संदेश

3- कलेक्टर महोदय

दिनांक : 15 जुलाई 2026 सेवा में, माननीय जिला कलेक्टर महोदय कलेक्ट्रेट परिसर, जिला गुना (मध्य प्रदेश) विषय :- जिला गुना मप्र में तहसील बमोरी में स्वामित्व योजना अंतर्गत प्रकरण क्रमांक 0863/अ-3/2020-21 में प्लॉट क्रमांक 32, आवासीय भूमि खसरा क्रमांक 273, ग्राम मोड़का, पटवारी हल्का 64 सूजाखेड़ी, तहसील बमोरी, जिला गुना स्थित पैतृक आवासीय संपत्ति जो किलेनुमा दो मंजिला पक्के मकानों सहित बहुमूल्य संपत्ति के, स्वामित्व अभिलेख एवं प्रॉपर्टी कार्ड में हुई गंभीर विधिक एवं तथ्यात्मक त्रुटि का सुधार कर स्वर्गीय श्री भूपेंद्र सिंह सिसोदिया के सभी प्रथम श्रेणी के वैध उत्तराधिकारियों के नाम संयुक्त सह-स्वामी के रूप में दर्ज किए जाने तथा अंतिम निर्णय तक उक्त संपत्ति के संबंध में किसी भी प्रकार की रजिस्ट्री, नामांतरण, हस्तांतरण, बंधक, ऋण अथवा अन्य स्वामित्व संबंधी कार्यवाही पर रोक लगाए जाने बाबत। महोदय, सविनय निवेदन है कि मैं अरविन्द सिंह सिसोदिया, पुत्र स्वर्गीय श्री भूपेंद्र सिंह सिसोदिया, ग्राम मोड़का, तहसील बमोरी, जिला गुना (मध्य प्रदेश) का मूल निवासी हूँ। मैं स्वर्गीय श्री भूपेंद्र सिंह सिसोदिया का ...

माननीय जिला कलेक्टर महोदय, स्वामित्व योजना

माननीय जिला कलेक्टर महोदय,  जिला - गुना  जिला कलेक्ट्रेट परिसर, गुना। विषय - 1.स्व भूपेंद्र सिंह सिसोदिया पुत्र स्व समंदर सिंह जी के प्लाट क्रमांक- 32 रकबा 2175 वर्ग मीटर, आबादी खसरा नंबर 273 रकबा 1.076 हैक्टर, ग्राम - मोड़का, ग्राम पंचायत - सूजाखेड़ी, तहसील बमोरी, जिला गुना मप्र स्थित पुस्तेनी आवासीय परिसर के स्वामित्व सर्वेक्षण में तैयार किए गये खसरे में त्रुटि सुधार कर सभी उत्तराधिकारीयों के नाम दर्ज किए जानें के संदर्भ में। 2. त्रुटि सुधार निर्णय होनें तक उपरोक्त संपत्ति के सभी आठ सह स्वामियों के हितों की रक्षा करने हेतु वर्तमान आदेश को स्थगित कर,किसी भी प्रकार के क्रय विक्रय एवं किसी भी प्रकार के हस्तानांतरण रोक एवं यथास्थिति बनाये रखने के संदर्भ में। संदर्भ - स्वामित्व योजना के अंतर्गत प्रकरण क्रमांक 0863/अ -3/2020-21जिसका अंतिम प्रकाशन 02/05/2023 को हुआ है के संदर्भ में। वादी  अरविन्द सिंह सिसोदिया पुत्र भूपेंद्र सिंह सिसोदिया जाति राजपूत आयु 69 वर्ष निवासी ग्राम मोड़का जिला गुना हाल निवास - बेकरी के सामने, राधाकृष्ण मंदिर रोड़, डडवाड़ा, कोटा जंक्शन राज पिनकोड - 324002 ...

