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मार्च, 2011 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का यह एकमात्र फोटो

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झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का यह एकमात्र फोटो है, जिसे कोलकाता में रहने वाले अंग्र ेज फोटोग्राफर जॉनस्टोन एंड हॉटमैन द्वारा 1850 में ही खींचा गया था। यह फोटो अहमदाबाद निवासी चित्रकार अमित अंबालाल के संग्रह में मौजूद है। आप सभी से निवेदन है की इस चित्र को अपनीं वाल पर साझा करें और अपनें मित्रों से भी साझा करनें को कहें... नेहरुओं/गांधियों के चित्रों से कहीं अधिक महत्वपूर्ण चित्र है...!! द्वारा:  Sachin Khare

संपूर्ण ब्रह्माण्ड ज्ञान से आलोकित : भारतीय नववर्ष : वर्ष प्रतिपदा : मन्वन्तर विज्ञान

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- बालमुकुन्द पाण्डेय (लेखक अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के राष्ट्रीय सह-संगठन मन्त्री हैं) भारतवर्ष वह पावन भूमि है जिसने संपूर्ण ब्रह्माण्ड को अपने ज्ञान से आलोकित किया है। इसने जो ज्ञान का निदर्षन प्रस्तुत किया है वह केवल भारतवर्ष में ही नहीं अपितु संपूर्ण विश्‍व के कल्याण का पोषक है। यहाँ संस्कृति का प्रत्येक पहलू प्रकृति व विज्ञान का ऐसा विलक्षण उदाहरण है जो कहीं और नहीं मिलता। नये वर्ष का आरम्भ अर्थात् भारतीय परम्परा के अनुसार ‘वर्ष प्रतिपदा’ भी एक ऐसा ही विलक्षण उदाहरण है।भारतीय कालगणना के अनुसार इस पृथ्वी के सम्पूर्ण इतिहास की कुंजी मन्वन्तर विज्ञान मे है। इस ग्रह के संपूर्ण इतिहास को 14 भागों अर्थात् मन्वन्तरों में बाँटा गया है। एक मन्वन्तर की आयु 30 करोड़ 67 लाख और 20 हजार वर्ष होती है। इस पृथ्वी का संपूर्ण इतिहास 4 अरब 32 करोड़ वर्ष का है। इसके 6 मन्वन्तर बीत चुके हैं। और सातवाँ वैवस्वत मन्वन्तर चल रहा है। हमारी वर्तमान नवीन सृष्टि 12 करोड़ 5 लाख 33 हजार 1 सौ 4 वर्ष की है। ऐसा युगों की भारतीय कालगणना बताती है। पृथ्वी पर जैव विकास का संपूर्ण काल 4,3

Amar Shaheed Bhagat Singh

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Amar Shaheed Bhagat Singh Born:  September 27, 1907 Martyrdom:  March 23, 1931 Achievements:  Gave a new direction to revolutionary movement in India, formed 'Naujavan Bharat Sabha' to spread the message of revolution in Punjab, formed 'Hindustan Samajvadi Prajatantra Sangha' along with Chandrasekhar Azad to establish a republic in India, assassinated police official Saunders to avenge the death of Lala Lajpat Rai, dropped bomb in Central Legislative Assembly along with Batukeshwar Dutt. Bhagat Singh was one of the most prominent faces of Indian freedom struggle. He was a revolutionary ahead of his times. By Revolution he meant that the present order of things, which is based on manifest injustice must change. Bhagat Singh studied the European revolutionary movement and was greatly attracted towards socialism. He realised that the overthrow of British rule should be accompanied by the socialist reconstruction of Indian society and for this political power must be

मनमोहन सिंह से होली खेली नारद जी नें

मनमोहन सिंह की होली ... - अरविन्द सिसोदिया  भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से होली खेलनें के लिए, नारद जी विशेष  यान से दिल्ली  पहुचे ! साथ में वे बहुत से दुर्लभ रंग भी लाये थे ..!! साथ में संगीत और होली के दुर्लभ गीतों को सुनानें के लिए मण्डली भी लाये थे !  मगर ये क्या .....,  प्रधान मंत्री जी बहुत उदास  बैठे थे .., नारद जी को देख वे शिष्टाचार वश उठ कर खड़े हो गए .., सम्मान पूर्वक नारद जी को उच्च - आसन पर बिठाया ..!  नारद जी ने अन्य बातों के बाद.., गूढ़ दृष्टी जब पी एम् पर डाली .., तो पी एम् ने सभी अन्य को वहां से चले जाने का इशारा करते हुए कहा एकांत..! एकांत हो गया ...!!  नारद जी ने कहा - उदासा कैसे हो जी .. मन मोहन सिंह जी - आपतो जानते ही हैं की सोनिया जी बाहर हैं ... नारद जी -तो क्या हुआ ....? मनमोहन सिंह जी -उनकी इच्छा  के बिना में हँस नहीं सकता -  रो नहीं सकता.. प्रभु आपतो सब जानते हैं कि....!!!!!! नारद जी - चलो हंसनें रोने कि बात छोडो ..रंग तो खेल लें ..यह तो अपनी संस्कृति है.. मनमोहन सिंह जी - आपकी आज्ञा  सर माथे पर .., पर मेरी सुनलें .. बेकार ही एक नई खबर बनेंगी .. नारद जी -

