भारत की विदेशनीति सटीक, किन्तु निरंतर सतर्कता रखनी होगी – अरविन्द सिसोदिया


भारत की विदेशनीति सटीक, किन्तु निरंतर सतर्कता रखनी होगी – अरविन्द सिसोदिया
कोटा, 1 मार्च। प्रख्यात चिंतक, विश्लेषक एवं राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी अरविन्द सिसोदिया ने वर्तमान में पूर्णतः अविश्वसनीयता से ग्रस्त वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि, “बदलते अंतरराष्ट्रीय समीकरणों और अस्थिर तथा अविश्वशनीयता के बीच भारत को अपनी सामरिक और आंतरिक सुरक्षा को उच्चतम स्तर पर सतर्क रखना होगा।”

सिसोदिया ने कहा, “ प्रधानमंत्री मोदीजी के नेतृत्व में भारत की संतुलित विदेश नीति अत्यंत सटीक एवं सतर्क है। क्वाड जैसे मंचों में भागीदारी महत्वपूर्ण है। भारत सरकार ने बहुदेशीय संबंधों को बढ़ावा दिया है तथा आवश्यक लचीलापन भी अपनाया है। इस दिशा में निरंतर सतर्कता की आवश्यकता आने वाले पाँच से दस वर्षों तक बनी रहेगी। इस दौरान ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखना होगा।”
उन्होंने कहा, “हाल के वर्षों में बांग्लादेश,नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका और मालदीप सहित पड़ोसी देशों में षड्यंत्रपूर्वक उत्पन्न राजनीतिक अस्थिरता और सत्ता परिवर्तन की घटनाओं ने यह संकेत दिया है कि दक्षिण एशिया अब केवल पारंपरिक युद्ध का क्षेत्र नहीं रहा, बल्कि हाइब्रिड वॉरफेयर, साइबर हमलों, टेरिफ़ दबाव और नैरेटिव युद्ध का अखाड़ा बन चुका है।”

अरविन्द सिसोदिया ने विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका की वर्तमान अस्थिर विदेश नीति की अनिश्चितताओं पर टिप्पणी करते हुए कहा कि, “अब किसी भी एक महाशक्ति पर अत्याधिक निर्भरता दीर्घकालिक हितों के अनुकूल नहीं हो सकती। बल्कि सुरक्षा के मामले में सर्वोच्च आत्मनिर्भरता, अनुसंधान एवं सतर्कता के मार्ग पर तेजी से चलना ही एकमात्र उपाय है। विश्व की महाशक्तियाँ स्वयं परमाणु शक्ति और युद्ध सामग्री का विस्तार कर रहीं हैँ और दूसरों को इससे रोक कर उन्हें अपना गुलाम बनाये रखना चाहती हैँ। यह चरित्र स्वतंत्रता और संप्रभुता के बेहद घातक है। ”
सिसोदिया ने कहा, “दक्षिण एशिया के देशों की प्रमुख समस्या अमेरिका और चीन के मध्य चल रहा प्रभुत्ववादी शीत संघर्ष भी है, जो इस क्षेत्र की गतिविधियों को सभी प्रकार से प्रभावित कर रहा है। चीन के विस्तारवाद से गंभीर सामरिक चुनौतियाँ उत्पन्न हो रही हैं।”

सिसोदिया ने कहा कि अब यह आवश्यक हो गया है कि, “भारत को अपना पूरा ध्यान सामरिक स्वायत्तता के लिए सुरक्षा और सैन्य उत्पादन में अनुसंधानों सहित, आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ाना होगा। वहीं बहुध्रुवीय संतुलन हेतु ब्रिक्स जैसे मंचों में अपनी भूमिका और अधिक प्रभावी बनाकर वैश्विक शक्ति संतुलन में सक्रिय योगदान देना होगा, जिससे पश्चिमी दबाव को संतुलित किया जा सके।”

उन्होंने कहा, “इंटरनेट आधारित सुविधाओं और ज्ञान ने पूरे विश्व में बड़े खतरे उत्पन्न कर दिए हैं। अब आपका मोबाईल आपकी सटीक लोकेशन बताता है। इसलिए भारत को साइबर एवं डिजिटल सुरक्षा का सुदृढ़ीकरण करना होगा। वहीं संवेदनशिलताहीन कृत्रिम बुद्धिमत्ता अर्थात ए आई आधारित साइबर हमलों, डीपफेक और डिजिटल दुष्प्रचार से निपटने के लिए सीईआरटी-इन जैसी संस्थाओं को और अधिक संसाधन देने होंगे तथा आवश्यक एवं सटीक वैधानिक अधिकार प्रदान करने होंगे ।”

सिसोदिया ने कहा, “आंतरिक सुरक्षा और समन्वय को पूर्णतः समीक्षा कर पुनर्संगठित करना , देश में छद्म युद्ध, आराजकता और विदेशी फंडिंग के माध्यम से अस्थिरता पैदा करने वाले तत्वों पर कड़ी निगरानी रखते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी और राज्य पुलिस बलों के बीच बेहतर और अनिवार्य समन्वय स्थापित किया जाने पर जोर देना चाहिए । "

सिसोदिया ने कहा, “वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में शांति का पक्षधर होना और सामरिक शक्ति की दिशा में आत्मनिर्भरता हेतु तीव्र गति से आगे बढ़ना ही भारत की सुरक्षा और संप्रभुता की गारंटी है।”

भवदीय

अरविन्द सिसोदिया
9414180151

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