकीकरण करने वाले महानायक सरदार वल्लभभाई पटेल को समर्पित

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           गुजरात सरकार द्वारा 7 अक्टूबर 2010 को इस परियोजना की घोषणा की गयी थी। इस मूर्ति को बनाने के लिये लोहा पूरे भारत के गाँव में रहने वाले किसानों से खेती के काम में आने वाले पुराने और बेकार हो चुके औजारों का संग्रह करके जुटाया गया। ... इस अभियान का नाम “स्टैच्यू ऑफ यूनिटी अभियान“ दिया गया।     सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय एकता ट्रस्ट ने इस कार्य हेतु पूरे भारतवर्ष में 36 कार्यालय खोले, जिससे लगभग 5 लाख किसानों से लोहा जुटाने का लक्ष्य रखा गया। इस अभियान का नाम “स्टैच्यू ऑफ यूनिटी अभियान“ दिया गया। 3 माह लम्बे इस अभियान में लगभग 6 लाख ग्रामीणों ने मूर्ति स्थापना हेतु लोहा दान किया। इस दौरान लगभग 5,000 मीट्रिक टन लोहे का संग्रह किया गया।         मूर्ति निर्माण के अभियान से “सुराज“ प्रार्थना-पत्र बना जिसमे जनता बेहतर शासन पर अपनी राय लिख सकती थी। सुराज प्रार्थना पत्र पर 2 करोड़ लोगों ने अपने हस्ताक्षर किये, जो कि विश्व का सबसे बड़ा प्रार्थना-पत्र...    स्टैच्यू ऑफ यूनिटी ( Statue of Unity ) के (विश्‍व की सबसे ऊॅची प्रतिमा जो कि गुजरात में बनायी गयी है) कुछ महत्‍वपूर्ण तथ्‍यों के बार

हनुमान चालीसा hanuman chalisaa की रचना गोस्वामी तुलसीदास जी ने जेल में की थी

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  हनुमान चालीसा की रचना गोस्वामी तुलसीदास जी ने जेल में की थी हनुमान चालीसा की रचना गोस्वामी तुलसीदास जी ने की थी और इसकी रचना किसी आश्रम में या दरबार में नहीं की गई थी. हनुमान चालीसा की रचना मुगल शासक अकबर की जेल में हुई थी. आप शायद ही जानते होंगे कि हनुमान चालीसा जेल में लिखी गई थी... * हनुमान चालीसा कब लिखा गया क्या आप जानते हैं। नहीं तो जानिये, शायद कुछ ही लोगों को यह पता होगा?* *पवनपुत्र हनुमान जी की आराधना तो सभी लोग करते हैं और हनुमान चालीसा का पाठ भी करते हैं, पर यह कब लिखा गया, इसकी उत्पत्ति कहाँ और कैसे हुई यह जानकारी बहुत ही कम लोगों को होगी।* *बात 1600 ईस्वी  की है यह काल अकबर और तुलसीदास जी के समय का काल था।* *एक बार तुलसीदास जी मथुरा जा रहे थे, रात होने से पहले उन्होंने अपना पड़ाव आगरा में डाला, लोगों को पता लगा कि तुलसीदास जी आगरा में पधारे हैं। यह सुन कर उनके दर्शनों के लिए लोगों का ताँता लग गया। जब यह बात बादशाह अकबर को पता लगी तो उन्होंने बीरबल से पूछा कि यह तुलसीदास कौन हैं।* *तब बीरबल ने बताया, इन्होंने ही रामचरित मानस का अनुवाद किया है, यह रामभक्त तुलसीदास जी है, म

जम्मू और कश्मीर का विलय RSS संघ के द्वितीय सरसंघचालक परम पूज्य गुरूजी के प्रयास से संभव हुआ था

