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मिडटर्म....

अमेरिकी मध्यावधि (मिडटर्म) चुनावों में व्हाइट हाउस में बैठी सत्तारूढ़ पार्टी (राष्ट्रपति की पार्टी) का चुनाव हारना या संसद (कांग्रेस) में सीटें गंवाना एक ऐतिहासिक और बेहद मजबूत परंपरा रही है। अमेरिकी राजनीति में इसे "प्रेसिडेंशियल पेनल्टी" (Presidential Penalty) या मध्यावधि का दंड कहा जाता है। इतिहास गवाह है कि लगभग 90% बार देश की जनता मिडटर्म चुनावों में राष्ट्रपति की पार्टी के खिलाफ वोट करती है। [1] (https://www.jagran.com/world/america-us-midterm-elections-what-is-the-history-why-they-matter-how-significant-are-they-for-trump-40415259.html), [2] (https://translate.google.com/translate?u=https://en.wikipedia.org/wiki/United_States_midterm_election&hl=hi&sl=en&tl=hi&client=sge), [3] (https://translate.google.com/translate?u=https://www.aljazeera.com/news/2026/11/2/how-the-presidents-party-has-fared-in-every-us-midterm-election-since-1946&hl=hi&sl=en&tl=hi&client=sge), [4] (https://www.facebook.com/hareshkumar1976/posts/%E0%A4%85%E0%A4%AE%E0%A5...

संगठन की मजबूती हेतु

राष्ट्रीय राजनीतिक दल के संगठन को अधिक सक्रिय, अनुशासित, जवाबदेह और जनसंपर्क आधारित बनाने के लिए आपके तीनों प्रश्न अत्यंत प्रासंगिक हैं। इन्हें आधार बनाकर पदाधिकारियों, जिला अध्यक्षों, मंडल अध्यक्षों एवं विभिन्न संगठनात्मक दायित्व निभा रहे कार्यकर्ताओं की समीक्षा के लिए एक विस्तृत संगठनात्मक समीक्षा प्रश्नावली तैयार की जा सकती है। इसका उद्देश्य केवल पदाधिकारियों से जानकारी लेना नहीं, बल्कि यह जानना भी होना चाहिए कि संगठन जमीन पर कितना सक्रिय है, कार्यकर्ताओं से उसका संवाद कितना प्रभावी है और आम नागरिकों से उसका संपर्क किस प्रकार बना हुआ है। ### संगठनात्मक मजबूती एवं सक्रियता हेतु संभावित समीक्षा प्रश्नावली ### 1\. संगठन विस्तार एवं सक्रियता * आपने पिछले 15 दिनों में संगठन के विस्तार एवं मजबूती के लिए कौन-कौन से ठोस कार्य किए हैं? * आपके क्षेत्र में पिछले एक माह में कितने नए लोग संगठन की गतिविधियों से जुड़े हैं? * क्या आपके पास अपने क्षेत्र के सक्रिय सदस्यों एवं पदाधिकारियों की अद्यतन सूची उपलब्ध है? * आपके क्षेत्र में कौन-कौन से बूथ अथवा संगठनात्मक इकाइयां निष्क्रिय हैं? उन्हें सक्रिय ...

रामायण में वर्णित नक्षत्रों की स्थितियों को लाखों साल पीछे सटीक रूप से सिद्ध किया जा सकता है

खगोलीय गणना और पृथ्वी के अयनचलन (Precession of Equinoxes) के सिद्धांतों के अनुसार, 17.5 लाख वर्ष पूर्व चैत्र मास शिशिर ऋतु (शीत ऋतु या ठंड के मौसम) में आता होगा। इसके पीछे का वैज्ञानिक और गणितीय कारण इस प्रकार है: 1. पृथ्वी का अयनचलन (Precession of Equinoxes) पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमते हुए एक लट्टू की तरह बहुत धीमी गति से डगमगाती (Wobble) भी है। इस गति को अयनचलन कहते हैं। पृथ्वी को ऐसा एक पूरा चक्र (360 डिग्री) पूरा करने में लगभग 25,772 वर्ष का समय लगता है। 2. निरयण कैलेंडर और ऋतुओं का खिसकना हमारा पारंपरिक पंचांग (विक्रम संवत) निरयण (Sidereal) पद्धति पर आधारित है, जिसमें महीनों का निर्धारण आकाश में तारों और नक्षत्रों की निश्चित स्थिति देखकर होता है। दूसरी ओर, ऋतुएं सूर्य की स्थिति (सायन या Tropical वर्ष) से तय होती हैं। अयनचलन के कारण, ऋतु चक्र हर साल नक्षत्रों की तुलना में लगभग 20 मिनट पहले समाप्त हो जाता है। इसका मतलब है कि समय के साथ ऋतुएं हिंदू महीनों में पीछे की ओर खिसकती जाती हैं। 3. 17.5 लाख वर्ष पूर्व की गणितीय गणना यदि हम 17.5 लाख (1,750,000) वर्षों को अयनचलन के एक चक्र की अवध...

