संदेश

मीडिया,सोशल मीडिया, आई टी और ए आई

प्रिय साथियों, नमस्कार 🙏 आज हम एक बहुत महत्वपूर्ण विषय पर बात करने के लिए यहाँ एकत्र हुए हैं— मीडिया, सोशल मीडिया, आईटी और एआई पहले राजनीति का तरीका अलग था। नेता लोगों तक पहुँचने के लिए सभा, रैली और घर-घर संपर्क करते थे। आज भी ये जरूरी है, लेकिन अब समय बदल गया है। 👉 आज का जमाना डिजिटल जमाना है। अब मोबाइल ही सबसे बड़ा मंच बन चुका है। 📰 1. मीडिया का महत्व साथियों, मीडिया क्या है? मीडिया वो माध्यम है जिससे हमारी बात जनता तक पहुँचती है। जैसे—टीवी, अखबार, न्यूज़ चैनल 👉 अगर आपकी बात मीडिया में आती है, तो लाखों लोग आपको जानते हैं। उपयोग: आपकी पहचान बनती है आपकी बात दूर-दूर तक जाती है जनता का विश्वास बढ़ता है 👉 सरल शब्दों में: “मीडिया आपकी आवाज़ को ताकत देता है” 📱 2. सोशल मीडिया का महत्व अब बात करते हैं सबसे ताकतवर चीज की— सोशल मीडिया पहले हमें 1000 लोगों तक पहुँचने के लिए रैली करनी पड़ती थी। आज एक मोबाइल से हम लाखों लोगों तक पहुँच सकते हैं। उदाहरण: WhatsApp पर मैसेज भेजो Facebook पर पोस्ट डालो YouTube पर वीडियो डालो उपयोग: जनता से सीधा संपर्क अपनी बात तुरंत पहुँचाना प्रचार करना आसान 👉 ...

सिरेंडर कांग्रेस...

1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद 54 भारतीय सैनिक लापता हैं, जिन्हें अक्सर 'मिसिंग 54' (Missing 54) कहा जाता है। माना जाता है कि ये सैनिक पाकिस्तानी जेलों में युद्धबंदी (PoW) के रूप में बंद हैं। वर्षों के बीत जाने और परिजनों के संघर्ष के बावजूद, इन सैनिकों की वापसी अब भी एक अनसुलझी पहेली और बड़ा कूटनीतिक मुद्दा है। 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के गुमनाम नायकों में से एक, मेजर अशोक कुमार सूरी (Major Ashok Kumar Suri) की कहानी वीरता, बलिदान और अंतहीन इंतज़ार की एक मार्मिक गाथा है। वे उन 54 भारतीय युद्धबंदियों (POWs) में से एक थे, जो युद्ध के बाद भी पाकिस्तान की जेलों में रह गए, लेकिन भारत कभी वापस नहीं लौटे। मेजर अशोक कुमार सूरी हरियाणा के फरीदाबाद के रहने वाले थे। वे 5 असम बटालियन (Assam Regiment) में कमीशंड ऑफिसर थे और बेहद बहादुर और खेल प्रेमी (विशेषकर हॉकी) अधिकारी थे। 1971 के युद्ध के दौरान, वे चम्ब सेक्टर (पश्चिमी मोर्चे) में तैनात थे। बटालियन क्वार्टर मास्टर के रूप में, उन्होंने मुन्नवर और तवी नदी के पास 191 इन्फैंट्री ब्रिगेड की अग्रिम रक्षा पंक्तियों में गोला-बारूद और ...

भू-अभिलेख के स्तर पर रिकॉर्ड को दुरुस्त कराया जा सकता है

मध्यप्रदेश में स्वामित्व योजना के तहत संपत्ति कार्ड (अधिकार अभिलेख) वितरण में गड़बड़ी, गलत नाम दर्ज होने या सीमांकन में त्रुटि के मामलों के निराकरण के लिए मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता (MP Land Revenue Code), 1959 के अंतर्गत स्पष्ट प्रावधान और प्रक्रिया निर्धारित है। स्वामित्व योजना में हुई गड़बड़ी के संबंध में प्रमुख रूलिंग और सुधारात्मक उपाय इस प्रकार हैं:- 1. आपत्तियों के निस्तारण की प्रक्रिया (Legal Remedies): अंतिम प्रकाशन से पूर्व: जब ड्रोन सर्वे के बाद गांव का मानचित्र (Map) तैयार किया जाता है, तो उसे ग्राम पंचायत में प्रदर्शित किया जाता है। यदि संपत्ति कार्ड में नाम, रकबा (क्षेत्रफल) या सीमा में गलती है, तो ग्रामीण प्रकाशन की तिथि से एक निर्धारित समय के भीतर (आमतौर पर 30 दिन) अपनी आपत्ति राजस्व विभाग (पटवारी या तहसीलदार) को दे सकते हैं। अंतिम प्रकाशन के बाद: यदि कार्ड वितरित हो चुके हैं, तो मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 115 या 116 के तहत तहसीलदार के समक्ष "अभिलेखों में सुधार" के लिए आवेदन किया जा सकता है।  2. विवादों के निराकरण के लिए रूलिंग (Dispute Resolut...

कविता - भारत की जान मोदी,

भारत की जान मोदी, भारत का मान मोदी, भारत का सम्मान मोदी, मोदी भारत की शान है। सीना तान विश्व मंचों पर, भारत की पहचान है, हर राष्ट्र संग बढ़ता रिश्ता, यह उनकी उड़ान है। कूटनीति की धार से जीता, हर दिल और हर देश, मित्रता का दीप जलाकर, मिटा दिए संशय-लेश। अमेरिका से अरब धरा तक, गूंजा भारत नाम, शांति, शक्ति और सहयोग का, फैला दिव्य पैगाम। सीमा से सागर तक फैली, विश्वासों की डोर, मोदी के नेतृत्व में चमका, भारत हर एक छोर। दुश्मन भी अब सोच में डूबे, कैसी यह हुंकार, शब्दों में भी शक्ति दिखे जब, हो सच्चा व्यवहार। विश्व गुरु बनने की राहें, अब हुईं आसान, नीति, नीयत, और नायक—तीनों का संगम महान। संकट में भी साथ निभाया, मानवता का मान, वैक्सीन से लेकर मदद तक, बढ़ाया देश सम्मान। हर मंच पर भारत बोले, साहस की जुबान, मोदी के इस युग में जग में, ऊँचा हिन्दुस्तान। भारत की जान मोदी, भारत का मान मोदी, भारत का सम्मान मोदी, मोदी भारत की शान है।

हिंदू नववर्ष 2083 कोटा महानगर के आयोजन

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