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नवसंवत् 2083 के स्वागत-अभिनंदन हेतु पंचदिवसीय कार्यक्रम

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प्रेसनोट -1 पत्रकार वार्ता / 16 मार्च ”अपना नववर्ष : अपना उत्सव“ नवसंवत् 2083 के स्वागत-अभिनंदन हेतु पंचदिवसीय कार्यक्रम हिंदू मातृशक्ति रैली आज ( 17 मार्च को ) आज से ( 17 मार्च से ) हिंदू नववर्ष के स्वागत अभिनन्दन कार्यक्रम प्रारंभ  कोटा 16 मार्च।ब्रह्माजी के द्वारा सृष्टि के सृजन दिवस हमारा संवत्सर प्रारंभ होता है। नवसंवत् के प्रथम सूर्योदय की तिथि चैत्र शुक्ल एकम् को “वर्ष प्रतिपदा” कहा जाता है और यह अनादिकाल से चली आ रही हमारी कालगणना और पंचांग का प्रारंभ दिवस है। हम सभी के लिये प्राकृतिक, सांस्कृतिक, पौराणिक, वैज्ञानिक एवं राष्ट्रीय गौरव की दृष्टि से सर्वाधिक महत्वपूर्ण, पवित्र एवं पुण्यमयी यह तिथि है। यह इस वर्ष हमारे बीच 19 मार्च, गुरुवार को आ रही है। हिंदू नववर्ष आयोजन समिति, कोटा महानगर की और से सोमवार को आयोजित पत्रकारवार्ता में यह बताया। पत्रकारवार्ता में मंचस्थ महानगर अध्यक्ष गोविन्द नारायण अग्रवाल, महामंत्री ड़ा बाबूलाल भाट, भगवा रैली संयोजक युधिष्टर सिंह हाड़ा, मातृशक्ति वाहन रैली संयोजक रेणु मिश्रा,स्वदेशी मेला समिति संयोजक प्रमोद राठौर, भजन संध्या समिति अध...

मंहगाई

आपकी बात तर्क के हिसाब से काफी हद तक सही है 👍 अगर किसी सरकार के समय की महँगाई या कीमतों की तुलना करनी हो, तो पूरे कार्यकाल (tenure) की तुलना करना ज़्यादा सही तरीका माना जाता है। Manmohan Singh की सरकार: 2004 – 2014 Narendra Modi की सरकार: 2014 – अभी (2026) इसलिए निष्पक्ष तुलना आमतौर पर इस तरह की जाती है: 1️⃣ UPA सरकार (2004 → 2013/14) चीज 2004 लगभग 2013 लगभग सोना (10g) ~₹5,800 ~₹29,000 चांदी (1 kg) ~₹7,000 ~₹45,000 पेट्रोल ~₹33 ~₹70 डीजल ~₹23 ~₹55 LPG सिलेंडर ~₹280 ~₹410 2️⃣ NDA सरकार (2014 → 2024-26) चीज 2014 लगभग 2024-26 लगभग सोना (10g) ~₹28,000 ~₹70,000+ चांदी (1 kg) ~₹45,000 ~₹85,000+ पेट्रोल ~₹70 ~₹95-110 डीजल ~₹55 ~₹90-100 LPG सिलेंडर ~₹410 ~₹800-900 ✅ इस तरह तुलना करने से ज़्यादा सही तस्वीर मिलती है, क्योंकि: पूरा शासनकाल कवर होता है बीच के साल चुनकर भ्रम नहीं बनाया जाता ⚠️ लेकिन एक और जरूरी बात: महँगाई सिर्फ सरकार से नहीं तय होती। इसमें कई बड़े कारण होते हैं, जैसे: अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत डॉलर-रुपया रेट टैक्स (केंद्र और राज्य) युद्ध, महामारी (जैसे COVID-19) वैश्विक आर्...

महाआरतियों हेतु नगरों और बस्तियों में तैयारीयां प्रारंभ

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महाआरतियों हेतु नगरों और बस्तियों में तैयारीयां प्रारंभ 18 मार्च को हिंदू नवसंवत्सर की पूर्व संध्या पर 120 बस्तियों में महाआरती के आयोजन की तैयारियां प्रारंभ, संपर्क और सूचिकरण में जुटे  कोटा, 11 फरवरी। हिंदू नववर्ष आयोजन समिति, कोटा महानगर के आह्वान पर हिंदू नववर्ष 2083 की पूर्व संध्या 18 मार्च, बुधवार को कोटा महानगर की 120 से अधिक बस्तियों में स्थित मंदिरों एवं देवस्थानों पर महाआरतियों का एक साथ भव्य आयोजन हिंदू समाज द्वारा किया जाएगा। कोटा के इतिहास में यह आयोजन पहली बार किया जा रहा है। इस अद्भुत आयोजन के क्रम में महानगर में 12 नगरों की आयोजन समितियों की बैठकें आयोजित की जा रही हैं। मंदिर समितियों से प्रारंभ हो गया है। महानगर अध्यक्ष गोविंद नारायण अग्रवाल ने बताया कि कोटा महानगर की 120 से अधिक बस्तियों में हिंदू नववर्ष 2083 की पूर्व संध्या पर महाआरतियों का भव्य आयोजन होगा, जिसमें हिंदूजन अपने-अपने क्षेत्र में महाआरती करेंगे। उन्होंने कहा कि इन आयोजनों में हिंदूजन स्वतः और स्वप्रेरणा से जुड़ेंगे। सभी महाआरतियों में हिंदू समाज के बंधु अपने-अपने घरों से दीपकों की थाल...

