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जून, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पत्र

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सरकार के एक साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री ने देश के लोगों के नाम लिखा पत्र, कहा पूरे होंगे सपनें, धैर्य रखें  मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का एक साल पूरा हो गया है. इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के लोगों के नाम पत्र लिख कर सरकार की उपलब्धियां बताईं, साथ ही उन्हें इस मुश्किल समय में धैर्य रखने को कहा. आज मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का एक साल पूरा हो गया है. इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के लोगों के नाम पत्र लिख कर सरकार की उपलब्धियां बताई हैं.  इस मौके पर प्रधानमंत्री ने कहा कि आज से एक साल पहले भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ा. देश में दशकों बाद पूर्ण बहुमत की किसी सरकार को लगातार दसूरी बार जनता ने जिम्मेदारी सौंपी थी. उन्होंने कहा कि इस अध्याय को रचने में आपकी बहुत बड़ी भूमिका रही है.  ऐसे में आज का यह दिन मेले लिए अवसर है आपको नमन करने का. उन्होंने कहा कि इस मुश्किल समय में धैर्य बनाए रखना बेहद जरूरी है. प्रधानमंत्री ने देश के नागरिकों को संबोधित करते हुए कहा कि सामान्य स्थिति होती तो मुझे आपके बीच आकर आपके दर्शन करने क

हिन्दू शौर्य के साथ कांग्रेस की बदतमीजी

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हिन्दू शौर्य के साथ कांग्रेस की बदतमीजी गहलोत सरकार ने बदला 10वीं क्लास का सिलेबस, महाराणा प्रताप की कहानी में काट-छांट शरत कुमार जयपुर, 23 जून 2020, अशोक गहलोत सरकार के दौरान किताबों की समीक्षा के लिए बनी कमेटी की सिफारिश पर पाठ्यपुस्तक मंडल की ओर से कक्षा 10वीं की सामाजिक विज्ञान की किताब के संस्करण में महाराणा प्रताप से जुड़ी ऐतिहासिक संघर्ष की कहानी को हटा दिया है. महाराणा प्रताप से जुड़ी ऐतिहासिक संघर्ष की कहानी को हटा दियाप्रताप और चेतक की वीरता को काट-छांट कर उसे कम कर दिया गया राजस्थान में सरकारों के बदलने के साथ ही इतिहास बदलने का भी चलन हो गया है. एक बार फिर से राजस्थान की किताबों के इतिहास में महाराणा प्रताप अकबर के खिलाफ लड़े गए हल्दीघाटी युद्ध में नहीं जीत पाए हैं. इसके पहले राजस्थान में इतिहास की किताबों मे पढ़ाया जाता था कि हल्दीघाटी के युद्ध में अकबर की सेना जीती थी मगर पिछली बीजेपी सरकार ने 2017 में सिलेबस में बदलाव करते हुए बताया था कि महाराणा प्रताप की सेना ने हल्दीघाटी के युद्ध में अकबर पर विजय प्राप्त की थी. इसे लेकर इतिहासकारों में विवाद रहा. अब ए

आपातकाल लगाने की कहानी

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कहा जाता है कि आपातकाल की नींव 12 जून 1975 को ही रख दी गई थी. वर्ष 1971 में इंदिरा गांधी रायबरेली से सांसद चुनी गईं. इंदिरा गांधी के खिलाफ संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के प्रत्याशी राजनारायण ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की. राजनारायण ने अपनी याचिका में इंदिरा गांधी पर कुल 6 आरोप लगाए. याचिका के मुताबिक-  पहला आरोप- इंदिरा गांधी ने चुनाव में भारत सरकार के अधिकारी और अपने निजी सचिव यशपाल कपूर को अपना इलेक्शन एजेंट बनाया और यशपाल कपूर का इस्तीफा राष्ट्रपति ने मंजूर नहीं किया.  दूसरा आरोप- कि रायबरेली से चुनाव लड़ने के लिए इंदिरा गांधी ने ही स्वामी अद्वैतानंद को बतौर रिश्वत 50,000 रुपए दिए, ताकि राजनारायण के वोट कट सकें. तीसरा आरोप- इंदिरा गांधी ने चुनाव प्रचार के लिए वायुसेना के विमानों का दुरुपयोग किया. चौथा आरोप- इलाहाबाद के डीएम और एसपी की मदद चुनाव जीतने के लिए ली गई. पांचवां आरोप- मतदाताओं को लुभाने के लिए इंदिरा गांधी की ओर से मतदाताओं को शराब और कंबल बांटे गए. छठा आरोप- इंदिरा गांधी ने चुनाव में निर्धारित सीमा से ज्यादा खर्च किया. 12 जू

