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हमारा अधिकाशं व्यापार घाटा चीन से वस्तुओं आयात के कारण - कश्मीरी लाल जी

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वर्तमान आर्थिक परिदृश्य में स्वदेशी ही एक मात्र विकल्प  हमारा अधिकाशं व्यापार घाटा चीन से वस्तुओं आयात के कारण - कश्मीरी लाल जी शुक्रवार, 29 जुलाई 2016 शहीद बाबू गेनू स्मृति स्वदेशी विचार व्याख्यान माला http://vskjodhpur.blogspot.in/2016/07/blog-post_29.html जोधपुर 28 जुलाई 2016 . स्वदेशी आन्दोलन  भारत के प्रथम स्वतंत्रता आन्दोलन के समय से ही जुड़ा हुआ है। भारत को पुनः सोने की चिड़िया का गौरव प्राप्त करने के लिए क्रांतिकारियों ने स्वदेशी अपनाओं का नारा दिया था। 12 दिसम्बर 1930 को बाबू गेनू स्वदेशी के लिए शहीद होने वाले प्रथम व्यक्ति थें। उन्होंने इस बात को समझा कि विदेशी वस्तुओं का भारत में व्यापार हमारे लिए आर्थिक नुकसान एवं राष्ट्रीय दासता के लिए जिम्मेदार तत्व है। उपरोक्त कथन स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय संगठक कश्मीरीलाल जी ने शहीद बाबू गेनू स्मृति स्वदेशी विचार व्याख्यान माला में “वर्तमान आर्थिक परिदृश्य में स्वदेशी ही एक मात्र विकल्प" विषय पर बोलते हुए मोटर मर्चेन्ट एसोसिएशन सभागार में कहें। उन्होंने आगे कहा कि स्वदेशी जागरण मंच चीन द्वारा भारत की एन.एस.जी

'मोदी के नेतृत्व में सुरक्षित है भारत' : परम पूज्य मोहन जी भागवत

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कानपुर : राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख परम पूज्य मोहन जी भागवत ने नरेंद्र मोदी सरकार की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत मोदी के नेतृत्व में सुरक्षित है. कानपुर में संघ की बैठक को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि सरकार के महत्वपूर्ण पदों पर स्वयं सेवक बैठे हैं इसलिए देश सुरक्षित हाथों में है. संघ प्रमुख की यह प्रशंसा ऐसे समय आई है जब यह बात चल रही है कि एफडीआई पर मोदी सरकार की सक्रियता स्वदेशी की विचारधारा से विपरीत जा रही है. बैठक में एक व्यवसायी के सवाल पर भागवत ने कहा सरकार में बैठे स्वयं सेवकों पर हमें पूरा भरोसा है धैर्य रखिए, जल्द ही परिणाम देखने को मिलेंगे. भागवत जी  ने आगे कहा कि वे मोदी से बहुत प्रभावित है. मोदी छोटे बच्चों में भी लोकप्रिय हैं. संघ प्रमुख ने वंचित वर्ग के लिए सेवा भारती के प्रसार पर भी जोर दिया. एक प्रश्न के उत्तर में भागवत पाठ्य पुस्तकों में बदलाव पर भी सहमत दिखे.उनके अनुसार बहुत समय से इस सुधार की जरूरत महसूस हो रही है. एनडीए सरकार की नीतियों का पूरी तरह से समर्थन करते हुए राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि इस समय भारत सुरक

शिक्षा के साथ विद्या का समन्वय लेकर चलें शिक्षक : परम पूज्य डॉ. मोहन जी भागवत

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नई दिल्ली, 24 जुलाई (इंविसंके)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के  परमपूज्य  सरसंघचालक डॉ . मोहन भागवत ने सिविक सेंटर स्थिति केदारनाथ साहनी आडिटोरियम में अखिल भारतीय ‘ शिक्षा भूषण ’ शिक्षक सम्मान समारोह में शिक्षकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि शिक्षा में परम्परा चलनी चाहिए , शिक्षक को शिक्षा व्यवस्था के साथ विद्या और संस्कारों की परम्परा को भी साथ लेकर चलना चाहिए। सभी विद्यालय अच्छी ही शिक्षा छात्रों को देते हैं फिर भी चोरी डकैती , अपराध आदि के समाचार आज टीवी और अखबारों में देखने को मिल रहे है। तो कमी कहां है ? सर्वप्रथम बच्चे मां फिर पिता बाद में अध्यापक के पास सीखते हैं। बच्चों के माता पिता के साथ अधिक समय रहने के कारण माता - पिता की भूमिका महत्वपूर्ण है। इसके लिए पहले माता - पिता को शिक्षक की तरह बनना पड़ेगा साथ ही शिक्षक को भी छात्र की माता तथा पिता का भाव अंगीकार करना चाहिए। शिक्षा जगत में जो शिक्षा मिलती है उसको तय करने का विवेक शिक्षक में रहता है। शिक्षक को चली आ रही शिक्षा व्यवस्था के अतिरिक्त अपनी ओर से अलग से चरित्र निर्माण के संस्कार छात्रों में डालने पड़ेंगे। लेकिन यह भी सत्य

