संदेश

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का आपातकाल में भारत के लोकतंत्र और संविधान को बचाने के लिए संघर्ष

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का आपातकाल में भारत के लोकतंत्र और संविधान को बचाने के लिए संघर्ष - 25 जून 1975 इस इन्फोपैक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा आपातकाल के विरोध तथा उसके निमित्त किए गए विभिन्न कार्यों का उल्लेख है। आपातकाल देश के संविधान और लोकतंत्र को बचाने तथा उसकी पुनः स्थापना का संघर्ष था, जिसमें सर्वाधिक योगदान संघ का रहा। इस इन्फोपैक में उससे जुड़े अनेक घटनाक्रमों और तथ्यों का भी उल्लेख किया गया है। साथ ही, संघ के स्वयंसेवकों पर इंदिरा गाँधी सरकार द्वारा किए गए अत्याचारों और अमानवीय व्यवहार के कई उदाहरण भी इसमें शामिल किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, कई बार बालासाहब देवरस जी के पत्रों का उदाहरण देकर संघ पर कथित समझौते के बेबुनियाद आरोप लगाए जाते हैं, किंतु उन पत्रों की पृष्ठभूमि और तथ्यों का उल्लेख नहीं किया जाता। अतः इस इन्फोपैक में उस विषय की वास्तविकता भी तथ्यों के आधार पर स्पष्ट की गई है। श्री बालासाहब देवरस जी के आपातकाल के दौरान प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को लिखे गए पत्रों का सत्य आपातकाल लागू होने के दो महीने बाद, बालासाहब ने इंदिरा गांधी को एक पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने क...

कविता - इंदिरा तेरी तानाशाही जुल्मों का इतिहास बन गई

सत्ता के लिए जुल्मों का आपातकाल लगाया, लोकतंत्र की हत्या की और संविधान को बदलवाया, इंदिरा तेरी तानाशाही जुल्मों का इतिहास बन गई, यह काला कालखंड फिर न आये, यह सतर्कता आगाज बन गई। जब सच बोलना अपराध बना, कलमों पर पहरे बिठाए गए, जनमत के मंदिर सूने कर, असहमति के स्वर दबाए गए। जेलों में लोकतंत्र बंद था, सत्ता का अहंकार जवान था, भारत माता का प्रत्येक पुत्र तब अन्याय से हैरान था। मीसा की जंजीरों में लाखों सपनों को जकड़ा गया, निर्दोषों को अपराधी कहकर कारागारों में पकड़ा गया। न्यायालय की राहें रोकीं, अधिकारों पर ताले जड़े, स्वतंत्रता के दीप बुझाकर भय के अंधियारे गढ़े। नसबंदी के नाम पर मानवता का अपमान हुआ, गरीब, किसान और मजदूरों पर निर्मम अत्याचार हुआ। आँसू, पीड़ा, चीखें, करुणा सब सत्ता के शोर में खो गईं, लोकतंत्र की पावन मर्यादाएँ राजनीति की भेंट हो गईं। लेकिन भारत झुका नहीं, जनमन का विश्वास जगा, अंधकार के उस युग के विरुद्ध स्वतंत्रता का प्रकाश जगा। जनता ने मत की शक्ति से तानाशाही को उत्तर दिया, लोकशक्ति ने सिंहासन से अहंकार का मुकुट लिया। इसलिए इतिहास याद रखो, यह केवल बीता काल नहीं, लोकतंत्र की...

आपातकाल

आपातकाल के अत्याचारों से भावी पीढ़ी को अवश्य परिचित कराएं , ताकी भविष्य में कोई लोकतंत्र का गला न घोंट सके - अरविन्द सिसोदिया  कोटा 24 जून। राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी एवं वरिष्ठ बुद्धिजीवी अरविन्द सिसोदिया नें ' कांग्रेस प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के द्वारा 1975 से 1977 तक 21 महीने रहे आपातकाल जो एमरजेंसी के नाम भी कुख्यात की वर्षी के अवसर पर कहा कि " तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी नें सत्ता का दुरूपयोग कर 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक लागू रहे 21 महीनों के आपातकाल को हमेशा याद रखना चाहिए और अगली पीढ़ियों को भी बताना चाहिए। ताकी भविष्य में कभी दुबारा इस तरह की लोकतंत्र का गला घोंटने वाली विभीषिका न आये। " सिसोदिया नें कहा कि " इस दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार ने सत्ता के दुरुपयोग, मौलिक अधिकारों के निलंबन और कठोर कानूनों के माध्यम से बड़े पैमाने पर मानवाधिकारों का हनन करते हुये जनअत्याचारों  का काला अध्याय इतिहास में दर्ज किया था। " सामूहिक गिरफ्तारियां और प्रताड़ना मीसा, और डीआईआर तथा 107/116 जैसे कानूनो...

मीडिया मैनेजमेंट और राजनैतिक दल

अध्याय 1- विश्व में मीडिया तंत्र  पूरे विश्व में राजनीतिक रूप से प्रभाव डालने वाले मीडिया को मुख्य रूप से 5 प्रकार में विभाजित किया जा सकता है — ये सभी मिलकर जनमत (public opinion) को आकार देने और नीतियों को प्रभावित करने का काम करते हैं:  1. सोशल मीडिया (Social Media) यह वर्तमान में सबसे ताकतवर राजनीतिक टूल है।  उदाहरण: X (पूर्व में Twitter), Facebook, Instagram, YouTube, और TikTok।   राजनीतिक प्रभाव: यह राजनेताओं को सीधे जनता से जोड़ने, सूक्ष्म-लक्षित (micro-targeted) विज्ञापन चलाने, चुनावी अभियान चलाने और आंदोलनों (जैसे Arab Spring) को संगठित करने में मदद करता है।   2. डिजिटल मीडिया और न्यूज़ वेबसाइट्स (Digital Media & News Websites) इंटरनेट पर मौजूद समाचार पोर्टल और ब्लॉग जो तेजी से राजनीतिक खबरें और विश्लेषण परोसते हैं।  उदाहरण: स्वतंत्र न्यूज़ वेबसाइट्स, पॉडकास्ट और डिजिटल पत्र-पत्रिकाएँ।   राजनीतिक प्रभाव: यह दुनिया भर के मतदाताओं को त्वरित जानकारी और गहराई से राजनीतिक विश्लेषण प्रदान करता है।   3. प्रसारण मीडिया (Broadcast Media) इस...