संदेश

केतकी चितले बनाम जंतर मंतर

मराठी अभिनेत्री केतकी चितले (जिन्हें कुछ लोग केतकी चिखलकर भी समझ लेते हैं) को मई 2022 में लगभग 40 दिनों तक जेल में रहना पड़ा था। उस समय महाराष्ट्र में शिवसेना, एनसीपी (NCP) और कांग्रेस के गठबंधन वाली महा विकास अघाड़ी (MVA) की सरकार थी, और उद्धव ठाकरे राज्य के मुख्यमंत्री थे।  उन्हें जेल होने का मुख्य कारण और उससे जुड़ी जानकारियां नीचे दी गई हैं: ## जेल होने का मुख्य कारण * शरद पवार पर आपत्तिजनक पोस्ट: केतकी चितले ने अपने फेसबुक अकाउंट पर किसी अन्य व्यक्ति द्वारा लिखी गई एक मराठी कविता (पोस्ट) को शेयर किया था। इस पोस्ट में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के प्रमुख शरद पवार के खिलाफ कथित तौर पर बेहद अपमानजनक, मानहानिकारक और आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई थीं।  * मल्टीपल FIR: इस फेसबुक पोस्ट के वायरल होने के बाद, एनसीपी कार्यकर्ताओं और नेताओं की शिकायतों पर महाराष्ट्र के अलग-अलग जिलों में केतकी के खिलाफ 22 से ज्यादा FIR दर्ज की गई थीं।  * कानूनी धाराएं: ठाणे पुलिस ने उन्हें 14 मई 2022 को गिरफ्तार किया था। उन पर मानहानि (धारा 500), समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने (धारा 153...

सर्वोच्च न्यायालय हेतु

सेवा में, महामहिम राष्ट्रपति महोदय राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली प्रतिलिपि: - माननीय प्रधानमंत्री, भारत सरकार - माननीय केंद्रीय गृह मंत्री, भारत सरकार विषय:- भारत की आंतरिक सुरक्षा, लोकतांत्रिक आंदोलनों की पारदर्शिता, विदेशी हस्तक्षेप की रोकथाम, सोशल मीडिया के दुरुपयोग की निगरानी व प्रतिबंध तथा आराजकता पूर्ण स्थिति में सुरक्षाबलो को आत्मरक्षा  सहित आवश्यक शक्तियों व अधिकारों का सुरक्षा कबच। शांतिपूर्ण प्रदर्शन एवं सुरक्षा व्यवस्था के लिए स्पष्ट सक्षम राष्ट्रीय नीति, आचार संहिता एवं स्पष्ट दिशानिर्देश बनाए जाने बाबत। महोदय, सविनय निवेदन है कि मैं अरविन्द सिंह सिसोदिया, शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी, राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल, जयपुर एवं सामाजिक कार्यकर्ता, निवासी कोटा (राजस्थान), एक जागरूक नागरिक के नाते, भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा तथा संवैधानिक मूल्यों से जुड़े एक महत्वपूर्ण विषय पर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ। भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहाँ प्रत्येक नागरिक को संविधान द्वारा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा शांतिपूर्ण एवं वैधानिक विरोध-प्रदर्शन का अ...

Shehzad Poonawalla

शहजाद पूनावाला गत विधानसभा चुनाव में कोटा संभाग के मीडिया प्रभारी थे और में कोटा संभाग मीडिया संयोजक.... मुझे तब भी लगा था कि कांग्रेस से भाजपा में आया व्यक्ती... सहज नहीं हो पाता.... क्योंकि भाजपा में राष्ट्रप्रथम होता है, सब कुछ समर्पण होता है, पूर्ण अनुशासन होता और व्यक्तिगत कुछ नहीं होता। मेरा मानना है कि उन्हें अपनी बात उचित मंच पर रखनी चाहिए थी। ======== भाजपा छोड़ने के बाद शहजाद पुनावाला का एक और बड़ा बयान, कहा- पीएम मोदी आप नाकाम रहे, ऐसी उम्मीद नहीं थी Shehzad Poonawalla You Failed PM Modi: बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने पीएम नरेंद्र मोदी को निशाने पर लेते हुए लिखा 'YOU FAILED'। दरअसल, उन्होंने यह बयान राहुल गांधी पर तंज कसते हुए दिया है। Aug 01, 2026 Shehzad Poonawalla PM Modi ट्वीट भाजपा छोड़ने के बाद शहजाद पुनावाला का एक और बड़ा बयान Shehzad Poonawalla PM Modi tweet:  भारतीय जनता पार्टी छोड़ने वाले शहजाद पूनावाला के एक हालिया सोशल मीडिया पोस्ट ने राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है। इस पोस्ट में उन्होंने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कहा है कि प्रधानमंत्री ...