भगवान विष्णुजी

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भगवान विष्णुजी हिन्दू धर्म के अनुसार विष्णु 'परमेश्वर' के तीन मुख्य रूपों में से एक रूप हैं। भगवान विष्णु सृष्टि के पालनहार हैं। संपूर्ण विश्व श्रीविष्णु की शक्ति से ही संचालित है। वे निर्गुण, निराकार तथा सगुण साकार सभी रूपों में व्याप्त हैं।ईश्वर के ताप के बाद जब जल की उत्पत्ति हुई तो सर्वप्रथम भगवान विष्णु का सगुण रूप प्रकट हुआ। विष्णु की सहचारिणी लक्ष्मी है। विष्णु की नाभी से ब्रह्मा की उत्पत्ति हुई। आदित्य वर्ग के देवताओं में विष्णु श्रेष्ठ हैं। और भी कई विष्णु हैं। विष्णु जी का अर्थ- विष्णु के दो अर्थ है- पहला विश्व का अणु और दूसरा जो विश्व के कण-कण में व्याप्त है। विष्णु जी की लीला : भगवान विष्णु के वैसे तो 24 अवतार है किंतु मुख्यत: 10 अवतार को मान्यता है। विष्णु ने मधु केटभ का वध किया था। सागर मंथन के दौरान उन्होंने ही मोहिनी का रूप धरा था। विष्णु द्वारा असुरेन्द्र जालन्धर की स्त्री वृन्दा का सतीत्व अपहरण किया गया था। विष्णु जी का स्वरूप : क्षीर सागर में शेषनाग पर विराजमान भगवान विष्णु अपने चार हाथों में शंख, चक्र, गदा और पद्म धारण किए होते हैं। उनके

सदगुरु : अंधकारमय गलियों से बाहर निकालकर लक्ष्य तक पहुँचाने वाला

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देवी देवताओं संतो और धर्म में बड़ी शक्ति है। जो इसे सच्चे मन से ध्याते हैं वे ही इसको समझ पाते हें। *** ‘‘तमसो मा ज्योतिगर्मय’’ **** परम पूज्य गोमतीदासजी महाराज,जिनके स्मरण मात्र से, समस्यायें हल हो जाती हें। शत शत नमन् ! सदगुरु महिमा  श्री रामचरितमानस में आता है:- गुरू बिन भवनिधि तरहिं न कोई। जौं बिरंचि संकर सम होई।। भले ही कोई भगवान शंकर या ब्रह्मा जी के समान ही क्यों न हो किन्तु गुरू के बिना भवसागर नहीं तर सकता। सदगुरू का अर्थ शिक्षक या आचार्य नहीं है। शिक्षक अथवा आचार्य हमें थोड़ा बहुत एहिक ज्ञान देते हैं लेकिन सदगुरू तो हमें निजस्वरूप का ज्ञान दे देते हैं। जिस ज्ञान की प्राप्ति से मोह पैदा न हो, दुःख का प्रभाव न पड़े एवं परब्रह्म की प्राप्ति हो जाय । ऐसा ज्ञान गुरूकृपा से ही मिलता है। उसे प्राप्त करने की भूख जगानी चाहिए। इसीलिए कहा गया है:- गुरू गोविंद दोनों खड़े, किसको लागूँ पाय। बलिहारी गुरू आपकी, जो गोविंद दियो मिलाय।। गुरू और सदगुरू में भी बड़ा अंतर है। सदगुरू अर्थात् जिनके दर्शन और सान्निध्य मात्र से हमें भूले हुए शिवस्वरूप परमात्मा की याद आ जाय, ज