जिद्दी वंशवाद से मुक्ति का अभियान है राजनीतिक दलों का विघटन - अरविन्द सिसोदिया

जिद्दी वंशवाद से मुक्ति का अभियान है राजनीतिक दलों का विघटन - अरविन्द सिसोदिया  भारतीय लोकतंत्र आज बदलाव के एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है। हाल के वर्षों में विभिन्न राजनीतिक दलों में हुए बड़े और अभूतपूर्व विघटन (टूट) केवल सत्ता की सामान्य लड़ाई या व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं के परिणाम नहीं हैं। गहराई से विश्लेषण करने पर यह साफ दिखाई देता है कि यह देश के राजनीतिक परिदृश्य को दशकों से जकड़े हुए 'जिद्दी वंशवाद' और 'व्यक्तिवादी सामंतशाही' के खिलाफ जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं का एक स्वतः स्फूर्त मुक्ति अभियान बन चुका है। ## विचारधारा बनाम पारिवारिक हित की जंग आजादी के बाद भारतीय राजनीति का एक बड़ा हिस्सा विचार-केंद्रित होने के बजाय व्यक्ति-केंद्रित और परिवार-केंद्रित होता चला गया। कई क्षेत्रीय और राष्ट्रीय दलों में यह परंपरा बन गई कि पार्टी का सर्वोच्च पद, निर्णय लेने के अधिकार और यहाँ तक कि चुनावी टिकट भी केवल एक परिवार विशेष की जागीर बनकर रह गए। जमीन पर पसीना बहाने वाले, दिन-रात जनता के बीच रहने वाले समर्पित नेताओं की भूमिका केवल 'दरबारियों' जैसी सीमित कर दी गई। दलो...

2- जिला कलेक्टर महोदय

दिनांक - 15 जुलाई 2026  माननीय जिला कलेक्टर महोदय, कलेक्ट्रेट परिसर, जिला गुना (मध्य प्रदेश) विषय : - 1-स्वामित्व योजना अंतर्गत प्लाट क्रमांक 32, आवासीय भूमि खसरा 273 ग्राम मोड़का, पटवार हल्का सूजाखेड़ी, तहसील बमोरी जिला गुना मप्र स्थित पैतृक आवासीय संपत्ति के स्वामित्व अभिलेख में हुई गंभीर त्रुटि का सुधार कर, सभी वैध आठ प्रथम श्रेणी उत्तराधिकारियों के नाम दर्ज किए जाने हेतु, 2- उपरोक्त प्लाट के अभिलेख में सुधार नहीं होनें तक रजिस्ट्रीकरण पर रोक लगाई जाये, एवं  3- अंतिम निर्णय तक उपरोक्त संपत्ति के किसी भी प्रकार के हस्तांतरण एवं ऋण इत्यादी पर रोक लगाए जाने बाबत। महोदय, 1- सविनय निवेदन है कि मैं अरविन्द सिंह सिसोदिया, स्वर्गीय श्री भूपेंद्र सिंह सिसोदिया का ज्येष्ठ पुत्र एवं प्रथम श्रेणी का वैध उत्तराधिकारी हूँ। 2- स्वर्गीय भूपेंद्र सिंह सिसोदिया पुत्र समंदर सिंह जी की मृत्यु 20 दिसंबर 2016 को निर्वसियत हो गई है। उनके प्रथमश्रेणी आठ उत्तराधिकारी हैँ। जो निम्नप्रकार से हैँ,धर्मपत्नी कमलादेवी,  पुत्र गण अरविन्द सिंह, हेमंत सिंह, विश्वजीत सिंह, सत्यजीत सिंह, प्रशांत सिंह, सिद...

आर.टी.आई. में जबाब नहीं देनें पर शिकायत का प्रावधान भी है

शिकायत आर.टी.आई. की धारा 18(1) आधार उपलब्ध कराता है, जिनपर एक शिकायत दाखिल की जा सकती है। शिकायत, सूचना तक पहुंच प्राप्त करने में असमर्थतता, सूचना प्रदान करने से इनकार आदि से संबंधित हो सकते हैं। धारा 18(1) नीचे दिया जाता है: धारा 18(1) इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, यथास्थिति, केन्द्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग का यह कर्तव्य होगा कि वह निम्नलिखित किसी ऐसे व्यक्ति से शिकायत प्राप्त करे और उसकी जांच करे— (क) जो, यथास्थिति, किसी केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी को, इस कारण से अनुरोध प्रस्तुत करने में असमर्थ रहा है कि इस अधिनियम के अधीन ऐसे अधिकारी की नियुक्ति नहीं की गई है या, यथास्थिति, केन्द्रीय सहायक लोक सूचना अधिकारी या राज्य सहायक लोक सूचना अधिकारी ने इस अधिनियम के अधीन सूचना या अपील के लिए धारा 19 की उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी अथवा ज्येष्ठ अधिकारी या, यथास्थिति, केन्द्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग को उसके आवेदन को भेजने के लिए स्वीकार करने से इंकार कर दिया है; (ख) जिसे इस अधिनियम के अधी...