विशाल भगवा वाहन रैली 21 मार्च को, पंच दिवसीय कार्यक्रमों की तैयारी समीक्षा, सभी आयोजन भव्य और दिव्य होंगे

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विशाल भगवा वाहन रैली 21 मार्च को, पंच दिवसीय कार्यक्रमों की तैयारी समीक्षा, सभी आयोजन भव्य और दिव्य होंगे कोटा, 13 मार्च। हिन्दू नववर्ष आयोजन समिति, कोटा महानगर के तत्वावधान में हिन्दू नववर्ष विक्रम संवत 2083 के उपलक्ष्य में 17 से 21 मार्च तक पंचदिवसीय भव्य कार्यक्रमों के आयोजन के क्रम में, 17 मार्च मातृशक्ति वाहन रैली, 18 मार्च महाआरतियां, 19 मार्च स्वदेशी मेला प्रारंभ, 20 मार्च गुजरात की प्रसिद्ध भजन गायिका गीता रबारी की भजन संध्या तथा समापन पर 21 मार्च को सर्व हिन्दू समाज की विराट भगवा वाहन रैली जैसे विविध आयोजनों के संदर्भ में समाजसेवी श्यामबिहारी नागर के आतिथ्य, महानगर के अध्यक्ष गोविन्द नारायण अग्रवाल की अध्यक्षता एवं महामंत्री डॉ. बाबूलाल भाट के संचालन में समीक्षा बैठक शुक्रवार सायं 5 बजे, मानव विकास भवन , टीलेश्वर चौराहे पर आयोजित हुई। बैठक में वाहन रैली संयोजक युधिष्ठिर सिंह हाड़ा, मातृशक्ति वाहन रैली संयोजिका रेणु मिश्रा, स्वदेशी मेला संयोजक प्रमोद राठौर तथा भजन संध्या संयोजक किसन पाठक एवं राजेन्द्र खंडेलवाल ने अपनी-अपनी तैयारियों के वृत्त प्रस्तुत किए। विशाल भगव...

वर्षप्रतिपदा : भारतीय नववर्ष का सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व– अरविन्द सिसोदिया

वर्षप्रतिपदा : भारतीय नववर्ष का सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व– अरविन्द सिसोदिया भारत की प्राचीन कालगणना परंपरा में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। इसी दिन से विक्रम संवत के अनुसार हिंदू नववर्ष का आरंभ होता है। भारतीय संस्कृति में इसे वर्षप्रतिपदा कहा जाता है। यह केवल नए वर्ष की शुरुआत भर नहीं, बल्कि प्रकृति, संस्कृति, अध्यात्म और सामाजिक जीवन में नवचेतना का प्रेरक पर्व है, जो आत्मावलोकन और नए संकल्प का संदेश देता है। भारतीय परंपराओं और पुराणों के अनुसार इसी दिन सृष्टि की रचना का प्रारंभ हुआ था। मान्यता है कि सृष्टिकर्ता ब्रह्मा ने इसी तिथि से जगत की रचना आरंभ की। इसलिए वर्षप्रतिपदा को सृष्टि के प्रथम दिवस के रूप में भी स्मरण किया जाता है। इसी कारण भारतीय पंचांग का नया वर्ष भी इसी दिन से प्रारंभ माना गया है। इतिहास की दृष्टि से भी इस दिन का विशेष महत्व है। परंपरा के अनुसार महान पराक्रमी सम्राट विक्रमादित्य ने अपनी विजय के उपलक्ष्य में विक्रम संवत का प्रारंभ किया, जो आज भी भारत की पारंपरिक कालगणना का महत्वपूर्ण आधार है। धार्मिक अनुष्ठानों, पर्वों और ...

सोभ सिंह आपातकाल बंदी निर्णय...

