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असहिष्णु अमेरिकियों को अपने भीतर झांकना चाहिए - अरविंद सिसोदिया

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प्रेस विज्ञप्ति असहिष्णु अमेरिकियों को अपने भीतर झांकना चाहिए - अरविंद सिसोदिया 30 अगस्त, कोटा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ /आरएसएस के खिलाफ अमेरिकी संस्थाओं और कुछ थिंक-टैंकों द्वारा लगातार फैलाए जा रहे नकारात्मक नैरेटिव पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन न्यासी एवं वरिष्ठ विचारक अरविंद सिसौदिया ने अमेरिका को कड़ा आईना दिखाया है। उन्होंने कहा कि, "भारत के सांस्कृतिक संगठन पर कोई भी टिप्पणी करने से पहले अमेरिका को अपने स्वयं के क्रूर और रक्तरंजित इतिहास को देखना चाहिए। दुनिया भर में मानवाधिकारों का ढोंग रचने वाला अमेरिका वास्तव में विश्व का सबसे बड़ा अत्याचारी, हिंसक और नरसंहारक देश है, जो अपनी बादशाहत के लिए चौबीस घंटे और 365 दिन दूसरे देशों के खिलाफ षड्यंत्र करता रहता है।" उन्होंने कहा कि " प्रधानमंत्री मोदीजी के नेतृत्व में भारत तेजी से उभरती अर्थ व्यवस्था बन रहा है जो कि अमेरिका के लिए सबसे बड़ी चुभन है और वह भारत के विरुद्ध लगातार अवरोध खडे कर रहा है, जिसे पूरी दुनिया महसूस कर रही है। " उन्होंने कहा क...

कविता - दरी बिछाये कार्यकर्ता, गद्दार करे जजमानी

कविता -   दरी बिछाये  कार्यकर्ता , जजमान बनें गद्दार - अरविन्द सिसोदिया  दरी बिछाये कार्यकर्ता , गद्दार करे जजमानी, वाहरी राजनीती तूनें अपनों को सगी न मानी ,  जनता से का का करेगी बेईमानी। =====1===== जिंदाबाद-मुर्दाबाद में बीत गई सारी उम्र, कार्यकर्ता फिर भी ढूंढता रहा अपना मुकाम  धूप में झंडा उठाया, बारिश में नारे लगाए, अपनों के लिए जाने कितने जूते घिसाए। दरी बिछाये वफादार, जजमान बनें गद्दार, वाहरी राजनीती तू अपनों की सगी नहीं,  जनता का क्या करेगी हॉल। =====2===== जो कल तक देते थे गाली, आज गले के हार, मौका मिलते ही बदल गए रिश्ते और विचार। जिसने बुरे वक्त में साथ दिया,वो आज भी कतार , कल के विरोधी बने आपके दरबार  न  कोई धरम कोई शरम न कोई ईमान। कार्यकर्ता सीढ़ी बना, सब चढ़ गए आसमान, मंजिल मिलते ही भूल गए उसका सारा एहसान। =====3===== दरी बिछाये वफादार जमान बनें गद्दार वाहरी राजनीती तू अपनों की सगी नहीं,  जनता का क्या करेगी हॉल। जिंदाबाद-मुर्दाबाद में बीत गई सारी उम्र, फिर भी कार्यकर्ता ढूंढता रहा अपना मुकाम हर कदम। धूप में झंडा उठाया, बारिश...

Instead of Opposing the RSS, Intolerant Americans Should Look Within — Arvind Sisodia

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Instead of Opposing the Sangh, Intolerant Americans Should Look Within — Arvind Sisodia Kota, August 30: Strongly reacting to what he described as a continuing negative narrative against the Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) by American institutions and certain think tanks, Arvind Sisodia, Trustee for Education Promotion of the Rajasthan State Textbook Board and senior thinker, has hit back at the United States, urging it to examine its own history before passing judgment on India's cultural organizations. "Before branding India's cultural organizations as 'intolerant,' America should look into its own past—a history marked by violence, bloodshed and grave violations of human rights. A country that presents itself as the global champion of human rights has itself been responsible for some of the most violent episodes in modern history and continues to pursue policies aimed at preserving its global dominance," Sisodia said. India and the Sangh's...

