फिल्मी गीतों ने.. होली का भी खूब धमाल मचाया है ...

- अरविन्द सिसोदिया 
..अजी होली तो होली ही है .., जम कर मनाई..,गालों पर गुलाल .., ललाट पर ऊपर तक मसला.,
चेहरा पहचान जाएँ तो होली ही काहे की...! आतंक और अधर्म के पर्याय बनें हिरण्यकश्यप के राजतन्त्र से मुक्त होनें पर उनकी जनता ने इसी तरह खुशी मनाई थी ..! हमारे शासकों को अच्छी तरह  समझ लेना चाहिए यह जनता अधर्म और अनाचार कतई पसंद  नहीं करती  और वक्त जरूरत इसका जबाव भी देती हे ..!
  फिल्मी गीतों ने हमारे त्यौहारों को खूब उभरा है , चाहे वीर रसा की बात हो या रक्षा बंधन.., होली का भी खूब धमाल मचाया है ... 
कुछ यादगार गीत जो मस्ती में ला देते हैं ... 
तन रंग लो जी मन रंग लो...(कोहिनूर)
होली आई रे कन्हाई...(मदर इंडिया)
अरे जा रे हट नटखट...(नवरंग)
होली के रंग दिल खिल जाते हैं...(शोले)

कुछ यादगार गीत जो मस्ती में ला देते हैं ...

रंग बरसे भींगे चुनर वाली...(सिलसिला)
अंग से अंग लगा ले सजन...(डर)
आज न छोडेंगे हम हमजोली...(कटी पतंग)
मल दे गुलाल मोहे...(कामचोर)

कुछ यादगार गीत जो मस्ती में ला देते हैं .

आई रे आई रे, होली आई रे...(ज़ख़्मी)
ओ देखो होली आई रे...(मशाल)
होरी खेले रघुवीरा अवध में...(बाग़वान)
‘होली के दिन दिल खिल जाते हैं’ (शोले )

कुछ यादगार गीत जो मस्ती में ला देते हैं .
‘भागी रे भागी रे भागी ब्रजबाला, कान्हा ने पकड़ा रंग डाला’ (‘राजपूत’)
‘सात रंग में खेल रही है दिल वालों की होली रे’ (‘आखिर क्यों’)
‘जा रे हट नटखट’ ( ‘नवरंग’ )
‘पिया संग होली खेलूँ रे’ (‘फागुन’)


कुछ यादगार गीत जो मस्ती में ला देते हैं .
‘मोहे छेड़ो न नंद के लाला’(‘लम्हे’)
‘मारो भर-भर पिचकारी’(‘धनवान’) 
‘लाई है हजारों रंग होली’(‘फूल और पत्थर’ )
‘आज न छोड़ेंगे बस हमजोली’ (‘कटी पतंग’)

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