राजस्थान उच्च न्यायालय - जोधपुर सोभ सिंह बनाम राजस्थान राज्य... 26 नवंबर, 2025 को लेखिका: नूपुर भाटी बेंच: नूपुर भाटी [2025:RJ-JD:51342]        राजस्थान उच्च न्यायालय,                         जोधपुर                   एसबी सिविल रिट याचिका संख्या 7071/2025  सोभ सिंह पुत्र श्री भीम सिंह, आयु लगभग 89 वर्ष,  निवासी ग्राम- हरसानी (तनु रावजी), तहसील- गडरा रोड,  जिला- बाड़मेर (राजस्थान)।                                                                       ----याचिकाकर्ता                                       बनाम  1. राजस्थान राज्य, सचिव,        ...

UPA कार्यकाल में अमरीका से समझौते...

भारत अमेरिका परमाणु सन्धि क्या थी उसके लिए भारत ने क्या क्या संसोधन किया व तब सरकार कोई सी थी भारत-अमेरिका परमाणु समझौता (2008) एक ऐतिहासिक असैनिक परमाणु करार था, जिसने भारत को NPT (परमाणु अप्रसार संधि) पर हस्ताक्षर किए बिना वैश्विक परमाणु व्यापार करने की अनुमति दी। इसे डॉ. मनमोहन सिंह की यूपीए (UPA) सरकार ने किया था। भारत ने नागरिक और सैन्य परमाणु संयंत्रों को अलग करने व उन्हें IAEA की निगरानी में रखने के संशोधन किए।  भारत-अमेरिका परमाणु संधि (123 समझौता) क्या थी? उद्देश्य: भारत को परमाणु ईंधन की आपूर्ति और तकनीक तक पहुँच सुनिश्चित करना। हस्ताक्षर: 2005 में आधारभूत समझौता, 2008 में अंतिम रूप से संपन्न। परिणाम: भारत को NSG (परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह) से विशेष छूट मिली, जिससे 34 वर्षों का परमाणु अलगाव समाप्त हुआ।  सरकार और मुख्य भूमिका सरकार: संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA-1), प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह। बुश-मनमोहन समझौता: 18 जुलाई 2005 को मनमोहन सिंह और अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने इसकी नींव रखी।  भारत द्वारा किए गए मुख्य संशोधन (Separation Plan & IAEA) संयंत्रों क...

राजस्थान विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2025

विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन विधेयक विशेषांक का विमोचन धर्मांतरण कानून को प्रभावी तरीके से लागू करने पर ही उसकी सार्थकता होगी — ललित शर्मा कोटा, 11 मार्च। श्रीराम मंदिर प्रबंध समिति, कोटा जंक्शन से संचालित ‘श्रीराम ज्योति’ पत्रिका के “विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध विधेयक” के विमोचन कार्यक्रम का आयोजन बुधवार सायंकाल माधव भवन, श्रीराम मंदिर में किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला सेशन एवं सत्र न्यायाधीश, कोटा सत्यनारायण व्यास थे। मुख्य वक्ता क्षेत्रीय संयोजक, धर्म जागरण समन्वय, राजस्थान क्षैत्र ललित शर्मा तथा अध्यक्षता श्रीराम मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष डॉ. सुधीर उपाध्याय ने की। प्रबंध समिति के सभापति महेश वर्मा एवं पत्रिका के संपादक चंद्रशेखर शर्मा मंचासीन रहे। कार्यक्रम का संचालन अनिल जैन ने किया। कार्यक्रम में श्रीराम मंदिर प्रबंध समिति, कोटा जंक्शन से प्रकाशित होने वाली ‘श्रीराम ज्योति’ पत्रिका के “विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध विधेयक” विशेषांक का विमोचन मंचस्थ अतिथियों ने किया तथा अतिथियों को स्मृति-चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य व...

कांग्रेस वोट बैंक को खुश करने के लिए हिंदुस्तान में आराजकता उत्पन्न करना चाहती है - अरविन्द सिसोदिया

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प्रेस विज्ञप्ति कांग्रेस वोट बैंक को खुश करने के लिए हिंदुस्तान में आराजकता उत्पन्न करना चाहती है - अरविन्द सिसोदिया 8 मार्च, कोटा। राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी अरविन्द सिसोदिया नें विश्व में लगातार बढ़ते युद्ध और टकरावों से अस्थिर हालातों के बीच, कांग्रेस द्वारा नित नित नये नये झूठ फैलाने पर देश विरोधी और शत्रुहित की राजनीती करार देते हुये कहा है कि " कांग्रेस का असली देश विरोधी चेहरा भारत ही नहीं पूरी दुनिया के सामने बेनक़ाब हो रहा है। कांग्रेस ने वोट बैंक और शत्रुराष्ट्र को खुश करने हेतु हिंदुस्तान में संकट खडे कर रही है, उसने सभी नैतीकताओं को दरकिनार कर दिया है। " उन्होंने कहा कि " आज जब पूरा विश्व अनेक प्रकार के संघर्षों और संकटों से जूझ रहा है, तब भारत को एकजुट होकर अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखना चाहिए। लेकिन कांग्रेस अपनी संकीर्ण राजनीतिक सोच और तुष्टिकरण की राजनीति के कारण देश में भ्रम और अस्थिरता का वातावरण बनाने में. लगी हुई है। यह न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के भी विरुद्ध है।" अरविन्द सिसोदिया ...

