संदेश

भाजपा के राजनीतिक एवं संगठनात्मक सुदृढ़ीकरण हेतु सुझाव-पत्र

1- कांग्रेस के एजेंडे में नहीं फंसना चाहिए  2- राहुल को बेटेज देना बंद करें  3- बहुअयामी मीडिया प्रबंधन हों  जैसे - मीडिया संपर्क विभाग मज़बूत हो, थर्डपार्टी मीडिया प्रबंधन मजबूत हो, मीडिया महामंत्री राष्ट्रीय और प्रांतीय स्तर पर आवश्यकरूप से हो... 4- संपत्ति ठेकेदारी सप्लाईगिरी सब दिखती है... कुछ पर्दा होना चाहिए  5- धर्मिक दिखना और धर्मिक होना  6- हिंदुत्व से जुडी समस्याएं एक साथ करके एक साथ निबंटाई जाएँ... भाजपा के राजनीतिक एवं संगठनात्मक सुदृढ़ीकरण हेतु सुझाव-पत्र प्रस्तावना वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में केवल सरकार का अच्छा कार्य करना पर्याप्त नहीं है। जनता तक उपलब्धियों, विचारधारा और नीतियों को प्रभावी ढंग से पहुँचाना, विपक्ष के आरोपों का तथ्यात्मक उत्तर देना, कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करना और बदलते सामाजिक-तकनीकी वातावरण के अनुरूप संगठन की कार्यपद्धति में परिवर्तन करना भी आवश्यक है। इस दृष्टि से निम्न सुझाव विचारार्थ प्रस्तुत हैं। 1. नेतृत्व की छवि — साहसी, दृढ़, आत्मविश्वासी और निर्णायक हो भारत में राजनीतिक नेतृत्व का साहसी छवि, दृढ़ता और निर्णय लेने ...

विकृत मानसिकता से अपने बच्चों की सुरक्षा करना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है — अरविन्द सिसोदिया

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स्कूल में जबरिया घुसपैठ करने आये लोगों की तत्काल गिरफ्तारी हो - अरविन्द सिसोदिया  विकृत मानसिकता से अपने बच्चों की सुरक्षा करना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है — अरविन्द सिसोदिया कोटा, 22 अगस्त। राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी अरविन्द सिसोदिया ने जयपुर के निकट ग्रामीणों और कथित सीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच हुई घटना पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि, "अपने बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा के लिए ग्रामीणों द्वारा किया गया प्रतिरोध स्वाभाविक है। बच्चों, शिक्षकों और अभिभावकों को भी आत्मरक्षा तथा सुरक्षित एवं व्यवस्थित वातावरण सुनिश्चित करने का पूरा अधिकार है।" सिसोदिया ने कहा कि, "देश सीजेपी की अनैतिक, आपराधिक और अराजकतावादी मानसिकता को जंतर-मंतर से लेकर आए दिन दिए जाने वाले सार्वजनिक वक्तव्यों तक देख और महसूस कर रहा है। देश का सामाजिक वातावरण इस प्रकार की गैरकानूनी गतिविधियों को पूरी तरह अस्वीकार करता है।" उन्होंने कहा कि, "गाली-गलौज करने वाले तथा अनैतिक आचरण और अशोभनीय गतिविधियों का प्रदर्शन करने वाले लोगों से अपने बच्चों क...

