देश विरोधी डिजिटल आतंकवाद और अराजकतावाद पर निर्णायक प्रहार हो
सादर प्रकाशनार्थ जंतर-मंतर से उपजे सवालों को गंभीरता से लिया जाए देश विरोधी डिजिटल आतंकवाद और अराजकतावाद पर निर्णायक प्रहार हो — अरविन्द सिसोदिया भारत की संसद पर पाकिस्तान-प्रेरित आतंकी हमला पहले भी हो चुका है, जिसे सुरक्षा बलों ने अपने बलिदान से विफल कर सांसदों के जीवन की रक्षा की थी। जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन के नाम पर संसद मार्च के दौरान जो दृश्य बना और जो सूचनाएं सामने आ रही हैं, वे न केवल गंभीर हैं, बल्कि सरकार के लिए सावधान होने की कड़ी चेतावनी भी हैं। आतंकवाद अब केवल सीमा पार से नहीं आता। वह सोशल मीडिया की स्क्रीन और हमारे लोकतांत्रिक मंचों तक भी प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से पहुंच चुका है। इसलिए जंतर-मंतर प्रकरण की गहराई से जांच, आयोजकों की और डिजिटल प्लेटफॉर्मों की जवाबदेही अब राष्ट्रीय सुरक्षा के अनिवार्य विमर्श का विषय है। जंतर-मंतर केवल दिल्ली का प्रदर्शन स्थल नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की उस परंपरा का प्रतीक है, जहां नागरिक अपनी बात सरकार तक पहुंचाते हैं और असहमति व्यक्त करते हैं। यदि किसी आतंकी नेटवर्क ने ऐसे स्थान को हिंसा और अराजकता फैलाने के लिए निशाना बनाया ह...