कोटि-कोटि श्रद्धांजली , आलोक तोमर

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- अरविन्द सिसोदिया     मेरा मन बहुत ख़राब है , मुझे जब से पता चला की आलोक तोमर नहीं रहे ..., नीरा रडिय के टेपों को सार्वजनिक कर उन्होंने एक भ्रष्ट तम मंत्री ए राजा को न केवल त्याग पत्र  को मजबूर कर दिया बल्की वह भ्रष्टाचारी मंत्री आज जेल में है ....! लोकतंत्र की लूटतंत्र पर एक विजय उनके हाथ से लिखी हुई ..! भगवान भी गजब का बेईमान है ..अच्छे लोगों को पहले ऊपर ले लेते है और बुरे लोगों का साम्राज्य चलने देता है ..? ख़ैर इसमें भी कोई अच्छाई ही होगी ..! हमारी कोटि-कोटि श्रद्धांजली इस निष्पक्ष पत्रकार को , उनकी पत्रकारिता को .....!!   ------ धारदार पत्रकारिता की पहचान थे आलोक तोमर http://www.livehindustan.com - उनकी कलम जब पन्नों पर चलती तो शब्द एक दुर्लभ लेखन शैली में ढलकर पूरे सच को बयां करते थे। बेबाक और धारधार पत्रकारिता की पहचान रहे आलोक तोमर भलेही सोमवार को पंचतत्व में विलीन हो गए, पर उन्होंने अपने पीछे लेखन का एक अंदाज छोड़ा है, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। आलोक तोमर का असमय चले जाना हिंदी पत्रकारिता के लिए दुखद घटना है। मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के रछेड़ गांव म

शहीदे आजम भगत सिंह के प्रेरणा स्त्रोत

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  सरदार भगत सिंह के प्रेरणा स्त्रोत  (शहीदे आजम भगत सिंह विशेषांक, १ नवम्बर २००७ अंक / पाथेय कण ) से - अरविन्द सिसौदिया  कभी वो दिन भी आएगा कि आजाद हम होंगे , ये अपनी ही जमीन होगी , यह अपना आसमां होगा | शहीदों कि चिताओं पर , लगेंगे हर बरस मेले , वतन पर मरने  वालों  का, यही बांकी निशां होगा |             ये पंक्तियाँ तो १९३० के दौर की हैं, अगर आज भगत सिंह जीवित होते तो सौ वर्ष से अधिक के होते ...! इतिहास कहता है कि गांधीजी और कांग्रेस चाहती तो ये क्रांतिवीर फांसी से बचाए जा सकते थे और यह भी सच है कि गांधी जी ने क्रांतिवीरों पर हो रहे अंग्रेजी शासन के अत्याचारों पर घोर उपेक्षा बरती | इनके मानवीय अधिकारों के लिए कभी व्रत , भूख हड़ताल , सत्याग्रह आयोजित नहीं किये गए | कलम भी आज यह लिखनें को मजबूर है कि क्रांतिवीरों पर हुए अत्याचारों को गांधी जी और कांग्रेस  की शह थी ...!             १९४७ से १९६४ तक शासन में रहते हुए पं. नेहरु भगत सिंह और साथी क्रांतिकारियों की समाधी नहीं बना सके , जलियांवाला बाग़ को स्मारक नही बना सके | जिस स्थान पर शहीदों को फांसी लगी थी , उसे पाकिस्तान में संरक्षित नहीं

अमर शहीद भगत सिंह तारीखों में ......