मोदीजी के लिए राष्ट्रहित सर्वोपरी, कांग्रेस ने हमेशा हिंदुस्तान का अहित किया – अरविन्द सिसोदिया

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मोदीजी के लिए राष्ट्रहित सर्वोपरी, कांग्रेस ने हमेशा हिंदुस्तान का अहित किया – अरविन्द सिसोदिया कोटा, 7 मार्च। राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी अरविन्द सिसोदिया ने ईरान-अमेरिका-इजराइल के बीच युद्ध और बढ़ते तनाव पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि “भारत की मोदीजी सरकार के लिए राष्ट्रहित सर्वोपरी है और वह दिन-प्रतिदिन बदलती अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में अपने राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए संतुलित, दृढ़ और प्रभावी भूमिका का निर्वहन कर रही है।” उन्होंने कहा कि “वर्तमान अनिश्चित वैश्विक परिदृश्य में भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात अपने देश की अक्षुण्यता, नागरिकों की सुरक्षा, आर्थिक हितों की रक्षा और अंतरराष्ट्रीय संतुलन बनाए रखना है। इसी कारण भारत की विदेश नीति सतर्क, संयमित और स्पष्ट रूप से राष्ट्रहित आधारित दृष्टिकोण पर आगे बढ़ रही है।” सिसोदिया ने कहा कि “कांग्रेस नेतृत्व, तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति में देश को पहले ही विभाजित करवा चुका है और उसने हिंदू तथा हिंदुस्तान के हितों को बड़े नुकसान पहुंचाए हैं।” उन्होंने आरोप लगाया कि ...

कोटा के इतिहास में पहली " हिन्दू मातृशक्ति वाहन रैली " 17 मार्च को, तैयारियां प्रारंभ

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विवेकानंद नगर में मातृशक्ति की बैठक, हिंदू नववर्ष की तैयारियों पर चर्चा कोटा के इतिहास में पहली " हिन्दू मातृशक्ति वाहन रैली " 17 मार्च को, तैयारियां प्रारंभ  कोटा 7 मार्च। हिन्दू नववर्ष 2083 के स्वागत अभिनंदन के पंच दिवसीय कार्यक्रमों का प्रारंभ 17 मार्च मंगलवार को हिन्दू मातृशक्ति वाहन रैली से हो रहा है। हिन्दू नववर्ष विक्रम संवत का शुभारंभ देवीय शक्तियों के आगमन से होता है, संवत के प्रथम दिन वर्षप्रतिपदा को घट स्थापना होती है। इसी थीम पर हिन्दू नववर्ष आयोजन समिति कोटा महानगर के तत्त्ववधान में 17 मार्च मंगलवार से पंच दिवसीय कार्यक्रमों के क्रम में प्रथम कार्यक्रम देवीय स्वरूप मातृशक्ति की वाहन रैली से प्रारंभ होगा। रैली नयापुरा स्थित स्टेडियम में कोटा महानगर की देवी स्वरूपा मातृशक्ति अपने अपने वाहनों के साथ एकत्र होकर रैली के रूप में निकलेंगी यह रैली गोदावरी धाम पहुंच कर सम्पन्न होंगी। महानगर समिति की मातृशक्ति एवं वाहन रैली संयोजिका रेणु मिश्रा एवं सहसंयोजका चेतना मोरवाल की अगुवाई में टोली गठन किया गया है जिसमें रीना शुक्ला, श्वेता जैन, सोनम पुरोहित, सोनम गोयल...

भारत को अपनी सामरिक सतर्कता को उच्चतम स्तर पर रखना होगा

यह बिल्कुल सही समय है जब भारत को अपनी सामरिक सतर्कता को उच्चतम स्तर पर रखना होगा। 2024-2025 में पड़ोसियों (जैसे बांग्लादेश) के सत्ता परिवर्तन और वैश्विक शक्तियों के बीच बढ़ते 'कोल्ड वॉर' ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत अब केवल पारंपरिक युद्ध से नहीं, बल्कि हाइब्रिड वॉरफेयर (छद्म युद्ध) से घिरा हुआ है।  भारत सरकार को इन तीन मोर्चों पर विशेष रूप से 'प्रो-एक्टिव' होने की आवश्यकता है: नैरेटिव वॉरफेयर और डिजिटल संप्रभुता: विदेशी ताकतों द्वारा सोशल मीडिया के जरिए फैलाई जाने वाली गलत सूचनाओं (Misinformation) और 'रिजीम चेंज' (सत्ता परिवर्तन) के नैरेटिव को रोकने के लिए सरकार को अपने सूचना तंत्र को और अधिक आक्रामक बनाना होगा।  आंतरिक सुरक्षा और विदेशी फंडिंग: देश के भीतर अस्थिरता पैदा करने वाले तत्वों और संदिग्ध विदेशी फंडिंग वाले संगठनों पर FCRA नियमों के तहत सख्त निगरानी जारी रखनी होगी ताकि आंतरिक मोर्चे पर कोई सेंध न लगा सके।  पड़ोसी देशों में 'बफर ज़ोन' की सुरक्षा: भारत को अपने पड़ोसियों के साथ केवल सरकारी स्तर पर ही नहीं, बल्कि वहां की जनता और संस्थानों के सा...