हिन्दू हैं हम युगों युगों से - युगों युगों तक

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हिन्दू हें हम - अरविन्द सिसोदिया कोटा 95095 59131 हम शब्दों के पुजारी , भावनाओं के संवेदक , मानवता के उत्पादक, व्यवस्थाओं के निर्माता! आनंद की सिद्धी, उत्सवों की संस्कृति , प्रेम की पराकाष्ठा, अपनत्व का अनंत आकाश, पुरूषार्थ के परमार्थी,, वीरता के व्योम हम, जौहर में राख करके, करते पवित्रता की आरती, शीश चढ़ा  लेते  मातृभूमि किं बलिहारी  । हिन्दू हैं हम युगों युगों से युगों युगों तक ! सम्पूर्ण सृष्टि का सृजन हैं हम, अनवरत जीवन यात्रा के संवाहक, नर से नारायण तक हैं हम ।। हिन्दू थे हिन्दू हैं हिन्दू ही रहेंगें युगों युगों तक ।

भाजपा राजस्थान आई टी सेल : बूथ -बूथ तक होगा सक्रीय

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प्रस्तुति - अरविन्द सिसोदिया ,  भा ज पा  जिला महामंत्री , कोटा शहर जिला  (95095 59131 WhatsApp) बधाई अविनाश जोशी जी !! सोसल मीडिया अब मीडिया में ही नहीं समाज में भी अपनी क्रांतिकारी भूमिका निभा रहा है। इसमें स्वंय पत्रकार, स्वंय प्रकाशक और स्वंय पाठक की भूमिका में हम आ गये है। भाजपा की ओर से आई टी सेल यह विषय देखता है। इसके राजस्थान प्रदेश संयोजक अविनाश जोशी जी ने अपनी प्रदेश टीम के गठन के साथ साथ सभी जिलों में संयोजक नियुक्त कर दिये हे। प्रदेश टीम की सफल प्रदेशस्तरीय बैठक भी सम्पन्न हो गई। भाजपा में सोसल मीडिया मण्डल और वार्ड से होता हुआ, बूथ -बूथ तक फैला हुआ है । बहुत जल्द यह व्यवस्थित स्वरूप में दिखने लगेगा। अविनाशजी बहुत ही मेहनती कार्यकर्ता हे। भाजपा का परिवार भी बहुत व्यापक है। सफलता की कामनाओं सहित हार्दिक बधाई एवं शुभकामनायें !!    ------------- जयपुर। 16 जुलाई 2016 शनिवार को भारतीय जनता पार्टी प्रदेश कार्यालय में आई.टी. विभाग की कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का आयोजन करते हुए आज के युग में सोशल मीडिया की बहुत उपयोगिता है, इससे युवा और हर वर्ग के

मीठी रस से भरी राधा रानी लागे

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मीठी रस से भरी राधा रानी लागे, मने करो करो जमुनाजी को पानी लागे... जमनाजी तो कारी कारी ,राधा गोरी गोरी, वृन्दावन धूम मचाये ,बरसाने की छोरी, बृजधाम राधाजी की जिंदगानी लागे, मने करो करो ................ काना नित मुरली में टेरे सुमिरे बारम्बार, कोटिन्ह रूप धरे मन मोहन तरु न पावे पार, रूप रंग की छबीली पटरानी लागे, मने करो करो........... न भावे मन माखन मिसरी, अब न कोई मिठाई, म्हारी जिभड़ली ने भावे, राधा नाम मलाई वृषभान की लली तो गुड धानी लागे, मने करो करो.............. राधा राधा नाम रटत है, जे नर आगे पाप, तिनकी बाधा दूर करत है, राधा राधा नाम, राधा नाम में सफल जिंदगानी लागे, मने करो करो...........................