कविता - कौन कहता है वह आंदोलन था

कविता -  सुनो आराजकताई सुरक्षा प्रहरी का  भी राष्ट्रधर्म है - अरविन्द सिसोदिया 9414180151  कौन कहता है वह आंदोलन था, वह तो संसद पर अराजकता का आक्रमण था। मत इसको कमतर आंको, यह षड्यंत्र महाभयंकर था। अपराधी थे, दंगाई थे, अराजक थे, तभी तो रक्त बहा, वर्दी फट गई ! हेलमेट भी चकनाचूर हुए, गिरे हुए प्रहरी को भी पैरों तले रौंदा गया, यह कैसा विरोध प्रदर्शन था ,   जिसमें हजारों अपराधियों को भरा गया। पर सुन लो — सुरक्षा प्रहरी यदि शस्त्र उठाए, तो वह क्रोध नहीं, कर्तव्य होता है। जब संसद पर संकट मंडराए, तो रण ही उसका राष्ट्रधर्म होता है। वह प्रहरी है, कोई दर्शक नहीं, जो चुपचाप अपमान सह जाएगा। भारत माँ की संसद पर जो वार करेगा, तो प्रहरी सिंह-गर्जन बनकर महाकाल बन जाएगा। ढाल उठी तो राष्ट्र बचा, दंड उठा तो संविधान बचा। सीना तान जो प्रहरी डटा, उससे भारत का सम्मान बचा। आत्मरक्षा उसका भी अधिकार है, राष्ट्ररक्षा उसका भी संकल्प है। जो तिरंगे की ओर बढ़ेगा, उसको प्रतिउत्तर ही कर्तव्य का संकल्प है। याद रखो, यह वही धरा है जहाँ प्रताप ने शीश झुकाया नहीं, जहाँ शिवाजी ने स्वराज रचा, जहाँ भगतस...

देश चाहता है कि 'कॉकरोज' और जंतर-मंतर हिंसा में विदेशी टूलकिट का पूरा सच सामने आए – अरविन्द सिसोदिया

देश चाहता है कि 'कॉकरोज' और जंतर-मंतर हिंसा में विदेशी टूलकिट का पूरा सच सामने आए – अरविन्द सिसोदिया कोटा, 1 अगस्त। राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी एवं वरिष्ठ बुद्धिजीवी अरविन्द सिसोदिया ने कहा है कि देश की जनता अब 'कॉकरोज जनता पार्टी' से जुड़े घटनाक्रम और जंतर-मंतर से शुरू होकर संसद क्षेत्र तक पहुंची हिंसक घटनाओं के पूरे सच को जानना चाहती है। उनका कहना है कि यदि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे विदेशी डिजिटल नेटवर्क, संदिग्ध फंडिंग, संगठित टूलकिट या भारत विरोधी शक्तियों की किसी भी स्तर पर भूमिका रही है, तो उसे बिना किसी राजनीतिक दबाव के देश के सामने लाया जाना चाहिए। सिसोदिया ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और भारत की संप्रभुता किसी भी लोकतांत्रिक बहस से ऊपर हैं। लोकतंत्र में विरोध और असहमति का अधिकार सभी को है, लेकिन यदि किसी आंदोलन की आड़ में हिंसा, अराजकता, सरकारी संस्थानों पर हमला, सुरक्षा बलों पर आक्रमण या विदेशी प्रभाव की आशंका पैदा होती है, तो उसकी गहन और निष्पक्ष जांच राष्ट्रीय दायित्व बन जाती है। उन्होंने कहा कि 'कॉकरोज जनता पार्टी' क...

