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प्रेस विज्ञप्ति कक्षा 6 से 12 तक 'साइबर सुरक्षा एवं डिजिटल नागरिकता' विषय को अनिवार्य पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन, डिजिटल इंडिया की सुरक्षा के लिए विद्यार्थियों को डिजिटल आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देने पर जोर जयपुर/कोटा। राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी एवं भाजपा के कोटा संभाग मीडिया संयोजक अरविन्द सिंह सिसोदिया ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए 'साइबर सुरक्षा एवं डिजिटल नागरिकता' (Cyber Security & Digital Citizenship) विषय को अनिवार्य पाठ्यक्रम के रूप में शामिल करने की मांग की है। श्री सिसोदिया ने अपने पत्र में कहा है कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत ने 'डिजिटल इंडिया' अभियान के माध्यम से विश्व की सबसे बड़ी डिजिटल क्रांति का नेतृत्व किया है। यूपीआई, 5जी नेटवर्क और इंटरनेट के व्यापक विस्तार ने देश को एक सशक्त डिजिटल अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित किया है। लेकिन इस डिजिटल प्रगति के साथ साइबर अपराध, ऑनलाइन ठगी, फर्जी सूचनाएं, डीपफेक, डेटा चोरी...

स्वामित्व -2

* पूर्व कब्जा, परंपरागत निवास या पुश्तैनी रूप से चले आ रहे अधिकार समाप्त नहीं हुए हैं, बल्कि इस योजना के माध्यम से उन्हीं पुराने और परंपरागत अधिकारों को पहली बार लिखित, वैध और डिजिटल कानूनी मान्यता (रजिस्ट्री) दी गई है।  - ग्रामीण भारत में सदियों से चली आ रही पारंपरिक व्यवस्था को इस योजना के तहत किस प्रकार मजबूत किया गया है, इसे आप इन बिंदुओं से समझ सकते हैं:- ## 1. पुराने कब्जे को ही आधार माना गया है * इस योजना का मूल सिद्धांत ही यही है कि "जो जहां काबिज है, वही वहां का मालिक है"। * ड्रोन सर्वे और जमीनी सत्यापन के समय आपके दादा-परदादा के समय से चले आ रहे पुश्तैनी मकान, बाड़े या खाली रिहायशी जमीन के भौतिक कब्जे (Physical Possession) को ही आधार मानकर नक्शा खींचा गया है।  * किसी भी नागरिक को उसके पुराने कब्जे से बेदखल नहीं किया गया है।  ## 2. मौखिक या अनौपचारिक अधिकार अब "लिखित कानून" बन गए हैं * पहले गांवों की आबादी भूमि (घरोनी) का कोई सरकारी लिखित रिकॉर्ड (खसरा-खतौनी की तरह) नहीं होता था। ग्रामीण केवल इस आधार पर रहते थे कि "यह हमारा पुश्तैनी घर है"।  * [स्...

उच्च शिक्षा के नाम पर बदचलनी का अंधापन

मेट्रो सिटी (महानगरों) में रह रहे जॉब वाले दम्पतियों के बच्चे कोई लेफ्टिस्ट बन रहे, कोई समलैंगिक बन रहे, कोई LGBT एक्टिविस्ट बन रहे… यह वो बच्चे हैं जो कॉलेज लाइफ़ में वोदका और चरस (चरस) का सेवन सीख चुके हैं… स्कूल बैग के अंदर वेप (ई सिगरेट) मिल रही है इनके… इन बच्चों का परिवार नामक संस्था में कोई विश्वास नहीं है… ना यह शादी करवाके परिवार बढ़ाएंगे,,, ना ही यह अपने बूढ़े मां बाप के पास रहेंगे… कॉलेज में ब्रेनवॉशड इन बच्चों की ही जिद्द और बदतमीजियो के कारण इनके मां बाप दूसरे रिश्तेदारों से भी कट चुके हैं… जब इनके बूढ़े मां बाप मरेंगे यह लेफ्टिस्ट संतानें उनका विधिवत संस्कार तक नहीं करेगी,, श्राद्ध तो दूर की बात। बड़े शहरों में पैसा कमाने में व्यस्त दंपति ने ये बच्चे पैदा अवश्य किए हैं, पर यह काम आएंगे कम्युनिस्ट लॉबी के… यह ताउम्र सिंगल रह जाएंगे और आंदोलनजीवियों द्वारा जंतर मंतर या दिल्ली में रखे धरने प्रदर्शनों में जाने के काम आएंगे… बीमार पड़े मां बाप के नहीं… आज जो 55-60 के हो चले हैं उन्हें कोई पानी पिलाने वाला नहीं होगा… ये जितने भी कम्युनिस्ट आज 60-70 वर्ष की उम्र वाले हैं इनके पा...