कविता - नाज़ करता हिंदुस्तान

कविता - नाज़ करता हिंदुस्तान कितनी भी बड़ी चुनौती हो, कैसा भी हो इम्तिहान, कुशलता से देश चलाता,निर्भीकता जिसकी पहचान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर नाज करता हिंदुस्तान। ----=---- जब विश्व महामारी से घबराया, टूटा हर राष्ट्र का मान, दवाओं और वैक्सीन से भारत ने बढ़ाया मानवता का सम्मान। ----=---- सूर्य की शक्ति को संगठित कर जोड़ा देशों का अभियान, इंटरनेशनल सोलर अलायंस से गूँजा हरित ऊर्जा का विधान। ----=---- जब विश्व अर्थव्यवस्था डगमगाई, मंदी ने बढ़ाया तूफ़ान, जी 20 की धुरी बन भारत ने दिया संतुलन का ज्ञान। ----=---- हिंद-प्रशांत की अशांत लहरों में सुरक्षा का दिया प्रमाण, क्वाड के संग मजबूत किया रणनीतिक सम्मान। ----=---- जब रिश्तों में आई कड़वाहट, उठे प्रश्न, बढ़ा तूफ़ान, धैर्य और संवाद की शक्ति से संभाला कूटनीतिक समाधान । ----=---- कनाडा संग तनाव के क्षणों में भी रखा संयम का ध्यान, राष्ट्रहित सर्वोपरि रखते दिया दृढ़ता का प्रमाण। ----=---- व्यापारिक बाधाएँ, टैरिफ की जब छाई कठिनाई महान, वार्ता, नीति और संतुलन से साधा हितों का समाधान। ----=---- संकल्प, रणनीति, धैर्य, दृष्टि— यही उनकी पहचान, असा...

कविता - अब वोट बैंक के चक्कर में देश ने झुकना छोड़ दिया

कविता - अब वोट बैंक के चक्कर में देश ने झुकना छोड़ दिया अब वोट बैंक के चक्कर में देश ने झुकना छोड़ दिया, बहुत हुई जो बर्बादी थी, मोदीजी ने मिथक तोड़ दिया। वर्षों से जो डर का साया सीमाओं पर छाया था, दुश्मन की हर काली चाल पर बस मौन ही पाया था, अब सिंहनाद गूंजा ऐसा, हर भ्रम का सिर फोड़ दिया, मोदीजी ने साहस से इतिहास नया मोड़ दिया। ----=---- देश की सुरक्षा सर्वोपरि है — यह मंत्र उन्होंने दिया, भारत पहले, भारत सर्वोच्च — यह संकल्प स्पष्ट किया। कल तक जो देते थे धमकी, उनका अभिमान तोड़ दिया, दृढ़ नेतृत्व की शक्ति से हर संकट को मोड़ दिया। ----=---- विश्व पटल पर भारत का गौरव ऊँचा हो गया, स्वाभिमान का दीपक फिर से घर-घर में रोशन हो गया। विकास और विश्वास का रथ आगे बढ़ता जा रहा, मोदीजी के नेतृत्व में भारत नित नित निखरता जा रहा। ----=---- अब वोट बैंक की राजनीति का दौर सिमटता गया , राष्ट्रधर्म की ज्योति से  धमकियों का अंधियारा मिट गया । बहुत हुई बर्बादी पहले, अब नवयुग से देश संवर गया , मोदीजी ने दृढ़ संकल्प से, नवोदय का सूर्य चमक रहा। ----=---- अब वोट बैंक के चक्कर में देश ने झुकना छोड़ दिया, बहुत...

