मिशनरी और नेहरू परिवार
मिशनरी और नेहरू परिवार 17 अक्टूबर 1952 को तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को एक परिपत्र (पत्र) लिखा था। इसमें उन्होंने निर्देश दिया था कि भारतीय और विदेशी ईसाई मिशनरियों के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव या उत्पीड़न नहीं किया जाना चाहिए। पत्र के मुख्य बिंदु:भेदभाव पर चिंता: नेहरू ने कहा कि उन्हें ऐसी शिकायतें मिली हैं कि कुछ राज्यों में ईसाई मिशनरियों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार किया जा रहा है और उन्हें उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। सेवा कार्यों की सराहना: उन्होंने जोर देकर कहा कि मिशनरियों द्वारा शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में किए जा रहे निस्वार्थ सेवा कार्यों में अनावश्यक बाधा उत्पन्न नहीं की जानी चाहिए।पुराने पूर्वाग्रहों को छोड़ना: नेहरू ने स्वीकार किया कि औपनिवेशिक काल में मिशनरियों का विदेशी ताकतों से जुड़ाव होने के कारण लोगों के मन में उनके प्रति कुछ पूर्वाग्रह थे। लेकिन, स्वतंत्र भारत में इस तरह की पुरानी सोच को खत्म किया जाना चाहिए। ======1======= नहीं, इस संदर्भ में ईसाई मिशनरियों के साथ भारत सरकार या जवाहरलाल नेहरू का कोई आधिक...