अंतिम यात्रा में "राम नाम सत्य है " क्यों...
🔥 अंतिम यात्रा में "राम नाम सत्य है" क्यों बोला जाता है? जानिए इसका अद्भुत रहस्य! 🙏🏽 🍂 "राम नाम सत्य है" - एक अंतिम यात्रा का मंत्र या जीवन का परम सत्य? 🔥🙏🏽 हम सभी ने अंतिम यात्रा के दौरान "राम नाम सत्य है" का उद्घोष सुना है। आखिर यह परंपरा कब और क्यों शुरू हुई? इसके पीछे गोस्वामी तुलसीदास जी से जुड़ी एक अद्भुत कथा प्रचलित है। 📜 एक प्रचलित कथा के अनुसार: एक समय की बात है, जब गोस्वामी तुलसीदास जी अपने गाँव में रहते थे। वे सदैव प्रभु राम की भक्ति में लीन रहते। उनकी अनन्य भक्ति को देखकर घरवालों और गाँववालों ने उन्हें 'ढोंगी' कहकर घर से निकाल दिया। तुलसीदास जी गंगा तट पर रहने लगे और वहीं प्रभु की आराधना करने लगे। यह वही समय था जब वे 'रामचरितमानस' की रचना आरंभ कर रहे थे। उसी दिन उनके गाँव में एक युवक का विवाह हुआ। वह अपनी नई-नवेली दुल्हन को लेकर घर आया, लेकिन दुर्भाग्यवश उसी रात किसी कारणवश उस युवक की मृत्यु हो गई। घर में कोहराम मच गया। सुबह जब लोग युवक की अर्थी सजाकर श्मशान घाट ले जाने लगे, तो उसकी दुल्हन भी सती होने की इच्छा से अर्थी क...