तुष्टिकरण का खेल खत्म, मोदीजी ने दिलाया वन्देमातरम को न्याय - अरविन्द सिसोदिया

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कांग्रेस ने तुष्टिकरण की राजनीती में हमेशा वन्देमातरम से अन्याय किया - अरविन्द सिसोदिया  तुष्टिकरण का खेल खत्म, मोदीजी ने दिलाया वन्देमातरम को न्याय - अरविन्द सिसोदिया  तुष्टिकरण से आजाद हुआ वन्देमातरम 'वंदे मातरम्' केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की चेतना, स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा और देश की अखंडता का सबसे बड़ा उद्घोष है। भारत के नौजवानों की ऊर्जा रहा है। यह वह मंत्र था जिसे गाते हुए हंसते-हंसते हजारों क्रांतिकारियों ने फांसी के फंदे को चूम लिया। करोड़ों स्वतंत्रता सेनानियों के कृतित्व और व्यक्तित्व को राष्ट्रवाद से सिंचित किया।लेकिन दुर्भाग्यवश, जिस गीत ने पूरे देश को बिना किसी भेदभाव के एकता के सूत्र में पिरोया, उसे आजादी के बाद की राजनीति में कांग्रेस पार्टी और उसके सर्वेसर्वा जवाहरलाल नेहरू जी नें तुष्टिकरण की बलि चढ़ा दिया गया। वह तो संविधान सभा के अध्यक्ष ड़ा राजेंद्र प्रसाद जी का साहस था जो उन्होंने वन्देमातरम को राष्ट्रगान के बराबर कर दर्जा देकर राष्ट्रगीत बनवा दिया। कांग्रेस ने सत्ता और वोटबैंक के लालच में इस गौरवमयी गीत के साथ जो समझौता किया, उस...

कविता - फिर से कहता हूँ, मोदी जी, आपका कोटि-कोटि बंदन है।

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कविता - फिर से कहता हूँ, मोदी जी, कोटि-कोटि अभिनंदन है फिर से कहता हूँ, मोदी जी, आपका कोटि-कोटि बंदन है। जिस "वन्दे मातरम्" पर था तुष्टिकरण का पहरा , उसकी आजादी पर आपका अभिनंदन है। ====1==== याद करो वे अमर कहानी, जब हँसकर फाँसी चूमी थी। "वन्दे मातरम्" कहते-कहते, वीरों ने जीवन बलिदानों को सोंपी थी। ====2==== सीने पर गोलियाँ खाकर भी, जयघोष नहीं रुक पाया था। भारत माँ की जय बोल-बोल कर , हर बलिदानी गर्व से मुस्काया था। ====3==== जब-जब रण में शंख बजे, जब-जब सीमाएँ ललकार उठीं। "वन्दे मातरम्" के स्वर से ही, भारत की सेनाओं के अपनी धार तेज करी । ====4==== यह केवल दो शब्द नहीं, यह राष्ट्र-प्राण का नारा है। इसमें भगतसिंह का रक्त बसा, इसमें आज़ाद का हमारा है। ====5==== इसमें मंगल की हुंकारें, इसमें बिस्मिल का बलिदान। इसमें लाखों माताओं के, अश्रु, तपस्या और सम्मान। ====6==== दशकों तक जो मौन रहा, वह स्वाभिमान आज जागा है। भारत माता के मस्तक पर, फिर स्वाभिमान का मुकुट सजा है। ====7==== इसलिए फिर कहता हूँ, कोटि-कोटि अभिनंदन है। जिस "वन्दे मातरम्" पर पह...

कविता : तुष्टिकरण का अंत

कविता : तुष्टिकरण का अंत सिंहासन की तुच्छ नीति का, आज कुहासा छँट गया, तुष्टिकरण का काल-अँधेरा, महाकाल से कट गया। कोटि-कोटि कंठों से गूँजा, वंदे मातरम का नारा, जाग उठा है सिंह सनातन, डोल उठा अंबर सारा। बाँट रहे थे जो भारत को, जाति-पाति के खानों में, थपकी देकर सुला रहे थे, राष्ट्रवाद को थानों में। उस कायरता की छाती पर, शौर्य-शंख अब बाजा है, सिंहासन पर बैठा देखो, न्याय-नीति का राजा है। झुकती थीं जो सत्ताएँ, केवल इक खास इशारे पर, छोड़ दिया था राष्ट्र-भाग्य को, राजनीति के धारे पर। उन बेड़ियों को काट फेंककर, भारत आज खड़ा हुआ, विश्व-मंच पर महाशक्ति बन, सबसे वीर बड़ा हुआ। कोटि-कोटि धन्यवाद उस नायक को, जिसने ठाना है, तुष्टिकरण की कब्र खोदकर, नया विहान लाना है। अब न झुकेगा, अब न रुकेगा, यह संकल्प हमारा है, मुक्त हुआ है देश भ्रम से, यह स्वतंत्र जयकारा है। वंदे मातरम! वंदे मातरम! ------------------------------