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- अरविन्द सिसोदिया      भगत सिंह का जन्म 2८ सितंबर, 1907 को लायलपुर ज़िले के बंगा में चक नंबर 105 (अब पाकिस्तान में) नामक जगह पर हुआ था। हालांकि उनका पैतृक निवास आज भी भारतीय पंजाब के नवांशहर ज़िले के खट्करकलाँ गाँव में स्थित है। उनके पिता का नाम सरदार किशन सिंह और माता का नाम विद्यावती कौर था।, एक देशभक्त सिख परिवार में हुआ था, जिसका अनुकूल प्रभाव उन पर पड़ा था। भगतसिंह के पिता 'सरदार किशन सिंह' एवं उनके दो चाचा 'अजीतसिंह' तथा 'स्वर्णसिंह' अंग्रेज़ों के ख़िलाफ संघर्षरत होने के कारण जेल में बन्द थे । जिस दिन भगतसिंह पैदा हुए उनके पिता एवं चाचा को जेल से रिहा किया गया था , इस शुभ घड़ी के अवसर पर भगतसिंह के घर में खुशी और भी बढ़ गयी थी । भगतसिंह की दादी ने बच्चे का नाम 'भागां वाला' (अच्छे भाग्य वाला) रखा । बाद में उन्हें 'भगतसिंह' कहा जाने लगा । वे 14 वर्ष की आयु से ही पंजाब की क्रान्तिकारी संस्थाओं में कार्य करने लगे थे। डी.ए.वी. स्कूल से उन्होंने नवीं की परीक्षा उत्तीर्ण की। 1923 में इंटरमीडिएट की परीक्षा पास करने के बाद उन्हें विवाह बन्धन में

फिल्मी गीतों ने.. होली का भी खूब धमाल मचाया है ...

- अरविन्द सिसोदिया  ..अजी होली तो होली ही है .., जम कर मनाई..,गालों पर गुलाल .., ललाट पर ऊपर तक मसला., चेहरा पहचान जाएँ तो होली ही काहे की...! आतंक और अधर्म के पर्याय बनें हिरण्यकश्यप के राजतन्त्र से मुक्त होनें पर उनकी जनता ने इसी तरह खुशी मनाई थी ..! हमारे शासकों को अच्छी तरह  समझ लेना चाहिए यह जनता अधर्म और अनाचार कतई पसंद  नहीं करती  और वक्त जरूरत इसका जबाव भी देती हे ..!   फिल्मी गीतों ने हमारे त्यौहारों को खूब उभरा है , चाहे वीर रसा की बात हो या रक्षा बंधन.., होली का भी खूब धमाल मचाया है ...  कुछ यादगार गीत जो मस्ती में ला देते हैं ...  तन रंग लो जी मन रंग लो...(कोहिनूर) होली आई रे कन्हाई...(मदर इंडिया) अरे जा रे हट नटखट...(नवरंग) होली के रंग दिल खिल जाते हैं...(शोले) कुछ यादगार गीत जो मस्ती में ला देते हैं ... रंग बरसे भींगे चुनर वाली...(सिलसिला) अंग से अंग लगा ले सजन...(डर) आज न छोडेंगे हम हमजोली...(कटी पतंग) मल दे गुलाल मोहे...(कामचोर) कुछ यादगार गीत जो मस्ती में ला देते हैं . आई रे आई रे, होली आई रे...(ज़ख़्मी) ओ देखो होली आई रे...(मशाल) होरी खेले रघुवीरा अव

होली : नरसिंह अवतार,प्रह्लाद,हिरण्यकश्यप और होलिका.....

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होली की बहुत बहुत शुभ कामनाएं और बधाई ..! रंगों के इस त्यौहार का सन्देश स्पष्ट है  कि जिन्दगी बहुरंगी होनी चाहिए ..! एक रंग नीरसता को लाता है .. तो बहुरंगता विविधता के द्वारा नीरसता को तोड़ता है ..! जीवन को बहु रंगी बनायें .. जम कर होली मनाएं ..!  - अरविन्द सिसोदिया , कोटा , राजस्थान , भारत | 09414180151   blog - jai jai bharat   arvindsisodiakota .blogspot.com mail - sisodiaarvind @yahoo .com ------ संझिप्त  में होली की कथा .....  होली के प्रचलन की अनेक कथाओं में प्रमुख है भक्त प्रहलाद , उसके पिता , बुआ और भगवान की कथा। कहा जाता है कि प्राचीन काल में एक असुर था जिसका नाम था हिरण्यकश्यप। अपने बल और सामर्थ्य के अभिमान में वह स्वयं को ही भगवान मानने लगा था। उसका पुत्र प्रह्लाद बड़ा ईश्वर भक्त था।  हिरण्यकश्यप की  भारी व्यथा यह थी कि उसके घर में ही उसे विद्रोह के स्वर (धर्म-पालन और ईश्वर-भक्ति के वचन) सुनाई दे रहे थे। अर्थात प्रह्लाद की ईश्वर-भक्ति और धर्मपरायणता उसके ढोंग को नकार देते थे ..! जिससे  नाराज होकर हिरण्यकश्यप ने  प्रह्लाद को  विभिन्न प्रकार से दंड दिए । परंतु पुत्र

विकिलीक्स की जय हो ..!