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    जम्मू और कश्मीर का विलय संघ के द्वितीय सरसंघचालक परम पूज्य गुरूजी के कारण संभव हुआ     जम्मू-कश्मीर का मुद्दा तब खड़ा हुआ, जब देश के विभाजन की घोषणा हुई और कश्मीर के महाराजा हरी सिंह कश्मीर को एक स्वतंत्र राष्ट्र रखना चाहते थे। क्यों कि पंडित जवाहरलाल नेहरू से उनके सम्बंध अच्छे नहीं थे तथा उन्होने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान नेहरूजी को गिरफतार कर भारत भेजा था, इसलिये एक बडा भय भी उनके मन में था। महाराजा शेख अब्दुल्ला के घोर विरोधी थे एवं उन्होने उसे कैद किया हुआ था। जबकि नेहरूजी शेख को सर्वोच्च सखा मानते थे। इसीलिये कश्मीर विलय का कार्य नेहरू जी ने अपने पास रखा हुआ था।    पाकिस्तान कश्मीर सहित बडे भूभाग को हथियाना चाहता था , उसकी कूटनीति एवं कश्मीर महाराजा की दुविधा से  लौहपुरुष गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल भली भांती परिचित थे। गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल  और उनके सेक्रेटरी वीपी मेनन के अथक प्रयासों से 550 से भी ज्यादा रजवाड़े भारत में विलय कर चुके थे। किन्तु जवाहरलाल नेहरू कश्मीर की समस्या को खुद सुलझाना चाहते थे, लेकिन सुलझाने की जगह उन्होंने इसे और भी जटिल बना दिया।   जिन्ना जम

आप अपने यहाँ के local products खरीदें - पी एम नरेंद्र मोदी

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 - अरविन्द सिसौदिया 9414180151 प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी का स्वदेशी वस्तुओं की खरीददारी का आग्रह बहुत ही अच्छा विचार है।  हमें उसका अनुसरण करना चाहिये एवं लोगों को अनुसरण के लिये प्रोत्साहित करना चाहिये। देशहित के इस अभियान से सभी को जुडना चाहिये।     देश  में बना सामान खरीदें -- मोदी Made in India खरीदने पर रहे जोर पीएम मोदी ने कहा, मैं आपसे फिर ये कहूंगा कि हमें हर छोटी से छोटी चीज, जो Made in India हो, जिसे बनाने में किसी भारतवासी का पसीना बहा हो, उसे खरीदने पर जोर देना चाहिए। और ये सबके प्रयास से ही संभव होगा। पीएम ने कहा कि आज भारतीय कंपनियों में न केवल रिकॉर्ड निवेश आ रहा है बल्कि युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं. स्टार्ट-अप में रिकॉर्ड निवेश के साथ, रिकॉर्ड स्टार्ट-अप और यूनिकॉर्न बनाए जा रहे हैं. अपने संबोधन के दौरान, प्रधान मंत्री ने सभी भारतीयों से ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों को खरीदने का आग्रह किया. इसके अलावा, उन्होंने नागरिकों से स्वच्छ भारत अभियान की तरह ही ‘वोकल फॉर लोकल’ को एक जन आंदोलन में बदलने का भी आग्रह किया. प्रधान मंत्री ने ‘मेड इन इंडिया’ पिच

आर्यन खान ड्रग्‍स केस : समीर वानखेड़े पर 'आधारहीन' और 'शरारत पूर्ण' हवा - हवाई आरोप मात्र डराने के लिए ..

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- अरविन्द सिसोदिया आर्यन ड्रग्‍स केस : समीर वानखेड़े  पर 'आधारहीन' और 'शरारत पूर्ण' हवा - हवाई आरोप मात्र डराने के लिए हैं, ये आरोप अदालत में भी नहीं टिक सकते। यह मात्र  आर्यन नामक खान को बचाने हेतु की जा रही गुलामी का षड्यन्त्र मात्र है। अभिनेता शाहरुख खान के नशेड़ी बेटे को एक ईमानदार अधिकारी ने पकड़ क्या लिया, उसे दवानें, डराने और हताश करने की राजनीति शिरू हो गई ? ईमानदार अफसर को नहीं खरीद सके तो चश्मदीदों को खरीदा जा रहा है । चश्मदीदों का बिकना,बदल जाना आम बात है । भारत में ज्यादातर अपराधी इसी कारण बरी हो जाते हैं। बच जाते हैं । महाराष्ट्र सरकार को मुंबई को पंजाब बनने से रोकना चाहिये था मगर वह पंजाब सरकार की तरह ही अपराधियों को संरक्षण प्रदान कर रही है । एक नसेड़ी से उसके सप्लायर तक पहुचना आम बात है । महाराष्ट्र में सप्लायर को बैकअप देनें जिस तरीके से राज्य सरकार का एक मंत्री उतरा यह भी जांच का विषय है । उसका पर्सनल इनट्रस्ट क्यों ।  शिवसेना को जबाव देना होगा कि नसेड़ी को पकड़ना महाराष्ट्र का अपमान कैसे ?  महाराष्ट्र में केंद्र और राज्य के बीच जो संघर्ष अनिल देशमुख, परमवी