मोदी क्यों जरूरी है

मोदी क्यों जरूरी है? 1-- जेवर एयरपोर्ट का निर्माण। 2-- 5 राज्यों में UCC लागू करना। 3-मिस काल पर गैस सिलेंडर; 4-आनलाईन बिलों का भुगतान; 5-यू पी आई पेमेंट; 6-डी जी लोकर 7-जन औषधि केंद्र 8-आयुष्मान कार्ड 9-नयी संसद भवन 10-फ्री वैक्सीनेशन  11-जन धन योजना  12-सर्जिकल स्ट्राईक 13-आप्रेशन सिंदूर  14-तीन तलाक़ बिल 15-आधार लिंक 16-फास्ट टैग 17-चिनाब ब्रिज 18-जम्बू की सुरंग 19- गंगा एक्सप्रेस-वे  20-काशी कोरीडोर 21-विश्वनाथ कोरीडोर 22-केदारनाथ पुनर्निर्माण  23-श्री राम मंदिर निर्माण  24-सुकन्या समृद्धि योजना 25-शौचालयों का निर्माण  26-रेलवे पटरियों का दोहरीकरण  27-टिकट बुकिंग में दिन कम 28-टिकट कैंसिलेशन सुविधा  29-स्वर्णिम चतुर्भुज योजना 30-भारत माला प्रोजेक्ट  31-18 एम्स का निर्माण  32-S I R  33-महात्मा गांधी सेतु पुनर्निर्माण  34-भूपेन हजारिका सेतु  35-सेना का आधुनिकीकरण  36-मेक इन इंडिया  37-ड्रोन क्रांति  38-किसानों के खाते में सीधे पैसे 39-राशन डिजिटलाईजेशन  40-फ्री राशन 41-नोटबंदी 42-G S T लागू करना ...

कविता - रक्षाबंधन पर्व नहीं, कर्तव्य है बहन के प्रति

कविता  रक्षाबंधन पर्व नहीं, कर्तव्य है बहन के प्रति - अरविन्द सिसोदिया  रक्षाबंधन पर्व नहीं, कर्तव्य है बहन के प्रति, संकल्प है समाज की शक्ति के प्रति। भाई-बहन के अटूट प्रेम की प्रतिष्ठा के प्रति, इसमें न कमी आने देना, यह संकल्प है जगत-जननी के प्रति। रक्षाबंधन पर्व नहीं, कर्तव्य है बहन के प्रति। ====1==== राखी केवल धागा नहीं, विश्वास की पहचान है, बहना के स्नेह में ममता, भाई में रक्षा का मान है। भाई दूज भी कहता है, रिश्ता रहे अटूट सदा, बहन का सम्मान और सुरक्षा, यही धर्म का विधान है। नारी का आदर करना, सनातन की पहचान है, नारी के सम्मान से ही घर, समाज और राष्ट्र महान है। ====2==== नारी जननी, नारी शक्ति, नारी जीवन का आधार है, दुर्गा में शक्ति, सरस्वती में ज्ञान, लक्ष्मी का अवतार है। वेदों में गूँजी गार्गी-मैत्रेयी की ज्ञानमयी वाणी, नारी के साहस और सामर्थ्य की अमर निशानी। नारी अबला नहीं, वह सृजन और सामर्थ्य की कर्ता है, उसके अधिकारों का सम्मान ही संस्कृति का सम्मान है। ====3==== शिक्षा मिले, सुरक्षा मिले, स्वतंत्रता का अधिकार मिले, हर बेटी को आगे बढ़ने के समान अवसर मिले। नारी केवल प...

ईश्वर में भी मातृशक्ति को बराबरी का दर्जा देता है हिंदुत्व — अरविन्द सिसोदिया

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ईश्वर में भी मातृशक्ति को बराबरी का दर्जा देता है हिंदुत्व — अरविन्द सिसोदिया भारतीय सभ्यता की पहचान केवल उसके प्राचीन ग्रंथों, मंदिरों और अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है; बल्कि उसकी वास्तविक पहचान उस जीवन-दृष्टि से होती है, जिसमें मनुष्य, प्रकृति, परिवार, समाज और सृष्टि को परस्पर संबद्ध एवं एकात्म माना गया है। इस व्यापक दृष्टि में स्त्री केवल परिवार की एक सदस्य नहीं है। वह जीवन की सहयात्री, ज्ञान की साधिका, सृजन की शक्ति, परिवार की धुरी और समाज की चेतना है। भगवान शंकर और भगवती भवानी के एकीकृत स्वरूप ‘अर्धनारीश्वर’ की संकल्पना इसकी सच्ची और सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुति के रूप में अनादिकाल से स्थापित है, जो वैज्ञानिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण प्रतीक है। यूँ तो संपूर्ण पृथ्वी की सभ्यताएँ परिस्थितियों से मुकाबला करते हुए, अपनी-अपनी व्यवस्थाओं का निर्माण करते हुए आगे बढ़ी हैं। इसलिए समयानुकूल व्यवस्थाओं में भेद हो सकते हैं और स्थिति-परिस्थिति के अनेक स्वरूप हो सकते हैं। किन्तु विश्व की अन्य समकक्ष सभ्यताओं के मुकाबले भारतीय संस्कृति की सनातन हिंदू सभ्यता में नारी की स्थिति हमेशा ...

