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वन्देमातरम एकता का महामंत्र है, विभाजनकारी मानसिकता के आगे अब देश सिरेंडर नहीं करेगा - अरविन्द सिसोदिया

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सादर प्रकाशनार्थ वन्दे मातरम् एकता का महामंत्र है, विभाजनकारी मानसिकता के आगे अब देश सरेंडर नहीं करेगा — अरविन्द सिसोदिया कोटा, 21 अगस्त। राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल, जयपुर के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी एवं वरिष्ठ बुद्धिजीवी अरविन्द सिसोदिया ने कहा कि ‘वन्दे मातरम्’ केवल एक गीत या कुछ शब्दों का समूह नहीं, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता की चेतना, सांस्कृतिक अस्मिता और राष्ट्रीय स्वाभिमान का शक्तिशाली महामंत्र है। इसमें राष्ट्रीय, सांस्कृतिक एवं सामाजिक एकता की गजब की महाशक्ति है। उन्होंने कहा कि भारत लाखों वर्षों से चली आ रही जीवंत, चैतन्य और सनातन सांस्कृतिक परंपरा वाला अत्यंत पुरातन राष्ट्र है। स्वतंत्रता आंदोलन की चेतना से जुड़ा महामंत्र सिसोदिया ने कहा कि किसी भी संप्रभु राष्ट्र का अस्तित्व उसके स्वाभिमान और राष्ट्रीय प्रतीकों की गरिमा से जुड़ा होता है। भारत के संदर्भ में ‘वन्दे मातरम्’ ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान जनमानस में राष्ट्रीय चेतना और स्वाधीनता की भावना को जागृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्वतंत्रता संग्राम के विभिन्न चरणों में इसकी गूंज राष्ट्रीय एकता, र...

माननीय जिला कलेक्टर महोदय, स्वामित्व योजना

माननीय जिला कलेक्टर महोदय,  जिला - गुना  जिला कलेक्ट्रेट परिसर, गुना। विषय - 1.स्व भूपेंद्र सिंह सिसोदिया पुत्र स्व समंदर सिंह जी के प्लाट क्रमांक- 32 रकबा 2175 वर्ग मीटर, आबादी खसरा नंबर 273 रकबा 1.076 हैक्टर, ग्राम - मोड़का, ग्राम पंचायत - सूजाखेड़ी, तहसील बमोरी, जिला गुना मप्र स्थित पुस्तेनी आवासीय परिसर के स्वामित्व सर्वेक्षण में तैयार किए गये खसरे में त्रुटि सुधार कर सभी उत्तराधिकारीयों के नाम दर्ज किए जानें के संदर्भ में। 2. त्रुटि सुधार निर्णय होनें तक उपरोक्त संपत्ति के सभी आठ सह स्वामियों के हितों की रक्षा करने हेतु वर्तमान आदेश को स्थगित कर,किसी भी प्रकार के क्रय विक्रय एवं किसी भी प्रकार के हस्तानांतरण रोक एवं यथास्थिति बनाये रखने के संदर्भ में। संदर्भ - स्वामित्व योजना के अंतर्गत प्रकरण क्रमांक 0863/अ -3/2020-21जिसका अंतिम प्रकाशन 02/05/2023 को हुआ है के संदर्भ में। वादी  अरविन्द सिंह सिसोदिया पुत्र भूपेंद्र सिंह सिसोदिया जाति राजपूत आयु 69 वर्ष निवासी ग्राम मोड़का जिला गुना हाल निवास - बेकरी के सामने, राधाकृष्ण मंदिर रोड़, डडवाड़ा, कोटा जंक्शन राज पिनकोड - 324002 ...

