कविता - हिन्दु सनातन जिसे कहते है वह मानवता का मान है

हिन्दु सनातन जिसे कहते है वह मानवता का मान है
उत्कर्षों की खान यह, सुख-समृद्धि और आनंद का अभियान है।
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वेदों की वाणी में गूँजता सृष्टि सत्य का गया है,
उपनिषदों के चिंतन में जीवन का विज्ञान है।
गीता का उपदेश यहाँ कर्म पथ विधान है,
मर्यादा की धरती यह, कर्तव्यों का सम्मान है।
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ऋषियों की तप-धरा, ज्ञान का वरदान है,
करुणा की सरिता बहती, प्रेम ही प्रधान है।
“वसुधैव कुटुम्बकम्” का उज्ज्वल विधान है,
सत्य-अहिंसा का पथ ही इसका स्वाभिमान है।
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योग की साधना में तन-मन का उत्थान है,
आयुर्वेद की शाला में रोगों का निदान है।
संस्कृति की ज्योति से आलोकित जहान है,
सनातन की चेतना अजर-अमर पहचान है।
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गंगा की धारा पावन, हिमगिरि अडिग शान है,
राम का आदर्श यहाँ, कृष्ण का प्रेम ज्ञान है।
हर युग में जिसने दिया क्षमा को सम्मान है,
हिन्दु वही संस्कृति है, जो जग का कल्याण है।
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हिन्दु सनातन जिसे कहते है वह मानवता का मान है,
उत्कर्षों की खान यह, सुख-समृद्धि और आनंद का अभियान है।

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