कविता - मोदी हैं, जो कर दें हर नैय्या पार!
कविता - मोदी हैं, जो कर दें हर नैय्या पार! हर संकट में बेड़ा पार करे जो खिवइय्या, हनुमान-सा पराक्रमी, वह है मोदी भैय्या। -------=------ चाहे आतंक का अंधकार, चाहे युद्ध की पुकार, चाहे महामारी का संकट, चाहे टैरिफ की मार, हर रण में डटकर खड़े, बनकर जन-आधार, हर बार वही लेकर आए, विजय का उद्गार, मोदी हैं, जो कर दें हर नैय्या पार ! -------=------ दुश्मन मिलकर रचते चाहे षड्यंत्रों के जाल, अराजकता की आग भड़काएँ बारंबार, हर साजिश टूटे आकर, हर चाल जाए हार, मोदी के संकल्पों से, विफल होता हर अत्याचार ! -------=----- कितनी भी ऊँची हों दीवारें, कितनी भी गहरी खाई, हिम्मत जिसने थामी हो, उसने राह नई बनाई। आंधी हो या प्रचंड तूफ़ान, न डिगे जिसका मान, मोदी अटल धैर्य की ज्योति लिए करता समाधान। -------=----- “मोदी” नाम में गूँज रही परिवर्तन की हुंकार, काम में दिखती सेवा, राष्ट्र रहे जिनका संसार। चाय की साधारण खुशबू से उठा जनविश्वास महान, मेहनत, निष्ठा, तप से रचा, नवभारत का स्वाभिमान । -------=----- जब-जब संकट घिर आया, जब डगमगाई नैया, हौसलों की पतवार थामे, आगे बढ़े वो भैय्या। जन-मन के विश्वास का दीप, अंधकार मे...