राजनैतिक कालनेमियों से भारी खतरा, सर्व हिंदुसमाज सावधान रहे - अरविन्द सिसोदिया

राजनैतिक कालनेमियों से भारी खतरा, सर्व हिंदुसमाज सावधान रहे - अरविन्द सिसोदिया  वर्तमान भारतीय राजनीति वैचारिक संक्रमण के एक अत्यंत दिलचस्प दौर से गुजर रही है। दशकों के वैचारिक और सांस्कृतिक संघर्ष के बाद आज देश में जिस सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और हिंदुत्व का उदय हुआ है, उसने समकालीन राजनीति के एजेंडे को पूरी तरह बदल दिया है। कल तक जो राजनीतिक दल हिंदुत्व और सनातन प्रतीकों से दूरी बनाए रखने में ही अपनी धर्मनिरपेक्षता की सार्थकता समझते थे, आज वे अचानक रामभक्ति और सॉफ्ट-हिंदुत्व की राह पर चलने को विवश दिखाई दे रहे हैं। इस बदलते राजनीतिक परिदृश्य पर वरिष्ठ विश्लेषक अरविंद सिसोदिया का बयान एक गहरा पौराणिक और रणनीतिक संदर्भ प्रस्तुत करता है। उन्होंने वर्तमान विपक्षी खेमे की तुलना रामायण काल के कुख्यात पात्र 'कालनेमि' से करते हुए एक बड़े वैचारिक षड्यंत्र की ओर इशारा किया है। पौराणिक आख्यानों के अनुसार, जब लक्ष्मण जी की मूर्छा को दूर करने के लिए हनुमान जी संजीवनी बूटी लेने जा रहे थे, तब रावण के आदेश पर कालनेमि नामक राक्षस ने उनका रास्ता रोकने के लिए एक छल रचा था। उसने किसी हिंसक राक्षस क...

सामाजिक जीवन में गिरते मूल्य और बढ़ते अपराध : केवल कानून नहीं, समग्र प्रशासनिक व्यवस्था पर चिंतन आवश्यक— अरविन्द सिसोदिया

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सामाजिक जीवन में गिरते मूल्य और बढ़ते अपराध : केवल कानून नहीं, समग्र प्रशासनिक व्यवस्था पर चिंतन आवश्यक — अरविन्द सिसोदिया कोटा, 1 जुलाई। देश में पारिवारिक और सामाजिक अपराधों की बढ़ती घटनाएँ केवल कानून-व्यवस्था की चुनौती नहीं हैं, बल्कि यह समाज के नैतिक, सांस्कृतिक और मानसिक स्वास्थ्य में आई गिरावट का संकेत भी हैं। संपत्ति विवादों में पिता की हत्या, दादा की हत्या, पति द्वारा पत्नी और बच्चों की हत्या, महिलाओं एवं बुजुर्गों पर अत्याचार जैसी घटनाएँ यह बताती हैं कि समाज के भीतर संवाद, संयम, सहिष्णुता और संतोष जैसे जीवन-मूल्य कमजोर पड़ रहे हैं। भारत का संविधान लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था स्थापित करता है। लोकतंत्र और चुनी हुई सरकारों का दायित्व केवल शासन चलाना, कर वसूलना, सड़कें बनाना और कानून लागू करना भर नहीं है। उनका व्यापक दायित्व ऐसी सामाजिक व्यवस्था का निर्माण करना भी है, जिसमें नागरिक सुरक्षित हों, अनुशासित हों, समन्वय की भावना हो, परस्पर विश्वास बना रहे, परिवार मजबूत हों, समाज संतुष्ट रहे और प्रत्येक व्यक्ति सम्मानपूर्वक, सुखपूर्वक तथा शांति से जीवन जी सके। किसी भी राष्ट्र की वास्तविक ...

भारत को अपनी संप्रभुता की रक्षा का अधिकार है, संयुक्त राष्ट्रसंघ का हस्तक्षेप गलत

संयुक्त राष्ट्र (UN) के तीन विशेष दूतों (Special Rapporteurs) ने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में चुनाव आयोग द्वारा चलाई जा रही विशेष गहन समीक्षा (SIR - Special Intensive Revision) प्रक्रिया को लेकर गंभीर चिंताएं जताई हैं और भारत सरकार से जवाब मांगा है। [1, 2]  इस मामले से जुड़ी मुख्य बातें निम्नलिखित हैं: ## UN की रिपोर्ट में क्या है? * वोटर लिस्ट से नाम हटाना: रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि SIR प्रक्रिया के तहत देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची से लगभग 5.2 करोड़ नाम हटा दिए गए हैं, जिसमें अकेले पश्चिम बंगाल से 91 लाख नाम शामिल हैं।  * अल्पसंख्यकों पर कथित प्रभाव: यूएन के दूतों ने चिंता जताई है कि इस प्रक्रिया से अल्पसंख्यक समुदाय (विशेषकर मुस्लिम और बंगाली समुदाय) सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम का उदाहरण दिया गया है, जहां हटाए गए नामों में से कथित तौर पर 95% नाम मुस्लिम मतदाताओं के थे।  * पारदर्शिता की कमी: रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि इस प्रक्रिया में अपारदर्शी आर्टिफ...