वन्देमातरम vndematram

 'वंदे मातरम्' में इन सभी रूपों (दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती) का वर्णन मातृभूमि यानी भारतमाता की शक्ति, समृद्धि और ज्ञान रूपी विशेषताओं को दर्शाने के लिए काव्यात्मक (Metaphorical) रूप में किया गया है। समर्थकों और रचनाकार के दृष्टिकोण से इन विशेषताओं का अर्थ इस प्रकार है: * मातृभूमि ही सर्वोच्च शक्ति: रचयिता बंकिम चंद्र चटर्जी ने देश की भौगोलिक और सांस्कृतिक भूमि को ही जननी मानकर उसकी स्तुति की है। * दुर्गा (रक्षा और बल): मातृभूमि की रक्षा करने वाली अदम्य शक्ति और साहस को 'दशप्रहरणधारिणी दुर्गा' के रूप में दर्शाया गया है। * कमला/लक्ष्मी (समृद्धि): देश की उपजाऊ भूमि, प्राकृतिक सौंदर्य, अन्न और धन के भंडार को 'कमलदलविहारिणी कमला' कहा गया है। * वाणी/सरस्वती (ज्ञान और संस्कृति): भारत की प्राचीन विद्या, चेतना, कला और बौद्धिक संपदा को 'विद्यादायिनी वाणी' के रूप में नमन किया गया है। इस विचारधारा के अनुसार, ये सभी नाम और रूप अलग-अलग देवी-देवताओं की पूजा के लिए नहीं, बल्कि भारतमाता के विभिन्न गुणों (शक्ति, धन और ज्ञान) का बखान करने वाले अलंकारिक प्रतीक हैं। क्या आप ...

वन्देमातरम एकता का महामंत्र है, विभाजनकारी मानसिकता के आगे अब देश सिरेंडर नहीं करेगा - अरविन्द सिसोदिया

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सादर प्रकाशनार्थ वन्दे मातरम् एकता का महामंत्र है, विभाजनकारी मानसिकता के आगे अब देश सरेंडर नहीं करेगा — अरविन्द सिसोदिया कोटा, 21 अगस्त। राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल, जयपुर के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी एवं वरिष्ठ बुद्धिजीवी अरविन्द सिसोदिया ने कहा कि ‘वन्दे मातरम्’ केवल एक गीत या कुछ शब्दों का समूह नहीं, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता की चेतना, सांस्कृतिक अस्मिता और राष्ट्रीय स्वाभिमान का शक्तिशाली महामंत्र है। इसमें राष्ट्रीय, सांस्कृतिक एवं सामाजिक एकता की गजब की महाशक्ति है। उन्होंने कहा कि भारत लाखों वर्षों से चली आ रही जीवंत, चैतन्य और सनातन सांस्कृतिक परंपरा वाला अत्यंत पुरातन राष्ट्र है। स्वतंत्रता आंदोलन की चेतना से जुड़ा महामंत्र सिसोदिया ने कहा कि किसी भी संप्रभु राष्ट्र का अस्तित्व उसके स्वाभिमान और राष्ट्रीय प्रतीकों की गरिमा से जुड़ा होता है। भारत के संदर्भ में ‘वन्दे मातरम्’ ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान जनमानस में राष्ट्रीय चेतना और स्वाधीनता की भावना को जागृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्वतंत्रता संग्राम के विभिन्न चरणों में इसकी गूंज राष्ट्रीय एकता, र...

माननीय जिला कलेक्टर महोदय, स्वामित्व योजना

माननीय जिला कलेक्टर महोदय,  जिला - गुना  जिला कलेक्ट्रेट परिसर, गुना। विषय - 1.स्व भूपेंद्र सिंह सिसोदिया पुत्र स्व समंदर सिंह जी के प्लाट क्रमांक- 32 रकबा 2175 वर्ग मीटर, आबादी खसरा नंबर 273 रकबा 1.076 हैक्टर, ग्राम - मोड़का, ग्राम पंचायत - सूजाखेड़ी, तहसील बमोरी, जिला गुना मप्र स्थित पुस्तेनी आवासीय परिसर के स्वामित्व सर्वेक्षण में तैयार किए गये खसरे में त्रुटि सुधार कर सभी उत्तराधिकारीयों के नाम दर्ज किए जानें के संदर्भ में। 2. त्रुटि सुधार निर्णय होनें तक उपरोक्त संपत्ति के सभी आठ सह स्वामियों के हितों की रक्षा करने हेतु वर्तमान आदेश को स्थगित कर,किसी भी प्रकार के क्रय विक्रय एवं किसी भी प्रकार के हस्तानांतरण रोक एवं यथास्थिति बनाये रखने के संदर्भ में। संदर्भ - स्वामित्व योजना के अंतर्गत प्रकरण क्रमांक 0863/अ -3/2020-21जिसका अंतिम प्रकाशन 02/05/2023 को हुआ है के संदर्भ में। वादी  अरविन्द सिंह सिसोदिया पुत्र भूपेंद्र सिंह सिसोदिया जाति राजपूत आयु 69 वर्ष निवासी ग्राम मोड़का जिला गुना हाल निवास - बेकरी के सामने, राधाकृष्ण मंदिर रोड़, डडवाड़ा, कोटा जंक्शन राज पिनकोड - 324002 ...

