संदेश

Pandit Deendayal Upadhyaya : Bharatiya thinker & philosopher

चित्र
    Pandit Deendayal Upadhyaya Executive Summary: Pandit Deendayal Upadhyaya was an eminent Bharatiya thinker, economist, writer, editor, political scientist, journalist, sociologist, historian, thinker, employer and philosopher, social worker and politician.He who was one of the leading lights  of the Bharatiya Jana Sangh, the erstwhile avtar of  the present day Bharatiya Janata Party. He was born on 25 September 1916 in a religious family .  His father, Bhagwati Prasad, was a well-known astrologer and his mother Shrimati Rampyari was a religious-minded lady. Both his parents died when he was eight years old and he was brought up by his maternal uncle. Deendayal was a proponent of an alternative model of governance and politics. He argued that neither communism nor capitalism were suitable for Bharat. Upadhyaya conceived the political philosophy Integral Humanism. He believed in Swaraj ("Self-governance"). He is also well known for the giving mantra of Antyodaya to the count

महंत नरेन्द्र गिरी के संदिग्ध निधन पर सपा की राजनीति,पाखण्ड की पराकाष्ठा - अरविन्द सिसौदिया

चित्र
           हिंदुत्व को लगातार अपमानित करते रहे,अवरोधित करते रहे, उसके ऊपर कहर बरपाती रही, उत्तरप्रदेश की सत्ता में कई बार रही समाजवादी पार्टी के हाथ निदोर्ष हिन्दूओं के खून से सने हुये हैं। उनके द्वारा, उत्तर प्रदेश के चुनाव को देखते हुये,निरंजनी अखाड़े के महंत और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष परमपूज्य संत महंत नरेंद्र गिरि जी के दुःखद निधन प्रकरण को लेकर के राजनीति करना निंदनीय है ।         यह हिंदुत्व पर सपा का तुच्छ राजनीति का बघार ही माना जायेगा । उनका बचकाना पन माना जायेगा। राजनैतिक स्वार्थ के लिये एक हिन्दू धर्माचार्य की संभावित हत्या / आत्महत्या को मजाक बनानें की नौटंकी माना जायेगा । पुलिस की जांच टीम पर सिर्फ इसलिये अविश्वास आरोपित करना कि समाजवादी पार्टी को सत्ता से बाहर करने वाली भाजपा वहां शासन में है। यह संवैधानिक व्यवस्था पर प्रश्न उठानें का बचकाना नमूना मात्र है। इसे मानसिक दिवालियापन ही इसे कहा जा सकता है। यह अत्यंत निंदनीय है और संपूर्ण हिंदू समाज को अपमानित करने वाला है ।                हिन्दू समाज को पूरी तरह एक जुट होकर राजनीतिक स्वार्थी तत्वों को जवाब देना चाह

25 सितम्बर जयंती पर विशेष : पंडित दीनदयाल उपाध्याय: एक युग-दृष्टा

चित्र
      पंडित दीनदयाल उपाध्याय: एक युग-दृष्टा   कार्यकारी सारांश        पंडित दीन दयाल उपाध्याय एक जाने-माने अर्थशास्त्री, लेखक, संपादक, राजनीतिक वैज्ञानिक, पत्रकार, समाजशास्त्री, इतिहासकार, विचारक, नियोक्ता और दार्शनिक थे। उनका जन्म 25 सितंबर 1916 को मथुरा निवासी एक अत्यंत धार्मिक  परिवार में हुआ था। उनका मूलतः जन्म नाना के यहां हुआ था जो कि राजस्थान के जयपुर के निकट धानिक्या रेल्वे स्टेशन के स्टेशन मास्टर थे। पण्डित जी की जन्मस्थली पर एक गरिमामय स्मारक स्थापित है। वह बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के विद्यार्थी थे । उन्होंने कला में स्नातक  और साहित्य में परास्नातक की पढ़ाई की। वह जनसेवा करने के मन्तव्य से राजकीय सेवा से जुड़े किन्तु उन्होने शीघ्र ही न मात्र इसका परित्याग कर दिया बल्कि अपने समस्त उपाधियों के प्रमाणपत्रों को जला दिया क्योंकि वह जिस प्रकार की सामाजिक और राजनीतिक संरचना गढ़ना चाहते थे, राजकीय सेवा में रहते हुए उसे पूरा कर पाना संभव नहीं था।       दीनदयाल शासन और राजनीति के वैकल्पिक प्रारूपों के प्रस्तावक थे।  उनका मानना था कि भारत के लिए न तो साम्यवाद और न ही पूंजीवाद उपयुक्त

कांग्रेस की निर्णयहीनता, फूट और अनैतिकता को ही उजागर किया पंजाब एपीसोड नें - अरविन्द सिसौदिया

चित्र
    कांग्रेस की निर्णयहीनता , फूट और अनैतिकता को ही उजागर किया पंजाब एपीसोड नें - अरविन्द सिसौदिया    भारतीय जनता पार्टी ने हाल ही में 4 बार अलग-अलग मुख्यमंत्री बदले, कहीं कोई विरोध या विद्रोह जैसी बात समानें नहीं आई। इसमें सबसे ताजा घटनाक्रम गुजरात का रहा जहां मुख्यमंत्री के साथ पूरा मंत्रिमंडल भी बदल दिया गया। पूरी तरह अनुशासित एवं बिना बयानवाजी के हो गया।     इसी की प्रेरणा लेते हुए कांग्रेस ने भी पंजाब में मुख्यमंत्री बदलने जा रही थी कि राजनीति का लम्बा अनुभव रखने वाले मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने ट्रंप कार्ड खेलते हुये खुद मन्त्रिमण्डल सहित राज्यपाल को त्यागपत्र दे दिया और सारे खेल के कर्ताधर्ता नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष नवज्योत सिंह सिद्धू की पाकिस्तान परस्ति उजागर कर राष्ट्र के लिए खतरा बता कर कटघरे कर दिया। मेरा मानना है कि सिंह ने कांग्रेस से ससम्मान अपना रियाटरमेंट ले लिया। वे आगे शरद पंवार और ममता बर्नजी की तरह अलग दल भी बना सकते है। आप उन्हे लीडर बनायेगी नहीं, भाजपा में वे स्वयं अभी जायेंगे नहीं। शिरामणी अकाली दल में वे बहुत नीचे रहेंगे इसलिये वहां जानें की संभावनाये