प्रधानमंत्री की कुर्सी के लिए जल बिन मछली की तरह तड़फ रहीं है कांग्रेस - अरविन्द सिसोदिया
प्रधानमंत्री की कुर्सी के लिए जल बिन मछली की तरह तड़फ रहीं है कांग्रेस - अरविन्द सिसोदिया जनादेश का अपमान या हार की हताशा ? 'वोट चोरी' के आरोपों की जमीनी हकीकत भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत इसकी निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव प्रणाली रही है। वैश्विक स्तर पर भारत के निर्वाचन आयोग की साख एक निष्पक्ष संस्था के रूप में स्थापित है। हालांकि, हाल के वर्षों में और विशेष रूप से 2024 के लोकसभा चुनावों और उसके बाद के राज्यों (जैसे हरियाणा और महाराष्ट्र) के विधानसभा चुनावों के बाद, देश की राजनीति में एक नया शब्द गूंज रहा है—'वोट चोरी'। कांग्रेस और विपक्षी दलों द्वारा लगातार चुनावी प्रक्रियाओं, मतदाता सूचियों और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या इन आरोपों में कोई वास्तविक दम है, या यह केवल चुनावी हार को छिपाने और संवैधानिक संस्थाओं को कटघरे में खड़ा करने की एक सोची-समझी रणनीति है? ## 1. संवैधानिक संस्थाओं पर हमला और 'बेबुनियाद' आरोपों का तर्क सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ([BJP](https://en.wikipedia.org/wiki/Bharatiya_Janata_Party)) और क...