विट्ठल भगवान के भक्त सन्त शिरोमणि नामदेव जी महाराज

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*26 अक्तूबर/जन्म-दिवस* *गोविन्द भक्त सन्त नामदेव* निर्गुण सन्तों में सन्त नामदेव का नाम अग्रणी है। उनका जन्म 26 अक्तूबर, 1270 ई. को महाराष्ट्र के नरसी बामनी नामक गाँव में हुआ था। इनके पिता श्री दामाशेट और माता श्रीमती गोणाई थीं। कुछ लोग इनका जन्मस्थान पण्डरपुर मानते हैं। इनके पिताजी दर्जी का काम करते थे; जो आगे चलकर पण्डरपुर आ गये और विट्ठल के उपासक हो गये। वे विट्ठल के श्रीविग्रह की भोग, पूजा, आरती आदि बड़े नियम से करते थे। जब नामदेव केवल पाँच वर्ष के थे, तो इनके पिता को किसी काम से बाहर जाना पड़ा। उन्होंने विट्ठल के विग्रह को दूध का भोग लगाने का काम नामदेव को सौंप दिया। अबोध नामदेव को पता नहीं था कि मूर्त्ति दूध नहीं पीती, उसे तो भावात्मक भोग ही लगाया जाता है।  नामदेव ने मूर्त्ति के सामने दूध रखा, जब बहुत देर तक दूध वैसा ही रखा रहा, तो नामदेव हठ ठानकर बैठ गये। बोले - जब तक तुम दूध नहीं पियोगे, मैं हटूँगा नहीं। जब तुम पिताजी के हाथ से रोज पीते हो, तो आज क्या बात है ? कहते हैं कि बालक की हठ देखकर विट्ठल भगवान प्रगट हुए और दूध पी लिया। बड़े होने पर इनका विवाह राजाबाई से हुआ। उससे उन्हें

माता यशोरेश्वरी Jeshoreshwari शक्तिपीठ ( बांग्लादेश )

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 यशोरेश्वरी शक्तिपीठ      बांग्लादेश के खुलना जिला के यशोर ( जैसोर ) में अवस्थित है माता यशोरेश्वरी शक्तिपीठ। करतोयत शक्तिपीठ एवं चट्टल भवानी शक्तिपीठ के बाद यह बांग्लादेश का तीसरा सबसे प्रमुख शक्तिपीठ है जो की वहाँ रहने वाले हिंदुओं के आस्था का केंद्र है।* * पौराणिक आख्यायिका के अनुसार भगवान विष्णु के चक्र से विच्छिन्न माता सती के हाथ एवं पैर का यहां निपात हुआ था। हालांकि कुछ विद्वानों का मत है कि यहां पर माता के बाएं हाथ की हथेली गिरी थी। इस शक्तिपीठ की शक्ति को 'यशोरेश्वरी माता' एवं भैरव को 'चन्द्र' कहते हैं।* *' यशोरेश्वरी माता' का यह मंदिर पहले 'अनारी' नाम से जाना जाता था। कहा जाता है कि इस मंदिर में लगभग 100 दरवाजे थे। साथ ही मंदिर के पास में ही एक बड़ा आयताकार रूप का भव्य मंच हुआ करता था। यह मंच ऊपर से ढका हुआ रहता था जिसे नट मंदिर कहा जाता था। यहां आने वाले भक्त, इस नट मन्दिर के पास खड़े होकर माता का दर्शन करते थे।*  * जब भारत का बंटवारा हुआ था तब भारतीय हिन्दुओं ने अपने कई तीर्थ स्थल, शक्तिपीठ और प्राचीन मंदिरों को खो दिया। यह मन्दिर भी उनमें से ह

