‘वंदे मातरम्’, भारतीय संस्कृति,राष्ट्रीय स्वाभिमान और स्वतंत्रता का प्रबल उदघोष है - अरविंद सिसोदिया
सादर प्रकाशनार्थ ‘वंदे मातरम्’, भारतीय संस्कृति,राष्ट्रीय स्वाभिमान और स्वतंत्रता का प्रबल उदघोष है - अरविंद सिसोदिया राष्ट्रीय विरासत और प्रतीकों के सम्मान से किसी प्रकार का तुष्टिकरणवादी समझौता स्वीकार्य नहीं हो सकता - अरविन्द सिसोदिया कोटा 21 अगस्त । राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल, जयपुर के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी एवं वरिष्ठ बुद्धिजीवी अरविंद सिसोदिया ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ केवल एक गीत या कुछ शब्दों का समूह नहीं, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता की चेतना, सांस्कृतिक अस्मिता और राष्ट्रीय स्वाभिमान का शक्तिशाली महामंत्र है। इसमें राष्ट्रीय, सांस्कृतिक एवं सामाजिक एकता की गजब की महाशक्ति है। उन्होंने कहा कि भारत किसी एक कालखंड में अस्तित्व में आया नया राष्ट्र नहीं, बल्कि लाखों वर्षों से चली आ रही जीवंत, चैतन्य और सनातन सांस्कृतिक परंपरा वाला राष्ट्र है। सिसोदिया ने कहा कि किसी भी संप्रभु राष्ट्र का अस्तित्व उसके स्वाभिमान और राष्ट्रीय प्रतीकों की गरिमा से जुड़ा होता है। भारत के संदर्भ में ‘वंदे मातरम्’ ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान जनमानस में राष्ट्रीय चेतना और स्वाधीनता की भाव...