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- अरविन्द सिसोदिया विकिलीक्स  ने वह कमाल  कर दिखाया जो होना ही चाहिए था .., लाखों जेम्स बांड जो रहस्य नहीं खोल  सकते थे , वे रहस्य खुल  कर सामनें हैं ..,  विश्व राजनीति का मतलब मानवीय साम्राज्य  का नीतियों और सिद्धन्तो पर आधारित हो कर सत्यता पूर्ण न्याय और मानवता का परस्पर सहयोग हो ..! अमेरिका सहित तमाम संपन्न देशों ने राजनीति को छल , कपट और धोकेबाजी  का धंधा बना लिया है और उसके सामनें विवश विकासशील और अविकसित देश सिर्फ और सिर्फ हाथ जोड़े महज गिदगिड़ाहट  में हैं ...!  विकासशील देशों के लिए ये लाभ  देने हेतु प्रतिबद्ध हैं .., महज बाजार बना  कर विश्व को देखनें का अधर्म अमरीका के नेतृत्त्व में हो रहा है संयुक्त राष्ट्र संघ मात्र एक कठपुतली संस्था बन कर रह गई ..! इतनें सरे लीकेज सामनें आ चुके हैं कोई भी प्रतिक्रिया नहीं है .., एक सुदूर चुप्पी के अलावा...!          भारत के बारे  में जो खुलासे  सामनें हैं उससे स्पष्ट है कि कांग्रेस नें परोक्ष / अपरोक्ष अमरीका की गुलामी जैसी स्थिति तो देश की बनाई  है ..! अब धुधलके में यह दिख रहा है कि भारत सरकार  को क्या करना है यह अमरीका में तय हो रहा है ..!

शैम...शैम....; कांग्रेस का राष्ट्र विरोधी चेहरा फिरसे उजागर

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  - अरविन्द सीसोदिया           कांग्रेस का राष्ट्र विरोधी और घोर  साम्प्रदायिक चेहरा फिरसे उजागर हुआ है , इस वार यह यह भाजपा या संघ परिवार के द्वारा नहीं , बल्कि  अमरीकी ख़ुफ़िया गिरी के विकीलीक्स पर लीक दस्तावेत से सामने आया है ...! जिस कांगेस नें महात्मा गांधी और इंदिरा गांधी के हत्यारों को बहुत कम समय में फांसी दे दी .., उसी कांग्रेस  ने भारतीय संसद पर हमले के लिए जिम्मेवार अफजल गुरू की फांसी लगातार इसा तरह से टली मानों , संसद पर हमले ये स्वंय शामिल हों .....! कांग्रेस के इस राष्ट्र विरोधी कार्य की कड़ी से कड़ी निदा की जानी चाहिए ...!  खबर ........ नई दिल्ली। 2001 में संसद पर हमले के मामले में दोषी अफजल गुरू की फांसी का मामला एक बार फिर भारतीय राजनीति को गरमा सकता है। विकीलीक्स ने अफजल गुरू की फांसी के मामले को लेकर सनसनीखेज खुलासा किया है। विकीलीक्स के गोपनीय दस्तावेजों के मुताबिक कांग्रेसी नेता व मौजूदा केन्द्रीय मंत्री गुलान नबी आजाद ने अफजल गुरू को दया याचिका मंजूर किए जाने के लिए भारी दबाव बनाया था। 2006 में नई दिल्ली स्थित अमरीकी दूतावास की ओर से वॉशिंगटन भेजे गए

न्यायलय तुम देश बचाओ जनता तुम्हारे साथ हैं ..

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- अरविन्द सिसोदिया  .........इस समय देश में लूटपाट का हमला चल रहा है ...इस आक्रमण से मुकवाला करनें में प्रतिपक्ष भी उतना कारगर जितनें की आवश्यकता है ..! केंद्र की सरकार नें कई दलों को आय से अधिक संपत्ति के मामलों में सीबीआई से बाँध दिया है सो वे भी सरकार के परोक्ष गुलाम बन गए  हैं ..! इस स्थिति में भारतीय न्यायपालिका ने ही देश हित में कुछ कदम उठाये हैं ..! उन्हें भी रोकनें के लिए कांग्रेस ने यह बात चल वाई है की न्यायपालिका अति सक्रीय है ..., जब की सच यह है कि देश के साथ लूट पात की अति सक्रियता  है..! प्रधान मन्त्र के विभाग से एस बैंड स्पेक्ट्रम घोटाला हो जाये और त्यागपत्र की जगह मात्र साफ सफाई से रफा दफा किया जाये ...! एक नहीं .. लगातार असंवैधानिक गतिविधियों में सरकार लिप्त हो तो कौन उसे रोकेगा ..? जबकि आधा विपक्ष बंधक बन चुका हो ..? अतः न्यायलय की सक्रियता आवश्यक है ...इसका स्वागत होना चाहिए ..! न्यायलय तुम देश बचाओ जनता  तुम्हारे साथ हैं .. यह नारा देश में गूंजना चाहिए ..!.........देखिये न्यायपालिका को दवाब में लेने की कोशिस की दो रिपोर्टें ..... १******** http://www.samaylive.com/