सावधान कोरोना फिर पैर पसार रहा है

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पिछले कुछ दिनों में चीन, रूस  और यूरोप में कोरोना के मामले पर तेजी से बढ़े हैं ।      रूस ने पूरे देश में लॉकडाउन लगा दिया है । बताया जाता है कि पिछले 24 घंटे में रूस में लगभग 38000 नए मामले आए हैं और 1000  के लगभग लोगों की मौत हो गई है।     इसी तरह से चीन में भी कुछ नए मामले आए हैं जिन को देखते हुए वहां भी लॉकडाउन  / पाबंदियां लगाई गई हैं ।  चीन में 11 प्रान्तों में कोरोना फैला है, वहाँ भी अनेकों पाबन्दियाँ लगा दी गई हैं ।   यूरोप में भी 39 देशों में कोरोना की बढ़ोत्री देखी जा रही है । अर्थात कोरोना से अभी हम पूरी तरह मुक्त नहों हुये है ।  सावधानी आवश्यक है । भीड़भाड़ से बचें, मास्क जरूर पहनें । --------- बीजिंग चीन में तेजी से बढ़ते कोरोना वायरस के मामलों ने पूरी दुनिया की चिंता को बढ़ा दिया है। चीन कोविड वैक्सीनेशन के मामले में दुनिया पहले नंबर पर है। चीन में अब तक कोविड वैक्सीन के 223 करोड़ से ज्यादा डोज लगाए जा चुके हैं। इसके बावजूद इस देश में फिर से कोरोना के पैर पसारने से हड़कंप मचा हुआ है। राजधानी बीजिंग समेत कई शहरों में बड़े पैमाने पर लोगों की जांच की जा रही है। जिन व्यक्तियों क

Deepawali : Great Indian Festival Victory of light above Darkness.

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Diwali is a festival of lights. It is a Hindu festival. Diwali or Deepawali is one of the most famous Hindu festivals. Diwali symbolizes the religious victory of light above darkness. The Hindu families wait with all their excitement to greet this famous festival, the festival of lights. The people do many rituals, many preparations both for greeting the festival, during the festival and to end the festival. The people remain busy these days.  The festival generally cascades between the mid-October and mid-November. Diwali is normally celebrated eighteen days after the Dussehra. In addition to these preparations and rituals in Diwali, people also clean, maybe sometimes renovates, decorates, colors their homes and their working place to make it perfectly clean and hygienic. On the days of Diwali and also sometimes before some days of Diwali people starts decorating their houses with various types of lights etc. to make it look attractive, neat, clean and of course beautiful. The people

भारतीय शिक्षा Indian-education-system में स्वभाषा, स्वसंस्कृति एवं स्वविश्वास स्थापित होने चाहिये- अरविन्द सिसोदिया

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भारतीय संस्कृति को समाप्त करने का अंग्रेजी षड्यन्त्र बहुत ही सुव्यवस्थित था, आजादी के बाद इससे मुक्त होना चाहिए था, दुर्भग्यवश यह अभी तक जारी है । इंग्लैंड में पहला स्कूल 1811 में खुला उस समय भारत में  732000 गुरुकुल थे!  खोजिए हमारे गुरुकुल कैसे बन्द हुए ❓ गुरुकुल कैसे खत्म हो गये❓ आपको पहले ये बता दे कि हमारे सनातन संस्कृति परम्परा के गुरुकुल मे क्या क्या पढाई होती थी ! आर्यावर्त के गुरुकुल के बाद ऋषिकुल में क्या पढ़ाई होती थी ये जान लेना आवश्यक है! इस शिक्षा को लेकर अपने विचारों में परिवर्तन लायें और प्रचलित भ्रांतियां दूर करें ! 01 अग्नि विद्या (Metallurgy) 02 वायु विद्या (Flight)  03 जल विद्या (Navigation)  04 अंतरिक्ष विद्या (Space Science)  05 पृथ्वी विद्या (Environment) 06 सूर्य विद्या (Solar Study)  07 चन्द्र व लोक विद्या (Lunar Study)  08 मेघ विद्या (Weather Forecast)  09 पदार्थ विद्युत विद्या (Battery)  10 सौर ऊर्जा विद्या (Solar Energy)  11 दिन रात्रि विद्या  12 सृष्टि विद्या (Space Research)  13 खगोल विद्या (Astronomy)  14 भूगोल विद्या (Geography)  15 काल विद्या (Time)  16