जनसेवा, जनसंपर्क और जनआशीर्वाद के बल पर भाजपा बनाएगी निकायों में बोर्ड - अरविन्द सिसोदिया

प्रेस विज्ञप्ति  जनसेवा, जनसंपर्क और जनआशीर्वाद के बल पर भाजपा बनाएगी निकायों में बोर्ड - अरविन्द सिसोदिया  कोटा, 23 अगस्त। भाजपा कोटा संभाग मीडिया संयोजक अरविन्द सिसोदिया ने कहा कि " भाजपा की केंद्र एवं राज्य सरकारों ने लोककल्याण, सुशासन और विकास के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं। वहीं, भाजपा का प्रत्येक कार्यकर्ता निरंतर समाज के बीच रहकर जनसमस्याओं के समाधान का सेतु बनने का कार्य कर रहा है। जनसेवा, जनसंपर्क और जनआशीर्वाद की इसी शक्ति के आधार पर राजस्थान के निकायों में भाजपा के बोर्ड बनेंगे।" सिसोदिया ने कहा कि " भाजपा केवल चुनाव के समय जनता के बीच जाने वाला संगठन नहीं है, बल्कि सेवा ही संगठन का मूल मंत्र है। भाजपा कार्यकर्ता वर्षभर समाज के प्रत्येक वर्ग के बीच सक्रिय रहकर उनकी समस्याओं को समझते हैं और समाधान के लिए निरंतर प्रयास करते हैं। केंद्र एवं राज्य सरकारों की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुंचाने में भी कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका है।" उन्होंने कहा कि " भाजपा सरकारों ने समाज के सभी वर्गों के हितों को ...

अर्द्धनारिश्वर स्त्री, समान अस्तित्व का सम्मान

प्रधानमंत्री [नरेंद्र मोदी] की सरकार ने भारत में 'महिला विकास' (Women's Development) की जगह 'महिला-नेतृत्व वाले विकास' (Women-led Development) को प्राथमिकता दी है। सरकार ने महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और कानूनी रूप से सशक्त बनाने के लिए कई ऐतिहासिक कदम उठाए हैं: [1, 2, 3, 4]  ## 🏛️ राजनीतिक सशक्तिकरण *  * नारी शक्ति वंदन अधिनियम: संसद (लोकसभा) और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित करने का ऐतिहासिक कानून पारित किया गया। [1]  *  ## 💰 आर्थिक आत्मनिर्भरता और उद्यमिता *  * लखपति दीदी योजना: स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर सालाना कम से कम 1 लाख रुपये की कमाई के योग्य बनाना। [3]  * पीएम मुद्रा योजना: महिला उद्यमियों को बिना किसी गारंटी (Collateral-free) के व्यापार ऋण देना, जिसमें कुल ऋणों का एक बड़ा हिस्सा महिलाओं को मिला है। [4]  * स्टैंड-अप इंडिया: महिलाओं को ग्रीनफील्ड उद्यम शुरू करने के लिए 10 लाख से 1 करोड़ रुपये तक का बैंक ऋण उपलब्ध कराना। [5]  *  ## 🛡️ सामाजिक सुरक्षा और ग...