माननीय प्रधानमंत्री महोदय

सेवा में, माननीय प्रधानमंत्री महोदय भारत सरकार, नई दिल्ली। विषय : राष्ट्रहित में आंतरिक सुरक्षा तंत्र को सुदृढ़ करने एवं लोकतांत्रिक व्यवस्था की सुरक्षा हेतु आवश्यक सुधारों के संबंध में। महोदय, सादर निवेदन है कि राष्ट्रहित, आंतरिक सुरक्षा तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था की दीर्घकालिक मजबूती के दृष्टिगत निम्नलिखित बिंदुओं पर गंभीर समीक्षा एवं आवश्यक कार्यवाही अपेक्षित है। 1. सरकार की इंटेलिजेंस एवं आंतरिक सुरक्षा क्षमता में वृद्धि आवश्यक - राष्ट्रहित चिंतक सरकारों के विरुद्ध संचालित होने वाले संभावित संगठित षड्यंत्रों, उनके वित्तीय स्रोतों, डिजिटल नेटवर्क, विदेशी संपर्कों तथा संसाधनों की समय रहते पहचान करने में वर्तमान सुरक्षा एवं खुफिया तंत्र की प्रभावशीलता की व्यापक समीक्षा आवश्यक प्रतीत होती है। - विभिन्न आंदोलनों के दौरान कथित रूप से बड़ी संख्या में फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट, संगठित डिजिटल प्रचार, समन्वित अभियान, विदेशी प्रभाव, वित्तीय सहायता, डिजिटल एप्स एवं संसाधनों के उपयोग जैसे विषयों की निष्पक्ष एवं गहन जांच कराई जानी चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। - यदि किसी भी प्रकार से भ...

नकाब नया, चेहरे वही, आराजकता वही, मकसद संसद को बाधित करना - अरविन्द सिसोदिया

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बच्चों का भविष्य दांव पर लगाकर सत्ता प्राप्ति का षड्यंत्र स्वीकार्य नहीं, जनमत पूरी तरह सजग है – अरविन्द सिसोदिया नकाब नया, चेहरे वही, आराजकता वही, मकसद संसद को बाधित करना - अरविन्द सिसोदिया  कोटा, 22 जुलाई। राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी एवं वरिष्ठ बुद्धिजीवी अरविन्द सिसोदिया ने देश में विद्यार्थियों के नाम पर चलाए जा रहे आंदोलन और विपक्षी राजनीति पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि " भारत में विपक्ष का मतलब आराजकतावाद और आंदोलन का मतलब सिर्फ देशको क्षति पहुंचना रह गया है।" उन्होंने कहा कि " जनता द्वारा लगातार नकारे जा चुके कुछ राजनीतिक दल लोकतांत्रिक जनादेश को स्वीकार करने के बजाय चोर रास्ते से, सत्ता प्राप्ति के लिए, हर प्रकार के हथकंडे अपनाने में जुटे हुये हैं। जिस तरह किसान आंदोलन मूलरूप से किसान विरोधी था, उसी तरह यह आंदोलन भी युवा विरोधी ही है, इन्हें युवाओं से कोई लेना देना नहीं है। ये देश के विद्यार्थियों और युवाओं के भविष्य को दांव पर लगाकर खुद की राजनीतिक रोटियां सेकने में लगे हैं। जो कि अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय ...