स्वामित्व -2

* पूर्व कब्जा, परंपरागत निवास या पुश्तैनी रूप से चले आ रहे अधिकार समाप्त नहीं हुए हैं, बल्कि इस योजना के माध्यम से उन्हीं पुराने और परंपरागत अधिकारों को पहली बार लिखित, वैध और डिजिटल कानूनी मान्यता (रजिस्ट्री) दी गई है।  - ग्रामीण भारत में सदियों से चली आ रही पारंपरिक व्यवस्था को इस योजना के तहत किस प्रकार मजबूत किया गया है, इसे आप इन बिंदुओं से समझ सकते हैं:- ## 1. पुराने कब्जे को ही आधार माना गया है * इस योजना का मूल सिद्धांत ही यही है कि "जो जहां काबिज है, वही वहां का मालिक है"। * ड्रोन सर्वे और जमीनी सत्यापन के समय आपके दादा-परदादा के समय से चले आ रहे पुश्तैनी मकान, बाड़े या खाली रिहायशी जमीन के भौतिक कब्जे (Physical Possession) को ही आधार मानकर नक्शा खींचा गया है।  * किसी भी नागरिक को उसके पुराने कब्जे से बेदखल नहीं किया गया है।  ## 2. मौखिक या अनौपचारिक अधिकार अब "लिखित कानून" बन गए हैं * पहले गांवों की आबादी भूमि (घरोनी) का कोई सरकारी लिखित रिकॉर्ड (खसरा-खतौनी की तरह) नहीं होता था। ग्रामीण केवल इस आधार पर रहते थे कि "यह हमारा पुश्तैनी घर है"।  * [स्...

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, किसी को भी अपमानजनक व्यवहार का अधिकार नहीं देती

त्रिपुरा हाईकोर्ट ने अगस्त 2026 में दिए अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि लोकतंत्र में राजनीतिक आलोचना स्वीकार्य है, लेकिन सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री के खिलाफ अपमानजनक, अभद्र या मानहानिकारक भाषा का इस्तेमाल करना पूरी तरह से गैरकानूनी है। न्यायालय ने ज़ोर देकर कहा कि संविधान के तहत मिलने वाला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार किसी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने का लाइसेंस नहीं देता है।  जस्टिस टी. अमरनाथ गौड़ और जस्टिस एस. दत्ता पुरकायस्थ की खंडपीठ ने सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर माधबी बिस्वास चक्रवर्ती के खिलाफ दर्ज एफआईआर और चार्जशीट को रद्द करने से इनकार करते हुए यह फैसला सुनाया।  ## कोर्ट के फैसले की मुख्य बातें: * संवैधानिक पद की गरिमा: अदालत ने कहा कि प्रधानमंत्री देश में एक उच्च संवैधानिक पद पर आसीन हैं। उनके नाम और उपनाम का मज़ाक उड़ाना या उनके खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करना वैश्विक स्तर पर उनकी छवि को धूमिल करने के प्रयास जैसा है।  * अभिव्यक्ति की आजादी असीमित नहीं: कोर्ट ने याचिकाकर्ता के इस तर्क को पूरी तरह खारिज कर दिया कि अनुच्छेद 19(1)(a) के ...

वन्देमातरम

print page button प्रधानमंत्री कार्यालय azadi ka amrit mahotsav राष्ट्रीय गीत "वंदे मातरम" के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित एक वर्ष लंबे स्मरणोत्सव के उद्घाटन अवसर पर प्रधानमंत्री के संबोधन का मूल पाठ प्रविष्टि तिथि: 07 NOV 2025 2:01PM by PIB Delhi वंदे मातरम! वंदे मातरम! वंदे मातरम!  वंदे मातरम, ये शब्द एक मंत्र है, एक ऊर्जा है, एक स्वप्न है, एक संकल्प है। वंदे मातरम, ये एक शब्द मां भारती की साधना है, मां भारती की आराधना है। वंदे मातरम, ये एक शब्द हमें इतिहास में ले जाता है। ये हमारे आत्मविश्वास को, हमारे वर्तमान को, आत्मविश्वास से भर देता है, और हमारे भविष्य को ये नया हौंसला देता है कि ऐसा कोई संकल्प नहीं, ऐसा कोई संकल्प नहीं जिसकी सिद्धि न हो सके। ऐसा कोई लक्ष्य नहीं, जो हम भारतवासी पा ना सकें। साथियों, वंदे मातरम के सामूहिक गान का ये अद्भुत अनुभव, ये वाकई अभिव्यक्ति से परे है। इतनी सारी आवाजों में एक लय, एक स्वर, एक भाव, एक जैसा रोमांच, एक जैसा प्रवाह, ऐसा तारतम्य, ऐसी तरंग, इस ऊर्जा ने ह्दय को स्पंदित कर दिया है। भावनाओं से भरे इसी माहौल में, मैं अपनी बात को ...