श्री वृन्दावन धाम अपार रटे जा राधे-राधे

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श्रीवृन्दावन-धाम अपार रटे जा राधे-राधे। भजे जा राधे-राधे! कहे जा राधे-राधे॥१॥ वृन्दावन गलियाँ डोले, श्रीराधे-राधे बोले। वाको जनम सफल हो जाय, रटे जा राधे-राधे॥२॥ या ब्रज की रज सुन्दर है, देवनको भी दुर्लभ है। मुक्ता रज शीश चढ़ाय, रटे जा राधे-राधे॥३॥ ये वृन्दावन की लीला, नहीं जाने गुरु या चेला। ऋषि-मुनि गये सब हार, रटे जा राधे-राधे॥४॥ वृन्दावन रास रचायो, शिव गोपी रुप बनायो। सब देवन करें विचार, रटे जा राधे-राधे॥५॥ जो राधे-राधे रटतो, दु:ख जनम-जनम को कटतो। तेरो बेड़ो होतो पार, रटे जा राधे-राधे॥६॥ जो राधे-राधे गावे, सो प्रेम पदारथ पावे। भव-सागर होवें पर, रटे जा राधे-राधे॥७॥ जो राधा नाम न गयो, सो विरथा जन्म गँवायो। वाको जीवन है धिक्कार, रटे जा राधे-राधे॥८॥ जो राधा-जन्म न होतो, रसराज विचारो रोतो। होतो न कृष्ण अवतार, रटे जा राधे-राधे॥९॥ मंदिर की शोभा न्यारी, यामें राजत राजदुलारी। डयौढ़ी पर ब्रह्मा राजे, रटे जा राधे-राधे॥१०॥ जेहि वेद पुराण बखाने, निगमागम पार न पाने। खड़े वे राधे के दरबार, रटे जा राधे-राधे॥११॥ तू माया देख भुलाया, वृथा ही जनम गँवाया। फिर भटकैगो संसार, रटे जा राधे-राधे॥१२॥

परमपवित्र भगवा ध्वज और समर्पण -रमेशभाई मेहता

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परमपवित्र भगवा ध्वज और समर्पण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ – भाग ११ -रमेशभाई मेहता संघ की स्थापना हो गयी। संघकार्य को आगे कैसे बढ़ाना है, इस बारे में डॉक्टरसाहब  ( संघ संस्थापक एवं प्रथम सरसंघचालक परमपूज्य डॉ0 केशव बलीराम हेडगेवार )  स्वयंसेवकों के अभिप्राय लेते रहते थे। ‘हमें सप्ताह में एक बार नहीं, बल्कि प्रतिदिन मिलना चाहिए’ ऐसा स्वयंसेवकों का ही आग्रह था। ‘यह मुलाकात कहाँ पर और किस प्रकार करनी हैं, यहाँ पर कौन-सा कार्यक्रम करना है’ इस बारे में विचारमंथन शुरू हो गया। शुरू-शुरू में सभी स्वयंसेवक डॉक्टरसाहब के घर में ही आया करते थे। यदि इनमें कुछ लोग पढ़ाई या किसी अन्य काम के सिलसिले में अन्यत्र जाते थे, तो वहाँ पर भी संघ का कार्य शुरू कर देते थे। ‘अप्पाजी जोशी’ ये इस प्रकार से कार्य करनेवाले स्वयंसेवक थे। आप्पाजी जोशी ने १८ फ़रवरी १९२६ के दिन वर्धा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पहली शाखा शुरू की। संघ की स्थापना सन १९२५ में नागपुर में हुई और एक साल के बाद संघ की जो पहली शाखा शुरू हो गयी, वह वर्धा में थी। इससे यह स्पष्ट होता है कि डॉक्टरसाब कितने बड़े संघटक थे। उन्होंने आप्पाजी

संघ : राष्ट्र रक्षा का शुभ संकल्प लेने का दिन गुरु पूर्णिमा

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राष्ट्र रक्षा का शुभ संकल्प लेने का दिन गुरु पूर्णिमा तरुण विजय भारतीय इतिहास गुरु-शिष्य संबंधों की गाथाओं से भरा पड़ा है. समय-समय पर गुरुओं ने जन-कल्याण के लिये मंत्र दिया, जिसे उनके शिष्यों ने दूर-दूर तक प्रसारित एवं प्रचारित किया इस संबंध की स्मृति में आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व अनादिकाल से मनाया जाता रहा है. परंतु इसे महर्षि व्यास ने अधिक व्यापक बनाया. इस कारण इसे व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं. प्राचीन काल में गुरु दीक्षा और गुरु दक्षिणा के लिये जो दिन नियत था, उसे ही गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता था. किंतु आषाढ़ मास की शुक्ल एकादशी को भगवान विष्णु समाधि लेते हैं और महात्मा आ भी चातुर्मास्य व्रत करते और एक स्थान पर रहकर उसे सम्पन्न करते हैं. इसी दिन सरस्वती पूजा भी की जाती है, स कारण यह पर्व आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाया जाने लगा. इसके पीछे यह भी भावना है कि पूर्णिमा को किया गया व्रत-अनुष्ठान पूर्णता एवं सर्वसिद्धि प्रदान करता है. निश्चत ही, यह वर्ष में एक बार हमें कल्याणकारी दिशा में अग्रसर होने की प्रेरणा देता है. मगध  के छिन्न-भिन्न हो र

