समाज में बढ़ती असहिष्णुता और घरेलू हिंसा : समस्या एवं समाधान
समाज में बढ़ती असहिष्णुता और घरेलू हिंसा : समस्या एवं समाधान आज समाज में बढ़ती असहिष्णुता, आक्रोश और पारिवारिक हिंसा की घटनाएँ गंभीर चिंता का विषय बन गई हैं। लगभग प्रतिदिन ऐसी घटनाएँ सामने आती हैं, जिनमें पुत्र द्वारा पिता की हत्या, पति-पत्नी के बीच घातक हिंसा, मंगेतर द्वारा भावी जीवनसाथी की हत्या या पूरे परिवार की सामूहिक हत्या जैसी दुखद घटनाएँ शामिल हैं। यह केवल मामूली कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और प्रशासनिक चुनौती भी है। साथ ही समाज में प्रशासनिक सुरक्षा तंत्र की घट चुकी क्षमता का प्रतीक भी है। लगभग साढ़े सतरह लाख वर्षपूर्व, भगवान राम के रामराज्य में समाज में क्या घटित हो रहा है इसकी जानकारी गुप्तचर व्यवस्था से होती थी। राजा राम स्वयं वेश बदल कर जनता की चर्चाओं को जानते समझते थे। आज तो तकनीकी संसाधन बहुत अधिक सक्षम हो गये हैँ, ऐसे में समाज में क्या घटित हो रहा है इसकी जानकारी शासन को होना चाहिए। समस्या कहाँ है? अनेक गंभीर अपराध अचानक नहीं होते, बल्कि उनसे पहले लंबे समय तक घरेलू विवाद, मारपीट, धमकियाँ, नशे की समस्या, मानसिक तनाव और हिंस...