स्वामित्व -2

* पूर्व कब्जा, परंपरागत निवास या पुश्तैनी रूप से चले आ रहे अधिकार समाप्त नहीं हुए हैं, बल्कि इस योजना के माध्यम से उन्हीं पुराने और परंपरागत अधिकारों को पहली बार लिखित, वैध और डिजिटल कानूनी मान्यता (रजिस्ट्री) दी गई है।  - ग्रामीण भारत में सदियों से चली आ रही पारंपरिक व्यवस्था को इस योजना के तहत किस प्रकार मजबूत किया गया है, इसे आप इन बिंदुओं से समझ सकते हैं:- ## 1. पुराने कब्जे को ही आधार माना गया है * इस योजना का मूल सिद्धांत ही यही है कि "जो जहां काबिज है, वही वहां का मालिक है"। * ड्रोन सर्वे और जमीनी सत्यापन के समय आपके दादा-परदादा के समय से चले आ रहे पुश्तैनी मकान, बाड़े या खाली रिहायशी जमीन के भौतिक कब्जे (Physical Possession) को ही आधार मानकर नक्शा खींचा गया है।  * किसी भी नागरिक को उसके पुराने कब्जे से बेदखल नहीं किया गया है।  ## 2. मौखिक या अनौपचारिक अधिकार अब "लिखित कानून" बन गए हैं * पहले गांवों की आबादी भूमि (घरोनी) का कोई सरकारी लिखित रिकॉर्ड (खसरा-खतौनी की तरह) नहीं होता था। ग्रामीण केवल इस आधार पर रहते थे कि "यह हमारा पुश्तैनी घर है"।  * [स्...

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, किसी को भी अपमानजनक व्यवहार का अधिकार नहीं देती

त्रिपुरा हाईकोर्ट ने अगस्त 2026 में दिए अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि लोकतंत्र में राजनीतिक आलोचना स्वीकार्य है, लेकिन सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री के खिलाफ अपमानजनक, अभद्र या मानहानिकारक भाषा का इस्तेमाल करना पूरी तरह से गैरकानूनी है। न्यायालय ने ज़ोर देकर कहा कि संविधान के तहत मिलने वाला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार किसी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने का लाइसेंस नहीं देता है।  जस्टिस टी. अमरनाथ गौड़ और जस्टिस एस. दत्ता पुरकायस्थ की खंडपीठ ने सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर माधबी बिस्वास चक्रवर्ती के खिलाफ दर्ज एफआईआर और चार्जशीट को रद्द करने से इनकार करते हुए यह फैसला सुनाया।  ## कोर्ट के फैसले की मुख्य बातें: * संवैधानिक पद की गरिमा: अदालत ने कहा कि प्रधानमंत्री देश में एक उच्च संवैधानिक पद पर आसीन हैं। उनके नाम और उपनाम का मज़ाक उड़ाना या उनके खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करना वैश्विक स्तर पर उनकी छवि को धूमिल करने के प्रयास जैसा है।  * अभिव्यक्ति की आजादी असीमित नहीं: कोर्ट ने याचिकाकर्ता के इस तर्क को पूरी तरह खारिज कर दिया कि अनुच्छेद 19(1)(a) के ...