गंगा : सनातन चेतना की पावन और मोक्षदायिनी धारा Ganga
गंगा : सनातन चेतना की पावन और मोक्षदायिनी धारा गंगा भारतीय संस्कृति की आत्मा, सनातन चेतना की जीवनरेखा और मानवीय गरिमा का परम प्रतीक है। कल-कल निनादिनी गंगा मात्र जल की धारा नहीं, अपितु सनातन संस्कृति के अंतःकरण की पावन चेतना है। भगीरथ के तप की यह जाज्वल्यमान परिणति, स्वर्ग के ऐश्वर्य को समेटे मृत्युलोक को पवित्र करने उतरी देवतुल्य करुणा है। इसके पावन तटों पर ऋषियों का चिंतन अंकुरित हुआ और वेदों की ऋचाएं गूंजीं। ये विचार *समुत्कर्ष समिति* द्वारा भारतीय संस्कृति की अक्षय धरोहर वेदों के सन्दर्भ में *'गंगा नदी : आस्था आध्यात्म एवं मोक्ष की धारा'* विषयक 146 वीं समुत्कर्ष विचार गोष्ठी में बोलते हुए विज्ञ वक्ताओं ने व्यक्त किए l समुत्कर्ष समिति के समाज जागरण के ऑनलाइन प्रकल्प *समुत्कर्ष विचार गोष्ठी* में वक्ताओ ने 25 मई से राजस्थान में प्रारम्भ हो रहे *वंदे गंगा जल संरक्षण जन-अभियान-2026* का उल्लेख करते हुए एक सुर में कहा कि गंगा का प्रत्येक बिंदु आस्था का महासागर और आध्यात्म का साक्षात आलोक है, जो सांसारिक कलुषता को धोकर आत्मा को परमात्मा से जोड़ता है। जनजन के दुखों को ह...