आय से अधिक सम्पत्ति : मुलायम सिंह : कांग्रेस से वफादारी ,



- अरविन्द सिसोदिया
       इन दिनों मुलायम सिंह बहुत परेशान हैं ...परेशानी के दो कारण हैं ... पहला उनके पास सत्ता की दम पर एकत्र  अकूत संपत्ती ...! दूसरा हालिया जनमानस सर्वेक्षणों में उनकी पार्टी का तीसरे स्थान पर सरकनें की खबरें ..! खबरों में तो कांग्रेस ५वे या छठे स्थान की बात आई है ..., सो सोनिया जी का साथ जरुरी है .., उनके मन में फिरसे कांग्रेस प्रेम जाग रहा है ...., कांग्रेस ने पिछले तीन साल में लगातार मुलायम सिंह को इस्तेमाल  किया और कचरे के डिब्बे में फेंक दिया .., कांग्रेस उनकी कदर इसलिए नहीं करती  कि उसके पास सबूत हैं की एक नकुछ व्यक्ती  से अरबों की संपती जुटानें वाले मुलायम आय से अधिक सम्पत्ति के मामले में फंसे हुए हैं .., इसी तरह से लालू जी भी फंसे हुए हैं ..! मायावती पर भी इसी तरह के मामले हैं ....! आय से अधिक सम्पत्ति के आधार पर बनें सी बी आई प्रकरण ही कांग्रेस सरकार का समर्थन  बनाये हुए है , अब टू - जी स्पेक्ट्रम के कारण डी एम् के करूणानिधि भी दवाब में है ..!

  मुलायम सिंह भी भाजपा से विरोध कर कांग्रेस को खुश करना चाहते थे .. सो केन्द्रीय मंत्री पवन कुमार बंसल के मामले पर उनने अडंगा लगाया ........! मगर मुलायम यह तो तय करें कि वे सत्ता पक्ष में हैं या विपक्ष में ....!! वे अभी तो सत्ता पक्ष के ही मानें जायेंगे .. क्यों कि उननें बहार से समर्थन  जो दे रखा है ..! 
इससे पहले वे .......
*- वाम दलों से धोका कर परमाणु करार मुद्दे पर कांग्रेस की गिर रही सरकार बचा चुके हैं ... 
*- मंहगाई के मुद्दे पर भी जनता से धोका कर .. बहार विरोध और सदन में समर्थन का खेल खेल  चुके हैं ...
*- अभी जब लोक सभा में चंडीगड़ में दुकान आबंटन घोटाले  में मंत्री  पवन  बंसल पर प्रहार होनें थे तब उस धर को कमजोर करने के लिए गुडों कि तरह व्यवहार पर मुलायम उतारू हुए ..!!
   मगर मुलायम सिंह यह अच्छी तरह समझ लें कि उनके दल की पहचान तभी तक थी जब तक वे कांग्रेस के विरुद्ध थे .., जब से उनने कांग्रेस के साथ खड़ा होना शिरू किया है तब से ही उन्हें जनता ने प्रदेश में नकारना शिरू कर दिया है ...! 
      
एक खबर
      अपनी बात पहले रखे जाने को लेकर लोकसभा में १४ मार्च २०११ सोमवार को सपा तथा भाजपा सदस्यों के बीच चली तकरार इस हद तक बढ़ी कि टकराव के हालात पैदा हो गए। राजद नेता लालू प्रसाद और जदयू नेता शरद यादव आदि ने बीचबचाव कर किसी अप्रिय घटना की आशंका से बचा लिया।
     शून्यकाल शुरू होने पर लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने पहले सपा प्रमुख मुलायमसिंह का नाम पुकारा, लेकिन इसी बीच चंडीगढ़ में दुकान आवंटन में कथित भूमिका के लिए संसदीय कार्य मंत्री पवन कुमार बंसल पर विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज की ओर से लगाए गए आरोपों का जवाब देने लगे।
इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने सपा नेता अखिलेश यादव को अपनी बात रखने के लिए आमंत्रित किया, लेकिन सुषमा ने बंसल के स्पष्टीकरण पर अपनी बात रखने की माँग की। अध्यक्ष ने उनसे कहा चूँकि वे अखिलेश को अपनी बात कहने के लिए बुला चुकी हैं, इसलिए उनके बाद वे (सुषमा) अपनी बात रख सकती हैं।लेकिन सुषमा अपनी बात पहले रखने पर अड़ी रहीं और उनके समर्थन में कई बार भाजपा सदस्य आसन के सामने आकर नारेबाजी करने लगे। उधर सपा नेता मुलायमसिंह यादव इस पूरे मामले पर सख्त नाराजगी जताते हुए बोले कि कांग्रेस और भाजपा मिलकर खेल खेल रहे हैं और सपा सदस्यों को अपनी बात नहीं रखने दे रहे हैं।
        लगभग 20 मिनट के हंगामे के बाद अध्यक्ष ने सदन चलाने के उद्देश्य से सुषमा को पहले अपनी बात रखने के लिए कहा लेकिन इसी बीच उत्तेजित सपा सदस्य मुलायम के नेतृत्व में आसन के सामने आ गए और अग्रिम पंक्ति में बैठे भाजपा सदस्यों से उलझ पड़े। गरमागरमी बढ़ते देख लालू, शरद, माकपा के बासुदेव आचार्य और भाकपा के गुरुदास दासगुप्ता तुरंत बीच में आ गए और उन्होंने सपा सदस्यों को शांत कराकर उन्हें अपने अपने स्थान पर वापस भेजा। हालात बिगड़ते देख अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक स्थगित कर दी।
सदन स्थगित होने के बाद भी सपा और भाजपा सदस्यों के बीच उत्तेजना देखी गई। मुलायम यह कहते सुने गए कि मुख्य विपक्षी दल उनके सदस्यों को नहीं बोलने दे रहा है तो सपा के लोग भी नेता प्रतिपक्ष को कभी बोलने नहीं देंगे। (भाषा)
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दूसरी खबर 