गुरुपूर्णिमा और संघ : भगवा ध्वज है गुरु हमारा

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संघ में अत्यंत महत्वपूर्ण है "गुरू दक्षिणा उत्सव" संघ शाखा प्रारम्भ होने के बाद प्रारंभिक दो वर्षों तक तो धन की कोई आवश्यकता महसूस नहीं हुई। कार्यक्रम भी सामान्य और छोटे स्वरूप के होते थे, इसलिए खर्चा भी विशेष नहीं होता था। जो कुछ थोड़ा बहुत खर्च होता उसकी पूर्ति डॉक्टरजी ( संघ संस्थापक एवं प्रथम सरसंघचालक परमपूज्य डॉ0 केशव बलीराम हेडगेवार )  का मित्र-परिवार करता। उनके मित्रों को यह पूरा विश्वास था कि डॉक्टरजी निरपेक्ष देश सेवा का कार्य कर रहे हैं। इसलिए वर्ष भर में एक या दो बार वे बड़ी खुशी से संघ कार्य के लिए आर्थिक मदद देते थे। 1927 तक संघ के जिम्मेदार स्वयंसेवक डॉक्टरजी के इन विश्वासपात्र मित्रों के यहां जाकर धन ले आते थे। द्रुत गति से बढ़ने वाले संघ कार्य के लिए, कार्यक्रमों तथा प्रवास हेतु जब अधिक खर्च करना अपरिहार्य हो गया तब डॉक्टरजी ने इस संबंध में स्वयंसेवकों के साथ विचार-विमर्श प्रारंभ किया। आज तक तो धनराशि एकत्रित होती उसका पाई - पाई का हिसाब डॉक्टरजी स्वयं रखते थे और यही आदत उन्होंने स्वयंसेवकों में भी डाली। परिणाम  स्वरूप स्वयंसेवकों को अपने सारे कार

हिन्दुत्व : धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो !

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हिन्दुत्व धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो, प्राणियों मे सद्भावना हो, विश्व का कल्याण हो ! प्रस्तुतकर्ता सूबेदार जी पटना http://dirghatama.blogspot.in/2015/03/blog-post_29.html             भारतीय संस्कृति के प्रखर उपासक महान विद्वान स्वामी करपात्री  जी महराज को कौन नहीं जनता, उनकी लौकिक पढ़ाई बहुत कम थी उन्होने गंगा जी की परिक्रमा की और वे वेद, वेदांग, उपनिषद और पुराणों के महान ज्ञाता बनकर आ गए वे भारतीय स्वतन्त्रता सेनानी ही नहीं धर्म संघ स्थापना कर धर्म प्रचार मे लग गए, एक बार मध्य प्रदेश के एक गाँव मे प्रवास पर थे प्रवचन के पश्चात वे जो जय घोष लगाते वह संस्कृत मे होता था एक छोटी सी बालिका आई और करपात्री जी से कहा स्वामी जी यदि आप इस जय घोष को हिन्दी मे कहते तो हमारी भी समझ मे आता, करपात्री जी को यह बात ध्यान मे आ गयी और उन्होने उसी उद्घोष को हिन्दी मे कहा ''धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो, प्राणियों मे सद्भावना हो, विश्व का कल्याण हो'' आज यह जय घोष भारतीय संस्कृति का उद्घोष बन गया । धर्म की जय हो -----------------!       भारतीय संस्कृति मे धर्म क्या है नैति

गुरु गोविंद सिंह की 350वीं जयंती मनाएगी भारत सरकार : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