दिमागी नक्सलवाद

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लोकतंत्र, संविधान और राष्ट्रविरोधी व्यवहार ही दिमागी नक्सलवाद — अरविन्द सिसोदिया कोटा, 18 अगस्त। राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल से जुड़े शिक्षा-प्रोत्साहन न्यासी एवं वरिष्ठ बुद्धिजीवी अरविन्द सिसोदिया ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लालकिले की प्राचीर से दिए गए संबोधन में प्रयुक्त “दिमागी नक्सल” शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि " यह शब्द केवल हिंसक नक्सली गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन वैचारिक प्रवृत्तियों की ओर भी संकेत करता है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था, संवैधानिक संस्थाओं, राष्ट्रीय एकता और भारत की संप्रभुता को कमजोर करने का प्रयास करती हैं, दुष्प्रेरणायें देश में फैलाती हैँ। सिसोदिया नें कहा कि " भारत ने लंबे समय तक नक्सलवाद की चुनौती को झेला है। इस दौरान देश ने यह महसूस किया कि जो लोग नक्सलवादी विचारधारा से जुड़े थे, वे न तो भारत के संविधान को मानते थे, न लोकतंत्र में विश्वास रखते थे, न कानून-व्यवस्था को स्वीकार करते थे और न ही निर्वाचन के माध्यम से जनता के निर्णय का सम्मान करते थे। उनकी भाषा हिंसा और शस्त्रों की भाषा थी।...

स्वाधीनता संग्राम में संघ की भूमिका के अकाट्य तथ्य - मुरलीधर

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स्वाधीनता संग्राम में संघ की भूमिका के अकाट्य तथ्य - मुरलीधर कोटा 16 अगस्त । स्वतंत्रता दिवस की 80 वी वर्षगाठ के शुभ अवसर पर भारतीय जनकल्याण समिति, कोटा द्वारा सूरज भवन, बल्लभबाड़ी कोटा पर स्वतंत्रता दिवस का भव्य समारोह आयोजित किया गया । कार्यक्रम की अध्यक्षता कोटा विभाग के विभाग संघचालक पन्नालाल शर्मा ने की। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, चितौड़ प्रांत के प्रान्त प्रचारक मुरलीधर ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने संबोधन में कहा कि " भारतीय इतिहास को धूमिल करने के प्रयास अब और नहीं टिकेंगे। " उन्होंने " स्वाधीनता संग्राम में संघ की भूमिका के अकाट्य प्रमाण प्रस्तुत किये।" मुरलीधर ने उद्बोधन में स्पष्ट किया कि " भारत की आजादी बिना खड़ग-बिना ढाल से नहीं बल्कि क्रांतिकारियों के बलिदान और जनजन के संघर्षों का परिणाम है। इसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक के संस्थापक डॉ केशवराव हेडगेवार एवं तत्कालीन स्वयंसेवकों की टोली ने अपना अमूल्य योगदान दिया। " उन्होंने कहा कि " जो लोग संघ पर आरोप लगाते हैं उनको “संघ और स्वतंत्रता आंदोलन” नाम की पुस्तक पढ़नी चाहिए। "  ...