आपातकाल : में भी था भूमीगत कार्यकर्ता

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श्री लक्ष्मण जी कृष्णनानी एवं - अरविन्द सिसौदिया , जिला महामंत्री भाजपा कोटा । 1975 गुना - आापातकाल के समय हमारा नेतृत्व ग्वालियर महाराज श्रीमंत माधवराव सिंधिया लोकसभा सांसद के नाते एवं ऊमरी राजा साहब शिवप्रतापसिंह जी सिसौदिया विधायक के नाते करते थे । मगर हमारा मुख्य नेतृृत्व भाई साहब गाविन्द जी सुखद (अगवाल) , रामजीलाल जी गोयल एवं नवलकिशोर जी विजयवर्गीय करते थे । मेरे पिताश्री भूपेन्द्र्र सिंह जी सीसौदिया उन दिनों जनसंघ के जिला मंत्री थे। पन्नालाल जी भाई साहब एवं गोपीलाल जी भाई साहब ,शिवचरन जी मंगल , हरीचरन जी तब हमारे अग्रज थे।  मेरे पिताश्री जागीरदार थे सो उन्होने गिरफ्तारी न देकर भूमिगत कार्यकर्ता के रूप में कार्य किया । तब में अरविन्द सिंह सिसौदिया जिसे लोग बडे बनाजी के नाम से जानते थे, भूमिगत कार्यकर्ता था । हमारे हाॅली का जबरिया आपरेशन तत्कालीन सरकार ने कर दिया था। जिसका विवाह भी नहीं हुआ था।  हम रात्रि शयन किसी पहाडी के वृक्ष के नीचे करते थे। में अपने पैतृक ग्राम मोडका में ही रहता था । मगर सायकिल से रोज गुना जाता था। तब हमारी मुख्यतौर पर मदद श्री लक्ष्मण जी कृष्णना

तिब्बत पर चीन के खूनी अत्याचार

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तिब्बत पर चीन के खूनी अत्याचारों के पचास वर्ष - डा.सतीश चन्द्र मित्तल पंडितजवाहर लाल नेहरू ने 1935 में कहा कि तिब्बत एक स्वतंत्र देश है परन्तु चीन में साम्यवादी शासन स्थापित हो जाने पर, माओत्से तुंग की सरकार की भांति उन्होंने भी तिब्बत को चीन का आंतरिक मामला बतलाया, जो इतिहास की भयंकर भूल है। गृहमंत्री सरदार पटेल ने नवम्बर, 1950 में पंडित नेहरू को लिखे एक पत्र में परिस्थितियों का सही मूल्यांकन करते हुए लिखा- "मुझे खेद के साथ कहना पड़ रहा है कि चीन सरकार हमें शांतिपूर्ण उद्देश्यों के आडम्बर में उलझा रही है। मेरा विचार है कि उन्होंने हमारे राजदूत को भी "तिब्बत समस्या शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने" के भ्रम में डाल दिया है। मेरे विचार से चीन का रवैया कपटपूर्ण और विश्वासघाती जैसा ही है।" सरदार पटेल ने अपने पत्र में चीन को अपना दुश्मन, उसके व्यवहार को अभद्रतापूर्ण और चीन के पत्रों की भाषा को "किसी दोस्त की नहीं, भावी शत्रु की भाषा" कहा है। भविष्य में इसी प्रकार के उद्गार देश के अनेक नेताओं ने व्यक्त किए। डा. राजेन्द्र प्रसाद ने चीनियों को तिब्बत का लुटेरा, रा

चीन : जो जवाहर लाल नेहरू का सगा नहीं हुआ

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चीन : जो जवाहर लाल नेहरू का सगा नहीं हुआ  1954 से जून 2020: सिर्फ गलवान ही नहीं,  इन 14 मौकों पर चीन ने सीमा पर दिखाई चालबाजी  14 मौकों पर चीन ने सीमा पर दिखाई चालबाजी... Read more at: https://hindi.asianetnews.com/gallery/national-news/from-1954-to-2020-not-just-in-galwan-china-cheated-india-on-these-14-occasions-kpp-qc3zls#image1 चीन भूल रहा भारत का एहसान, पढ़ें-पंडित नेहरू और UNSC की स्थायी सदस्यता के सवालों का सच पंडित जवाहरलाल नेहरू (Jawaharlal Nehru) की 56वीं पुण्यतिथि (Death Anniversary) पर चीन की हरकतें उसकी एहसानफरामोशी की याद ताजा करवा देती हैं. नेहरू की वजह से चीन की अंतरराष्ट्रीय पहचान बनी. हालांकि UNSC की सदस्यता के सवाल से जुड़े तथ्यों पर ऐतिहासिक विवाद है. चीन के वुहान शहर से शुरू कोरोनावायरस (Coronavirus) ने पूरी दुनिया में तबाही मचाई हुई है. साथ ही लद्दाख में अपनी हरकतों से वह भारत को आंखें दिखाने से भी बाज नहीं आ रहा है. आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की 56वीं पुण्यतिथि पर चीन की हरकतें उसकी एहसानफरामोशी की याद भी ताजा