संदेश

CJI

 To, The Hon’ble Chief Justice of India, Supreme Court of India, New Delhi Subject: Representation for safeguarding judicial dignity and framing guidelines on baseless recusal pleas Respected Sir, I respectfully submit this representation as a concerned citizen. Recently, the Delhi High Court, in its decision concerning recusal, rejected the plea seeking withdrawal of Hon’ble Justice Swarana Kanta Sharma from hearing the matter, observing that the allegations were unfounded and could undermine the institutional dignity of the judiciary. This issue, in my humble view, raises a matter of wider public importance. If allegations regarding judicial bias are made without substantive basis, it may adversely affect not only the judicial process but also public confidence in the administration of justice. The court of law is a forum meant for adjudication of genuine grievances and not for seeking publicity or exerting indirect pressure. Therefore, I most respectfully pray that this Hon’ble ...

सृष्टि ज्ञान में विज्ञान अधूरा है सनातन ही पूरा है Science is incomplete in the knowledge of creation, only Sanatan is complete.

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Science is incomplete in the knowledge of creation, only Sanatan is complete. पूर्णमदः पूर्णमिदं" बृहदारण्यक उपनिषद और ईशावास्य उपनिषद का एक प्रसिद्ध शांति पाठ है, जो परमात्मा (ब्रह्म) की अनंतता और पूर्णता को दर्शाता है। इसका अर्थ है कि वह (परमात्मा) पूर्ण है, और यह (संसार) भी पूर्ण है। पूर्ण में से पूर्ण को निकालने पर भी पूर्ण ही शेष रहता है, जो अद्वैत (एकता) का प्रतीक है।  मंत्र: ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥ अर्थ और व्याख्या: 1- पूर्णमदः (वह पूर्ण है): 'अदः' का अर्थ है 'वह' (परमात्मा या ईश्वर)। वह निराकार ब्रह्म आदि और अंत से रहित, पूर्ण और अनंत है। 2- पूर्णमिदं (यह पूर्ण है): 'इदं' का अर्थ है 'यह' (प्रकट जगत या सृष्टि)। चूँकि यह संसार पूर्ण ईश्वर से ही उत्पन्न हुआ है, इसलिए यह भी अपने आप में पूर्ण है। 3- पूर्णात्पूर्णमुदच्यते (पूर्ण से पूर्ण की उत्पत्ति): इस पूर्ण ब्रह्म से ही इस पूर्ण सृष्टि की उत्पत्ति हुई है। 4- पूर्णस्य पूर्णमादाय (पूर्ण से पूर्ण ल...

पचपदरा रिफाइनरी अग्निकांड की जाँच NIA या राव से हो - अरविन्द सिसोदिया

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स्थान - कोटा  दिनांक - 20 अप्रैल 2026 आदरणीय गृह मंत्री महोदय भारत सरकार, नई दिल्ली आदरणीय मुख्यमंत्री महोदय राजस्थान सरकार, जयपुर विषय: बालोतरा रिफाइनरी में आग की घटना की उच्च स्तरीय जाँच एवं जिम्मेदारी तय करने हेतु निवेदन महोदय, सविनय निवेदन है कि राजस्थान के बालोतरा स्थित पचपदरा रिफाइनरी में माननीय प्रधानमंत्री श्री Narendra Modi जी के प्रस्तावित कार्यक्रम से ठीक एक दिन पूर्व आग लगने की घटना अत्यंत गंभीर एवं चिंताजनक है। इस घटना के कारण प्रधानमंत्री जी का कार्यक्रम स्थगित होना अनेक प्रकार के संदेह एवं आशंकाओं को जन्म देता है। यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि प्रधानमंत्री जी जैसे अति संवेदनशील एवं उच्च स्तर के कार्यक्रमों की सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य सरकार की नैतिक जिम्मेदारी एवं जवाबदेही होती है। सामान्यतः ऐसे कार्यक्रमों के पूर्व शासन सचिवालय एवं संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को कम से कम 1–2 दिन पूर्व स्थल पर पहुँचकर व्यवस्थाओं की निगरानी एवं समन्वय हेतु कैंप करना चाहिए। किन्तु यह दुर्घटना इस प्रकार की पूर्व तैयारी और सतत निगरानी के अभाव को दर्शाती है, जो एक...

सांसदों और विधायकों की सीटें बढ़ाना और महिला आरक्षण देना संवैधानिक कर्तव्य, कांग्रेस अड़ंगेबाजी का षड्यंत्र बंद करे – अरविन्द सिसोदिया

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सांसदों और विधायकों की सीटें बढ़ाना और महिला आरक्षण देना संवैधानिक कर्तव्य, कांग्रेस अड़ंगेबाजी का षड्यंत्र बंद करे – अरविन्द सिसोदिया कोटा, 19 अप्रैल। राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी एवं वरिष्ठ बुद्धिजीवी अरविन्द सिसोदिया ने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल देशवासियों के लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक अधिकारों की अनदेखी कर रहे हैं, बाधा पहुँचा रहे हैं, षड्यंत्रपूर्वक देश की आकांक्षाओं को पराजित कर रहे हैँ। यह शत्रुभाव किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जनगणना के बाद जनसंख्या के अनुरूप संसद एवं विधानसभाओं में सीटों की संख्या बढ़ाना संविधान की मूल भावना है। इसी प्रकार 33 प्रतिशत महिला आरक्षण प्रदान करना भी संवैधानिक कर्तव्य है। इन महत्वपूर्ण विषयों को किन्तु-परन्तु और उत्तर-दक्षिण के आधार पर रोकना देश के साथ संवैधानिक विश्वासघात के समान है। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सत्ता में रहते हुए कांग्रेस ने इन मुद्दों को बार-बार टालकर जनता के विश्वास को कमजोर किया है। वहीं मोदीजी की सरकार इस आकांक्षा क...

