संदेश

PMO

सेवा में, माननीय प्रधानमंत्री जी, भारत सरकार, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), साउथ ब्लॉक, नई दिल्ली - 110011 विषय: 'डिजिटल इंडिया' की सुरक्षा हेतु कक्षा 6 से 12 तक के पाठ्यक्रम में 'साइबर सुरक्षा एवं डिजिटल आत्मरक्षा' को अनिवार्य पाठ्यपुस्तक के रूप में सम्मिलित करने के संबंध में। आदरणीय प्रधानमंत्री जी, सादर प्रणाम। आपके यशस्वी और दूरदर्शी नेतृत्व में भारत ने 'डिजिटल इंडिया' अभियान के माध्यम से विश्व की सबसे बड़ी डिजिटल क्रांति का सूत्रपात किया है। यूपीआई (UPI), ५जी (5G) नेटवर्क का विस्तार और सुदूर गांवों तक इंटरनेट की पहुंच ने देश का कायाकल्प कर दिया है। आज हमारा देश एक सशक्त डिजिटल अर्थव्यवस्था बन चुका है। किंतु, इस तीव्र तकनीकी प्रगति के समानांतर भारत के सामने एक नया, अदृश्य और अत्यंत संवेदनशील खतरा भी खड़ा हो गया है। हमारी इस अभूतपूर्व प्रगति को बाधित करने के लिए विदेशी शक्तियों और वैश्विक साइबर अपराधियों द्वारा भारतीय समाज पर 'कॉग्निटिव वॉरफेयर' (Cognitive Warfare) यानी मानसिक व डिजिटल आक्रमण किया जा रहा है। इस युद्ध का सबसे आसान और पहला शिकार देश की त...

माननीय प्रधानमंत्री महोदय

सेवा में, माननीय प्रधानमंत्री महोदय भारत सरकार, नई दिल्ली। विषय : राष्ट्रहित में आंतरिक सुरक्षा तंत्र को सुदृढ़ करने एवं लोकतांत्रिक व्यवस्था की सुरक्षा हेतु आवश्यक सुधारों के संबंध में। महोदय, सादर निवेदन है कि राष्ट्रहित, आंतरिक सुरक्षा तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था की दीर्घकालिक मजबूती के दृष्टिगत निम्नलिखित बिंदुओं पर गंभीर समीक्षा एवं आवश्यक कार्यवाही अपेक्षित है। 1. सरकार की इंटेलिजेंस एवं आंतरिक सुरक्षा क्षमता में वृद्धि आवश्यक - राष्ट्रहित चिंतक सरकारों के विरुद्ध संचालित होने वाले संभावित संगठित षड्यंत्रों, उनके वित्तीय स्रोतों, डिजिटल नेटवर्क, विदेशी संपर्कों तथा संसाधनों की समय रहते पहचान करने में वर्तमान सुरक्षा एवं खुफिया तंत्र की प्रभावशीलता की व्यापक समीक्षा आवश्यक प्रतीत होती है। - विभिन्न आंदोलनों के दौरान कथित रूप से बड़ी संख्या में फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट, संगठित डिजिटल प्रचार, समन्वित अभियान, विदेशी प्रभाव, वित्तीय सहायता, डिजिटल एप्स एवं संसाधनों के उपयोग जैसे विषयों की निष्पक्ष एवं गहन जांच कराई जानी चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। - यदि किसी भी प्रकार से भ...

नकाब नया, चेहरे वही, आराजकता वही, मकसद संसद को बाधित करना - अरविन्द सिसोदिया

चित्र
बच्चों का भविष्य दांव पर लगाकर सत्ता प्राप्ति का षड्यंत्र स्वीकार्य नहीं, जनमत पूरी तरह सजग है – अरविन्द सिसोदिया नकाब नया, चेहरे वही, आराजकता वही, मकसद संसद को बाधित करना - अरविन्द सिसोदिया  कोटा, 22 जुलाई। राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी एवं वरिष्ठ बुद्धिजीवी अरविन्द सिसोदिया ने देश में विद्यार्थियों के नाम पर चलाए जा रहे आंदोलन और विपक्षी राजनीति पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि " भारत में विपक्ष का मतलब आराजकतावाद और आंदोलन का मतलब सिर्फ देशको क्षति पहुंचना रह गया है।" उन्होंने कहा कि " जनता द्वारा लगातार नकारे जा चुके कुछ राजनीतिक दल लोकतांत्रिक जनादेश को स्वीकार करने के बजाय चोर रास्ते से, सत्ता प्राप्ति के लिए, हर प्रकार के हथकंडे अपनाने में जुटे हुये हैं। जिस तरह किसान आंदोलन मूलरूप से किसान विरोधी था, उसी तरह यह आंदोलन भी युवा विरोधी ही है, इन्हें युवाओं से कोई लेना देना नहीं है। ये देश के विद्यार्थियों और युवाओं के भविष्य को दांव पर लगाकर खुद की राजनीतिक रोटियां सेकने में लगे हैं। जो कि अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय ...