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गुरु गोविंद सिंह की 350वीं जयंती मनाएगी सरकार : PM मोदी भाषा [Edited By: सना जैदी] नई दिल्ली, 4 जुलाई 2016 | सरकार सिख गुरु गोविंद सिंह की 350वीं जयंती पूरे देश में मनाएगी और इन समारोहों के लिए 100 करोड़ रुपये की राशि निश्चित की गई है. सिख योद्धा बाबा बंदा सिंह के 300वें शहीदी दिवस पर एक समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि एक उच्च स्तरीय राष्ट्रीय समिति का निर्माण किया जाएगा. यह समारोह की योजना का खाका तैयार करेगी. पीएम मोदी कहा, 'भारत सरकार गुरु गोविंद सिंह की 350वीं जयंती समारोह को पूरे देश के कोने-कोने में मनाएगी. यह दुनिया में हर उस जगह मनाई जाएगी जहां भारतीय रहते हैं. उन्होंने कहा, 'इसके लिए भारत सरकार ने 100 करोड़ रुपये की राशि निश्चित की है. इन समारोहों के आयोजन को देखने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति बनाई जा रही है.' इन समारोहों के आयोजन के लिए पंजाब सरकार भी इतनी ही राशि का योगदान करेगी. गुरु गोविंद सिंह सिखों के दसवें एवं अंतिम गुरु थे जिनका जन्म 22 दिसंबर 1666 को हुआ था. प्रधानमंत्री ने कहा, 'ऐतिहासिक समारोहों के आयोजन से ह

कौन थे बंदा बैरागी ?

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सेक्यूलर इतिहास की काल कोठरी में बंद, बंदा बैरागी की अमर बलिदानी गाथा ! - Harihar Sharma   शुक्रवार, 1 जुलाई 2016 साभार आधार - नया इंडिया अभी पिछले दिनों पंजाब सरकार ने बन्दा बैरागी का शहादत दिवस मनाया ! उनकी स्मृति में एक सिक्का भी जारी किया गया ! कौन थे ये बंदा बैरागी ? बन्दा जम्मू-कश्मीर की रियासत पूंछ का राजकुमार था। एक बार जब वह हिरण का शिकार कर रहा था तो उसका तीर लगने से एक गर्भवती हिरणी ने तड़पते हुए उसने एक शावक को जन्म दिया। जिसके बाद हिरणी और उसके शावक की मौत हो गई। इन दोनों की मौत ने बन्दा का पूरा जीवन ही बदल दिया। वह राज-पाट छोड़कर बैरागी बन गया। 15 वर्ष की उम्र में वह जानकीप्रसाद नाम के एक बैरागी का शिष्य हो गया और उसका नाम माधोदास पड़ा। तदन्तर उसने एक अन्य बाबा रामदास बैरागी का शिष्यत्व ग्रहण किया और कुछ समय तक पंचवटी (नासिक) में रहे । वहाँ एक औघड़नाथ से योग की शिक्षा प्राप्त कर वह पूर्व की ओर दक्षिण के नान्देड क्षेत्र को चला गया जहाँ गोदावरी के तट पर उसने एक आश्रम की स्थापना की। जब गुरु गोविन्द सिंह जी की मुगलो से पराजय हुयी और उनके दो सात और नौ वर्ष के शिशुओ

'पाक, अपने देश में आजादी की चिन्ता करें' : संघ के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार

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By: एजेंसी | Last Updated: Sunday, 3 July 2016 http://abpnews.abplive.in नई दिल्ली: ‘मुस्लिम राष्ट्रीय मंच’ संगठन द्वारा नई दिल्ली में पाकिस्तान उच्चायुक्त को भेजे इफ्तार निमंत्रण को वापस लेने के बाद, संघ के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार ने आज पाकिस्तान से अपने देश में उठ रही आजादी की मांगों के बारे में चिंता करने और कश्मीर में हस्तक्षेप बंद करने के लिए कहा.उन्होंने यह आशा भी जताई कि एक ऐसा दिन आएगा जब पाकिस्तान की बेहतर समझ होगी और वह घृणा, कटुता और हिंसा फैलाना बंद करेगा तथा शांति एवं भाई चारे को गले लगाएगा. कुमार ‘मुस्लिम राष्ट्रीय मंच’ की मेजबानी में आयोजित इफ्तार पार्टी में बोल रहे थे. इस संगठन ने पाकिस्तानी उच्चायुक्त अब्दुल बासित की कश्मीर के पंपोर में मुठभेड़ में आठ CRPF जवानों के शहीद होने की घटना पर ‘‘असंवेदनशील’’ टिप्पणी के बाद बासित को भेजा न्यौता वापस ले लिया था. इंद्रेश कुमार इस संगठन के परामर्शक हैं.  इंद्रेश कुमार ने कहा कि उन्हें आशा है कि एक ऐसा दिन आएगा जब भारत और दुनिया की मुस्लिम महिलाएं ‘तलाक’ के ‘गुनाह’ से मुक्त होंगी. उन्होंने यह टिप्पणी तीन बार तलाक पर