२१ अप्रेल २०१० की यह खबर ....
मायावती का सी बी आई पर दोहरे मापदंड का आरोप         नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि उनके खिलाफ दायर आय के ज्ञात स्त्रोतों से अधिक संपत्ति का मामला बेबुनियाद, निराधार और गैरकानूनी है।
      मायावती की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल 230 पृष्ठ के हलफनामे में कहा गया है कि स्पष्ट राजनीतिक कारणों से मेरे, समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता मुलायम सिंह यादव तथा राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता लालू प्रसाद से संबंधित ऎसे ही मामलों में सीबीआई दोहरे मापदंड अपना रही है। मायावती ने सीबीआई के उस दावे को भी बेबुनियाद बताया जिसमें कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ही उसने उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। उन्होंने कहा, ""सुप्रीम कोर्ट ने आय के ज्ञात स्त्रोतों से अधिक संपत्ति के मामले में मेरे खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के संबंध में कोई निर्देश नहीं दिए, सिर्फ ताज गलियारा मामले में प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया था। उन्होंने कहा कि अदालत ने ताज गलियारा मामले को इस मामले से अलग रखा है। उन्होंने दावा किया कि ताज गलियारे के लिए जारी की गई 17 करो़ड की राशि के इस्तेमाल में सर्वोच्चा न्यायालय को कुछ भी गलत नहीं मिला।
      मायावती के मुताबिक, सीबीआई ने लालू प्रसाद के खिलाफ आरोपों की कानूनी जांच कराई और इसके बाद उनके खिलाफ मुकदमे की प्रक्रिया नहीं चलाई गई जबकि सीबीआई ने मेरे खिलाफ सीधे तौर पर प्राथमिकी दर्ज की। मुलायम सिंह से संबंधित ऎसे ही एक मामले का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, ""तत्कालीन सॉलिसिटर जनरल की सलाह के बाद सीबीआई ने मुलायम के परिवार के सदस्यों की आय को मुलायम की आय में नहीं जो़डा जबकि मेरे मामले में मेरे करीबी संबंधियों की आय जो़डी गई और उसे मेरी आय के रूप में दिखाया गया।"" उन्होंने इस बात पर आpर्य जताया कि उनके मामले में कानूनी राय क्यों नहीं मांगी गई। वह भी तब जबकि वही सॉलिसिटर जनरल आज भी अटार्नी जनरल के पद पर विद्यमान हैं।
       मायावती ने आयकर अधिकारियों की ओर से खुद को दी गई क्लीन चिट की ओर सर्वोच्चा न्यायालय का ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि वह लगातार अपनी रिटर्न जमा करा रही हैं। आयकर विभाग (अपील) के मुख्य आयुक्त और आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण को मेरे आयकर रिटर्न और मेरी आय में कुछ भी विरोधाभासी नहीं मिला, जिसमें मेरे समर्थकों द्वारा दिए गए उपहार भी शामिल हैं। ऎसे में सीबीआई आयकर विभाग की ओर से दी गई क्लीन चिट पर सवाल उठाकर अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जा रही है। मायावती ने कहा, ""इसलिए यह सीबीआई के हित में होगा कि वह मेरे खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के फर्जी मामले को बंद करे।""

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तीसरी खबर 
१० फरवरी २००९ 
यू पी ए से नहीं होगा समर्थन वापस - अमर सिंह 
        नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव और उनके परिवार की ज्ञात स्त्रोतों से हुई आय से अधिक संपत्ति के मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो ‘सीबीआई’ द्वारा की जा रही जांच के मद्देनजर वह केंद्र में सत्तारूढ संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन यूपीए सरकार से समर्थन वापस नहीं लेगी।
       सपा प्रवक्ता अमर सिंह ने आज कांग्रेस पर अपने कल के आक्रामक तेवर में कुछ नरमी लाते हुए कहा कि सपा ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी को कोई चुनौती नहीं दी और वह उच्चतम न्यायालय में सपा सुप्रीमो के खिलाफ् चल रहे मामले को आधार बनाकर यूपीए सरकार से हाथ नहीं खींचेगी।
      उन्होंने आय से ज्यादा संपत्ति रखने के मामले को हास्यास्पद करार देते हुए कहा कि सीबीआई ने जो आरोप पत्र दाखिल किया है उसमें कई गलतियां हैं। श्री सिंह ने कहा कि वह सीबीआई पर विश्वास नहीं करते। लेकिन इसके बावजूद भी सपा केंद्र सरकार से समर्थन वापस नही लेगी।
       इससे पहले आज सुबह उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में केन्द्र की भूमिका पर सवाल उठाते हुए सीबीआई को कडी फटकार लगाते हुए मामले पर फैसला सुरक्षित रखा। श्री यादव की ओर से मामले की पैरवी करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने न्यायमूर्ति अलतमस कबीर और सीरिक जोसेफ की खंडपीठ से यह कहते हुए मुकदमे की न्यायिक जांच की मांग की कि उनके मुवक्किल का सीबीआई पर से भरोसा उठ गया है।
खंडपीठ ने केंद्र की सलाह पर एक याचिका वापस लेने संबंधी प्रार्थना पत्र दायर करने के लिए सीबीआई को कडी फटकार लगाई।
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अधिक जानकारी के लिए ..
अजय सेतिया का लेख ...
लिंक .....

चमक-चमक कर चूके चतुर सुजान


http://indiagatenews.com/india-news/300.php

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