आंदोलन का आराजकता के लिए दुरूपयोग उजागर , विपक्ष की श्रेय हड़पने की घुड़दौड़ — अरविन्द सिसोदिया

चित्र
आंदोलन के नाम पर अराजक हिंसा, राष्ट्र की अस्मिता पर हमला, देशहित में कठोरता से इसे रोका जाए — अरविन्द सिसोदिया कोटा, 23 जुलाई। राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी एवं वरिष्ठ बुद्धिजीवी अरविन्द सिसोदिया ने कहा कि, "कथित छात्र आंदोलन पूरी तरह अराजक तत्वों द्वारा हाईजैक किया जा चुका है। पत्थरबाजी और हिंसा इसमें सम्मिलित हो गई है। यह आंदोलन नहीं, बल्कि सोची-समझी योजना के तहत देश की व्यवस्था पर किया गया आक्रमण है। इसमें विपक्षी दल अपने-अपने हित साधने के साथ-साथ समानांतर प्रतियोगिता करते भी नजर आ रहे हैं। इस तरह के हिंसक गतिविधियों का लोकतंत्र में कोई स्थान नहीं है। " आंदोलन के नाम पर आराजक हिंसा, देश की अस्मिता पर हमला उन्होंने कहा कि, "पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं और छात्रों के भविष्य से जुड़े गंभीर मुद्दों के नाम पर शुरू हुआ कथित आंदोलन, यूँ तो प्रारंभ से ही भारतीय युवाओं के साथ विदेशी ताकतों का छल तथा उनके माध्यम से देश में अराजकता उत्पन्न करने का बड़ा षड्यंत्र है। जंतर-मंतर पर आंदोलनकारीयों द्वारा की गई पत्थरबाजी, सुरक्ष...

3- कलेक्टर महोदय

दिनांक : 22 जुलाई 2026 सेवा में, माननीय जिला कलेक्टर महोदय कलेक्ट्रेट परिसर, जिला गुना (मध्य प्रदेश) विषय :- जिला गुना मप्र में तहसील बमोरी में स्वामित्व योजना अंतर्गत प्रकरण क्रमांक 0863/अ-3/2020-21 में प्लॉट क्रमांक 32, आवासीय भूमि खसरा क्रमांक 273, ग्राम मोड़का, पटवारी हल्का 64 सूजाखेड़ी, तहसील बमोरी, जिला गुना स्थित पैतृक आवासीय संपत्ति जो किलेनुमा दो मंजिला पक्के मकानों सहित बहुमूल्य संपत्ति के, स्वामित्व अभिलेख एवं प्रॉपर्टी कार्ड में हुई गंभीर विधिक एवं तथ्यात्मक त्रुटि का सुधार कर स्वर्गीय श्री भूपेंद्र सिंह सिसोदिया के सभी प्रथम श्रेणी के वैध उत्तराधिकारियों के नाम संयुक्त सह-स्वामी के रूप में दर्ज किए जाने तथा अंतिम निर्णय तक उक्त संपत्ति के संबंध में किसी भी प्रकार की रजिस्ट्री, नामांतरण, हस्तांतरण, बंधक, ऋण अथवा अन्य स्वामित्व संबंधी कार्यवाही पर रोक लगाए जाने बाबत। महोदय, सविनय निवेदन है कि मैं अरविन्द सिंह सिसोदिया, पुत्र स्वर्गीय श्री भूपेंद्र सिंह सिसोदिया, ग्राम मोड़का, तहसील बमोरी, जिला गुना (मध्य प्रदेश) का मूल निवासी हूँ। मैं स्वर्गीय श्री भूपेंद्र सिंह सिसोदिया का ...