कविता - हिन्दु सनातन जिसे कहते है वह मानवता का मान है

हिन्दु सनातन जिसे कहते है वह मानवता का मान है उत्कर्षों की खान यह, सुख-समृद्धि और आनंद का अभियान है। -----=----- वेदों की वाणी में गूँजता सृष्टि सत्य का गया है, उपनिषदों के चिंतन में जीवन का विज्ञान है। गीता का उपदेश यहाँ कर्म पथ विधान है, मर्यादा की धरती यह, कर्तव्यों का सम्मान है। -----=----- ऋषियों की तप-धरा, ज्ञान का वरदान है, करुणा की सरिता बहती, प्रेम ही प्रधान है। “वसुधैव कुटुम्बकम्” का उज्ज्वल विधान है, सत्य-अहिंसा का पथ ही इसका स्वाभिमान है। -----=----- योग की साधना में तन-मन का उत्थान है, आयुर्वेद की शाला में रोगों का निदान है। संस्कृति की ज्योति से आलोकित जहान है, सनातन की चेतना अजर-अमर पहचान है। -----=----- गंगा की धारा पावन, हिमगिरि अडिग शान है, राम का आदर्श यहाँ, कृष्ण का प्रेम ज्ञान है। हर युग में जिसने दिया क्षमा को सम्मान है, हिन्दु वही संस्कृति है, जो जग का कल्याण है। -----=----- हिन्दु सनातन जिसे कहते है वह मानवता का मान है, उत्कर्षों की खान यह, सुख-समृद्धि और आनंद का अभियान है।

कविता - वफादार को कूड़ेदान

कविता - वफादार को कूड़ेदान गद्दारों को मान मिले सम्मान मिले और वफादार को कूड़ेदान, राजनीति का खेल अलग है,भ्रष्ट आचरण होगया पद प्रतिष्ठा का प्रमाण । -----=---- दल-बदल की गंगा देखो, दागों की धुल जाए पहचान, कल तक जिनने पत्थर फेंके, आज वही भगवान। झंडे बदले, नारे बदले, बदला पूरा बयान, सिद्धांतों की रीढ़ झुक गई, पर रही कुटिल मुस्कान। -----=---- राजनैतिक गद्दारी को कहते “रणनीतिक बदलाब ”, पीठ में खंजर घोपें, मुंह में महानता के यशो गान। विचारधारा किराये पर है, कुर्सी में बसे है प्राण, मतदाता की याद तभी तक, जब तक होता मतदान । -----=---- घोटालों की राख कुरेदो, निकले अनगिनित बखान, दाग यहाँ पर अलंकरण हैं, बेशर्म के आव्हान । जिनके हाथ स्याही से काले, देते स्वच्छता का ज्ञान,, सच की आवाज़ों को मिलता है केवल अपमान। -----=---- ईमानदारी खड़ी चौराहे, ढूँढे अपना मान, चापलूसी के शोर में दबता उसका हर अरमान। जो प्रश्न करे वह देशद्रोही, जो झुके वही विद्वान, तालियाँ बजती भीड़ कहे — “वाह! यही समाधान।” -----=---- जनता भी अब सोच रही है, किसको दे पहचान? हर मौसम में रंग बदलते जैसे गिरगिट-प्राण। वोटों की खेती लहलहाए,...

इजराईल युद्ध तकनीकी में बेहतर और भारत का सहयोगी

#कारगिल_युद्ध के समय चोटी पर बैठे पाकिस्तानी सैनिकों को सप्लाई देने के लिए पाकिस्तान ने चार विशाल सप्लाई कैंप बना रखे थे  और वह कैंप उन सैनिकों को गोला बारूद से लेकर खाना पीना सप्लाई करते थे और वह सप्लाई कैंप के आसपास कई मिसाइल लॉन्चिंग सिस्टम बनाए गए थे  भारत के लिए इन सप्लाई कैंप को नष्ट करना जरूरी था लेकिन जैसे ही भारत का कोई विमान इन पर बम गिराने के लिए जाता था उसके पहले ही मेड इन अमेरिका की स्ट्रिंगर मिसाइल या कोई अन्य मिसाइल उसे विमान को गिरा देती थी  आप लोगों को विंग कमांडर नचिकेता याद होंगे जिनके विमान को पाकिस्तान ने नष्ट कर लिया था और आठ दिन तक युद्ध बंदी बना दिया था  भारत को अपने कुल आठ विमान खोने पड़े और भारतीय सेना ने कह दिया कि जब तक हम इन रसद और हथियार सप्लाई डिपो को नष्ट नहीं करेंगे तब तक हम चोटियों पर बैठे पाकिस्तानी सैनिकों को अलग-अलग नहीं कर सकते  लेकिन उस समय भारत के पास ऐसी कोई टेक्नोलॉजी नहीं थी जिसके द्वारा भारत ने नष्ट कर सके  भारत को चाहिए लाइटनिंग पॉड और लेजर गाइडेड मिसाइल जो दोनों भारत के पास उसे वक्त नहीं थे फिर ऐसे में भारत का ...