वन्देमातरम

print page button प्रधानमंत्री कार्यालय azadi ka amrit mahotsav राष्ट्रीय गीत "वंदे मातरम" के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित एक वर्ष लंबे स्मरणोत्सव के उद्घाटन अवसर पर प्रधानमंत्री के संबोधन का मूल पाठ प्रविष्टि तिथि: 07 NOV 2025 2:01PM by PIB Delhi वंदे मातरम! वंदे मातरम! वंदे मातरम!  वंदे मातरम, ये शब्द एक मंत्र है, एक ऊर्जा है, एक स्वप्न है, एक संकल्प है। वंदे मातरम, ये एक शब्द मां भारती की साधना है, मां भारती की आराधना है। वंदे मातरम, ये एक शब्द हमें इतिहास में ले जाता है। ये हमारे आत्मविश्वास को, हमारे वर्तमान को, आत्मविश्वास से भर देता है, और हमारे भविष्य को ये नया हौंसला देता है कि ऐसा कोई संकल्प नहीं, ऐसा कोई संकल्प नहीं जिसकी सिद्धि न हो सके। ऐसा कोई लक्ष्य नहीं, जो हम भारतवासी पा ना सकें। साथियों, वंदे मातरम के सामूहिक गान का ये अद्भुत अनुभव, ये वाकई अभिव्यक्ति से परे है। इतनी सारी आवाजों में एक लय, एक स्वर, एक भाव, एक जैसा रोमांच, एक जैसा प्रवाह, ऐसा तारतम्य, ऐसी तरंग, इस ऊर्जा ने ह्दय को स्पंदित कर दिया है। भावनाओं से भरे इसी माहौल में, मैं अपनी बात को ...

हिंदुत्व ही सबसे ज्यादा महिला सम्मान देता है - अरविन्द सिसोदिया

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कृपया लेख अंत तक पढें।  आजकल महाराज मनु को लेकर निम्न कोटि की राजनीति करने वाले फूटपरस्त,पाकिस्तान परस्त राजनीतिज्ञ बहुत सी अनर्गल व अप्रामाणिक बातें करते रहते हैं व हिन्दू धर्म पर कीचड़ उछालते रहते हैं। वेद - पुराणों के अनुसार महाराज मनु भूमंडल के प्रथम राजा थे। वे एक महामना उदार प्रजापालक क्षत्रिय राजा थे। उनके वंशज सूर्यवंशी राजा कहलाये।जिनमें अत्यंत उदार, सत्यवादी, प्रजापालक व गौभक्त चक्रवर्तीराजा हरिश्चन्द्र, दिलीप, दशरथ जी आदि भी हैं जिनकी कीर्ति के आज भी गुणगान होते हैं। सम्पूर्ण हिन्दू समाज को ऐसे महान सम्राट महाराज मनु पर गर्व होना चाहिए, व उनकी निंदा करने वालों का विरोध करना चाहिये। पुराणों में वर्णन आता है कि मनु महाराज की द्रविड़ प्रदेश यानी कि आज के दक्षिण भारत में राजधानी थी। मनु महाराज के वंशजों में इक्ष्वाकु महाराज प्रथम व भगवान राम 68 वें राजा थे। सुचारू शासन व्यवस्था हेतु विश्व के प्रथम संविधान की रचना महाराज मनु ने की थी, जिसे मनु स्मृति के नाम से जाना जाता है। महाराज मनु ने लोक कल्याण के लिए व एक सशक्त राष्ट्र के निर्माण के लिए लोगों के गुण -कर्म क...

RTI द्वितीय अपील

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द्वितीय अपील आवेदन सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 19(3) के अंतर्गत सेवा में, माननीय राज्य सूचना आयोग, मध्यप्रदेश, भोपाल (म.प्र.) विषय : सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 19(3) के अंतर्गत द्वितीय अपील प्रस्तुत करने बाबत। महोदय/महोदया, सविनय निवेदन है कि मेरे द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत लोक सूचना अधिकारी के समक्ष नीचे विवरणानुसार आवेदन प्रस्तुत कर आवश्यक जानकारी चाही गई थी, किन्तु निर्धारित समयावधि में सूचना पूर्ण रूप से उपलब्ध नहीं कराई गई / अपूर्ण एवं अस्पष्ट सूचना प्रदान की गई। प्रथम अपील प्रस्तुत करने के उपरांत भी वांछित सूचना प्राप्त नहीं हुई है। अतः अधिनियम की धारा 19(3) के अंतर्गत यह द्वितीय अपील प्रस्तुत की जा रही है। 1. आरटीआई आवेदन का विवरण (क) आरटीआई आवेदन क्रमांक : ____________________ (ख) आवेदन दिनांक : ____________________ (ग) लोक सूचना अधिकारी का नाम : ____________________ (घ) कार्यालय/स्थान का नाम एवं पता : ________________________________ 2. लोक सूचना अधिकारी द्वारा उत्तर का विवरण (क) उत्तर प्राप्त हुआ (हाँ/नहीं) : ____________________ (ख) ...