झूठे नैरेटिवों पर मोदीजी की विजयगाथा

झूठे नैरेटिवों पर मोदीजी की विजयगाथा झूठी नौटंकियाँ होती रहीं, देश को रोकने के लिए, काँटे बिछाए जाते रहे, हर कदम को रोकने के लिए। न कदम कभी डगमगाए, न दृढ़ विश्वास कम हुआ, मोदीजी बढ़ते रहे, हर चुनौती का सामना करने के लिए। ====1==== कभी उन्हें तानाशाह कहा, कभी न जाने क्या-क्या बोला, झूठ के बाज़ारों में हर दिन, नया-नया आरोप ही खोला। लेकिन समय ने हर अफ़वाह का सच दुनिया को दिखला दिया, सेवा, साहस और संकल्प ने हर भ्रम को मिटा दिया। ====2==== मोदीजी ने उत्तर भाषणों से कम, कर्मों से अधिक दिया, हर चुनौती को अवसर मान, भारत का मस्तक ऊँचा किया। जिन्होंने हर मोड़ पर रोड़े अटकाने का प्रयास किया, उन्होंने ही अनजाने में उनके संकल्प को और प्रखर किया। ====3==== सदियों की इस यात्रा में, ऐसा नेतृत्व कम ही आया, जिसने स्वयं से पहले भारत माँ का सम्मान बढ़ाया। हर संकट में अटल खड़े रहे, हर विपदा से लोहा लिया, विश्व पटल पर भारत का गौरव नई ऊँचाइयों तक पहुँचा दिया। ====4==== झूठे नैरेटिव थक जाएँगे, सत्य कभी न हार सकेगा, सेवा का पथ अपनाने वाला इतिहास में अमर रहेगा। जब-जब भारत की गाथा का स्वर्णिम अध्याय लिखा जाएगा, ...

देश में पत्रकारिता के लिए एक ठोस नियामक ढांचा हो - हाईकोर्ट

नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने डिजिटल मीडिया के दौर में प्रेस की स्वतंत्रता और जवाबदेही पर एक बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए देश में पत्रकारिता के लिए एक ठोस नियामक ढांचा (Regulatory Framework) बनाने का सुझाव दिया है। अदालत ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज के समय में हर वह व्यक्ति जिसके पास एक मोबाइल फोन और माइक्रोफोन है, वह खुद को 'रिपोर्टर' घोषित कर देता है। ऐसे स्वयंभू पत्रकारों के पास न तो पत्रकारिता का कोई औपचारिक प्रशिक्षण होता है और न ही वे किसी नैतिक जवाबदेही से बंधे होते हैं। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रेस की आजादी बेशक लोकतंत्र की आधारशिला है, लेकिन इसका उपयोग गैर-जिम्मेदाराना पत्रकारिता करने, लोगों को धमकाने या सार्वजनिक व्यवस्था को खतरे में डालने के लिए एक ढाल के रूप में नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने 'स्वयंभू पत्रकारों' द्वारा की जा रही चुनिंदा रिपोर्टिंग (Selective Reporting), सनसनीखेज खबरों और अपुष्ट आरोपों के प्रसारण पर गंभीर चिंता जताई। अदालत के अनुसार, बिना जांच-परख के चलाए जाने वाले ऐसे आचरण से न सिर्फ समाज में विभाजन गहरा सकता है, बल्कि सांप्रदायिक...

स्वतंत्रता से पूर्व से ही विभाजन, तुष्टीकरण और हिंदू हितों की उपेक्षा कांग्रेस की नीति

स्वतंत्रता से पूर्व से ही विभाजन, तुष्टीकरण और हिंदू हितों की उपेक्षा कांग्रेस की निर्बल नीति के कारण हुआ जो अभी तक चला आ रहा है - अरविन्द सिसोदिया  भारतीय राजनीति के इतिहास और वर्तमान का यदि निष्पक्ष विश्लेषण किया जाए, तो एक यक्ष प्रश्न लगातार सामने आता है—क्या भारत का विभाजन, सांस्कृतिक अवरोध और सांप्रदायिक तुष्टीकरण केवल तत्कालीन परिस्थितियों की मजबूरी थी, या फिर यह कांग्रेस की वैचारिक निर्बलता और अदूरदर्शी नीतियों का परिणाम था? इतिहास के पन्नों को पलटने पर स्पष्ट होता है कि ब्रिटिश हुकूमत की 'फूट डालो और राज करो' की कुटिल नीति को परास्त करने में कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व न केवल विफल रहा, बल्कि उसने अनजाने में या राजनीतिक लाभ के लिए उन विभाजनों और समझौतों को स्वीकार किया, जिनकी गूंज आज भी आधुनिक भारत में सुनाई देती है।  ब्रिटिश षड्यंत्र और कांग्रेस का आत्मसमर्पण यह ऐतिहासिक रूप से सिद्ध है कि अंग्रेजों ने बंगाल विभाजन (1905) जो 1947 में देश का विभाजन बना और अलीगढ़ आंदोलन के उत्तरार्ध का राजनीतिकरण करके भारत को धार्मिक आधार पर बांटने का जाल बिछाया था। लॉर्ड कर्जन से लेकर मिं...