अहंकारी ट्रंप की तरह कांग्रेस का भी होगा राजनीतिक सफाया - अरविन्द सिसोदिया

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बदतमीजी और अहंकार के चलते राहुल का भी होगा, ट्रंप की तरह होगा राजनीतिक सफाया - अरविन्द सिसोदिया कोटा, 6 नवंबर। राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी, वरिष्ठ बुद्धिजीवी एवं चिंतक,लेखक, विश्लेषक अरविन्द सिसोदिया ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी पर तीखा राजनीतिक हमला बोलते हुए कहा कि, "जिस तरह अहंकारी ट्रंप को बदतमीजी और बड़बोलेपन की सजा वहां की जनता ने  लोकतान्त्रिक रास्ते से दी है, ठीक उसी तरह भारत की जनता भी बदतमीजी, बड़बोलेपन, अनर्गल बयानबाजी और नकारात्मक राजनीति के लिए नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस को भी वोट के रास्ते सजा देगी।" उन्होंने कहा कि, "जिस तरह लगातार राहुल गांधी और कांग्रेस ने राजनीतिक मर्यादाओं को ताक पर रखकर केवल अपमान, झूठ, आरोप-प्रत्यारोप, भ्रम और अनावश्यक विवाद की राजनीति की है, उसका जवाब देश की जागरूक जनता लोकतांत्रिक तरीके से अवश्य देगी।" सिसोदिया ने कहा कि, "लोकतंत्र में विपक्ष की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, किन्तु राष्ट्रहित और मर्यादा लांघने की अनुमति किसी को नहीं है।...

'वोट बचाओ रैली' नहीं, बल्कि 'घुसपैठियों को बचाओ रैली' थी - अमित शाह

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भाषण की खास बातें: माननीय केंद्रीय गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह हैदराबाद, तेलंगाना में 'लोकतंत्र बचाओ, बेरोजगारी हटाओ' पदयात्रा कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री अमित शाह द्वारा - 02-11-2026    प्रेस विज्ञप्ति   हैदराबाद में आयोजित 'लोकतंत्र बचाओ, आरक्षण हटाओ' पदयात्रा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के भाषण की खास बातें ******************** कल दिल्ली में राहुल गांधी की रैली 'वोट बचाओ रैली' नहीं, बल्कि 'घुसपैठियों को बचाओ रैली' थी। ******************** कांग्रेस घुसपैठियों को बचाने के लिए SIR को रोकना चाहती है। राहुल जी, जितना दबाव डालना है, डालिए; BJP तब तक चैन से नहीं बैठेगी जब तक हर एक घुसपैठिए को देश से बाहर नहीं निकाल दिया जाता। ******************** कांग्रेस SIR का विरोध इसलिए कर रही है क्योंकि घुसपैठिए उसका वोट बैंक हैं ******************** राहुल बाबा का दावा है कि 13 करोड़ वोट डिलीट कर दिए गए हैं। इन 13 करोड़ में से 3 करोड़ वोट ऐसे लोगों के हैं जो हैं ही नहीं; ये घुसपैठिए हैं। कांग्रेस बोगस ...

विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) – क्यों - शिवप्रकाश

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 विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) – क्यों? विचार : शिवप्रकाश भारतीय संविधान की प्रस्तावना में उल्लेखित ‘हम भारत के लोग’ अपने संविधान को आत्मार्पित करते हैं। भारत में जन्मे, भारत की एकता एवं अखंडता के प्रति निष्ठा रखने वाले और भारतीय संविधान में आस्था रखने वाले नागरिकों से ही ‘हम भारत के लोग’ का तात्पर्य है। चुनाव, प्रतिनिधित्व, नागरिक अधिकार और कानून का शासन लोकतंत्र का आधार है। भारत के प्रति समर्पित वयस्क नागरिकों को ही भारत में सरकार चुनने का अधिकार है। चुनाव के माध्यम से भारत में राज्य और केंद्र की सरकार चुनने का अधिकार विदेशी घुसपैठियों को देना कैसे संभव हो सकता है? इसी कारण संविधान में मतदाता शुद्धिकरण की व्यवस्था है। भारतीय संविधान, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 21(3) के अंतर्गत मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) करने का अधिकार चुनाव आयोग को देता है। इसके अंतर्गत अब तक 13 बार मतदाता सूची के निरीक्षण का कार्य चुनाव आयोग द्वारा किया गया है। यह प्रक्रिया 1952–56, 1957, 1961, 1965, 1966, 1983–84, 1987–89, 1992, 1993, 1995, 2002, 2003 और 2004 में हुई...

‘फ्लॉप रैली’ की फजीहत से बचने को राहुल की बहस वाली नौटंकी: अरविंद सिसोदिया Rahul ki bahas

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प्रेस विज्ञप्ति ‘फ्लॉप रैली’ की फजीहत से बचने को राहुल कर रहे हैँ बहस की नौटंकी : अरविंद सिसोदिया कोटा, 5 नवंबर। भारतीय जनता पार्टी (राजस्थान) के कोटा संभाग मीडिया संयोजक एवं वरिष्ठ बुद्धिजीवी और राजनीतिक विश्लेषक अरविंद सिसोदिया ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की बहस की चुनौती पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि " राहुल गांधी द्वारा हाल ही में दी गई बहस की चुनौती पूरी तरह से फ्लॉप रैली की चर्चा से ध्यान हटाने की एक राजनीतिक नौटंकी मात्र है।" उन्होंने कहा कि " इंडी गठबंधन के 23 दलों की जिस कथित ‘महारैली’ को लेकर बड़े-बड़े दावे 15 दिन से किए जा रहे थे, वह मात्र 50 हजार की क्षमता वाले रामलीला मैदान तक को नहीं भर पाई। इस करारी नाकामी और मीडिया एवं जनता के सामने हुई भारी फजीहत से ध्यान भटकाने के लिए ही अब राहुल गांधी बहस का ड्रामा कर रहे हैं।" अरविंद सिसोदिया ने राहुल गांधी को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि " अगर राहुल गांधी में सचमुच दम है, तो उन्हें सड़कछाप नौटंकी करने के बजाय देश के सर्वोच्च अधिकृत मंच यानी संसद में बहस करनी चाहिए। वे खुद नेता प्रतिपक्ष हैं, ...

विदेशी संबंधों पर जबाब राहुल और कांग्रेस को ही देना है,भारत फिर किसी अंग्रेज का गुलाम नहीं बनेगा - अरविन्द सिसोदिया

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यह वीडियो उस समय की एक रिपोर्ट है, इसे अवश्य सुनें ======== भारत के इतिहास में सर्वाधिक विदेश घूमने वाले नेता प्रतिपक्ष और संदिग्ध व्यक्तियों से मिलकर भारत विरोधी बातें करने वाले नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को मैं याद दिलाना चाहता हूँ कि मार्च 2023 में आपने लंदन जाकर यह कहा था, “Why are the defenders of democracy in Europe and America silent?” यानी लोकतंत्र के रक्षक यूरोप और अमेरिका चुप क्यों हैं? यानी आप यूरोप और अमेरिका से सीधे अपने लिए भारत के अंदर राजनीतिक मदद माँग रहे थे। यह सभी को पता है कि वास्तव में विदेशों से लिंक किसके जुड़े हुए हैं। इसलिए मैं यही कहना चाहूँगा कि आप और आपका खानदान कम से कम विदेशों के मामले पर तो न ही बोलें, तो बेहतर है। खुद मियाँ फ़ज़ीहत, दूसरों को नसीहत। ========== 1- भारत पर विदेशी अंग्रेज स्वतंत्रता के बाद भी माउन्टबेटन को शासक बनाये रखने का सवाल कांग्रेस से ही है ? 2- भोपाल गैस त्रासदी के मुख्यअभियुक्त एडरसन को भारत से सुरक्षित अमरीका पहुंचाने का सवाल कांग्रेस से ही है  3- भारत की संसद में अमेरिकी परमाणु सन्धि प...