भारत की विदेशनीति सटीक, किन्तु निरंतर सतर्कता रखनी होगी – अरविन्द सिसोदिया

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भारत की विदेशनीति सटीक, किन्तु निरंतर सतर्कता रखनी होगी – अरविन्द सिसोदिया कोटा, 1 मार्च। प्रख्यात चिंतक, विश्लेषक एवं राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी अरविन्द सिसोदिया ने वर्तमान में पूर्णतः अविश्वसनीयता से ग्रस्त वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि, “बदलते अंतरराष्ट्रीय समीकरणों और अस्थिर तथा अविश्वशनीयता के बीच भारत को अपनी सामरिक और आंतरिक सुरक्षा को उच्चतम स्तर पर सतर्क रखना होगा।” सिसोदिया ने कहा, “ प्रधानमंत्री मोदीजी के नेतृत्व में भारत की संतुलित विदेश नीति अत्यंत सटीक एवं सतर्क है। क्वाड जैसे मंचों में भागीदारी महत्वपूर्ण है। भारत सरकार ने बहुदेशीय संबंधों को बढ़ावा दिया है तथा आवश्यक लचीलापन भी अपनाया है। इस दिशा में निरंतर सतर्कता की आवश्यकता आने वाले पाँच से दस वर्षों तक बनी रहेगी। इस दौरान ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखना होगा।” उन्होंने कहा, “हाल के वर्षों में बांग्लादेश,नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका और मालदीप सहित पड़ोसी देशों में षड्यंत्रपूर्वक उत्पन्न राजनीतिक अ...

कविता - कालचक्र

कविता - कालचक्र अनादि नभ के निस्तब्ध प्रांगण में, जब शब्द भी था मौन कहीं, तब समय स्वयं ध्यानस्थ हुआ — और जन्मा काल, अनंत यहीं। सतयुग की स्वर्णिम प्रभा से, त्रेता की मर्यादा जागी, द्वापर में धर्म डगमगाया, कलि में चेतना फिर भी जागी। चक्र घूमता, युग बदलते, धरा नित्य नवीन बनती है, क्षण में सृष्टि, क्षण में लय — पर सत्य सदा अडिग रहती है। मन्वंतर बहते सागर जैसे, महायुगों की लहरें उठतीं, ब्रह्मा का दिन, ब्रह्मा की रात्रि — कल्पों में सृष्टि रचती-बुनती। नभ के नाप अनंत यहाँ हैं, संख्या भी हो जाती लघु, जहाँ अरबों वर्ष एक श्वास हों — वहाँ मानव का क्या मोल, कहो? फिर भी इस क्षुद्र कण में छिपा, वेदों का गहन प्रकाश, ऋषि-दृष्टि ने काल को बाँधा — ज्ञान बना जग का विश्वास। नमन उस चिंतन-परंपरा को, जिसने अनंत को छू डाला, काल नहीं बस गणना मात्र — वह आत्मा का भी है उजियाला।

कविता - जीवन गीत

जीवन गीत  जीवन में आए उतार-चढ़ाव, सिखा जाए हर नया सबक। बंद घड़ी भी दो बार सही समय बताती, कभी किसी को हल्का न समझो । जो बुराई खोजते हर पल, जख्मों पर ही बैठते, खो देते वे अपना कल। गरीबी में टूटते रिश्ते सच्चे, पैसे में बनते हज़ार दोस्त ऐसे। संकट में जो साथ खड़ा  वह ईश्वर से भी बड़ा। मुस्कान से खिल उठे जहां, भीगी पलकों से धुंधला वहां। जल्दी मिली चीजें जल्दी छूट जाएँ, धीरे मिली चीजें उम्र भर निभाएँ। बीमारी आए खरगोश की चाल, जाती है कछुए की चाल । पैसा आए कछुए की चाल, खरगोश बनकर चला जाए । धन है तो उसे संभाल, जीवन भर वही करता कमाल। छोटी खुशियों में खोजो आनंद, बड़ी खुशियाँ होती हैँ बहुत कम,  ईश्वर वही देता जो सही है, मांगना नहीं, समझना ही है सच्चाई। असफलता से कभी न हारो, आखिरी चाबी ताला खोल दे बार-बार। एक अकेला सूरज सबको रोशन करे, अकेलेपन भी शक्ति भर दे अपार । रिश्तों को मत तोड़ो, भले वे स्वार्थी हों, आग बुझा सकते, प्यास नहीं कभी हों। शब्द न आए तो मौन रहो, माँ समझती हर बात, यही है भरो। शर्म की अमीरी से, इज्जत की गरीबी बेहतर, उतार-चढ़ाव जीवन को बनाते मजबूत हर कदम। अच्छाई की तलाश मत क...