शर्मनाक प्रदर्शन, देश की प्रतिष्ठा से खिलवाड़- अरविन्द सिसोदिया

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अरविंद सिसोदिया 9414180151 भारत पाकिस्तान से T20 क्रिकेट मैच 24  अक्टूबर 2021 को दुबई में शर्मनाक तरीके से हार गया है । जिस तरीके से भारतीय टीम खेली उसने कप्तान विराट कोहली को छोड़ दिया जाए तो , बाकी 10 खिलाड़ी क्या कर रहे थे यह देश का एक -  एक व्यक्ति सोच रहा है ।      क्योंकि सवाल यह है कि जब देश की प्रतिष्ठा के साथ किसी मैदान में हम उतरते हैं तो हमें अपना उच्चतम सिद्ध करना चाहिए , लेकिन पाकिस्तान के विरुद्ध टीम इंडिया के ओपनर इस तरह खेलें जैसे वह क्रिकेट खेलना ही नहीं जानते हैं और यही सब बोलेरो ने भी किया जैसे वह बॉलिंग ही नहीं जानते हों ।       ऐसा नहीं होना चाहिए था , कहीं ना कहीं जब टीम या खिलाड़ी इस तरह के प्रदर्शन करते हैं तो उन पर एक भारी जुर्माना भी लगाया जाना चाहिए, ताकि वह इस सावधानी में रहे कि,  वे सही नहीं खेले तो उन पर कोई जुर्माना या दंडात्मक कार्यवाही सकती है ।      क्योंकि जिस गैर जिम्मेवार तरीके से भारतीय क्रिकेट टीम ने T - 20 मैच खेला उसकी तो कल्पना ही नहीं की जा सकती । एक ऐसी टीम जो लगभग विजेता रही है वह इस तरह की शर्मनाक तरीके से हारे , यह जांच का विषय भी है और क्

संत ज्ञानेश्वरजी Sant Gyaneshwar : हिन्दुत्व की अलौकिक चेतना के साक्ष्य

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    Sant Gyneshwar Ji  - अरविन्द सिसोदिया 9414180151  भारत भूमि पर अनेकानेक दिव्य महापुरूष अवतरित होते रहे है। उन्होने हिन्दुत्व की अलौकिक चेतना के जीवंत साक्ष्य प्रस्तुत किये है। इसी तरह का एक महान संत परिवार के रूप में समाज को धर्म का मार्ग दिखानें संत ज्ञानेश्वर जी औैर उनके भाईयों एवं बहन का अवतरण हुआ था । इतना ही नहीं तंत्र शक्ति के महान सिद्ध चांगदेव भी उनके समकक्ष रहे हैं ,वे संत ज्ञानेश्वर जी के शिष्य बन गये थे। उनके जीवन पर प्रकाश डालने वाले दो आलेख संलग्न करते हुये आग्रह है कि इस तरह के महापुरूषों के जीवन वृत का अवश्य मनन करना चाहिये। हिन्दुत्व की अलौकिक चेतना के साक्ष्य Sant Gyanesgwar:Evidence of the supernatural consciousness of Hinduism     जब चांगदेव ने संत ज्ञानेश्वर का अहंकार रहित यौगिक बल देखा, तो उनकी समझ में आ गया कि चमत्कार साधना नहीं है, बल्कि इससे अहंकार जागता है। साधना तो अहंकार को विनष्ट कर देती है। सबसे बड़ा चमत्कार तो अंतर्मन में घटित होता है। उन्होंने ज्ञानेश्वर को साष्टांग प्रणाम किया और शिष्यत्व प्रदान करने की विनती करने लगे। -------------------