Creation, Consciousness, and Reincarnation: An Integrated Philosophical-Scientific Hypothesis

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Creation, Consciousness, and Reincarnation: An Integrated Philosophical-Scientific Hypothesis — Arvind Sisodia  Mo - 9414180151 कोटा, Rajasthan, India। Introduction Since the beginning of human civilization, questions about creation, life, consciousness, and death have remained at the center of inquiry. Modern science has made remarkable progress in understanding many laws of nature; however, fundamental questions still remain unanswered—especially regarding consciousness, the origin of life, and phenomena such as reincarnation. This article attempts to examine these questions through an integrated perspective, where scientific observation and philosophical interpretation proceed together. --- 1. Laws of Nature: Discovered, Not Created The laws governing energy, matter, motion, gravity, light, etc., existed prior to human existence. Humans are not the creators of these laws, but their discoverers. This indicates that: - The universe is an organized system - This order i...

राजा मान सिंह का पुनर्जन्म

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हाल ही में राजस्थान के टोंक जिले के जेकमाबाद गांव के एक 10 वर्षीय बालक, कान्हाराम बैरवा, द्वारा राजा मान सिंह प्रथम का पुनर्जन्म होने का दावा मीडिया और सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। इस दावे को लेकर वैज्ञानिक, ऐतिहासिक और सामाजिक दृष्टिकोण से अलग-अलग राय सामने आई है: - दावे के मुख्य बिंदु: * प्रारंभिक व्यवहार: परिवार के अनुसार, कान्हा ने ढाई साल की उम्र से ही खुद को राजा मान सिंह बताना शुरू कर दिया था। * जीवनशैली: वह बैरवा परिवार में जन्म लेने के बावजूद खुद को क्षत्रिय बताता है, परिवार के साथ खाना खाने से इनकार करता है और अलग बर्तनों में भोजन करता है। * ऐतिहासिक विवरण: वह दावा करता है कि उसने हल्दीघाटी का युद्ध लड़ा और शिला देवी की प्रतिमा बंगाल से लाकर आमेर में स्थापित की।  दावे की विश्वसनीयता पर सवाल (विरोधाभास): गहन जांच और साक्षात्कारों के दौरान कुछ ऐसे तथ्य सामने आए हैं जो इस दावे को संदिग्ध बनाते हैं: * मृत्यु का स्थान: कान्हा अपनी मृत्यु का स्थान 'अनाज मंडी' बताता है, जबकि ऐतिहासिक रूप से राजा मान सिंह की मृत्यु दक्षिण भारत के एलिचपुर में हुई थी। * ...

ईश्वरीय डिजिटलाइजेशन ही वास्तविक सृजन है - अरविन्द सिसोदिया

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ईश्वरीय डिजिटलाइजेशन ही वास्तविक सृजन है लेखक: अरविन्द सिसोदिया प्रस्तावना: अक्सर हम पुनर्जन्म को केवल एक धार्मिक मान्यता मानकर छोड़ देते हैं, लेकिन यदि हम इसे आधुनिक कंप्यूटर विज्ञान और डेटा मैनेजमेंट की दृष्टि से देखें, तो यह एक अत्यंत सटीक ईश्वरीय व्यवस्था सिद्ध होती है। यह सच है कि इसके तमाम संकेत सनातन हिंदू धर्म में मिलते हैँ। मुख्य विचार: आत्मा: एक अमर सॉफ्टवेयर: शरीर मात्र एक नाशवान 'हार्डवेयर' है। आत्मा वह ऑपरेटिंग सिस्टम है जो शरीर को संचालित करती है। हार्डवेयर के खराब होने पर सॉफ्टवेयर नष्ट नहीं होता, बल्कि एक नए सिस्टम (नए जन्म) में स्थानांतरित हो जाता है। अचानक मृत्यु और डेटा रिकवरी: सामान्य मृत्यु एक 'सिस्टम शटडाउन' है जहाँ डेटा व्यवस्थित रूप से सेव हो जाता है। लेकिन अचानक या हिंसक मृत्यु एक 'सिस्टम क्रैश' की तरह है। जैसे क्रैश हुए कंप्यूटर को दोबारा चालू करने पर पुरानी 'अनसेव्ड' फाइलें (स्मृतियाँ) खुली मिल जाती हैं, वैसे ही पुनर्जन्म में कुछ लोगों को पिछले जन्म की यादें 'खुली फाइल' की तरह मिल जाती हैं। मस्तिष्क का स्टोर...