कविता - सिफ़ारिशों के आधार पर मिलता है पुरुस्कार

कविता सिफ़ारिशों के आधार पर मिलता है पुरुस्कार और सम्मान, जिला हो, संभाग हो या राज की राजधानी, सब तरफ वही व्यवधानी, योग्यता रह जाती है कोने में धरी खोकर अपना स्थान। किसी की डिज़ायर,किसी के लेटरपैड,से चढ़ती सफलता की सीढ़ी, आखिर क्यों इतना गिर गया निज़ाम, न बचा कोई धर्म,न बचा कोई ईमान। ===1=== मेहनत यहाँ मौन खड़ी, देखती है तमाशा चुपचाप, जहाँ काबिल हाथ खाली हैं, और अयोग्य ताज के पास। योग्यता की हार बनती है सिफ़ारिश, सच की आवाज़ दब जाती है हर बार। यह सिर्फ़ अन्याय के समान नहीं, यह अन्याय का सबसे कुरूप अवतार। जब रिश्ते बिकते हैं अंकों से महंगे, और ईमान सस्ता हो जाता है, तब समाज की नींव हिलती है, और भविष्य अंधेरों में खो जाता है। कब टूटेगा यह झूठा तंत्र, कब मिलेगा मेहनत को अधिकार? जब सिफ़ारिश नहीं, योग्यता बोलेगी, तभी आएगा सच में उजाला हर बार।

बेहोश हुये लोकतंत्र का जब हुआ एक्सरे

बेहोश हुये लोकतंत्र का जब हुआ एक्सरे , भ्रष्टाचार जिन्दा था,  लूट खसोट की दौड़ प्रतियोगिता चल रहीं थीं सांसे। भेड़ बकरी जैसी भरी थी जनता रेलों में, पिस रही थी सच्चाई न्यायालय और जेलों में, दम तोड़ चुका था न्याय का वायदा और दफन हो चुकीं थीं सभी संवेधानिक बातें। बेहोश हुये लोकतंत्र का जब हुआ एक्सरे , तंत्र का पोस्टमार्टम फाइल खुलती है, पहले दर पूछती है। कानून पीछे बैठा, नोट आगे बोलते है। थाने में न्याय नहीं, रेट लिस्ट टंगी है, जिसके पास वजन है, उसकी हर हर गंगे है। पटवारी भगवान है काग़ज़ का, कलम से बाँटता काटता है, जिसने मुट्ठी गरम रखी, उसी का हक़ बनाता है। पंच बोले—“मजबूरी है”, प्रधान बोले—“सिस्टम है”, जनप्रतिनिधि हँसकर कहे— “सब चलता है, यही रिवाज़ है।” बेहोश हुये लोकतंत्र का जब हुआ एक्सरे , भ्रष्टाचार जिन्दा था,  लूट खसोट की दौड़ प्रतियोगिता चल रहीं थीं सांसे। भेड़ बकरी जैसी भरी थी जनता रेलों में, पिस रही थी सच्चाई न्यायालय और जेलों में, दम तोड़ चुका था न्याय का वायदा और दफन हो चुकीं थीं सभी संवेधानिक बातें। बेहोश हुये लोकतंत्र का जब हुआ एक्सरे , विकास आया काग़ज़ में, ज़मीन पर गड्ढे ...

कविता - में भी मोदी, वह भी मोदी, हम सब तो मोदी हैं,

में भी मोदी, वह भी मोदी, हम सब तो मोदी हैं, राष्ट्र प्रथम है हम सबको, समझ लो सब गद्दारों। एक मोदी की कब्र खोद के क्या कर लोगे, बच्चा मोदी है, हम है करोड़ो मोदी वाले। में भी मोदी, वह भी मोदी, हम सब तो मोदी हैं। ===1=== भारत माँ के सपूत हैं हम, ज्वाला सी पहचान लिए, सीने में तूफान लिए, हाथली पर जान लिए । जो आँख उठाए भारत पर, मिट्टी में मिला देंगे, शेरों की इस धरती पर, सियार कहाँ टिक पाएंगे। में भी मोदी, वह भी मोदी.......... ===2=== हर घर में अब चिंगारी है, हर दिल में अंगारों की आग, देशभक्ति की इस धड़कन से, काँपे झूठ के सारे ख्वाब। ना बिकेंगे, ना झुकेंगे, ना डरेंगे हथियारों से, हम निकले हैं प्रलय बनकर, अत्याचारों के विरुद्ध प्रहारों को । में भी मोदी, वह भी मोदी....... ===3=== कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी, राष्ट्रधर्म का ही नारा गूँजेगा, भारत माता की जय बोलेगा, वन्देमातरम बोलेगा, एक विधान, एक निशान, अब हर दिल की आवाज़ बने, मोदी युग में भारत माता फिर से विश्व सिरमौर बनी । में भी मोदी, वह भी मोदी...... ===4=== गरीब के आँसू पोंछे जिसने, उसको कहते मोदी हैं, सीमा पर जो डटा हुआ है, वो भी सच्चा मोदी ...