आंदोलन का आराजकता के लिए दुरूपयोग उजागर , विपक्ष की श्रेय हड़पने की घुड़दौड़ — अरविन्द सिसोदिया

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आंदोलन के नाम पर अराजक हिंसा, राष्ट्र की अस्मिता पर हमला, देशहित में कठोरता से इसे रोका जाए — अरविन्द सिसोदिया कोटा, 23 जुलाई। राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी एवं वरिष्ठ बुद्धिजीवी अरविन्द सिसोदिया ने कहा कि, "कथित छात्र आंदोलन पूरी तरह अराजक तत्वों द्वारा हाईजैक किया जा चुका है। पत्थरबाजी और हिंसा इसमें सम्मिलित हो गई है। यह आंदोलन नहीं, बल्कि सोची-समझी योजना के तहत देश की व्यवस्था पर किया गया आक्रमण है। इसमें विपक्षी दल अपने-अपने हित साधने के साथ-साथ समानांतर प्रतियोगिता करते भी नजर आ रहे हैं। इस तरह के हिंसक गतिविधियों का लोकतंत्र में कोई स्थान नहीं है। " आंदोलन के नाम पर आराजक हिंसा, देश की अस्मिता पर हमला उन्होंने कहा कि, "पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं और छात्रों के भविष्य से जुड़े गंभीर मुद्दों के नाम पर शुरू हुआ कथित आंदोलन, यूँ तो प्रारंभ से ही भारतीय युवाओं के साथ विदेशी ताकतों का छल तथा उनके माध्यम से देश में अराजकता उत्पन्न करने का बड़ा षड्यंत्र है। जंतर-मंतर पर आंदोलनकारीयों द्वारा की गई पत्थरबाजी, सुरक्ष...

3- कलेक्टर महोदय

दिनांक : 22 जुलाई 2026 सेवा में, माननीय जिला कलेक्टर महोदय कलेक्ट्रेट परिसर, जिला गुना (मध्य प्रदेश) विषय :- जिला गुना मप्र में तहसील बमोरी में स्वामित्व योजना अंतर्गत प्रकरण क्रमांक 0863/अ-3/2020-21 में प्लॉट क्रमांक 32, आवासीय भूमि खसरा क्रमांक 273, ग्राम मोड़का, पटवारी हल्का 64 सूजाखेड़ी, तहसील बमोरी, जिला गुना स्थित पैतृक आवासीय संपत्ति जो किलेनुमा दो मंजिला पक्के मकानों सहित बहुमूल्य संपत्ति के, स्वामित्व अभिलेख एवं प्रॉपर्टी कार्ड में हुई गंभीर विधिक एवं तथ्यात्मक त्रुटि का सुधार कर स्वर्गीय श्री भूपेंद्र सिंह सिसोदिया के सभी प्रथम श्रेणी के वैध उत्तराधिकारियों के नाम संयुक्त सह-स्वामी के रूप में दर्ज किए जाने तथा अंतिम निर्णय तक उक्त संपत्ति के संबंध में किसी भी प्रकार की रजिस्ट्री, नामांतरण, हस्तांतरण, बंधक, ऋण अथवा अन्य स्वामित्व संबंधी कार्यवाही पर रोक लगाए जाने बाबत। महोदय, सविनय निवेदन है कि मैं अरविन्द सिंह सिसोदिया, पुत्र स्वर्गीय श्री भूपेंद्र सिंह सिसोदिया, ग्राम मोड़का, तहसील बमोरी, जिला गुना (मध्य प्रदेश) का मूल निवासी हूँ। मैं स्वर्गीय श्री भूपेंद्र सिंह सिसोदिया का ...