कविता - नाज़ करता हिंदुस्तान
कविता - नाज़ करता हिंदुस्तान
कितनी भी बड़ी चुनौती हो, कैसा भी हो इम्तिहान,
कुशलता से देश चलाता,निर्भीकता जिसकी पहचान,
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर नाज करता हिंदुस्तान।
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जब विश्व महामारी से घबराया,
टूटा हर राष्ट्र का मान,
दवाओं और वैक्सीन से भारत ने
बढ़ाया मानवता का सम्मान।
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सूर्य की शक्ति को संगठित कर
जोड़ा देशों का अभियान,
इंटरनेशनल सोलर अलायंस से गूँजा
हरित ऊर्जा का विधान।
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जब विश्व अर्थव्यवस्था डगमगाई,
मंदी ने बढ़ाया तूफ़ान,
जी 20 की धुरी बन भारत ने
दिया संतुलन का ज्ञान।
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हिंद-प्रशांत की अशांत लहरों में
सुरक्षा का दिया प्रमाण,
क्वाड के संग मजबूत किया
रणनीतिक सम्मान।
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जब रिश्तों में आई कड़वाहट,
उठे प्रश्न, बढ़ा तूफ़ान,
धैर्य और संवाद की शक्ति से
संभाला कूटनीतिक समाधान ।
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कनाडा संग तनाव के क्षणों में भी
रखा संयम का ध्यान,
राष्ट्रहित सर्वोपरि रखते
दिया दृढ़ता का प्रमाण।
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व्यापारिक बाधाएँ, टैरिफ की
जब छाई कठिनाई महान,
वार्ता, नीति और संतुलन से
साधा हितों का समाधान।
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संकल्प, रणनीति, धैर्य, दृष्टि— यही उनकी पहचान,
असामान्य वैश्विक संकटों में भी रखा सदा देश का मान।
ऐसे नेतृत्व पर गर्व करता मेरा भारत महान।
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