कविता - हम हिंदू वीर संतानें हैँ
कविता - हम हिंदू वीर संतानें हैँ हम काल से टकराने वाले, शक्ति पुत्र कहलाते हैं, मृत्यु की आँखों में झाँककर, प्रचण्ड अट्टहास लगाते हैं। रग-रग में धधकती ज्वालाएँ, प्रलय का तूफ़ान उठाये हैँ, हम हिंदू वीर संतानें हैँ , विजयी सुदर्शन उठाये हैँ। --------=------- जब-जब कोई ललकारे, हम वज्र-विनाशक बन जाते हैं, रणचंडी के चरणों में, हँसकर शीश चढ़ाते हैं। खड्ग उठे, बिजली कड़के, गगन भी कांप उठे, शत्रु के हर दंभ को, क्षण भर में धूल चटाते हैँ। --------=------- केसरिया रक्त उफनता, आँखों में अंगार लिए , धर्म हेतु जीना सीखा, क्षात्र धर्म निभाते हैँ। हिमगिरि सा अटल इरादा, सागर तक फैलाते है , जो हमसे टकराने आये , उसका अस्तित्व मिटाते है । -------=------- ना झुके हैं, ना झुकेंगे, ये संकल्प हमारा है, हर युग में वीरों ने ही, इतिहास सँवारा है। बलिदानों की ज्योति से, युग-युग दीप जलाते हैं, हम काल के भी काल हैँ , विजय ध्वज फहराते हैं। ------=------- धरा दहाड़े, गगन पुकारे, जब रण का आह्वान उठे, आत्मबल से इतिहास बदलें, जब-जब संकट का उफान उठे। लहू हमारा ज्वाला बनकर, अन्यायों को ध्वस्त करे, हिंदू वीरों का शौर्...