100 करोड़ मुफ्त वेक्सिनेशन, कोटि कोटि धन्यवाद मोदी जी

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🌷 *जरा ध्यान से पढ़े व सोचे...*🙂 कुछ तथ्य कम ज्यादा हो सकते हैं, किन्तु आल ओवर , मोदी जी ने बहुत ही अच्छे तरीके से, इस महामारी काल में देश का नेतृत्व किया और सभी व्यवस्थाएं श्रेष्ठतम कीं, उन्हें उन्हें कोटि कोटि धन्यवाद । - अरविन्द सिसोदिया ----/----- *भारत के प्रधानमंत्री* माननीय नरेंद्र मोदी जी ने *मुफ्त टीकाकरण* 100 करोड़ के पार पहुंचाकर यह साबित कर दिया है कि  वे *मानवता के सच्चे मसीहा* है *क्या आपको  पता है कि इस 100 करोड़ वैक्सीन की कीमत कितनी होगी ..*❓❓ *(एक आंकड़े के अनुसार,)* *इन 100 करोड़ में* *88% कोविशिल्ड,* और  *12% कोवक्सीन के टीके लगे* हैं .. *>> अब तक लग चुके ~* *कोवैक्सिन की कीमत* = *6,85,40,00,00,000* रू *(छह खरब, पच्चासी अरब, = चालीस करोड़ रू)* और  *कोविशील्ड की कीमत* = *1,69,20,00,00,000* रू  *(एक खरब, उनहत्तर अरब, बीस करोड़ रू) हुए।*  *~ मतलब >>* *प्रधानमंत्री जी ने अब तक*  *8,54,60,00,00,000*₹ *(आठ खरब, चौवन अरब, साठ करोड़)*  *> इतने रुपये की वैक्सीन अब तक मुफ्त लगवा चुके।* *> अभी और टीका लगाने का काम चल ही रहा है ...*   *जो लोग पेट्रोल डीजल व गैस के

पाकिस्तान के हिंदुत्व का चौकानें वाला इतिहास

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पाकिस्तान का हिन्दू इतिहास, जानकर चौंक जाएंगे आप....        भारत के प्राचीन और हिन्दू ग्रंथों में सिंधु नामक देश के बारे में उल्लेख मिलता है। इस सिंधु देश के बारे में ग्रंथों में विस्तार से लिखा हुआ है। सिंधु घाटी की सभ्यता का केंद्र स्थान है पाकिस्तान। इसी सभ्यता के दो नगर चर्चित है- मोहनजोदड़ो और हड़प्पा। यह सभ्यता बलूचिस्तान के हिंगलाज मंदिर से भारत के राजस्थान और हरियाणा (भिर्राना और राखीगढ़ी) तक फैली थी। पहले की खुदाई और शोध के आधार पर माना जाता था कि 2600 ईसा पूर्व अर्थात आज से 4617 वर्ष पूर्व हड़प्पा और मोहनजोदेडो नगर सभ्यता की स्थापना हुई थी। कुछ इतिहासकारों के अनुसार इस सभ्यता का काल लगभग 2700 ई.पू. से 1900 ई. पू. तक का माना जाता है।       आईआईटी खड़गपुर और भारतीय पुरातत्व विभाग के वैज्ञानिकों ने सिंधु घाटी सभ्यता की प्राचीनता को लेकर नए तथ्‍य सामने रखे हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह सभ्यता 5500 साल नहीं बल्कि 8000 साल पुरानी थी। इस लिहाज से यह सभ्यता मिस्र और मेसोपोटामिया की सभ्यता से भी पहले की है। मिस्र की सभ्यता 7,000 ईसा पूर्व से 3,000 ईसा पूर्व तक रहने के प्रमाण मिलते है