कांग्रेस बनाम हिंदुत्व

कांग्रेस सरकारों के दौरान मुख्य रूप से जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और मनमोहन सिंह के कार्यकाल पर हिंदू विरोधी कृत्यों और तुष्टीकरण के आरोप लगाए जाते रहे हैं। आलोचकों और राजनीतिक दलों (विशेषकर भाजपा) द्वारा इन प्रधानमंत्रियों के काल के जिन प्रमुख कृत्यों का उल्लेख किया जाता है, उनका विवरण इस प्रकार है:  ## जवाहरलाल नेहरू का कार्यकाल (1947–1964) * सोमनाथ मंदिर का विरोध: वर्ष 1951 में गुजरात के सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण और जीर्णोद्धार का नेहरू ने विरोध किया था तथा तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के वहां जाने पर भी आपत्ति जताई थी।  * हिंदू कोड बिल: नेहरू द्वारा लाए गए हिंदू विवाह और उत्तराधिकार कानूनों को पारंपरिक हिंदू मान्यताओं में हस्तक्षेप और केवल बहुसंख्यक समुदाय के पर्सनल लॉ को बदलने वाला माना गया।  ## इंदिरा गांधी का कार्यकाल (1966–1977, 1980–1984) * सांप्रदायिक संतुलन और नीतियां: आपातकाल के दौरान धार्मिक और वैचारिक संगठनों पर कार्रवाई तथा राजनीति में अल्पसंख्यक तुष्टीकरण की शुरुआत को लेकर उनकी नीतियों की आलोचना की जाती है।  ## मनमोहन सिंह का कार्यकाल ...

स्व-अर्जित संपत्ति एवं पैतृक संपत्ति

इस ऐतिहासिक फैसले का केस नंबर और पूरा कानूनी ब्यौरा निम्नलिखित है: ## केस का विवरण * केस का नाम: श्रीमती उषा एन. स्वामी बनाम श्री एम. वेंकटस्वामी और अन्य (Smt. Usha N. Swamy v. Sri M. Venkataswamy & Ors.) [1, 2]  * केस नंबर: आर.एफ.ए. नंबर 1568/2018 (RFA No. 1568 of 2018) [2]  * फैसले की तारीख: 16 जून, 2026 [3]  * पीठ (Bench): न्यायमूर्ति डी.के. सिंह और न्यायमूर्ति टी.एम. नदाफ की खंडपीठ  ------------------------------ ## मामले की पृष्ठभूमि (पूरा ब्यौरा)    1. विवाद की वजह: इस मामले में एक पोती (बेटी) ने अपने दादा की संपत्तियों में समान हिस्सेदारी (Partition Suit) का दावा करते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। उसका तर्क था कि चूंकि यह संपत्ति उसके पिता को दादा से मिली है, इसलिए हिंदू उत्तराधिकार कानून (संशोधन) 2005 के तहत उसे भी इसमें जन्मजात सहदायिक (Coparcener) अधिकार मिलना चाहिए।     2. सच्चाई क्या थी?: कानूनी जांच में यह सामने आया कि विवादित संपत्तियां मूल रूप से दादा की स्व-अर्जित (Self-Acquired) थीं, यानी उन्होंने इसे अपनी निजी कमाई से ...

युवा कौशल विकास में उद्योग निभा रहे हैं बड़ी भूमिका

विश्व युवा कौशल दिवस पर Samsung DOST ने दिखाई राह, युवाओं के कौशल विकास में उद्योग निभा रहे हैं बड़ी भूमिका Samsung DOST जैसे ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग और स्टाइपेंड आधारित कार्यक्रम, स्किल इंडिया मिशन के तहत भारतीय युवाओं को सीधे रोजगार से जोड़ने का सबसे असरदार जरिया बन रहे हैं। यह मॉडल पारंपरिक क्लासरूम पढ़ाई और आज के बाजार की असली जरूरतों के बीच की दूरी को खत्म कर युवाओं के लिए नौकरी की राह खोलता है। संयुक्त राष्ट्र (UN) की इस साल की थीम "साझे भविष्य के लिए हुनर" है। भारत के लिए इसमें 'साझा' शब्द सबसे ज्यादा मायने रखता है और इस साझेपन का एक बड़ा हिस्सा कंपनियों की तरफ से आना चाहिए। Samsung DOST युवाओं को रिटेल क्षेत्र के लिए जरूरी कौशल और प्रैक्टिकल अनुभव देकर इस साझा जिम्मेदारी को वास्तविक करियर में बदलने में मदद कर रहा है। 15 जुलाई 2015 को दो बड़े लॉन्च एक ही दिन हुए थे। संयुक्त राष्ट्र ने अपना पहला 'विश्व युवा कौशल दिवस' मनाया और ठीक उसी दिन नई दिल्ली में भारत सरकार ने 'स्किल इंडिया मिशन' की शुरुआत की। ग्यारह साल बाद आज, ऐसा एक ही तारीख पर होना एक बड़ा सं...